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दिल्ली से अलवर तक नकली मिठाई पर कार्रवाई, दिवाली से पहले ज़हरीली मिठाइयों का भंडाफोड़

 नईदिल्ली  देशभर में दिवाली के त्योहार को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग सक्रिय हो गया है. दिल्ली, गोरखपुर, गाजियाबाद, चंदौली, बागेश्वर, अलवर, मुजफ्फरनगर सहित कई शहरों में छापेमारी की गई है. इन छापेमारियों के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसी खाद्य सामग्री पकड़ी गई है जो जहरीली पाई गई है. यह कदम त्योहार के समय लोगों को सुरक्षित और साफ-सुथरा भोजन उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है. खाद्य सुरक्षा विभाग ने अलर्ट जारी कर दुकानों और गोदामों की जांच तेज कर दी है ताकि अवैध और नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकी जा सके. इस तरह के उपायों से त्योहार के दौरान आम जनता को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाने में मदद मिलेगी. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दिवाली और छठ के त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फूड विभाग ने बड़ी कार्रवाई की. शुक्रवार को नौसढ़ स्थित प्राइवेट बस स्टॉप पर छापेमारी कर लगभग 500 किलो संदिग्ध खजूर और 15 क्विंटल मिठाई व नमकीन जब्त किए गए. ये सामान दिल्ली से प्राइवेट बस और डिलीवरी वैन के जरिए गोरखपुर लाया जा रहा था. फूड विभाग की टीम ने मौके पर तीन लोगों के नमूने लेकर उन्हें माल नष्ट कर दिया. अन्य सामानों को जब्त कर लिया गया जिसकी अनुमानित कीमत 3 लाख रुपये बताई गई है. गोरखपुर के सहायक खाद्य आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि जब्त किए गए खजूर के डिब्बों पर FSSAI नंबर और मैन्युफैक्चरिंग डेट दर्ज नहीं थी. प्रारंभिक जांच में पता चला कि खजूर में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. नमूने प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं. चंदौली में फूड सेफ्टी टीम ने मिलावटी मिठाई पकड़ी फूड एंड सेफ्टी विभाग ने ग्रामीण इलाकों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर लाए जा रहे 5 कुंतल संदिग्ध मावे को पकड़ा. विभाग ने मावा की जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा और छापेमारी के दौरान संबंधित व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की. बागेश्वर में पकड़ी गईं जहरीली मिठाइयां खाद्य सुरक्षा अधिकारी ललित मोहन पांडेय के नेतृत्व में गरुड़ और बागेश्वर नगर क्षेत्र की दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई. दूध, मावा, बेशन, मिठाइयों और जूस के 15 सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिनमें कई में मिलावट पाई गई. अधिकारी ने बताया कि दीपावली तक अभियान जारी रहेगा. अलवर में दिवाली से पहले फूड विभाग ने लिया बड़ा कदम स्वास्थ्य विभाग ने लक्ष्मणगढ़ रोड पर संचालित सॉस निर्माण और विक्रय इकाई पर छापा मारा. 3000 किलो सॉस और 6000 किलो पल्प को नष्ट किया गया. अधिकारी ने बताया कि ड्रमों में सड़ चुकी सामग्री और कीड़े पाए गए थे. दिल्ली (रघुबीर नगर) में फुड विभाग ने पकड़ी मिलावटी मिठाइयां दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने मिलावटी मिठाई के गोदाम पर छापा मारा. लगभग 2500 किलो कलाकंद और मिल्क केक बरामद किए गए, जिन्हें मिलावटी मावा और केमिकल से तैयार किया गया था. मिठाई की सप्लाई त्योहारों के लिए होनी थी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही जब्त कर लिया गया. मुजफ्फरनगर में कई क्विंटल नकली खाद्य सामग्री बरामद हुए मुजफ्फरनगर जनपद का खाद्य विभाग लगातार सड़कों पर उतरकर मिलावट खोरों पर अपना शिकंजा कसने का काम कर रहा है. दिवाली पर्व को देखते हुए जनपद के खाद्य विभाग ने 8 अक्टूबर से मिलावट खोरों के विरुद्ध एक अभियान चलाया हुआ है. इस अभियान के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने अब तक जहां 66 फूड सामग्रियों के सैंपल लिए हैं तो वहीं 13 क्विंटल फूड आर्टिकल सीज किया है और 28 क्विंटल मावा पनीर डिस्ट्रॉय करने का काम किया है जिसकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है. ग़ाज़ियाबाद में फुड विभाग का एक्शन दिवाली से पहले बाजारों में रौनक बढ़ रही है, लेकिन इसी रौनक के बीच कुछ मिलावट खोर भी सक्रिय हो गए हैं जो मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते. त्योहारों के मौसम में मिलावटी दूध, मावा, मिठाई और पनीर की सप्लाई बढ़ जाती है. इसी को देखते हुए गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने चौकसी बढ़ा दी है और लगातार कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में गुरुवार तड़के विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. इन कार्रवाईयों से यह स्पष्ट होता है कि त्योहारों के दौरान मिलावट खोरों पर प्रशासन की पैनी नजर है. शहर-शहर फूड विभाग की यह कार्रवाई उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध खाद्य सामग्री को बाजार में पहुंचने से रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.  

वैश्विक व्यापार को खतरा! IMF ने दी टैरिफ पर चेतावनी, भारत की नीतियों की सराहना

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बड़ी चेतावनी (IMF Warning On Tariff) दी है. आईएमएफ की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इसे ग्लोबल ट्रेड को नुकसान पहुंचाने वाला कदम करार दिया है और कहा है कि ये उभरते बाजारों की ग्रोथ को धीमा कर सकता है. इसे साथ ही उन्होंने एक बार फिर इंडियन इकोनॉमी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसका खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी है.    बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का हथियार बना टैरिफ आईएमएफ चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने टैरिफ से होने वाले संभावित नुकसानों के बारे में अलर्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में दुनिया की कुछ कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संरक्षणवादी उपायों की ओर मुड़ गई हैं और टैरिफ को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं. वहीं ज्यादातक देश अभी भी खुले और निष्पक्ष व्यापार का समर्थन करना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि उनका मानना ​​है कि ग्लोबल ग्रोथ के लिए यही सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि टैरिफ के बढ़ते प्रयोग से वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंच सकता है. जॉर्जीवा ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर कहा कि, 'दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने साझेदारों के साथ अपने संबंधों में टैरिफ को एक साधन के रूप में इस्तेमाल करना चुना है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बाकी दुनिया ने इसका अनुसरण नहीं किया है, कम से कम अभी तक तो नहीं.' 191 देशों में से 3 टैरिफ के पक्ष में  आईएमएफ चीफ ने आगे बताया कि IMF के 191 सदस्य देशों में से महज तीन देशों अमेरिका, चीन और कुछ हद तक कनाडा ने टैरिफ लगाने के लिए ज्यादा जोरदार कदम उठाए हैं. वहीं बाकी बचे 188 देशों ने कहा है, 'शुक्रिया, लेकिन नहीं.' इन सभी देशों ने मोस्ट फेवर्ड नेशन के नियमों के तहत ही व्यापार जारी रखने का विकल्प चुना है. क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से अपील की है कि वे एक खुली, निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली की दिशा में काम करें. भारत पर IMF को भरोसा वैश्विक संगठन आईएमएफ की निदेशक ने भारत पर फिर से भरोसा जताते हुए कहा है कि Indian Economy दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अपने सुधार प्रयासों के कारण ग्लोबल ग्रोथ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत एक ओपन इकोनॉमी है और खुला, प्रतिस्पर्धी और सुधार-संचालित बने रहना ही आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है. गौरतलब है कि IMF ने हाल ही में FY26 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 6.6% किया है. इसके साथ ही भारत को दुनिया के विकास के लिए ग्रोथ इंजन करार दिया था.  

PF नियमों पर ओवैसी की तीखी आलोचना, EPFO ने दिया जवाब

नई दिल्ली EPFO के नए नियमों पर असदुद्दीन ओवैसी भड़क गए और कई तरह के सवाल उठाने लगे। ओवैसी ने अपने ट्वीट में लिखा, "बेरोज़गारी में सरकार का “बचत उत्सव”: पहले बेरोज़गारी के 1-2 महीने में आप पूरा पीएफ निकाल सकते थे। अब सरकार की “दया” से अपने ही पैसे निकालने के लिए 1–3 साल तक इंतज़ार करना होगा। PF का 25% जबरदस्ती 1 साल तक लॉक। मतलब बेरोज़गारी में आपको एक साल का इंतज़ार करना होगा और तब भी आप अपना पैसा पूरा नहीं निकाल सकते।" ओवैसी ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, "EPFO वैसे भी आपके पैसों का मालिक बना हुआ है: ₹54,658 करोड़ पीएफ “अनक्लेम्ड” पड़ा है। 25–35% पीएफ निकासी आवेदन रिजेक्ट हो जाते हैं।" ओवैसी के इस ट्वीट पर EPFO ने जवाब भी दिया। EPFO ने बताया कि, नौकरी छूटने पर EPF निकालने के लिए 2 महीने की जगह 12 महीने क्यो किया गया? EPFO ने अपने पोस्ट में लिखा, "नौकरी छूटने के तुरंत बाद लाभार्थी 75% अमाउंट तुरंत निकाल सकता हैं। ⁠12 महीने तक बेरोजगार रहने पे बाकी 25% राशि भी निकाल सकता हैं। 2 महीने में पूर्ण राशि निकालने से 3 महीने के बाद दूसरी नौकरी लग जाने से सर्विस continuous नहीं मानी जाती हैं और वे पेंशन पात्र नहीं होते। क्योंकि पेंशन के लिए 10 वर्ष continuous नौकरी जरूरी है। इन Reforms से EPFO के लाभार्थी को पेंशन हेतु पात्र बनाने में सुविधा होगी।"  

स्वदेशी शक्ति को मिलाजुला बल: IAF के तेजस Mk‑1A अब बम गिराने में सक्षम, HAL की नई जेट लाइन तैयार

नासिक भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A नासिक में आज यानी 17 अक्टूबर 2025 को अपनी पहली आधिकारिक उड़ान भरी. इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक फैक्ट्री में यह उड़ान थी. इसी दिन HAL की LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए तीसरी प्रोडक्शन लाइन और HTT-40 ट्रेनर विमान की दूसरी प्रोडक्शन लाइन का उद्घाटन भी हुआ. यह भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने का बड़ा कदम है.   तेजस Mk1A: भारत का गौरव, क्यों है यह खास? तेजस भारत का अपना बनाया हुआ लड़ाकू विमान है. यह 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, यानी यह हवाई रक्षा, जमीन पर हमला और समुद्री हमले सब कर सकता है. पहले तेजस Mk1 विमान पहले से ही वायुसेना में हैं, लेकिन Mk1A इसका एडवांस्ड वर्जन है. इसमें नई तकनीकें लगी हैं, जो इसे और ताकतवर बनाती हैं. पिछले कुछ सालों में तेजस ने कई ट्रायल उड़ानें भरी हैं, लेकिन आज की उड़ान खास थी, क्योंकि यह वायुसेना में शामिल होने से पहले की आखिरी तैयारी है. HAL ने इसके लिए बहुत मेहनत की है. इंजन की देरी की वजह से प्रोजेक्ट थोड़ा धीमा पड़ा था, लेकिन अब जनरल इलेक्ट्रिक ने 4 इंजन दे दिए हैं. इस साल कुल 12 इंजन मिलने का वादा है. 10 विमान तैयार हैं. ट्रायल में स्वदेशी अस्त्र BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) एयर-टू-एयर मिसाइल, ASRAAM (एडवांस शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल) और लेजर-गाइडेड बम का सफल टेस्ट हो चुका है. अनुबंध और उत्पादन: कितने विमान बनेंगे? भारतीय वायुसेना को तेजस की सख्त जरूरत है. 26 सितंबर को मिग-21 के दो स्क्वॉड्रन (कुल 40 विमान) को रिटायर कर दिया गया. इससे वायुसेना के फाइटर स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 30 रह गई है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान चीन से पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट खरीद रहा है. चीन भी अपने सभी विमानों को 5वीं पीढ़ी में बदल रहा है. ऐसे में भारत को अपनी ताकत बढ़ानी है. तेजस इसी कमी को पूरा करेगा.     पहला अनुबंध: 40 तेजस Mk1 विमान. लगभग पूरा हो चुका, दो स्क्वॉड्रन बन चुके हैं.     दूसरा अनुबंध: 2021 में 83 तेजस Mk1A का ऑर्डर. डील पूरी, डिलीवरी 2029 तक. आज का पहला विमान इसी का है.     नया अनुबंध: 25 सितंबर को 97 और विमान का डील साइन. डिलीवरी 2027 से 2034 तक. इससे कुल 4 स्क्वॉड्रन बनेंगे. HAL की नई प्रोडक्शन लाइनें उत्पादन को तेज करेंगी. नासिक में तीसरी LCA लाइन और HTT-40 की दूसरी लाइन से सालाना ज्यादा विमान बन सकेंगे. क्यों है यह मील का पत्थर? यह उड़ान सिर्फ एक विमान की नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की जीत है. वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी आएगी. तेजस Mk1A Mk2 (2027 में रोलआउट) और AMCA (पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ विमान) तक का पुल बनेगा. नासिक फैक्ट्री पहले रूसी विमान जोड़ती थी, अब स्वदेशी उत्पादन कर रही है. इससे नौकरियां बढ़ेंगी और रक्षा निर्यात भी संभव होगा. ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों ने दिखाया कि भारत को मजबूत हवाई ताकत चाहिए. पाकिस्तान-चीन की बढ़ती साजिशों के बीच तेजस जवाब देगा. HAL तेजस Mk2 पर काम कर रही है, जो और एडवांस्ड होगा. AMCA प्रोजेक्ट भी तेजी पकड़ रहा है. नई प्रोडक्शन लाइनें से सालाना 24 से ज्यादा विमान बन सकेंगे. वायुसेना को 30-40 स्क्वॉड्रन चाहिए, तेजस इसे पूरा करेगा.

गुजरात में BJP की पूरी कैबिनेट बदली, क्या है विधानसभा चुनाव के पीछे की वजह?

 अहमदाबाद  गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया. शपथ ग्रहण समारोह कार्यक्रम गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित हुआ. कुल 25 मंत्रियों ने शपथ लिया है. छह पुराने चेहरों को नए मंत्रीमंडल में मौका दिया गया है. यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत किया गया, जिसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है. हर्ष संघवी ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली जीतु वाघानी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. नरेश पटेल ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. इसके अलावा कई अन्य मंत्रियों ने शपथ ली है. कांग्रेस में से भाजपा में शामिल हुए अर्जुन मोढवाडिया ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. 3 SC, 4 ST, 9 OBC और 7 पाटीदार नेता बनेंगे मंत्री शपथ ग्रहण समारोह से पहले 26 नए मंत्रियों के नामों की सूची सामने आई है. इस नई टीम में तीन महिलाओं को शामिल किया गया है. इसके साथ ही कांग्रेस से भाजपा में आए एक नेता को भी शामिल किया गया है. पटेल की टीम में तीन महिलाओं को शामिल किया गया है. गुजरात मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं की संभावित सूची नया मंत्रिमंडल सुबह 11:30 बजे गांधीनगर महात्मा मंदिर में शपथ लेगा. सीएम के अलावा मंत्रिमंडल में 25 मंत्री होंगे. उत्तर गुजरात (1)ऋषिकेश पटेल विसनगर (मेहसाणा) कड़वा पटेल (2) पी.सी. बरंडा भिलोडा (अरावली) एसटी (3) प्रवीण माली डिसा (बनासकांठा) ओबीसी (4) स्वरुपजी ठाकोर, वाव,(बनासकांठा) ओबीसी दक्षिण गुजरात (5) प्रफुल्ल पांसेरिया सूरत शहर लेउआ पाटीदार (6) कनुभाई देसाई पारडी (वलसाड) अछूत ब्राह्मण (7) हर्षभाई संघवी सूरत सिटी जनरल (8) नरेश पटेल गणदेवी ) नवसारी ) एसटी (9)जयराम गामित निजर (तापी) एसटी (10) ईश्वर पटेल हांसोट भरूच obC सौराष्ट्र (11)कुंवरजी बावडिया जसदन कोली (राजकोट) (12) परसोतम सोलंकी भावनगर ग्रामीण कोली (भावनगर) (13) जीतू वाघाणी भावनगर सिटी (पाटीदार) (14) रीवाबा जाडेजा जामनगर शहर (क्षत्रिय) (15) कांति अमृतिया मोरबी लेउआ पाटीदार (16) त्रिकम छांगा अंजार कच्छ अन्य पिछड़ा वर्ग (17) अर्जुन मोढवाडिया पोरबंदर ओबीसी (18) प्रद्युम्न वाजा कोडिनार एससी (19) कौशिक वेकरिया अमरेली लेउआ सीट मध्य गुजरात (20) मनीषा वकील वडोदरा सिटी एससी (21) रमेश कटारा दाहोद एसटी (22) कमलेश पटेल पेटलाद (आनंद) पाटीदार (23) दर्शनाबहन वाघेला असारवा अहमदाबाद सिटी एससी (24) संजयसिंह महि़डा महुधा खेड़ा जिला ओबीसी (25) रमण सोलंकी, बोरसद (आनंद जिला ) ओबीसी राज्यपाल से मिलने पहुंचे CM, कौन-कौन बनेंगे मंत्री, इन नेताओं को आए कॉल नया मंत्रिमंडल सुबह 11:30 बजे गांधी नगर महात्मा मंदिर में शपथ लेगा. अब तक 6 विधायकों को कॉल आ चुके हैं. सभी 6 नाम रिपीट हैं. सौराष्ट्र से 2 नेता रिपीट हो रहे हैं. कुंवरजी बावलिया, पुरुषोत्तम सोलंकी को फिर से मौका मिला. दक्षिण गुजरात से 3 मंत्री रिपीट हो रहे हैं. इनके नाम हैं- हर्ष सांघवी, पांसेरिया, कनू देसाई. उत्तर गुजरात से ऋषिकेश पटेल को फिर मौका मिल रहा है. रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा बनेंगी मंत्री?  रिपोर्ट के मुताबिक इस बार मंत्री परिषद में 22 से 23 मंत्री शामिल किए जा सकते है. पुराने मंत्रिमंडल से चार से पांच चेहरों को शामिल किया जा सकता है. शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा शामिल हो सकते हैं. क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी और विधायक रिवाबा जडेजा को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. 16 मंत्रियों ने गुरुवार को दिया था इस्तीफा गुजरात की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री पटेल सहित 17 मंत्री थे. आठ कैबिनेट स्तर के मंत्री थे जबकि इतने ही राज्य मंत्री (एमओएस) थे. कुल 182 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में सदन की कुल संख्या का 15 प्रतिशत या 27 मंत्री हो सकते हैं. इस महीने की शुरुआत में गुजरात सरकार में राज्य मंत्री रहे जगदीश विश्वकर्मा, केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल की जगह बीजेपी इकाई के नए अध्यक्ष बने थे. भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर, 2022 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली थी. गुजरात में विधानसभा चुनाव या फिर कुछ और है बात… जानिए इनसाइड स्टोरी गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सरकार ने अपना पूरा मंत्रिमंडल बदलने का फैसला किया है. वर्ष 2022 के दिसंबर में सरकार के गठन के महज तीन साल के भीतर पटेल ने अपनी पूरी कैबिनेट से इस्तीफा लेकर नई कैबिनेट बनाने का फैसला किया. उनकी नई कैबिनेट आज शपथ लेने वाली है. नई कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 27 मंत्री हैं. राज्य में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 27 मंत्री हो सकते हैं. ऐसे में अब कोई सीट खाली नहीं बचेगी. इस नई कैबिनेट में क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रवाबा जडेजा को भी शामिल किया जा रहा है. लेकिन, सवाल यह है कि भूपेंद्र पटेल ने ऐसा क्यों किया? विधानसभा चुनाव में भी अभी दो साल से अधिक का समय बचा हुआ है. इससे पहले पटेल मंत्रिपरिषद में उनको छोड़कर 16 मंत्री थे. इसमें आठ कैबिनेट और आठ राज्यमंत्री थे. शुक्रवार को भूपेंद्र पटेल सरकार में मुख्यमंत्री के अलावा 26 मंत्री शामिल किए जा रहे. इसमें कई पुराने चेहरे हैं. जातीय समीकरण की बात करें तो इसमें तीन अनुसूचित जाति, चार अनुसूचित जनजाति, नौ ओबीसी और सात पाटीदार नेताओं को मौका दिया गया है. शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही 25 नए मंत्रियों के नामों की सूची सामने आई. इस नई टीम में तीन महिलाओं को शामिल किया जा रहा है. इसके साथ ही कांग्रेस से भाजपा में आए एक नेता को भी शामिल किया जा रहा है. क्यों बदल दी गई सरकार राज्य में भाजपा ने क्यों अपनी ही पूरी सरकार बदल दी है. यह बड़ा सवाल है. लेकिन, जानकार राज्य के सभी प्रमुख शहरों में संभावित नगर निगम चुनावों को कैबिनेट में बदलाव की मुख्य वजह मान रहे हैं. इन चुनावों को ‘मिनी विधानसभा चुनाव’ माना जा रहा है. नतीजतन भाजपा को इन चुनावों में अपना दबदबा बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. जूनागढ़ और गांधीनगर के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट समेत नए नगर निगमों में चुनाव होंगे. गुजरात में भाजपा शुरू से ही ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में मजबूत रही है. ऐसे में भाजपा इन चुनावों में कोई नुकसान नहीं उठाना चाहती है. गुजरात में इस बड़ी सर्जरी को रविवार को नई दिल्ली में राज्य के नेताओं और पीएम मोदी … Read more

BRICS के बैंक NDB में मेंबरशिप के लिए पाकिस्तान ने चीन से सहयोग की अपील की

बीजिंग  आर्थिक रूप से बदहाल पाकिस्तान अपनी बेचारगी का हवाला देकर भीख मांगने में कसर नहीं छोड़ता। वहीं चीन पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है। अब पाकिस्तान ने BRICS देशों के बैंक न्यू डिवेलपमेंट बैंक (NDB) की सदस्यता के लिए चीन से गुहार लगाई है। इसके बदले में उसने चीन को ऑफर भी दिया है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह चीन की कंपनियों, उद्योगों और खनिजों के क्षेत्र में निवेश के लिए ज्यादा मौके उपलब्ध करवाएगा। शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में चीन के वित्त मेंत्री लियाओ मिन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एनडीबी की सदस्यता को लेकर बात की। औरंगजेब ने चीन से कहा कि वह एनडीबी की सदस्यता दिलाने में उसकी मदद करे। उन्होंने कहा कि इसके बदले पाकिस्तान में तकनीक, कृषि, उद्योग और खनिज के क्षेत्र में चीनी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। बता दें कि ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर एनडीबी बनाया है जिसका उद्देश्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, सतत पोषणीय विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी फंडिंग उपलब्ध कराना है। विकासशील देशों के विकास में यह बैंक बड़ी भूमिका निभाता है। इसी साल फरवरी में इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन कमेटी ने एनडीबी में 582 मिलियन डॉलर के शेयर्स की खरीद की मंजूरी दी है। फाइनेंस डिवीजन के बयान के मुताबिक इसीसी ने पाकिस्तान की एनडीबी में सदस्यता को मंजूरी दे दी है। पाकिस्तान ने नवंबर 2024 में ब्रिक्स की सदस्यता के लिए भी आवेदन किया था। बताया गया था कि चीन ने इस्लामाबाद को इसके लिए भरोसा दिया था। हालांकि पीएम मोदी से चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात के बाद पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर गया। तुर्की को पार्टनर देशों में शामिल किया गया था लेकिन पाकिस्तान को नहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने कहा था कि वह ब्रिक्स में ज्यादा देशों का स्वागत करने को तैयार है लेकिन फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएंगे। पीएम मोदी ने कहा था कि किसी देश को सदस्यता देने से पहले विचार किया जाना चाहिए कि उसमें ब्रिक्स के संस्थापक देशों की राय शामिल हो। बता दें कि ब्रिक्स के संस्थापक देशों में रूस, चीन, भारत और ब्राजील का नाम है।

‘कोई विकल्प नहीं’ — ट्रंप के हमास पर तेज रुख के बाद क्या बढ़ेगी आर्मी एक्शन की संभावना?

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को चेतावनी दी है क‍ि अगर गाजा में लोगों की हत्या करना जारी रखा तो हमारे पास कोई चॉइस नहीं बचेगा. अमेरिका के पास विकल्प कम रह जाएंगे और हमें अंदर जाकर उन्हें मारना होगा. ट्रंप के इस मैसेज ने मिड‍िल ईस्‍ट में एक बार फ‍िर आग भड़का दी है. ऐसी संभावनाएं जताई जाने लगी हैं क‍ि अमेर‍िकी सेना कहीं हमास पर अटैक न कर दे. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू ने चेतावनी दी क‍ि मारे गए बंधकों के शव नहीं मिले तो हम तबाही मचा देंगे. इजरायल पूरी ताकत के साथ हमास से बात करेगा. पिछले कुछ दिनों में हमास ने कुछ बंधकों के शव वापस किए हैं, जिनमें से दो की पुष्टि इनबार हैइमैन और सार्जेंट मेजर मुहम्मद अल-अतारश के तौर पर हुई. इन हालिया सौंपियों के बाद सोमवार से अब तक मृत बंधकों की वापसी की संख्या नौ बताई गई है, जबकि अभी भी कई शव गाजा में बने हुए हैं. इस बीच वह 20 जीवित बंधक जिन्हें सोमवार को रिहा किया गया था, उनके बदले इजराइल ने 250 फिलिस्तीनी कैदियों और 1,718 गाजा कैदियों को रिहा कर दिया था. हमास ने क्‍या कहा हमास की सैन्य शाखा ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि शेष शवों की तलाश जारी है और इसके लिए बड़े प्रयास और विशेष तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता होगी. वहीं इस देरी के चलते इजरायली जनता में हमास के प्रति गुस्सा तेज हुआ है और कुछ आवाजें यह कह रही हैं कि हमास ने पिछले सप्ताह के सीजफायर समझौते के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन नहीं किया. हालांकि संयुक्त राज्य की प्रशासनिक वक़्तियों ने इस बात को बहुत अधिक तौर पर “समझौते का उल्लंघन” बताने से हतोत्साहित किया है. मिड‍िल ईस्‍ट में जंग को नया मोड़ ट्रंप के ट्वीट ने मिड‍िल ईस्‍ट में जंग को नया मोड़ दे द‍िया है. कूटनीत‍िक मामलों के जानकारों का मानना है क‍ि ट्रंप का यह मैसेज सिर्फ हमास के ल‍िए नहीं है बल्कि रूस, ईरान और अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ियों के ल‍िए भी है. दूसरी ओर, नेतन्याहू का पूरी ताकत वाला संदेश इजरायल की सैन्य नीति और आक्रामकता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराता है. हालांकि, लोगों का अभी भी मानना है क‍ि अमेर‍िका आर्मी ऑपरेशन को आख‍िरी विकल्‍प मानेगा. उससे पहले मुद्दों को सुलझाने की कोश‍िश करेगा.  

अल-गमारी की मौत पर इजराइल का कड़ा संदेश; हूती नेतृत्व पर बड़ा थप्पड़

सना/तेल अवीव  यमन के ईरान समर्थित हूती संगठन को बड़ा झटका लगा है. उसके चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद अब्दुल करीम अल-गमारी की मौत हो गई है. हूती संगठन ने  बयान जारी कर कहा कि अल-गमारी ‘अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए शहीद हुए’. हालांकि हूतियों ने सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन बयान में कहा गया कि ‘इजरायल को उसके अपराधों की सजा जरूर मिलेगी’. इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने पहले भी यमन में हूती ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी. अब माना जा रहा है कि अगस्त के अंत में सना में हुए एक हमले में अल-गमारी गंभीर रूप से घायल हुए थे और अब उनकी मौत हो गई है. इस हमले में हूती सरकार के प्रधानमंत्री और कई मंत्री भी मारे गए थे. इजरायल ने कहा, ‘जो हमें निशाना बनाते हैं, हम उन्हें ढूंढ कर खत्म करते हैं.’ अल-गमारी कौन था? हूती ताकत का एक बड़ा चेहरा     मोहम्मद अल-गमारी हूती संगठन के सबसे सीनियर मिलिट्री कमांडर्स में से एक था. 2016 में उसे चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया और 2021 में उसने अब्दुल खालिक अल-हूती की जगह कमांडर-इन-चीफ का पद संभाला.     संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अल-गमारी को यमन की शांति और स्थिरता के लिए खतरा बताकर प्रतिबंधित किया था. अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने भी उसके खिलाफ ‘एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13611’ के तहत सैंक्शन लगाए थे.     अमेरिकी बयान में कहा गया था, ‘अल-गमारी ने ऐसे कदम उठाए जो यमन की सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण और राजनीतिक प्रक्रिया में बाधा डालते हैं.’     वो ईरान समर्थित धड़े का सबसे भरोसेमंद चेहरा माना जाता था और हूती मिलिट्री ऑपरेशंस की रणनीति उसी के हाथों में थी. इजरायल का दावा, ‘आतंक की चेन को खत्म कर रहे हैं’ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अल-गमारी की मौत पर कहा, ‘एक और आतंकी चीफ ऑफ स्टाफ मारा गया जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहता था. हम सबको खत्म करेंगे.’ इजरायली डिफेंस मिनिस्टर इस्राएल काट्ज ने भी X (पहले ट्विटर) पर लिखा – ‘गमारी अब अपने साथियों के साथ नरक में है. हमने उसके आतंक नेटवर्क को तहस-नहस कर दिया.’ उन्होंने बताया कि हाल में इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट ने ‘हूती वॉर रूम’ पर टारगेटेड स्ट्राइक की थी, जिसमें हूती नेतृत्व का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया. काट्ज ने कहा – ‘हमने हूतियों की खतरनाक क्षमताओं को मिटाने का काम शुरू किया है और ये आगे भी जारी रहेगा.’ हूतियों की धमकी- ‘जंग खत्म नहीं हुई, बदला लेंगे’ हूती संगठन ने बयान में कहा कि अल-गमारी और उसका 13 वर्षीय बेटा ‘इस्राइली दुश्मन के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए’. उन्होंने कहा कि यह मौत ‘गौरव की निशानी’ है और वे ‘इसका बदला जरूर लेंगे’. बयान में लिखा गया, ‘संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. जियोनिस्ट दुश्मन को उसके अपराधों की सजा मिलेगी.’ हूतियों ने इजरायल की ओर कई बार मिसाइलें दागीं, जिन्हें ज्यादातर इंटरसेप्ट कर लिया गया. जवाब में इजरायल ने यमन के हूती कंट्रोल वाले इलाकों पर एयरस्ट्राइक की.  

120 5th‑Generation जेट मात्र ₹1,57,844 में; 2600 km/h की बवाली रफ्तार और 6500kg वारहेड क्षमता

 बेंगलुरु  भारत अपने दम पर नेशनल सिक्‍योरिटी को मजबूत करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है. विदेशी रक्षा सौदे में आने वाली दिक्‍कतों और लेटलतीफी को देखते हुए अब डिफेंस सेक्‍टर के स्‍वदेशीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दी गई है. मिसाइल प्रोडक्‍शन के साथ अल्‍ट्रा मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्‍टम पर पूरे रफ्तार से काम चल रहा है. इसके अलावा पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ फाइटर जेट को देश में डेवलप करने के लिए कुछ महीने पहले महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्‍ट के तहत 5th जेनरेशन स्‍टील्‍थ फाइटर जेट डेवलप किया जा रहा है. इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आधुनिक रडार सिस्‍टम से पकड़ पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन सा होगा. भारत के लिए सामरिक रूप से यह उल्‍लेखनीय सफलता होगी. चीन और पाकिस्‍तान जैसे देश भारतीय सीमा की तरफ आंख उठाकर देखने की कोशिश भी नहीं कर सकेंगे. पांचवीं पीढ़ी के देसी फाइटर जेट के आसमान में आते ही भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की कैटेगरी में आ जाएगा. दूसरी तरफ, इंडियन एयरफोर्स (IAF) ने AMCA के तहत डेवलप 120 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की योजना बनाई है. इसपर हजारों करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना. दरअसल, भारत का बहुप्रतीक्षित एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम निर्णायक चरण में पहुंच गया है. देश की यह पहली स्वदेशी स्‍टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्‍ट अब उत्पादन की दिशा में अग्रसर है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए प्रारंभिक चरण में लगभग 120 AMCA लड़ाकू विमान बनाए जाएंगे, जिनकी डिलीवरी 2035 से शुरू होने की संभावना है. AMCA प्रोजेक्ट का लक्ष्य एक ऐसा विमान बनाना है जो दुश्मन की रडार पकड़ में आए बिना डीप अटैक करने में सक्षम हो. इसके दो संस्करण बनाए जा रहे हैं. पहला, AMCA MK-1, जिसमें अमेरिकी GE F414 इंजन लगाया जाएगा. दूसरा, AMCA MK-2, जिसमें भारत और फ्रांस की कंपनी Safran द्वारा संयुक्त रूप से विकसित 120 kN थ्रस्ट इंजन का उपयोग किया जाएगा. इस संयुक्त इंजन विकास परियोजना पर $7.2 बिलियन (करीब ₹60,000 करोड़) खर्च होंगे. इसमें भारत को पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (Technological Transfer) और बौद्धिक संपदा अधिकार भी मिलेंगे. पांचवीं पीढ़ी का देसी महाबली     AMCA के तहत डेवलप फाइटर जेट में 25 टन के दो इंजन होंगे.     अधिकतम रफ्तार: 2600 KMPH (Mach 2.15)     कॉम्‍बैट रेंज: 1620 किलोमीटर     फेरी रेंज: 5324 किलोमीटर     सर्विस सीलिंग: 20000 मीटर (65,000 फीट)     पेलोड कैपेसिटी: 6500 किलोग्राम​ ₹157844 में 120 5th जेनरेशन देसी फाइटर जेट अब सवाल उठता है कि AMCA के तहत डेवलप होने वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की कीमत कितनी होगी. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्‍ट के तहत बने फाइटर जेट के एक यूनिट की कीमत 140 मिलियन डॉलर (तकरीबन 1228 करोड़ रुपये) होने की संभावना है. इंडियन एयरफोर्स ने AMCA के तहत बने 120 जेट खरीदने की योजना बनाई है. इसकी कुल कीमत तकरीबन 18 बिलियन डॉलर यानी ₹157844 होगी. 120 आधुनिक विमान की खरीद के साथ ही इंडियन एयरफोर्स के स्‍क्‍वाड्रन में भी वृद्धि होगी. इसके साथ ही IAF की ताकत में भी कई गुना इजाफा होगी. बता दें कि तेजस फाइटर जेट प्रोजेक्‍ट के तहत भी 4.5 जेनरेशन के फाइटर जेट डेवलप किए जा रहे हैं. इंडिजेनस एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूजन AMCA के तहत डेवलप पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भारत के स्वदेशी उत्तम-AESA रडार से लैस होगा, जो 150 किलोमीटर से अधिक दूरी पर फाइटर जेट-साइज टारगेट्स का पता लगा सकता है. इसमें AI-ऑपरेटेड मल्टी-सेंसर डेटा फ्यूजन सिस्टम, इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) और इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम भी होगा. इस तकनीक से पायलट को ‘फर्स्ट लुक, फर्स्ट किल’ क्षमता मिलेगी. यानी दुश्मन के प्रतिक्रिया देने से पहले उसे निशाना बनाना. AMCA प्रोजेक्‍ट का पूरा शेड्यूल     2025-2027: प्रोटोटाइप कंस्‍ट्रक्‍शन और सिस्‍टम इंटीग्रेशन     2028-2029: फर्स्‍ट फ्लाइट और शुरुआती टेस्टिंग     2030-2034: ट्रायल और सर्टिफिकेशन     2035 और उसके बाद: प्रोडक्‍शन और एयरफोर्स में शामिल करने की प्रक्रिया स्वदेशी वेपन सिस्‍टम का इंटीग्रेश्‍न AMCA की आंतरिक हथियार प्रणाली (internal weapon bay system) को फिर से डिजाइन किया गया है, ताकि यह 6 Astra MK-2 मिसाइलें बिना स्टील्थ कैपेबिलिटी घटाए ले जा सके. इसके अलावा यह फाइटर जेट BrahMos-NG सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, SANT एंटी-टैंक मिसाइल और Rudram एंटी-रेडिएशन मिसाइल जैसे भारत में विकसित हथियारों से लैस होगा. रक्षा मंत्रालय ने इस बार प्रतिस्पर्धी उद्योग भागीदारी मॉडल को मंजूरी दी है. अब केवल HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) ही नहीं, बल्कि TATA Advanced Systems, Adani Defence, L&T, Bharat Forge और Goodluck India जैसी निजी कंपनियां भी बोली लगा रही हैं. इससे उत्पादन की गति और गुणवत्ता दोनों बढ़ने की उम्मीद है. भारत को एयरोस्पेस पावर बनाने की दिशा में कदम AMCA केवल एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक बड़ा छलांग है. यह प्रोजेक्‍ट एक ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम बना रही है जो आने वाले वर्षों में भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि वैश्विक एयरोस्पेस खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा. परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अपने बजट अनुशासन, तकनीकी जोखिम प्रबंधन और उद्योग समन्वय को कितनी कुशलता से संभालता है. साल 2035 में जब पहले AMCA लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होंगे, तो यह न केवल भारत के रक्षा इतिहास में एक निर्णायक मोड़ होगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि देश अब किसी का ग्राहक नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है.

PF निकासी हुई आसान! नौकरी छोड़ने पर अब नहीं होगी फंड की दिक्कत, EPFO का बड़ा फैसला

नई दिल्ली  केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के नियमों में भारी ढील दिए जाने पर प्रकाश डाला. इससे कर्मचारियों के लिए ईपीएफ निकासी आसान हो गई है. नए नियमों के अनुसार नौकरी छूटने वाले कर्मचारी अब अपनी ईपीएफ राशि का 75फीसदी तुरंत निकाल सकते हैं. शेष 25 प्रतिशत राशि एक वर्ष बाद निकाली जा सकती है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारी का 10 साल का सेवाकाल बरकरार रहे. मंडाविया ने कहा, 'ईपीएफ निकासी अब आसान बना दी गई है. अगर किसी की नौकरी चली जाती है तो 75 फीसदी राशि तुरंत निकाली जा सकती है और एक साल बाद पूरी राशि निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी. 25 फीसदी राशि एक वर्ष के लिए रखने के पीछे उद्देश्य यह है कि 10 साल का सेवाकाल बाधित न हो. इन नए सुधारों से कर्मचारी की सेवा निरंतरता बनी रहेगी और पेंशन प्राप्त करने से उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी. इसके अतिरिक्त सरकार ने नौकरी छूटने के बाद धनराशि निकालने की अवधि दो महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी है, जिससे सदस्यों को नया रोजगार खोजने और नौकरी जारी रखने के लिए अधिक समय मिल जाएगा. एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत जिन प्रतिष्ठानों ने पहले ईपीएफओ में योगदान नहीं किया है, वे अब मामूली जुर्माने के साथ नामांकन करा सकते हैं. इससे अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अलावा बुजुर्ग और दूरदराज के ईपीएफओ लाभार्थियों की सहायता के लिए डाक सेवाओं के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि उनके घरों पर ही जीवन प्रमाण पत्र का प्रमाणीकरण और जारी करने की सुविधा प्रदान की जा सके. इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभार्थी ईपीएफओ कार्यालयों में जाए बिना ही अपना लाभ प्राप्त कर सकें.