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व्हाइट कॉलर आतंकवाद का चौंकाने वाला मामला: डॉक्टरों ने रची PM मोदी पर प्लानिंग

लखनऊ  दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब एक बड़े आतंकी नेटवर्क तक जा पहुंची है. देशभर में 2,900 किलो से ज्यादा विस्फोटक बरामद हुए हैं, डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ का चेहरा दिखाया है और अब एजेंसियां उस कहानी के गुम हिस्से जोड़ने की कोशिश में जुटी हैं, जिससे लाल किले ब्लास्ट की पूरी साजिश समझ में आ सके. इसी जांच के दौरान एक बड़ी खौफनाक साजिश सामने आई है. व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ने 4 शहरों को दहलाने की साजिश रची थी. इतना ही नहीं पीएम मोदी से लेकर आरएसएस चीफ तक निशाने पर थे. मगर, उससे पहले ही एजेंसी की सतर्कता के कारण इनका प्लान फुस्स हो गया. सूत्रों की मानें तो 4 शहर में 8 धमाकों की तैयारी की जा रही थी. आइए जानते हैं सब… जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब उमर नबी की हर गतिविधि पर फोकस कर रही हैं. उमर वही डॉक्टर है जिसे आत्मघाती हमलावर बताया जा रहा है. एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि 30 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच यानी उन 10 दिनों में उमर ने क्या किया, कहां गया और किससे मिला. दरअसल, यही वो वक्त था जब उसके साथी डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया गया था. मुजम्मिल का नाम उसके एक और साथी डॉ. आदिल राथर से पूछताछ के दौरान सामने आया था. सूत्रों का कहना है कि 30 अक्टूबर तक उमर और उसका ग्रुप गाड़ियों और विस्फोटक जैसी जरूरी चीजों की व्यवस्था नहीं कर पाए थे. लेकिन 10 नवंबर तक उन्होंने एक कार में हाई ग्रेड विस्फोटक भर दिया, जो आखिरकार लाल किले के पास फटा. सवाल ये उठ रहा था कि सिर्फ 10 दिनों में उन्होंने इतनी बड़ी तैयारी कैसे कर ली थी. एजेंसियों को शक था कि उमर को उस वक्त कुछ लोगों से मदद मिली, जिनका नाम अभी सामने नहीं आया है. मगर, अब सूत्रों की माने तो जांच एजेंसी को बड़ा सुराग हाथ लगा है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य खुफिया एजेंसियों ने एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है. जांच में सामने आया है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ने चार शहरों में आठ अलग-अलग धमाकों की योजना बनाई थी. इन धमाकों का मकसद 25 नवंबर और 6 दिसंबर को देश की सुरक्षा को दहलाना था. सूत्रों के अनुसार, 25 नवंबर को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान विस्फोट की साजिश रची जा रही थी. इसके अलावा 6 दिसंबर को दिल्ली में भी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी. जांच में यह भी पता चला है कि इस साजिश की शुरुआत 2022 में विदेश से हुई थी. विदेशी हैंडलर उकासा ने मॉड्यूल के सदस्यों उमर और मुजम्मिल को निर्देश दिए और योजना को अंजाम देने के लिए उकसाया. इतना ही नहीं इन दोनों आरोपियों ने 2023 से जनवरी 2025 तक लाल किले की कई बार रेकी भी की थी. सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में आतंकी टेलीग्राम एप के जरिए बातचीत कर रहे थे. बाद में उन्होंने अधिक सुरक्षित माने जाने वाले सिग्नल और सेशन ऐप का इस्तेमाल शुरू किया. विस्फोटक सामग्री और पुराने वाहनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही थी. एजेंसियों के मुताबिक, मॉड्यूल ने देश में डर और दहशत फैलाने के लिए बड़ी योजना बनाई थी, लेकिन समय रहते साजिश का पर्दाफाश कर दिया गया. जांचकर्ताओं ने कहा कि उमर और मुजम्मिल विदेश से मिले निर्देशों के तहत काम कर रहे थे और उनका मकसद सिर्फ बड़े स्तर पर आतंक फैलाना था. सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सभी आरोपी पकड़ लिए गए हैं और उनसे आवश्यक पूछताछ जारी है.

एयरपोर्ट टैक्सी: बेंगलुरु में कैब सेवाओं का सस्ता और आरामदायक विकल्प

बेंगलुरु बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी सेवा – सुगम और समय पर यात्रा केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट , बैंगलोर का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो देवनहल्ली में स्थित है और शहर से करीब 35 किमी दूर है। यह हवाई अड्डा दो टर्मिनलों (T1 और T2) के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संभालता है और हर साल लाखों यात्रियों की सेवा करता है। बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी सेवाएं याfत्रयों को शहर के प्रमुख इलाकों जैसे एमजी रोड, इंfदरानगर, व्हाइटफील्ड और इलेक्ट्र्रॉनिक सिटी से जोड़ती हैं। समय पर पिकअप, सुरfक्षत सफर और आरामदायक यात्रा के लिए एयरपोर्ट टैक्सी एक विश्वसनीय विकल्प है। अब बैंगलोर एयरपोर्ट से शहर तक के fलए टैक्सी बुक करें और पाएं एक सहज और सुविधाजनक अनुभव। Table of Contents एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग: बेंगलुरु एयरपोट से सस्ती और सुfवधाजनक कैब सेवाएँ क्यों जरूरी है एक भरोसेमंद एयरपोट कैब सर्विस? 1. समय की बचत 2. सुरfक्षत यात्रा 3. साफसुथरी और आरामदायक गाfड़यां कैसे बुक करें बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी? 4. एयरपोर्ट टैक्सी काउंटर से ऑन स्पॉट बुकिंग एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग क्यों है सबसे बेहतर विकल्प? एयरपोर्ट टैक्सी की खासियतें बेंगलुरु एयरपोर्ट से शहर तक टैक्सी बुकिंग प्रोसेस टैक्सी के प्रकार: अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें कितना खर्च आएगा? आउटस्टेशन टैक्सी की सुविधा यात्रियों के लिए सुझाव: एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग में ध्यान देने वाली बातें निष्कर्ष क्यों जरूरी है एक भरोसेमंद एयरपोर्ट कैब सर्विस? 1. समय की बचत फ्लाइट लेने से पहले या फ्लाइर्ट से निकलने के बाद इंतजार करना हर किसी को पसंद नहीं। प्री-बुक्ड एयरपोट टैक्सी से आपको पिकअप प्वाइंट पर कैब पहले से तैयार fमलेगी। 2. सुरक्षित यात्रा रात हो या दिन, बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में सुरक्षा महत्वपूण है। प्रोफेशनल ड्राइवस और ट्रैक की जा सकने वाली कैब्स आपके सफर को सुरfक्षत बनाती हैं। 3. साफ-सुथरी और आरामदायक गाडि़यां एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही गम , थकावट और भीड़ से राहत सिर्फ एक AC टैक्सी ही दे सकती है। कैसे बुक करें बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी? बैंगलोर में एयरपोर्ट टैक्सी बुुकिंग करना आसान है आप ऑनलाइन, मोबाइल ऐप से या एयरपोर्ट पर पहुँच कर सीधे टैक्सी बुक कर सकते हैं। 1. ऑनलाइन और ऐप-आधा रत टैक्सी बुकिंग डिजटल युग में ज्यादातर यात्री मोबाइल ऐप या वेबसाइट के ज़रिए टैक्सी बुक करना पसंद करते हैं। बुfकंग में लगता है सिर्फ कुछ सेकंड रियल-टाइम ट्रैकिंग और ड्राइवर डिटेल्स डिजिटल पेमेंट और फिक्स किराया प्री-बुकिंग का विकल्प जिससे गारंटीड पिकअप सुनिश्चित होता है 2. एयरपोर्ट टैक्सी काउंटर से ऑन-स्पॉट बुfकंग अगर आपने पहले से कैब बुक नहीं की है, तो आप हवाई अड्डे पर मौजूद टैक्सी काउंटर से भी तुरंत टैक्सी बुक कर सकते हैं। इससे आपको एयरपोर्ट पहुंचने के बाद तुरंत टैक्सी मिल जाती है, और कोई ऑनलाइन या डिजिटल प्रोसेस फॉलो नहीं करना पड़ता। ध्यान देने योग्य बातें पीक टाइम (सुबह/शाम) में लंबा वेस्टिंग टाइम हो सकता है किराया ऐप बुकिंग से अधिक हो सकता है एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग क्यों है सबसे बेहतर विकल्प? हर तरफ टैक्सी सर्विस का विकल्प मौजूद है, लेकिन सही कैब चुनना ज़रूरी है जो समय पर पहुंचे, किराया वाजिब हो और गाड़ी साफ-सुथरी हो। ऐसी सेवाएं आपकी यात्रा को सहज और तनाव रहित बना देती हैं। एयरपोर्ट टैक्सी की खासियतें स्पष्ट और पारदर्शी किराया 24×7 उपलब्धता प्रशिक्षित और अनुभवी ड्राइवर्स GPS ट्रैकिंग से सेफ्टी सहज और आसान कैब बुकिंग अतिरिक्त शुल्क जिन पर ध्यान देना चाfहए लेट नाइट चार्ज (रात 10 बजे के बाद लागू हो सकता है) टोल और पार्किंग शुल्क अतिरिक्त प्रतीक्षा समय शुल्क कुछ सेवाओं में अतिरिक्त सामान शुल्क बेंगलुरु एयरपोर्ट से शहर तक टैक्सी बुकिंग प्रोसेस टैक्सी बुक करने के लिए आप किसी भी विश्वसनीय वेबसाइट या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकतर जगहों पर आपको बुकिंग के लिए बस नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करने होते हैं: 1. यात्रा की शुरुआत और अंत का पता डालें (जैसे बेंगलुरु एयरपोर्ट से अपने गंतव्य तक) 2. अपनी यात्रा की तारीख और समय चुनें 3. कैब का प्रकार चुनें (जैसे मिनी, सेडान, SUV आदि) 4. भुगतान करें और बुकिंग कन्फर्म करें ऐसे प्लेटफॉम्स से आप मिनटों में अपनी टैक्सी बुक कर सकते हैं और फ्लाइट के हिसाब से ड्राइवर से कनेक्ट भी कर सकते हैं। टैक्सी के प्रकार: अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें कैब मिनी- सस्ती, छोटी दूरी के लिए उपयुक्त सेडान – आरामदायक और AC वाली गाड़ी, परिवार के लिए बढ़िया SUV – बड़े ग्रुप्स या ज्यादा सामान के लिए लग्ज़री – खास मौकों या बिजनेस ट्रैवल के लिए कितना खर्च आएगा? बेंगलुरु एयरपोर्ट से शहर के प्रमुख इलाक़ों जैसे एमजी रोड इंदिरा नगर व्हाइटफील्ड इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक टैक्सी किराया आमतौर पर ₹700 से शुरू होता है। दूरी, कैब के प्रकार, और ट्रैफिक के आधार पर कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। आउटस्टेशन टैक्सी की सुविधा अगर आप बेंगलुरु एयरपोर्ट से मैसूर, ऊटी, चिकमंगलूर या कोडाइकनाल जैसे आसपास के शहरों या हिल स्टेशन जाना चाहते हैं, तो आउटस्टेशन कैब बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। ये टैक्सी लंबी दूरी के सफर के लिए आरामदायक और भरोसेमंद विकल्प हैं। यात्रियों के लिए सुझाव: एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग में ध्यान देने वाली बातें ● पहले से बुकिंग करें: खासकर व्यस्त समय और छुट्टियों में ताकि सफर आरामदायक रहे। ● फ्लाइट डिटेल्स डालें: ड्राइवर आपके फ्लाइट के अनुसार तैयार रहेगा। ● कस्टमर सपोर्ट नंबर सेव रखें: अगर रास्ते में कोई परेशानी आए तो मदद ले सकें।   निष्कर्ष बेंगलुरु एयरपोर्ट से अपनी मंज़िल तक पहुंचना अब आसान हो गया है अगर आप सही एयरपोर्ट टैक्सी सेवा का चुनाव करें। एक भरोसेमंद टैक्सी सेवा न केवल आपके समय और पैसे की बचत करती है, बिल्क आपके सफर को सुरक्षित और आरामदायक भी बनाती है। तो अगली बार जब भी आप बेंगलुरु आएं या यहां से यात्रा करें, अपनी एयरपोर्ट टैक्सी पहले से बुक करके स्माट और सुरक्षित ट्रैवल का आनंद लें।

PAK-यूक्रेन ड्रोन समझौते पर भारत की पैनी नजर, ऑपरेशन सिंदूर की याद ताजा

 नई दिल्ली भारत की खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच ड्रोन तकनीक के हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी या TOT) समझौते पर कड़ी निगरानी रख रही हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सौदा एक यूरोपीय ड्रोन कंपनी और पाकिस्तान की सरकारी रक्षा कंपनी हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला (HIT) के बीच हो चुका है. अधिकारी ने कहा कि हम इस विकास पर पूरी नजर रखे हुए हैं. पाकिस्तान यह सौदा गुप्त रखने की कोशिश कर रहा है. यह खबर ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. मई 2025 में हुई 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी यूक्रेन, रूस और यूरोप की अन्य ड्रोन कंपनियों से संपर्क में थे. वे मध्यम ऊंचाई वाले लंबी दूरी के (MALE) ड्रोन की तलाश कर रहे थे. अगर यह सौदा पूरा होता है, तो पाकिस्तान की ड्रोन जंग लड़ने की ताकत बढ़ जाएगी. ऑपरेशन सिंदूर: ड्रोन हमलों का सबक 'ऑपरेशन सिंदूर' मई 2025 में हुआ था. उस दौरान पाकिस्तानी सेना ने पश्चिमी सीमा पर ड्रोन और अन्य हथियारों से कई हमले किए. लेकिन भारतीय रक्षा बलों ने इन हमलों को पूरी तरह नाकाम कर दिया. बिना पायलट वाले हवाई यान (UAS) ने इस जंग में मुख्य भूमिका निभाई. इस घटना ने भारत को ड्रोन युद्ध की तैयारी और मजबूत करने का संकेत दिया. रूस-यूक्रेन जंग से सबक दुनिया भर में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में दोनों देश ड्रोन से एक-दूसरे के ऊर्जा केंद्रों, सैन्य ठिकानों और फैक्टरियों पर हमला कर रहे हैं. लंबी दूरी के ड्रोन रूस और यूक्रेन के अंदरूनी इलाकों में तेल रिफाइनरी और लॉजिस्टिक हब को निशाना बना रहे हैं. पाकिस्तान इस जंग से सीख ले रहा है और अपनी सेना को नई तकनीक से लैस करना चाहता है. उत्तरी सेना कमांड का ड्रोन रिव्यू उत्तरी आर्मी कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने गुरुवार को ड्रोन युद्ध की तैयारी की समीक्षा की. उन्हें आधुनिक ड्रोन की लड़ाकू क्षमता और तैयारियों के बारे में जानकारी दी गई. लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने सभी रैंकों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि इनोवेशन, तकनीकी उत्कृष्टता और बहु-क्षेत्रीय संचालन (मल्टी डोमेन ऑपरेशंस) में क्षमता विकास पर जोर दिया जाए. यह कदम दिखाता है कि उत्तरी कमांड आधुनिक जंग में बढ़त बनाए रखने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है. भारत की रणनीति: सतर्कता और तैयारी भारतीय एजेंसियां इस सौदे पर इसलिए चिंतित हैं क्योंकि पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता बढ़ने से सीमा पर खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को भी अपनी ड्रोन तकनीक को और मजबूत करना होगा. ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं से भारत ने साबित कर दिया है कि वह ड्रोन हमलों का मुकाबला करने में सक्षम है.  भविष्य के लिए लगातार निगरानी जरूरी है. यह विकास क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नया मोड़ ला सकता है. भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सैन्य स्तर पर तैयारी तेज हो गई है.

अटलांटिक महासागर की धारा रुकने से यूरोप में ठंड का कहर, भारत-अफ्रीका पर भी असर

 नई दिल्ली अटलांटिक महासागर की मुख्य समुद्री धारा (Ocean Current) जो यूरोप और कई महाद्वीपों को गर्म रखती है वो खत्म हो रही है. यानी ठंडी हो रही है. इसे आइसलैंड ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बता दिया है. यह धारा अगर रुक गई तो पूरे यूरोप में फिर से हिमयुग आ सकता है. यानी चारों तरफ बर्फ ही बर्फ.  आइसलैंड के जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन ने कहा कि यह देश की अस्तित्व के लिए खतरा है. सरकार अब सबसे बुरे हालात के लिए योजना बना रही है. क्योंकि आइसलैंड एकदम नॉर्थ पोल पर ही है. सबसे बुरा असर उसे ही होगा.  अटलांटिक धारा क्या है और क्यों महत्वपूर्ण? अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) नाम की यह धारा गर्म पानी को उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से आर्कटिक की ओर ले जाती है. इससे यूरोप के सर्दियां हल्की रहती हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन से आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है. ग्रीनलैंड की बर्फीली चादर से ठंडा पानी समुद्र में बह रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं कि यह ठंडा पानी धारा को बाधित कर सकता है. अगर AMOC ढह गई, तो उत्तरी यूरोप में सर्दियों का तापमान बहुत गिर जाएगा. बर्फ और बर्फीले तूफान बढ़ जाएंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह धारा पहले भी ढह चुकी है. लगभग 12,000 साल पहले आखिरी बर्फीले युग से पहले यही हुआ था. आइसलैंड की चिंता: पहली बार जलवायु खतरे को सुरक्षा मुद्दा बनाया मंत्री जोहानसन ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय मजबूती और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है. यह पहली बार है जब किसी खास जलवायु घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सामने अस्तित्व का खतरा बताया गया. अब सभी मंत्रालय सतर्क हैं और जवाब तैयार कर रहे हैं. सरकार शोध, नीतियां और आपदा तैयारी पर काम कर रही है. खतरों में ऊर्जा और भोजन सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय परिवहन शामिल हैं. जोहानसन ने कहा कि समुद्री बर्फ जहाजों को रोक सकती है. चरम मौसम कृषि और मछली पकड़ने को नुकसान पहुंचा सकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और भोजन के लिए जरूरी हैं. आइसलैंड इंतजार नहीं कर सकता. वैश्विक प्रभाव: सिर्फ यूरोप नहीं, पूरी दुनिया प्रभावित AMOC के ढहने का असर उत्तरी यूरोप से कहीं आगे जाएगा. अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका के किसानों पर वर्षा पैटर्न बिगड़ सकती है. अंटार्कटिका में गर्मी तेज हो सकती है, जहां बर्फ पहले ही खतरे में है. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगले कुछ दशकों में घटना पूरी हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. फिनलैंड के मौसम विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक एलेक्सी नुमेलिन ने कहा कि कब होगा, इस पर बहुत शोध हो रहा है. लेकिन समाज पर असर के बारे में कम जानकारी है. जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट के स्टेफन राह्मस्टॉर्फ ने कहा कि विज्ञान तेजी से बदल रहा है. समय कम है, क्योंकि टिपिंग पॉइंट करीब आ रहा है. अन्य देशों की प्रतिक्रिया: शोध बढ़ा रहे हैं उत्तरी यूरोप के अन्य देश भी सतर्क हैं. आयरलैंड के मौसम विभाग ने प्रधानमंत्री और संसदीय समिति को जानकारी दी है. नॉर्वे का पर्यावरण मंत्रालय नया शोध कर रहा है. ब्रिटेन ने 81 मिलियन पाउंड से ज्यादा शोध के लिए दिए.  नॉर्डिक काउंसिल ने अक्टूबर में 60 विशेषज्ञों के साथ "नॉर्डिक टिपिंग वीक" कार्यशाला की. वे समाज पर असर की सिफारिशें तैयार कर रहे हैं. सोमवार को 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की बर्फ पिघलने पर चेतावनी दी.  आगे क्या? तत्काल कार्रवाई जरूरी आइसलैंड ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ने और गर्मी तेज होने के बीच जोखिम नहीं ले रहा. सरकार जलवायु अनुकूलन योजनाओं में जोखिमों को शामिल कर रही है. विशेषज्ञ कहते हैं कि समाज को प्रभाव समझने के लिए ज्यादा शोध चाहिए. यह मुद्दा दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि सुरक्षा का सवाल है.

अमेरिका को निर्यात में गिरावट, लेकिन भारत का कुल एक्सपोर्ट 6.75% बढ़ा — नए बाजारों में बढ़ी पकड़

 नई दिल्ली  अमेरिका (America) ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50 फीसदी का टैरिफ (Tariff) लगाया है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की 'दबाव नीति' के तहत भारत पर एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोपा गया. लेकिन अब अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने ही इसकी हवा निकाल दी है.  दरअसल, अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपने एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है. सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की आई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-केंद्रित व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. यानी भारत अब केवल अमेरिका के भरोसे नहीं रहने वाला है. दुनिया में भारत का डंका वैश्विक ट्रेड तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियों के बीच भी Moody’s Ratings ने भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति अपना पॉजीटिव रुख दिखाया है. अपनी 'Global Macro Outlook 2026-27' रिपोर्ट में एजेंसी ने यह अनुमान लगाया है कि भारतीय इकोनॉमी अगले दो वर्षों तक सालाना लगभग 6.5% की विकास दर के साथ बढ़ती रहेगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत इस अवधि में G-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहने की संभावना रखता है.  भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के पीछे मुख्यतौर पर तीन कारण हैं:  (i) लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश.  (ii) घरेलू उपभोक्ता मांग का मजबूत होना. (iii) एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम.  भारतीय इकोनॉमी में मजबूती के पीछे महंगाई पर काबू और ब्याज दरों में कटौती की अहम भूमिका रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि Reserve Bank of India ने अक्टूबर में रेपो दर स्थिर रखी, जो यह संकेत देता है कि महंगाई नियंत्रित है और अब विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है. इस बीच विदेशी निवेशकों के नजरिये में भी भारत को लेकर सकारात्मक रुख रहा है.  बता दें, जहां मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर 6.5 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, वहीं  वैश्विक जीडीपी में 2026-27 के दौरान सिर्फ 2.5-2.6% तक रहने का अनुमान है. जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं करीब 4% की दर तक बढ़ सकती हैं. हालांकि मूडीज की रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि प्राइवेट सेक्टर की निवेश गतिविधि अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई है. लेकिन घरेलू डिमांड मजबूत है. मूडीज (Moody’s) एक अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है, इसकी रिपोर्ट पर निवेशक भरोसा करते हैं. इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और यह 1909 में जॉन मूडी द्वारा स्थापित की गई थी.  घरेलू डिमांड, विदेशी निवेश मजबूत मूडीज की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मज़बूत विदेशी पूंजी प्रवाह और पॉजिटिव इन्वेस्टर सेंटीमेंट ने भारत को बाहरी झटकों से निपटने के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है, जिससे लिक्विडिटी बनाए रखने में बड़ी मदद मिली है. हालांकि घरेलू डिमांड अभी भी ग्रोथ का मुख्य इंजन बनी हुई है. मूडीज़ ने कहा है कि निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय अभी भी धीमा है और बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निवेश अभी पूरी तरह से नहीं उबर पाया है.   

दिल्ली विस्फोट पर उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया: कश्मीरी होने का मतलब आतंकी होना नहीं है

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि हर कश्मीरी को आतंकवाद से जुड़ा बताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का हर निवासी आतंकवादी नहीं है या आतंकवादियों से जुड़ा नहीं है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में नई दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले की निंदा की, जिसमें कम से कम 12 लोग मारे गए हैं। उन्होंने कहा, "घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। बेगुनाह लोगों का कत्ल करने की इजाजत कोई मजहब नहीं देता है। कार्रवाई चल रही है और जांच होती रहेगी, लेकिन हमें ख्याल रखना होगा कि जम्मू-कश्मीर का हर नागरिक आतंकवादी नहीं है और न ही वह आतंकियों के साथ है।" उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सिर्फ चंद लोग हैं, जिन्होंने यहां अमन और भाईचारे को बिगाड़ने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम जम्मू-कश्मीर के हर निवासी और हर कश्मीरी मुसलमान को एक ही विचारधारा से देखते हैं और सोचते हैं कि उनमें से हर एक आतंकवादी है, तो लोगों को सही रास्ते पर रखना मुश्किल हो जाता है। दिल्ली कार ब्लास्ट के आतंकियों के पेशेवर पृष्ठभूमि (जिनमें डॉक्टर भी शामिल हैं) से होने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पढ़े-लिखे लोग भी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होते हैं। उन्होंने कहा, "क्या हमने इससे पहले विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों को नहीं देखा? मैं इस बात से स्तब्ध हूं कि उन्हें नौकरी से निकाल तो दिया गया, लेकिन उसके बाद किस तरह की जांच की गई? मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया?" इस दौरान, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस हादसे के लिए कसूरवार को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, लेकिन बेगुनाह लोगों को इससे बाहर रखना होगा। उन्होंने फिर से दोहराया कि वे सिर्फ चंद लोग हैं जो हमले के लिए जिम्मेदार हैं। बता दें कि दिल्ली कार ब्लास्ट और फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के दौरान पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों में से अधिकतर जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं।

‘सर्वेसर्वा’ बने असीम मुनीर! सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां सीमित, राजनीति में मचा तूफ़ान

नई दिल्ली  पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर अब तीनों सेना के प्रमुख बन गए हैं। पाकिस्तान के इतिहास में यह बड़ा बदलाव हुआ है। पाकिस्तानी असेंबली में इस बिल को 234 मतों के साथ पास किया गया। असीम मुनीर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) होंगे। असीम 27 नवंबर से इस पद का कार्यभार संभालेंगे। इसके बाद परमाणु हथियारों का भी कमांड उन्हीं के हाथों में होगा। हैरानी की बात यह है कि इस संशोधन के साथ ही मुनीर की शक्तियां बढ़ गईं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों में कमी आई है। इस संशोधन के प्रावधान के तहत मुनीर अब अपने कार्यकाल को समाप्त करने के बाद भी इन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे। वह ना तो रिटायर होंगे, ना उनसे यह पद लेकर किसी और को दिया जाएगा। आसान सी भाषा में कहें, तो अब वह सर्वेसर्वा होंगे। संशोधन के अनुसार, सभी संवैधानिक मामलों को कोर्ट से हटाकर फेडरल कांस्टीट्यूशनल कोर्ट (एफसीसी) में शिफ्ट किया जाएगा। इसके तहत अब जजों की नियुक्ति भी सरकार ही करेगी। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, 27वें संशोधन में आखिरी समय में कुछ बदलाव किया गया। इसके तहत फिलहाल वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान (सीजेपी) याह्या अफरीदी अपने कार्यकाल के दौरान सीजेपी के पद पर ही रहेंगे। सीजेपी अफरीदी ने अक्टूबर 2024 में 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी, ऐसे में उनका कार्यकाल तीन साल बाद खत्म होगा। संशोधन के अनुसार सीजेपी का मतलब दोनों मुख्य न्यायाधीशों में से वरिष्ठ न्यायाधीश है। यह प्रावधान अफरीदी के अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद लागू होगा। यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी उनकी ताकत छीन ली गई है। मुनीर पहले पर्दे के पीछे से सरकार संभाल रहे थे, लेकिन अब लग रहा है कि वह पर्दे से बाहर आकर सत्ता संभालेंगे। दरअसल, नेशनल कमांड अथॉरिटी पहले परमाणु हथियारों और मिसाइल सिस्टम की निगरानी और कंट्रोल करती थी। इसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री करते थे। हालांकि, इस पर भी मुनीर का कंट्रोल होगा। विपक्ष इस संशोधन के खिलाफ आवाज उठा रहा है। पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ जमकर इसका विरोध कर रही है। पीटीआई नेताओं ने ना केवल सत्र का बहिष्कार किया, बल्कि विधेयक की प्रतियां भी फाड़ दी। तहरीक तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान ने इस संशोधन के खिलाफ जन आंदोलन का ऐलान भी किया है। हालांकि, यह आंदोलन कब होगा, इसे लेकर फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

एलजी मनोज सिन्हा का बड़ा बयान: ‘आतंकवाद विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू यूनिवर्सिटी के 19वें (द्वितीय विशेष) दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान, उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वालों और स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित किया। जम्मू यूनिवर्सिटी के विशेष दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने छात्रों और शिक्षकों से बदलाव को अपनाने और कौशल-प्रधान पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज की मांगों को पूरा करने के लिए उभरते रुझानों के साथ तालमेल बनाए रखने समेत अलग-अलग विषयों में सहयोग करने की भी अपील की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम के दौरान दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "10 नवंबर को दिल्ली में हुए बम विस्फोटों में जिन लोगों को हमने खोया है, मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।" उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि आतंकवाद विकास का सबसे बड़ा दुश्मन है। जम्मू-कश्मीर के लोग लंबे समय से इस आतंक का दंश झेल रहे हैं। अब वहां के युवा नए सपने देख रहे हैं और हमें उन्हें उन मुकामों तक पहुंचने के लिए पंख देने में मदद करनी चाहिए, जिनकी देश और दुनिया का हर युवा आकांक्षा रखता है।" मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वालों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई दी और सभी विषयों में छात्राओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर जोर दिया और जम्मू-कश्मीर के विश्वविद्यालयों में पहुंच, गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मिशन युवा' शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और मानसिक स्वास्थ्य के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रमुख पहल है, जो उन्हें न सिर्फ रोजगार के लिए, बल्कि नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए भी तैयार करती है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "शिक्षा परिवर्तन का मूल है। विश्वविद्यालय ने आपमें निवेश किया है। अब अपने आसपास की दुनिया में निवेश करें। सफलता इसमें नहीं है कि आप अपने लिए क्या हासिल करते हैं, बल्कि इसमें है कि आप समाज के लिए क्या योगदान देते हैं।"

ढाका में कूटनीतिक हलचल: शेख हसीना के इंटरव्यू पर बांग्लादेश का विरोध

ढाका  बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हालिया इंटरव्यू को लेकर तल्ख प्रतिक्रिया दी है। भारतीय मीडिया के साथ पूर्व पीएम हसीना का एक इंटरव्यू सामने आया है। इसे लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे को तलब किया। बांग्लादेशी मीडिया ने यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे को तलब कर औपचारिक रूप से नाराजगी जाहिर की। बांग्लादेशी मीडिया ने राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया कि भारतीय राजनयिक से नई दिल्ली को बांग्लादेश के उस अनुरोध से अवगत कराने को कहा गया था, जिसमें हसीना की मीडिया तक पहुंच रोकने की बात कही गई थी। बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि हाल ही में एएफपी, रॉयटर्स और द इंडिपेंडेंट (यूके) ने पूर्व पीएम शेख हसीना का इंटरव्यू लिया था। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ। इस दौरान बांग्लादेश में भारी हिंसा देखने को मिली। पूर्व पीएम शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा। उस समय से पूर्व पीएम भारत में ही रह रही हैं। वहीं, बांग्लादेश में शेख हसीना के ऊपर अपराध और नरसंहार समेत अन्य कई आरोपों में मामला दर्ज है। हसीना ने बीते कुछ समय में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को भी इंटरव्यू दिए हैं। अपने इंटरव्यू के दौरान शेख हसीना ने बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार को जमकर घेरा। बांग्लादेश की सरकार का कहना है कि शेख हसीना के हालिया इंटरव्यू से देश में बवाल मच सकता है। शेख हसीना और दो अन्य के खिलाफ पिछले साल जुलाई-अगस्त में हुए विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के मामले में इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने सजा सुनाने की तारीख पर फैसला सुनाया है। आईसीटी-1 ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ सजा सुनाने की तारीख 17 नवंबर तय की है। जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजूमदार, जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद, और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक इनाम चौधरी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय बेंच ने यह तारीख तय की।

उपचुनाव रिजल्ट 2025: 7 राज्यों की 8 सीटों पर कल खुलेगा मतगणना का पिटारा

नई दिल्ली देश के सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आठ विधानसभा सीटों पर मंगलवार (11 नवंबर) को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था। अब 14 नवंबर (शुक्रवार) को इन चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। जिन सीटों पर मतदान हुआ उनमें जम्मू-कश्मीर की बडगाम और नगरोटा, झारखंड की घाटशिला, पंजाब की तरनतारन, राजस्थान की अंता, तेलंगाना की जुबली हिल्स, मिजोरम की डम्पा और ओडिशा की नुआपाड़ा विधानसभा सीट शामिल हैं। झारखंड की इस सीट पर आएंगे उपचुनाव के नतीजे झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव हुआ था। इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार सोमेश सोरेन, जो पूर्व विधायक रामदास सोरेन के बेटे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन के बीच सीधी टक्कर है। इस उपचुनाव में कुल 13 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की बडगाम और गांदेरबल विधानसभा सीट उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में बडगाम और गांदेरबल दो सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने बडगाम सीट से इस्तीफा दे दिया, जिस वजह से इस सीट पर अब उपचुनाव कराया गया है। वहीं, नगरोटा सीट बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के कारण खाली हुई थी। राजस्थान की अंता सीट राजस्थान की अंता सीट पर उपचुनाव इसलिए हुए हैं क्योंकि बीजेपी नेता कंवर लाल मीणा को 2005 के एक पुराने मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हैदराबाद की जुबली हिल्स विधानसभा सीट हैदराबाद की जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर कांग्रेस, बीआरएस और बीजेपी के बीच महामुकाबला है। कल यानी 13 नवंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच नतीजे आने की उम्मीद है। कहां देखें उपचुनाव के नतीजे? उपचुनाव के नतीजे और अपडेट आप चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, एबीपी न्यूज की वेबसाइट या फिर एबीपी न्यूज के यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकते हैं.     ECI की वेबसाइट: (https://www.eci.gov.in/)     एबीपी न्यूज की वेबसाइट: (https://lalluram.com/)