samacharsecretary.com

IAF की बड़ी ताकत बनने जा रहे हैं 1100 जेट इंजन, ₹65,400 करोड़ की डील से बदलेगा गेम

नई दिल्ली  भारतीय वायु सेना (IAF) ने अगले दशक में अपनी ताकत को कई गुना बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. देश लगभग ₹65,400 करोड़ ($7.44 बिलियन) खर्च करने जा रहा है, ताकि 2035 तक 1,100 नए फाइटर जेट इंजन खरीदे जा सकें. ये इंजन कई विकसित हो रहे फाइटर जेट प्रोग्रामों के लिए इस्तेमाल होंगे और भारतीय रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे. देश में लंबे समय से चल रहे घरेलू जेट इंजन कार्यक्रम को गति देने के लिए नई योजनाओं पर काम शुरू हो गया है. वर्तमान में लाइट कॉम्बैट जेट ‘तेजस’ को Kaveri इंजन से लैस करने की योजना तकनीकी चुनौतियों के चलते पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है. लेकिन अब नए इंजन की खरीद और विकास से यह सपनों को साकार करने वाला कदम माना जा रहा है. भारत की जेट इंजन की प्लानिंग S.V. रामाना मूर्ति, Gas Turbine Research Establishment (GTRE) के निदेशक और देश के होम-ग्रोन इंजन विकास के प्रभारी, ने बताया कि अगले दशक में भारत को लगभग 1,100 जेट इंजन की जरूरत होगी. ये इंजन विभिन्न फाइटर जेट प्रोग्रामों में इस्तेमाल किए जाएंगे, जिनकी निर्माण प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है. मूर्ति ने कहा कि देश को मिशन मोड में काम करके घरेलू फाइटर इंजन का इकोसिस्टम तैयार करना होगा. घरेलू इंजन कावेरी का भविष्य तेजस जेट को कावेरी इंजन से लैस करने का प्रयास पिछले कई सालों से चल रहा है. लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसका विकास अधूरा रहा.मूर्ति ने कहा कि कावेरी इंजन का अपग्रेडेड संस्करण घरेलू ड्रोन लड़ाकू विमानों (UCAV) में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नए प्रकार की क्षमताएं हासिल होंगी. अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और 5वीं पीढ़ी का जेट GTRE के निदेशक ने यह भी बताया कि भारत अपने पहले 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में इंजन विकसित करने की योजना बना रहा है. इस परियोजना में फ्रांस की Safran, ब्रिटेन की Rolls-Royce और अमेरिका की General Electric जैसी कंपनियों ने रुचि दिखाई है. Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) का प्रोटोटाइप 2028 में रोलआउट होने की संभावना है. निजी क्षेत्र की भागीदारी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस नए फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए निजी कंपनियों को भी बोलियां लगाने का अवसर मिलेगा. इसका उद्देश्य भारतीय स्टेट-ओन्ड वॉरप्लेन निर्माता HAL पर दबाव कम करना और देश में रक्षा निर्माण क्षमता बढ़ाना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने रक्षा उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी निर्माताओं को भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी में निवेश करने का आग्रह किया है. इंजन खरीद से भविष्य की ताकत ₹65,400 करोड़ के निवेश से भारत न केवल घरेलू इंजन विकास में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि अपनी वायु सेना की शक्ति को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई तक ले जाएगा. यह कदम IAF के अगले दशक की रणनीति और आधुनिक हवाई शक्ति सुनिश्चित करने की योजना का हिस्सा है.  

ट्रंप ने किया ऐलान: दक्षिण कोरिया में होंगे जिनपिंग के साथ सीधे वार्ता

वाशिंगटन  दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस मौके पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह अगले कुछ सप्ताह में दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक बैठक के दौरान यह टिप्पणी की। चीन ने दुर्लभ मृदा धातुओं (जो विभिन्न सैन्य और वाणिज्यिक उत्पादों के उत्पादन के लिए आवश्यक घटक हैं) पर निर्यात नियंत्रण कड़ा करने का फैसला लिया। इसके बाद से दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापार तनाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा, "चीन बातचीत करना चाहता है और हमें चीन से बात करना पसंद है। इसलिए हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हम कुछ हफ्तों में दक्षिण कोरिया में मिलने वाले हैं।" अपनी टैरिफ नीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि कोरिया में होने वाली संभावित बैठक से पहले अमेरिका "बहुत मजबूत" स्थिति में है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक से कोई व्यापार समझौता हो सकता है। इस पर ट्रंप ने कहा, "हो सकता है।" उन्होंने कहा, "वे बातचीत करना चाहते हैं और हम बातचीत कर रहे हैं और मुझे लगता है कि हम एक ऐसा समझौता करेंगे जो दोनों के लिए अच्छा होगा। मुझे लगता है कि हम कुछ करेंगे।" पिछले शुक्रवार को, ट्रंप ने चीन के निर्यात नियंत्रण कदम की निंदा की और शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द करने की धमकी दी। उन्होंने 1 नवंबर से चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने और उसी दिन सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लागू करने की योजना की भी घोषणा की। टैरिफ योजना पर बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि अगर वे चाहें तो इसे "बढ़ा" सकते हैं, और चीन नहीं चाहता कि यह टैरिफ लागू हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोपीय संघ का भी ज़िक्र किया और जोर देकर कहा, "हम बस यही चाहते हैं कि हमारे साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। लेकिन निष्पक्षता यह है कि सैकड़ों अरबों और यहां तक कि खरबों डॉलर अमेरिका में आ रहे हैं और टैरिफ के कारण हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित है। अगर टैरिफ नहीं होते, तो हमारी कोई राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं होती। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।" उसी दिन पहले प्रसारित फॉक्स बिजनेस के एक इंटरव्यू में, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की एक "अलग" बैठक "निर्धारित" है। उन्होंने कहा, "हम कुछ हफ्तों में मिलने वाले हैं। दरअसल, हम दक्षिण कोरिया में मिलने वाले हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य लोग भी। लेकिन हमारी एक अलग बैठक निर्धारित है।" चीन के खिलाफ टैरिफ योजना पर, राष्ट्रपति ट्रंप का रुख थोड़ा नरम दिखाई दिया। उन्होंने कहा, "यह टिकाऊ नहीं है, लेकिन संख्या यही है। शायद नहीं… यह टिक सकता है, लेकिन उन्होंने मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। मुझे लगता है कि चीन के साथ हमारा रिश्ता ठीक रहेगा।" ट्रंप ने शी की भी प्रशंसा की और कहा, "मैं उनके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता हूं; वह एक बहुत ही मजबूत नेता और अद्भुत इंसान हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को चीन के साथ "निष्पक्ष समझौता" करना होगा और अपने इस आरोप को दोहराया कि चीन ने अमेरिका को "धोखा" दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ ट्रेलर था! अब भारत की असली ताकत का संकेत, राजनाथ सिंह बोले

नई दिल्ली  केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शनिवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य ताकत अब उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां विजय एक आदत बन गई है। राजनाथ ने लखनऊ में सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि विजय अब हमारे लिए छोटी घटना नहीं है। विजय हमारी आदत बन चुकी है।' भारतीय सशस्त्र बलों की सटीकता और तत्परता की प्रशंसा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के विरोधी अब देश की मिसाइल क्षमताओं से बच नहीं सकते। राजनाथ सिंह ने कहा, 'देश को भरोसा है कि हमारे विरोधी अब ब्रह्मोस से बच नहीं पाएंगे। पाकिस्तान का हर इंच अब हमारी ब्रह्मोस मिसाइल की पहुंच में है।' उन्होंने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की घटनाएं भारत की क्षमताओं का केवल एक छोटा सा नमूना हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में जो हुआ, वह सिर्फ एक ट्रेलर था। उन्होंने कहा, 'ट्रेलर ने ही पाकिस्तान को अहसास करा दिया कि अगर भारत ने पाकिस्तान को जन्म दिया तो मुझे यह बताने की जरूरत नहीं कि वह और क्या कर सकता है।' ब्रह्मोस मिसाइलों की खेप को दिखाई हरी झंडी रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के ब्रह्मोस एयरोस्पेस केंद्र में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ब्रह्मोस एयरोस्पेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम का निर्माता है। राजनाथ सिंह ने बताया कि ब्रह्मोस टीम ने केवल एक महीने में दो देशों के साथ लगभग 4,000 करोड़ रुपये के करार किए हैं। उन्होंने कहा, 'आने वाले वर्षों में हम अन्य देशों के विशेषज्ञों को लखनऊ में आते देखेंगे, जिससे यह शहर ज्ञान का केंद्र और रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनेगा। अगले वित्तीय वर्ष से ब्रह्मोस की लखनऊ यूनिट का टर्नओवर लगभग 3,000 करोड़ रुपये होगा और जीएसटी संग्रह 5,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगा।'  

गोरखा विवाद पर ममता का गुस्सा: पीएम को भेजा विरोध पत्र

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है दार्जिलिंग हिल्स, तराई और डुआर्स क्षेत्र में गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्र द्वारा एक 'मध्यस्थ' की नियुक्ति राज्य सरकार से परामर्श के बिना की गई है, जो संघीय सहयोग की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, "मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने पंकज कुमार सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल सरकार से किसी भी प्रकार की चर्चा या परामर्श किए बिना लिया गया है, जबकि यह पूरा मामला राज्य प्रशासन, शांति और दार्जिलिंग की गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के सुशासन से सीधे तौर पर जुड़ा है।" ममता बनर्जी ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की स्थापना 18 जुलाई 2011 को दार्जिलिंग में हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुई थी, जिसमें भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच समझौता हुआ था। यह समझौता उस समय के केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीटीए का गठन गोरखा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई प्रगति सुनिश्चित करने और पहाड़ी इलाकों की शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में शांति और सद्भाव का माहौल कायम हुआ है। ममता बनर्जी ने पत्र में प्रधानमंत्री को कहा कि इस तरह का एकतरफा निर्णय इस नाजुक क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार का दृढ़ मत है कि गोरखा समुदाय या जीटीए क्षेत्र से जुड़ी किसी भी पहल को राज्य सरकार से पूरी चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। बिना परामर्श के उठाया गया कोई भी कदम इस क्षेत्र में शांति और सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि इस नियुक्ति आदेश पर पुनर्विचार कर उसे रद्द किया जाए, ताकि केंद्र और राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना बनी रहे। उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और कहा, "हम सभी को शांति, सहयोग और संवैधानिक भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।"

शॉकिंग हादसा: ढाका एयरपोर्ट का कार्गो सेक्शन आग की लपटों में, फ्लाइट्स स्थगित

ढाका बांग्लादेश की राजधानी ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कार्गो एरिया में आज दोपहर 2:30 बजे (स्थानीय समय) के आसपास आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैल गई कि एयरपोर्ट प्राधिकरण को तुरंत सभी उड़ानों को रोकना पड़ा। फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि आग गेट नंबर 8 के पास कार्गो विलेज में शुरू हुई। अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन कार्गो में रखे माल का बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों ने आग से निकल रहे काले धुएँ और जहरीली गैसों को लेकर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह धुआँ आसपास के लोगों के लिए सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है। एयरपोर्ट प्रशासन ने पास के इलाकों में रहने वालों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की कई टीमें मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर काबू पाने का प्रयास जारी है।

तालिबान को आसिम मुनीर की नई चेतावनी: दो ऑप्शन और गंभीर संदेश

इस्लामाबाद  पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने शनिवार को अफगानिस्तान को दो ऑप्शन देते हुए शांति या अराजकता में किसी एक को चुनने के लिए कहा। उन्होंने काबुल से कहा कि वह अफगान जमीन का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के अंदर हमले करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ सख्त और तुरंत कार्रवाई करे। मुनीर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर नए एयर स्ट्राइक किए हैं। इससे कुछ घंटे पहले इस्लामाबाद और काबुल ने अपने दो दिन के सीजफायर को बढ़ाया था, जिससे दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी कुछ समय के लिए रुक गई थी। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एबटाबाद में पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी (PMA) काकुल में आर्मी कैडेट्स के पासिंग आउट होने के समारोह में अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए कहा, ''शांति और अराजकता में से किसी एक को चुनें।'' उन्होंने कहा कि तालिबान शासन को पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों के लिए अपनी जमीन से काम करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। मुनीर ने चेतावनी दी कि अफगान जमीन का इस्तेमाल करने वाले सभी प्रॉक्सी को धूल में मिलाने जैसा जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान की तरफ से शुक्रवार को किए गए हमले, नॉर्थ वज़ीरिस्तान में एक मिलिट्री ठिकाने पर आतंकवादियों के बंदूक और बम हमले के बाद हुए, जिसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हाफिज गुल बहादुर ग्रुप ने ली थी। ये नए हमले ऐसे समय में हुए हैं जब दोनों देशों के प्रतिनिधियों की दोहा में मीटिंग होने की उम्मीद है, जहां कतर सरकार बीच-बचाव की कोशिश करने वाली है। इस्लामाबाद ने लगातार तालिबान सरकार से आतंकवादी ग्रुपों को बॉर्डर पार हमलों के लिए अफगान इलाके का इस्तेमाल करने से रोकने की अपील की है। हालांकि, काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है, और जोर देता है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं किया जा रहा है। बैन किए गए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बार-बार आतंकवादी हमलों के बाद दोनों पड़ोसियों के बीच हालात बिगड़ गए। हाल ही में अशांत खैबर पख्तूनख्वा के ओरकजई जिले में एक हमला हुआ, जिसमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर समेत 11 मिलिट्री के लोगों की जान चली गई।

खाई में वाहन गिरा, महाराष्ट्र में 8 श्रद्धालुओं की मौत, परिवार में मातम

मुंबई  महाराष्ट्र में भीषण हादसा हुआ है, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई है। यह हादसा नंदुरबार जिले में हुआ है, जब एक वाहन चंदशाली घाट पर एक खाई में गिर गया। महाराष्ट्र पुलिस ने शनिवार को घटना की जानकारी दी। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया। यह घटना शहादा पुलिस थानाक्षेत्र में हुई। जानकारी के मुताबिक अस्तंबा देवी के मंदिर में दर्शन करके लौट रहे थे। चढ़ाई के दौरान वाहन ने खोया नियंत्रण मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। वाहन में सवार सभी लोग अस्तंबा देवी के दर्शन के लिए गए थे। वापसी के दौरान यह हादसा हुआ। वाहन चालक ने चढ़ाई के दौरान अपना नियंत्रण खो दिया और वाहन खाई में गिर गया। पुलिस के मुताबिक यह खाई काफी गहरी थी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार लोग उसमें से निकल-निकलकर बाहर गिर पड़े। वहीं, वाहन भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घायलों को तलोदा उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं, गंभीर रूप से घायल लोगों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। कौन हैं अस्तंबा देवी अस्तंबा देवी की यात्रा का महत्व आदिवासी समुदाय में काफी ज्यादा है। गुजरात और महाराष्ट्र से यहां पर बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। वहीं, जिस चांदशैली घाट पर यह हादसा हुआ है, वह भी बेहद खतरनाक है। यहां पर चढ़ाई बहुत रिस्की है और कई जगहों पर खड़ी चढ़ाई है। इसलिए हादसे का डर बना रहता है।  

क्रिकेटरों की मौत के बाद तनाव बढ़ा: अफगानिस्तान बदला लेने की तैयारी में, पाकिस्तान ने कतर में बात की

दोहा पाकिस्तान और अफगान तालिबान शासन के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में की गई हवाई कार्रवाई में कम से कम 10 नागरिक मारे गए, जिसके बाद दोनों पक्षों ने कतर की राजधानी दोहा में आपातकालीन शांति वार्ता बुलाने का फैसला किया है। इन हमलों में अफगानिस्तान के तीन क्रिकेटर भी मारे गए हैं। अब तालिबान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और खुफिया प्रमुख जनरल आसिम मलिक के नेतृत्व में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल दोहा भेजा है। वहीं अफगान पक्ष के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल शनिवार को पहुंचने वाला है। यह घटना उस 48 घंटे के अस्थायी युद्धविराम के ठीक बाद हुई है, जो बुधवार शाम को प्रभावी हुआ था और हाल ही में दोहा वार्ता के समापन तक बढ़ा दिया गया था। तालिबान अधिकारियों ने हमलों को "युद्धविराम का उल्लंघन" करार देते हुए प्रतिशोध की चेतावनी दी है, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि ये सटीक हवाई हमले अफगानिस्तान से संचालित होने वाले आतंकी समूहों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर किए गए थे। कैसे भड़का विवाद? पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर संघर्ष की जड़ें गहरी हैं, लेकिन हालिया दौर 11 अक्टूबर को शुरू हुआ जब अफगान बलों ने कुर्रम जिले में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर गोलीबारी की। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान के कंधार और हेलमंद प्रांतों में ड्रोन हमले किए, जिसमें 19 तालिबान लड़ाकों की मौत का दावा किया गया। तालिबान ने इसे "सीमा उल्लंघन" बताते हुए पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, संघर्ष में उसके 23 सैनिक शहीद हुए। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, अब तक के संघर्ष में कम से कम 18 लोग मारे गए और 360 घायल हुए हैं। कंधार के स्पिन बोल्दाक जिले में पाकिस्तानी हवाई हमले से 15 नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। स्थानीय अस्पतालों में 80 से अधिक घायलों का इलाज चल रहा है। 17 अक्टूबर को युद्धविराम बढ़ाने के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान ने पक्तिका प्रांत के अर्गुन और बरमल जिलों में हमले किए। तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी को बताया, "पाकिस्तान ने युद्धविराम तोड़ा और पक्तिका में तीन स्थानों पर बमबारी की। अफगानिस्तान जवाब देगा।" प्रांतीय अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, हमलों में 10 नागरिक मारे गए, जिनमें दो बच्चे शामिल हैं, और 12 अन्य घायल हुए। इनमें 3 स्थानीय क्रिकेटर भी मारे गए, जो उर्गुन जिले लौट रहे थे। अफगान क्रिकेट बोर्ड के प्रवक्ता सैयद नसीम सादात ने इसकी पुष्टि की है। दोहा वार्ता: शांति की उम्मीद या नया संकट? दोहा में वार्ता कतर की मध्यस्थता में हो रही है, जो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को कहा, "हम काबुल के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे हमारी सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लें। इन आतंकियों ने हमारे नागरिकों, सेना और पुलिस को निशाना बनाया है। हमारी धैर्य की सीमा पार हो चुकी है।" उन्होंने अफगानिस्तान को टीटीपी जैसे समूहों को शरण देने का आरोप लगाया। तालिबान सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है और पाकिस्तान पर "गलत सूचना फैलाने" का इल्जाम लगाया है। अफगान गृह मंत्री खलीफा सिराजुद्दीन हक्कानी ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात में कहा कि अफगानिस्तान पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। सीमा पर स्थिति: तनाव बरकरार सीमा पर हालात नाजुक बने हुए हैं। चमन जिले के निवासी नजीबुल्लाह खान ने बताया, "लोगों की जान पर बनी है। गोलियां घरों में गिर रही हैं।" स्पिन बोल्दाक में तालिबान लड़ाके टैंकों पर सवार होकर गश्त कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी सेना ने डुरंड लाइन पर सतर्कता बढ़ा दी है। युद्धविराम के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहरा है।

वंदे भारत स्लीपर की पहली झलक वायरल: अंदर का लुक देगा एअरलाइन का एहसास!

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे यात्रियों को एक और बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। अब तक दिन की यात्राओं के लिए तेज़ और लग्ज़री विकल्प के तौर पर पहचानी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही स्लीपर कोच वर्जन के रूप में लॉन्च होने जा रही है। यह वर्जन खासतौर पर लंबी दूरी की रात की यात्राओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है – जहां यात्रियों को सिर्फ गंतव्य ही नहीं, बल्कि सफर में भी सुकून मिलेगा। वंदे भारत स्लीपर: नयी यात्रा संस्कृति की शुरुआत साल 2019 में वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत ने भारतीय रेलवे को स्पीड और कंफर्ट के नए स्तर पर पहुंचा दिया था। अब वही अनुभव रात की ट्रेनों में भी मिलने वाला है। स्लीपर वर्जन की पहली झलक हाल ही में IREE 2025 (इंटरनेशनल रेलवे इक्विपमेंट एग्जिबिशन) में देखने को मिली, जहां इसका फर्स्ट एसी कोच का प्रोटोटाइप पहली बार सार्वजनिक किया गया। इस अत्याधुनिक ट्रेन को Kinet Railway Solutions नामक इंडो-रशियन संयुक्त उपक्रम ने डिज़ाइन किया है, जबकि निर्माण का ज़िम्मा BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) ने संभाला है।    प्रो-प्रेमियम अनुभव: क्या मिलेगा यात्रियों को? वंदे भारत स्लीपर वर्जन को आधुनिक विमान जैसी आंतरिक बनावट दी गई है। इसमें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों का पूरा ध्यान रखा गया है। प्रमुख फीचर्स: प्राइवेट फर्स्ट क्लास केबिन्स सॉफ्ट टच स्लीपर बर्थ रीडिंग लाइट, चार्जिंग पॉइंट, और बॉटल होल्डर स्वचालित स्लाइडिंग दरवाज़े हवाई जहाज जैसे इंटीरियर वाई-फाई और डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम फायर-रेसिस्टेंट वॉल्स और एडवांस क्रैश बफर सिस्टम   स्पीड और क्षमता: तेज़ रफ्तार, अधिक सुविधा ऑपरेशनल स्पीड: 160 किमी/घंटा धिकतम स्पीड: 180 किमी/घंटा यात्रियों की क्षमता: लगभग 1,128 कुल कोच: 16 (फर्स्ट एसी, सेकेंड एसी, थर्ड एसी) टेस्टिंग और सुरक्षा: लॉन्च से पहले कठोर जांच कोचों के सार्वजनिक संचालन से पहले RDSO (Research Designs and Standards Organisation) द्वारा ट्रेन का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। सुरक्षा, स्थायित्व और प्रदर्शन जैसे सभी मापदंडों पर ट्रेन को परखा जाएगा। हरी झंडी मिलने के बाद ही यह सेवा में उतरेगी। पहला रूट: दिल्ली से पटना? हालांकि रेलवे की ओर से अभी तक आधिकारिक रूट घोषित नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली–पटना रूट पर इसकी पहली सेवा शुरू होने की संभावना है। अनुमानित टाइमिंग के मुताबिक, ट्रेन पटना से रात 8 बजे चलेगी और सुबह 7:30 बजे दिल्ली पहुंचेगी। इस सफर के दौरान छोटे स्टेशनों पर 2–3 मिनट और बड़े स्टेशनों पर थोड़ी देर अधिक रुकने की योजना है, जैसे दिल्ली कैंट, जयपुर आदि। मेक इन इंडिया: कहां बन रही है ट्रेन? निर्माण स्थल: लातूर, महाराष्ट्र उत्पादन कंपनी: BEML टेक्निकल सपोर्ट: ICF, चेन्नई कुल ऑर्डर: 120 ट्रेनों का कॉन्ट्रैक्ट, लागत लगभग $6.5 बिलियन (₹54,000 करोड़)   किराया कितना होगा? वंदे भारत स्लीपर का किराया राजधानी एक्सप्रेस से 10–15% ज्यादा हो सकता है। किराया क्लास और रूट के अनुसार अलग-अलग तय किया जाएगा। हालांकि, रेलवे इसे प्रीमियम लग्ज़री सेवा बनाना चाहता है—जिसमें आधुनिक सुविधा और कम समय दोनों का फायदा यात्री को मिलेगा। क्या कहता है रेलवे का विज़न? रेलवे के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर भारत में रात की ट्रेनों की परिभाषा बदलने वाली है। यह उन यात्रियों के लिए डिजाइन की गई है जो समय, सुविधा और टेक्नोलॉजी—तीनों से समझौता नहीं करना चाहते।

राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: यूपी में शुरू हुई औद्योगिक क्रांति, दशक भर पहले कोई सोच नहीं सकता था

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि दस साल पहले सोचा भी नहीं जा सकता था कि उत्तर प्रदेश इस तरह औद्योगिक क्रांति की शुरुआत करेगा। लखनऊ में ‘पीटीसी इंडस्ट्रीज' के भ्रमण के बाद यहां ‘टाइटेनियम' और ‘सुपर एलॉयज' सामग्री संयंत्र के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि यह (पीटीसी) निजी क्षेत्र की पहली निर्माता इकाई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उद्घाटन उत्तर प्रदेश की धरती पर हो रहा है। आज से लगभग दस साल पहले यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि उत्तर प्रदेश इस तरह की औद्योगिक क्रांति की शुरुआत करेगा।'' सिंह ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में ऐसी औद्योगिक क्रांति होगी, इसकी तो हम लोग कल्पना भी नहीं करते थे। सारा माहौल बनाने में हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जो मुख्य भूमिका निभाई है, उसके लिए मैं प्रशंसा करता हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘आज नयी तकनीक आ रही हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसमें उपयोग होने वाली सामग्री का हम उत्पादन करें, क्योंकि इसके बिना हम तकनीकी प्रगति सुनिश्चित नहीं कर सकते। पीटीसी का प्रयास हमारे लिए बहुत ही सराहनीय है।'' रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमने देखा है कि आजादी के बाद से कई दशकों तक हमारे रक्षा क्षेत्र और ‘एयरोस्पेस' कार्यक्रम के लिए जिस उन्नत सामग्री और तकनीक की आवश्यकता थी, उसके लिए हम दुनिया के दूसरे देशों पर निर्भर रहते थे।'' उन्होंने कहा कि इसके चलते स्वाभाविक था कि रक्षा क्षेत्र में हमारी गति जिनती तेज होनी चाहिए थी, उतनी नहीं हो पाई। सिंह ने कहा, ‘‘आज यह जो परियोजना लखनऊ में शुरू हो रही है, वह पूरी कहानी को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, ऐसा मेरा पक्का विश्वास है।'' योगी की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘जो देश की राजनीतिक परिस्थितियों को कम जानने वाला होगा, उससे भी कानून-व्यवस्था पर सवाल किया जाए तो हर व्यक्ति कहेगा कि उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे बेहतर है। अब यहां माहौल पूरी तरह बदल चुका है।'' रक्षा मंत्री ने दावा किया, ‘‘उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बहुत मजबूत है और निवेशकों का आत्मबल भी बहुत मजबूत है, अब वे घबराते नहीं हैं, इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को जाता है। इनके अंदर विकास की एक नयी सोच है।'' उन्होंने कहा कि आज देश-विदेश से निवेशक उत्तर प्रदेश में आकर विकास की एक नयी कहानी लिख रहे हैं। कुछ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में आयोजित हुए निवेशक सम्मेलन ने दिखा दिया था कि उत्तर प्रदेश अब देश का ‘‘विकास इंजन'' बनने जा रहा है। सिंह ने कहा, ‘‘इसी माहौल का असर है कि पीटीसी ने भी लखनऊ को ही चुना क्योंकि यहां शासन और प्रशासन मिलकर उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं।'' रक्षा मंत्री ने ‘पीटीसी इंडस्ट्रीज' के निदेशक सचिन अग्रवाल और उनकी पत्नी स्मिता अग्रवाल के प्रयासों की सराहना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में ‘पीटीसी इंडस्ट्रीज' के भ्रमण के बाद संयंत्र के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के विकास में किए जा रहे नए प्रयोगों और रक्षा मंत्री के लखनऊ के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी चर्चा करते हुए दोनों की सराहना की। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद थे।