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‘लड़ो या मर जाओ’ नारे के बीच लंदन में विरोध तेज, मस्क ने बढ़ाई आग

लंदन ब्रिटेन में इमिग्रेशन के खिलाफ आंदोलन की आग विकराल रूप ले चुकी है। शनिवार को लंदन में एंटी इमिग्रेशन कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में लाखों लोग सड़कों पर उतर पड़े। इसी बीच अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भी आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि अब ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों के पास केवल दो विकल्प हैं, लड़ो या मर जाओ। एलन मस्क ने कहा कि ब्रिटेन का पहले से ही क्षरण शुरू हो गया है और आने वाले समय में यह पूरे देश के विनाश का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर माइग्रेशन की वजह से संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ी हिंसा होने वाली है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के पास केवल लड़ने या मरने का विकल्प शेष है। एलन मस्क ने कहा, मेरा यही संदेश है कि हिंसा की आग तुम तक पहुंचेगी जरूर। ऐसे में तुम्हें लड़ना होगा। तुम चाहो या ना पाओ, हिंसा होकर रहेगी। एलन मस्क ने कहा, मुझे लगता है कि अब कीर स्टार्मर की अगुआई वाली लेबर सरकार को गिराने की जरूरत है। आपेक पास चार साल का वक्त नहीं है। आने वाले चुनाव में अभी बहुत वक्त है। पहले ही कुछ होना चाहिए। संसद भंग होनी चाहिए और दोबारा वोटिंग होनी चाहिए। मस्क ने कहा, हमारे दोस्त चार्ली किर्क को मार दिया गया और वामपंथी इसका जश्न मना रहे हैं। हमें एक मिनट ठहरकर सोचना होगा कि हिंसा रोकने का कोई उपाय नहीं है। ऐसे में लड़ने के लिए तैयार रहना ही एक मात्र रास्ता है। लंदन की इस रैली को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा का आह्वान बताया गया, लेकिन इस दौरान आव्रजन का मुद्दा छाया रहा। प्रदर्शनकारियों ने बार-बार 'हमें अपना देश वापस चाहिए' जैसे नारे लगाए।इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प होने की भी खबरें आईं।रॉबिन्सन यूनाइटेड किंगडम में एक प्रमुख दक्षिणपंथी नेता हैं और इंग्लिश डिफेंस लीग (ईडीएल) का नेतृत्व करते हैं जो मुख्य रूप से प्रवासन के मुद्दों से संबंधित है। बता दें कि हाल ही में नेपाल में दो दिन के आंदोलन ने ही वहां की वामपंथी सरकार उखाड़कर फेंक दी है। अब ब्रिटेन के इस प्रदर्शन को भी नेपाल जैसा ही बताया जा रहा है।

नया नियम: लोन डिफॉल्ट पर बैंक कर सकेंगे आपके मोबाइल को लॉक — जानें क्या होगा असर

मुंबई  लोन पर लिए गए मोबाइल फोन्स को जल्द ही लॉक करने की मंजूरी मिल सकती है. RBI लोन देने वालों को ये सुविधा देने पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स की मानें, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अपने फेयर प्रैक्टिस कोड्स को अपडेट कर सकता है. लोन डिफॉल्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए बैंक ये सुविधा लेंडर्स को दे सकता है.  इसके बाद से लोगों की डेटा प्राइवेसी और अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. 2024 में आई होम क्रेडिट फाइनेंस की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में एक तिहाई कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स को छोटे लोन पर लिया जाता है. इसमें स्मार्टफोन्स भी शामिल हैं.  1.4 अरब की आबादी वाले इस देश में 1.16 अरब मोबाइल कनेक्शन हैं. ऐसा नहीं है कि पहले लेंडर्स पहले ऐसा नहीं करते थे. पहले भी कई लेंडर्स लोन पर लिए गए फोन्स को लॉक करने के लिए ऐप का इस्तेमाल करते थे. पिछले साल RBI ने लेंडर्स की प्रैक्टिस पर रोक लगा दिया था. लोन ना चुकाने पर लेंडर्स कंज्यूमर्स का फोन लॉक कर देते थे.  RBI दे सकता है मंजूरी इसके लिए वे एक ऐप का इस्तेमाल करते थे, जो फोन में इंस्टॉल किया जाता था. लेंडर्स से बातचीत के बाद RBI इस प्रक्रिया को मंजूरी दे सकता है. इसके लिए केंद्रीय बैंक एक गाइडलाइन जारी कर सकता है, जो आने वाले कुछ महीनों में जारी होगी.  बैंक चाहता है कि छोटे लोन देने वालों के पास भी उन्हें रिकवर करने की शक्ति हो. साथ ही बैंक का फोकस लोगों की डेटा को सुरक्षित रखना भी है. इसलिए बैंक एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार कर रहा है, जिससे लेंडर्स को यूजर्स का डेटा एक्सेस करने से रोका जा सके. हालांकि, इस पूरे मामले में RBI ने आधिकारिक तौर पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है.  कैसे लॉक होगा लोन पर चल रहा फोन?  इसके लिए बैंक और NBFC एक ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप को डिवाइस खरीदने के वक्त कंज्यूमर के फोन में इंस्टॉल किया जाएगा. Google Device Lock Controller, Samsung Finance+ ऐप (सिर्फ सैमसंग यूजर्स के लिए) और दूसरे ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.  कब लॉक किया जाएगा फोन?  रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐप को इंस्टॉल करने से पहले लेंडर्स को कंज्यूमर की परमिशन लेनी होगी. लेंडर्स किसी भी यूजर के पर्सनल डेटा को एक्सेस नहीं कर पाएंगे. किसी फोन को तभी लॉक किया जा सकेगा, जब कंज्यूमर्स लोन अमाउंट नहीं चुकाएंगे.

‘कुशल प्रशासक’ वाला बयान बना बवाल, ABVP ने सुखाड़िया विवि में किया प्रदर्शन

नई दिल्ली उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा के हालिया बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को बप्पा रावल सभागार में आयोजित सेमिनार में मिश्रा ने कहा, “हम इतिहास में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे शासकों को सुनते हैं। हम कई अच्छे राजाओं को याद रखते हैं, और कुछ औरंगजेब जैसे भी थे, जो एक कुशल प्रशासक था।” एबीवीपी का विरोध इस टिप्पणी पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध जताया। एबीवीपी उदयपुर महानगर मंत्री पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ऐतिहासिक तथ्यों पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने इस बयान को विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए अनुचित बताया। “विकसित भारत 2047” विषय पर सेमिनार प्रो. मिश्रा यह बयान “भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में दे रही थीं। कार्यक्रम गुरु नानक कन्या स्नातक महाविद्यालय और एसोसिएशन ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर भी जोर दिया और कहा कि भारतीय परंपराएं जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती हैं। विवाद का केंद्र बनी एक टिप्पणी हालांकि उनका भाषण मुख्य रूप से सकारात्मक बिंदुओं पर केंद्रित था, लेकिन औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ कहने वाली टिप्पणी चर्चा का केंद्र बन गई। शहर के शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान शैक्षणिक मंचों पर संवेदनशील होते हैं और अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है।  

2 सेकेंड से भी कम समय में एक्टिव होगा ‘कवच’, अब प्लेन क्रैश का डर खत्म?

नई दिल्ली कुछ महीने पहले अहमदाबाद में एअर इंडिया विमान हादसे में कई लोगों की जान चली गई थी। इस घटना से सबक लेते हुए इंजीनियर्स ने एक ऐसा कॉन्सेप्ट तैयार किया है, जिससे कोई विमान कभी भी क्रैश नहीं होगा और हवाई यात्रियों की जान बचाने में भी कारगर साबित हो सकता है। इस कॉन्सेप्ट को 'प्रोजेक्ट रीबर्थ' नाम दिया गया है और इसे दुबई के बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स पिलानी) के दो इंजीनियरों एशेल वसीम और धरसन श्रीनिवासन ने तैयार किया है। पारंपरिक सुक्षा उपायों से अलग है ये सिस्टम यह पारंपरिक सुरक्षा उपायों से अलग है और इसे जेम्स डायसन अवॉर्ड के लिए फाइनल लिस्ट में चुना गया है। इस अंतरराष्ट्रीय डिजायन पुरस्कार की घोषणा 5 नवंबर को की जाएगी। क्रैश सर्वाइवल सिस्टम आकस्मिक दुर्घटना से यात्रियों की जान बचाएगा। क्या है इस सिस्टम की खासियत? इस सिस्टम की खासियत है कि ये ऊंचाई, गति, दिशा और आग लगने की स्थिति और पायलट की प्रतिक्रिया जैसे जरूरी कारकों पर लगातार पैनी नजर रखता है। इसके अलावा, अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को पता चलता है कि 3 हजार फीट से कम ऊंचाई पर किसी घटना का जरा भी अंदेशा होता है और उसे टाला नहीं जा सकता है तो ऐसी स्थिति में यह सिस्टम अपने आप एक्टिव हो जाता है। दो सेकेंड से भी कम समय में विमान के अगले हिस्से, बीच के हिस्से और सबसे पीछे वाले हिस्से, तीनों जगह से बड़े-बड़े 'कवच' (विशाल एयरबैग) बाहर निकलेंगे। ये एयरबैग लेयर्ड क्लोथ से बने होते हैं, जो विमान के मुख्य हिस्से को सुरक्षित रखते हैं।

दादा-दादी की संपत्ति पर पोते-पोतियों का अधिकार नहीं, जब तक माता-पिता जीवित हैं – दिल्ली HC

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोता या पोती अपने माता-पिता के जीवित रहते संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकते हैं। यह आदेश अदालत ने एक सिविल याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें याचिकाकर्ता कृतिका जैन ने अपने पिता राकेश जैन और चाची नीना जैन के खिलाफ दिल्ली की एक संपत्ति में एक चौथाई हिस्सेदारी का दावा किया था। न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया कि कृतिका के दावे में कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कृतिका की दादी-पोती का दर्जा प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी के रूप में नहीं आता, जब तक उसके माता-पिता जीवित हैं। कोर्ट ने कहा कि कृतिका के दिवंगत दादा पवन कुमार जैना की ओर से जो संपत्ति खरीदी गई थी, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा आठ के तहत केवल उनकी विधवा और संतान में ही विभाजित होती है। अदालत ने कहा कि वर्ष 1956 के बाद से प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारी की संपत्ति उनका व्यक्तिगत स्वामित्व बन गई है, जो संयुक्त परिवार की संपत्ति नहीं मानी जाएगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि यह निर्णय समाज में व्याप्त भ्रांति को दूर करता है, जहां यह माना जाता था कि पोते-पोतियां अपने दादा-दादी की संपत्ति पर माता-पिता के रहते ही हकदार बन जाते हैं।

लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि बताया, पीएम मोदी का नेपाल को सशक्त संदेश

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कर्की को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण का चमकदार उदाहरण है। पीएम मोदी ने इंफाल में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते साझा इतिहास, आस्था और संस्कृति पर टिके हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के लोगों के साथ इस परिवर्तन के समय मजबूती से खड़ा है। पीएम मोदी ने कहा, "मैं 140 करोड़ भारतीय की ओर से कर्की को बधाई देता हूं। मुझे भरोसा है कि वह नेपाल में शांति, स्थिरता और विकास का रास्ता खोलेंगी।"   सुशीला कर्की ने संभाली कमान शुक्रवार रात सुशीला कर्की ने नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वह नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी रह चुकी हैं। उनकी नियुक्ति ने नेपाल की राजनीति में चल रही अनिश्चितता को खत्म किया। केपी शर्मा ओली की सरकार को सोशल मीडिया बैन के खिलाफ बड़े आंदोलन के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। राष्ट्रपति पौडेल, सेना के शीर्ष अधिकारियों और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं की बैठक के बाद कर्की को अंतरिम सरकार की कमान सौंपी गई। पीएम मोदी ने नेपाल की जनता की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में लोग राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद इमारतों को साफ और रंग रोगन कर रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? उन्होंने कहा, "मैं नेपाल की जनता को बधाई देता हूं जिन्होंने कठिन हालात में भी लोकतंत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा।" पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत और नेपाल साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं और नई दिल्ली नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा व स्थिरता में हर कदम पर उसके साथ खड़ी है।  

सुशीला कार्की के नेतृत्व में नेपाल का विकास युग शुरू, युवाओं में जोश

काठमांडू  जेन-जी के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन हो गया है। सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री पद की कमान सौंप दी गई है। हिंसक विरोध प्रदर्शन से उबरने के बाद देश की जनता को नई प्रधानमंत्री से बहुत उम्मीदें हैं। इसी को लेकर नेपाल के कई युवाओं ने मीडिया से बातचीत में अपने विचार साझा किए। उन्होंने विश्वास जताया कि अब देश से भ्रष्टाचार पूरी तरह से समाप्त होगा। निश्चित तौर पर सुशीला कार्की प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने की दिशा में सक्रिय रहेंगी। दिपेंद्र थामा ने सुशीला कार्की को मौजूदा समय में नेपाल के लिए बहुत बड़ी उम्मीद करार दिया। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि सुशीला कार्की अन्य भ्रष्ट नेताओं से अलग और कई मामलों में बेहतर हैं। हमें उम्मीद है कि वह आगामी दिनों में देश को आगे बढ़ाने की दिशा में संकल्पित होकर काम करेंगी। इसके अलावा, हम सभी युवा अब नेपाल को आगे बढ़ाने की दिशा में पूरी मेहनत कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस दिशा में हम लोगों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़े। हम लोग दोबारा से नेपाल को विकास के पथ पर अग्रसर करने का काम करेंगे, हमें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि निसंदेह इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि इस विरोध प्रदर्शन की वजह से नेपाल के विकास की गति धीमी हो गई है। स्थिति अव्यवस्थित हो चुकी है, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि अगर हम सभी युवा एक साथ आ जाएं तो हम लोग दोबारा से अपने राष्ट्र को खड़ा कर सकेंगे। इस बीच, जब उनसे यह सवाल किया गया कि नेपाल में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन के बाद किस तरह के बदलाव देख रहे हैं तो दिपेंद्र थामा ने कहा कि इस बात को बिल्कुल खारिज नहीं किया जा सकता है कि विरोध प्रदर्शन के बाद देश में अब चौतरफा सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। अब जितने भी भ्रष्टाचारी नेता थे, उन लोगों में खौफ है। उन्हें इस बात का डर है कि अगर वे कोई गलत काम करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें देश के युवाओं के रोष का सामना करना पड़ सकता है। एक अन्य युवा ने सुशीला कार्की की तारीफ की और उन्हें देश के लिए अच्छा नेता बताया। उन्होंने कहा कि सुशीला कार्की के नेतृत्व में देश के विकास को नई गति मिलेगी। निश्चित तौर पर वह हमारे देश के लिए बेहतर साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर नेपाल में विकास की कई संभावनाएं हैं, लेकिन यह अफसोस की बात है कि देश के युवा नशे और नेता भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इसी वजह से आज की तारीख में देश की यह स्थिति बनी हुई है। अगर नेपाल के नेता भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होते तो आज नेपाल की ऐसी स्थिति नहीं होती। 

सरकार का अनोखा कदम: भ्रष्टाचार से निपटने के लिए बनाई AI मंत्री

अल्बानिया दुनिया में पहली बार किसी देश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से एक वर्चुअल मंत्री की नियुक्ति की है। यूरोपीय देश अल्बानिया ने भ्रष्टाचार से निपटने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए एक AI मंत्री को अपनी सरकार में शामिल किया है। इस वर्चुअल महिला मंत्री का नाम ‘डिएला’ है, जिसका मतलब होता है ‘सूर्य’। प्रधानमंत्री एडी रामा ने खुद डिएला की घोषणा करते हुए बताया कि वह कैबिनेट की सदस्य तो होंगी, लेकिन इंसानों की तरह शारीरिक रूप से मौजूद नहीं रहेंगी। डिएला एक AI-बेस्ड वर्चुअल बॉट हैं, जो सरकारी ठेकों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगी। सरकार का दावा है कि इस पहल से भ्रष्टाचार पर 100% रोक लगाने में मदद मिलेगी। पहले डिजिटल असिस्टेंट, अब मंत्री बनीं डिएला डिएला को सबसे पहले जनवरी 2025 में ई-अल्बानिया प्लेटफॉर्म पर AI डिजिटल असिस्टेंट के रूप में पेश किया गया था। उसे पारंपरिक अल्बानियाई पोशाक पहने एक महिला के रूप में डिज़ाइन किया गया है। उसका मुख्य काम नागरिकों को ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और दस्तावेजों तक पहुंचाने में मदद करना था। अब तक डिएला की मदद से:     36,600 डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं,     और लगभग 1,000 सरकारी सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई गई हैं। भ्रष्टाचार से जूझ रहा है अल्बानिया अल्बानिया लंबे समय से सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों के पैसों को वैध करने जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है। जानकार मानते हैं कि यह कदम न सिर्फ देश के अंदर व्यवस्था सुधारने की कोशिश है, बल्कि इसका संबंध यूरोपीय संघ (EU) की सदस्यता की दिशा में की जा रही कोशिशों से भी है। क्या AI मंत्री संविधान के खिलाफ है? जब राष्ट्रपति बाजराम बेगाज से पूछा गया कि क्या एक AI मंत्री की नियुक्ति संविधान के अनुरूप है, तो उन्होंने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। हालांकि, प्रधानमंत्री रामा की सोशलिस्ट पार्टी ने हाल ही में हुए चुनावों में 140 में से 83 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। इसलिए वह अकेले ही सरकार चला सकते हैं और सामान्य कानून पास कर सकते हैं। लेकिन संविधान में बदलाव के लिए उन्हें 93 सीटों की जरूरत होगी। EU सदस्यता की ओर बढ़ता अल्बानिया अल्बानिया की सोशलिस्ट पार्टी ने वादा किया है कि वह देश को 2027 तक यूरोपीय संघ का सदस्य बनवाएगी। एक साल पहले EU सदस्यता के लिए बातचीत शुरू हो चुकी है। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि देश अभी इसके लिए तैयार नहीं है। साफ है कि डिएला की नियुक्ति केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है। अब देखना यह है कि क्या AI तकनीक वाकई अल्बानिया को भ्रष्टाचार से निजात दिला सकेगी, या यह सिर्फ एक प्रचार अभियान बनकर रह जाएगी।  

विदाई से पहले मानसून का तांडव: 13-18 सितंबर इन राज्यों में बर्फीली बारिश की संभावना

नई दिल्ली  भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून की विदाई से पहले देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 13 से 19 सितंबर तक पूर्वोत्तर, दक्षिण, पूर्वी, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत में तीव्र वर्षा और तेज हवाओं का अनुमान है। उत्तराखंड, बिहार, असम और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। आइए जानते हैं IMD की ताजा रिपोर्ट। पूर्वोत्तर भारत में बहुत भारी बारिश IMD के अनुसार, 13 से 18 सितंबर तक अरुणाचल प्रदेश में भारी वर्षा के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 से 16 सितंबर तक बहुत भारी बारिश का अनुमान है। खासकर 13 सितंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में, जबकि 14-15 सितंबर को असम और मेघालय में भारी वर्षा होगी। अरुणाचल में 18-19 सितंबर को फिर से भारी बारिश की संभावना है।   दक्षिण भारत में तेज हवाओं के साथ बारिश दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 13 और 16-19 सितंबर को तमिलनाडु में भारी बारिश और 30-40 किमी/घंटे की तेज हवाएं चलेंगी। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 13-14 सितंबर, रायलसीमा में 13 सितंबर और तेलंगाना में 13-17 सितंबर तक भारी बारिश होगी। 13 सितंबर को तटीय आंध्र प्रदेश में बहुत भारी वर्षा संभावित है। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 13-16 सितंबर तक भारी बारिश होगी। तटीय आंध्र और रायलसीमा में अगले 5 दिनों तक 30-50 किमी/घंटे की तेज हवाएं चलने की चेतावनी है। पूर्वी और मध्य भारत में बाढ़ का खतरा पूर्वी और मध्य भारत में 14-16 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ और ओडिशा में 13-15 सितंबर, छत्तीसगढ़ में 13-16 सितंबर और बिहार में 13-17 सितंबर तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 13-19 सितंबर और झारखंड में 15-17 सितंबर तक भारी वर्षा होगी। अंडमान और निकोबार में 14 और 17-19 सितंबर को बारिश का अनुमान है। पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा पश्चिम भारत में कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 13-15 सितंबर को हल्की से मध्यम बारिश होगी, जिसमें 14-15 सितंबर को कोंकण और गोवा में बहुत भारी वर्षा संभावित है। उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तराखंड में 13 सितंबर को बहुत भारी बारिश, हिमाचल प्रदेश में 13-14 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 15-19 सितंबर तक बारिश होगी। कल की बारिश का रिकॉर्ड पिछले 24 घंटों (12 सितंबर 8:30 बजे से 13 सितंबर 8:30 बजे तक) में उत्तराखंड के हरिपुर में 25 सेमी, नरेन्द्रनगर में 23 सेमी और मसूरी में 19 सेमी बारिश दर्ज की गई। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बरोभिषा और चेल में 16 सेमी, मराठवाड़ा के पूर्णा में 16 सेमी और पूर्वी मध्य प्रदेश के बिलहरी में 10 सेमी वर्षा हुई।

अच्छा रिश्ता खो दिया – ट्रंप ने भारत को टैरिफ लगाने पर व्यक्त की चिंता

न्यूयार्क  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ (शुल्क) लगाना आसान काम नहीं है और यह ‘‘भारत के साथ दरार पैदा करता है।'' ट्रंप ने शुक्रवार को ‘फॉक्स एंड फ्रेंड्स' को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘देखिए, भारत उनका (रूसी तेल का) सबसे बड़ा ग्राहक है। मैंने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया क्योंकि वे रूस से तेल खरीद रहे हैं। यह कोई आसान काम नहीं है। यह एक बड़ी बात है और इससे भारत के साथ दरार पैदा होती है।'' अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछा गया था कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर शिकंजा कसने का क्या मतलब है, जिसके जवाब में ट्रंप ने यह कहा। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं यह पहले ही कर चुका हूं। मैंने बहुत कुछ किया है।'' ट्रंप ने कहा, ‘‘और याद रखें कि यह हमारी समस्या से कहीं अधिक यूरोप की समस्या है।'' साक्षात्कार में, ट्रंप ने अपने इस दावे को भी दोहराया कि उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में अब तक सात संघर्षों को सुलझाया है।   ट्रंप ने कहा, ‘‘मैंने सात संघर्ष सुलझाए हैं। मैंने कई संघर्ष सुलझाए, जिनमें पाकिस्तान और भारत भी शामिल हैं, साथ ही बड़े संघर्ष, जिनमें से कुछ अनसुलझे थे, जैसे कांगो और रवांडा। मैंने उन्हें सुलझाया। यह 31 सालों से चल रहा था, लाखों लोग मारे गए। मैंने ऐसे संघर्ष सुलझाए जो अनसुलझे थे।'' रूस से कच्चे तेल की खरीद का बचाव करते हुए, भारत यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से प्रेरित है।