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फिलिस्तीन की स्वतंत्रता के समर्थन में भारत की मजबूत आवाज, मिले स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा

न्यूयॉर्क  संयुक्त राष्ट्र महासभा में  ‘न्यूयॉर्क घोषणा’ पर ऐतिहासिक मतदान हुआ. भारत ने फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र की मांग के पक्ष में जोरदार समर्थन जताया. इस घोषणा के पक्ष में 142 देशों ने वोट दिया, जबकि 10 ने विरोध किया और 12 देशों ने मतदान से परहेज किया. भारत का यह रुख नया नहीं है. दशकों से भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है और हमेशा से फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र मान्यता दिलाने की कोशिशों के साथ खड़ा रहा है. इस बार भी भारत ने साफ संदेश दिया कि पश्चिम एशिया की स्थायी शांति तभी संभव है, जब फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिले. न्यूयॉर्क घोषणा क्या कहती है? ‘न्यूयॉर्क घोषणा ऑन द पीसफुल सेटलमेंट ऑफ द क्वेश्चन ऑफ फिलिस्तीन एंड द इंप्लीमेंटेशन ऑफ द टू-स्टेट सॉल्यूशन’ नामक इस प्रस्ताव को फ्रांस और सऊदी अरब ने पेश किया. इसमें कहा गया है कि गाजा युद्ध खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं और एक न्यायपूर्ण, स्थायी समाधान केवल दो-राष्ट्र फार्मूले से ही संभव है. घोषणा में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साफ शब्दों में 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों की निंदा की है. इसमें मांग की गई कि हमास सभी बंधकों को रिहा करे और गाजा से सत्ता छोड़कर अपने हथियार फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सौंप दे. भारत का स्टैंड क्या है? भारत ने इस घोषणा का समर्थन कर फिर से स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ है और फिलिस्तीन के लिए न्यायपूर्ण समाधान चाहता है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत का मानना है कि हिंसा और चरमपंथ को किनारे रखकर ही क्षेत्र में शांति लाई जा सकती है. यूरोप और अरब देशों का दबाव इस घोषणा को अरब लीग पहले ही समर्थन दे चुकी है और फ्रांस ने ऐलान किया है कि 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में वह औपचारिक रूप से फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देगा. कई अन्य यूरोपीय नेताओं ने भी इसी तरह की घोषणा का संकेत दिया है. इसे इजरायल पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. इजरायल का तीखा विरोध इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को साफ कहा कि फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा कभी नहीं मिलेगा. वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को संभवतः न्यूयॉर्क सम्मेलन में वीजा नहीं दिया जाएगा.

नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री, कर्फ्यू और निषेधाज्ञा खत्म

 काठमांडू  हिंसा, उपद्रव और आगजनी के बाद अब नेपाल में शांति लौट रही है. राजधानी काठमांडू में सेना की ओर से लगाया गया कर्फ्यू और निषेधाज्ञा आज सुबह 5 बजे से हटा दिया गया है. अंतरिम सरकार बनने के बाद सुरक्षा बलों ने हालात को देखते हुए यह फैसला लिया. हालांकि सड़कों पर सेना की मौजूदगी अभी कुछ दिन और रहने की उम्मीद है. अंतरिम सरकार की कमान पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने संभाली है. उन्होंने कल प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राजधानी की सड़कों पर अब धीरे-धीरे सामान्य माहौल लौटता दिख रहा है. स्थानीय निवासी सुमन सिवाकोटी ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि सुशीला कार्की नेपाल के लिए एक नए युग की शुरुआत करेंगी. देश को और सुरक्षित रखने के साथ विकास को आगे बढ़ाना जरूरी है.' सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल के बीरगंज में भी लोगों को उम्मीद है कि एक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार बनेगी और प्रधानमंत्री समेत तमाम मंत्री जो भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त हैं सब की संपत्ति की जांच होगी और नेपाल भ्रष्टाचार मुक्त होगा. होटल इंडस्ट्री को 25 अरब का घाटा पिछले दिनों हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा के चलते हालात बिगड़ गए थे. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है. इसमें 21 प्रदर्शनकारी, 9 कैदी, 3 पुलिसकर्मी और 18 अन्य लोग शामिल हैं. हिंसा का सबसे ज्यादा असर नेपाल की होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब दो दर्जन होटलों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं से इस सेक्टर को 25 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. पुलिस मांग रही उपद्रवियों के वीडियो नेपाल पुलिस ने देशभर में हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं को लेकर जनता से सहयोग की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि जिनके पास भी इन घटनाओं से जुड़े वीडियो या सबूत हैं, वे उन्हें साझा करें ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके. इसके लिए पुलिस ने एक आधिकारिक ईमेल जारी कर ऐसे सभी वीडियो भेजने की अपील की है. हुआ क्या था? बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था. सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनके दफ्तर में घुस गए थे और सोमवार के प्रदर्शन में हुई मौतों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे. सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध सोमवार रात को ही हटा लिया गया था. ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसा थमी नहीं और प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी दफ्तरों, राजनीतिक दलों के दफ्तरों और वरिष्ठ नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया. 1700 लोगों को आई चोटें शुक्रवार दोपहर कई मृतकों का अंतिम संस्कार काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर स्थित आर्यघाट पर बागमती नदी के किनारे किया गया. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,700 लोग घायल हुए. इनमें से लगभग 1,000 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक, काठमांडू घाटी में नेपाल पुलिस की गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं और जिन थानों व पुलिस चौकियों को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा-फोड़ा या आग के हवाले कर दिया था, वे फिर से संचालन में आ रही हैं.

रूस में जोरदार भूकंप के झटके, सुनामी की आशंका को लेकर अमेरिका-चीन सतर्क

मॉस्को  रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया है. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 7.1 दर्ज की गई और यह समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में था. वहीं, यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की तीव्रता 7.4 और गहराई 39.5 किलोमीटर बताई. आंकड़ों में अंतर के बावजूद, दोनों एजेंसियों ने इसे गहरा और शक्तिशाली भूकंप माना है. भूकंप के बाद पैसिफिक सुनामी वार्निंग सिस्टम ने संभावित सुनामी का अलर्ट जारी किया और कहा कि इस क्षेत्र में खतरा पैदा हो सकता है.  चीन के सुनामी वार्निंग सेंटर ने भी सुबह 10:37 बजे (बीजिंग समयानुसार) सूचना जारी करते हुए कहा कि भूकंप कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दर्ज किया गया है. केंद्र ने भूकंप की तीव्रता 7.1 और गहराई 15 किलोमीटर बताई. स्थानीय स्तर पर सुनामी का खतरा है. जापान ब्रॉडकास्टर ने जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के हवाले से बताया कि जापान, जो कामचटका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, ने किसी भी तरह का सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया है. सुनामी की चेतावनी पर लेटेस्ट अपडेट: पूर्वी कामचटका, रूस के पास आए भूकंप के बाद अब सुनामी का कोई खतरा नहीं है. अधिकारियों ने चेतावनी को रद्द कर दिया है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रहने के लिए सामान्य सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. भूकंप की तीव्रता और संभावित प्रभावों का अभी भी मूल्यांकन किया जा रहा है लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है. जुलाई में 8.8 तीव्रता का दर्ज किया गया था झटका यह भूकंप उसी क्षेत्र में आया है जहां जुलाई में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली झटका महसूस किया गया था. उस समय जापान, अमेरिका और कई प्रशांत द्वीपीय देशों – जैसे हवाई, चिली और कोस्टा रिका – के लिए सुनामी चेतावनियां जारी की गई थीं. पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है कामचटका  कामचटका प्रायद्वीप भूवैज्ञानिक दृष्टि से बेहद सक्रिय क्षेत्र है और इसे पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा माना जाता है. यहां आए दिन भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं. इस इलाके में बड़े स्तर पर विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं. 1952 के भूकंप से मची थी भारी तबाही साल 1952 में कामचटका को 9.0 तीव्रता के एक भीषण भूकंप ने झकझोर दिया था. यह भूकंप अब तक दर्ज किए गए सबसे ताकतवर भूकंपों में से एक माना जाता है. उस समय भूकंप के झटकों ने भारी तबाही मचाई थी और बड़े स्तर पर सुनामी भी आई थी.

नई टेंशन अलर्ट: ब्रह्मोस मिसाइल से भारत ने चीन को दिया सशक्त संदेश

नई दिल्ली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की ताकत पूरी दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखी है। इन मिसाइलों की मदद से भारत ने पाकिस्तान को महज कुछ ही दिनों में घुटने पर ला दिया। अब चीन के एक पड़ोसी देश को भारत ब्रह्मोस मिसाइलों की तीसरी खेप देने जा रहा है। यह देश फिलीपींस है। भारत की ओर से फिलीपींस को कई ब्रह्मोस मिसाइलें मिलने की वजह से चीन की टेंशन बढ़ गई है। इससे पहले, पिछले साल की शुरुआत में भारत ने चीन को पहली और फिर इस साल मिसाइलों की दूसरी खेप भेजी थी। दोनों देशों के बीच साल 2022 में 375 मिलियन डॉलर का करार हुआ था, जिसके तहत भारत की ओर से फिलीपींस को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें दी जानी थीं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस संयुक्त उद्यम के सीईओ और प्रबंध निदेशक जयतीर्थ जोशी ने इंडिया टुडे को बताया, "रॉकेट तैयार हैं। हम उन्हें समय पर डिलिवर कर देंगे।" फिलीपींस को ये मिसाइलें उस समय दी जा रही हैं, जब पिछले कुछ सालों से दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा है। चीन इस सागर पर अपना हक जमाता है, जिसकी वजह से अमेरिका जैसे देशों से भी उसका विवाद हो चुका है। फिलीपींस इन मिसाइलों को किसी भी खतरे से बचने के लिए तटीय क्षेत्रों में ही तैनात किया जाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से भी तेज उड़ती है। इससे दुश्मनों के रडार को इसे ट्रैक करने में काफी मुश्किल आती है और यह लक्ष्यों को भेदने में कामयाब रहती है। एक बार लॉन्च किए जाने के बाद मिसाइल को किसी इंसानों के इनपुट की जरूरत नहीं पड़ती है। इसकी रेंज की बात करें तो पहले यह 290 किलोमीटर तक की थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 450 से 800 किलोमीटर तक कर दिया गया है। इन्हीं मिसाइलों के जरिए ऑपरेशन सिंदूर में रावलपिंडी, सरगोधा, भोलारी और नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था।  

जापान की नेवी ने रचा इतिहास! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन 8000 KM की स्पीड से करती है वार

टोक्यो  जापान ने अपनी नेवी के जहाज से पहली बार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन फायरिंग का सफल टेस्ट कर इतिहास रच दिया है. समुद्र में तैनात टारगेट शिप पर दागे गए इस ‘शॉक वेपन’ ने साफ कर दिया कि परंपरागत तोप-गोलों का जमाना अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने खुलासा किया कि जून से जुलाई के बीच टेस्ट शिप JS Asuka से रेलगन के ट्रायल किए गए. चार तस्वीरें जारी करते हुए ATLA ने लिखा, ‘यह पहली बार है जब किसी वारशिप से रेलगन का टेस्ट किया गया और वह भी सीधे एक असली जहाज पर.’ क्या है रेलगन? रेलगन बारूद नहीं, बल्कि बिजली की ताकत से गोला दागती है. प्रोजेक्टाइल को इतनी गति मिलती है कि वह परंपरागत तोपों से कहीं अधिक दूरी और शक्ति के साथ टारगेट भेदता है. जापान की यह रेलगन करीब Mach 6.5 की स्पीड यानी आवाज की रफ्तार से साढ़े छह गुना (8,000 किलोमीटर प्रति घंटा) तक प्रोजेक्टाइल दाग सकती है. खास बात यह कि 120 लगातार फायरिंग के बाद भी बैरल की स्पीड में गिरावट दर्ज नहीं हुई. चीन और अमेरिका भी इस टेक पर लगे चीन भी इसी तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और उसके पास सतत फायरिंग के सफल टेस्ट की खबरें आई हैं, लेकिन वह इसे अब तक तैनात नहीं कर पाया है. अमेरिका ने भी एक समय रेलगन प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन 2021 में तकनीकी चुनौतियों और लागत के चलते इसे बंद कर दिया. वहीं जापान अब इस हथियार को वास्तविक तैनाती की दिशा में सबसे आगे निकल आया है. क्यों इतनी खास है यह तकनीक? डिफेंस एक्सपर्ट मसाशी मुरानो ने जापान टाइम्स को बताया कि हाई-स्पीड एंटी-शिप मिसाइलों को परंपरागत मिसाइलों से इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है. रेलगन इस चुनौती का जवाब हो सकता है. इसके दागे प्रोजेक्टाइल न सिर्फ बेहद तेज होते हैं, बल्कि पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में सस्ते भी हैं. जहां एयर डिफेंस मिसाइल की एक शॉट की कीमत करोड़ों-करोड़ होती है, वहीं रेलगन अपेक्षाकृत किफायती है. इसके अलावा, रेलगन से एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए ‘एयरबर्स्ट म्युनिशन’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हवा में ही फटकर घातक टुकड़े छोड़ते हैं. यह मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है. जापान रेलगन को सिर्फ नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहता. योजना है कि इसे जमीन पर भी तैनात किया जाए, ताकि दुश्मन के आर्टिलरी यूनिट्स को निशाना बनाया जा सके और तटीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके. ATLA अब प्रोजेक्टाइल की उड़ान स्थिरता, फायर-कंट्रोल सिस्टम और सतत फायरिंग क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी तक इसकी अधिकतम रेंज और रैपिड फायर की क्षमता उजागर नहीं की गई है.

नेपाल में सत्ता परिवर्तन: सुशीला कार्की लेंगी अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ

नेपाल  नेपाल की नई अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम तय हो गया है. सुशीला कार्की नई अंतरिम पीएम के रूप में शपथ लेंगी. गौरतलब है कि सुशीला कार्की नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस रह चुकी हैं. जेन जी के आंदोलन के समय से ही अनुमान लगाए जा रहे थे कि सुशीला कार्की को नेपाल की कार्यवाहक सरकार का प्रमुख नियुक्त किया जा सकता है. राष्ट्रपति भवन और सैन्य मुख्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सुशीला कार्की का अंतरिम सरकार का प्रमुख बनना लगभग तय माना जा रहा है. राष्ट्रपति भवन में हुई इस बैठक में सहमति बनने का दावा किया जा रहा है. ये सहमति राष्ट्रपति के अलावा प्रधान सेनापति जनरल अशोक राज सिग्देल, सुशीला कार्की, स्पीकर देवराज घिमिरे और राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहाल की उपस्थिति में बनी है. सूत्रों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा, तो कल शपथग्रहण हो सकता है. मीटिंग में संसद विघटन पर भी सहमति बन गई है. अगले  6 महीने में आम चुनाव कराना होगा. जानकारी के मुताबिक नेपाल के राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने नेपाली कांग्रेस और माओवादी के नेताओं के साथ परामर्श किया है. सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने को लेकर इन नेताओं से चर्चा की गई है.  राष्ट्रपति का प्रमुख दल के नेताओं से संवाद हुआ है. इसमें माओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड, कांग्रेस उपसभापति पूर्ण बहादुर खड़का, महामंत्री गगन थापा, पूर्व प्रधानमंत्री माधव शामिल हैं. हालांकि प्रमुख दलों ने संविधान विघटन को लेकर सहमति नहीं दी है.  72 साल की सुशीला कार्की सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं और Gen-Z युवाओं के प्रतिनिधि चाहते हैं कि उन्हें ही फिलहाल के लिए अंतरिम सरकार की ज़िम्मेदारी सौंपी जाए और अगले 6 महीने के अंदर नेपाल में संसदीय चुनाव कराए जाएं. बताया जा रहा है कि नेपाल के युवा इसके लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि वो उम्रदराज़ नेताओं से तंग आ चुके हैं और किसी भी कीमत पर 73 साल के ओली को हटाकर 72 साल की सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री नहीं बनाया जा सकता. बता दें कि नेपाल ने Gen-Z के आंदोलन के बाद तख्तापलट हो गया है. अब कवायद अंतरिम सरकार बनाने को लेकर जारी है. इसी क्रम आज देर रात अहम बैठक बुलाई गई. वहीं, नेपाल में हुए विनाशकारी विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. अब हर कोई यही सोच रहा है कि नेपाल किस रास्ते पर चलेगा? नेपाल की आबादी करीब 3 करोड़ के आस-पास है और अब Gen-Z ने कहा है कि उनका मकसद नेपाल के संविधान को मिटाना नहीं, बल्कि संसद को भंग करना है. लेकिन सवाल यही है कि सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए Gen-Z ने जो रास्ता अपनाया, और नेपाल को जो नुकसान हुआ है, क्या वो इससे उबर पाएगा?

नए सभापति सीपी राधाकृष्णन: शपथ ग्रहण कर किया कार्यभार ग्रहण

नई दिल्ली सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभाला। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने शुक्रवार को औपचारिक रूप से राज्यसभा के सभापति का पदभार ग्रहण किया। साथ ही एक्स पर सीपी राधाकृष्णन के पदभार ग्रहण करते हुए तस्वीरें भी शेयर की गई हैं। इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रपिता और उनके सत्य एवं अहिंसा के शाश्वत आदर्शों का सम्मान किया। उन्होंने सदैव अटल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राधाकृष्णन ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय के स्मारक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने किसान घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनको नमन किया। साथ ही उन्होंने संसद भवन स्थित प्रेरणा स्थल पर महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने संसद भवन परिसर में एक पौधा भी लगाया और देश की समृद्ध विरासत एवं एक सतत भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने जगदीप धनखड़ की जगह ली है। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत थे। सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे।

सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक: प्रदूषण रोकने के लिए पूरे भारत में लागू हों सख्त नियम

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर शुक्रवार को कड़ी टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई ने कहा कि अगर दिल्ली-एनसीआर (एनसीआर) के लोगों को स्वच्छ हवा का अधिकार है, तो दूसरे शहरों के निवासियों को क्यों नहीं? उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियां सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रह सकतीं, बल्कि पैन-इंडिया स्तर पर लागू होनी चाहिए। बेंच की सुनवाई के दौरान, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे, सीजेआई बी.आर. गवई ने पटाखा निर्माताओं की उस याचिका पर विचार किया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरे साल के लिए लगे प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी। बेंच ने कहा, "हम दिल्ली के लिए अलग नीति नहीं बना सकते, सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां देश का संभ्रांत वर्ग रहता है।" सीजेआई ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया, "मैं पिछले साल सर्दियों में अमृतसर गया था। वहां प्रदूषण की स्थिति दिल्ली से भी बदतर थी। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो यह पूरे देश में लगना चाहिए।" कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब एमिकस क्यूरिए एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की भयावह स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक लैंडलॉक्ड शहर है, जहां हवा में प्रदूषक फंस जाते हैं, जिससे स्थिति चोकिंग लेवल तक पहुंच जाती है। लेकिन, सिंह ने स्वीकार किया कि एलीट वर्ग प्रदूषण के चरम दिनों में शहर छोड़ देता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या नीतियां सिर्फ अमीरों के लिए बनाई जा रही हैं? बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी नागरिकों को स्वच्छ हवा का समान अधिकार है, चाहे वे किसी भी शहर में रहें। इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर एक्शन लिया, जिसमें पटाखों पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को नोटिस जारी किया और दो हफ्तों में जवाब मांगा। यह नोटिस दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं के संदर्भ में भी जारी किया गया।

सोशल मीडिया से सड़कों तक: नेपाल में जेन-जेड की नई आंदोलनकारी ताकत

काठमांडू पिछले चार साल में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हुई उथल-पुथल के बीच सोशल मीडिया का मेगाफोन के रूप में उपयोग किया जाना चर्चा का विषय है। ये सामाजिक दरार को दर्शाता है, साथ ही जवाबदेही की मांग भी उठाता है। पुणे स्थित एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग एंड जर्नलिज्म के प्रभारी निदेशक डॉ. संबित पाल ने बताया, "जेनरेशन जेड 'डिजिटल नेटिव' हैं जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ पले-बढ़े हैं और इसलिए इस प्लेटफॉर्म की बारीकियों से वाकिफ हैं।" नेपाल में युवा प्रदर्शनकारियों ने जेन जी या जनरेशन जेड का इस्तेमाल किया। ये शब्द 1997 और 2012 के बीच पैदा हुए लोगों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। उन्होंने आगे कहा, "सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने उन्हें मेनस्ट्रीम मीडिया को दरकिनार कर, अपने नैरेटिव सेट करने और शासन संबंधी मुद्दों पर मिलजुलकर राय व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया है।" अध्ययनों से पता चलता है कि सोशल मीडिया अभियान मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा दे सकते हैं, और जब पारंपरिक मीडिया सीमित दायरे में काम करती है तो नागरिक संवाद को बनाए रख सकते हैं। मीडिया स्किल्स लैब के संस्थापक-निदेशक जॉयदीप दास गुप्ता ने कहा, "अरब विद्रोह से लेकर दक्षिण एशियाई देशों के आंदोलनों तक, प्रदर्शनकारियों ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है, जो संचार का एक शक्तिशाली माध्यम है, जिसमें न्यूनतम खर्च में अधिकतम पहुंच है।" मीडिया स्किल्स लैब एक शैक्षिक-शोध संस्थान है जो मीडिया साक्षरता, फैक्ट-चैक, एआई साक्षरता, डेटा जर्नलिज्म और सोल्यूशन जर्नलिज्म पर केंद्रित है। फोर्ब्स कम्युनिकेशंस काउंसिल की एक पोस्ट के अनुसार, "सभी सोशल मीडिया चैनल एक जैसे नहीं बनाए जाते। प्रत्येक प्लेटफॉर्म के अपने विशिष्ट यूजर समूह होते हैं, जिनकी सामग्री के साथ बातचीत करने की अपनी विशिष्टताएं होती हैं।" लेख 13 प्रैक्टिस पर प्रकाश डालती है, जिनमें व्यवसाय की प्रकृति को पहचानना, कोर टारगेट ऑडियंस दर्शकों पर फोकस करना, ग्राहक जनसांख्यिकी, प्रतिस्पर्धियों पर शोध आदि शामिल हैं। ज्यादातर बातें चीनी रणनीतिकार और दार्शनिक सुन त्जु की शिक्षाओं जैसी लग सकती हैं, जिन्होंने अपने दुश्मन को जानने के महत्व पर जोर दिया था। दास गुप्ता ने बताया, "इंटरनेट के लोकतंत्रीकरण के साथ, पहुंच आसान हो गई है। संदेश का प्रसार तुरंत होता है और आंदोलन गति पकड़ लेता है।" जब विद्रोह का सामना करना पड़ता है, तो सरकारें आमतौर पर संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया हैंडल या इंटरनेट पर ही प्रतिबंध लगा देती हैं। 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान, श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर कर्फ्यू लगा दिया था। तत्कालीन बांग्लादेश सरकार ने भी लगभग इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी, जबकि नेपाल में, राजधानी काठमांडू की सड़कों पर हिंसा भड़कने के साथ प्रतिबंध हटा लिया गया था। हालांकि, जैसा कि घटनाओं से पता चलता है, अधिकारी आपातकालीन समय को छोड़कर वेब सामग्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते। ये प्लेटफॉर्म निजी स्वामित्व वाले हैं, और इंटरनेट पर पुलिस की निगरानी का सुझाव भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा डालने के आरोपों को जन्म देता है। लेकिन ऐसे हैंडल के एल्गोरिदम यह तय कर सकते हैं कि लोग क्या देखें और क्या नहीं। ऐसे एल्गोरिदम वाले कानूनों का इस्तेमाल करते हुए, बाल शोषण, हिंसा और झूठी कहानियों के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए एक 'स्टैच्यूरी बिल्डिंग कोड' बनाने की सिफारिश की गई है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए अनिवार्य सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी जरूरतें शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञों का ये भी मत है कि राजनीतिक और सामाजिक संदेशों को बाध्य नहीं किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिए।

भारी बारिश से तबाही: हिमाचल में सैकड़ों सड़कें ठप, 215 लोगों की जान गई

शिमला हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर जारी है। राज्य के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को बताया कि भले ही कई सड़कों की बहाली पूरी कर ली गई है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में मार्ग क्षतिग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 583 लिंक रोड और 3 राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए बंद पड़े हैं। इसके साथ ही 806 डीटीआर मार्ग और 364 जल आपूर्ति योजनाएं (WSS) बाधित हैं। मंत्री नेगी ने बताया कि इस बार मानसून सीजन के दौरान 215 लोगों की जान गई है, जिनमें से 165 मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुई हैं।