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राशिफल 30 अप्रैल: जानें मेष से मीन तक, आपके लिए कैसा रहेगा आज का दिन

मेष राशि- एक मजबूत लव कनेक्शन बनाने की कोशिश करें। कल के दिन वर्कप्लेस पर नई जिम्मेदारियां लें, जो आपकी प्रोफेशनल काबिलियत को साबित करेंगी। आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी। विवादों से बचें। पॉजिटिव माहौल बनाए रखें। वृषभ राशि- समझदारी भरे रवैये से लव अफेयर की चुनौतियों का सामना करें। आप अपनी प्रोफेशनल जिंदगी में भी सफल होंगे। धन और सेहत दोनों अच्छी स्थिति में रहेंगे। छोटी-मोटी दिक्कतें आ सकती हैं। मिथुन राशि- रोमांटिक तौर पर, आप भाग्यशाली मेहसूस करेंगे। आपको प्रोफेशनल तौर पर आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। आपके पास अलग-अलग सोर्स से पैसा आएगा। कल के दिन आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी। कॉन्फिडेंट महसूस करेंगे। कर्क राशि- आपकी लव लाइफ में ईमानदारी अच्छे नतीजे लाएगी। प्रोफेशनल चुनौतियों को समझदारी से संभालने की जरूरत है। सेहत और धन दोनों ही अच्छे रहेंगे। रिश्ते में समझदारी दिखाएं। कोई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम नहीं है। सिंह राशि- कल के दिन हर रोमांटिक प्रॉब्लम को सॉल्व करने पर फोकस करें। अपने पार्टनर के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। आप काम में बेहतरीन परिणाम देने में सफल हो सकते हैं। कल के दिन धन और स्वास्थ्य दोनों में परेशानी हो सकती है। कन्या राशि- कल के दिन एक खुशहाल पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ इन्जॉय करें। ऑफिस में अपने सीनियर्स को अपनी परफॉर्मेंस से खुश रखें। स्वास्थ्य सामान्य है, लेकिन अपने खान-पान का ध्यान रखें। कुछ लोगों को फाइनेंशियल दिक्कतें रहेंगी। तुला राशि- अपनी लव लाइफ में खुश रहें और अहंकार को पीछे रखें। ऑफिशियल मामलों को सही ढंग से सुलझाने के लिए अपने प्रोफेशनल प्रयास जारी रखें। आज के दिन धन संबंधी समस्याएं मौजूद हैं। वृश्चिक राशि- पर्सनल लाइफ में कल के दिन प्रेशर को कंट्रोल में रखें। अपनी काबिलियत साबित करने के लिए ऑफिस में नए काम हाथ में लें। कुछ हेल्थ प्रॉब्लम सामने आ सकती हैं। आप लव लाइफ के लिए समय निकालें। धनु राशि- एक शानदार लव लाइफ का कल के दिन आनंद लें, जहां आप पिछली सभी प्रॉब्लम्स को सुलझा सकते हैं। आप अपनी काबिलियत साबित करने के लिए हर प्रोफेशनल मौके का इस्तेमाल करेंगे। कल सेहत और धन दोनों ही आपके लिए पॉजिटिव रहेंगे। मकर राशि- कल के दिन आपकी लव लाइफ खुशहाल रहेगी और आज आप काम पर प्रोडक्टिव रहें। खुशहाल फ्यूचर के लिए स्मार्ट इन्वेस्टमेंट पर गौर करें। सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूरी बनाएं। कुंभ राशि- नौकरी पर जरूरी काम करें। कल के दिन अपने रिश्ते में अपने पार्टनर के साथ समय बिताना जारी रखें। सही लाइफस्टाइल अपनाने से हेल्दी रहेंगे। धन की प्राप्ति भी होगी। इस बात का ध्यान रखें कि कल के दिन ऑफिस में सीनियर्स की उम्मीदों पर खरे उतरें। मीन राशि- लव अफेयर में आने वाली दिक्कतों से सावधान रहें और उन्हें सावधानी के साथ संभालें। कल के दिन नौकरी में आपका रवैया बहुत जरूरी है। आपकी फाइनेंशियल सिचूऐशन मजबूत बनी रहेगी। आपकी हेल्थ अच्छी रहेगी।

जीवन में आगे बढ़ने के लिए MS धोनी की 10 सबसे असरदार बातें

महेंद्र सिंह धोनी बेशक भारत के सबसे सफल क्रिकेट कप्तान हो। लेकिन वह दुनिया के सबसे सफल क्रिकेट कप्तानों की लिस्ट में भी शामिल है। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने जो उपलब्धियां कमाई हैं, उससे देश का नाम तो रोशन हुआ ही है। लेकिन उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस और पोस्ट मैच टॉक्स में जो बातें कही है, वह भी आज की जनरेशन के लिए किसी प्रेरणा (Inspiration) से कम नहीं है। अगर आप जीवन में हताश, परेशान और हारा हुआ महसूस कर रहे हैं, तो आपको धोनी को सुनना चाहिए। क्योंकि रांची से आए उस लड़के का जीवन भी उतना आसान नहीं रहा है। जितना आज बाहर-बाहर से देखकर लगता है। आइए पढ़ते है, धोनी के 10 सबसे असरदार, प्रेरित करने वाले ऐसे मोटिवेशनल कोट्स जो आपको अपने गोल अचीव करने के लिए हमेशा जगाए रखेंगे। 1. आप भीड़ के लिए नहीं, देश के लिए खेलते हैं! धोनी के इस कोट का मतलब समझे? आप नहीं समझें! MS के इस कोट को आप इस तरह समझिए कि आप उन 4 लोगों के लिए अपना जीवन नहीं जी रहे। बल्कि आप अपना जीवन उनके लिए जी रहे हैं, जो आपसे प्यार करते हैं। फिर चाहे, वो आपके घर वाले हो या फिर आपके दोस्त! इसलिए अपने जीवन को हमेशा दूर का सोचकर जीना चाहिए। 2. अगर आप लगातार जीतते है, तो आपको अपनी उन कमियों के बारे में पता नहीं चलता, जिसे सुधारने की जरूरत है! कई बार लोग हारते ही निराश होकर टूट जाते हैं। लेकिन सच्चाई तो ये है कि हार हमें मजबूत बनकर ठोस वापसी करना सिखाती है। 3. फैसला शांति से लो, सफलता शोर मचाएगी! धोनी का ये कोट भले ही कहीं से प्रेरित लगे। लेकिन सच्चाई तो ये है कि आपको अपने जीवन के अहम और बड़े फैसले शांति से लेने है। बाकी सफलता अपने आप शोर मचा देगी। 4. मैं फील्ड पर अपना 100 प्रतिशत देने में विश्वास रखता हूं! बिल्कुल धोनी की तरह ही आप भी अपने जीवन में जो भी हासिल करना चाहते, उसके लिए 100 प्रतिशत दें। फिर नतीजा जो होगा, उससे निराशा नहीं होगी! 5. खुद पर विश्वास और हार्ड वर्क ही सफलता दिलाता है! धोनी का ये कोट हमें सिखाता है कि आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत ही हमेशा सफलता दिलाते हैं। 6. जब तक फुल स्टॉप नहीं आता, वाक्य (Sentence) खत्म नहीं होता! ये लाइन भले ही छोटी-सी हो। लेकिन इसका मतलब बहुत बड़ा है। लोगों के बोल भर देने से इंसान का करियर खत्म नहीं होता। याद रखें कि आप अपनी कहानी खुद लिख रहे हैं और अब जब चाहेंगे, तब उसका अंत होगा! 7. सीखकर, वहीं गलती दोबारा नहीं करनी है! गलती करना जिंदगी का हिस्सा है! लेकिन उससे सीखकर हमें उसे दोहराना नहीं। बल्कि ठीक करना है। 8. जीतने से ज्यादा हम हारने पर सीखते हैं! एमएस धोनी का ये कोट अगर आपने अपने जीवन में उतार लिया, तो आप हारने से भी नहीं डरेंगे और जीत आपके कदम चूमेगी! 9. हार को तब तक फेस करो, जब तक हार तुम्हें फेस करने में हार न जाए हार का तब तक सामना करिए, जब तक हार आपका सामना करते हुए हार न जाए। इस सिंपल-सी लाइन का मतलब हार से डरना नहीं है, बल्कि उससे सीखकर उसे हराना है। 10 अपने आप को कभी प्रेशर में मत आने दो! धोनी के इस कोट का मतलब है कि आपको कभी भी खुद को प्रेशर में नहीं आने देना। उल्टा हर हालात में खुद को शांत और धैर्यवान बनाए रखना है।

पत्थर और व्यक्ति: बुद्ध की कहानी जो बताती है, अपनी कीमत खुद पहचानो

बुद्ध पूर्णिमा इस साल 1 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल यह वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, इसलिए इसे वैशाखी पूर्णिमा भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, यह दिन भगवान गौतम बुद्ध को समर्पित है क्योंकि इनका जन्म इसी तिथि पर हुआ था. गौतम बुद्ध ने अपने पूरे जीवन में अहिंसा, सत्य, करुणा और शांति का संदेश दिया, जो आज भी लोगों को सही राह दिखाता है. गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई कहानियां व कथाएं भी हमें गहरी सीख देती हैं. उनकी ऐसी ही एक कथा आत्म-मूल्य को समझाने वाली है. आइए पढ़ते हैं वह कथा. जब अपनी कीमत जानने की खोज में बुद्ध के पास पहुंचा एक व्यक्ति कहानी के अनुसार, एक व्यक्ति गौतम बुद्ध के पास पहुंचा और उनसे पूछा कि, 'मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है और मेरी असली कीमत क्या है?'  गौतम बुद्ध ने सीधे जवाब देने के बजाय उसे एक पत्थर दिया और कहा कि, 'जाओ, इसकी कीमत बाजार में पूछकर आओ, लेकिन इसे बेचना मत चाहे कितना भी महंगा क्यों न हो.' वह व्यक्ति सबसे पहले एक फल बेचने वाले के पास गया. फलवाले ने पत्थर को देखकर कहा कि यह उसके ज्यादा काम का नहीं है, लेकिन इसकी चमक अच्छी है, इसलिए वह इसके बदले 10 आम दे सकता है. इसके बाद वह एक सब्जी वाले के पास गया, जिसने कहा कि इसके बदले एक बोरी आलू मिल सकते हैं. एक ही पत्थर, लेकिन हर जगह अलग कीमत क्यों? अब वह और हैरान हो गया कि एक ही पत्थर की अलग-अलग कीमत क्यों लग रही है. आखिर में वह एक जौहरी के पास पहुंचा. जौहरी ने पत्थर को ध्यान से देखा और कहा, 'यह तो बहुत कीमती रत्न है, मैं इसके लाखों रुपये देने को तैयार हूं.' जब व्यक्ति वहां से जाने लगा, तो जौहरी ने कीमत और बढ़ा-चढ़ाकर देने की बात कही. इसके बाद वह व्यक्ति वापस गौतम बुद्ध के पास आया और पूरी बात बताकर फिर वही सवाल पूछा. गौतम बुद्ध मुस्कुराए और बोले, 'तुमने देखा, हर किसी ने अपनी समझ के हिसाब से उस पत्थर की कीमत लगाई. लेकिन उसकी असली पहचान सिर्फ वही कर पाया, जिसे उसकी सही परख थी.' खुद को पहचानना है सबसे बड़ी ताकत गौतम बुद्ध ने समझाया कि इंसान की कीमत भी कुछ ऐसी ही होती है. हर कोई आपके गुणों को नहीं समझ पाएगा. असली बात यह है कि आप खुद को पहचानें और अपने अंदर छिपी खूबियों को निखारें. किसी भी व्यक्ति की असली कीमत दूसरों के विचारों से नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और उसकी पहचान से तय होती है.

घर में पानी के मटके रखने के वास्तु नियम: सुख-समृद्धि और धन की बढ़ोतरी के लिए

गर्मी के मौसम में भारतीय घरों में सदियों से पानी के मटकों का इस्तेमाल होता रहा है। मिट्टी के घड़े में रखा हुआ पानी सेहत के लिए अमृत के समान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी पानी के मटके को घर में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। मिट्टी का घड़ा घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है। अगर वास्तु के अनुसार पानी का मटका रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। आइए वास्तु गुरु मान्या जी से जानते हैं कि पानी के मटकों के घर में रखना के क्या वास्तु नियम हैं। घर में पानी का मटका रखने की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, पानी का मटका हमेशा घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। घर के ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। ईशान कोण को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। ऐसे में घर की इस दिसा में पानी का मटका रखना सुख-समृद्धि लाता है और आर्थिक परेशानियों को दूर करता है। इस दिशा में न रखें पानी का मटका पानी के मटके को कभी घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए। इसे वास्तु दोष माना जाता है और यह आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। इसके अलावा पानी के मटके को बाथरूम के पास या सीढ़ियों के नीचे रखना भी अशुभ माना जाता है। मटका कभी भी खाली न रखें वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, पानी के मटके को कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए। इसे हमेशा पानी से भरा रखना चाहिए। पानी से भरा हुआ मटका घर में सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है और घर में कभी धन की कमी नहीं होती है। मटके के आस-पास साफ सफाई बनाए रखनी चाहिए। घर में टूटा हुआ घड़ा न रखें घर में टूटा हुआ या चटका हुआ मटका रखना अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, खंडित मटका नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर में आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती है। ऐसे में इसे तुरंत हटा देना चाहिए। मटके से पानी का टपकना धन की बर्बादी का कारण माना जाता है। मटका खरीदने का शुभ दिन वास्तु के अनुसार, मिट्टी का घड़ा घर में सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बुधवार और गुरुवार को पानी का मटका खरीदना सबसे शुभ फल देने वाला होता है। इसके अलावा मंगलवार को शनिवार के दिन मटका नहीं खरीदना चाहिए। वहीं, वैशाख मास में घड़ा खरीदना और दान करना दोनों ही शुभ माने जाते हैं। सबसे जरूरी बात सबसे जरूरी बात नया मटका घर लाने के बाद उसको साफ करने बेहद जरूरी है। सबसे पहले उसपर गंगा जल का छिड़काव करें और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद पीने का पानी भरें। ध्यान रखें की मटके में पहली बार भरा हुआ पानी पौधों में डाल दें। इसके बाद मटके को भरकर पीने के लिए इस्तेमाल करें।

सामुद्रिक शास्त्र: हाथ-पैर के चिन्ह बताते हैं जीवन का भाग्य और भविष्य के संकेत

 सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक, हाथ और पैर हमारी कुंडली की तरह होते हैं. उनमें पाए जाने वाले चिह्न योगों को बताते हैं. हाथ पैरों में बनने वाले चिह्न दो तरह के होते हैं. एक जो हमेशा रहते हैं और दूसरे जो आते जाते रहते हैं. जो चिह्न आते जाते रहते हैं वो एक समय की विशेष दशा बताते हैं. वहीं, जो चिह्न हमेशा रहते हैं वो सारी विशेषताएं बताते हैं. इन चिह्नों की महत्वपूर्ण बात है कि इन चिह्नों का स्वतंत्र होना जरूरी है. आइए पंडित शैलेंद्र पांडेय से जानते हैं कि शरीर के इन विशेष चिह्नों के बारे में. हाथ-पांव पर वर्ग के होने का अर्थ? सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक, वर्ग रेखाओं पर भी पाए जाते हैं और पर्वतों पर भी पाए जाते हैं. हाथ में यह चिह्न कहीं पर भी हों सुरक्षा ही प्रदान करते हैं. लेकिन, वर्ग चिह्न अगर अंगूठे के नीचे शुक्र के पर्वत पर हैं तो जेल यात्रा का कारण बन सकता है. हाथ-पांव में सामान्य चिह्न होना हाथ या पैरों में पाए जाने वाले सामान्य चिह्नों में त्रिभुज, तारा, वलय और तिल शामिल हैं. त्रिभुज जिस स्थान पर होता है, उसकी शक्ति को बढ़ाता है. तारा सामान्यतः अशुभ माना जाता है, लेकिन सूर्य पर्वत पर हो तो प्रसिद्धि दिलाता है. वलय शुभ प्रभाव को रोकने वाला माना जाता है, जबकि तिल का स्थान उसके प्रभाव को निर्धारित करता है. विशेष और दुर्लभ चिह्न सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक, कुछ चिह्न बेहद खास और दुर्लभ माने जाते हैं, जैसे शंख, चक्र, त्रिशूल, मंदिर, मछली और कमल. ये चिन्ह व्यक्ति के जीवन में विशेष उपलब्धियों, आध्यात्मिक उन्नति और धन-संपत्ति का संकेत देते हैं. उदाहरण के लिए, चक्र धन लाभ का प्रतीक होता है, जबकि कमल का चिन्ह अत्यंत दुर्लभ और उच्च सफलता का सूचक माना जाता है. ऐसे चिन्ह जीवन में बड़े बदलाव और विशेष कृपा का संकेत देते हैं. शंख (Conch)- उंगलियों के पोरों पर हो तो ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति. चक्र (Chakra)- धन-संपत्ति का संकेत और आर्थिक समृद्धि देता है. त्रिशूल (Trident)- शक्ति, सफलता और यश का प्रतीक होना. मंदिर (Temple)- दैवीय कृपा और धार्मिक झुकाव होना. मछली (Fish)- यात्रा से लाभ और जीवन में गतिशीलता होना. कमल (Lotus)- बहुत दुर्लभ और अत्यंत शुभ है यह चिह्न, इस चिन्ह से बड़ी सफलता, ऊंचा स्थान और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है. अशुभ चिन्हों के उपाय अगर हाथ या पैरों में कोई अशुभ चिह्न दिखाई देता है, तो उसके प्रभाव को कम करने के लिए कुछ पारंपरिक उपाय बताए गए हैं. जैसे शनिवार को काला धागा पहनना, रोजाना पौधों को जल देना, सुबह उठकर अपनी हथेलियों को देखना और माता-पिता का आशीर्वाद लेना. इन उपायों को नियमित रूप से करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है.

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में विंड चाइम लगाने के सही तरीके और दिशा

वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में विंड चाइम्स लगाना बहुत शुभ होता है। इसे घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने और नेगेटिविटी को दूर करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। जिसके प्रभाव से घर में सुख और उन्नति को बढ़ावा मिलता है। अगर विंड चाइम्स को वास्तु अनुसार, सही तरीके से लगाया जाए तो इससे घर में बरकत और शांति बनी रहती है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, विंड चाइम घर में लगाने से पहले इसके धातु, सही दिशा, स्थान, आवाज और रॉड की संख्या पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है। आइए विस्तार से जानें विंड चाइम लगाने के वास्तु टिप्स। विंड चाइम की दिशा और धातु का रखें ख्याल वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर में विंड चाइम्स लगाने से पहले इस बात पर ध्यान अवश्य देना चाहिए की वह किस धातु का है। फिर, उसी के अनुसार सही दिशा में विंड चाइम लगाना चाहिए।     माना जाता है कि अगर विंड चाइम लोहे या पीतल का हो, तो उसे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना शुभ होता है। इसे भाग्य में वृद्धि और करियर के लिए अच्छा माना जाता है।     अगर आप घर में लकड़ी या बांस से बने विंड चाइम्स लगाने के बारे में सोच रहे हैं, तो इसे पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है।     वास्तुशास्त्र के अनुसार, सिरेमिक वाले विंड चाइम्स को घर की दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आसपास का माहौल भी सुखद रहता है। विंड चाइम में लगी रॉड की संख्या पर भी दें ध्यान वास्तु गुरु मान्यता बताती हैं कि विंड चाइम्स में लगी रॉड की संख्या का घर और आसपास के माहौल पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। अगर विंड चाइम में 6 या 8 रॉड हों तो इसे शुभ माना जाता है। यह करियर में उन्नति और भाग्य में वृद्धि करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। वहीं, 5 रॉड होने पर इसे घर से नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को दूर करने में प्रभावशाली माना जाता है। अगर विंड चाइम में 9 रॉड हों, तो इससे परिवार के बीच आपसी तालमेल, प्रेम और खुशियां बनी रहती हैं। विंड चाइम कहां लगाएं और कहां न लगाएं?     ​वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में विंड चाइम लगाते समय स्थान पर ध्यान देना भी बेहद आवश्यक होता है। इसे हमेशा ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए जहां हवा का फ्लो अच्छा बना रहता हो। ऐसे में आप विंड चाइम को घर की बालकनी, खिड़की या मेन दरवाजे के आसपास लगा सकते हैं।     कहां न लगाएं : माना जाता है कि भूलकर भी विंड चाइम को घर के मंदिर या किचन में नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, इसके आसपास वाले स्थान पर भी विंड चाइम नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। विंड चाइम लगाते वक्त इन बातों का भी रखें ध्यान     वास्तु के अनुसार, विंड चाइम को कभी भी अपने बेड के ऊपर वाले स्थान पर नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, इसके नीचे बैठना भी शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है।     विंड चाइम खरीदते समय इस बात का ख्याल जरूर रखें की इसकी आवाज मधुर और कानों को सुकून देने वाली होनी चाहिए। कभी भी तेज और कानों को चुभने वाले आवाज का विंड चाइम नहीं लेना चाहिए।     अगर आप घर में गृह क्लेश या नेगेटिविटी महसूस करते हैं, तो इसके लिए मुख्य द्वार के पास 5 रॉड वाला विंड चाइम लगाना चाहिए। ऐसा करना उत्तम माना जाता है और साथ ही, यह बरकत भी बढ़ाता है।  

2026 में आएगा 13वां महीना: अधिकमास से बदलेंगी त्योहारों की तारीखें

 हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना 'अधिक मास' कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है. कब पड़ेगा अधिकमास 2026? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी अधिकमास क्यों आता है? अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का. हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है. अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है? अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है. इस दौरान ना करें ये काम अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए. क्या खास है पुरुषोत्तम मास? अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.

मेष राशि में बुध का प्रवेश, वृषभ-कन्या-मकर पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

ग्रहों के राजकुमार के नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह 30 अप्रैल यानी कल सुबह 06 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में गोचर करने जा रहे हैं. बुध देव मीन राशि से विराजमान थे जो इनकी नीच राशि मानी जाती है. साथ ही, वह शनि ग्रह के साथ युति कर रहे थे. ऐसे में, बुध के मेष राशि में गोचर से इनकी स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. बुध के गोचर से किन राशियों को नुकसान होने जा रहा है. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में. वृषभ राशि बुध वृषभ राशि के बारहवें भाव में प्रवेश करेंगे. इस दौरान आपके खर्चों में वृद्धि हो सकती है. आप जीवन के कुछ बड़े फैसले जल्दबाज़ी में ले सकते हैं. मन में बेचैनी महसूस हो सकती है. संयम बरतने और सोच-समझकर फैसले लें. आर्थिक जीवन में आपको सावधानी बरतनी होगी. बिना सोचे-समझे कोई भी खरीदारी करने से बचें. आपको धन से जुड़े मामलों में सतर्क रहना होगा. आर्थिक जीवन पर ध्यान देना होगा, तब ही आप सही फैसले ले पाएंगे. उपाय– इस अवधि में इन जातकों को आध्यात्मिक गतिविधियां जैसे योग, ध्यान और मंत्र जाप में आपको मानसिक शांति प्रदान करेगा. कन्या राशि बुध कन्या राशि के आठवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं. अचानक से होने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना होगा. नौकरी में अचानक से कोई मुश्किल प्रोजेक्ट या बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. जिम्मेदारियों में भी कुछ बदलाव हो सकता है. किसी नए काम की शुरुआत असहज हो सकती है इसलिए परिस्थिति में खुद को ढालने की कोशिश करें. जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचना होगा. हर फैसला बहुत सोच-समझकर लें. स्वास्थ्य और मानसिक तनाव परेशान कर सकता है. उपाय– इस समय आपके लिए हरी घास पर चलना अच्छा रहेगा और प्रकृति के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं. मकर राशि बुध मकर राशि के चौथे भाव में गोचर करने जा रहे हैं. घर-परिवार में समस्याएं आ सकती हैं. माता की सेहत बिगड़ सकती है. थकन महसूस कर सकते हैं. इस अवधि में आपको कोई बड़ा और मुश्किल प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है जो शुरुआत में आपको मुश्किल लग सकता है. उपाय– प्रतिदिन तुलसी के पौधे की पूजा करें और उसके सामने तेल का दीपक जलाएं.

मई 2026 में बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन राशियों की चमकेगी किस्मत और धन

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल को जीवन के उतार-चढ़ाव से जोड़कर देखा जाता है. मई 2026 के अंत में एक बेहद खास योग बनने जा रहा है, लक्ष्मी नारायण राजयोग. यह योग तब बनता है जब शुक्र (धन, वैभव, सुख) और बुध (बुद्धि, व्यापार) एक ही राशि में आ जाते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 मई को शुक्र मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे और 29 मई को बुध भी वहीं पहुंच जाएंगे, जिससे यह शुभ योग बनेगा. यह योग खासतौर पर कुछ राशियों के लिए आर्थिक तरक्की, करियर में ग्रोथ और भाग्य चमकने के योग बन रहे हैं. लक्ष्मी नारायण राजयोग क्या होता है? लक्ष्मी नारायण राजयोग ज्योतिष में बेहद शुभ और प्रभावशाली योगों में से एक माना जाता है. जब शुक्र और बुध एक ही राशि में युति बनाते हैं, तो यह योग बनता है. इन दोनों ग्रहों का मिलन व्यक्ति को धन, सफलता, बुद्धिमत्ता और सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने वाला माना जाता है. इस योग के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और करियर में नई ऊंचाइयां हासिल करने के मौके मिलते हैं. मिथुन राशि इस योग का सबसे ज्यादा असर मिथुन राशि वालों पर देखने को मिलेगा. नौकरी और करियर में अच्छी प्रगति हो सकती है. नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ-साथ प्रमोशन के योग भी बनेंगे. व्यापार करने वालों को मुनाफा होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए यह योग कई रुके हुए काम पूरे करा सकता है. नौकरी में तरक्की और आय बढ़ने के संकेत हैं. पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है. हर काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ेगी. तुला राशि तुला राशि के लोगों के लिए यह समय धन लाभ देने वाला रहेगा. व्यापार में फायदा हो सकता है. नई डील मिलने के संकेत हैं. निवेश से भी अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है. आय के नए रास्ते खुल सकते हैं. धनु राशि धनु राशि के लिए यह योग किस्मत बदलने वाला साबित हो सकता है. नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं. पार्टनरशिप में किए गए कामों से लाभ होगा. अगर कोई केस या विवाद चल रहा है, तो उसमें भी सफलता मिल सकती है. विदेश से जुड़े मौके भी मिल सकते हैं.

बड़ा चार धाम यात्रा: जानें भारत के चारों दिशाओं में स्थित पवित्र तीर्थों का महत्व

 उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'बड़ा चार धाम' भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए- उत्तर में बद्रीनाथ दक्षिण में रामेश्वरम पश्चिम में द्वारका पूर्व में पुरी किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम? बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है. बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पित रामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग द्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर पुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार) बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत) बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे. घूमने की जगहें: तप्त कुंड, वसुधारा फॉल्स, हेमकुंड साहिब, वैली ऑफ फ्लावर्स जाने का सही समय: मई से अक्टूबर रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत) रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है. घूमने की जगहें: धनुषकोडी, राम सेतु, पंबन ब्रिज जाने का सही समय: अक्टूबर से अप्रैल द्वारका धाम (पश्चिम भारत) द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है. घूमने की जगहें: बेट द्वारका, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, रुक्मिणी मंदिर जाने का सही समय: अक्टूबर से मार्च जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत) पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं. घूमने की जगहें: पुरी बीच, चिलका झील, गुंडिचा मंदिर जाने का सही समय: अक्टूबर से जुलाई क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा? बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है. चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतर छोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है. दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है. बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स 1. पहले से प्लान करें यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है. 2. सही समय चुनें रामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है. 3. जरूरी पेपर रखें बड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है. 4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करें इस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें. 5. लोकल गाइड लें इस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी. 6. कैश साथ रखें हर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.