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रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी सप्लाई की कमी से 2026 में हो सकता है वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट

नई दिल्ली  गंभीर मेमोरी सप्लाई संकट का सामना कर रहे वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट ने 2025 का अंत मामूली एकल-अंकीय (सिंगल डिजिट) साल-दर-साल वृद्धि के साथ किया। यह बढ़ोतरी बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक हालात और छुट्टियों के मौसम में मजबूत मांग के कारण संभव हुई।  2025 की चौथी तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 3.8 प्रतिशत बढ़ी। यह लगातार चौथी तिमाही रही जब बाजार में सुधार देखा गया। साथ ही, यह 2021 के बाद सबसे मजबूत हॉलिडे तिमाही रही। चीन और पूर्वी यूरोप को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार 2026 में बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में अनुमान है कि 2026 में स्मार्टफोन शिपमेंट 12.4 प्रतिशत साल-दर-साल घट सकती है, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी की कमी, कंपोनेंट की तेजी से बढ़ती कीमतें और लोअर-एंड ओईएम कंपनियों की संरचनात्मक कमजोरियां 2026 में बाजार पर दबाव डालेंगी। यह गिरावट 2027 तक जारी रह सकती है और सुधार की उम्मीद 2027 के अंत में है, जब अतिरिक्त मेमोरी क्षमता उपलब्ध होगी। काउंटरपॉइंट के प्रिंसिपल एनालिस्ट यांग वांग ने कहा, "इसका असर 2027 की दूसरी छमाही तक जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि मेमोरी सप्लाई बढ़ने में कई तिमाहियां लगेंगी। खासकर निम्न-स्तरीय स्मार्टफोन सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि एलपीडीडीआर4 मेमोरी की सप्लाई अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से घट रही है।" उन्होंने बताया कि ओईएम कंपनियां पहले ही नए लॉन्च में देरी, सीमित प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और स्पेसिफिकेशन में बदलाव जैसे कदम उठा रही हैं। जनवरी 2026 में कुछ एंड्रॉयड ओईएम पोर्टफोलियो में 10 से 20 प्रतिशत तक कीमतों में बढ़ोतरी भी देखी गई है। मौजूदा गिरावट की मुख्य वजह मेमोरी सप्लाई चेन में गहरा असंतुलन है। निर्माता कंपनियां ज्यादा मुनाफा देने वाले एआई-केंद्रित डीआरएएम और एंटरप्राइज एसएसडी एनएएनडी के लिए वेफर क्षमता का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार के सभी हिस्से समान रूप से प्रभावित नहीं होंगे। प्रीमियम सेगमेंट अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है और सिंगल डिजिट वृद्धि दर्ज कर सकता है, जबकि 200 डॉलर से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट में 20 प्रतिशत से अधिक गिरावट की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत सप्लाई चेन, बेहतर मूल्य निर्धारण क्षमता और प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान देने के कारण एप्पल और सैमसंग इस संकट का बेहतर सामना कर सकते हैं।

सोने और चांदी को छोड़े, यह मेटल बन सकता है दोगुना, एक्‍सपर्ट का खुलासा

नई दिल्‍ली पिछले कुछ सालों में सोना और चांदी ने निवेशकों को कमाल का रिटर्न दिया है, लेकिन अब एक नए मेटल का उदय हो रहा है. एक जानकार का कहना है कि इसकी कीमत आने वाले समय में डबल होने वाली हैं. एक्‍सपर्ट का कहना है कि AI और विद्युतीकरण की असीमित डिमांड के कारण दुनिया एक विशाल कमोडिटी सुपरसाइकिल के कगार पर खड़ी है, जिस कारण कॉपर मेटल की कीमतों में तगड़ी उछाल आ सकती है.   इवानहो माइंस के संस्थापक और सह-अध्यक्ष रॉबर्ट फ्रीडलैंड के अनुसार, उत्पादन लागत में वृद्धि और अभूतपूर्व मांग के चलते तांबे की कीमतें और भी बढ़ने वाली हैं. जनवरी 2026 में सऊदी अरब में आयोजित फ्यूचर मिनरल्स फोरम 2026 में बोलते हुए, खनन क्षेत्र के दिग्गज ने लाल धातु (तांबे) के लिए बेहद आशावादी तस्वीर पेश की है. जहां पिछले पांच वर्षों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 53 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रही हैं, वहीं फ्रीडलैंड ने बताया कि इसी अवधि के दौरान तांबे की कीमत अभी कम तेजी के बाद भी सर्वकालिक उच्च स्तर 13,400 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, लेकिन आगे और भी तेजी की संभावना है.  क्‍यों आएगी कॉपर में तेजी?  कमोडिटी की कीमतों में इस उछाल का एक बड़ा कारण AI डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार है. उन्होंने बताया कि 2026 के अंत तक, ग्‍लोबल डेटा सेंटर्स उतनी ही बिजली की खपत करेंगे जितनी जापान, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. फ्रीडलैंड ने शिकागो में माइक्रोसॉफ्ट के एक हालिया 'बेबी डेटा सेंटर' का उदाहरण दिया, जिसके लिए अकेले 20 लाख किलोग्राम तांबे की आवश्यकता थी. उन्होंने कहा कि टेस्ला के हर सर्वर को सोना, लोहा, गैलियम, एंटीमनी, टंगस्टन, चांदी, कई रेयर अर्थ मिनरल्‍स, इंडियम, टैंटलम, पैलेडियम, बेरियम, नाइओबियम और टाइटेनियम की आवश्यकता होती है. उन्‍होंने कहा कि अगर ग्रीन एनर्जी चेंजेज या एआई सेंटर्स के सपनों को इग्‍नोर करें तो भी कॉपर जैसे मेटल की भारी कमी है.  बहुत बड़े लेवल पर तांबे की आवश्‍यकता फ्रीडलैंड ने कहा कि अपनी वर्तमान जीवनशैली को बनाए रखने के लिए, दुनिया को ठीक उसी तरह चलाने के लिए, जैसा वह चलती आ रही है, हमें अगले 18 वर्षों में 70 करोड़ मीट्रिक टन तांबा और निकालना होगा. इस विशाल आंकड़े को समझने के लिए, यह ठीक उतनी ही मात्रा है, जितना तांबा मानव जाति ने गुफाओं से बाहर आने के बाद से 10,000 वर्षों में निकाला है. 40 फीसदी हिसा तो यहां खत्‍म हो जाएगा फ्रीडलैंड ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए 2050 तक हर साल छह नए टॉप कैटेगरी की तांबा खदानों को चालू करना होगा. उस नए उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से ग्रिड अपग्रेड, इलेक्ट्रिकसिटी और डेटा केंद्रों द्वारा उपयोग किया जाएगा. क्‍यों डबल हो सकती है कॉपर की कीमत?  उन्होंने कहा कि 1900 से लेकर अब तक, तांबे की एक यूनिट के उत्पादन के लिए आवश्यक ऊर्जा 16 गुना बढ़ गई है और तांबे की एक यूनिट बनाने के लिए आवश्यक पानी की मात्रा दोगुनी हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि इसलिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भविष्य की खनन जरूरतों को पूरा करने के लिए तांबे की कीमत दोगुनी होनी चाहिए.

मारुति ने पेश किया नया ऑफर, बलेनो, फ्रोंक्स, ग्रैंड विटारा, जिम्नी और ई विटारा की खरीदारी में मिला खास फायदा

मुंबई  मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) ने अपने 200वें NEXA स्टूडियो आउटलेट के खुलने की घोषणा की है। यह मारुति सुजुकी के अपने फ्लैगशिप ‘NEXA’ चैनल के तहत प्रीमियम और पर्सनलाइज्ड कार ओनरशिप एक्सपीरियंस देने के सफर में एक और कदम है। जगह और सेल्स पोटेंशियल के आधार पर, NEXA चैनल को दो फॉर्मेट में बनाया गया है, जिसमें NEXA मेन आउटलेट और NEXA स्टूडियो आउटलेट शामिल हैं। कुल मिलाकर, NEXA सेल्स नेटवर्क के अभी 530 से ज्यादा शहरों में 740 से ज्यादा आउटलेट हैं। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, मिस्टर हिसाशी ताकेउची ने कहा, "NEXA का मतलब है इनोवेशन, डिजाइन और प्रीमियम ओनरशिप एक्सपीरियंस है। NEXA स्टूडियोज का तेजी से बढ़ना दिखाता है कि हम सेमी-अर्बन इलाकों में अपने एस्पिरेशनल कस्टमर्स को यह एक्सपीरियंस देने के लिए कमिटेड हैं। इन इलाकों में ऐसे कस्टमर्स का एक बढ़ता हुआ सेगमेंट है जो प्रीमियम कार खरीदने का एक्सपीरियंस चाहते हैं। उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए, हमें ऐसी जगहों पर अपने NEXA फुटप्रिंट को बढ़ाकर खुशी हो रही है। हम अपने डीलर पार्टनर्स और कस्टमर्स के उनके भरोसे और जोश के लिए शुक्रगुजार हैं जो NEXA की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके सपोर्ट से हमारा मकसद FY 2030-31 के आखिर तक NEXA स्टूडियो आउटलेट्स की कुल संख्या 600 तक ले जाना है।" जुलाई 2015 में लॉन्च हुआ चैनल मारुति सुजुकी ने जुलाई 2015 में अपना NEXA चैनल लॉन्च किया था ताकि कार खरीदने के बेहतरीन एक्सपीरियंस के जरिए नए तरह के कस्टमर्स को आकर्षित किया जा सके। NEXA लॉन्च करने के एक साल के अंदर, कंपनी ने 94 शहरों में 100 NEXA सेल्स आउटलेट सफलतापूर्वक स्थापित किए। FY 2024-25 में 5.4 लाख से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री के साथ, NEXA मारुति सुजुकी की घरेलू बिक्री का लगभग 30% है। मारुति सुजुकी NEXA के जरिए बलेनो, फ्रोंक्स, ग्रैंड विटारा, XL6, इग्निस, जिम्नी, इनविक्टो और ई विटारा बेचती है। नेक्सा डीलरशिप पर ई-विटारा पहली इलेक्ट्रिक SUV कंपनी ने इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में भी कदम रख लिया है। मारुति का पहला इलेक्ट्रिक मॉडल ई विटारा है, जिसे नेक्सा डीलरशिप के जरिए बेचा जा रहा है। कंपनी ने इसे बैटरी और बैटरी सब्सक्रिप्शन दोनों ऑप्शन के साथ लॉन्च किया है। यानी इसमें BaaS (बैटरी एज ए सर्विस) का ऑप्शन भी मिलेगा। ई-विटारा को 3 वैरिएंट डेल्टा, जेटा और अल्फा में खरीद पाएंगे। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 15.99 लाख रुपए है। भारतीय बाजार में इसका मुकाबला, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, MG ZS EV, टोयोटा ईबेला, MG विंडसर जैसे मॉडल से होगा। इसे दो बैटरी पैक ऑप्शन 49kWh और 61kWh में खरीद पाएंगे। इनकी रेंज 440km और 543km तक होगी।

भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री में भारी गिरावट, 10 साल में पहली बार आई धड़ाम

 नई दिल्ली चीन की स्मार्टफोन कंपनियों को भारत में बड़ा झटका लगा है. करीब एक दशक बाद पहली बार इन ब्रांड्स की कमाई और बाजार हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है. Xiaomi, Oppo, Realme और OnePlus जैसे बड़े नामों की बिक्री भारत में कमजोर पड़ी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के दौरान इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ निगेटिव रही है, जबकि पिछले कई सालों से लगातार इनका ग्राफ ऊपर जा रहा था. डेटा बताता है कि भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 2023 में करीब 54 फीसदी थी. अब यह घटकर लगभग 48 फीसदी के आसपास आ गई है.   क्यों गिर रहा भारत में चीनी स्मार्टफोन मार्केट? यानी हर दो में से एक फोन अब चीनी ब्रांड का नहीं रहा. यह बदलाव अचानक नहीं आया है. पिछले दो सालों में भारतीय ग्राहक धीरे धीरे प्रीमियम और ब्रांड वैल्यू वाले फोन्स की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं. Apple और Samsung जैसे ब्रांड्स की बिक्री बढ़ी है, खासकर 30 हजार रुपये से ऊपर वाले सेगमेंट में. इस गिरावट की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि एंट्री लेवल और मिड रेंज सेगमेंट में मार्जिन काफी कम हो गया है. पहले जहां चीनी कंपनियां सस्ते फोन बेचकर बड़ी संख्या में यूजर्स जोड़ लेती थीं, अब उसी सेगमेंट में मुकाबला बहुत तेज हो गया है. ऐपल और सैमसंग का दबदबा भारतीय ब्रांड्स और पुराने इंटरनेशनल प्लेयर्स भी आक्रामक ऑफर दे रहे हैं. साथ ही सरकार की मेक इन इंडिया पॉलिसी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर का असर भी बाजार पर दिख रहा है. एक और बड़ा कारण प्रीमियम फोन की डिमांड का बढ़ना है. भारत में अब ज्यादा लोग 5G, बेहतर कैमरा और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट वाले फोन चाहते हैं. इस सेगमेंट में Apple और Samsung की पकड़ मजबूत है. प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर फोकस Xiaomi और Oppo जैसी कंपनियों ने प्रीमियम फोन लॉन्च किए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक वैसी ब्रांड ट्रस्ट नहीं मिल पाई है जैसी पुराने खिलाड़ियों को मिली है. OnePlus का प्रीमियम सेगमेंट में नाम जरूर है, लेकिन उसकी कुल बिक्री पर असर पड़ा है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीनी कंपनियों के लिए यह चेतावनी है. अगर वे सिर्फ सस्ते फोन पर टिके रहेंगी, तो आने वाले समय में मुश्किल बढ़ेगी. अब उन्हें भारत में ज्यादा निवेश करना होगा, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी और प्रीमियम सेगमेंट में भरोसेमंद इमेज बनानी होगी. इसके साथ ही आफ्टर सेल्स सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट पर भी फोकस करना पड़ेगा, क्योंकि अब भारतीय ग्राहक सिर्फ कीमत नहीं, पूरे एक्सपीरियंस को देखकर फोन खरीद रहा है. चीनी कंपनियों का सप्लाई चेन अब भी मजबूत हालांकि जानकार यह भी कहते हैं कि चीनी कंपनियां इतनी आसानी से बाजार से बाहर नहीं होंगी. इनके पास बड़ा नेटवर्क है, मजबूत सप्लाई चेन है और भारत में पहले से करोड़ों यूजर्स मौजूद हैं. आने वाले महीनों में ये कंपनियां नई स्ट्रैटेजी के साथ वापसी करने की कोशिश करेंगी. लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है. भारत का स्मार्टफोन बाजार बदल रहा है और चीनी ब्रांड्स को अपनी चाल बदलनी होगी, वरना उनकी पकड़ और ढीली पड़ सकती है.

उबर एयर टैक्सी का आगाज, मोबाइल ऐप से होगी बुकिंग, नई उड़ान सेवा का इंतजार

 नई दिल्ली Uber Air Taxi : सोचिए, आप कैब बुक करने के लिए फोन निकालते हैं, ऐप खोलते हैं और सामने दो विकल्प मिलते हैं. एक सड़क वाली टैक्सी और दूसरी हवा में उड़ने वाली. जी हां, वही हवा, वही आसमान. दुबई अब इसी सोच को हकीकत में बदलने जा रहा है, जहां टैक्सी सिर्फ सड़क पर नहीं, बल्कि ऊपर आसमान में भी चलेगी. अब तक ट्रैफिक में फंसना मजबूरी था, लेकिन आने वाले वक्त में शायद नहीं. क्योंकि जिस Uber ऐप से आप रोज कैब बुक करते हैं, उसी से एयर टैक्सी भी मिलेगी.  दरअसल, दुबई में इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) सर्विस शुरू होने वाली है, जिसे सीधे मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकेगा. खास बात यह है कि यह सुविधा मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber के जरिए मिलेगी. यानी सड़क पर चलने वाली कार के साथ अब हवा में उड़ने वाली एयर टैक्सी का भी ऑप्शन अब एक ही ऐप पर मिलेगा.  ऐप से कैसे होगी एयर टैक्सी की बुकिंग एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में. यह एयर टैक्सी पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी और इसमें चार यात्री बैठ सकेंगे. हर फ्लाइट को एक लाइसेंस प्राप्त कमर्शियल पायलट उड़ाएगा, जिससे सेफ्टी को लेकर भरोसा बना रहे. केबिन में आरामदायक सीटें होंगी और बड़ी खिड़कियां दी जाएंगी, ताकि यात्री उड़ान के दौरान दुबई के शानदार नजारे देख सकें. इस एयर टैक्सी में 6 खास प्रोपेलर लगाए गए हैं, जो इसे सीधा ऊपर उड़ने और उतरने में मदद करते हैं. ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. जरूरत पड़ने पर यह आगे की दिशा में भी उड़ान भर सकती है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं. इस एयरटैक्सी सर्विस की शुरुआत इसी साल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही दुबई में जमीन और हवा को जोड़ने वाली मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. कई सालों से जिस एयर मोबिलिटी की योजना पर काम हो रहा था, वह अब आम लोगों की डेली लाइफ का हिस्सा बन सकती है.इस सर्विस का मकसद ऐसा ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाना है, जहां ट्रैफिक वाले इलाकों में भी कम समय में शॉर्ट डिस्टेंस की यात्रा की जा सके.

बैंक और बाजार पर ब्रेक: मार्च में कब-कब रहेगी छुट्टी, पूरी लिस्ट देखें

नई दिल्ली फरवरी का महीना अपनी समाप्ति की ओर है और मार्च 2026 की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में अगर आप मार्च में बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले बैंक छुट्टियों की सूची जरूर देख लें। कई बार जरूरी काम के लिए बैंक शाखा में जाना पड़ता है, लेकिन छुट्टी होने पर काम अटक सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आधिकारिक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, मार्च 2026 में अलग-अलग राज्यों में कुल 18 दिन बैंक बंद रहेंगे। इनमें साप्ताहिक अवकाश, दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा विभिन्न राज्यों के त्योहार भी शामिल हैं। मार्च की शुरुआत 1 मार्च (रविवार) से होगी, जो देश भर में साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 2 मार्च (सोमवार) को होलिका दहन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे। 3 मार्च (मंगलवार) को होली के मौके पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब समेत लगभग 15 राज्यों में बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी। वहीं, 4 मार्च (बुधवार) को कुछ राज्यों और शहरों में होली के दूसरे दिन भी बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद, 8 मार्च (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 13 मार्च (शुक्रवार) को मिजोरम में चापचर कुट पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। 14 मार्च को दूसरे शनिवार और 15 मार्च को रविवार होने से देश भर में बैंक बंद रहेंगे। 17 मार्च (मंगलवार) को जम्मू और श्रीनगर में शब-ए-कद्र के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। 19 मार्च (गुरुवार) को महाराष्ट्र सहित 11 राज्यों में गुड़ी पड़वा, उगादी और नवरात्रि की शुरुआत के चलते अवकाश रहेगा। 20 मार्च (शुक्रवार) को ईद-उल-फितर पर देश भर में बैंक बंद रहेंगे। 21 मार्च (शनिवार) को रमजान ईद और सरहुल पर्व के अवसर पर भी बैंक बंद रहेंगे। 22 मार्च (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 26 मार्च (गुरुवार) को श्रीराम नवमी के कारण बैंक बंद रहेंगे, जबकि 27 मार्च (शुक्रवार) को कुछ राज्यों में राम नवमी के बाद दशमी के उपलक्ष्य में अवकाश रहेगा। 28 मार्च को चौथा शनिवार और 29 मार्च को रविवार होने से देश भर में बैंक बंद रहेंगे। महीने के अंत में 31 मार्च (मंगलवार) को श्री महावीर जयंती के अवसर पर लगभग 15 राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। हालांकि शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। इन माध्यमों से आप पैसे का लेन-देन, फंड ट्रांसफर और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। मार्च में बैंक छुट्टियों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी कुल 12 दिन बंद रहेगा। 3 मार्च (होली), 26 मार्च (श्रीराम नवमी) और 31 मार्च (श्री महावीर जयंती) को बाजार में कारोबार नहीं होगा। इसके अलावा शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश के चलते कुल 9 दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में, मार्च महीने में बैंक या बाजार से जुड़े किसी भी जरूरी काम की योजना बनाते समय छुट्टियों की सूची अवश्य जांच लें, ताकि आपका काम समय पर और बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके।

खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग में प्रमोशन की बौछार, इंक्रीमेंट और वेतन पर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। वैसे तो वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने में 18 महीने या उससे ज्यादा का समय लग सकता है लेकिन इससे पहले कर्मचारियों की डिमांड जारी है। इसी कड़ी में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) और NC-JCM की मीटिंग हुई है। इस मीटिंग में 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में रक्षा, रेलवे, डाक, आयकर, लेखा एवं लेखा परीक्षा सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। क्या है डिमांड? इस बैठक में केंद्र सरकार के सैलरी स्ट्रक्चर, प्रमोशन पॉलिसी, एनुअल सैलरी इंक्रीमेंट और पेंशन सुधार जैसे विषय पर चर्चा हुई। बैठक में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी व्यापक चर्चा की गई। कर्मचारी संगठनों ने प्रत्येक कर्मचारी को सेवा अवधि में कम से कम पांच प्रमोशन सुनिश्चित करने की मांग रखी। उनका कहना है कि निचले स्तर पर काम कर रहे प्रतिभाशाली कर्मचारियों में सीमित प्रमोशन अवसरों के कारण निराशा बढ़ रही है। संगठनों की मांग है कि कर्मचारियों और लगभग 68 लाख पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। इसके अलावा, पेंशन व्यवस्था पर भी जोरदार बहस हुई। प्रतिनिधियों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की पुरानी मांग दोहराई। बैठक में फैमिली यूनिट की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सैलरी निर्धारण में माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए, इसलिए परिवार इकाई का दायरा बढ़ाया जाए। 18 सवालों के जवाब देने पर बनी सहमति ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के महासचिव सी. श्रीकुमार के मुताबिक 8वें वेतन आयोग द्वारा वेबसाइट पर पूछे गए 18 सवालों के जवाब तय समयसीमा के भीतर भेजने पर सहमति बनी है। अगले 10 से 15 दिनों में सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों को समेटते हुए एक ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) से वंचित शहरों में कर्मचारियों को वर्तमान में 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने और इंटरनेट जैसी सेवाओं के लिए भत्ता शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया। बता दें कि 10 मार्च को अगली बैठक में साझा ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इसे 1-2 सप्ताह के भीतर 8वें वेतन आयोग को सौंपे जाने की संभावना है।

शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, 5 लाख करोड़ का नुकसान

मुंबई  सप्‍ताह का आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार निवेशकों के लिए काफी दर्दनाक रहा. इंट्राडे के दौरान सेंसेक्‍स 1000 अंक और निफ्टी 320 अंक से ज्यादा टूट गए थे. हालांकि कारोबार बंद होने पर शेयर बाजार में थोड़ी रिकवरी रही, फिर भी सेंसेक्‍स 961 अंक या 1.17 फीसदी टूटकर 81287 लेवल पर बंद हुआ और निफ्टी 317 अंक या 1.25 फीसदी गिरकर 25178 पर आ गया.  बीएसई टॉप 30 शेयरों में से 25  शेयर लाल निशान पर बंद हुए. सबसे ज्‍यादा गिरावट सनफार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व और इंडिगो के शेयरों में रही. एफएमसीजी के साथ ही कुछ आईटी शेयरों में भी दबाव दिखाई दिया. बैंकिंग स्‍टॉक भी दबाव में कारोबार करते हुए दिखाई दिए.  क्‍यों आई ये बड़ी गिरावट?     एक्‍सपर्ट्स इस गिरावट को जियो-पॉलिटिकल टेंशन से जोड़ रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अपडेट सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच अभी कोई समझौता होता हुआ नहीं दिख रहा है. उधर, अमेरिकी सेना  अपनी तैयारियों में जुटी हुई है.      इसके अलावा, अफगानिस्तान और पाकिस्‍तान के बीच जंग छिड़ गई है, जिस कारण एशियाई बजारों में भी दबाव दिखा है, जिस कारण भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित हुआ है.     अमेरिकी S&P 500 और यूरोपीय बाजारों में कमजोरी देखने को मिली है.  टेक-हेवी एशियाई बाजारों ने भी NASDAQ की कमजोरी को फॉलो किया, जिससे भारतीय बाजार दबाव दिखाई दिया.     विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली हो रही है.गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 3,465.99 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे शेयर बाजार में गिरावट हावी हुई.  5 लाख करोड़ स्‍वाहा भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के कारण बीएसई कैपिटलाइजेशन 468.49 लाख करोड़ से घटकर 463.51 लाख करोड़ हो चुका है. इस हिसाब से देखा जाए तो निवेशकों की वैल्‍यूवेशन में 5 लाख करोड़ रुपये की कटौती हुई है. 2,528  शेयरों में गिरावट  बीएसई पर 4,369 एक्टिव शेयरों में से आज 1,660 शेयरों में तेजी रही, जबकि 2,528  शेयर गिरावट पर बंद हुए और 181 शेयर अनचेंज रहे. 340  शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर थे और 100 शेयर 52 वीक के हाई पर पहु्ंच गए. 9 शेयरों में लोअर सर्किट रहा और 10 शेयर 52 वीक के हाई पर पहु्ंच गए. 

जैक डोर्सी ने अपनी कंपनी से 4000 लोगों को निकाला, AI के प्रभाव से बढ़ी छंटनी

 नई दिल्ली टेक दुनिया से बड़ी खबर सामने आई है. Twitter के को-फाउंडर जैक डॉर्सी की कंपनी Block Inc. ने करीब 4,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. यह संख्या कंपनी के कुल स्टाफ का लगभग 40 फीसदी बताई जा रही है. सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने इस बड़े कदम के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को वजह बताया है. अब तक कंपनियां छंटनी करते वक्त ये साफ तौर पर नहीं बताती थीं कि जॉब AI की वजह से जा रही है. लेकिन Jack Doresey ने ये साफ किया है कि उन्होंने अपनी कंपनी से लोगों को AI की वजह से ही निकाला है. Block एक फिनटेक कंपनी है जो Cash App और Square जैसी सेवाएं चलाती है. कंपनी का कहना है कि वह अब AI पर ज्यादा फोकस कर रही है और काम करने का तरीका बदल रही है. आर्थिक संकट में नहीं है कंपनी, फिर भी निकाले गए लोग जैक डॉर्सी  ने अपने संदेश में कहा कि कंपनी आर्थिक संकट में नहीं है. बिजनेस ठीक चल रहा है, लेकिन AI की वजह से अब कम लोगों के साथ ज्यादा काम संभव हो रहा है. डोर्सी ने कहा कि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और कंपनियों को समय रहते बदलाव करना होगा. उनके मुताबिक कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने में देर कर रही हैं. Block ने एक साथ बड़ा फैसला लेकर अपनी टीम का आकार छोटा कर दिया ताकि आगे की रणनीति साफ रहे. इस खबर के बाद शेयर बाजार में Block के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के शेयर करीब 20 से 25 फीसदी तक चढ़ गए. निवेशकों को लग रहा है कि AI के इस्तेमाल से कंपनी की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ सकता है. हालांकि कर्मचारियों के लिए यह बड़ा झटका है. इतनी बड़ी संख्या में नौकरी जाने से टेक सेक्टर में चिंता बढ़ गई है. पिछले कुछ समय से दुनिया भर में टेक कंपनियां स्टाफ कम कर रही हैं, लेकिन इस बार साफ तौर पर AI को वजह बताया जाना चर्चा का विषय बन गया है. कर्मचारियों को मिलेगा मुआवजा और सपोर्ट जैक डॉर्सी  ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों की नौकरी गई है, उन्हें नियमों के मुताबिक मुआवजा और कुछ समय तक सपोर्ट दिया जाएगा. अलग-अलग देशों में नियम अलग होने की वजह से यह पैकेज भी अलग हो सकता है. इस फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या AI अब सच में इंसानों की नौकरियां ले रहा है? टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI पूरी तरह नौकरियां खत्म नहीं करता, बल्कि काम की प्रकृति बदल देता है. जिन भूमिकाओं में दोहराव वाला काम ज्यादा है, वहां AI तेजी से जगह बना रहा है. Block का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में और कंपनियां भी इसी दिशा में जा सकती हैं. अगर AI से कम स्टाफ में ज्यादा काम हो सकता है, तो कंपनियां लागत कम करने के लिए ऐसे फैसले ले सकती हैं. टेक इंडस्ट्री में यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है. यह एक बड़े ट्रेंड की तरफ इशारा करता है, जहां AI अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि बिजनेस रणनीति का हिस्सा बन चुका है. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दूसरी बड़ी कंपनियां क्या कदम उठाती हैं.

चांदी ने पकड़ी रफ्तार, सोने के भाव में उछाल, US की नीतियों का असर

 नई दिल्‍ली सोना और चांदी की कीमतों में एक बार फिर उछाल देखी जा रही है. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट (MCX) पर सोना 400 रुपये चढ़कर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जबकि चांदी के दाम में भी 8000 रुपये से ज्‍यादा की तेजी आई है. 5 मार्च वायदा वाली चांदी 2.75 लाख रुपये के ऊपर कारोबार कर रही है.  वहीं कुछ दिन पहले चांदी की कीमत 2.25 लाख रुपये के करीब थी और सोने के दाम 1.37 लाख रुपये पर बने थे, लेकिन कुछ ही दिनों में इन मेटल्‍स ने एक बार फिर तेजी दिखाई है. सोने चांदी के दाम में तेजी को लेकर एक्‍स्‍पर्ट्स का मानना है कि अमेरिका अलग- अलग खबरें आने के कारण इनके दामों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.  सोने-चांदी के दाम में फिर क्‍यों आई तेजी?  सोने और चांदी के दाम में तेजी का बड़ा कारण अमेरिका में हुए दो बड़े अपडेट हैं. अमेरिका में टैरिफ को लेकर अनिश्‍चितताएं बनी हुई हैं. इसके अलावा, निवेशक अमेरिका और ईरान  के बीच बातचीत में लेटेस्‍ट डेवलपमेंट को भी देख रहे हैं, जिस कारण निवेशक सेफ निवेश की ओर बढ़ रहे हैं. यही कारण है कि आज सोने और चांदी के भाव में तेजी देखने को मिली है.  जिनेवा में मीडिएटर ओमान के मुताबिक अमेरिका और ईरान ने तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत में कुछ प्रोग्रेस की खबर दी है. हालांकि, गुरुवार को घंटों की बातचीत के बावजूद, कोई साफ नतीजा नहीं निकला जिससे अमेरिका संभावित हमलों की संभावना को खारिज किया जा सके, जबकि इस इलाके में मिलिट्री की बड़ी तैयारी जारी है. सीधे शब्‍दों में कहें तो अभी अमेरिका और ईरान दोनों बातचीत में सहमत नहीं हो सके हैं, जिस कारण सोने और चांदी जैसे मेटल में तेजी देखी जा रही है.  दूसरी ओर, अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान के बीच भी वॉर शुरू हो गया है, जिस कारण गोल्‍ड सिल्‍वर के दाम तेजी पर हैं और एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है.   इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी के दाम इंटरनेशनल मार्केट में शुक्रवार को सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी रहीं.  स्पॉट गोल्ड 5,187.39 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना रहा, जबकि स्पॉट सिल्वर 0.6% बढ़कर $88.81 प्रति औंस पर पहुंच गया, जो बुधवार को तीन हफ्ते के हाई पर पहुंचने के बाद की तेजी है.