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सस्ता होगा सोना? जानिए क्यों US फेड की बैठक बन सकती है गेमचेंजर

नई दिल्‍ली  सोने की चमक ने सबको चकाचौंध कर रखा है। इसने एक साल में ताबड़तोड़ तेजी दर्ज की है। इस दौरान यह करीब 53% तक चढ़ा है। दूसरे किसी भी एसेट क्‍लास में ऐसी बंपर तेजी देखने को नहीं मिली है। हालांकि, 17 सितंबर से पहले सोने की कीमतों में तेजी पर कुछ अंकुश लग सकता है। अगले हफ्ते बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व नीतिगत दरों पर फैसला लेने वाला है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि आगे चलकर सोने की चमक बनी रहेगी। वे टैर‍िफ के असर, ब्रिटेन और यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों और बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की बैठकों पर नजर रखेंगे। सोने की कीमतों में तेजी आई है। लेकिन, अब यह रफ्तार धीमी हो सकती है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रणव मेर का कहना है कि निवेशक अब सतर्क हो गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में सोने के दाम काफी बढ़ गए हैं। इसलिए, वे अब और ज्यादा पैसा लगाने से डर रहे हैं। 17 सितंबर पर दुन‍िया की नजर मेर ने कहा कि पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के युद्ध के कारण सोने के दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोने और चांदी के दाम बढ़ सकते हैं। लेकिन, निवेशकों को फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों का इंतजार है। ऐसे में कीमतों में कुछ बदलाव हो सकता है। फेडरल रिजर्व की दो दिन की बैठक 16 सितंबर को शुरू होगी। नीतिगत फैसले की घोषणा 17 सितंबर को की जाएगी। एंजल वन के प्रथमेश माल्या ने कहा कि अमेरिका में भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगने और रूस-यूक्रेन के बीच लड़ाई बढ़ने से सोने के दाम में तेजी आना कोई हैरानी की बात नहीं है। सोने के दाम में तेजी क्यों आई? भू-राजनीतिक तनाव पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश मानकर इसमें पैसा लगा रहे हैं। व्यापार शुल्क (टैरिफ) अमेरिका में भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगने से भी सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।   आगे क्या हो सकता है? कीमतों में स्थिरता फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले तक सोने के दाम स्थिर रह सकते हैं। तेजी जारी रह सकती है जानकारों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और अन्य वैश्विक कारकों के कारण आगे भी सोने के दाम बढ़ सकते हैं।   निवेशकों को क्या करना चाहिए? सतर्क रहें सोने में निवेश करते समय सावधानी बरतें और बाज़ार के उतार-चढ़ाव पर नज़र रखें। फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार करें कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले फेडरल रिजर्व के 17 सितंबर के फैसले का इंतजार करें, क्योंकि यह सोने के भविष्य के दाम तय कर सकता है। प्रणव मेर ने कहा, 'सोने की कीमतों में सकारात्मक रफ्तार जारी रही और यह लगातार चौथे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि, सप्ताह के मध्य में बढ़त की रफ्तार कुछ धीमी हो गई। पिछले चार हफ्तों में कीमतों में 10 फीसदी से ज्‍यादा की बढ़ोतरी के बाद निवेशक और कारोबारी अब सतर्क हो गए हैं। मौजूदा कीमतों पर नए तेजी के सौदे जोड़ने से हिचक रहे हैं।'    

iPhone खरीदना है तो पहले खरीदो पास! Flipkart के Big Billion Days का अजीब ऑफर वायरल

नई दिल्ली अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट की स्वामित्व वाली इंडियन ई-कॉमर्स वेबसाइट Flipkart ने Big Billion Days सेल के लिए एक अनोखी स्कीम शुरू की है. सस्ते में iPhone खरीदने के लिए कंपनी ने 5000 रुपये का पास बेचना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर इस स्कीम की लोग आलोचना भी कर रहे हैं. दरअसल Flipkart ने Big Billion Days के लैंडिंग पेज पर लिखा है कि iPhone 16 Pro सिर्फ 70 हजार रुपये में ही मिलेगा. जबकि iPhone 16 Pro की कीमत 1 लाख रुपये से ऊपर है. ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक साल के अंदर Apple का कोई Pro फोन एक सिर्फ 70 हजार रुपये में मिलने लगा हो.  Flipkart के मुताबिक़ जो यूजर 5000 रुपये का पास खरीदता है उसे iPhone 16 Pro सस्ता मिलेगा. कंपनी ने दावा किया है कि Big Billion Days सेल के पहले 24 घंटे में एर्ली ऐक्सेस के तहत उन्हीं यूजर्स को सस्ते iPhone मिलेंगे जो 5000 रुपये का पास खरीदेंगे.  Flipkart का 5000 रुपये पास वाला ऑफ़र तीन स्मार्टफोन्स के लिए है. इनमे iPhone 16 Pro 128GB, iPhone 16 Pro 256GB और iPhone 16 Pro Max 256GB मॉडल्स शामिल हैं.  Flipkart ने दावा किया है कि सेल के दौरान iPhone 16 Pro सिर्फ 70 हज़ार रुपये से मिलना शुरू हो जाएगा. जबकि इसकी लॉन्च क़ीमत 1 लाख 30 हज़ार रुपये है.  iPhone 16 Pro Max को यूजर्स 90 हजार रुपये में ख़रीद सकेंगे, जबकि इसकी लॉन्च क़ीमत लगभग 1 लाख 45 हज़ार रुपये थी. आईफोन को लेकर भारत में काफी क्रेज है और कई लोगों ने पास खरीद भी लिया है. X पर कई लोगों की शिकायत है कि एरर की वजह से खरीद नहीं पा रहे हैं.  आपके लिए जानना इंपॉर्टेंट है कि ये 5000 रुपये वाला पास नॉन रिफंडेबल है और इसे आप कैंसिल भी नहीं करा सकते हैं. यानी अगर आप फैसला बदलते हैं तो आपको ये पैसा वापस नहीं मिलेगा. Flipkart का ये पास Big Billion Days Sals के शुरुआती 24 घंटे तक ही वैलिड रहेगा. यानी आप इसे अर्ली ऐक्सेस के तौर पर यूज कर पाएंगे. एक कस्टमर सिर्फ एक ही पास खरीद सकेगा.  फ़िलहाल ये साफ़ नहीं है कि जिन यूजर्स को 5000 रुपये वाला पास खरीदने के बाद भी iPhone 16 Pro या Pro Max नहीं मिलता है तो उस केस में क्या होगा? मुमकिन है कंपनी पैसे वापस कर दे. लेकिन कंपनी अगर ऐसा नहीं करती है तो ये यूजर्स के साथ नाइंसाफी होगी. 

डिजिटल पेमेंट में बड़ा अपडेट: UPI की लिमिट बढ़ी, अब एक दिन में 10 लाख रुपये ट्रांसफर संभव

नई दिल्ली भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने कई कैटेगरी में यूपीआई लेनदेन की लिमिट में बढ़ोतरी का ऐलान किया था, जो आज से प्रभावी होने जा रही है. हाई वैल्यू डिजिटल ट्रांजेक्शन को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस के जरिए आसान बनाने की दिशा बड़ा कदम उठाते हुए एनपीसीआई ने लेनदेन की लिमिट को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है. यूपीआई पेमेंट के नियमों में ये अहम बदलाव 15 सितंबर 2025 से लागू हो रहे हैं. इसके बाद अब इंश्योरेंस, कैपिटल मार्केट, लोन ईएमआई और ट्रैवल कैटेगरी में प्रति ट्रांजैक्शन 5 लाख रुपये, जबकि डेली 10 लाख रुपये तक का लेनदेन किया जा सकेगा.  कहां-कहां लागू होगी नई लिमिट यूपीआई पेमेंट की नई लिमिट पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतान पर प्रभावी होगी. मतलब वेरिफाइड कारोबारियों और संस्थाओं को पेमेंट पर ये बदलाव लागू होगा. इसके तहत कुछ कैटेगरी में अधिकतम 5 लाख रुपये, तो कुछ में मैक्सिमम 10 लाख रुपये तक का डेली ट्रांजेक्शन किया जा सकेगा.  बीते 24 अगस्त को जारी एक सर्कुलर में एनपीसीआई की ओर से इस बदलाव के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया था कि यूपीआई अब सबसे पसंदीदा पेमेंट मोड बन चुका है और बड़े ट्रांजेक्शन के लिए बढ़ती डिमांड को देखते हुए यूपीआई पेमेंट की डेली लिमिट को बढ़ाने का यह कदम उठाया जा रहा है. ये बढ़ी हुई लिमिट 5 लाख रुपये तक के टैक्स भुगतान से जुड़ी कैटेगरी के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं पर लागू होगी. UPI पेमेंट लिमिट में ये चेंज  कैपिटल मार्केट निवेश 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 10 लाख रुपये इंश्योरेंस पेमेंट 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 10 लाख रुपये GeM लेनदेन 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 10 लाख रुपये ट्रैवल पेमेंट 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 10 लाख रुपये क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 6 लाख रुपये मर्चेंट पेमेंट 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन कोई डेली लिमिट नहीं ज्वेलरी पेमेंट 2 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 6 लाख रुपये फॉरेक्स रिटेल (BBPS) 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 5 लाख रुपये डिजिटल अकाउंट ओपनिंग 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजेक्शन डेली लिमिट 5 लाख रुपये P2P पेमेंट लिमिट में बदलाव नहीं   यहां बता दें कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे को पैसे भेजने की लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये पहले की तरह ही एक लाख रुपये प्रति दिन रहेगी. एनपीसीआई द्वारा यूपीआई पेमेंट लिमिट में किया गया ये बदलाव खासतौर पर ऐसे यूपीआई यूजर्स के लिए राहत भरा है, जिन्हें पहले बड़े पेमेंट करने के लिए एक नहीं, बल्कि कई ट्रांजेक्शन करने पड़ते थे या ऑप्शनल बैंकिंग चैनल का सहारा लेना पड़ता था. इस बदलाव के बाद वे आसानी से हाई वैल्यू वाले लेनदेन कर पाएंगे. 

17 सितंबर को मिलेगी आराम की दिन! सरकारी छुट्टी पर बंद रहेंगे सभी शैक्षणिक संस्थान

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने आगामी छुट्टियों को लेकर एक अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार इस साल 17 सितंबर बुधवार को विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर सभी परिषदीय और मान्यता प्राप्त बेसिक विद्यालय बंद रहेंगे। यह छुट्टी सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए मान्य होगी। जिउतिया पर नहीं मिलेगी छुट्टी हर साल जिउतिया व्रत के लिए महिला शिक्षिकाओं को विशेष अवकाश दिया जाता है। यह व्रत इस साल 14 सितंबर को पड़ रहा है। हालाँकि चूंकि 14 सितंबर को रविवार है इसलिए इस दिन स्कूल वैसे ही बंद रहेंगे और महिला शिक्षिकाओं को अलग से छुट्टी नहीं मिलेगी। यह व्रत संतान की लंबी उम्र और कल्याण के लिए निर्जला रहकर किया जाता है। विश्वकर्मा पूजा की तैयारी शुरू विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कल-कारखाने और प्रतिष्ठान बंद रहते हैं। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जाती है। उन्नाव-सफीपुर मार्ग पर स्थित कब्बाखेड़ा के विश्वकर्मा मंदिर में भी पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यहां हर साल इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें स्कूली बच्चे भी भाग लेते हैं। 17 सितंबर को होने वाले इस कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों के भी शामिल होने की उम्मीद है।  

जनता को राहत: सरकार ने 12% टैक्स स्लैब घटाकर 5% किया, 99% वस्तुएं होंगी सस्ती

चेन्नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार ने 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 99 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इससे लोगों पर कर का बोझ कम होगा। ट्रेड एडं इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के ज्वाइंट कॉन्क्लेव में लोगों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार ने जीएसटी सुधार के तहत टैक्स स्लैब की संख्या को चार (5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत) से घटाकर दो (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) कर दिया गया है।" वित्त मंत्री ने आगे कहा, "जब लोगों को लगा कि सरकार ज्यादा टैक्स लगा रही है तो प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्स के बोझ को घटाने के लिए कदम उठाए। जीएसटी में कटौती का हमारे 140 करोड़ नागरिकों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री दिवाली से पहले देश को यह छूट देना चाहते थे, लेकिन हमें नवरात्रि से पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। यह सभी भारतीयों की जीत है।" वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य कर दिया है। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने बताया कि 2017 में केवल 65 लाख लोग की जीएसटी का भुगतान कर रहे थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ पर पहुंच गई है। साथ ही जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है, जो कि 2018 में 7.18 लाख करोड़ रुपए था। जीएसटी में कटौती का श्रेय राज्यों के साथ साझा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के मंत्री जीएसटी परिषद की शुरुआत से ही इसका हिस्सा रहे हैं, और यह निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया है। इस सफलता में राज्य सरकारों की भी भूमिका है। हमने 350 से ज्यादा वस्तुओं पर कर कम किया है और कर ढांचे को केवल दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। नए जीएसटी सुधार 22 सितंबर से लागू होंगे। नए जीएसटी ढांचे में सरकार ने 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब रखे हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत का अलग से टैक्स लगाया जाएगा।

भारत की अर्थव्यवस्था पर रघुराम राजन का विश्लेषण: विकास दर उत्साहजनक, मगर चुनौतियां बरकरार

नई दिल्ली  भारत की अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे ऊंचा स्तर है। यह आंकड़ा सतही तौर पर उत्साहजनक दिखाई देता है, लेकिन पूर्व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि इस पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। क्या है डिटेल स्पारएक्स (SparX) के मुकेश बंसल से बातचीत में रघुराम राजन ने कहा कि मजबूत वृद्धि के आंकड़े का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसके पीछे की असल सच्चाई को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा, “जब भी आंकड़े ऊंचे आते हैं तो खुशी होना स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह इतना ऊंचा क्यों है?” राजन ने खास तौर पर दो बड़ी चिंताओं की ओर इशारा किया। पहली, निजी निवेश का सुस्त रहना, जो लंबे समय तक टिकाऊ विकास के लिए बेहद अहम है। दूसरी, रोजगार सृजन की कमजोरी, जिससे विकास का लाभ आम जनता तक सीमित रूप से पहुंच पा रहा है। रघुराम राजन ने क्या कहा रघुराम राजन ने कहा कि भारत में महंगाई मापने का तरीका हकीकत को पूरी तरह नहीं दिखाता। उन्होंने समझाया, “क्या हम महंगाई सही तरीके से गिन रहे हैं? जब आप अर्थशास्त्रियों से बात करते हैं तो पता चलता है कि इसमें दिक्कतें हैं, क्योंकि यह असली महंगाई को पूरी तरह नहीं दिखाता। कभी यह हमारे लिए फायदे में होता है, कभी नुकसान में। अभी यह हमें फायदा दे रहा है, इसलिए हमारे आंकड़े अधिक अच्छे दिख रहे हैं।” राजन ने सिर्फ आंकड़ों की खामियों पर ही नहीं, बल्कि गहरी चिंताओं पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “आजकल ज्यादातर निवेश सरकार कर रही है, चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें। लेकिन निजी क्षेत्र उतना निवेश नहीं कर रहा। पिछले 10–12 साल से यह एक बड़ी चिंता है। अगर हम सचमुच इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, तो फिर निजी क्षेत्र निवेश क्यों नहीं कर रहा? यही सवाल हर अर्थशास्त्री को परेशान करता है।” रघुराम राजन ने कहा कि हाल ही में ग्रामीण मांग अच्छी फसल की वजह से मजबूत रही है। यह एक अच्छी बात है क्योंकि इससे अमीर और गरीब के बीच असमानता थोड़ी कम होती है। लेकिन शहरी इलाकों में खपत अभी भी कमजोर है। उन्होंने कहा, “हमें लंबे समय तक टिकाऊ खपत चाहिए। इसके लिए घर-परिवारों को रोज़गार को लेकर भरोसा होना चाहिए। लेकिन शहरी परिवार इस मामले में ज़्यादा चिंतित हैं। आपने खबरें देखी होंगी—जैसे टीसीएस (TCS) नौकरियां घटा रहा है। असली समस्या यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था उतनी अच्छी नौकरियां नहीं बना रही, जितनी जरूरत है ताकि मजदूरी की उम्र में आने वाले युवाओं को रोजगार मिल सके।” ट्रंप टैरिफ पर क्या बोले राजन अमेरिका की टैरिफ नीति पर राजन ने कहा कि इसका भारत पर असर सीमित होगा, लेकिन यह असर सब पर बराबर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि भारत से अमेरिका को होने वाले करीब 85 अरब डॉलर के निर्यात में से लगभग 40 अरब डॉलर का मूल्य भारत में ही जोड़ा जाता है। अगर मान भी लें कि निर्यात पूरी तरह बंद हो जाए, तो भी भारत को लगभग 40 अरब डॉलर यानी करीब 1% जीडीपी का नुकसान होगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ऐसा पूरी तरह से रुकना संभव नहीं है। राजन ने चेतावनी दी कि कुछ क्षेत्रों पर असर ज्यादा हो सकता है, जैसे टेक्सटाइल और झींगा पालन। उन्होंने सुझाव दिया कि “हमारे झींगा किसान ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि अमेरिकी बाजार में हमारे व्यापारी और कंपनियां अमेरिकी पक्षों के साथ मिलकर लॉबिंग करें। मौजूदा अमेरिकी प्रशासन छूट देने को तैयार दिखता है। उदाहरण के लिए, ब्राज़ील को 50% टैरिफ के बावजूद कई छूटें मिल चुकी हैं।” राजन ने अनुमान लगाया कि अगर ये टैरिफ कुछ महीनों तक बने रहते हैं, तो भारत की जीडीपी पर 0.2% से 0.4% तक का असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह निर्यातकों की मदद करे ताकि वे अमेरिकी लॉबिंग का इस्तेमाल कर नुकसान को कम कर सकें। चीन को लेकर क्या बोले रघुराम राजन ने भारत और चीन के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का “स्वाभाविक गठजोड़” चीन के साथ नहीं हो सकता, क्योंकि दोनों देशों के बीच गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है।

ऑटो सेक्टर के लिए खुशखबरी: जीएसटी रेट्स में कटौती, उद्योग में आएगा बड़ा सुधार

नई दिल्ली भारत में मेक इन इंडिया के 10 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, सप्लाई चेन को मजबूत करने, मजबूती बढ़ाने और रोजगार, निर्यात एवं हाई-क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग में योगदान देने का एक सही समय है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के 65वें वार्षिक सत्र में केंद्रीय मंत्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में घोषित जीएसटी सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक ऐतिहासिक सुधार है और ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। ट्रैक्टरों के लिए जीएसटी रेट्स को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सुधार प्रधानमंत्री की सराहना का पात्र है क्योंकि इससे स्पेयर पार्ट्स पहले से अधिक सस्ते हो जाएंगे, औपचारिकता मजबूत होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वैल्यू चेन में मांग बढ़ेगी। केंद्रीय मंत्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी रेट कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी रेट में कटौती का यह दौर आजादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार है और इससे हर भारतीय को फायदा होगा। उन्होंने आगे कहा कि 1.4 अरब लोगों में से एक भी नागरिक ऐसा नहीं होगा जिसे इन सुधारों से फायदा नहीं होगा। दिवंगत रतन टाटा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “लोग आप पर जो पत्थर फेंकते हैं, उन्हें स्वीकार करें और एक स्मारक बनाएं।” उन्होंने कहा कि राष्ट्र को चुनौतियों से विचलित नहीं होना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ-साथ सामूहिक प्रयास से भारत निरंतर मजबूत होता रहेगा। केंद्रीय मंत्री गोयल ने कोरोना के दौरान देश की मजबूती की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने 100 से अधिक देशों को दवाइयां और टीके (कुछ मुफ्त) उपलब्ध करवाने से लेकर बिना किसी मुनाफा के आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर सभी वैश्विक प्रतिबद्धता को पूरा किया है। उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत को वैश्विक रूप से विश्वास प्राप्त हुआ है और आज देश की पहचान एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद साझेदार के रूप में होती है।  

सोने ने रचा इतिहास: 61 साल में पहुँचा ₹113,736.75 तक, जानें साल-दर-साल रेट

मुंबई  सोने की खरीद करने वालों के लिए एक बहुत ही महत्पूर्ण जानकारी है. वह यह है कि 31 दिसंबर 2024 के बाद साल 2025 की शुरुआत से लेकर 12 सितंबर 2025 तक देश के सर्राफा बाजारों में सोना रिकॉर्ड की झड़ी लगाते हुए करीब 34,850 रुपये या 44.14% तक महंगा हो गया है. साल 2025 में अब तक इसकी कीमतों में उछाल आने के पीछे कई कारकों को अहम माना जा रहा है. इनमें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ नीतियां, कमजोर डॉलर, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदों और भारत में त्योहारी मांग प्रमुख हैं. सबसे अहम बात यह है कि सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत में आज से करीब 60 साल पहले 1964 में सोने की कीमत जानकर आप माथा पकड़कर बैठ जाएंगे, क्योंकि उस समय इसकी कीमत मात्र 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इन 60 सालों के दौरान सोने की कीमतों आई उछाल का मूल्यांकन करेंगे, उस समय से अब तक इसकी कीमत में करीब 1798 गुना बढ़कर 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है. इसका मतलब यह है कि आज के 60 साल पहले वर्ष 1964 में जिस व्यक्ति ने 100 सोना खरीदकर रख लिया होगा, आज वह करोड़पति हो गया होगा. आइए, टाइमलाइन के माध्यम से जानते हैं कि साल 2025 में सोने की कीमत ने कब-कब रिकॉर्ड बनाया और साल 1964 से लेकर 12 सितंबर 2025 तक साल-दर-साल सोना कैसे महंगा होता चला गया? 2025 में किन कारणों से सोना हुआ महंगा     वैश्विक स्तर पर: गोल्ड का अंतरराष्ट्रीय भाव 3,500 डॉलर प्रति औंस को पार कर 3,674 डॉलर तक पहुंचा, जो ट्रंप की टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रेरित है.     भारतीय बाजार में: कमजोर रुपये (88.16 तक गिरावट), सेंट्रल बैंक खरीदारी (आरबीआई ने 2025 में 72.6 टन सोना जोड़ा) और त्योहारी सीजन की मांग से सोना महंगा हुआ.     उपभोग का प्रभाव: भारत में 2025 का गोल्ड उपभोग 600-700 टन अनुमानित है, लेकिन ऊंची कीमतों से ज्वेलरी डिमांड 10% घट गई. 2025 में सोने की कीमतों ने कब-कब बनाया नया रिकॉर्ड वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है. 31 दिसंबर 2024 को सोने का भाव 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम था, यानी इस साल अब तक 34,850 रुपये या 44.14% की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है.        31 दिसंबर 2024: 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम     16 अप्रैल 2025: 94,579 रुपये प्रति 10 ग्राम     17 अप्रैल 2025: 97,310 रुपये प्रति 10 ग्राम     18 अप्रैल 2025: 97,580 रुपये प्रति 10 ग्राम     22 अप्रैल 2025: 1,01,350 रुपये प्रति 10 ग्राम     30 अप्रैल 2025: 1,02,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     23 जुलाई 2025: 1,00,510 रुपये प्रति 10 ग्राम     7 अगस्त 2025: 101,470 रुपये प्रति 10 ग्राम     8 अगस्त 2025: 101,900 रुपये प्रति 10 ग्राम     29 अगस्त 2025: 1,02,490 रुपये प्रति 10 ग्राम     2 सितंबर 2025: 1,06,140 रुपये प्रति 10 ग्राम     3 सितंबर 2025: 1,08,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     9 सितंबर 2025: 1,12,750 रुपये प्रति 10 ग्राम     10 सितंबर 2025: 1,10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     11 सितंबर 2025: 1,13,100 रुपये प्रति 10 ग्राम     12 सितंबर 2025: 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम स्रोत: दिल्ली एमसीएक्स 61 साल में 113,736.75 रुपये महंगा हो गया सोना आपको बता दें कि साल 1964 में जब गुलजारी लाल नंदा और लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे, तब भारत के सर्राफा बाजारों में सोने की कीमत करीब 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. आज करीब 61 साल बाद 12 सितंबर 2025 तक देश के सर्राफा बाजारों में इसकी कीमत 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई है. इन 61 सालों में सोना करीब 113,736.75 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया है. 1964 से 2025 तक सोने का भाव     1964: 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम     1965: 71.75 रुपये प्रति 10 ग्राम     1966: 83.75 रुपये प्रति 10 ग्राम     1967: 102.50 रुपये प्रति 10 ग्राम     1968: 162.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1969: 176.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1970: 184.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1971: 193.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1972: 202.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1973: 278.50 रुपये प्रति 10 ग्राम     1974: 506.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1975: 540.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1976: 432.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1977: 486.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1978: 685.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1979: 937.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1980: 1,330.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1981: 1670.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1982: 1,645.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1983: 1,800.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1984: 1,970.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1985: 2,130.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1986: 2,140.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1987: 2,570.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1988: 3,130.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1989: 3,140.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1990: 3,200.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1991: 3,466.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1992: 4,334.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1993: 4,140.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1994: 4,598.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1995: 4,680.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1996: 5,160.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1997: 4,725.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1998: 4,045.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1999: 4,234.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2000: 4,400.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2001: 4,300.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2002: 4,990.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2003: 5,600.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2004: 5,850.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2005: 7,000.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2007: 10,800.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2008: 12,500.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2009: 14,500.00 रुपये … Read more

अब शैम्पू, साबुन और जैम होंगे सस्ते, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने किया दामों में बड़ा कटौती

नई दिल्‍ली  आप भी अगर हर महीने डव शैम्पू, हॉर्लिक्स, किसान जैम या लाइफबॉय साबुन खरीदते हैं तो आपका खूब पैसा आने वाले समय में बचने वाला है. देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने इन लोकप्रिय प्रोडक्ट्स के दाम घटाने का ऐलान कर दिया है. नई कीमतें 22 सितंबर से लागू हो जाएगी. यह कदम सरकार के जीएसटी में कटौती करने के बाद उठाया गया है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अखबारों में विज्ञापन देकर यह रेट कम करने की जानकारी दी है. एचयूएल का कहना है कि संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) वाले नए पैक जल्द ही बाजार में पहुंच रहे हैं. कहीं-कहीं पर ग्राहकों को बढ़े हुए ग्राम वाले पैक भी मिल सकते हैं, यानी या तो आपको सस्ता दाम मिलेगा या फिर ज्यादा मात्रा उसी दाम में. नई रेट लिस्‍ट प्रोडक्ट                                                   पुराना रेट           नया रेट डव शैम्पू (340 एमएल)                           ₹490           ₹435 हॉर्लिक्स (200 ग्राम)                                     ₹130           ₹110 किसान जैम (200 ग्राम)                           ₹90                  ₹80 लाइफबॉय साबुन (75 ग्राम × 4 पैक)          ₹68                 ₹60 डव से लेकर लाइफबॉय तक सब सस्‍ता 22 सितंबर से 340 एमएल की डव शैम्पू की बोतल ₹490 की जगह ₹435 में मिलेगी. बच्चों और बड़ों की पसंद हॉर्लिक्स का 200 ग्राम जार पहले ₹130 में मिलता था, वह ₹110 में उपलब्ध होगा. सुबह के नाश्ते में अक्सर इस्तेमाल होने वाला 200 ग्राम किसान जैम भी सस्ता हो गया है. इसकी कीमत ₹90 से घटाकर ₹80 कर दी गई है. इसके अलावा, हर घर में इस्तेमाल होने वाला लाइफबॉय साबुन (75 ग्राम × 4 पैक) भी अब ₹68 की बजाय ₹60 में मिलेगा.

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा समर्थन, कम महंगाई और ब्याज दरें बढ़ाएंगी घरेलू मांग

नई दिल्ली एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के बीच कम हेडलाइन मुद्रास्फीति और ब्याज दरें अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करेंगी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में अब हेडलाइन मुद्रास्फीति पहले के 3.5 से कम होकर 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप इस वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति में 140 आधार अंकों (1.4 प्रतिशत) की गिरावट आएगी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "इस तीव्र नरमी का अर्थ है कि इस वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति में 140 आधार अंकों की गिरावट आएगी, जिससे मौद्रिक नीति में ढील की गुंजाइश बनेगी। हमारा मानना है कि आरबीआई इस वर्ष दरों में 25 आधार अंकों की अतिरिक्त कटौती करेगा।" आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में मामूली रूप से बढ़कर 2.1 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 1.6 प्रतिशत थी और आरबीआई के 2 प्रतिशत के लोअर टॉलरेंस बैंड को पार कर गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति बहुत निचले स्तर से ऊपर जाने लगी है, जिसमें सांख्यिकीय निम्न-आधार प्रभाव भी शामिल है। ग्रामीण क्षेत्र में सीएफपीआई आधारित खाद्य मुद्रास्फीति जुलाई, 2025 में -1.74 प्रतिशत की तुलना में अगस्त में -0.70 प्रतिशत (अनंतिम) दर्ज की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि अत्यधिक बारिश खरीफ फसलों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, जिसका संभावित रूप से खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ने यह भी नोट किया कि गैर-खाद्य मुद्रास्फीति सौम्य बनी हुई है या आगे भी कम होने की उम्मीद है, जिसे तेल की कम कीमतों और जीएसटी दरों में कटौती के कारण कोर मुद्रास्फीति में नरमी का समर्थन प्राप्त है। केरोसिन, बिजली और जलाऊ लकड़ी की कम कीमतों के कारण ईंधन मुद्रास्फीति 2.7 प्रतिशत से घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कोर मुद्रास्फीति 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में मुद्रास्फीति में गिरावट आई।