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योगी सरकार 13 से 19 मई तक परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में आयोजित करेगी ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’

अब स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ मिलेगी भारतीय भाषाओं और सांकेतिक संवाद की सीख  योगी सरकार 13 से 19 मई तक परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में आयोजित करेगी 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026'  नई शिक्षा नीति-2020 को जमीन पर उतारते हुए बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा पर जोर – पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज को भी शिविर से जोड़कर बच्चों को दिया जाएगा व्यावहारिक प्रशिक्षण – भविष्य में बच्चों में संवाद क्षमता, भाषाई समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने वाला बड़ा अभियान बनेगा 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' लखनऊ  योगी सरकार अब शिक्षा को भारतीय संस्कृति, संवाद कौशल और सामाजिक समावेश से जोड़ते हुए नई पीढ़ी को भारतीय भाषाई विरासत से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में 13 से 19 मई तक 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आयोजित किए जाएंगे, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ भारतीय भाषाओं और सांकेतिक संवाद की भी सीख दी जाएगी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य अधिकारियों को मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के विजन को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। शिविर के दौरान बच्चे अपनी मातृभाषा के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं से परिचित होंगे। संवाद कौशल विकसित करेंगे और पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) की बुनियादी जानकारी भी प्राप्त करेंगे। योगी सरकार शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर बच्चों को भारतीय संस्कृति, विविधता और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने का माध्यम भी बना रही है। यह शिविर भाषा सीखने के कार्यक्रम के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीयता, सांस्कृतिक समरसता और राष्ट्रीय एकता से जोड़ने वाले अभियान के रूप में भी स्थापित हो रहा है। योगी सरकार अब प्रदेश में शिक्षा को भारतीयता, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक समावेश से जोड़कर नई दिशा देने की ओर अग्रसर हो चुकी है। 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आने वाले समय में बच्चों में संवाद क्षमता, भाषाई समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने वाला बड़ा अभियान बन सकता है। बहुभाषावाद और भारतीय संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा शिविर का उद्देश्य बच्चों में भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान और बहुभाषावाद की समझ विकसित करना है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी मातृभाषा के अलावा दूसरी भारतीय भाषाओं में भी बुनियादी संवाद कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता की सबसे मजबूत कड़ी है। इसी सोच के अंतर्गत योगी सरकार द्वारा स्कूलों में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को मजबूत करेगी सांकेतिक भाषा की पहल शिविर में इंडियन साइन लैंग्वेज को शामिल किया जाना योगी सरकार की समावेशी शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आरपीडब्ल्यूडी  एक्ट-2016 के अनुरूप बच्चों को सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि समाज में संवेदनशीलता और समावेश की भावना को बढ़ावा मिल सके। एससीईआरटी द्वारा पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से इंडियन साइन लैंग्वेज से जुड़ी शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों इसका प्रभावी उपयोग कर सकें।

‘कृष्णावतारम्’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में भक्तिमय हुआ लोकभवन, CM योगी ने की बड़ी घोषणा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म कृष्णावतारम् को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया है। रविवार को मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद राज्यपाल आनंदीबेन व सीएम योगी ने दोनों उप मुख्यमंत्री, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने एक साथ यह फिल्म देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इसे टैक्स फ्री करने को घोषणा की। राजधानी स्थित लोकभवन सभागार उस समय पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जब फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान कृष्णा कृष्णा, राधे राधे के जयघोष से पूरा सभागार गूंज उठा। इस दौरान सभागार खचाखच भरा रहा और फिल्म को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच पर कलाकारों का सम्मान भी किया। फिल्म में द्वापर युग और सनातन संस्कृति की झलक फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में द्वापर युग, भारतीय पुरातन संस्कृति और सनातन परंपरा के विभिन्न आयामों को भव्यता के साथ दर्शाया गया है। फिल्म की सबसे खास बात यह रही कि इसमें भगवान कृष्ण के साथ राधा, रुक्मिणी और सत्यभामा की प्रेम कथाओं को अलग-अलग स्वरूपों में प्रस्तुत किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वृंदावन बिहारी लाल की जय और भारत माता के जयकारे लगाए। ढाई घंटे तक एक साथ बैठा रहा मंत्रिमंडल उन्होंने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आज मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्री पूरे मंत्रिमंडल के साथ इस अद्भुत कार्यक्रम में सहभागी बने। करीब ढाई घंटे तक सभी एक साथ यहां बैठे रहे और हर एक चेहरे पर नई रौनक दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति से जुड़ी भगवान श्री कृष्ण पर आधारित इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के साथ हम सभी यहां जुड़े हैं। फिल्म के कलाकार भी यहां उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के रूप में सत्यभामा का किरदार निभाने वाली कलाकार का नाम भी संस्कृति है, जिन्होंने इस भूमिका को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने लिया सीएम योगी से आशीर्वाद मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम सभी ने एक साथ इस फिल्म को देखा। यह भारत की संस्कृति और परंपराओं से जुड़े इतिहास को समेटते हुए तथा पुरातन विरासत को मुख्य धारा में प्रस्तुत करने वाली फिल्म है। इस दौरान फिल्म की मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी ने निर्माता-निर्देशक और फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों को धन्यवाद भी दिया। जो नए मंत्री बने हैं, उनके स्वागत के लिए यादगार क्षण मुख्यमंत्री ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा भी की। उन्होंने सूचना विभाग को प्रत्येक जनपद में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित कराने में सहयोग करने का निर्देश दिया, जिससे बच्चे और युवा इसे देखकर अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन विरासत के बारे में समझ सकें। उन्होंने कहा कि जब हम बरसाना, मथुरा और वृंदावन में जाते हैं तो वहां संबोधन राधे-राधे का ही होता है। उन्होंने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णावतारम् की मुख्य पात्र संस्कृति राज्यपाल की नातिन हैं और किसी भी नानी के लिए इससे अद्भुत क्षण और कोई नहीं होगा कि पालन-पोषण कर जिस बच्ची को आगे बढ़ाया है, आज उसे इतना बेहतर काम करते हुए वे देख रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार को सम्मान मिलना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए : राज्यपाल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नए मंत्रियों को शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हिंदी, तमिल और तेलुगु में की गई रिलीज यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज की गई है। फिल्म के निर्देशक हार्दिक गज्जर हैं। फिल्म में सिद्धार्थ गुप्ता, संस्कृति, सुष्मिता भट्ट और निवासिनी कृष्णन मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, जैकी श्रॉफ और आशुतोष राणा समेत कई बड़े कलाकार अपने किरदारों के जरिये छाप छोड़ने में सफल रहे।

काशी में यज्ञ-हवन के बीच 11 लोगों ने किया धर्म परिवर्तन, बोले- ‘अब नटराज शिव की शरण में’

वाराणसी धर्मनगरी वाराणसी के सेवापुरी विकास खंड अंतर्गत बाराडीह भूसौला गांव में आस्था और भक्ति का एक अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां तीन मुस्लिम परिवारों के 11 सदस्यों ने पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ 'घर वापसी' करते हुए सनातन धर्म को स्वीकार किया। धर्म जागरण मंच काशी जिला द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यज्ञ, हवन और मंत्रोच्चार के बीच इन लोगों ने हिंदू धर्म में लौटने की घोषणा की। सनातन धर्म अपनाने वाले सभी लोग 'नट' बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। भुसवला पेट्रोल पंप के पीछे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सफी नट, मुख्तार और वकील के परिवारों ने भाग लिया। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि उनके पूर्वजों ने करीब चार पीढ़ी पहले डर और प्रलोभन के वश में आकर सनातन धर्म को छोड़ दिया था और इस्लाम स्वीकार कर लिया था। लेकिन उनके मन में हमेशा से अपने मूल जड़ों के प्रति सम्मान बना रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम धर्म की मान्यताओं के बीच उन्हें एक 'घुटन' महसूस होती थी और वे लंबे समय से अपने आराध्य की शरण में लौटना चाहते थे। नटराज भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था कार्यक्रम के दौरान इन परिवारों ने बताया कि नट बिरादरी सदियों से 'नटराज' भगवान शिव की उपासक रही है। उन्होंने कहा, "हम लोग जन्मजात नटराज शिव के भक्त हैं। चार पीढ़ियों का अंतराल भले ही रहा हो, लेकिन हमारी सांस्कृतिक विरासत और भक्ति भगवान शिव से ही जुड़ी है। अब हम भगवान नटराज शिव की शरण में वापस आ गए हैं और आजीवन उन्हीं की आराधना करेंगे।" वैदिक अनुष्ठान और नए नामकरण शुद्धि कार्यक्रम के दौरान पंडितों और धर्म जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य यज्ञ संपन्न कराया। 11 सदस्यों ने हवन कुंड में आहुति डाली, जिसके बाद उन्हें गंगाजल से पवित्र किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी को माथे पर तिलक-चंदन लगाया गया और कलाई पर रक्षा सूत्र (कलावा) बांधकर सनातन धर्म में उनका स्वागत किया गया। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने अपने पुराने नामों को त्यागकर सनातन धर्म के अनुरूप नए नाम भी स्वीकार किए। सामाजिक संगठनों की मौजूदगी इस धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर धर्म जागरण मंच के जिला संयोजक प्रदीप, रामाश्रय और आनंद समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि इन परिवारों ने बिना किसी दबाव के अपनी स्वेच्छा से घर वापसी की है। बाराडीह भूसौला गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना की खासी चर्चा है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय स्तर पर सतर्कता भी बरती गई।

लखनऊ में दवा कीमतें बढ़ीं, इंसुलिन और जरूरी मेडिसिन हुईं महंगी

 लखनऊ  महंगाई की मार अब रोगियों पर भी पड़ने लगी है। डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की कीमतों में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी गई है। पिछले साल भी करीब 10-15 प्रतिशत तक इजाफा हुआ था जिसका सीधा असर मधुमेह रोगियों की जेब पर पड़ रहा है। डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को जीवनभर नियमित दवाएं और इंसुलिन लेनी पड़ती हैं। खासकर, डायबिटीज-1 के रोगी इंसुलिन पर निर्भर होते हैं। दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों, आयात लागत और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी के कारण फार्मा कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी का कहना है कि डायबिटीज की कई दवाओं में इस्तेमाल होने वाला एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट विदेशों से आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल और शिपिंग लागत बढ़ने से दवाओं की उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है हाल के वैश्विक तनावों और सप्लाई चेन प्रभावित होने का असर भी दवा उद्योग पर पड़ा है। लखनऊ में डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन का सालाना करीब 80-90 करोड़ रुपये की खपत है। डायबिटीज के मरीजों का मासिक खर्च अब पहले की तुलना में 20 प्रतिशत तक बढ़ेगा। नई तकनीक वाली दवाओं और इंजेक्शन का उपयोग करने वाले मरीजों पर यह खर्च और अधिक पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह कई कंपनियों ने नई रेट लिस्ट जारी की हैं। कुछ ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में पहले ही 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि आने वाले समय में यह वृद्धि 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। डायबिटीज रोगी सर्वाधिक प्रभावित उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोग डायबिटीज रोग से पीड़ित हैं। ऐसे मरीजों को रोजाना दवाएं लेनी पड़ती हैं। दाम बढ़ने का असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के मरीजों पर सीधे पड़ता है। कई मरीज पहले ही महंगी दवाओं के कारण इलाज बीच में छोड़ देते हैं, ऐसे में कीमतों में और वृद्धि चिंता बढ़ाने वाली है। आईसीएमआर एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 4.9% वयस्क आबादी मधुमेह से पीड़ित है। हालांकि, यूपी में मधुमेह की दर देश में सबसे कम है, लेकिन चिंता की बात यह है कि यहां 18% लोग प्री-डायबिटिक हैं, जो भविष्य में डायबिटिक हो सकते हैं। दवा का नाम                                          पुराना दाम (₹)              नया दाम (₹) इंसुलिन ह्यूमलाग मिक्स-25 कार्ट्रिज              5,350                         6,000 रोजडे टैबलेट                                           212                            235 इस्टामेट टैबलेट                                       175                           195     दवाओं के दाम बढ़ाने-घटाने का निर्णय केंद्र सरकार करती है। हालांकि, हमारे विभाग को डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं महंगी होने की कोई सूची नहीं मिली है। सोमवार को इसके बारे में जानकारी करने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।                                      ब्रजेश कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन

स्वगणना प्रक्रिया शुरू, अनाज वाले सवाल पर बढ़ी चर्चा

लखनऊ यूपी में जनगणना 2027 के लिए स्वगणना शुरू हो चुकी है। अब लोग स्वगणना करा रहे हैं। पूछे जाने वाले सवाल उनको परेशान कर रहे हैं। परिवार कौन से मुख्य अनाज का उपयोग करता है? इसके विकल्प है गेहूं, चावल, बाजरा। अब उत्तर भारत में मुख्य रूप से गेहूं और चावल दोनों का उपयोग किया जाता है। समस्या यह है कि दोनों को विकल्प के रूप में नहीं रखा जा सकता है। अगर गेहूं चुनेंगे तो चावल मिट जाएगा और चावल विकल्प में चुनेंगे तो गेहूं मिट जाएगा। लोगों का कहना है कि एक साथ दोनों क्यों नहीं रखा जा सकता है। सहायक निदेशक जनगणना जेके श्रीवास्तव का कहना है कि इस सवाल को रखने का मुख्य उद्देश्य था कि किस क्षेत्र के लोग कौन सा मुख्य अनाज खाते हैं। जिससे आगे कुछ योजनाएं बनानी हो तो उसके अनुसार की जाए। प्रयागराज डीएम, मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वक्त स्वगणना हो रही है। तीन दिनों में अच्छा रिस्पांस मिला है। हम जिले के सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वो स्वगणना में हिस्सा लें और अपना फॉर्म समय रहते भरें। ऐसा करने पर बाद में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। इस पोर्टल पर कराएं स्वगणना http://se.census.gov.i n पोर्टल पर जाकर अपना राज्य, जिला भरकर भाषा व मोबाइल नंबर डालें और ओटीपी के बाद परिवार का मुखिया, गूगल मैप पर घर की लोकेशन भरने के बाद पूछे गए सवालों के जवाब देकर आसानी से स्वगणना कराई जा सकती है। अफसरों का कहना है कि प्रक्रिया में 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है। छह हजार से अधिक ने करा ली स्वगणना आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज में अब तक छह हजार से अधिक लोगों ने स्वगणना करा ली है। तीसरे दिन यूथ एवं स्पोर्ट्स डे के रूप में मनाया गया। जिला जनगणना अधिकारी विनीता सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग के अध्यक्ष सहित हंडिया तहसील व जसरा ब्लॉक के खिलाड़ियों, ग्रुप मुख्यालय 15 यूपी बटालियन के एनसीसी कैडेटों, अफसरों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों ने अपना स्वगणना फॉर्म भरा व इसे ऑनलाइन भी किया। जिला जनगणना अधिकारी ने बताया कि अभियान 21 मई तक चलेगा। उन्होंने प्रत्येक वर्ग से अपील की है कि सभी लोग आवेदन करें और जनगणना 2027 में सहयोग करें। 22 मई से 20 जून के बीच जब प्रगणक उनके घर आएं तो उसे अपने स्वगणना के बाद मिले नंबर को जरूर बताएं।

योगी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: 8 नेताओं को मिला मंत्री पद, जातीय संतुलन पर फोकस

 लखनऊ  योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार दोपहर 3.30 बजे से जन भवन में हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ मंत्रियों पद की शपथ दिलाई। भूपेन्द्र चौधरी और मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री और डॉ. सोमेंद्र तोमर व अजीत पाल ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ ली। इनके साथ कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर व हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में अभी मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री समेत 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इनके साथ 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री हैं। सरकार में 54 मंत्री हैं तो अधिकतम 60 मंत्री ही बनाये जा सकते है। बिना किसी को मंत्रिमंडल से हटाए आठ को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। योगी आदित्यनाथ सरकार एक में कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी व रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली। इनके साथ अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतहेपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेन्द्र दिलेर और कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने पहली बार राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। इन मंत्रियों ने ली पद की शपथ उत्तर प्रदेश जन भवन में आज आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें दो राज्यमंत्रियों के कद में बढ़ोतरी गई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी व मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। चौधरी इससे पहले योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार (2017-2022) में  पंचायती राज मंत्री  रह चुके हैं। रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मनोज कुमार पाण्डेय ने योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री पद शपथ ली। लेंगे। कन्नौज के तिर्वा से विधायक विधायक कैलाश सिंह राजपूत मंत्रिपद की शपथ लेंगे। वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा अलीगढ़ के खैर से भाजपा के विधायक सुरेंद्र दिलेर फतेहपुर के खागा से भाजपा की विधायक कृष्णा पासवान मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाया गया है। वह सरकार में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत हैं, अब इनको राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग है। इनको प्रोन्नत किया गया है। अब यह राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ लेंगे। दो वर्ष पहले हुआ था पहला विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले पांच मार्च 2024 को हुआ था। तब सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। इनमें सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, भाजपा एमएलसी दारा सिंह चौहान, मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से रालोद विधायक अनिल कुमार और गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा मंत्री बने थे। इसके साथ कैबिनेट मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री योगी सहित 22 हो गई, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गए थे। इस तरह से वर्तमान में 21 कैबिनेट मंत्री हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल का जातीय समीकरण योगी आदित्यनाथ 2.0 सरकार जब गठित हुई उस समय पिछड़ा वर्ग के 20, आठ दलित, सात ब्राह्मण, छह राजपूत, चार वैश्य, दो भूमिहार मंत्री बनाय गये थे। पहले विस्तार में दो पिछड़े वर्ग मंत्रियों में बढ़ोत्तरी हुई, जिससे मंत्री पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 22 हो गई। इसके अतिरिक्त एक सुनील शर्मा ब्राह्मण को मंत्रिमंडल में स्थान मिला, लेकिन जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गये, जिससे ब्राहमण मंत्रियों की संख्या सात ही रही। अलबत्ता अनिल कुमार के रूप में दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी। भाजपा विधायकों का जातीय समीकरण वर्तमान में भाजपा के पास 258 विधायक हैं। इनमें से 45 राजपूत, 42 ब्राह्णण, ओबीसी के 84, एससी के 59 और अन्य सवर्ण विधायक की संख्या 28 हैं। इसी तरह 100 सदस्यों वाली विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। इनमें राजपूत 23, ब्राहम्ण 14, ओबीसी 26, मुस्लिम 02 और अन्य सवर्ण 12 और एससी वर्ग के दो सदस्य हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ आठ महीने ही है। इसको देखते हुए भाजपा यूपी में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी। जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत करने वाले विधायकों में से दो को मंत्री पद का पुरस्कार मिल सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री। राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बन सकते हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के छह रिक्त पदों को भरा जाएगा।  

Mother’s Day 2026: मां के सम्मान पर बोले सीएम योगी, कहा– मां ही परिवार की असली शक्ति

लखनऊ मदर्स डे, यह दिन विशेष रूप से मां के प्रति कृतज्ञता, उनके निस्वार्थ प्रेम और योगदान को सम्मान देने को समर्पित है। लेकिन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिदिन हर मां की खुशी और अपने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के परिवार के लिए समर्पित रहते हैं। वे प्रदेश की सभी मांओं के आंसू पोंछ परिवार में उजाला फैलाते हैं। कानपुर की खुशी गुप्ता व मायरा, लखनऊ की अनाबी अली, मुरादाबाद की वाची, गोरखपुर की पंखुड़ी त्रिपाठी समेत अनेक बच्चे इसके उदाहरण हैं, जिन्हें सीएम योगी के कारण उज्ज्वल भविष्य मिला और उनकी मांओं का दुख दूर हुआ।  जब खुशी ने पहला शब्द बोला- थैंक्यू योगी जी, भर आई थीं मां की आंखें मुख्यमंत्री ने कानपुर की मूक-बधिर बच्ची “खुशी” के जीवन में खुशी के इंद्रधनुषी रंग भरे। कानपुर की यह बच्ची न बोल सकती थी और न सुन सकती थी। खुशी नवंबर 2025 में बिना बताए कानपुर स्थित घर से निकलकर लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए लखनऊ पहुंच गई थी। किसी तरह उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया गया। इस बच्ची ने अपने हाथों से बना चित्र सीएम को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एक फाउंडेशन के सहयोग से खुशी के इलाज की व्यवस्था कराई। 26 जनवरी 2026 को खुशी का सफलता पूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया। अब खुशी सुन भी पा रही है और कुछ-कुछ बोलना भी शुरू कर दिया है। सर्जरी के बाद उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे- “थैंक यू योगी जी।” बेटी की खुशी देख मां गीता गुप्ता की आंखों में पहली बार खुशी के आंसू छलक पड़े।  मायरा, पंखुड़ी, अनाबी, वाची का परिवार भी योगी का मुरीद कानपुर की नन्ही मायरा को सीएम योगी ने जनता दर्शन में न सिर्फ चॉकलेट दी, बल्कि शाम तक उसकी मुराद पूरी कर दी। सीएम के निर्देश पर कानपुर के एस्काटर्स वर्ल्ड स्कूल ने मायरा का एडमिशन किया। मुरादाबाद की वाची, लखनऊ की अनाबी का एडमिशन और गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफी भी सीएम योगी के निर्देश पर हुई। अब ये बच्चियां अपने-अपने शहर के प्रतिष्ठित विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। मायरा की मां नेहा कहती हैं कि हम खुशनसीब हैं कि योगी आदित्यनाथ हमारे मुखिया हैं। वृद्ध मां के दर्द से द्रवित सीएम ने कैंसर पीड़ित बेटे को भिजवाया अस्पताल सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं,  जहां सीएम योगी ने मां के आंसू पोंछकर परिवार में खुशियों के रंग भर दिए।

Mother’s Day Special: सालों बाद बेटी से बात हुई तो मां बोली – मुझे पूरी दुनिया मिल गई

कानपुर  मदर्स डे का दिन एक मां के लिए तब और भी खास हो जाता है, जब उसे अपनी संतान की सलामती का सबसे बड़ा तोहफा मिले। कानपुर की दो मांओं ग्वालटोली की गीता गुप्ता और केशवपुरम की नेहा फातिमा के लिए यह दिन खुशियों का एक अलग एहसास लेकर आया है। इन दोनों मांओं की कहानी अलग जरूर है, लेकिन जीवन में खुशियों का उजाला लाने वाले एक ही हैं- एक मां की पीड़ा को महूसस कर उसका त्वरित निवारण करने वाले अत्यंत संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। ग्वालटोली की गीता गुप्ता बताती हैं, "उनकी बेटी खुशी सुन और बोल नहीं पाती थी, लेकिन आज वह पूरी तरह ठीक होने की राह पर है। जब खुशी ने पहली बार मुझे सुना, तो मुझे लगा जैसे पूरी दुनिया मिल गई। एक मां के लिए इससे बड़ी जीत क्या होगी? ये सब योगी जी की वजह से हो पाया। मेरी बेटी को सरकार की मदद से इलाज मिला। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने मेरी बेटी की खामोश दुनिया बदल दी।" गीता बताती हैं कि खुशी पुलिस की वर्दी देखकर आकर्षित होती है। उन्हें भरोसा है कि उनकी बेटी एक दिन पुलिस अफसर बनकर देश का नाम रोशन करेगी।  केशवपुरम की रहने वाली नेहा फातिमा भी बेहद ख़ुश हैं। उनकी 5 साल की मासूम बेटी मायरा फातिमा अब स्कूल जाती है। नेहा ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, "आज जब मैं मायरा को कॉपी-किताबों के साथ स्कूल जाते देखती हूं, तो मेरा दिल भर आता है। यह सब योगी जी के स्नेह और उनकी सरकार की मदद की वजह से मुमकिन हो पाया।" नेहा ने अपनी बेटी की एक प्यारी बात साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब बच्ची से मुलाकात की थी, तब उसे चॉकलेट दी थी। आज भी जब किसी का फोन आता है, तो मायरा चहकते हुए पूछती है- "उन्हीं अंकल का कॉल आया है, जिन्होंने मुझे चॉकलेट दी थी?" नेहा के लिए अपनी बेटी को दूसरे बच्चों की तरह अच्छे स्कूल में पढ़ते देखना मदर्स डे का सबसे अनमोल उपहार है।

खिलाड़ियों को सीएम की सीख: बैडमिंटन की तरह अपने सपनों को गिरने न दें

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों को जीवन का मूलमंत्र दिया। कहा कि बैडमिंटन-टेबल टेनिस में एकाग्रता व त्वरित निर्णय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खेल के माध्यम से सीखे गए स्किल आपदा प्रबंधन के साथ ही विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने को तैयार करते हैं। हर मेडल के पीछे संघर्ष और कभी हार न मानने के संकल्प की कहानी होती है। टैलेंट शुरुआत देता है, लेकिन मेहनत हमें लक्ष्य तक पहुंचाती है। जितना पसीना बहेगा, जीत उतनी ही बड़ी होगी। खेल गिरना, उठना और जीतना सिखाता है। बैडमिंटन में शटल कॉक को नहीं गिरने देते, वैसे ही जीवन में सपनों और हौसलों को टूटने नहीं देना चाहिए। जैसे हर खेल में स्टेप व शॉट का ध्यान जरूरी है, वैसे ही जीवन में निरंतर सुधार व अनुशासन के साथ लगातार किए जाने वाले प्रयास का परिणाम भी बेहतर तरीके से प्राप्त होता है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बाबू बनारसी दास यूपी बैडमिंटन एकेडमी गोमतीनगर में द्वितीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन क्लस्टर (बैडमिंटन- टेबल टेनिस) प्रतियोगिता 2025-26 का शुभारंभ किया। सीएम ने बैडमिंटन भी खेला और स्मारिका का विमोचन किया। कपिल चौधरी ने खिलाड़ियों को शपथ दिलाई। यूपी में खेल व खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। 35वीं वाहिनी पीएसी के बैंड ने मधुर स्वर लहरियां प्रस्तुत कीं।  स्वस्थ शरीर के लिए खेलकूद को जीवन का हिस्सा बनाएं सीएम योगी ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश में हो रहे पांच दिवसीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन कलस्टर में लगभग 1400 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। भारत में खेल व इसकी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की परंपरा प्राचीन काल से ही रही है। जीवन के जितने भी साधन हैं, वह स्वस्थ शरीर से ही संभव हो सकते हैं। स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है कि दैनिक कार्यक्रमों के साथ खेलकूद की गतिविधियों को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, धनुर्विद्या, मलखंभ, तलवारबाजी, शतरंज प्राचीन काल से ही जीवन का हिस्सा रहे हैं। सीएम ने अखाड़ा शब्द की व्याख्या करते हुए, बताया कि ज्ञान की परंपरा व शरीर को स्वस्थ रखने की कला को जिस क्षेत्र विशेष में प्रदर्शित किया जाए, वही अखाड़ा है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ मस्तिष्क से स्वस्थ चरित्र का निर्माण करके राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान सुनिश्चित करना उस अभियान का हिस्सा बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।  एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं अर्जुन सीएम ने प्राचीन धर्मग्रंथों की चर्चा कर अर्जुन का भी उल्लेख किया। कहा कि अर्जुन एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं। मल्लयुद्ध की बात करते हैं तो बलराम जी व भीम जी का स्मरण हो जाता है। बलराम मतलब शक्ति और संतुलन का प्रतीक। गदायुद्ध में शक्ति, रणनीति व पराक्रम भी है। डबल इंजन सरकार इन प्राचीन विधाओं से प्रेरणा प्राप्त कर खेल के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से बढ़ा रही है।  खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पुस्तकों में मिलना कठिन होता सीएम योगी ने कहा कि 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पाठ्य पुस्तकों में मिलना कठिन होता है क्योंकि खेलकूद के बारे में जो व्यावहारिक रणनीति बताई जाएगी, वह सैद्धांतिक रूप से पुस्तकों में मिलना कठिन होता है। खेल के मैदान में अनुशासन, दृढ़संकल्प और समर्पण के बारे में खिलाड़ी को तैयार किया जाता है और उसके माध्यम से ऐसे व्यक्तित्व को तराशने का कार्य होता है, जो राष्ट्र को सशक्त, सुरक्षित और विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।  11 वर्ष में देश में नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का हुआ क्रियान्वयन सीएम ने कहाकि हम लोगों ने पीएम मोदी के विजन को यूपी में प्रभावी ढंग से लागू करने में सफलता हासिल की। 11 वर्ष में देश के अंदर नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सभी ने देखा है। खेल ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ व राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बना है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट, सांसद/विधायक खेलकूद प्रतियोगिता, यूपी में ग्रामीण लीग आदि प्रतियोगिताएं समाज के अंतिम पायदान पर बैठे खिलाड़ियों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रही हैं। इसी का परिणाम है कि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स व विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिभाग बढ़ा है और हमें अभूतपूर्व सफलता भी मिल रही है।  2017 के पहले प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ती थीं प्रतिभाएं सीएम ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में नाममात्र के स्टेडियम थे, इनमें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं। उनका उचित रखरखाव तक नहीं था। ट्रैक टूटे और स्वीमिंग पुल सूखे थे। खिलाड़ी उपेक्षित और कुशल खिलाड़ी कार्यालय-कार्यालय भटकने को मजबूर थे। प्रतिभाएं प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ने को मजबूर होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश ने आज कुशल खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती, पदोन्नति व नकद पुरस्कार की पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। सीएम ने खिलाड़ियों के लिए किए कार्यों को गिनाया सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने खिलाड़ियों के लिए नौकरियों में दो प्रतिशत हॉरिजेंटल रिजर्वेशन की व्यवस्था की है। खेल अब केवल शौक, टाइमपास नहीं बल्कि सम्मानजक कैरियर बन रहा है। हमारी सरकार इसकी गारंटी भी दे रही है।

यूपी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, स्मार्ट मीटर हटे, हर महीने आएगा सामान्य बिजली बिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने काफी हंगामा मचने के बाद अब प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर को वापस लेना शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी वितरण कंपनियों को प्रदेश भर में लाखों उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड बिल मॉडल बहाल करने की निर्देश दिया है। सरकार ने यह फैसला अनिवार्य प्रीपेड रिचार्ज, अचानक कनेक्शन काटने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी कथित बिलिंग अनियमितताओं को लेकर उपभोक्ताओं, व्यापारियों और किसान समूहों के महीनों के विरोध प्रदर्शन और शिकायतों के बाद लिया है। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख वितरण निगमों- पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों, साथ ही आरडीएसएस के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों पर लागू होता है। उपभोक्ताओं के लिए अब क्या? रिचार्ज करने की जरूरत नहीं सरकार के इस कदम से अब उपभोक्ताओं को अपने बैलेंस को पहले से रिचार्ज करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन्होंने जितनी बिजली खर्च की, उसका हर माह बिल आएगा, बिल्कुल पहले की तरह। यानी आपने मई में बिजली खर्च की है तो आपको बिल जून में देना होगा। बिलिंग कैसे होगी? नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर के बिल हर माह 10 तारीख तक तैयार किए जाएंगे और यह एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाएंगे। उपभोक्ता आधिकारिक व्हाट्सऐप चैटबोट और 1912 बिजली हेल्पलाइन के माध्यम से भी बिल देख सकेंगे। जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के दिक्कत है और जहां महीने की पांच तारीख तक ऑटोमैटिक रीडिंग नहीं मिलती, वहीं मीटर रीडिंग एजेंसियां बिलिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए मैन्युअल रीडिंग करेंगी। कैसे काम करेगी नई भुगतान प्रणाली? सरकार ने बताया कि उपभोक्ताओं को बिल जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर बिल जमा नहीं किया तो सात दिन के भीतर बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद बकाया बिल पर विलंब शुल्क यानी लेट फीस भी लगेगी। बकाया राशि का निपटान ब्याज दरों में छूट के साथ-साथ बकाया राशि में राहत की घोषणा की है। घरेलु उपभोक्ताओं को चार किस्तों में राशि चुकाने की अनुमति दी जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा, “जब पोस्टपेड उपभोक्ताओं को प्रीपेड में बदला गया, तो उनकी पिछली सुरक्षा राशि बिल में जोड़ दी गई। 6 मई के आदेश के अनुसार, उपभोक्ताओं से मौजूदा लागत मानदंडों के अनुसार नई सुरक्षा जमा राशि जमा करने की अपेक्षा की गई थी। हालांकि, हमने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि इससे उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “अब यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ली गई सुरक्षा राशि पहले की गणनाओं पर आधारित होगी और किश्तों में वसूल की जाएगी।” 15 मई से लगेगा विशेष शिविर शिकायतों के निवारण के लिए यूपीपीसीएल ने सभी डिस्कॉम को 15 मई से 30 जून के बीच कार्यकारी अभियंता और उपखंड कार्यालयों में विशेष स्मार्ट मीटर शिकायत शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इन शिविरों में बिल संबंधी विवाद, मोबाइल नंबर में सुधार, मीटर रीडिंग संबंधी शिकायतें, स्मार्ट मीटर में परिवर्तन से संबंधित मुद्दे और खाता मिलान जैसे मामलों को निपटाया जाएगा।