samacharsecretary.com

अनुपूरक बजट चर्चा में सीएम योगी बोले- परंपरागत उत्पादों को ब्रांडिंग-पैकेजिंग से मिला नया बाजार, काला नमक बना उदाहरण

ब्रह्मोस मिसाइल के लखनऊ में निर्माण से डिफेंस कॉरिडोर को मिली मजबूतीः योगी आदित्यनाथ वेलफेयर योजनाओं और विकास कार्यों में कोई भेदभाव नहीं, हर विधानसभा तक पहुंच रहा विकास का पैसाः योगी आदित्यनाथ लखनऊ, विधान सभा के शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों के साथ-साथ परंपरागत उद्यमों को सशक्त कर एमएसएमई सेक्टर को नई मजबूती दी गई है, जिसका असर आज निवेश, निर्यात और रोजगार के रूप में साफ दिखाई दे रहा है। पहले किसी सरकार ने इन उत्पादों पर ध्यान नहीं दिया, जबकि मौजूदा सरकार ने इनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब के प्रति सरकार की संवेदना अडिग है। 25 करोड़ की आबादी के कल्याण और सुरक्षा के लिए सरकार बिना किसी भेदभाव के मजबूती से खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी। काला नमक चावल की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काला नमक चावल पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।  हमारी सरकार ने इसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शाही जी जहां भी जाते हैं, वहां के श्रेष्ठ स्थानीय खाद्य उत्पादों की जानकारी लेते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए वाराणसी का किस्सा भी सुनाया और कहा कि शाही जी स्वयं परंपरागत उत्पादों के प्रति सजग हैं और काला नमक को विशेष ब्रांड के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। वहीं, पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि उस समय इच्छाशक्ति की कमी के कारण ऐसे उत्पाद उपेक्षित रहे। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के हर जनपद में एक-एक विशिष्ट उत्पाद था, लेकिन तकनीक, डिजाइन, मार्केट डिमांड और पैकेजिंग की जानकारी के अभाव में वे धीरे-धीरे बंद होते जा रहे थे। सरकार ने इन्हें सुविधाएं दीं और आज उत्तर प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा एमएसएमई नेटवर्क है। प्रदेश में करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनसे पौने दो करोड़ परिवारों की आजीविका चल रही है। एमएसएमई के जरिए यूपी दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। 5 लाख करोड़ की जीबीसी होगी जल्द निवेश के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमीनी स्तर पर उतर चुके हैं। वहीं, 7 लाख से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार मिला है। 5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है। अब प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर नहीं है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण अब लखनऊ में हो रहा है, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर की बड़ी उपलब्धि है। इसमें काम करने वाले सभी युवा उत्तर प्रदेश के हैं। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग पास युवाओं को यहीं रोजगार मिला है। कभी चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया वेलफेयर योजनाओं पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार ने कभी चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया। आवास, राशन, उज्ज्वला गैस, आयुष्मान कार्ड और मुख्यमंत्री राहत कोष हर योजना बिना भेदभाव लागू की गई है। सूची में उन गरीबों को भी जोड़ा गया, जिन्हें पहले वंचित रखा गया था। सीएम योगी ने कहा कि 403 विधानसभा क्षेत्रों में कोई भी क्षेत्र विकास से वंचित नहीं रहेगा। पीडब्ल्यूडी समेत हर विभाग की नियमित समीक्षा होती है, जिलों में सांसद और प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में बैठकें होती हैं और योजनाओं की प्रगति की रिपोर्ट शासन तक पहुंचती है। मुख्यमंत्री राहत कोष में किए गए नए प्रावधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिनके पास आयुष्मान कार्ड है, वे पहले उसका उपयोग करें, आवश्यकता होने पर जिला अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर राहत कोष से सहायता दी जाएगी। कुछ अस्पतालों में गलत बिलिंग की शिकायतों पर कार्रवाई भी की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर बोलते हुए सपा सरकार को जमकर लताड़ा

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर चर्चा करते हुए कहा कि पिछले पौने 9 वर्षों में प्रदेश में विकास की रफ्तार, पहचान और सम्मान तीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। इसके पीछे मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और योजनाबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की हालत किसी से छिपी नहीं थी। सड़कों पर गड्ढे, मेट्रो के नाम पर मजाक, रेलवे नेटवर्क में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी थी। बुनियादी ढांचे की बदहाली आम बात थी। उस दौर में प्रदेश की पहचान एक पिछड़े राज्य के रूप में बनती जा रही थी। तत्कालीन सरकारें मजबूरी में गठबंधन करती थीं, लेकिन विकास के नाम पर अराजकता फैलती रही। जब केंद्र में यूपीए और प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब भी आपसी संबंधों और समन्वय की स्थिति बेहतर नहीं रही। वर्ष 2017 से पहले यूपी में महज डेढ़ एक्सप्रेस–वे थे, आज 22 एक्सप्रेस–वे हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में महज डेढ़ एक्सप्रेस-वे थे, जबकि आज प्रदेश में 22 एक्सप्रेस-वे हैं। यदि ये सभी पूरी तरह संचालित हो जाते हैं, तो देश के कुल एक्सप्रेस-वे में से लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की होगी। आज यह उत्तर प्रदेश की स्पीड है। रेलवे नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश आज देश में सबसे आगे है। उत्तर प्रदेश लगभग 16,000 किलोमीटर के नेटवर्क के साथ देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क वाला राज्य बन चुका है। इंटरस्टेट कनेक्टिविटी को फोर लेन में बदला गया है और मेट्रो सिटी के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी है। देश में सबसे अधिक मेट्रो शहर आज यूपी में हैं। हवाई कनेक्टिविटी को लेकर भी बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में एयरपोर्ट की संख्या बहुत कम थी, जिनमें से दो पूरी तरह संचालित थे जबकि दो आंशिक रूप से संचालित थे। आज 16 एयरपोर्ट संचालित हो रहे हैं, जिनमें चार इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं। इसके साथ ही पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) जो भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा, अगले महीने से संचालित होने जा रहा है। यह प्रदेश के विकास का प्रतीक है। सपा शासनकाल में हाई स्कूल और इंटर में थर्ड डिवीजन को बनाया आयोग का अध्यक्ष देश की पहली रैपिड रेल उत्तर प्रदेश में चल रही है और देश का पहला वॉटर-वे भी यूपी में ही संचालित हो चुका है। वाराणसी से हल्दिया के बीच चल रहे जलमार्ग को प्रयागराज तक और आगे बलिया से अयोध्या तक विस्तार देने की योजना पर काम चल रहा है। यह सभी परियोजनाएं सरकार की इच्छाशक्ति का परिणाम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी-बड़ी बातें करना समाजवादी पार्टी का अहंकार है। जब व्यक्ति या पार्टी यह कहने लगती है कि मैंने यह कर दिया, तभी अहंकार पैदा होता है और इसी वजह से जनता काे सम्मान नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि सम्मान तब मिलता है, जब दुनिया खुद कहे कि आपने अच्छा काम किया है। आज दुनिया कह रही है कि उत्तर प्रदेश में अच्छा हो रहा है और इसका सम्मान हर उत्तर प्रदेशवासी को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए वर्ष 2017 से पहले शिक्षा और भर्ती आयोगों में कथित गड़बड़ियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले अयोग्य लोगों को अहम पदों पर बैठाया जाता था। उस दौरान हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में थर्ड डिवीजन पाने वाले लोगों को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया, जिससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ। यूपी के नौजवानों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हुआ। यूपी ने बनाया बिना घूस के सरकारी नौकरी देने का अनूठा रिकॉर्ड प्रदेश में पौने नौ वर्षों में लगभग 9 लाख सरकारी नौकरियां बिना किसी घूसखोरी के दी गई हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में 60,244 पुलिसकर्मियों की भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि इतनी पारदर्शी और बड़े पैमाने की भर्ती पहले कभी नहीं हुई। वर्ष 2017 से पहले पुलिस प्रशिक्षण की कुल क्षमता केवल 3,000 थी। बड़ी संख्या में भर्ती होने के बावजूद प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। ट्रेनिंग अवधि को 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया गया था, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल के लिए अच्छी ट्रेनिंग बेहद जरूरी है, ट्रेनिंग में जितना पसीना बहेगा, सेवा के दौरान उतना ही खून कम बहेगा। हमने वर्ष 2017 के बाद प्रशिक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है ताकि पुलिस बल अधिक सक्षम और पेशेवर बन सके। हमने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और पुलिस भर्ती बोर्ड में तकनीकी और प्रशासनिक तंत्र को मजबूत किया गया है। वर्तमान सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी नौकरी के साथ एम्प्लॉयमेंट के नए रास्तों पर भी काम कर रही मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा आयोग में हाल ही में एक रिटायर्ड डीजीपी को नियुक्त किया गया है। उन्होंने जैसे माफियाओं की कमर तोड़ी है, वैसे ही नकल माफिया की कमर भी तोड़ी जाएगी। नकल माफिया की आदतें पिछली सरकारों में बिगड़ीं, लेकिन उन्हें सुधारना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है। हमारा उद्देश्य प्रदेशवासियों की रक्षा और दुर्जनों को दंड देना है। मुख्यमंत्री ने परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृताम्” का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सरकार केवल औपचारिकता निभाने नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधारने के लिए बैठी है। इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नौकरियों के साथ-साथ एम्प्लॉयमेंट के अन्य रास्तों पर भी काम किया जा रहा है।

विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर पलटवार

लखनऊ, विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों को सदन के समक्ष रखा, बल्कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का भी तथ्यों के साथ जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सुरक्षा, कानून का राज और विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इन्हीं आधारों पर उत्तर प्रदेश की छवि देश और दुनिया में बदली है। इस दौरान, मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जमकर हमला भी बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आज जो उपदेश हमारी सरकार को दिए जा रहे हैं, वो उपदेश पहले की सरकारों को दिए होते तो प्रदेश की स्थिति कुछ और होती। विपक्ष के उठाए सवालों को गंभीरता से लेगी सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष और सभी दलीय नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में उठाए गए अधिकांश विषय आम जनमानस से जुड़े हुए हैं और प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों को सरकार गंभीरता से लेती है और उन पर आवश्यक कार्यवाही भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी हैं तथा उनकी सहजता और सरलता सदन को सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि विपक्ष में रहते हुए सरकार के कार्यों की आलोचना की जाती है, क्योंकि विरोध में रहने का भी यही औचित्य होता है। आपने सरकार के बजट के आकार और पिछले लगभग साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सरकार के योगदान पर प्रश्न उठाए हैं। इतना अवश्य पूछना चाहूंगा कि यदि आज से लगभग नौ–दस वर्ष पहले, जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी और भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, आज जो आपने उपदेश यहां दिए हैं, वे उस समय की सरकार को दिए होते तो संभवतः प्रदेश की स्थिति कुछ और होती। 2017 से पहले और बाद का अंतर प्रदेश की जनता देख रही है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता, अव्यवस्था और पहचान के संकट की जो स्थिति बनी थी, उसके लिए कौन उत्तरदायी था यह उत्तर प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है। आपने यह स्वीकार किया है कि अपराधियों और माफियाओं के प्रति सरकार की नीति स्पष्ट और कठोर होनी चाहिए और यह हमारी सरकार ने करके भी दिखाया है। राज्य की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट नीति और उसे लागू करने की इच्छाशक्ति आवश्यक होती है। इसके चार प्रमुख आयाम हैं और उन चारों पर सरकार ने प्रभावी ढंग से कार्य किया है। कोई भी व्यक्ति, समाज या संस्था, सबसे पहले सुरक्षा चाहता है। कानून का राज हो, हर व्यक्ति, हर बेटी, हर व्यापारी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे यह किसी भी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले और 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की छवि में जो बदलाव आया है, वह देश और दुनिया दोनों के सामने है। पहले प्रदेश की छवि अच्छी नहीं थी, यह हम सभी को पीड़ा देता था। आज प्रदेश के भीतर या बाहर जाने पर लोग स्वयं कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर माहौल है, दंगे नहीं हैं, अराजकता नहीं है। बेटी किसी भी पक्ष की हो उसे न्याय मिलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय कैसे होता है, इसका उदाहरण भी हमारे सामने है। पूजा पाल प्रकरण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। आपके समय में माफिया के सामने झुकना मजबूरी थी, लेकिन आज सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि बेटी किसी भी पक्ष की हो, उसे न्याय हर हाल में मिलेगा। यह केवल सत्ता या विपक्ष का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश की सुरक्षा और सम्मान का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस रिद्धिमा यादव की बात यहां कही जा रही है उसे भी न्याय हमारी सरकार जरूर देगी। मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों के सवाल पर कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि चाहे कोई भी हो, किसी भी स्मारक, पौराणिक स्थल या सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। सरकारी भूमि गरीबों के लिए है, न कि माफिया के लिए। गरीब और वंचितों के लिए लाए गए बिल पर सपा का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्य है कि इस सदन में जब ग्रामीण अभिलेख विधेयक लाया गया तो समाजवादी पार्टी ने उसका विरोध किया। ग्रामीण अभिलेख से संबंधित संशोधन विधेयक पहली बार गरीब को उसके मकान का वैधानिक अधिकार देता है। यह अधिकार महिला सदस्य के नाम पर दर्ज होगा, जिससे वह आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेगी। लेकिन यदि कोई माफिया या असामाजिक तत्व सरकारी भूमि पर कब्जा कर अनैतिक गतिविधियाँ करेगा, तो उस पर कठोरतम कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि यही सुरक्षा का वातावरण है, जिसने उत्तर प्रदेश की छवि बदली है और जिसके कारण आज प्रदेश में निवेश आ रहा है। यह परिवर्तन परिणाम आधारित है, और उत्तर प्रदेश की जनता ने इसका उत्तर दिया है और आगे भी देती रहेगी।

कोहरे और कम दृश्यता में नियंत्रित गति, सभी बसों में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य

योगी सरकार यात्रियों की सुरक्षा के लिए सतर्क, ठंड में सुरक्षित बस संचालन के निर्देश कोहरे और कम दृश्यता में नियंत्रित गति, सभी बसों में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य कोहरे की स्थिति में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो  विजिबिलिटी सामान्य होने पर ही बसों का संचालन किया जाए बस अड्डों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से यात्रियों को सुरक्षा उपायों की दी जाएगी जानकारी घने कोहरे वाले मार्गों पर रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित किया जाए  रात्रि सेवाओं में अनुभवी, दुर्घटना-रहित और अच्छे ईंधन रिकॉर्ड वाले चालकों की हो तैनाती  लंबी दूरी की बसों की 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग तथा 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शरद ऋतु और ठंड के मौसम में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद में प्रदेश में बस यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किये जाने, रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित करने और यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। कोहरे में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने परिवहन निगम एवं संबंधित अधिकारियों को शरद ऋतु/ठंड के मौसम में बसों के सुरक्षित एवं नियंत्रित संचालन को लेकर विस्तृत आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किया जाना आवश्यक है और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मुहैया कराना प्रदेश सरकार का दायित्व है। परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कोहरे की स्थिति में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो, जबकि अत्यधिक कोहरे में बस को किसी सुरक्षित स्थान पर रोककर विजिबिलिटी सामान्य होने पर ही आगे संचालन किया जाए। बस अड्डों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार एनाउंसमेंट कर यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं। अनुभवी चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए उन्होंने कहा कि घने कोहरे वाले मार्गों पर रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित किया जाए तथा रात्रि सेवाओं में अनुभवी, दुर्घटना-रहित और अच्छे ईंधन रिकॉर्ड वाले चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि रात्रि सेवा पर जाने से पूर्व चालक को कम से कम 8 घंटे का विश्राम प्राप्त हुआ हो। 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर वाली रात्रिकालीन सेवाओं को अस्थायी रूप से स्थगित रखने के निर्देश दिए गए हैं। चालकों का अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य लंबी दूरी एवं रात्रिकालीन सेवाओं की बसों को मार्ग पर भेजने से पूर्व 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग जांच तथा संचालन के दौरान 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निगम एवं अनुबंधित बसों में रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप, फॉग लाइट, ऑल वेदर बल्ब, वाइपर और शीशे पूर्ण रूप से कार्यरत होना अनिवार्य किया गया है। मार्ग पर तैनात इंटरसेप्टर एवं प्रवर्तन वाहनों द्वारा निरीक्षण के दौरान ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता परिवहन मंत्री ने चालकों को तीन प्रकार की सड़कों पर विशेष सावधानी बरतने को कहा है। एक्सप्रेस-वे पर अचानक ठहराव से बचाव, डिवाइडर युक्त सड़कों पर दायीं ओर संचालन, तथा बिना डिवाइडर वाली सड़कों पर बायीं ओर संचालन कर दुर्घटनाओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी चालकों एवं परिचालकों को इन दिशा-निर्देशों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि संयमित गति और सतर्कता के साथ बसों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यूपी भाजपा में जातीय बैठकों की गूंज: ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग की तस्वीरें वायरल, माहौल गरमाया

लखनऊ  यूपी की राजनीति में जाति के नाम पर वार-पलटवार का दौर तो हमेशा चलता रहता है। टिकट से लेकर पार्टियों में पद भी जाति के आधार पर देने की तो परंपरा ही है। ऐसे में जब किसी दल में एक जाति के विधायकों की गोलबंदी होती है तो माहौल गरमा जाता है। कुछ समय पहले लखनऊ में राजपूत विधायकों ने कुटुंब के नाम से बैठक की थी। अब भाजपा के ब्राह्मण विधायकों ने सहभोज के नाम पर बैठक की है। विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के जुटान ने सूबे का सियासी माहौल गर्मा दिया है। कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के बहुखंडी स्थित आवास पर ब्रह्माण विधायकों का जुटान हुआ है। इसमें करीब तीन दर्जन विधायक और विधान परिषद सदस्यों के शामिल होने की खबर है। सरकार और संगठन में बदलाव के इस दौर में लोग इस जुटान के सियासी मायने तलाशने में जुटे हैं। बैठक की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। भाजपा ने भी इस पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।   इस सहभोज की तस्वीरों के साथ एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें विधायकों को प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी सहित अन्य सियासी मुद्दों पर चर्चा करते हुए सुना जा सकता है। इस सहभोज में लिट्ठी-चोखा और मंगलवार व्रत के भोजन के साथ ही राजनैतिक चर्चाएं भी होने की खबर है। पिछले विधानसभा सत्र के दौरान इसी तरह क्षत्रिय विधायक भी कुटुंब मिलन कार्यक्रम के तहत राजधानी के एक होटल में जुटे थे। उसके बाद एक अन्य स्थान पर कुर्मी विधायकों की भी बैठक हुई थी। भाजपा में हाल ही में प्रदेश संगठन का नेतृत्व बदला है। केंद्रीय मंत्री व महराजगंज के सांसद पंकज चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी या ब्राह्मण चेहरे को लेकर ही चर्चाओं का बाजार गर्म था। नये साल में योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी चर्चाएं तेज हैं। उधर, सबको हिन्दुत्व के झंडे के नीचे लाने के प्रयास में जुटे संघ और भाजपा को भी जातीय गोलबंदी का संदेश देती ऐसी बैठकों ने बेचैन कर दिया है। सूत्रों की मानें तो पीएन पाठक के आवास पर हुए सहभोज में शामिल विधायकों में से कइयों से बातचीत कर बैठक के निहितार्थ खोजे जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बता दें कि भाजपा के कुल 46 ब्राह्मण विधायक हैं।   यह हुए शामिल पीएन पाठक (आयोजक), रत्नाकर मिश्र, उमेश द्विवेदी, एमएलसी, प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्र, शलभमणि त्रिपाठी, विपुल दूबे, राकेश गोस्वामी, रवि शर्मा, विनोद चतुर्वेदी, संजय शर्मा, विवेकानंद पाण्डेय, अनिल त्रिपाठी, अंकुर राज तिवारी, साकेत मिश्र (एमएलसी, बाबूलाल तिवारी (एमएलसी), विनय द्विवेदी, सुभाष त्रिपाठी, अनिल पाराशर, कैलाशनाथ शुक्ला, प्रेमनारायण पाण्डेय, ज्ञान तिवारी, सुनील दत्त द्विवेदी, धर्मेंद्र सिंह भूमिहार (एमएलसी।  

पूर्व से उत्तर भारत तक नई रफ्तार: गोरखपुर–पानीपत 747 KM एक्सप्रेसवे से चमकेगा 100 से अधिक गांवों का भविष्य

गोरखपुर  पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल के 133 गांवों में जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यह एक्सप्रेसवे सिद्धार्थनगर के बांसी से प्रवेश करते हुए संतकबीरनगर के मेंहदावल, गोरखपुर के सदर एवं कैंपियरगंज होते हुए कुशीनगर के हाटा तक बनेगा। गोरखपुर मंडल में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 86.24 किमी होगी। एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण के लिए चारों जिलों के जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, एनएचएआई ने पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल में सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें बांसी के 37 गांवों में 16.69 किमी, मेंहदावल के 29 गांवों में 22.5 किमी, गोरखपुर तहसील सदर के 24 एवं कैंपियरगंज के 22 गांवों में 34.22 किमी एवं हाटा के 21 गांवों में 12.8 किमी सड़क की लंबाई होगी। 747 किमी लंबी है एक्सप्रेसवे पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे की लंबाई 747 किमी है, जो सिद्धार्थनगर से आगे बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ होते हुए आगे बनेगा। संतकबीरनगर के 20.25 किमी के बाद 280 मीटर का एरिया गोरखपुर का कवर होगा, इसके बाद 1.98 किमी एरिया संतकबीरनगर का कवर होगा। फिर इसके बाद गोरखपुर में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 34 किलोमीटर होगी। नयनसर के पास पानीपत एक्सप्रेसवे गोरखपुर सोनौली हाईवे को पार करेगा। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे का एलाइन्मेंट तय हो गया है। गोरखपुर के 46 गांवों से होते हुए एक्सप्रेसवे आगे जाएगा। एनएचएआई के प्रस्ताव पर जल्द भूमि अधिग्रहण अधिकारी नामित कर दिया जाएगा। इन गांवों में होगा भू-अधिग्रहण कैंपियरगंज के लक्ष्मीपुर (पचवारा), लक्ष्मीपुर(भारीवैसी), मखनहा, ठकुरापार, भरोहिया, गंगापार, रामपुर कैथवलिया, बेलघाट बुजुर्ग, रमवापुर, दोनफा, भइयाराम, जरहद, नयनसर, हिरुआ, बढ़या, चकमाफी, भुइधरपुर, साखी, ताल कोमर, कानापार, नीबा, कंदरखावा। गोरखपुर सदर बढ़नी, फुलवरिया, सियारामपुर, महराजगंज, ठाकुरपुर नंबर एक, ठाकुरपुर नंबर दो, खुटहन खास, जंगल नाकिन, जंगल डुमरी नंबर एक, रामपुर खुर्द, भिस्वा, इस्मालपुर, रामपुर बुजुर्ग, मेंहदिया, जमुनिया, पोखर भिंडा उर्फ चकदहा, समस्तपुर उर्फ मुड़िला, कोटवा, खिरिया, आराजी बरवा, रामपुर थवईपार, गंभीरपुर कम्हरिया, परशुरामपुर, सोनराइच उर्फ बड़ा गांव। बांसी, सिद्धार्थनगर बंजारी, बिमौआ खुर्द तप्पा पचहर, पचमोहनी, कम्हरिया, बहादुरपुर, डोड़वार शुक्ल, जमोहनी, जमोहना, भावपुर, पिपरा भइया, भटुली, बरनवार, सोनवा माफी, सुहईरनपुरवा, मुड़िला हिर्दन, छपवा, बेलवा लगुनही, पड़िया बुजुर्ग, रोहुआ, महोखवा, बनकटा, कड़जा, बचलाखोर, अकोल्ही, परसा, ढुढ़नी, मझारिया तप्पा मजोरा, मंझरिया तप्पा हाटा, नगवा तप्पा हाटा, नगवा तप्पा कुदारन, सोनखर तप्पा कुदारन, सोनखर तप्पा चंवर, सोनवलिया तप्पा कुदारन, मिश्रौलिया तौफिर, सिरसिया तप्पा मजोरा, पिपरा शुक्ल। मेंहदावल, संतकबीरनगर बढ़या, फेउसा, परसा माफी, परसा शुक्ल, महला, पसाई, देवकली, प्रतापपुर, जसवल, रमवापुर, खजुरा खुर्द, नचनी, समोगर, गुदरिहवा, खजुराकला, सिक्टौर माफी, कुंडवा, जमुवरिया खुर्द, जमुवरिया कला, रक्सा, भरवलिया मिश्र, कुसोना कला, जमोहरा, मुड़ली, डुमरिया बाबू, इंदरपुर, कौवाठोर, पिड़ारी कला, चितरुखिया। कुशीनगर, हाटा, रामपुर, अगया, होलिया, रामपुर माफी, मगडिहा, सिंदुरिया विशुनपुर, घोड़ादेउर, खुरहुरिया, बलुआ, तुर्कडिहा, बिंदुआर, सहजौली, सेंदुआर, मुंडेरा, खोट्ठा, सिहुलिया, टिकर, छपिया, बेलवा खुर्द, महुअवा, अहिरौली।  

योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि उद्यम शक्ति का केंद्र बनाना है

निधि योजना : उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता को मिला रहा मजबूत आधार योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि उद्यम शक्ति का केंद्र बनाना है टियर 2 और टियर 3 शहरों में उद्यमिता का हो रहा है विस्तार निधि योजना के अंतर्गत देश में कुल 714, उत्तर प्रदेश में 25 महिला स्टार्टअप्स को सीधी सहायता लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने साढ़े आठ वर्षों में प्रदेश के विकास को नई दिशा और गति दी है। कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकार का फोकस नवाचार उद्यमिता और आत्मनिर्भरता पर है। इसी सोच के अनुरूप केंद्र सरकार की निधि योजना का प्रभाव उत्तर प्रदेश में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स खासकर महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए प्रदेश में एक सकारात्मक और भरोसेमंद वातावरण तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि उद्यम शक्ति का केंद्र बनाना है। निधि कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2016 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य प्रारंभिक चरण के विज्ञान एवं तकनीक आधारित स्टार्टअप्स को वित्तीय और संस्थागत सहायता देना है। योजना के अंतर्गत देश में कुल 714 महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स सहायता दी जा चुकी है। वर्ष 2017-18 में 23  महिला स्टार्टअप्स को सहायता मिली, वर्ष 2023-24 में 152,  2024-25 में 140 और वर्ष 2025-26 में 84  महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को समर्थन दिया गया।  महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स में उत्तर प्रदेश की मजबूत भागीदारी निधि कार्यक्रम के अंतर्गत देश भर में महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को शुरुआती स्तर पर सहायता दी जा रही है। इस राष्ट्रीय पहल में उत्तर प्रदेश ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। प्रदेश में 25  महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को निधि योजना के तहत वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि प्रदेश की महिलाएं अब केवल रोजगार की तलाश में नहीं हैं बल्कि रोजगार देने वाली उद्यमी बनने की दिशा में आगे कदम बढ़ा रही है। योगी सरकार की स्टार्टअप नीति और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं ने इस बदलाव को गति दी है। टीबीआई और आईटीबीआई से प्रदेश में नवाचार को मिला संबल उत्तर प्रदेश में निधि प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर (टीबीआई) और समावेशी प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर (आईटीबीआई) की स्थापना योगी सरकार के विकास मॉडल की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रदेश में 7 टीबीआई और आईटीबीआई स्थापित किए गए हैं, जो महिला स्टार्टअप्स के लिए मार्गदर्शन का केंद्र बन रहे हैं। इन इनक्यूबेटरों के माध्यम से महिलाओं को तकनीकी सलाह, व्यवसायिक रणनीति, बौद्धिक संपदा अधिकार, कानूनी और नियामक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसका लाभ यह हुआ है कि छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं भी अब नवाचार आधारित उद्यम शुरू करने का साहस कर पा रही हैं, यह योगी आदित्यनाथ सरकार के विज़न से ही संभव हो पा रहा है।  टियर वन और टियर टू शहरों में हो रहा है उद्यमिता का विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। इसी सोच के अंतर्गत टियर वन और टियर टू स्तर के शहरों में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई ऐसे जिले जो पहले उद्यमिता के मानचित्र पर नहीं थे, अब धीरे-धीरे स्टार्टअप गतिविधियों के केंद्र बन रहे हैं। निधि योजना से जुड़े इनक्यूबेटर इन क्षेत्रों में स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

भारत की अंतरिक्ष उड़ान को नई ऊंचाई: LVM3-M6 लॉन्च पर CM योगी ने दी बधाई

लखनऊ भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। LVM3-M6 की सफल उड़ान के साथ भारत की धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह अपने निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता आत्मनिर्भर भारत की भावना का सशक्त प्रतीक है। प्रौद्योगिकी में भारत का बढ़ते वैश्विक कद सीएम योगी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि भारत के लिए गर्व का क्षण है। इसरो की पूरी टीम को हार्दिक बधाई। LVM3-M6 के सफल प्रक्षेपण पर, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह को निम्न पृथ्वी कक्षा में तैनात किया गया। ऐतिहासिक मिशन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाता है। पीएम नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर मार्गदर्शन द्वारा सक्षम है। इसरो देश को लगातार प्रेरित कर रहा है और दुनिया के लिए एक भरोसेमंद अंतरिक्ष भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत कर रहा है। यह सफलता न केवल ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि भारत को वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में एक विश्वसनीय शक्ति के रूप में भी स्थापित करती है।

दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन: शारीरिक संबंध बनाने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ FIR दर्ज

गाजियाबाद दिल्ली-मेरठ के बीच चलने वाली नमो भारत ट्रेन में शारीरिक संबंध बनाने वाले स्टूडेंट्स की तलाश अब तेज हो गई है। एनसीआरटीसी ने मुरादनगर थाने में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। चलती ट्रेन में संबंध बनाने वाले लड़के-लड़की के अलावा अश्लील वीडियो को वायरल करने वाले कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उसे बर्खास्त भी किया जा चुका है। एक सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल हुआ था। बाद में कुछ और क्लिप भी सामने आए। इनमें चलती ट्रेन की सीट पर बैठे एक लड़का और लड़की शारीरिक संबंध बनाते दिख रहे हैं। दोनों के ड्रेस से पता चलता है कि वे किसी कॉलेज के स्टूडेंट हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि लड़का बीटेक स्टूडेंट और लड़की उसी कॉलेज से बीसीए कर रही है। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वीडियो को ट्रेन से सीसीटीवी फीड से रिकॉर्ड करके वायरल करने के आरोपी रिषभ कुमार को बर्खास्त कर दिया गया था। अब उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एनसीआरटीसी ने उसे पहले ही बर्खास्त कर दिया था। सोशल मीडिया पर छात्र-छात्रा के कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग हो रही थी। वीडियो वायरल होने के एक सप्ताह बाद मेंटनेंस एंजेसी डीअीआरआरसीटी के अधिकारी दुष्यंत कुमार ने मुरादनगर थाने में शिकायत दी है। एसीपी मसूरी सर्किल लिपि नगायच ने बताया कि छात्र-छात्रा सहित ऑपरेटर रिषभ कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया गया है कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य) और धारा 77 (दृश्यरति/वॉयेरिज़्म) और आईटी एक्ट की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण) के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। कितनी हो सकती है सजा? जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है। वीडियो में दिखने वाले कपल की पहचान की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। सीसीटीवी वीडियो के जरिए उनके रूट को खंगाला जा रहा है। दोषी पाए जाने पर बीएनएस की धारा 296 के तहत आरोपियों को अधिकतम तीन महीने की कैद, 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। धारा 77 के तहत न्यूनतम एक वर्ष से लेकर अधिकतम तीन वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

कुशीनगर विधायक के घर 50 ब्राह्मण विधायकों का जुटान, यूपी की राजनीति में हलचल

 लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है और सभी दलों के विधायक राजधानी लखनऊ में हैं. सूबे की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक भी लखनऊ में हैं और अब ब्राह्मण विधायकों की गोलबंदी ने सर्दी के मौसम में भी सियासी तापमान बढ़ा दिया है. लखनऊ में मंगलवार की शाम बीजेपी और अन्य दलों के 52 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य एक जगह जुटे और बंद कमरे में बैठे. बीजेपी विधायकों के साथ ही इस आयोजन में अन्य दलों के विधायक भी पहुंचे. ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी का जुटान कुशीनगर के विधायक पंचानंद पाठक (पीएन पाठक) के आवास पर हुआ. इसे सहभोज नाम दिया गया था, जिसमें खासतौर पर पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विधायक पहुंचे थे. विधायकों का कहना है कि यह सहभोज था, कोई बैठक नहीं थी. इसे लेकर मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट से विधायक रत्नाकर मिश्रा का बयान आया है. मिर्जापुर नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कहा है कि कुशीनगर के विधायक पंचानंद पाठक ने यह आयोजन किया था. इसमें लगभग चार दर्जन ब्राह्मण विधायक शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई थी. हम सब लोग बस बैठते हैं, भोजन का आयोजन था. मिर्जापुर नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने यह भी कहा है कि हम सभी ने बस खाना खाया और इसके बाद वहां से सभी चले गए. उन्होंने कहा कि कुछ भी खास नहीं था. जैसे सब बैठते थे, वैसे हम लोग भी बैठे और खाना खाया. इस सहभोज में मिर्जापुर नगर विधानसभा से विधायक रत्नाकर मिश्रा के साथ ही शलभमणि त्रिपाठी, एमएलसी उमेश द्विवेदी भी मौजूद रहे. ये सभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी करीबी माने जाते हैं. गौरतलब है कि यूपी विधानसभा के पिछले मॉनसून सत्र के दौरान भी ऐसा ही एक आयोजन चर्चा का केंद्र रहा था. यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान ठाकुर विधायकों का जुटान हुआ था, जिसे कुटुंब नाम दिया गया था. तब बीजेपी के साथ ही अन्य दलों के ठाकुर विधायक भी उस जुटान में पहुंचे थे. विधायकों ने उस आयोजन को पारिवारिक मिलन बताया था. यह बैठक उसी आयोजन का जवाब मानी जा रही है.