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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय प्रशासन को दिया निर्देश

जनता दर्शन : ठंड में आने वाले फरियादियों के लिए रैनबसेरे में रुकने की कराएं व्यवस्था   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय प्रशासन को दिया निर्देश  मुख्यमंत्री बोले- सभी जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान प्रतिदिन जनपदों में सुनें जनता की शिकायत  सीएम ने बच्चों को दी चॉकलेट, बोले- ठंड में बचकर रहें  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश भर से आए फरियादियों से मुलाकात की। सीएम ने उनकी समस्याएं सुनीं और प्रार्थना पत्र लेकर संबंधित अधिकारियों को निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपदों में भी ‘जनता दर्शन’ में फरियादी अपनी शिकायत लेकर पहुंचते हैं, लेकिन लखनऊ में होने वाले ‘जनता दर्शन’ में भी बड़ी संख्या में फरियादी आते हैं। ‘जनता दर्शन’ में शामिल होने के लिए एक दिन पहले रात में ही वे राजधानी पहुंच जाते हैं। यहां आने वाले फरियादी रैन बसेरों में रूकें, सरकार ने रैन बसेरों में समुचित व्यवस्था की है। सीएम ने लखनऊ प्रशासन को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर रैन बसेरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहें और यह सुनिश्चित करें कि रैन बसेरों में रहने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।  प्रतिदिन जनता की समस्याएं सुनें जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान  मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय ठंड काफी पड़ रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि पहले जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान के पास पहुंचें और अपनी समस्याओं से अवगत कराएं। प्रशासन स्तर पर हर समस्याओं का निराकरण कराया जा रहा है। सीएम ने सभी जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान को निर्देश दिया कि प्रतिदिन जनता की समस्याएं सुनें और उनका निराकरण कराएं, जिससे उन्हें ठंड के मौसम में लखनऊ न आना पड़े।  आप एस्टिमेट बनवाइए, सरकार इलाज में मदद करेगी ‘जनता दर्शन’ में कुछ फरियादी इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर भी पहुंचे थे। इस पर मुख्यमंत्री ने उनका प्रार्थना पत्र लिया और कहा कि आप अस्पताल से एस्टिमेट बनवाकर दीजिए। सरकार पहले दिन से ही इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। सरकार का संकल्प है कि इलाज के अभाव में किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।  जमीन कब्जे की शिकायत पर सीएम सख्त  ‘जनता दर्शन’ में कुछ मामले जमीन कब्जे के भी आए। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रूख अपनाते हुए इसकी जांच कराते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धान खरीद के मामलों को लेकर पहुंचे किसानों की शिकायत सुनकर सीएम ने तत्काल संबंधित प्रशासन को समाधान के लिए निर्देशित किया। सीएम ने कहा कि किसानों की समस्याओं का निदान ही सरकार की प्राथमिकता है।  सीएम ने बच्चों को दी चॉकलेट, बोले- ठंड में बचकर रहें  "जनता दर्शन' में अभिभावकों के साथ बच्चे भी पहुंचे। सीएम ने बच्चों से संवाद किया, उन्हें दुलारा-पुचकारा और पढ़ाई के बारे में भी पूछा। बच्चों ने भी मुख्यमंत्री के प्रश्नों का जवाब दिया, फिर सीएम ने सभी बच्चों को चॉकलेट दी और अभिभावकों से कहा कि ठंड अधिक पड़ रही है। बच्चों को ठंड में बचाकर रखें। मुख्यमंत्री का यह प्रेम देख अभिभावक भी अभिभूत हो गए।

6720 ग्राम पंचायतों में किया जा चुका किसान पाठशाला का आयोजन

किसान पाठशाला 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान हुईं लाभान्वित  लखनऊ योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को आधुनिक खेती व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष रबी सीजन में भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को बाराबंकी में पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर से किसान पाठशाला 8.0 रबीः 2025-26 का शुभारंभ किया था। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह पाठशाला 29 दिसंबर तक चलेगी। 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसानों को दिया गया प्रशिक्षण  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में कराए जाने के लिए जनपदीय व मंडलीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया था। इस क्रम में 12 दिसंबर से 21 दिसंबर (10 दिन) तक 6720 ग्राम पंचायत स्तरीय गोष्ठी/ किसान पाठशाला का आयोजन किया जा चुका है। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं एवं कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 6.98 लाख किसानों में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान शामिल हैं।  अब तक लगभग दो करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक लगभग दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाती है।

ग्रामीण महिलाओं को मिले रोजगार के अवसर तो नाविक के चेहरे खिले

गंगा नदी के तटीय गांवों में सज रही है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मंडी माघ मेले में साधु संतों और कल्पवासियों के अस्थाई शिविरों में रहती है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग मेला प्रशासन द्वारा मेला में हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर पर लगी पाबंदी से बढ़ी उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग   प्रयागराज प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर  03 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहे  माघ मेला 2026 की शुरूआत के लिए अब दो हफ्ते का समय है । आस्था और अध्यात्म के यह महा समागम लाखों लोगों की जीविका का जरिया भी बन रहा है। महाकुंभ नगर के अंतर्गत आने वाले गांवों में की ग्रामीण महिलाओं की जीविका के महाकुंभ ने नए अवसर दे दिए हैं।   15 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों के लिए जीविका का जरिया संगम किनारे 3 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहा माघ मेला होटल, ट्रैवल और टेंटेज , फूड जैसे औद्योगिक सेक्टर के साथ छोटे मोटे काम करने वाले लोगों के लिए भी जीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। गंगा किनारे आकार ले रही तंबुओं के इस नगर के अंतर्गत आने वाले 27 गांवों में पशुपालन से जुड़े कार्य में लगे परिवारों की 15 हजार से अधिक आबादी के लिए इस आयोजन ने जीविका का जरिया दे दिया है। नदी किनारे बसे कई गाँवों में इन दिनों ईंधन के परम्परागत रूप उपलों का नया बाजार विकसित होने लगा है। इन गाँवों में नदी किनारे बड़ी तादाद में उपलों की मंडी बन गई है । गाँवों में इन दिनों गोबर से बने उपलों को बनाने में स्थानीय महिलाएं पूरे दिन लगी रहती हैं । मेला क्षेत्र के गंगा किनारे बसे बदरा सोनौटी गांव की विमला यादव का कहना है कि घर में चार भैंस और गाय हैं जिनसे साल भर हम उपले बनाते हैं और इन्हें इकट्ठा करते रहते हैं। माघ के महीने में कल्पवास करने आने वाले कल्पवासियों के यहां इनको भेजते हैं। मलावा खुर्द गांव की आरती सुबह से ही अपने घर की आम तौर पर खाली रहने वाली महिलाओं के साथ मिट्टी के चूल्हे तैयार करने में जुट जाती हैं। आरती बताती हैं कि माघ मेले में कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं का खाना इन्ही चूल्हों पर तैयार होता है । इसके लिए अभी तक उनके पास सात हजार मिट्टी के चूल्हे तैयार करने के ऑर्डर मिल चुके हैं। साधु संतो के शिविरों में भी इनके उपले और चूल्हों की मांग अच्छी मांग है ।  नाविकों की संख्या में इजाफा, महाकुंभ की आमदनी का असर  प्रयागराज सर्वाधिक कमाई करने वाले नाविक समाज में इस बार माघ मेले को लेकर सबसे अधिक उम्मीदें हैं। लगभग कर निषाद परिवार इस समय नई नाव संगम में उतारने की तैयारी में लगा है जिसके पीछे महाकुम्भ 2025 का उसका सुखद अनुभव है। दारागंज के दशाश्वमेध घाट की निषाद बस्ती में रहने वाले बबलू निषाद बताते हैं कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों तक को माघ मेले के एक महीने के लिए बुला लिया है। माघ मेले में सरकार की तरफ से जिस तरह 12 से 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है उसमें अगर 5 करोड़ भी नावों से त्रिवेणी आए तो एक बार नाविक समाज की तकदीर बन जाएगी।  शिविरों में बिजली के हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल में लगी रोक बनी सहायक महाकुंभ के आयोजन के बाद कल्पवास करने की शुरुआत करने वालों की संख्या में हर बार इजाफा होता है। एडीएम मेला दयानंद प्रसाद के मुताबिक इस बार माघ मेले में 6 हजार से अधिक संस्थाएं बसाई जा रही हैं । इसमें 4 लाख से अधिक कल्पवासियों को भी जगह मिलेगी । मेला क्षेत्र में बड़ी संस्थाएं वैसे तो कुकिंग के गैस के बड़े सिलेंडर का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि इन्हें प्रतिदिन लाखों लोगों को भोजन कराना होता है। लेकिन धर्माचार्यों, साधु संतों और कल्पवासी अभी भी अपनी पुरानी व्यवस्था के अंदर ही खाना बनाते हैं। कुछ स्थानों पर आग लगने की घटनाओं में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर का इस्तेमाल बड़ी वजह पाई जाने के मेला प्रशासन ने शिविरों में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी । इस नई व्यवस्था की वजह से भी अब गांव की इन महिलाओं के हाथ से बने उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग बढ़ गई है। तीर्थ पुरोहित प्रदीप तिवारी बताते हैं कि तीर्थ पुरोहितों के यहां ही सबसे अधिक कल्पवासी रुकते हैं। उनकी पहली प्राथमिकता पवित्रता और परम्परा होती है इसके लिए वह मिट्टी के चूल्हों पर उपलों से बना भोजन ही बनाना पसंद करते हैं।

लेखपाल भर्ती पर बड़ा फैसला: सीएम योगी ने दिखाई सख्ती, आरक्षण संबंधी खामियों पर लगेगी रोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी और कड़े निर्देशों के बाद लेखपाल भर्ती प्रक्रिया में सामने आई आरक्षण संबंधी विसंगति अब दूर होने जा रही है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने 12 दिसंबर को लेखपाल के 7994 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, लेकिन इसमें 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का समुचित पालन न होने को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। यूपीएसएसएससी को पत्र भेज दी गई जानकारी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद राजस्व परिषद ने यूपीएसएसएससी को पत्र भेजकर श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की जानकारी दी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि संशोधित पदों का विवरण एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेज दिया जाएगा। आरक्षण में विसंगति का मुद्दा उठाया गया था यूपीएसएसएससी द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार लेखपाल के स्थायी पदों में अनारक्षित (सामान्य) वर्ग के 4185, अनुसूचित जाति के 1446, अनुसूचित जनजाति के 150, अन्य पिछड़ा वर्ग के 1441 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 792 पद निर्धारित किए गए थे। इन्हीं आंकड़ों को लेकर आरक्षण में विसंगति का मुद्दा उठाया गया था।   मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी इस संबंध में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आरक्षण व्यवस्था का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने यूपीएसएसएससी को भेजे पत्र में बताया कि मंडलायुक्तों द्वारा मंडल स्तर पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत लेखपालों के आधार पर रोस्टरवार (लंबवत एवं क्षैतिज आरक्षण सहित) श्रेणीवार रिक्तियों की गणना कर अधियाचन उपलब्ध कराया गया था। इसी आधार पर चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया। श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की संभावना हालांकि, अब जिला स्तर पर कार्यरत और रिक्त लेखपाल पदों की श्रेणीवार गणना से जुड़े कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। इसके चलते आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में दर्शाई गई श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की संभावना है। राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि संशोधित जानकारी एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेज दी जाएगी। 

दिल्ली-NCR के भविष्य की सुरक्षा: अखिलेश यादव ने अरावली संरक्षण पर दी लंबी पोस्ट

लखनऊ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिल्लीवासियों को अरावली पहाड़ियों को बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं बल्कि संकल्प होना चाहिए। एक्स पर लिखे गए एक लंबे संदेश में उन्होंने कहा कि बची रहे जो ‘अरावली’ तो दिल्ली रहे हरीभरी! उन्होंने कहा कि अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा। अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें क़ुदरती ढाल है। अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है। अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है। अरावली से ही एनसीआर की जैव विविधता बची हुई है। जो वेटलैंड गायब होते चले जा रहे हैं, उन्हें यही बचा सकती है। गुम हो रहे परिंदों को वापस बुला सकती है। अरावली से ही एनसीआर का तापमान नियंत्रित होता है। इसके अलावा अरावली से एक भावात्मक लगाव भी है जो दिल्ली की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है। अरावली को बचाना, दिल्ली के भविष्य को बचाना है, नहीं तो एक-एक साँस लेने के लिए संघर्ष कर रहे दिल्लीवासी स्मॉग जैसे जानलेवा हालात से कभी बाहर नहीं आ पाएंगे। आज एनसीआर के बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चों पर प्रदूषण का सबसे ख़राब और ख़तरनाक असर पड़ रहा है। यहाँ के विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटल और मेडिकल सर्विस सेक्टर तक बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो लोग बीमारी ठीक करने दिल्ली आते थे, वो अब और बीमार होने नहीं आ रहे हैं। – यही हाल रहा तो उत्तर भारत के सबसे बड़े बाज़ार और आर्थिक केंद्र के रूप में भी दिल्ली अपनी अहमियत खो देगी। – ⁠विदेशी तो छोड़िए, देश के पर्यटक भी यहाँ नहीं आएंगे। – ⁠न ही दिल्ली में कोई बड़ा इवेंट आयोजित होगा। – ⁠न ही कोई राजनीतिक, शैक्षिक, अकादमिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक सम्मेलन आयोजित होगा। – ⁠न ही ओलंपिक, कॉमनवेल्थ या एशियाड जैसी कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित होगी। – ⁠यहाँ का होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी-कैब, गाइड, हैंडीक्राफ़्ट बिज़नेस, हर काम-कारोबार व अन्य सभी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियाँ ठप्प हो जाने के कगार पर पहुँच जाएंगी। – ⁠जब प्रदूषण की वजह से हवाई जहाज़ नहीं चलेंगे, ट्रेनें घंटों लेट होंगी, सड़क परिवहन असुरक्षित हो जाएगा, तो दिल्ली कौन आएगा। – ⁠यहाँ तक कि इसका असर ये भी पड़ेगा कि लोग अपने बेटी-बेटे की शादी तय करने से पहले दिल्ली के हवा-पानी के बारे में सोचने लगेंगे। – ⁠इसीलिए हर नागरिक के साथ हर स्कूल-कोचिंग, हर व्यापारी, हर कारोबारी, हर दुकानदार, हर रेहड़ी-पटरीवाले, हर घर-परिवार तक को ‘अरावली बचाओ’ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। – ⁠हर चैनल, हर अख़बार को ये अभियान चलाना चाहिए। अरावली को बचाना मतलब ख़ुद को बचाना है। अगर अरावली का विनाश नहीं रोका गया तो भाजपा की अवैध खनन को वैध बनाने की साज़िश और ज़मीन की बेइंतहा भूख देश की राजधानी को दुनिया की ‘प्रदूषण राजधानी’ बना देगी और लोग दिल्ली छोड़ने को बाध्य हो जाएंगे। इसीलिए आइए हम सब मिलकर अरावली बचाएं और भाजपा की गंदी राजनीति को जनता और जनमत की ताक़त से हराएं! उनका ये संदेश सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

योगी सरकार के बुंदेलखंड पर फोकस से आकार लेने लगी विकास की परियोजनाएं

गरौठा सोलर पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा, ग्रिड सब स्टेशन की स्थापना का चल रहा काम झांसी योगी सरकार की बुंदेलखंड को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की कवायदों का असर जमीनी रूप से दिखाई देने लगा है। साल 2025 में कई बड़ी परियोजनाओं ने गति पकड़ी और उन पर काम की गति ने तेजी पकड़ी। इन कवायदों से बुंदेलखंड में बदलाव की बयार साफ तौर पर महसूस की जा रही है। डिफेंस कॉरिडोर, गरौठा सोलर पार्क, मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना न्यू झांसी फेज 1, जालौन-झांसी लिंक एक्सप्रेस वे, झांसी के रिसाला चुंगी से ओरछा तक की सड़क को फोर लेन के काम समेत कई महत्वपूर्ण कार्यों की ओर सरकार ने कदम आगे बढ़ाए। डिफेंस कॉरिडोर ने पकड़ी तेजी झांसी के गरौठा क्षेत्र में विकसित हो रहे डिफेंस कॉरिडोर के लिए ग्राम पंचायत झबरा के निकट गुरसराय-एरच रोड पर 132/33 केवी का बिजली सब स्टेशन बनकर तैयार हो गया है। इससे एक ओर जहां डिफेंस कॉरिडोर के लिए बिजली की सप्लाई हो सकेगी तो दूसरी ओर जुझारपुरा की पेयजल परियोजना और आसपास के कई उपकेंद्रों तक भी यहां से बिजली पहुंचाई जा सकेगी। इस नवनिर्मित 132/33 केवी बिजली सब स्टेशन से डिफेंस कॉरिडोर के काम में भी तेजी आएगी। डिफेंस कॉरिडोर के झांसी नोड में बीडीएल की यूनिट की स्थापना का कार्य शुरू हो चुका है। इस वर्ष डब्लूबी इलेक्ट्रॉनिक ने भी डिफेंस कॉरिडोर में यूनिट की स्थापना का काम शुरू कर दिया है। यहां 14 इकाइयों को जमीनें आवंटित की गई हैं। डिफेंस कॉरिडोर के लिए 6 गांव एरच, गेंदा कबूला, कठरी, लभेरा, इसकिल और झबरा की 1034 हेक्टेयर जमीन पर डिफेंस कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। गरौठा में सोलर पार्क के काम ने पकड़ी रफ्तार बुन्देलखण्ड क्षेत्र को सोलर पावर के हब के रूप में विकसित करने के योगी सरकार के प्रयास ने 2025 में तेज गति पकड़ी। झांसी जिले के गरौठा तहसील क्षेत्र में बन रहे 600 मेगावाट के सोलर पॉवर पार्क के लिए सोलर पावर डेवलपर का चयन कर लिया गया है। पार्क के लिए जमीन से जुड़े लीज एग्रीमेंट का लगभग 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लगभग 2700 एकड़ क्षेत्रफल में पार्क का निर्माण होना है और 2650 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। लगभग 2000 से अधिक किसानों से जमीन ली गयी है। जमीन का कुछ हिस्सा सरकारी है। यह सोलर पार्क परियोजना क्षेत्र के 8 गांव सुजानपुरा, जलालपुरा, जसवंतपुरा, नदौरा, बरारु, पुरा, खदौरा और मोती कटरा में फैली है। टुस्को लिमिटेड को गरौठा सोलर पार्क की स्थापना का काम दिया गया है। पार्क के निर्माण में जुटी कम्पनी के अफसरों के अनुसार सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम पूरे किए जा रहे हैं। सोलर पार्क के साथ ही 220/400 केवी ग्रिड सब स्टेशन की स्थापना का काम तेज गति से चल रहा है। उत्तर प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड को यहां ग्रिड सब स्टेशन की स्थापना का काम दिया गया है।  यहां इंटरनल पावर एवाक्यूएशन सिस्टम के अंतर्गत दो पुलिंग सब स्टेशन की स्थापना का काम पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। कई अन्य परियोजनाओं पर भी चल रहा काम झांसी के रक्सा क्षेत्र में बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के लिए जमीन अधिग्रहण का काम तेज गति से चल रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी की कनेक्टिविटी बढ़ाने के मकसद से योगी सरकार ने जालौन से झांसी के लिए 115 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेस वे को मंजूरी दी है। झांसी विकास प्राधिकरण ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना न्यू झांसी फेज 1 की हुई शुरुआत की और भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी की। झांसी से ओरछा के बीच की सड़क को टू लेन से फोर लेन करने के लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। इसी साल अक्टूबर महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी के पॉलीटेक्निक कॉलेज के निकट बनकर तैयार हुए अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर का लोकार्पण किया। कई अन्य योजनाओं और परियोजनाओं ने भी साल 2025 में तेज गति से रफ्तार पकड़ी और जमीन पर आकार लेते दिखाई दिए।

कार्बाइन फायरिंग में चौंकाने वाला प्रदर्शन: 40 दारोगाओं में से केवल 14 ही साध सके सटीक निशाना

कानपुर  कानपुर पुलिस लाइन में शनिवार को आयोजित हथियार अभ्यास के दौरान कई दारोगा की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े हो गए। अभ्यास के दौरान 40 दारोगा में से आधे से अधिक दारोगा कार्बाइन के पुर्जे सही तरीके से असेंबल नहीं कर पाए, जबकि कुछ को इसमें काफी समय लग गया। वहीं फायरिंग रेंज में भी अधिकांश दारोगा का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। 22 दारोगा अपनी पिस्टल लेकर पहुंचे पुलिस लाइन में नियमित रूप से इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाहियों को पिस्टल और कार्बाइन से निशानेबाजी का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी क्रम में शनिवार को कोतवाली, रेलबाजार, फीलखाना, कैंट, गुजैनी, ग्वालटोली, नवाबगंज, काकादेव, बर्रा समेत अन्य थानों से कुल 40 दारोगा को अभ्यास के लिए बुलाया गया था। इनमें कई चौकी इंचार्ज भी शामिल थे। अभ्यास के दौरान 22 दारोगा अपनी पिस्टल लेकर पहुंचे।   14 दारोगा ही सटीक निशाना लगा सके सबसे पहले फायरिंग रेंज में निशानेबाजी का अभ्यास कराया गया। इसमें केवल 14 दारोगा ही लक्ष्य के निर्धारित गोले के भीतर सटीक निशाना लगा सके, जबकि शेष दारोगाओं की गोलियां गोले के आसपास ही लगती रहीं। इसके बाद पिस्टल और कार्बाइन के पुर्जों को खोलने और दोबारा असेंबल करने का अभ्यास कराया गया। इस दौरान कई दारोगाओं की पिस्टल गंदी पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे अपने हथियारों की नियमित साफ-सफाई और अभ्यास नहीं करते हैं।   कार्बाइन असेंबलिंग में भी स्थिति चिंताजनक रही कार्बाइन असेंबलिंग में भी स्थिति चिंताजनक रही, क्योंकि 40 में से आधे से भी कम दारोगा इसे सही ढंग से पूरा कर सके। संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सभी पुलिसकर्मियों को इसका प्रशिक्षण पहले से दिया जाता है, लेकिन नियमित अभ्यास न होने के कारण वे अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। उन्होंने सभी को भविष्य में नियमित अभ्यास करने की सख्त चेतावनी दी और पुलिस लाइन में दोबारा अभ्यास भी कराया गया। 

लाखों परिवारों को मिला स्थायी सहारा, गांवों में मजबूत हुई आजीविका

महिला मेट्स को 111 करोड़ से अधिक का किया गया भुगतान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यों का चयन महिला मेट के रूप में किया जा रहा लखनऊ उत्तर प्रदेश में रोजगार गारंटी व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश में अब तक 23 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में मिसाल कायम की गई है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी (मनरेगा) से महिलाओं की आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है। महिला नेतृत्व को मिला नया मंच ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक करीब 32 हजार महिला मेट्स को कार्य सौंपा गया है। महिला मेटों को 111 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है। समयबद्ध और पारदर्शी भुगतान प्रणाली से महिलाओं का विश्वास सरकारी योजनाओं पर और मजबूत हुआ है। स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका सरकार की रणनीति के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को महिला मेट के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों में महिला नेतृत्व और प्रबंधन क्षमता को भी नया आयाम मिला है। समय पर भुगतान से बढ़ा भरोसा वित्तीय वर्ष 2025–26 में 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय से भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि रोजगार गारंटी प्रणाली में पारदर्शिता और कार्यकुशलता लगातार मजबूत हो रही है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल रहा है। गांवों में बने आय के नए स्रोत प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गारंटी के अंतर्गत अब तक 6703 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों को गति मिली है, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को विशेष प्राथमिकता देकर समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर कदम रोजगार गारंटी व्यवस्था के माध्यम से उत्तर प्रदेश के गांवों में आजीविका का स्थायी आधार तैयार हो रहा है। लाखों परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और प्रदेश में मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्पष्ट तस्वीर उभरकर सामने आ रही है।

अटल आवासीय विद्यालय बनेंगे फ्यूचर-रेडी लर्निंग हब

ड्रोन से लेकर स्पेस साइंस तक, यूपी के वंचित छात्रों को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्रत्येक विद्यालय में कम्पोजिट स्किल/इनोवेशन लैब स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही योगी सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए खुलेगा टेक्नोलॉजी का नया द्वार दो महीने में पायलट प्रोजेक्ट के साथ 6 महीने में सभी विद्यालयों में इनोवेशन लैब की होगी स्थापना परियोजना के लिए आवश्यक फंड की हुई व्यवस्था, प्रमुख तकनीकी संस्थाओं और विशेषज्ञों का लिया जाएगा सहयोग लखनऊ उत्तर प्रदेश में अटल आवासीय विद्यालय अब केवल आवासीय शिक्षा संस्थान नहीं रहेंगे, बल्कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन के अनुरूप प्रदेश सरकार प्रत्येक अटल आवासीय विद्यालय में कम्पोजिट स्किल/इनोवेशन लैब स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।  इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्रामीण, श्रमिक और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, स्पेस साइंस, 3डी प्रिंटिंग और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना है। यह पहली बार होगा जब इन वर्गों के छात्र स्कूली स्तर पर अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। मिशन मोड में लागू होगी योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत इस परियोजना को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। दो महीने में पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित विद्यालयों में इनोवेशन लैब की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी। छह महीने के भीतर सभी अटल आवासीय विद्यालयों में लैब पूरी तरह क्रियाशील हो जाएगी। उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की सचिव एवं अटल आवासीय विद्यालयों की महानिदेशक पूजा यादव ने बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन सुनिश्चित कर लिए गए हैं, जिससे कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। एक्सपर्ट संस्थानों और विशेषज्ञों से लिया जाएगा सहयोग लैब संचालन और प्रशिक्षण के लिए देश की प्रमुख तकनीकी संस्थाओं और विशेषज्ञ एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा। पहले चरण में चयनित शिक्षकों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा, जो आगे अन्य शिक्षकों और छात्रों को प्रशिक्षित करेंगे। इन इनोवेशन लैब के माध्यम से छात्रों में इनोवेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स जैसी 21वीं सदी की आवश्यक क्षमताओं को विकसित किया जाएगा, जिससे वे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। यूपी को बनाएंगे टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एजुकेशन लीडर सरकार का विश्वास है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी ड्रिवन एजुकेशन हब के रूप में स्थापित करेगी। अटल आवासीय विद्यालयों से निकलने वाले छात्र आने वाले समय में न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि तकनीकी रूप से भी प्रदेश और देश का नेतृत्व करने में सक्षम होंगे।

सोशल मीडिया की सनक: असलहों के साथ हर्ष फायरिंग, युवक-युवती की रीलबाजी पर चलेगा पुलिस का डंडा

चंदौली पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के अलीनगर थाना क्षेत्र से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक युवक और युवती घर के आंगन में असलहों का प्रदर्शन करते हुए बेखौफ हर्ष फायरिंग करते दिख रहे हैं. इसे भी पढ़ें- सहारनपुर में एक लाख का इनामी बदमाश सिराज ढेर, खुद को घिरता देख पुलिस पर की थी फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में लगी गोली बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहा युवक एक स्थानीय जनप्रतिनिधि का साथी है, जबकि युवती एक सिंगर है. यह घटना घर के आंगन में हुई, जहां दोनों ने खुलेआम असलहों का प्रदर्शन किया. इस दौरान युवक और युवती फायरिंग करते नजर आए. जिसका वीडियो वहां मौजूद किसी अन्य महिला ने रिकार्ड कर लिया. वहीं इस मामले में सीओ ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वीडियो सामने आने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या कानून का डर खत्म हो गया है, जो बेखौफ होकर हर्ष फायरिंग की जा रही है.