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मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 5 लाख तक लोन, ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य

 लखनऊ यूपी में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब किसी अभ्यर्थी को लोन 30 घंटे के ऑनलाइन ट्रेनिंग के बाद ही मिलेगा। यह पैसा बैंक को प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र मिलने के बाद जारी कर दी जाएगी। दरअसल, राज्य सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। सीएम युवा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन हासिल मिलता है। इसे लेने में युवाओं को कोई कठिनाई न हो और कहीं कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बड़ी पहल की गई है। योजना के तहत किसी युवा उद्यमी को अब लोन स्वीकृत होने के बाद चुनिंदा तीन संस्थानों से 30 घंटे का प्रशिक्षण सत्र पूरा करना अनिवार्य होगा। ट्रेनिंग के बाद प्रमाण पत्र ऑनलाइन ही बैंक को प्राप्त हो जाएगा। जिसके मिलने पर बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर देगा। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग ने फेस रिक्ग्नीशन प्रणाली अपनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बैंकों के बड़ी संख्या में आवेदनों को निरस्त किए जाने और युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रणाली में बड़ा सुधार किया गया है। सीएम युवा उद्यमी विकास योजना की प्रमुख बातें सीएम युवा उद्यमी विकास योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उत्पादन और सेवा संबंधी उद्यम स्थापित कराकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। हर साल एक लाख युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना। इसके अलावा 10 सालों में कुल 10 लाख स्वरोजगार के अवसर सृजित करना। इस योजना के तहत 5 लाख तक का लोन मिलता है। पात्रता और शर्तें आवेदनकर्ता की न्यूनतम उम्र 21 साल और अधिकतम 40 साल हो। आवेदनकर्ता कम से कम आठवीं पास होना चाहिए। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी प्रशिक्षण योजना, एससी/एसटी/ओबीसी प्रशिक्षण योजना, यूपी कौशल विकास मिशन, के अंतर्गत ट्रेनिंग या किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान से कौशल संबंधी प्रमाण पत्र/डिग्री/डिप्लोमा मिला हो। आवेदक पहले से किसी अन्य सरकारी सब्सिडी योजना का लाभ न ले रहा हो। आवश्यक दस्तावेज कौशल प्रमाण पत्र/प्रशिक्षण प्रमाण पत्र/कंप्यूटर प्रमाण पत्र/ आईटीआई प्रमाण पत्र परियोजना रिपोर्ट पैन कार्ड आधार कार्ड निवास प्रमाण पत्र बैंक पासबुक आयु प्रमाण पत्र हस्ताक्षर पासपोर्ट साइज फोटो स्वघोषणा पत्र कैसे करें आवेदन एमएसएमई पोर्टल https://msme.up.gov.in पर जाएं। यहां Register के बटन पर क्लिक करें। अपना मोबाइल नंबर और OTP के जरिए वेरीफाई करें। लॉगिन करने के बाद 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' का पर जाएं और मांगी गई जानकारी भरें इसके बाद डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर दें।

जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी

हमने पिछली सरकारों के गड्ढों को भरा, अब यूपी को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी: सीएम योगी दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी 9 वर्ष पहले प्रदेश के नाम के आगे “उत्तर” तो था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे: योगी आदित्यनाथ 2017 के पहले अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे देखकर लोग समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया: सीएम योगी मठ के प्रबंधन का अनुभव प्रदेश के संचालन में मददगार: मुख्यमंत्री नई दिल्ली  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन की विस्तृत तस्वीर पेश करते हुए कहा कि हमने अभी तक नींव को पुख्ता किया है, पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरा है। अब डबल इंजन की सरकार को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी है। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी मैन्युफैक्चरिंग शक्ति पर निर्भर करती है। उद्योग और उद्यमिता मजबूत होंगे तो रोजगार, निवेश और समृद्धि स्वतः बढ़ेगी। दुनिया के अधिसंख्य संघर्षों और युद्धों के पीछे भी आर्थिक हित ही प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में कोई भी देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा नहीं कर सकता। भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति ही मानवता व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। 75 वर्ष पहले आज के दिन ही प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी द्वारा पुनर्प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण के माध्यम से ‘ऑपरेशन शक्ति’ का प्रदर्शन किया था। भारत की यह ताकत न केवल उसके सामर्थ्य का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक मानवता एवं कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करती है। जिसके पास शक्ति होगी, जो सामर्थ्यवान होगा, वही करुणा व मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने, गिड़गिड़ाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी। कोई हमारी बात नहीं मानेगा और न ही हम पर विश्वास करेगा। अनेक प्रश्नचिह्न लगे थे उत्तर प्रदेश पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा था। प्रदेश का नाम सुनते ही लोग दूरी बना लेते थे। कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब थी कि हर वर्ष 300 से अधिक दंगे होते थे, गुंडा टैक्स वसूला जाता था और उद्यमी पलायन करने को मजबूर थे। उत्तर प्रदेश के नाम के आगे ‘उत्तर’ था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे। प्रदेश दंगों, माफिया राज, गुंडा टैक्स और पलायन की पहचान बन चुका था। यात्रा कर रहे लोग अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे दिखने पर समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया है। 2017 से पहले यही उत्तर प्रदेश की पहचान बनी थी। मठ का अनुभव प्रदेश के संचालन में सहायता कर रहा मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वह पहली बार सांसद बने थे और गोरखपुर के बंद पड़े फर्टिलाइजर कारखाने को शुरू कराने के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री से मिले, तो उनसे पूछा गया कि “यूपी में चुनाव जीतकर आए हैं, कितने लोगों का मर्डर हुआ था?”  यह उस दौर के उत्तर प्रदेश की छवि थी। 2017 में प्रधानमंत्री ने जब उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी, तब उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं था। सीएम योगी ने कहा कि मैं तो मठ चलाता था, लेकिन मठ प्रबंधन का अनुभव मुझे प्रदेश चलाने में बड़ी सहायता कर रहा है। क्योंकि किसी भी मठ का अपना एक अनुशासन होता है। समयबद्ध तरीके से कार्यक्रम संचालित होते हैं। वित्त का भी अनुशासन होता है और हर प्रकार की सुरक्षा के लिए भी उस अनुशासन को लागू करना पड़ता है। मैंने उसी अनुभव को प्रदेश प्रशासन में लागू किया। सबसे पहली प्राथमिकता सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना था। रूल ऑफ लॉ को लागू करने, पॉलिसी पैरालिसिस समाप्त करने और सेक्टोरल पॉलिसी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। कभी माफिया के लिए रोका गया था चीफ जस्टिस का काफिला मुख्यमंत्री ने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति थी कि एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कोई भी माफिया ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रही हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पलायन करने वाले परिवार लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कैराना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2015 में एक व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरा परिवार प्रदेश छोड़कर चला गया। लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद वही परिवार वापस लौटा। किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त सुरक्षा का वातावरण है और सरकार का दायित्व है कि वह हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करे। उद्योगों को ठोस सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए। किसानों की आत्महत्या रोकने, खेती को तकनीक से जोड़ने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर विशेष काम हुआ। सरकार ने बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए लैंड बैंक तैयार किया और उद्योगों के लिए स्पष्ट नीतियां बनाई। 2018 में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना आज प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रही है। ओडीओपी के माध्यम से डिजाइन, पैकेजिंग, तकनीक और ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया गया। 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां प्रदेश में रोजगार और उत्पादन का आधार बन चुकी हैं। एमएसएमई सेक्टर लगभग 3 करोड़ युवाओं को रोजगार दे रहा है। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उद्योगों को सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध कराई जाए। सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें महाकुंभ में आए 66-67 करोड़ श्रद्धालु भी शामिल थे। काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, नैमिषारण्य, बौद्ध और जैन सर्किट सहित प्रदेश की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश … Read more

डीएम डॉ. वीके सिंह का बड़ा एक्शन: जनशिकायत निस्तारण में ढिलाई पर अफसरों पर गिरी गाज

 मेरठ यूपी के मेरठ में अधिकारियों पर गाज गिरी है। डीएम डॉ. वीके सिंह ने जनशिकायतों (आईजीआरएस) के निस्तारण में लापरवाही को लेकर 9 अफसरों, अभियंताओं के एक दिन का वेतन कटौती, 155 अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। विकास भवन सभागार में सोमवार को डीएम ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त जनशिकायतों के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में नौ विभागीय नोडल अधिकारियों, अभियंताओं को अनुपस्थित पाया गया। इन सभी के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने उनके एक दिन के वेतन कटौती का निर्देश दिया। समीक्षा में पाया गया जनशिकायतों पर प्राप्त फीडबैक में 15 अधिकारियों के मामले में 100 प्रतिशत असंतुष्टि पाई गई। अर्थात शिकायतकर्ता संबंधित अधिकारी की कार्रवाई से 100 प्रतिशत असंतुष्ट है। डीएम ने इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखें। यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक शिकायत का समाधान संतोषजनक रूप से हो। प्रत्येक शिकायतकर्ता से वार्ता की जाए और मौके पर जाकर सत्यापन कर रिपोर्ट लगाई जा सके। इन्हें जारी हुआ नोटिस जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बीडीओ रजपुरा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सरूरपुर, बीडीओ हस्तिनापुर, बीडीओ दौराला, बीडीओ जानी, बीडीओ माछरा, बीडीओ मेरठ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, उप संचालक चकबंदी, मेरठ, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण पीडी, पशु चिकित्सा अधिकारी मवाना, खंड शिक्षा अधिकारी मवाना, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (जिला चिकित्सालय) और सब रजिस्ट्रार, मवाना। इनके वेतन कटौती का निर्देश हुआ अधिशासी अभियंता, यांत्रिकी विभाग, अधिशासी अधिकारी, हस्तिनापुर, जिला कमांडेंट, होमगार्ड, खंड शिक्षा अधिकारी, माछरा, एआरटीओ (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी), एआरएम रोडवेज, वरिष्ठ निरीक्षक बाट एवं माप विभाग, अधिशासी अभियंता जलकल विभाग और अधिशासी अधिकारी मवाना। कृषि विभाग ने नौ समितियों समेत 35 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस उधर, पीलीभीत में पिछले वर्ष के सापेक्ष वर्तमान वर्ष के अप्रैल महीने में 35 प्रतिशत अधिक यूरिया को खपा दिया गया। इस पर कृषि विभाग सतर्क हो गया। जिला कृषि अधिकारी ने नौ सहकारी समितियों समेत 35 उवर्रक विक्रेताओं को अधिक यूरिया बेचने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। एम-पैक्स कैशोपुर, एम-पैक्स माधोटांडा, एम-पैक्स ललौरीखेड़ा, एम-पैक्स सुहास, एम-पैक्स ऐमी, एम-पैक्स चुटकुना, एम-पैक्स बीसलपुर, दीक्षित फर्टिलाइजर, मखदूम अशरफ खाद भंडार, श्रीराम खाद भंडार, शंकर इंटरप्राइजेज, गुरुनानक फर्टिलाइजर, गगन एग्री जंक्शन, सिंह फर्टिलाइजर, विपिन खाद भंडार, शर्मा खाद भंडार, न्यू सपन खाद भंडार से जवाब मांगा गया है। इन केंद्रों पर पीओएस मशीन के माध्यम से जो बिक्री दिखाई गई है। वह बीते साल के शून्य या बेहद कम आंकड़ों के मुकाबले इस बार कई गुना अधिक है। आईएफएमएस पोर्टल के माध्यम से कड़ी मानीटरिंग की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल यूरिया की खपत में 35 फीसदी की बढ़ोत्तरी पाई गई है। इस पर कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

यूपी सरकार सख्त: 30 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य, तभी जारी होगा लोन

लखनऊ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब किसी अभ्यर्थी को लोन आनलाइन प्रशिक्षण के बाद ही मिलेगा। यह राशि बैंक को प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी करेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। योजना के तहत किसी युवा उद्यमी को अब लोन स्वीकृत होने के बाद चुनिंदा तीन संस्थानों से 30 घंटे का प्रशिक्षण सत्र पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों की खास ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र आनलाइन ही बैंक को प्राप्त हो जाएगा, जिसके मिलने पर बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर देगा। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग ने फेस रिक्ग्नीशन प्रणाली अपनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बैंकों के बड़ी संख्या में आवेदनों को निरस्त किए जाने और युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रणाली में बड़ा सुधार किया गया है। सीएम युवा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन हासिल करने में युवाओं को कोई कठिनाई न हो और कहीं कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बड़ी पहल की गई है। योजना के तहत 28 अप्रैल तक लगभग 530487 आवेदन आए थे, जिनमें 448577 आवेदनों को बैंक को भेजा गया। इनमें बैंक ने करीब 180756 आवेदनों को स्वीकृति दी और 168516 आवेदनों के तहत 5913.13 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया। लगभग 2.67 लाख आवेदनों को बैंक के स्तर से स्वीकृति न मिल पाने पर चिंता जताई गई थी। बैंक अधिकारियों ने आवेदनों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट व अन्य तकनीकी खामियां बताई थीं। मिशन निदेशक के विजयेन्द्र पांडियन ने आवश्यक बदलाव कराकर एक मई से नई व्यवस्था लागू कराई है। एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण सीएम युवा योजना के आवेदकों को प्रशिक्षण के लिए समाधान समिति, यूपीआईकान (यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड) और उद्यमिता विकास संस्थान को चुना गया है। तीनों संस्थानों को 25-25 जिले प्रदान किए गए हैं। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदकों की उनके चुने हुए सेक्टर के अनुरूप पांच दिनों में 30 घंटे की आनलाइन ट्रेनिंग कराई जा रही है। अंतिम दिन लाइव सत्र में विशेषज्ञ भी जुड़े हैं, जो आवेदकों के प्रश्नों का समाधान भी करते हैं। सीएम युवा के नोडल अधिकारी सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार बैंक जिस सेक्टर या कारोबार के लिए लोन स्वीकृत करता है, उसके लिए विशेषज्ञों से खास ट्रेनिंग का माड्यूल एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है। पंजीकरण से पहले 30 मिनट का वीडियो देखना अनिवार्य पोर्टल पर पंजीकरण के लिए भी काउंसलिंग सत्र के तहत आधे घंटे का प्रारंभिक वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण के लिए आवेदक को पहले उसके चुने गए उद्यम की बारीकियों व बैंक से लोन लेने के सेक्टर की जरूरी जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध करा रहा है। मानक विहीन लैब व प्रशिक्षण देने वाली 400 कंपनियां हटाई गईं लखनऊ। यूपी में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने में गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को हटा दिया गया है। लैब व प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। ऐसे में उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से इस बार बड़ी कार्रवाई की है। गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रशिक्षण दिलाने के सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से जिलों में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों का चयन किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान मिशन की ओर से टीमें भेजकर मानकों की जांच कराई जाती है। जांच में 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियां ऐसी पाईं गईं जिनके यहां लैब में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। यही नहीं मनमाने ढंग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा था और सरकार से इसकी एवज में धन लिया जा रहा था। मिशन निदेशक पुलकित खरे की ओर से सत्र 2026-27 से कौशल प्रशिक्षण को लेकर पर्याप्त सख्ती की जा रही है। जिसका नतीजा है कि मानकों की जांच सख्ती से कर गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। करीब 900 से अधिक कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जा चुका है और आगे मांग के अनुसार प्रशिक्षण लक्ष्य दिए जाएंगे। अच्छा कार्य करने पर टॉपअप की सुविधा भी है, यानी उन्हें और युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य दिया जाएगा। कौशल दृष्टि पोर्टल से प्रशिक्षण की निगरानी की जा रही है। जिस पर जियो टैगिंग के साथ प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण करते युवाओं की फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। फिलहाल अब गड़बड़ी नहीं चलेगी।

योगी कैबिनेट फुल होने के बाद, BJP की 2024 की तैयारी और चुनावी स्थिति पर सवाल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दूसरा कैबिनेट विस्तार रविवार किया गया है. 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई तो दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया. मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश देने कवायद की गई है, क्योंकि 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'पीडीए' फॉर्मूले से बीजेपी को पीछे धकेल दिया था।  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है तो कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  योगी मंत्रिमंडल विस्तार में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली. ये दोनों ही नेता पहले से योगी सरकार में राज्यमंत्री थे, जिन्हें अब प्रमोशन देकर अब स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. इस तरह से योगी मंत्रिमंडल अब पूरी तरह फुल हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि कैबिनेट विस्तार से बीजेपी के बिगड़े सियासी समीकरण को कितनी मजबूती मिल पाएगी?  कैबिनेट के जरिए बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग योगी मंत्रिमंडल का विस्तार कर बीजेपी ने दलित, पिछड़े और ब्राह्मण समाज केतबकों को बड़ा संदेश दे दिया है. योगी सरकार से नाराज माने जा रहे ब्राह्मण समाज से मनोज पांडेय को मंत्री बना कर बीजेपी ने उन्हें लुभाने का प्रयास किया है. इसी तरह भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट समाज को जोड़े रखने का दांव है तो सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री पद से प्रमोशन स्वतंत्र प्रभार देकर गुर्जर समाज को सियासी संदेश दिया है।  कैबिनेट विस्तार में दलित चेहरे को तौर पर कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया, जिनके जरिए गैर जाटव दलित वोटों को साधने की कवायद की है. कृष्णा पासवान पासी समुदाय से हैं तो सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समुदाय से आते हैं. इन दोनों ही नेताओं दलित प्रतिनिधित्व के रूप में कैबिनेट में जगह दी है ताकि दलित समाज के विश्वास को बनाए रखा जा सके।  वहीं, लोधी, पाल और विश्वकर्मा जैसी पिछड़ी जातियों पर भी फोकस किया गया. पाल समुदाय से आने वाले अजीत सिंह पाल को राज्यमंत्री से प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बना दिया गया है. इसी तरह लोधी जाति से आने वाले कैलाश सिंह राजपूत बनाए गए हैं. हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री के तौर पर शामिल कर ओबीसी की लोहार जाति को सियासी संदेश दिया है।  बीजेपी ने दिया सियासी संदेश,  राह में कांटे ही कांटे?  योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ने राजनीतिक रूप से इसका सबसे बड़ा संदेश दिया है. बीजेपी ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उसके जरिए ओबीसी की उन्हीं जातियों पर फोकस किया है, जो पहले से ही बीजेपी के साथ जुड़ी हुई हैं. सपा के पीडीए फॉर्मूले के साथ 2024 में नहीं गई थी।  बीजेपी गैर-यादव OBC की राजनीति से आगे बढ़कर अन्य पिछड़ी जाति पर काम कर रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को जिन इलाकों और जातियों में नुकसान हुआ था, पार्टी अब उसी गैप को भरने की कोशिश कर रही है. पश्चिम यूपी में जाट समीकरण लोकसभा में पूरी तरह स्थिर नहीं दिखे थे. इसी तरह मायावती के कमजोर से होने से दलित वोट का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर गया था।  अखिलेश यादव ने पीडीए के जरिए पिछड़ी जातियों को भी साथ जोड़ने में कामयाब रहे. इसलिए इस विस्तार के जरिए इन सभी तबकों को संदेश दिया जा रहा है कि सत्ता में उनकी हिस्सेदारी है, लेकिन सवाल यही है कि अखिलेश यादव के 'पीडीए फॉर्मूले' को बीजेपी क्या काउंटर कर पाएगी।  2024 के बिगड़े समीकरण कितना दुरुस्त होगा?  बीजेपी ने योगी मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उससे 2024 में बीजेपी के अलग होने वाली जातियों को क्या फिर से बीजेपी जोड़ पाएगी? ये इसीलिए भी कहा जा रहा है कि 2019 की तुलना में बीजेपी 2024 में 62 सीटों से घटकर 33 सीट पर सिमट गई थी।  सपा 37 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही तो उसकी सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें मिली थी. 2024 के चुनाव नतीजे को विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से देखें तो सपा और कांग्रेस को करीब 128  विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. बीजेपी के साथ जुड़ा रहा कुर्मी, मौर्य जैसे ओबीसी वोटर के साथ-साथ राजपूत और दलित वोटर भी छिटक गए थे. इसके चलते ही बीजेपी लोकसभा चुनाव में सपा से पीछे रह गई थी।  बीजेपी ने कुर्मी समाज के विश्वास को जीतने के लिए पकंज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, लेकिन मौर्य और राजपूत समाज को साधने की कवायद कैबिनेट के जरिए नहीं हो सकी. इसीलिए बृजभूषण शरण सिंह और विधायक आशा मौर्य का दर्द छलक उठा. आशा मौर्य ने कहा कि लगता है पार्टी को अब मौर्य समाज की आवश्यकता नहीं रह गई और बाहर से आए दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गई है।  वहीं, बृजभूषण सिंह कैबिनेट विस्तार से नाखुश दिखे. माना जा रहा था कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद चाहते थे. किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने 'X' पर शायराना अंदाज में निशाना साधा कि शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है. उनके इस पोस्ट को लेकर साफ समझा जा सकता है कि किस तरह से नाराज हैं. मौर्य और ठाकुर वोटों को साधे रखने के लिए बीजेपी ने कोई सियासी दांव नहीं चल रही है।  पांडेय और चौधरी बीजेपी के कितन काम आएंगे?  ब्राह्मण बीजेपी के साथ पहले ही मजबूती से खड़ा है और मनोज पांडेय मंत्री बनकर क्या खिसकते हुए ब्राह्मण समाज को जोड़े रख पाएंगे, ये सवाल इसीलिए है कि सपा में रहते हुए ब्राह्मणों को अखिलेश के करीब नहीं ला सके थे. अखिलेश से बगावत करने का भले ही उन्हें इनाम मिल गया है, लेकिन ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता अपने क्षेत्र से बाहर नहीं है।  पश्चिम … Read more

योगी सरकार का जोर: जल जीवन मिशन को मिला बढ़ा हुआ बजट, लक्ष्य जल्द पूरा होगा

योगी सरकार में जल जीवन मिशन को मिल रहा भरपूर बजट, जल्द पूरा होगा लक्ष्य केंद्र और प्रदेश सरकार के लगभग 28 हजार करोड़ रुपये से पूरे होंगे अधूरे काम जल जीवन मिशन 2.0 के विस्तार से ग्रामीण जनता को राहत देगी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) न केवल एक सरकारी योजना है, बल्कि यह ग्रामीण जीवनशैली में एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मिशन को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्र से उत्तर प्रदेश के लिए 13,425 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित हो चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये वर्ष 2026-27 में योजनाओं को पूरा करने के लिए देगी। इस 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में कोई बाधा नहीं आएगी।  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में 2.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को अब जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए हासिल किया जाएगा। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुका है। इसमें जल जीवन मिशन की डेड लाइन जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है। साथ ही जारी वित्तीय वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश को 13,425 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं। एसडब्ल्यूएसएम, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि मिशन के नए स्वरूप और बजट के साथ नई जिम्मेदारियों को भी जोड़ा गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विंध्य और बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई इलाकों में पानी में रासायनिक तत्वों की जांच कर उन्हें पीने योग्य बनाना सबसे जरूरी है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। जनभागीदारी भी इसका दूसरा सबसे अहम बिंदु है। प्रदेश में जलापूर्ति के लिए जितने भी पंप हाउस, पानी की टंकी समेत अन्य निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम एवं पेयजल स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) को सौंपा जाएगा। 10 वर्षों तक जल निगम, (वीडब्ल्यूएससी), निर्माण एजेंसियां व ठेकेदार मिलकर इनके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करेंगे। पानी के स्रोत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि एक बार निर्माण हो जाने के बाद कोई भी बोरवेल, पंप या पानी का स्रोत सूखे नहीं। इससे सभी ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी। प्रभास कुमार ने बताया कि वर्ष 2027 में सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सभी नई प्राथमिकताओं को प्रदेश में लागू कराया जाएगा। तेजी से पूरा किया जा रहा लक्ष्य विभाग के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत अभी तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026-27 में 2.62 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य पूरा करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा दांव, मंत्रिमंडल में 60% ओबीसी व एससी समाज शामिल

 लखनऊ  सत्ता की हैट-ट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार के जरिए जातीय से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों के संतुलन का रणक्षेत्र सजा लिया है। 19वीं विधानसभा के लिए लगभग आठ माह बाद होने वाले चुनाव को लेकर सपा जिस पीडीए के अस्त्र को धार दे रही है, भाजपा ने विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर उसको कुंद करने का बड़ा दांव चला है। सपा चुनाव के लिए जाट, गुर्जर, पाल, वाल्मीकि, पासी आदि जातियों में पैठ बढ़ाने में जुटी है। भाजपा ने सपा की इसी रणनीति को ध्वस्त करने का ताना-बाना मंत्रिमंडल के सहारे बुना है। ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ दो को प्रोन्नत किया गया है। दलित समाज से भी दो और मंत्री बनाए गए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब 60 प्रतिशत मंत्री ओबीसी और एससी समाज से पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। रविवार के विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज का ही प्रतिनिधित्व हो गया है। क्षत्रिय व वैश्व समाज की भागीदारी यथावत रखते हुए पार्टी ने सवर्ण समाज से एक मात्र मनोज पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर यूजीसी सहित अन्य मुद्दों को लेकर समाज में उपजी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया गया है। चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार के कई मायने चुनाव से आठ माह पहले किया गया विस्तार कई मायनों में अहम है। बनाए गए मंत्रियों को भले ही अन्य की तरह लंबा कार्यकाल नहीं मिलेगा लेकिन इस बहाने सत्ताधारी भाजपा, विरोधियों के साथ ही कार्यकर्ताओं को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। चूंकि प्रदेश की राजनीति आज भी जातीय संतुलन पर ही टिकी है, इसलिए दूसरे विस्तार में खासतौर से जातीय गणित का ही ध्यान रखा गया है। चुनाव में ओबीसी जातियों की निर्णायक भूमिका होने के नाते विस्तार में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में आने वाले लोध (कैलाश राजपूत), पाल (अजीत सिंह), विश्वकर्मा (हंसराज), गुर्जर (सोमेन्द्र तोमर) व जाट (भूपेन्द्र चौधरी) बिरादरी का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया है। इससे पहले भाजपा पिछड़े में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को पार्टी की कमान सौंप चुकी है। पिछड़े समाज को बनाया वोट बैंक सूबे की सत्ता हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की नजर पहले से ही राज्य के लगभग 44 प्रतिशत आबादी वाले पिछड़े समाज के वोट बैंक पर है। दोनों पार्टियों ने पिछड़े समाज से आने वाले नेताओं को ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप रखी है। अनुसूचित जाति से पहली बार वाल्मीकि (सुरेन्द्र दलेर) के साथ ही पासी(कृष्णा पासवान) बिरादरी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस संग सपा, पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए भाजपा को बड़ा झटका दे चुकी है। विस्तार के बाद अधिकतम 60 मंत्रियों वाले योगी मंत्रिमंडल में पिछड़े समाज से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित सर्वाधिक 25 मंत्री हो गए हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के 11, सवर्ण समाज से भी 22 (ब्राह्मण समाज के आठ, राजपूत के छह, वैश्य के चार, दो भूमिहार, एक-एक खत्री व कायस्थ समाज से) मंत्री अब हो गए हैं। विस्तार के जरिए भाजपा ने जिस तरह से सवर्णों के साथ ही गैर यादव ओबीसी बिरादरी को साधने की कोशिश की है, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा के सामने इसमें सेंधमारी करने की ही बड़ी चुनौती होगी। विदित हो कि लोकसभा चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। यथावत ही रही सहयोगी दलों की हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भले ही काफी समय से एनडीए के सहयोगी दल बयानबाजी के साथ दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे थे लेकिन दूसरे विस्तार में किसी को भी मौका नहीं मिला। इसके बाद भी सहयोगी दलों के नेता पूरी तरह से शांत हैं। माना जा रहा है कि बिहार के बाद बंगाल, असम एवं पुडुचेरी विधान सभा चुनाव में भी मिली बड़ी जीत के बाद सहयोगी दल, भाजपा पर अब दबाव बनाने से बच रहे हैं। सहयोगी दलों को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह का माहौल भाजपा के पक्ष में बना हुआ है उसका असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी रहने वाला है। ऐसे में किसी तरह का दबाव बनाने से सत्ताधारी भाजपा में उनकी स्थिति बिगड़ सकती है। सपा सहित विरोधियों के साथ खड़े होने से फिलहाल फायदा मिलने का आसार नहीं है। 2017 में अपना दल और सुभासपा से हुआ था अलायंस गौरतलब है कि भाजपा वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपना दल ( सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी थी। सरकार बनने पर सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में निषाद पार्टी का भी भाजपा से गठजोड़ हुआ लेकिन मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए जाने पर सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से किनारा कर लिया। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी तो भाजपा के साथ रहीं लेकिन सुभासपा ने सपा के साथ चुनाव लड़ा था। छह विधायक भी जीते लेकिन सपा से अनबन के बाद राजभर ने फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व रालोद भी सपा से नाता तोड़कर भाजपा के साथ आ गई। भाजपा के साथ खड़े दलों का एक-एक विधायक वर्तमान में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री है।  

योगी सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर फोकस

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विश्वविद्यालयों के कायाकल्प के बाद, अब राज्य सरकार ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने का लक्ष्य तय किया है। जिस तरह यूपी के सात विश्वविद्यालयों ने नैक (NAAC) की 'A++' रैंकिंग हासिल कर देशभर में मिसाल पेश की है, ठीक उसी तर्ज पर अब डिग्री कॉलेजों को भी उत्कृष्ट श्रेणी में लाने के लिए 'मिशन मोड' में काम शुरू हो गया है। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेजों तक: रैंकिंग का नया रोडमैप उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का विजन अब केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है।  विशेष कार्यशालाएं: प्रदेशभर के डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें नैक रैंकिंग की बारीकियों, डेटा संकलन और गुणवत्ता सुधार के मंत्र दिए जा रहे हैं। रिसर्च और डिजिटल कल्चर: कॉलेजों को केवल 'डिग्री बांटने' वाला केंद्र न मानकर, उन्हें शोध (Research) और डिजिटल शिक्षा का हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बी-ग्रेड का दौर खत्म, ए++ की लगी झड़ी योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अक्सर रैंकिंग के मामले में पिछड़ जाती थी। ऐतिहासिक सुधार: पहले जहां विश्वविद्यालय बी या बी-प्लस ग्रेड तक ही पहुंच पाते थे, आज कुलाधिपति (राज्यपाल) और सरकार के साझा प्रयासों से राज्य के सात विश्वविद्यालय ए++ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं। ग्लोबल बेंचमार्क: उत्तर प्रदेश के दो विश्वविद्यालय अब 'क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग' में शामिल हैं, जबकि छह संस्थानों ने 'क्यूएस एशिया रैंकिंग' में अपनी जगह पक्की की है। तीन विश्वविद्यालय यूजीसी की 'ग्रेड-1' श्रेणी का गौरव हासिल कर चुके हैं। छात्र सुविधाएं और रोजगार: नई शिक्षा नीति का आधार उच्च शिक्षा में यह गुणात्मक सुधार केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ छात्रों को मिल रहा है।  इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और बेहतर छात्र सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।  नई शिक्षा नीति (NEP): पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाकर छात्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।  प्रतिस्पर्धा: कॉलेजों के बीच बेहतर रैंकिंग हासिल करने की होड़ से अंततः शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।  

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, 15 मई से लगेंगे विशेष सहायता कैंप

लखनऊ  ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। पूर्वांचल के उपभोक्ता 8010968292, मध्यांचल के 7669003409, पश्चिमांचल के 7859804803, दक्षिणांचल के 8010957826 तथा केस्को कानपुर के 8287835233 मोबाइल नंबर पर अपना बिजली कनेक्शन नंबर वाट्सअप कर बिल हासिल कर सकते हैं। अब नया बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के पोस्टपेड मोड में ही मिलेगा। प्रदेशभर में अब तक 83 लाख से अधिक प्रीपेड मोड में किए जा चुके स्मार्ट मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में करने के साथ ही उपभोक्ताओं को पहले की तरह जून से बिल देने के संबंध में पावर कारपोरेशन के एमडी ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए हैं। मई में उपभोग की गई बिजली का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। उपभोक्ताओं को अगले 15 दिन में बिल जमा करने की सुविधा मिलेगी। 15 दिन में बिल न जमा करने पर अगले सात दिन में कनेक्शन काट दिया जाएगा। 30 अप्रैल तक के बकाए बिल का घरेलू उपभोक्ता 10 किस्तों में जबकि अन्य श्रेणियों के उपभोक्ता तीन किस्तों में विलंब अधिभार सहित जमा कर सकेंगे। तकनीकी दिक्कतों के चलते स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चार मई को प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की थी। चार दिन बाद गुरुवार को कारपोरेशन के एमडी नितीश कुमार ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल डिस्काम व केस्को के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में परिवर्तित करने संबंधी निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि अब सभी नए कनेक्शन स्मार्ट मीटर के माध्यम से पोस्टपेड मोड में ही दिए जाएंगे। मई में बिजली खपत संबंधी बिल पोस्टपेड पद्धति में उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं। स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि स्मार्ट मीटर की आटोमैटिक रीडिंग न उपलब्ध होने पर मैनुअल रीडिंग कर अनिवार्य रूप से 10 तक बिल उपलब्ध कराया जाए। उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर रजिस्टर्ड न हो या गलत हो तो उसे डिस्काम के संबंधित वाट्सएप नंबर पर कनेक्शन संख्या के माध्यम से अपडेट कराने के बारे में बताया जाए। 1912 के माध्यम से भी बिल हासिल किया जा सकेगा

बरेली दूसरे और पीलीभीत तीसरे स्थान पर रहे

 लखनऊ  योगी सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। रामपुर ने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है जबकि बरेली ने दूसरा और पीलीभीत ने तीसरा स्थान हासिल किया है। रामपुर ने 10 में से 9.42 अंक प्राप्त कर बाजी मारी मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खासतौर पर जनशिकायतों के समाधान में जिले ने बेहतर कार्य करते हुए शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया। शिकायतों के निस्तारण के बाद प्राप्त सकारात्मक फीडबैक ने भी जिले की रैंकिंग को मजबूत किया। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.42 अंक प्राप्त हुए। इसके साथ ही रामपुर ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं, बरेली ने 9.41 अंक के साथ दूसरा और पीलीभीत ने 9.36 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। टॉप टेन जिलों में इटावा, हमीरपुर, महराजगंज ने स्थान प्राप्त किया सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें इटावा ने 9.35 अंक हासिल कर चौथा, हमीरपुर ने 9.33 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह महराजगंज ने 9.31 अंक हासिल कर छठवां, शाहजहांपुर ने 9.30 अंक हासिल कर सांतवां, सीतापुर ने 9.29 अंक हासिल कर आठवां, हरदोई ने 9.27 अंक हासिल कर नौवां और औरैया ने 9.26 अंक हासिल कर दसवां स्थान प्राप्त किया है। इन सभी जिलों ने जनशिकायतों के समाधान, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश के जिलों के बीच बेहतर कार्य करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड योगी सरकार का एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योगी सरकार को जिलों के प्रदर्शन की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होता है, वहां प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।