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उप मुख्यमंत्री शर्मा ने गौधन की सुरक्षा, देखभाल एवं संरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था बनाने के निर्देश

रायपुर : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम के गौसेवकों एवं अधिकारियों की ली बैठक उप मुख्यमंत्री शर्मा ने गौधन की सुरक्षा, देखभाल एवं संरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था बनाने के निर्देश उप मुख्यमंत्री शर्मा ने ग्राम सरेखा में गौशाला के लिए उपयुक्त स्थल चयन के निर्देश रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने  कबीरधाम जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जिले में गौधन की सुरक्षा, समुचित देखभाल, संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, गौसेवकों एवं पशुपालकों की बैठक ली। बैठक में जिले में गौधन के रखरखाव, उपचार, संरक्षण तथा दुर्घटना एवं आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि गौधन की सुरक्षा और उनकी समुचित देखभाल के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जो प्रभावी होने के साथ-साथ स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप भी हो। उन्होंने अधिकारियों को जिले में गौधन के लिए पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को ग्राम सरेखा में गौशाला निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने को कहा, ताकि गौधन के संरक्षण और देखभाल के लिए व्यवस्थित सुविधा विकसित की जा सके।          बैठक में प्रमुख मार्गों पर दुर्घटनाओं से संबंधित विषय पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग सहित जिले के अन्य प्रमुख मार्गों पर दुर्घटना अथवा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्रेन, जेसीबी मशीन सहित अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता रखने को कहा, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई कर स्थिति को सामान्य किया जा सके। गुजरात की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर कबीरधाम में लागू करने पर जोर        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने गुजरात राज्य में गौधन की देखभाल और पशुधन प्रबंधन के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की अच्छी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कबीरधाम की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वहां की उपयोगी व्यवस्थाओं को अपनाने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए। उन्होंने गौसेवकों एवं गौ रक्षकों को गुजरात में पशुधन की देखभाल और प्रबंधन की व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कराने के लिए भ्रमण कराने की बात भी कही। इससे गौसेवकों को वहां की कार्यप्रणाली को समझने और जिले में बेहतर व्यवस्था विकसित करने में सहयोग मिलेगा। समय पर उपचार के लिए पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता          शर्मा ने पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक को निर्देश दिए कि जिले में गौधन के समुचित उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां एवं अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखी जाए। उन्होंने आवश्यकता के अनुसार पशु चिकित्सकों तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा, ताकि बीमार एवं घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि गौधन की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ समाज की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। गौसेवकों, पशुपालकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गौसेवकों एवं पशुपालकों के साथ बैठक कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस रणनीति एवं कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।          बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, अपर कलेक्टर नरेंद्र पैकरा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गौसेवक एवं पशुपालक उपस्थित थे।

Jhiram Ghati Case: 13 साल बाद आया बड़ा फैसला, 10 दोषियों को मृत्युदंड; हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन

रायपुर  2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं।25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। NIA के मुताबिक इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। यह सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी। तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में रहेंगे। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी। न्यायालय के फैसले का सम्मान, लेकिन न्याय की लड़ाई जारी झीरम नक्सली हमले के मामले में न्यायालय के फैसले के बाद पीड़ितों की प्रतिक्रिया सामने आई है. हमले में घायल हुए शिवनारायण द्विवेदी ने न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए इसका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी. द्विवेदी के मुताबिक, झीरम हमले में बड़े नेताओं समेत कई निर्दोष लोगों की हत्या हुई थी. वे खुद भी इस हमले में घायल हुए थे और आज भी उस घटना के पीड़ित हैं. उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले का सम्मान है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।  क्या था झीरम घाटी हमला ? झीरम घाटी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दरभा इलाके के पास स्थित है। 25 मई 2013 को CPI (माओवादी) के सदस्यों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर हमला किया। NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमला करीब शाम 4:15 बजे NH-221 के झीरम घाटी क्षेत्र में हुआ था। हमले में माओवादी दस्ते ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के अनुसार 27 लोगों की मौके पर मौत हुई थी, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे और 38 लोग घायल हुए थे। सार्वजनिक रिपोर्टों में बाद में मृतकों की संख्या 29 बताई गई, जिसमें बाद में चोटों के कारण हुई मौतें भी शामिल हैं। हमला किसने किया था? जांच एजेंसी के अनुसार हमला CPI (Maoist) के सदस्यों ने किया था। NIA के मामले में इसी संगठन के सदस्यों पर काफिले पर हमले, हत्या और साजिश समेत विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए। 2026 में हुई सुनवाई में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 16 सितंबर को इन्हीं 10 को मृत्युदंड सुनाया गया। हालांकि आरोपपत्र में इससे अधिक लोगों के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज थे और कुछ आरोपी फरार/वांछित बताए गए हैं। आखिर हमला क्यों किया गया था? हमले के उद्देश्य को लेकर जांच और सार्वजनिक रिपोर्टों में कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने की बात सामने आई है। खास तौर पर तत्कालीन कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा माओवादियों के निशाने पर बताए गए, क्योंकि वे माओवादी विरोधी सलवा जुडूम अभियान से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे। हालांकि पूरे हमले के पीछे के उद्देश्य को एक ही कारण तक सीमित करना उचित नहीं होगा। उस समय बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा, सुरक्षा अभियानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तनाव पहले से मौजूद था। कांग्रेस के कौन-कौन से बड़े नेता मारे गए? झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। मारे गए लोगों में प्रमुख कांग्रेस नेताओं में… विद्या चरण शुक्ल – पूर्व केंद्रीय मंत्री, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हुई नंद कुमार पटेल – तत्कालीन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश पटेल – नंद कुमार पटेल के बेटे महेंद्र कर्मा – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष उदय मुदलियार – कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक इनके अलावा पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी हमले में मारे गए। उस दिन क्या हुआ था? कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली थी। यात्रा के बाद नेताओं का काफिला बस्तर के रास्ते लौट रहा था। झीरम घाटी के पास माओवादियों ने काफिले को घेर लिया और हमला शुरू कर दिया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार हमले में हथियार और गोला-बारूद भी लूटा गया था। जांच में दो AK-47 राइफल, एक 9mm पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और अन्य सामान के लूटे/गायब होने का उल्लेख है। जांच कैसे आगे बढ़ी? हमले के बाद मामला पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने दर्ज किया। केंद्र सरकार ने इसके बाद NIA को जांच सौंपी। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के लिए तत्कालीन हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग बनाया था। NIA की जांच के बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चलती रही। 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया। झीरम घाटी हमला इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? झीरम घाटी हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक बड़े हिस्से का नेतृत्व एक ही हमले में मारा गया था। घटना ने राज्य की राजनीति और माओवादी हिंसा के बीच संबंधों पर देशभर में चर्चा छेड़ दी थी। 13 साल बाद आया अदालत का फैसला अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मृत्युदंड के फैसले के बाद दोषियों के पास कानून के तहत उपलब्ध आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता रहेगा। वे माओवादी जिन्हें आरोपी बनाया गया था, अब मिली फांसी झीरम घाटी के हमले को नक्सली संगठन के टॉप लीडरों ने प्लान किया है। जानकारी के अनुसार, झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड हिडमा था। 25 मई 2013 को यह हमला हुआ था। माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर घात लगाकर हमला किया था। हमला करने वाले सभी नक्सली संगठन के मेंबर थे। आरोपियों में जो शामिल थे, उनमें…     … Read more

भिलाई के गीतांश बामनिया की बड़ी कामयाबी, Rentomojo ला रही ₹1,266 करोड़ का IPO

भिलाई   शहर के कारोबारी गीतांश बामनिया ने अपनी कंपनी रेंटोमोजो का 1,266 करोड़ का आइपीओ बाजार में उतारकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेंटोमोजो की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) 9 सितंबर को खुली और 11 सितंबर को बंद हुई। कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग 17 सितंबर को प्रस्तावित है। बता दें कि रेंटोमोजो एक प्रमुख भारतीय आनलाइन रेंटल प्लेटफार्म है। यह कंपनी ग्राहकों को घर और आफिस के उपयोग के लिए फर्नीचर, घरेलू उपकरण (जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन) और इलेक्ट्रानिक्स सामान मासिक किराए या सब्सक्रिप्शन माडल पर उपलब्ध कराती है। भिलाई में पले-बढ़े, दो स्टार्टअप रहे असफल     गीतांश भिलाई में ही पले-बढ़े हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेक्टर-10 इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल से पढ़ाई करने वाले गीतांश ने आइआइटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।  इसके बाद उन्होंने केपीएमजी और फ्लिपकार्ट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। फिर उन्होंने खुद उद्यमी बनने का निर्णय लिया, दो स्टार्टअप भी शुरू किए, जो असफल रहे।     असफलता से सीखते हुए उन्होंने वर्ष 2012 में ‘रेंटोमोजो’ की शुरुआत की। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई। असफलताओं से मिली सीख बनी कारोबार की ताकत     रेंटोमोजो के सफर में गीतांश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने शुरुआती असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।  कारोबार में आने वाली चुनौतियों को समझते हुए उन्होंने माडल में बदलाव किए और बाजार की जरूरत के अनुरूप कंपनी को आगे बढ़ाया। अब 1,266 करोड़ रुपये के आइपीओ के जरिए कंपनी ने पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए पेश किए हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री बाजार में की जा सकेगी। पिता से कारोबार की प्रेरणा, मां चिकित्सा क्षेत्र में रहीं अग्रणी गीतांश अपने कारोबारी दृष्टिकोण के लिए परिवार से मिली प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके पिता जगदीश बामनिया भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद करीब 10 वर्षों तक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के व्यवसाय से जुड़े रहे। उनकी मां डॉ. मीरा बामनिया बीएसपी के जेएलएन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर सेक्टर-नौ में बाल एवं शिशु रोग विभाग की प्रमुख रहीं और वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुईं।

2017 कांस्टेबल भर्ती मामला: 400 से ज्यादा अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, SC ने SLP की खारिज

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती के सैकड़ों प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में 2259 कांस्टेबल पदों की भर्ती से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी है। इससे 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत कांस्टेबल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद बढ़ गई है। मामला प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरे जाने के अधिकार को लेकर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था। हाई कोर्ट ने सुनाया था अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला     मामला पारस राम ध्रुव एवं अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम, 2007 के नियम 13(2) के तहत वैध प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरा जा सकता है। हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर परिवर्तन अथवा अन्य कारणों से रिक्त हुए पदों को केवल इस आधार पर प्रतीक्षा सूची से बाहर नहीं किया जा सकता कि वे प्रारंभिक रूप से चयनित अभ्यर्थियों के पद नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की एसएलपी     हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को 47 सफल अभ्यर्थियों के पद सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके साथ ही हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की संभावना मजबूत हो गई है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना अली उपस्थित रहीं। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रुचि नागर और एओआर देवाशीष तिवारी ने पैरवी की। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल के. नटराज उपस्थित हुए। वर्षों से नियुक्ति का इंतजार     2017 की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में चयन और प्रतीक्षा सूची को लेकर विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे। हाई कोर्ट के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।     अब एसएलपी खारिज होने से 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया और रिक्त पदों की संख्या के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।  

नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपालरामेन डेका ने किया शुभारंभ

रायपु छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्तअजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्तअजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्षविजय देव एवं संयोजकसुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिवविकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपालरमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया । सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्तअजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई। बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया। मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई। सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

आशीर्वाद के दीयों से जगमगाएगा बिलासपुर, शाम 7 बजे जिले में एक साथ जलेंगे 10 लाख दीप

रायपुर प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 बरस पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर बिलासपुर जिले में लगभग 10 लाख दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। जिला स्तरीय ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का आयोजन उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्रीअरुण साव के मुख्य आतिथ्य में पुलिस परेड ग्राउंड में शाम 7 बजे से होगा। जिला स्तरीय कार्यक्रम में 1 लाख 25 हजार दीपों का प्रज्वलन किया जाएगा।           अभियान के तहत जिले के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को भी दीपों से रोशन किया जाएगा। रतनपुर में 11 हजार, बेलपान में 1100, ताला में 1100 तथा मल्हार में 11 हजार दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इनके साथ ही जिले के चारों विकासखंडों की चयनित 44 ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत घरों में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।        जनपद पंचायत बिल्हा अंतर्गत बैमा, कोरबी, लिमतरी, भटगांव, परसदा भ., सरवनदेवरी, उच्चभट्ठी, धमनी, अकलतरी एवं देवकिरारी में, जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत नवागांव सल्का, अमाली, नगोई, खोंगसरा, बेलगहना, बानाबेल, पटैता, खैरझिट्टी, खरगहनी, मोहदा, बरद्वार एवं अमने में शत-प्रतिशत घरों में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इसी प्रकार विकासखंड मस्तुरी के दर्रीघाट, सीपत, परसदावेद, बेलटुकरी, बिटकुला, खम्हरिया, गतौरा, पंधी, जोंधरा एवं गोपालपुर तथा जनपद पंचायत तखतपुर के लोखंडी, बोड़सरा, बिनौरी, खपरी, घुटकू, अमसेना, खरकेना, कोड़ापुरी, विजयपुर, गनियारी, छतौना एवं खजुरीनवागांव में भी प्रत्येक घर में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके अलावा हर गांव में 100 से ज्यादा आशीर्वाद के दीये जलाने की व्यवस्था की गई है।         अभियान के तहत शाम 7 बजे जिले के सभी शासकीय भवनों, विद्यालयों, पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं ग्राम पंचायतों में दीप प्रज्वलन किया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों के घरों में भी दीप जलाए जाएंगे। महिला स्वसहायता समूहों की दीदियां विभिन्न स्थानों पर दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में सहयोग करेंगी। वहीं जल जन सेवा संकल्प के तहत जिले के बांध, बैराज, एनीकट एवं नहर शीर्षों पर भी दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।

अम्बिकापुर से भारत गौरव ट्रेन ने शुरू की काशी-अयोध्या की यात्रा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने दिखाई हरी झंडी

रायपुर रामलला तीर्थ दर्शन (अयोध्या धाम) योजना के अंतर्गत आज सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालु भारत गौरव ट्रेन सेकाशी एवंअयोध्या धाम के लिए रवाना हुए। अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से दोपहर 2ः30 बजे रवाना हुई स्पेशल ट्रेन को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, सभापति नगर पालिक निगमहरमिंदर सिंह टिन्नी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन, आईआरसीटीसी तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को काशी में बाबा विश्वनाथ और अयोध्या धाम मेंरामलला के दर्शन का अवसर मिलेगा। दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ देश की समृद्ध धार्मिक एवं    सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं काकाशी औरअयोध्या धाम के लिए रवाना होना प्रसन्नता का विषय है। श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ औररामलला के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करेंगे। अयोध्या मेंराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया में प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी की सार्वजनिक सहभागिता के कारण श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या धाम की यह यात्रा विशेष भावनात्मक महत्व रखती है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को अपनी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के अधिक से अधिक अवसर मिलें। अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन पर दिखा भक्ति और उत्साह ट्रेन की रवानगी के अवसर पर अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। परिजन और परिचित भी श्रद्धालुओं को विदाई देने स्टेशन पहुंचे। काशी और अयोध्या धाम के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में उमंग और प्रसन्नता दिखाई दी। हरी झंडी दिखाकर ट्रेन रवाना किए जाने के साथ ही स्टेशन परिसर में आस्था और उल्लास का वातावरण बन गया। आईआरसीटीसी के माध्यम से भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधा श्रद्धालुओं की सुविधाजनक एवं व्यवस्थित यात्रा के लिए आईआरसीटीसी के माध्यम से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को भोजन, आवास एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यात्रा प्रबंधन में आईआरसीटीसी तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की टीम समन्वय के साथ कार्य कर रही है, ताकि तीर्थयात्रियों को यात्रा के दौरान आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से मिल सकें। अयोध्या मेंरामलला के दर्शन का विशेष भाव सरगुजा संभाग के श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या धाम की यह यात्रा विशेष धार्मिक एवं भावनात्मक महत्व रखती है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या मेंराम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन किया था।रामलला के भव्य मंदिर में दर्शन का अवसर श्रद्धालुओं के लिए आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव के रूप में सामने आ रहा है। काशी में बाबा विश्वनाथ और अयोध्या मेंरामलला के दर्शन के साथ श्रद्धालु देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ेंगे। 62 ट्रेनों से 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन   रामलला तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को अयोध्या धाम की यात्रा का अवसर लगातार मिल रहा है। अब तक 62 ट्रेनों के माध्यम से 52 हजार से अधिक तीर्थयात्री इस योजना का लाभ लेकररामलला के दर्शन कर चुके हैं। अम्बिकापुर से रवाना हुई यह यात्रा इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं कोकाशी औरअयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्रदान कर रही है। तीर्थयात्रियों ने प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के प्रति जताया आभार  यात्रा पर रवाना एक श्रद्धालु ने कहा कि आज हमें बाबा विश्वनाथ औररामलला के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है, यह हमारे लिए अत्यंत खुशी और भावुकता का क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के प्रयासों से अयोध्या मेंरामलला का भव्य मंदिर साकार हुआ और आज हम उस पवित्र धाम में जाकर रामलला के दर्शन कर पा रहे हैं। इसके लिए हम प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय और राज्य सरकार का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने प्रदेश के श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया। भारत गौरव ट्रेन के माध्यम से भोजन, आवास और चिकित्सा जैसी सुविधाओं के साथ यात्रा की व्यवस्था होने से हमारी खुशी और बढ़ गई है।  एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि काशी और अयोध्या हमारे लिए केवल तीर्थस्थल नहीं, बल्कि हमारी गहरी आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं।रामलला के भव्य मंदिर में दर्शन करने की हमारी वर्षों पुरानी इच्छा आज पूरी होने जा रही है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के प्रयासों से आज अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का दर्शन संभव हो सका है, इसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के प्रति भी हम आभार व्यक्त करते हैं, जिनके नेतृत्व में प्रदेश के श्रद्धालुओं कोरामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर मिल रहा है। परिवार और अन्य श्रद्धालुओं के साथ यह यात्रा हमारे जीवन की अविस्मरणीय यात्राओं में शामिल होगी।  सरगुजा से रवाना हुई यह तीर्थयात्रा धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक अनुभव और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर लेकर आगे बढ़ी है। भारत गौरव ट्रेन 19 सितंबर को वापस आएगी।

कवर्धा के पीवीजीटी क्षेत्र में बाल अधिकारों की गूंज, डॉ. वर्णिका शर्मा ने लगाई बाल चौपाल 2.0

कवर्धा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की माननीय अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 16 सितंबर 2026 को कवर्धा जिले के दौरे के दौरान दूरस्थ आदिवासी अंचल के बैगा समुदाय से लेकर जिला मुख्यालय तक बाल अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर व्यापक निरीक्षण एवं समीक्षा की। उन्होंने बैरख तहसील के विशेष जनजाति बैगा आदिवासी क्षेत्र में बाल चौपाल 2.0 के माध्यम से बच्चों से सीधे संवाद किया, विभिन्न शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थानों का निरीक्षण किया तथा जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर सभागृह में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ योजनाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र के बच्चे प्रतिभाशाली और होनहार हैं तथा उन्हें बेहतर अवसर, तकनीकी संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उनके भविष्य को और मजबूत किया जा सकता है। विभिन्न संस्थाओं का निरीक्षण तत्काल सुधार के निर्देश निरीक्षण के दौरान आदिवासी बालक आश्रम बैरख एवं अन्य संस्थानों में साफ-सफाई की कमी, भंडार गृह में गंदगी, शिक्षकों की कमी तथा मलेरिया से बचाव की व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं। आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मलेरिया से बचाव के लिए नई मच्छरदानियां उपलब्ध कराने, शिक्षकों की कमी के संबंध में उपस्थित ABEO को उचित पत्राचार कर आयोग को अवगत कराने तथा संस्थानों में स्वच्छता और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। हाई स्कूल में साइंस इक्विपमेंट की कमी और अव्यवस्था पाए जाने पर भी उसे तत्काल ठीक कराने की सख्त हिदायत दी गई। शासकीय बालक गृह कवर्धा का भी निरीक्षण किया गया, जहां आयोग अध्यक्ष ने बच्चों के साथ रात्रि भोजन किया तथा बाल गृह के एक बच्चे का जन्मदिन भी मनाया। बाल चौपाल 2.0 में खुलकर बोले बैरख के बच्चे कवर्धा मुख्यालय से दूरस्थ विशेष जनजातीय आदिवासी अंचल की तहसील बैरख में आयोजित बाल चौपाल 2.0 में बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बच्चों ने अपनी झिझक दूर करते हुए आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के सामने खुलकर अपनी बात रखी और अपने अनुभव साझा किए। चौपाल में क्विज, बाल अधिकारों पर आधारित सांप-सीढ़ी जैसे रोचक खेलों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों ने प्रेरणादायक कहानियां और अपने जीवन से जुड़ी यादें भी साझा कीं। गुड टच-बैड टच, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और बाल विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बच्चों की जागरूकता पर चर्चा हुई। आयोग अध्यक्ष ने बच्चों की प्रतिभा और उत्साह को देखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम से जोड़कर डिजिटल अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। एकलव्य विद्यालय तरेगांव में बच्चों संग मनाया प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन एकलव्य आवासीय विद्यालय तरेगांव में आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने  विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर बच्चों ने प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के प्रति अपनी प्रेरणा व्यक्त करते हुए कहा कि वे उनके संघर्ष और राष्ट्र के लिए समर्पण से प्रभावित हैं। विद्यार्थियों ने बेहतर भविष्य के निर्माण के साथ राष्ट्र सेवा में अपना हर संभव योगदान देने का संकल्प लिया। एकलव्य विद्यालय तरेगांव में उन्होंने बच्चों से विभिन्न विषयों पर संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्य जाने। डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों की समस्याओं को समय रहते सामने लाने के लिए समय-समय पर काउंसलिंग एवं आवश्यक सैंपलिंग की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया, ताकि बच्चे बिना झिझक अपनी बात रख सकें। कलेक्टर सभागृह में कड़ी समीक्षा कवर्धा मुख्यालय स्थित कलेक्टर सभागृह में आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने जिले से जुड़े विभिन्न बाल अधिकार एवं विभागीय विषयों की समीक्षा की। बैठक में सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान बच्चों से जुड़े मामलों, संस्थागत व्यवस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर जानकारी ली गई। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को बाल अधिकारों से जुड़े प्रकरणों में संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करने तथा बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। योजना वार समीक्षा के दौरान आश्रम शालाओं और छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने हेतु आदिवासी विकास विभाग को निर्देश दिए गए। स्कूल में स्थाई शिक्षक की नियुक्ति होने तक अतिथि शिक्षक की व्यवस्था हेतु निर्देश दिए गए, मुख्यत गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों के शिक्षक की व्यवस्था हेतु निर्देश दिए गए। Cotpa एक्ट और बालश्रम अधिनियम अंतर्गत विभिन्न विभागों के मध्य निरंतर अनुश्रवण के माध्यम से अभियान का संचालन करने के निर्देश दिए गए। पीसीपीएनडीटी act के सही संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए। महिला बाल विकास और श्रम विभाग द्वारा सतत समन्वय स्थापित कर PMMVY और मिनीमाता महतारी जतन योजना के हितग्राहियों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

17 सितंबर को रायपुर में होगा भव्य राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलनश्, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे शिरकत

रायपुर  भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर कल यानी 17 सितंबर को राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में एक भव्य राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में प्रदेशभर के श्रमवीरों के सम्मान और उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इस महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन करेंगे। इस गरिमामयी आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा और मंत्री  केदार कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। आयोजन का उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रम, कौशल, निर्माण और सृजन की शक्ति का प्रतीक है। निर्माण से लेकर उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र में अपने पसीने से प्रदेश के विकास की मजबूत नींव तैयार करने वाले श्रमिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यह महासम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। यह आयोजन प्रदेश के श्रमवीरों के परिश्रम और छत्तीसगढ़ के विकास में उनके योगदान का सार्वजनिक अभिव्यक्तिकरण है।  राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मंत्री  रामविचार नेताम,  दयालदास बघेल,  श्याम बिहारी जायसवाल,  ओ.पी. चौधरी,  लक्ष्मी राजवाड़े,  टंकराम वर्मा,  गजेन्द्र यादव,  गुरु खुशवंत साहेब,  राजेश मूणत,  मोतीलाल साहू,  पुंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा,  इंद्र कुमार साहू, डॉ. रामप्रताप सिंह,  योगेश दत्त मिश्रा,  किशोर महानंद, रायपुर महापौर  मीनल चौबे और जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक सहभागिता करेंगे।

सड़कें विकास की जीवन रेखा हैं: बेहतर कनेक्टिविटी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती—मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े।

रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने भैयाथान क्षेत्रवासियों को सड़क विकास की बड़ी सौगात देते हुए 34 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की लागत वाले दो महत्वपूर्ण सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्यों का कार्यप्रारम्भ पूजन किया। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर होगी तथा क्षेत्र में विकास की गति को नई दिशा मिलेगी। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सड़कें विकास की जीवन रेखा हैं। मजबूत और बेहतर सड़क नेटवर्क से गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ती है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। सरकार का प्रयास है कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना पहुंचे और लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि इन सड़क परियोजनाओं का लाभ किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों सहित आम नागरिकों को मिलेगा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत और टिकाऊ अधोसंरचना ही विकास कार्यों का स्थायी लाभ लोगों तक पहुंचा सकती है। राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से केंवरा तक 18 किलोमीटर सड़क का होगा चौड़ीकरण कार्यप्रारम्भ पूजन किए गए प्रमुख कार्यों में डुमरिया राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से केंवरा मार्ग का चौड़ीकरण एवं उन्नयन शामिल है। लगभग 30.41 करोड़ रुपये की लागत से 18 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत बिटुमिनस कंक्रीट एवं शोल्डर कार्य के साथ 6,570 मीटर नाली, 300 मीटर टो-वॉल, 140 मीटर रिटेनिंग वॉल, 8 एचपीसी तथा 7 स्लैब पुलियों का निर्माण किया जाएगा। सड़क के उन्नयन से राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और आवागमन सुविधा बेहतर होगी। दर्रीपारा-दनौली मार्ग से झम्मनपारा को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी इसी क्रम में झम्मनपारा में दर्रीपारा से दनौली तक 3.20 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य का भी कार्यप्रारम्भ पूजन किया गया। इस कार्य के लिए 374.76 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना में 3.20 किलोमीटर सड़क, 0.90 किलोमीटर सीसी रोड, 1,200 मीटर नाली, 90 मीटर रिटेनिंग वॉल तथा 6 एचपीसी पुलियों का निर्माण किया जाएगा। इससे स्थानीय ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने के साथ क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सेवा संकल्प अभियान से जुड़ने की अपील की कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने क्षेत्रवासियों से सेवा संकल्प अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान का उद्देश्य सेवा, जनभागीदारी और जनकल्याण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं एवं सामाजिक संगठनों से अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से सेवा और जनकल्याण के कार्यों को नई गति दी जा सकती है।