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छत्तीसगढ़ का शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय अद्वितीय

रायपुर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नवा रायपुर में बने देश का पहला डिजिटल संग्रहालय का किया अवलोकन देश के प्रत्येक व्यक्ति को जनजातीय इतिहास को जानना चाहिए: चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति  सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति  सूर्यकांत ने आज राजधानी नवा रायपुर के आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में बने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए।  चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी।  आदिमजाति विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी बोरा ने जनजातीय संग्रहालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस  सूर्यकांत, जस्टिस  पी.एस.नरसिम्हा, जस्टिस  प्रशांत कुमार और हाईकोर्ट बिलासपुर के चीफ जस्टिस  रमेश सिन्हा, राजस्थान के चीफ जस्टिस  कल्पथी राजेंद्रन राम सहित अन्य न्यायाधीश गण का बीरनमाला से आत्मीय स्वागत करने के साथ ही उन्हें स्मृति स्वरूप जनजातीय जीवन पर आधारित भित्ती चित्र भेंट किया।  प्रमुख सचिव  बोरा ने जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के दौरान चीफ जस्टिस  सूर्यकांत सहित अन्य न्यायधीश गणों को जनजातीय विद्रोहों की पृष्ठिभूमि और जनजातीय नायकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  बोरा ने संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में प्रदर्शित विद्रोहों को साल, साजा और महुआ के प्रतिकात्मक वृक्ष के पत्तों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया है। संग्रहालय में बने यह वृक्ष उसी तरह से है जिस तरह से मोशन फिल्मों में एक वृद्ध व्यक्ति फिल्म की कहानी बताते है।  चीफ जस्टिस  सूर्यकांत ने जनजातीय संग्रहालय में प्रदर्शित भूमकाल विद्रोह के बारे में जानकर काफी प्रभावित हुए। यह विद्रोह बस्तर क्षेत्र के चित्रकोट के आस-पास वर्ष 1910 में हुआ था। यह विद्रोह 20 वर्षीय जननायक गुंडाधुर के नेतृत्व में, औपनिवेशिक वन नीतियों, जमींदारों के शोषण और बाहरी हस्तक्षेप के विरूद्ध था, जिसमें आदिवासियों ने पारंपरिक हथियारों से अंग्रेजों के खिलाफ किया था। चीफ जस्टिस ने संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार सहित अन्य जनजातीय नायकों द्वारा विद्रोह के दौरान उपयोग में लाए गए अस्त्र-शस्त्र का भी अवलोकन किया।  चीफ जस्टिस ने गैलरी में स्थापित मां दंतेश्वरी का प्रतिकात्मक डिजिटल मंदिर से काफी प्रभावित हुए उन्होंने दो बार घंटी बजाकर मां दंतेश्वरी के दर्शन किया। उन्होंने आगामी समय बस्तर (दंतेवाड़ा) जाकर मां दंतेश्वरी की साक्षात दर्शन करने की इच्छा जाहिर की।  उल्लेखीनय है कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा 01 नवबंर 2025 को इस भव्य डिजिटल संग्रहालय को लोगों को समर्पित किया था। तब से आगुन्तकों के लिए यह संग्रहालय आर्कषण एवं उत्साह का केंद्र बना हुआ है। जनसमुदाय में इस संग्रहालय के प्रति आकर्षण और लोकप्रियता को  देखते हुए इसके द्वितीय चरण के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी के मार्गदर्शन में जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित म्यूजियम तथा सहित वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी म्यूजियम का निर्माण तेजी के साथ पूरा हुआ है। मुख्य मंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर निर्माण से उद्घाटन तक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी  बोरा के नेतृत्व में बारीकी से एक-एक पहलुओं को परखा तब जाकर संग्रहालय का बुनियाद बनकर तैयार हुआ है। संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता और साहस का याद दिलाता रहेगा। यह न केवल जनजातीय वर्गो के बल्कि सभी लोगों के प्रेरणापद है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का किया आत्मीय स्वागत

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के छत्तीसगढ़ आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप राजकीय गमछा, विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम एवं माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Hidayatullah National Law University) के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए हैं।  

हाई कोर्ट का सख्त रुख: बिजली चोरी केस में सबूत विश्वसनीय, दोषसिद्धि बरकरार

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिजली चोरी के एक मामले में दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की आपराधिक अपील खारिज कर दी है. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया है. प्रकरण के अनुसार 28 जनवरी 2015 को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की सतर्कता टीम ने कवर्धा शहर में एक परिसर का निरीक्षण किया. जांच के दौरान पाया गया कि आरोपी विक्की गुप्ता द्वारा लिए गए बिजली कनेक्शन में मीटर बोर्ड के पीछे सर्विस वायर से छेड़छाड़ कर अतिरिक्त तार और एमसीबी लगाकर मीटर को बायपास किया गया था. इस व्यवस्था के कारण बिजली की खपत तो हो रही थी, लेकिन मीटर में वास्तविक खपत दर्ज नहीं हो रही थी. जांच में कुल 2840 वॉट का घरेलू लोड पाया गया. मौके से तार, एमसीबी और अन्य सामग्री जब्त कर पंचनामा तैयार किया गया. एक लाख से अधिक का जुर्माना आकलित बिजली विभाग ने गणना पत्रक के आधार पर आरोपी पर 1,18,925 का अस्थायी आकलन (प्रोविजनल असेसमेंट) लगाया और सात दिन में राशि जमा करने या आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया. हालांकि आरोपी ने न तो आपत्ति दी और न ही निर्धारित समय में राशि जमा की, जिसके बाद विशेष न्यायालय में परिवाद दायर किया गया. ट्रायल कोर्ट ने दी थी सजा कबीरधाम जिले के विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) ने 22 नवंबर 2018 को आरोपी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135(1)(ए) के तहत दोषी ठहराया. अदालत ने आरोपी को न्यायालय उठने तक की सजा और 1000 के अर्थदंड से दंडित किया था. जुर्माना न देने पर एक माह के साधारण कारावास का प्रावधान रखा गया था. अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है. गवाहों के बयान में विरोधाभास हैं, और स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत नहीं किए गए. यह भी कहा गया कि आरोपी ने आकलित राशि जमा कर दी थी, जिससे आपराधिक मंशा सिद्ध नहीं होती. हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद कहा कि सतर्कता टीम द्वारा की गई जांच, जब्ती और दस्तावेजी साक्ष्य विश्वसनीय हैं. अधिकारियों के बयान जिरह में कमजोर नहीं पड़े और साक्ष्य स्पष्ट रूप से मीटर बायपास कर बिजली उपयोग को सिद्ध करते हैं. अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा अत्यंत हल्की और अनुपातिक है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता. इसी के साथ कोर्ट ने आपराधिक अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि और सजा संबंधी आदेश को यथावत रखा.

भक्तों की आपत्ति के बाद बदली गई प्रतिमा, कौशल्या धाम पहुंची प्रभु श्रीराम की नई मूर्ति

रायपुर चंदखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर में स्थापना के लिए ग्वालियर से भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची वनवासी प्रतिमा रायपुर पहुंच गई है. प्रतिमा रीजनल आर्ट एंड क्राफ्ट डिजाइन सेंटर में प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने इस मूर्ति का निर्माण किया है. प्रभु श्रीराम की नई प्रतिमा की स्थापना कांग्रेस शासनकाल में कौशल्या धाम परिसर में वर्ष 2021 में 51 फीट ऊंची श्रीराम की प्रतिमा के स्थान पर की जाएगी. बता दें कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने उस समय राम वन पथ गमन और कौशल्या धाम जीर्णोद्धार को एक ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित किया था. प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विपक्ष में रही भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि भगवान राम के स्वरूप के अनुरूप मनमोहक नहीं है. यह प्रतिमा भी ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई थी. सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र विगत वर्ष 20 नवंबर को भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद भी नई प्रतिमा की स्थापना में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए नई प्रतिमा के संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा था. पत्र में उल्लेख किया गया था कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद भी यह मांग लगातार उठती रही, किंतु दो वर्षों के बाद भी मूर्ति परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने से जनता में निराशा व्याप्त है. पर्यटन मंत्री ने दिया था आश्वासन पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर में इसी माह प्रभु श्रीराम की नई मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी. मूर्ति पूरी तरह तैयार है. रायपुर पहुंचने के बाद पूरे विधि-विधान के साथ इसकी स्थापना की जाएगी.

दुर्ग में एसआईआर के बाद घटे 2.17 लाख मतदाता

दुर्ग. चार महीने तक चले एसआईआर के बाद आज मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया. एसआईआर शुरू होने के पहले 31 अक्टूबर 2025 की स्थिति में जिले में कुल 1452509 मतदाता थे जो आज एसआईआर के बाद अंतिम प्रकाशन के अनुसार घटकर 1235230 रह गए अर्थात एसआईआर के बाद जिले में 2 लाख 17 हजार 279 मतदाता घट गए एसआईआर के दौरान सर्वाधिक 44 हजार 746 मतदाताओं के नाम वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में कटे हैं. शनिवार को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार जिले में महिला मतदाताओं की संख्या 620522 एवं पुरुष 614665 है वहीं 43 तृतीय लिंग है. एसआईआर के पहले व अंतिम प्रकाशन के बाद मतदाताओं के आंकड़े के अनुसार वैशाली नगर विधान सभा में पहले 254291 मतदाता थे जो एसआईआर के बाद घटकर 209545 हो गया है. इसी प्रकार दुर्ग शहर में 42954 मतदाता गायब हो गए. यहां 236265 से घटकर अब 195368 मतदाता रह गए हैं. अहिवारा में 39358 मतदाताओं के नाम कटे हैं. यहां 243616 से घटकर कुल मतदाता अब 2204258 हो गए हैं, जबकि भिलाईनगर में 163324 से घटकर अब 127023 मतदाता रह गए हैं. सबसे कम पाटन में 17125 मतदाताओं के नाम कटे: एसआईआर के दौरान सबसे कम पाटन विधानसभा में मात्र 17125 मतदाताओं के नाम कटे हैं. एसआईआर के पहले मतदाताओं की संख्या के हिसाब से पाटन जिले का चौथे नंबर का बड़ा विधानसभा था जो अब वैशाली नगर के बाद दूसरा सबसे बड़ा विधानसभा हो गया है. पाटन में 222681 से घटकर अब 205556 मतदाता हो गए हैं. इसी प्रकार दर्ग ग्रामीण में 222544 से घटकर अब 195368 मतदाता रह गए हैं. वहीं जिले के अंतर्गत आने वाले साजा विधानसभा के आंशिक क्षेत्र में 7359 एवं बेमेतरा आंशिक में 2260 मतदाता कम हुए हैं. प्रारूप प्रकाशन के बाद हुई 31786 मतदाताओं की वृद्धि : गौरतलब है कि एसआईआर के दौरान घर घर जाकर 4 नवम्बर से 18 दिसंबर 2025 तक गणना पत्रक भरे गए. इसके बाद 23 दिसंबर 2025 को इसका प्रारूप प्रकाशन किया गया. इसके अनुसार मतदाता सूची में जिले में कुल 1203444 मतदाता थे. इसके उपरांत दावा आपत्ति प्राप्त किए गए एवं नोटिस जारी कर सुनवाई की गई, इसमें प्रारूप प्रकाशन के बाद मतदाताओं की संख्या 31786 और बढ़ गई.

उत्तर भारत की ट्रेनों का ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य के कारण बदला रूट

बिलासपुर. उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के व्यास नगर–काशी सेक्शन में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य के कारण कुछ ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। इस दौरान दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से चलने और गुजरने वाली कुछ गाड़ियां परिवर्तित मार्ग से संचालित की जाएंगी। 25 फरवरी 2026 को गोंदिया से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 15232 गोंदिया–बरौनी एक्सप्रेस चुनार–प्रयागराज–फाफामऊ–जंघई–जौनपुर मार्ग से होकर बरौनी जाएगी। इसी तरह 25 फरवरी 2026 को दुर्ग से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 18201 दुर्ग–नौतनवा एक्सप्रेस मानिकपुर–प्रयागराज–माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़–सुल्तानपुर–अयोध्या धाम–गोरखपुर के रास्ते नौतनवा पहुंचेगी। शालीमार–एलटीटी एक्सप्रेस में अतिरिक्त एसी-3 कोच यात्रियों की सुविधा और अधिकाधिक कन्फर्म बर्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गाड़ी संख्या 18030/18029 शालीमार–एलटीटी–शालीमार एक्सप्रेस में अस्थायी रूप से एक अतिरिक्त एसी-3 कोच जोड़ा जा रहा है। यह सुविधा 21 से 27 फरवरी 2026 तक शालीमार से चलने वाली गाड़ी संख्या 18030 शालीमार–एलटीटी एक्सप्रेस में उपलब्ध रहेगी। वहीं 23 से 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को एलटीटी से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 18029 एलटीटी–शालीमार एक्सप्रेस में यह सुविधा दी जाएगी। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस व्यवस्था से बड़ी संख्या में यात्रियों को लाभ मिलेगा।

15 मार्च तक मनरेगा और जून तक पीएम आवास पूर्ण करने के निर्देश

जांजगीर-चांपा.  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे ने जिले के सभी जनपद सीईओ, सहायक अभियंता, कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक और रोजगार सहायकों को निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत सूचीबद्ध सभी कार्यों को 15 मार्च तक निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने, श्रमिकों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने और गुणवत्ता से समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण और साप्ताहिक प्रगति समीक्षा के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत आवासों में हितग्राहियों को 90 दिवस की मजदूरी सुनिश्चित करने और निर्माणाधीन आवासों को जून माह तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया है। सीईओ ने स्पष्ट किया कि आवास निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जल संचयन और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत कार्यों की समय पर पोर्टल एंट्री सुनिश्चित की जाए तथा युक्तधारा पोर्टल पर योजनाओं की कार्ययोजना नियमित रूप से अपलोड की जाए। जल संरक्षण के तहत निजी डबरी प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ तैयार कर शीघ्र स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए। सीईओ ने चेतावनी दी कि सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

धान उपार्जन में फर्जीवाड़ा करने वाले राइस मिल के मुंशी समेत 4 गिरफ्तार

बिलासपुर. बिल्हा थाना क्षेत्र में धान उपार्जन में गड़बड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राइस मिल के मुंशी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 360 क्विंटल धान की फर्जी आवक-जावक दर्शाकर शासन को लगभग 8 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। मामले में प्रार्थी धर्मराज सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके मुंशी श्यामसुंदर अग्रवाल ने बिना जानकारी के फर्जी डीओ लेटर और गेट पास जारी कर उपार्जन केंद्र बोडसरा और बिटकुली से 180-180 क्विंटल, कुल 360 क्विंटल धान (करीब 450 बोरी) की हेराफेरी की। इस धान की कीमत लगभग 9 लाख रुपये बताई गई है। शिकायत पर बिल्हा पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान श्यामसुंदर अग्रवाल को सिलतरा, रायपुर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि महावीर एग्रो इंडस्ट्रीज के नाम से फर्जी डीओ लेटर और गेट पास जारी कर बोडसरा केंद्र में कंप्यूटर ऑपरेटर धनंजय यादव और प्रभारी प्रबंधक अशोक मरावी के साथ मिलकर 180 क्विंटल धान की हेराफेरी की, जिससे करीब 4 लाख रुपये की अवैध कमाई हुई। इसी प्रकार बिटकुली केंद्र में प्रभारी प्रबंधक ललित बघेल के साथ मिलकर 180 क्विंटल धान की हेराफेरी कर शासन को लगभग 4 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस ने श्यामसुंदर अग्रवाल, अशोक कुमार मरावी, ललित कुमार बघेल और धनंजय यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बिल्हा के समक्ष पेश किया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

कौशल्या धाम में पहुंची प्रभु श्रीराम की नई प्रतिमा

रायपुर. चंदखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर में स्थापना के लिए ग्वालियर से भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची वनवासी प्रतिमा रायपुर पहुंच गई है. प्रतिमा रीजनल आर्ट एंड क्राफ्ट डिजाइन सेंटर में प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने इस मूर्ति का निर्माण किया है. प्रभु श्रीराम की नई प्रतिमा की स्थापना कांग्रेस शासनकाल में कौशल्या धाम परिसर में वर्ष 2021 में 51 फीट ऊंची श्रीराम की प्रतिमा के स्थान पर की जाएगी. बता दें कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने उस समय राम वन पथ गमन और कौशल्या धाम जीर्णोद्धार को एक ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित किया था. प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विपक्ष में रही भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि भगवान राम के स्वरूप के अनुरूप मनमोहक नहीं है. यह प्रतिमा भी ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई थी. सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र विगत वर्ष 20 नवंबर को भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद भी नई प्रतिमा की स्थापना में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए नई प्रतिमा के संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा था. पत्र में उल्लेख किया गया था कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद भी यह मांग लगातार उठती रही, किंतु दो वर्षों के बाद भी मूर्ति परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने से जनता में निराशा व्याप्त है. पर्यटन मंत्री ने दिया था आश्वासन पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर में इसी माह प्रभु श्रीराम की नई मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी. मूर्ति पूरी तरह तैयार है. रायपुर पहुंचने के बाद पूरे विधि-विधान के साथ इसकी स्थापना की जाएगी.

छत्तीसगढ़ बजट 2026-27 सत्र 23 फरवरी से, मंतातरण विरोधी कानून और 2 लाख करोड़ के बजट पर फोकस

 रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा का आगामी बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जो राजनीतिक दृष्टि से बेहद गरमागरम रहने के आसार हैं। इस सत्र में साय सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पूर्ण बजट पेश करने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य निपटाएगी। चर्चा है कि सरकार इस सत्र में बहुप्रतीक्षित मंतातरण विरोधी विधेयक पेश कर सकती है। राजनीतिक सरगर्मियां तेज सत्र की तैयारियों और सदन में घेराबंदी की रणनीति बनाने के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने 23 फरवरी की शाम चार बजे राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। वहीं, सत्तापक्ष भाजपा ने भी सदन की कार्यवाही को लेकर रणनीति तैयार करने के लिए उसी दिन अपने विधायक दल की बैठक आहूत की है। 24 फरवरी को वित्‍त मंत्री करेंगे पेश, विजन 2047 पर जोर 24 फरवरी 2026 को विधानसभा सत्र में अपना बजट पेश करेगी. वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जानकारी दी कि यह बजट नई थीम और विजन के साथ आएगा, जैसा कि पिछले बजट में “ज्ञान” और “गति” पर जोर था. उन्होंने बताया कि इस बार बजट का दृष्टिकोण विजन 2047 के अनुरूप होगा, जिसमें दीर्घकालिक विकास और रणनीति को स्थान दिया जाएगा जबकि मुख्य वर्गों के लिए विशेष पहल बनाए जाने की बातें उठीं. बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होगा, जिसमें पहले दिन राज्यपाल अभिभाषण देंगे और अगले दिन यानि 24 फरवरी को बजट दस्तावेज पेश किया जाएगा. वित्त मंत्री का कहना है कि बजट 2026-27 में महिलाओं, युवाओं और किसानों के साथ-साथ आधारभूत संरचना, खेल एवं स्वास्थ्य जैसी प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान होगा. बजट सत्र लगभग 20 मार्च तक चलेगा, जिसमें कुल 15 बैठकें शामिल होंगी. बजट की तैयारी और प्राथमिकताएँ में विजन 2047  छत्तीसगढ़ का यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए रोडमैप भी पेश करेगा. वित्त मंत्री ने कहा है कि बजट में नए विजन और दीर्घकालिक रोडमैप के साथ 2047 तक प्रदेश के विकास की दिशा दिखाई जाएगी और इसमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा औद्योगिक विकास जैसे प्रमुख लक्ष्यों को शामिल किया जाएगा. महिला, युवा और किसान केंद्रित योजनाएँ वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस बार बजट में महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए विशेष अनुदान और योजनाओं पर जोर दिया जाएगा. पिछले बजट के अनुभवों से सीख लेकर इस बार इन वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा नेट और रोजगार सृजन से जुड़े उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है. इन्फ्रास्ट्रक्चर और खेल सुविधाएँ सूत्रों के मुताबिक इस बजट में राज्य के नगर पंचायतों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रिंग रोड निर्माण के लिए लगभग ₹100 करोड़ का प्रावधान किया जा सकता है. इसके अलावा नए खेल परिसर, इंडोर स्टेडियम और नवीनीकरण योजनाएँ भी शामिल होने की संभावना है, जिससे युवा वर्ग के लिए खेल और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे. आयुष्मान योजना, ग्रामीण स्वास्थ्य सशक्तिकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर फोकस इस बजट में आयुष्मान योजना, ग्रामीण स्वास्थ्य सशक्तिकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण और कृषि प्रोत्साहन के लिए मजबूत प्रावधान किए जाने की बात सामने आ रही है. बजट पेश होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों को कितना वित्तीय समर्थन मिलेगा और किस तरह की दीर्घकालिक योजनाएँ लागू होंगी.  विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 प्रदेश की आर्थिक गति को बनाए रखने और सामाजिक कल्याण के लक्ष्यों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. इसे विकास, रोजगार और आधारभूत सेवाओं को मजबूत करने वाले प्रावधानों के रूप में देखा जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के दीर्घकालिक विजन के अनुरूप हो सकते हैं. दो लाख करोड़ का हो सकता है बजट सत्र के दूसरे दिन यानी 24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी सदन में राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत करेंगे। अनुमान है कि इस बार बजट का आकार दो लाख करोड़ रुपये के आसपास होगा। इस बजट में युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए विशेष प्राविधान और बड़ी योजनाओं की घोषणा की जा सकती है। 1,000 से अधिक सवाल 20 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। अब तक विधानसभा सचिवालय में एक हजार से अधिक प्रश्न लगाए जा चुके हैं। आधा दर्जन से अधिक विधेयकों के सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना है, जिनमें से मंतातरण विरोधी कानून पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।