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ट्रांसजेंडर के लिए खुशखबरी! दिल्ली की बसों में अब मिलेगा मुफ्त सफर

नई दिल्ली समावेशी और संवेदनशील शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और परिवहन विभाग द्वारा संचालित सभी बस मार्गों में ट्रांसजेंडर यात्रियों को मुफ्त यात्रा योजना में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के तहत दिल्ली में निवास करने वाले पात्र ट्रांसजेंडर व्यक्ति अब डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ उठा सकेंगे, ठीक उसी प्रकार जैसे वर्तमान में दिल्ली की बसों में महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जाती है। यह पहल रेखा गुप्ता सरकार की सामाजिक समावेशन, गरिमा और सभी वर्गों के लिए सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस निर्णय का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को बिना किसी आर्थिक बाधा के शहर में सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा दिल्ली की बसों में महिलाओं के लिए लागू मुफ्त यात्रा योजना के समान ही व्यवस्था और तंत्र के तहत लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और संवेदनशील दिल्ली के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां हर नागरिक को सम्मान के साथ अवसरों और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच मिल सके। यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी में सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने और समावेशी शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में दिल्ली सरकार का एक और महत्वपूर्ण कदम है।

ईरान संकट पर BRICS की प्रतिक्रिया पर बहस तेज, भारत की रणनीति पर टिकी सबकी नजर

नई दिल्ली भारत ने बीते सप्ताह यह स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच साझा रुख तय करना मुश्किल है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इस युद्ध को लेकर सदस्य देशों के अलग-अलग विचार हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा था कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिसकी वजह से समूह के लिए एक साझा रुख तय करना कठिन हो गया है। हालांकि भारत इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है। गौरतलब है कि भारत इस साल इस प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता कर रहा है। लभारत, चीन और रूस जैसे देशों वाले इस समूह का हाल के कुछ सालों में ही विस्तार हुआ है और इसमें ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ अन्य देशों को शामिल किया गया है। अब ईरान बीते 2 सप्ताह से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है, जिससे समूह और अध्यक्ष भारत के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में भारत के सामने चुनौती है कि पश्चिम एशिया के इस संघर्ष पर ब्रिक्स का एक साझा रुख कैसे तैयार किया जाए। ब्रिक्स समूह में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में विस्तार कर मिस्र, इथोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया। ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह बनकर उभरा है, जिसमें दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर बड़ा कद रखने वाला BRICS इस युद्ध पर कोई संयुक्त बयान जारी नहीं कर पाया है। भारत की BRICS अध्यक्षता के सामने चुनौती हालांकि ईरान युद्ध ने भारत की अध्यक्षता को मुश्किल स्थिति में ला दिया है। ईरान ने सीधे भारत से BRICS को सक्रिय करने की अपील की थी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से संपर्क कर अमेरिका और इजरायल के हमलों और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या की निंदा करने के लिए BRICS से बयान जारी करने की मांग की थी। लेकिन अब तक ऐसा कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हुआ है। इससे पहले 2025 में ब्राजील की अध्यक्षता के दौरान BRICS ने 12 दिन चले युद्ध में इजरायल के हमलों की निंदा करते हुए दो बयान जारी किए थे। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अध्यक्ष देश के राष्ट्रीय हित समूह की प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं। संघर्ष में शामिल कई पक्षों से भारत के करीबी संबंध भारत की स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि उसके इस संघर्ष में शामिल कई देशों से करीबी संबंध हैं। भारत के इजरायल के साथ रक्षा और तकनीकी संबंध हैं। वहीं संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ ऊर्जा और भारतीय प्रवासी से जुड़े महत्वपूर्ण हित हैं। इसके अलावा अमेरिका के साथ भी संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। दूसरी ओर ईरान के साथ भी भारत के लंबे समय से संबंध हैं, जिनमें चाबहार बंदरगाह परियोजना शामिल है, जो भारत को मध्य एशिया तक पहुंच देने में अहम है। BRICS के विस्तार ने भी सहमति बनाना कठिन कर दिया है। पहले पांच देशों का यह समूह अब 11 सदस्य देशों तक बढ़ चुका है और इनमें कई देशों के हित एक-दूसरे से टकराते हैं। उदाहरण के लिए ईरान के अपने ही BRICS सदस्य देशों यूएई और सऊदी अरब के साथ तनावपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में अध्यक्ष देश के रूप में भारत किसी तरह की जबरन एकता नहीं बना सकता, बल्कि वह केवल सहमति बनने पर उसे मजबूत कर सकता है या मतभेदों को शांत तरीके से संभाल सकता है। युद्ध से BRICS की अर्थव्यवस्थाओं पर असर ईरान ने मार्च की शुरुआत से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों के जरिए आवाजाही को काफी हद तक प्रभावित कर दिया है। इससे 1000 से अधिक जहाजों को देरी या रास्ता बदलना पड़ा है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके अलावा एलएनजी, उर्वरक, अनाज और कई अन्य वस्तुएं भी इसी मार्ग से गुजरती हैं। युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, टैंकरों का किराया बढ़ गया है और कई जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। इससे यात्रा में 10 से 14 दिन की देरी हो रही है और BRICS देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के लिए लागत बढ़ रही है। संकट के बीच भारत की रणनीति भारत का रुख इस समय आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और तनाव कम करने पर केंद्रित है। भारत BRICS शेरपा चैनल के जरिए सदस्य देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है और कूटनीतिक स्तर पर भी संपर्क बनाए हुए है। भारतीय प्रवक्ता ने बीते दिनों कहा है कि भारत ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि इस संघर्ष पर कोई साझा रुख तय किया जा सके।  

दिल्ली में पानी संकट की चेतावनी: 3 विधानसभा क्षेत्रों के कई इलाकों में एक दिन नहीं आएगा पानी

नई दिल्ली दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी में पानी आपूर्ति को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। जल बोर्ड ने कहा है कि तीन विधानसभा क्षेत्रों के दर्जनभर इलाकों में 24 घंटे तक पानी नहीं आएगा। हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े पाइप लाइन की मरम्मत के लिए आपूर्ति रोकी जाएगी। रोहिणी, रिठाला और बादली विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में 17 मार्च सुबह 10 बजे से अगले दिन 10 बजे तक पानी की आपूर्ति नहीं होगी। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से जारी अलर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में जिस पाइप लाइन से आपूर्ति होती है, वह क्षतिग्रस्त हो गया है और इसकी जल्द से जल्द मरम्मत के प्रयास किए जा रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था और जरूरी इंतजाम की सलाह दी गई है। लोगों को पहले ही पर्याप्त पानी स्टोर करके रखने को कहा गया है। इसके अलावा मांग के आधार पर टैंकर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। किन-किन इलाकों में बंद रहेगी पानी आपूर्ति रोहिणी- रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में सेक्टर 19, बादली इंडस्ट्रियल एयरिया फेज-1, 2, 3, सूरज पार्क, राजा विहार, प्रशांत विहार और आसपास के इलाकों में पानी आपूर्ति बंद रहेगी। रिठाला- रिठाला के भी कई इलाकों में पानी नहीं आने की चेतावनी दी गई है। रिठाला में सेक्टर 16, सेक्टर 17, सरदार कॉलोनी, अमर ज्योति कॉलोनी और आसपास के इलाकों दिक्कत रहेगी। बादली- बादली के समयपुर, शिवपुरी, टीचर कॉलोनी, बादली गांव और आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति बंद रहेगी। इन नंबरों पर फोन करके मंगवा सकते हैं टैंकर रोहिणी AC6 & 13- 8770530657, 9289138498 अवंतिका वाटर इमर्जेंसी- 0999902478, 9650755709, 8178020816, 9650094327, 9643575478 बादली- केवल पार्क- 9654708881 (JE) पानी आपूर्ति इन इलाकों में रहेगी बाधित  

शराब घोटाला मामले में CBI को मिली बड़ी राहत, HC ने फैसला बरकरार रखा; जानें आज की सुनवाई का हाल

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से जुड़े शराब घोटाला केस में सीबीआई को आज फिर बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जांच में खामियों के लिए सीबीआई पर की गई टिप्पणियों और सीबीआई अधिकारी की जांच कराने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगाई गई रोक को फिलहाल बरकरार रखा है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जो भी अंतरिम रोक लगाई गई थी वो अभी ऐसी ही जारी रहेंगी। अदालत ने कहा कि वो इस मामले में 6 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगी। बता दें कि इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया यह पाया था कि केजरीवाल और अन्य को बरी करते समय ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां ‘गलत’ थीं। कोर्ट ने सीबीआई अधिकारी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी थी और ट्रायल कोर्ट में चल रही ईडी के केस की कार्यवाही को भी टाल दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में 9 मार्च को हुई पिछली सुनवाई में सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सीबीआई की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने बताया कि सभी प्रतिवादियों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका था और नोटिस जारी होने के बाद भी उन्हें सूचित किया गया है। इस पर बेंच ने प्रतिवादियों से पूछा कि क्या किसी ने भी अपना जवाब दाखिल नहीं किया है? क्या आप और समय चाहते हैं? प्रतिवादियों ने कहा, ‘हां’ उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और मोहलत चाहिए। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई एसएलपी अरविंद केजरीवाल की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने कहा कि यह 500 पन्नों का आदेश है। सिर्फ इसलिए कि यह आदेश उनके पक्ष में नहीं है, वो इसे गलत बता रहे हैं। हमें जवाब दाखिल करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। केजरीवाल के वकील ने कहा कि जब यह कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में एक SLP (विशेष अनुमति याचिका) दाखिल की है। एसजी तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अगर केस को टालने का यही आधार है तो आपत्तियों को दूर करके केस को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाना चाहिए। इस हरिहरन ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री का इंचार्ज नहीं हूं। एसजी ने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है जिसमें जवाब या जवाबी हलफनामा दाखिल करना जरूरी हो, क्योंकि हमें सिर्फ विवादित आदेश और केस के रिकॉर्ड को ही देखना है। यह एक असाधारण आदेश है। इसे रिकॉर्ड में एक पल के लिए भी और नहीं रखा जा सकता। सीबीआई ने आरोपियों को वक्त देने का किया विरोध बेंच ने कहा कि उन्हें अपना जवाब दाखिल करने दीजिए। इस पर एसजी ने कहा कि मैं कोर्ट से गुजारिश करूंगा कि उन्हें एक हफ्ते से अधिक का समय न दिया जाए। किसी को बरी करने के मामले में सिर्फ केस के रिकॉर्ड को ही देखा जाता है। यह पूरी तरह से गलत है और मैं इसका विरोध करता हूं। इसके बाद बेंच ने कहा कि केस को दो हफ्ते बाद लिस्ट किया जाए और प्रतिवादी दो हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करें। जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के वकील से कहा कि मैंने अपने आदेश में यह दर्ज कर लिया है कि आपने याचिका दाखिल की है और यह भी कि आपने मुझे इस बारे में सूचित किया है। 6 अप्रैल तक अंतरिम आदेश जारी रहेंगे एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अब तो यह एक चलन सा बन गया है। ये लोग आरोप लगाते हैं और फिर भाग खड़े होते हैं। ऐसे मुकदमों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। इन्होंने तो सिर्फ आरोप लगाकर ही अपना करियर बना लिया है। इस पर हरिहरन ने उनसे पूछा कि कैसे आरोप? हम तो सिर्फ जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा और समय मांग रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को करेगी और तब तक अंतरिम आदेश जारी रहेंगे। क्या है मामला गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

दिल्ली HC ने निचली अदालतों को चेतावनी दी, बच्चियों को यौन उत्पीड़न के मामलों में बार-बार कोर्ट बुलाना मानसिक रूप से हानिकारक

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो केस में पीड़िताओं को बार-बार कोर्ट में पेशी के लिए बुलाने के लिए निचली अदालतों के रवैये पर चिंता जताई। हाई कोर्ट जज स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने निर्देश दिया है कि नाबालिग पीड़ितों को ट्रायल या जमानत सुनवाई के दौरान बार-बार अदालत में पेशी के लिए बुलाना ठीक नहीं है। ऐसा करने से बच्चों को मानसिक पीड़ा और दोबारा ट्रॉमा का सामना करना पड़ सकता है। मामला 2022 के एक यौन उत्पीड़न केस से जुड़ा है। जिसमें ट्रायल के दौरान नाबालिग पीड़िता को 9 बार कोर्ट में पेश होना पड़ा। इतना ही नहीं पेश न होने पर जमानती वारंट तक जारी किया गया। बार एंड बेंच में छपि खबर के मुताबिक, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने कहा कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट के तहत अदालतों को ‘चाइल्ड-फ्रेंडली’ प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि नाबालिग पीड़ितों को बार-बार या अनावश्यक रूप से अदालत में उपस्थित न होना पड़े। अदालत ने यह भी कहा कि बच्चों के बयान दर्ज करने के लिए संभव हो तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जाए, जिससे उन्हें अदालत में आने की आवश्यकता कम हो। अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पीड़ित को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन एक बार यदि जमानत पर पीड़ित के आपत्ति या विचार दर्ज हो जाएं, तो हर सुनवाई पर उसकी शारीरिक या वर्चुअल उपस्थिति पर जोर देना उचित नहीं है। 2022 का यौन उत्पीड़न मामला यह टिप्पणी हाई कोर्ट ने 2022 में दर्ज एक यौन उत्पीड़न मामले की तीन नाबालिग पीड़िताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका के अनुसार तीनों लड़कियां लापता हो गई थीं और बाद में दिल्ली में मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दो दिनों तक कई आरोपियों ने बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न किया और धमकाया। इस मामले में बलात्कार, मानव तस्करी और पॉक्सो अधिनियम के तहत भी आरोप जोड़े गए। बार-बार गवाही के लिए बुलाने से मानसिक तनाव याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ट्रायल के दौरान उन्हें कई बार अदालत में गवाही के लिए बुलाया गया, जिससे उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी हुई। एक पीड़िता को तो उसकी गवाही पूरी होने से पहले नौ बार अदालत बुलाया गया, जबकि बाकी दोनों को भी कई बार पेश होना पड़ा। यहां तक कि एक नाबालिग पीड़िता के अदालत में उपस्थित न होने पर ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ जमानती वारंट भी जारी कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने उस वारंट को रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट को निर्देश हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़ितों के हित में पहले भी कई दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट और विशेष अदालतों को इन्हें एक समान और सख्ती से लागू करना चाहिए, ताकि बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक मानसिक पीड़ा न झेलनी पड़े।

‘200 रुपये की पुड़िया देकर कराए जा रहे अपराध’ – AAP का CM रेखा गुप्ता पर बड़ा हमला

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बड़ा आरोप लगा दिया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता के संरक्षण में नशे का धंधा और फिर अपराध किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि ये जानकारी खुद पुलिस की ओर से दी गई है। आप दिल्ली के मुखिया सौरभ भारद्वाज ने रविवार को इस मामले पर सीएम रेखा गुप्ता के इस्तीफे मांग की है। सौरभ भारद्वाज ने कहा, दिल्ली में अपराध और नशा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। तमाम जगहों पर खुलेआम नशा बिक रहा है और पुलिस तस्करों को जानती भी है लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। नाबालिग बच्चों को सूखा नशा कराया जाता है और उनसे आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिलाया जाता है। ऐसा ही कुछ वजीरपुर की JJ कॉलोनी में हुआ, वहां नशेड़ियों ने अपनी गैंग बुलाकर एक आदमी की हत्या कर दी और एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है। सीएम रेखा गुप्ता पर अपराधियों को बचाने का आरोप आप नेता ने कहा, इस हत्याकांड के बाद इलाके की महिलायें पुलिस थाने पहुंची और उन्होंने SHO से कहा कि जब CCTV में सभी लोग नजर आ रहे हैं तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? इसके बाद SHO बताते हैं कि जब भी हम नशेड़ियों और तस्करों के खिलाफ एक्शन लेते हैं तब उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बचाती हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा, दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर साफ-साफ कह रहे हैं कि जब-जब हम इन बदमाशों को पकड़ते हैं, तब-तब रेखा गुप्ता जी के यहां से इन्हें छोड़ने का आदेश आ जाता है। पूरी दिल्ली में नाबालिग बच्चों को नशा कराकर अपराध कराया जा रहा है। 200 रुपए की पुड़िया दी जाती है और खुलेआम गोलीबारी और चाकूबाजी कराई जाती है। ये सभी चीजें सीएम रेखा गुप्ता के संरक्षण में खुल्लम खुल्ला चल रही हैं।

हाई कोर्ट ने नहीं मानी केजरीवाल की दलील, जज स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की याचिका खारिज

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में जज बदलने वाली अरविंद केजरीवाल की मांग ठुकरा दी। केजरीवाल ने मामले में सुनवाई कर रहीं जज स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाकर मामले को किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने की मांग की थी। चीफ जस्टिस ने मामले में टिप्पणी भी की। दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि याचिका वर्तमान रोस्टर के अनुसार न्यायमूर्ति शर्मा को सौंपी गई है और प्रशासनिक पक्ष पर आदेश पारित करके इसे स्थानांतरित करने का कोई कारण नहीं पाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करना चाहें तो यह निर्णय उन्हें लेना है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से 13 मार्च को एक पत्र की जानकारी दी गई थी। यह पत्र उन आठ लोगों को भेजा गया था, जिन्होंने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिनमें केजरीवाल भी शामिल थे। चीफ जस्टिस ने मामले में कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इस याचिका को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने का कोई कारण नहीं दिखता। केजरीवाल के आरोप दरअसल, 11 मार्च को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि यदि मामला जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा के पास ही रहा तो सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से नहीं हो पाएगी। इससे पहले 27 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच में चल रही है। ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर जस्टिस शर्मा की रोक 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने मामले में नोटिस जारी किया था और ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया था। साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश भी दिया। केजरीवाल ने पत्र में क्या मांग की थी केजरीवाल ने अपने पत्र में कहा था कि 9 मार्च के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस गंभीर त्रुटि के आधार पर बिना दूसरी पक्ष की सुनवाई के ऐसा अंतरिम आदेश दिया गया। उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही टालने का निर्देश दिया, जबकि उस समय अदालत में ईडी पक्षकार भी नहीं थी। आप नेता ने यह भी कहा कि आमतौर पर इस तरह की रिविजन याचिकाओं में पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार से पांच सप्ताह का समय दिया जाता है, लेकिन इस मामले में अदालत का रुख जल्दबाजी वाला प्रतीत हुआ, जिससे उन्हें पूर्वाग्रह की आशंका हुई।

नकली मेडिकल वीजा के सहारे दिल्ली में रह रहे 10 बांग्लादेशी पुलिस के हत्थे चढ़े

 नई दिल्ली दिल्ली पुलिस के बाहरी जिले की 'फॉरेनर सेल' ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है. इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है, जो फर्जी मेडिकल वीजा के सहारे भारत में रह रहे थे और यहां से यूरोप जाने की योजना बना रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ विदेशी नागरिक अपने भारतीय वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से इलाके में छिपे हुए हैं. सूचना के आधार पर 6 मार्च, 2026 को फॉरेनर सेल की टीम ने पीरागढ़ी चौक के पास स्थित डीडीए पार्क की घेराबंदी की। पुलिस की मौजूदगी भांपते ही संदिग्धों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद टीम ने उन्हें चारों ओर से घेरकर पकड़ लिया. तलाशी के दौरान इनमें से कोई भी व्यक्ति वैध पहचान पत्र या भारत में रहने के जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। बुल्गारिया जाने का था इरादा पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये सभी 10 बांग्लादेशी नागरिक भारत का इस्तेमाल एक 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में कर रहे थे. इनका असल मकसद भारत में रहते हुए बुल्गारिया के लिए मेडिकल वीजा हासिल करना था. जांच में पता चला कि इनके पासपोर्ट और वीजा काफी समय पहले ही एक्सपायर हो चुके थे, जिसके बाद से ये दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे थे। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान पकड़े गए लोगों में फारुक (39), मोहम्मद सोजिब फकीर (29), शोहाग मिया (26), शहाबुद्दीन (36), मोहम्मद शराजुल इस्लाम शाहिदुल (37), गुलाम रब्बानी (29), सजीब मिया (26), मोहम्मद जहिरुल (33), मोहम्मद आलमगीर होसिन (30) और मोहम्मद अब्दुल कुद्दुस (38) शामिल हैं। देश निकाला की प्रक्रिया शुरू पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी 10 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ FRRO के समन्वय से निर्वासन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है. बाहरी जिला पुलिस का कहना है कि उनके अधिकार क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान के लिए इस तरह के वेरिफिकेशन अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

उन्नाव रेप पीड़िता की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई स्थगित, 28 मार्च तय हुई नई तारीख

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई टाल दी है, जिसमें उसने अपने पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग की है। इस याचिका में मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य आरोपियों की सजा बढ़ाने की अपील की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिया जाता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च के लिए तय कर दी है। उन्नाव रेप पीड़िता ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने पिता की कथित हिरासत में मौत के मामले में दोषियों के खिलाफ सजा बढ़ाने की मांग की है। पीड़िता के मुताबिक कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़िता के परिवारवालों ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।  पीड़िता ने अपने पिता की कथित पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की है। निचली अदालत ने पीड़िता के पिता की मौत मामले में सेंगर को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी और उस पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। हालांकि, पीड़िता का पक्ष है कि यह सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

केजरीवाल की नई मांग: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से हटे केस, चीफ जस्टिस को भेजा पत्र

नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर भरोसा नहीं है, जो उनसे जुड़े केस की सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य ने हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर शराब घोटाले वाले केस को किसी और 'निष्पक्ष' बेंच के सामने ट्रांसफर करने की मांग की है। ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के आदेश को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जस्टिस स्वर्ण कांता की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए थे और पूछा था कि उनका भारतीय जनता पार्टी से क्या रिश्ता है। अब खुद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे लेटर में जज के पक्षपाती होने के आरोप लगा दिए हैं। गौरतलब है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में शराब घोटाले से जुड़े कुछ मामलों की पहले भी सुनवाई हो चुकी है और आरोपियों को झटका लगा था। उन्होंने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को भी उचित करार दिया था। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य की ओर से चीफ जस्टिस को भेजे गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि सीबीआई द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को 'निष्पक्ष बेंच' के पास स्थानांतरित कर दिया जाए। इनकी ओर से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर 'पक्षपात' के आरोप लगाए गए हैं और कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उनके हर आदेश को पलट दिया था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होनी है।