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श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी से पहले CM भगवंत मान और सिसोदिया ने की रणनीतिक चर्चा

अमृतसर. श्री अकाल तख्त साहिब पर सोमवार को प्रस्तावित पेशी से एक दिन पहले आम आदमी पार्टी (आप) की 11:30 बजे अमृतसर के सर्किट हाउस में अपने सभी विधायकों व मंत्रियों की विशेष बैठक होगी। बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल होंगे। बैठक में पार्टी धार्मिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस पूरे घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करने के साथ ही साथ आगे की रणनीति तय करेगी। हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। बावजूद इसके उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उन्हें बुलाया जाता है, तो वे वह सम्मानपूर्वक उपस्थित होंगे। श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने से पहले रविवार स्तरीय अमृतसर में बैठक रखी है, जिसमें विशेष तौर पर भाग लेने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया भी पहुंच चुके हैं।

पंजाब के मोगा में दिल दहला देने वाली घटना, खूंखार कुत्तों के हमले में मजदूर की दर्दनाक मौत

मोगा. थाना मेहना के गांव कपूरे में गत रात्रि खूंखार कुत्तों द्वारा खेत से काम करके वापस लौट रहे एक मजदूर को बुरी तरह नोच डाला है। जिसकी मौका पर मौत हो गई घटना का पता सुबह परिवार को लगा तो परिवार ने सूचना पुलिस को दी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोगा के सिविल अस्पताल में पहुंचा दिया है। सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार 50 वर्षीय सरबजीत सिंह पुत्र भजन सिंह निवासी कपूरे गांव के ही एक किसान के पास मेहनत मजदूरी करता था। वह गत रात्रि खेत में फसल को पानी लगाने के लिए गया था पानी लगाने के बाद वह पैदल वापस लौट रहा था तो रास्ते में खूंखार कुत्तों के झुंड ने सरबजीत सिंह को घेर लिया और बुरी तरह नोच डाला। जिसकी मौका पर ही मौत हो गई सूचना मिलते ही शव को कब्जे में लेकर आगामी जांच शुरू कर दी है। पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं शव को लेकर सिविल अस्पताल में पहुंचे गांव वासियों ने बताया कि उनके गांव में खूंखार कुत्तों का झुंड अक्सर ही लोगों को अपना शिकार बना लेता है गांव में बहुत ज्यादा गिनती में खूंखार कुत्ते घूमते हैं इससे पहले भी खूंखार कुत्तों के झुंड ने गांव के कई लोगों को अपना शिकार बना लिया यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी लगभग 6-7 लोग काट कर घायल किया जा चुके हैं।

रक्षा तकनीक में बड़ा कदम, IIT रोपड़ विकसित करेगा AI टैंक और लेजर ड्रोन-रोधी सिस्टम

चंडीगढ़ भारतीय सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाब स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रोपड़ ने आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) से कुल 120 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। 27वें आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड साइकिल के तहत दिए गए इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए 'स्वायत्त बख्तरबंद वाहन' (Autonomous Armoured Vehicles) और 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (Directed Energy Weapons) विकसित करना है। यह कदम न केवल सीमा पर सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की युद्ध तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। बिना इंसानी मदद के चलेंगे बख्तरबंद वाहन इस पहल का पहला प्रमुख हिस्सा अगली पीढ़ी के कॉम्बैट प्लेटफॉर्म यानी स्वायत्त बख्तरबंद वाहनों का विकास है। ये ऐसे वाहन या टैंक होंगे जिन्हें चलाने के लिए इंसानों की कम से कम जरूरत पड़ेगी। आईआईटी रोपड़ के निदेशक राजीव आहूजा के अनुसार, ये सिस्टम नेविगेशन, खतरों की पहचान करने और युद्ध के मैदान में सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे दुश्मन के चुनौतीपूर्ण इलाकों और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम कर रहे हमारे सैनिकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाएगा। भविष्य की तकनीक: डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) आईआईटी रोपड़ का दूसरा प्रोजेक्ट 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' के विकास से जुड़ा है। ये हथियार आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए 'गेम-चेंजर' माने जा रहे हैं। इनमें दुश्मनों के खतरों को बेअसर करने के लिए अत्यधिक केंद्रित विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा बीम का इस्तेमाल किया जाता है। निदेशक आहूजा ने बताया कि एंटी-ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) अनुप्रयोगों के लिए इन प्रणालियों को आधुनिक युद्ध में बेहद मारक और उपयोगी माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट भारतीय सेना के सैन्य संचालन निदेशालय ) के तहत काम करने वाला एटीबी (ATB) उभरती तकनीकी आवश्यकताओं की पहचान करता है और उन्नत समाधान देने में सक्षम संस्थानों को महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास कार्य सौंपता है। आईआईटी रोपड़ को ये दोनों प्रोजेक्ट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, फोटोनिक्स और लेजर तकनीक में उसकी विशेषज्ञता के आधार पर मिले हैं। संस्थान के निदेशक ने इसे सेना द्वारा उनके रिसर्च इकोसिस्टम पर जताए गए भरोसे का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा, "हमारे संकाय और छात्र रक्षा प्रौद्योगिकी डोमेन में कठोर परिश्रम कर रहे हैं। हम इसे राष्ट्रीय सुरक्षा में सीधे योगदान के रूप में देखते हैं और इसे सामरिक रक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक अनुशासन के साथ पूरा करेंगे।" इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी रोपड़ के अधिकारियों का कहना है कि इन रक्षा कार्यक्रमों से क्षेत्र में भारी आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होंगी। कलपुर्जों के निर्माण और परीक्षण के लिए स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के बड़े तकनीकी कार्यक्रमों से रिसर्च संस्थानों के आसपास एक 'इनोवेशन इकोसिस्टम' तैयार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और विशेष उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

सस्पेंडेड DIG एचएस भुल्लर की बढ़ीं मुश्किलें, भ्रष्टाचार मामले में बेल पर फैसला 7 जुलाई तक टला

 चंडीगढ़  भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को फिलहाल पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। उनकी नियमित जमानत याचिका पर  सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिना कोई निर्देश जारी किए मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई तक स्थगित कर दी। भुल्लर ने एक बार फिर जमानत की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने 10 अप्रैल को खारिज कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में भुल्लर को यह छूट दी थी कि यदि दो महीने के भीतर उनके खिलाफ मामले का ट्रायल शुरू नहीं होता है तो वे दोबारा जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसी आधार को बनाते हुए भुल्लर ने अब फिर से हाई कोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की है। भुल्लर का दावा, जांच हो चुकी है पूरी याचिका में भुल्लर ने कहा है कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस की ओर से चालान भी अदालत में पेश किया जा चुका है। उनका तर्क है कि इस मामले के अधिकांश गवाह सरकारी अधिकारी हैं और वह स्वयं भी निलंबित चल रहे हैं, ऐसे में उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। निर्धारित अवधि में ट्रायल नहीं हुआ शुरू भुल्लर की ओर से यह भी दलील दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई छूट के बावजूद निर्धारित अवधि में ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है, इसलिए उन्हें नियमित जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, मामले में अभी हाई कोर्ट ने कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए सुनवाई को 7 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है।

रेस्टोरेंट ने जबरन जोड़ा सर्विस चार्ज, हाईकोर्ट के वकील ने लड़ी लड़ाई; मिला ₹5,000 मुआवजा

 चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने अवैध तरीके से सर्विस चार्ज वसूलने पर एक रेस्टोरेंट को सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराया है। जीरकपुर निवासी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील राहुल गोयल की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने बठिंडा स्थित कैपर रूफटाप बिस्ट्रो रेस्टोरेंट को पांच हजार रुपये हर्जाना भरने के निर्देश दिए हैं। रेस्टोरेंट ने एडवोकेट गोयल के बिल में उनकी मर्जी के बिना 129 रुपये सर्विस चार्ज लगा दिया था। ऐसे में उन्होंने रेस्टोरेंट के खिलाफ चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया। गोयल ने शिकायत में बताया कि पांच अक्टूबर 2025 को वह इस रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। जब उन्होंने बिल देखा तो पता चला कि उसमें 129 रुपये सर्विस चार्ज जोड़े गए थे। शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्हें पहले इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी की ओर से 2022 में जारी की गई सिफारिशों के मुताबिक कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहक से अपनी मर्जी मुताबिक सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते हैं और न ही इसे बिल में जोड़ा जा सकता है। सर्विस चार्ज पूरी तरह से स्वैच्छिक होते हैं। वहीं, रेस्टोरेंट की ओर से आयोग के समक्ष कोई पेश नहीं हुआ। ऐसे में आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए ग्राहक के हक में फैसला सुनाया। गोयल ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को वस्तु या सेवा की निर्धारित कीमत से अधिक राशि चुकाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

पंजाब में गर्मी का कहर जारी, 41 डिग्री तक पहुंचा तापमान; पहाड़ी इलाकों से लगे जिलों में बारिश की संभावना

अमृतसर  पंजाब में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर बने रहने के बावजूद गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। शुक्रवार को राज्य का अधिकतम तापमान एक बार फिर 41 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। सबसे अधिक तापमान पटियाला में 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक हिमाचल प्रदेश से सटे जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी, जबकि राज्य के अधिकांश मैदानी इलाकों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 27 जून (शनिवार) को पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना है। गुरदासपुर जिले में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए निगरानी श्रेणी का अलर्ट जारी किया गया है। आने वाले दिन कोई अलर्ट नहीं 28 जून: बारिश का दायरा कुछ सिमट जाएगा। इस दिन पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। राज्य के शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है, लेकिन मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। 29 जून: वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी पंजाब तक सीमित रहेगा। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में छिटपुट बारिश हो सकती है, जबकि अन्य जिलों में वर्षा की संभावना नहीं है।  30 जून: को भी लगभग यही स्थिति बनी रहेगी। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन जिलों में वर्षा का अनुमान है, वहां भी व्यापक बारिश नहीं होगी, बल्कि केवल कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा दर्ज की जा सकती है। सामान्य से 1.7 डिग्री बढ़ा तापमान शुक्रवार को भी पंजाब में गर्मी का असर बरकरार रहा। औसत अधिकतम तापमान में 1.9 डिग्री की बढ़ौतरी देखने को मिली। राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान पटियाला में 41.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद बठिंडा में 40.8, भाखड़ा बांध 39.5, लुधियाना 39.0, मोहाली 38.5, गुरदासपुर (बल्लोवाल) 38.0, पठानकोट 37.8, जालंधर 37.3, फिरोजपुर और होशियारपुर में 37.1 तथा अमृतसर में 35.0 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। हालांकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पूर्वी और हिमाचल से सटे जिलों में बादलों की आवाजाही व हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन दक्षिणी और मध्य पंजाब में गर्मी का असर फिलहाल जारी रहने का अनुमान है।

VB-GRAM-G योजना पर मान सरकार का बड़ा फैसला, अधिसूचना जारी; पहले AAP ने किया था विरोध

चंडीगढ़  पंजाब में वीबी जी राम जी (विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन) योजना लागू हो गई है। राज्य सरकार ने स्कीम लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।पंजाब सरकार पहले इस योजना के विरोध में थी। योजना के खिलाफ विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था। केंद्र की इस स्कीम के तहत एक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की व्यवस्था की गई है।  केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को रद्द करके विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम लाई थी। संसद से ये बिल पिछले साल दिसंबर में पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।  बता दें कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को रद्द करके विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम लाया था. संसद से ये बिल पिछले साल दिसंबर में पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली थी।  कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने 2005 में MGNREGA शुरू किया था. इसके तहत ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का काम मिलने की गारंटी दी गई थी. अब नए कानून के तहत, गारंटी वाले काम के दिनों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है।  पंजाब सरकार ने किया एक्ट का विरोध विपक्ष शासित पांच राज्यों कर्नाटक, केरल, पंजाब, तेलंगाना और झारखंड ने VB-G Ram G एक्ट का विरोध करते हुए और MGNREGA योजना को बहाल करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किए थे. पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि VB-G RAM G एक्ट का गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदायों और ग्रामीण मजदूरों पर बुरा असर पड़ेगा, जो अपनी जीविका के लिए MGNREGA पर निर्भर हैं।  योजना का उद्देश्य स्पष्ट VB-G RAM G योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है। यह योजना प्रधानमंत्री मोदी के विकास के विजन को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में काम की तलाश करने वाले लोगों को 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकेगी। आर्थिक सुधारों की दिशा में एक कदम इस योजना का उद्देश्य न केवल रोजगार पैदा करना है, बल्कि ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देना है। एएपी सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि इससे राज्य के आर्थिक ढांचे में सुधार होगा और युवा वर्ग को रोजगार के अवसर मिलेंगे। योजना के तहत, कर्मचारियों को स्थायी नौकरी के लिए भी प्रोत्साहित किया जायेगा। गांवों में काम से होगी खुशहाली VB-G RAM G योजना की लॉन्चिंग से ग्रामीण क्षेत्र में काम की प्रवृत्ति बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल मजदूरों को काम मिलेगा, बल्कि इसके चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इस योजना का पूरा फायदा उन परिवारों को होगा जो रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे थे। सरकार की तैयारियों में तेजी पंजाब सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए आवश्यक संसाधनों और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। यह योजना न केवल रोजगार बल्कि आजीविका के अवसर भी प्रदान करेगी, जिससे ग्रामीण लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा। आवश्यकता जन जागरूकता की योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार को गांवों में जन जागरूकता अभियान चलाना होगा। लोगों को योजना की जानकारी और उसके लाभ समझाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें और इसका लाभ उठा सकें। सरकार ने क्या कहा? हालांकि, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया कि VB-G Ram G एक्ट मजदूरों के जीवन में एक नए युग की शुरुआत करेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना से जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और सड़कें, पुल, पुलिया, स्कूल और आंगनवाड़ी भवन बनाए जा सकेंगे. केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 95,600 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट आवंटित किया।  1 जुलाई से लागू होगी योजना शिवराज चौहान ने कहा, VB GRAM-G योजना 1 जुलाई से लागू हो रही है, जिससे बिना किसी रुकावट के पूरी तरह से सुचारू और कर्मचारी-केंद्रित बदलाव सुनिश्चित होना चाहिए. उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक स्कीम का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों मज़दूरों की ज़िंदगी और रोज़ी-रोटी से जुड़ा मामला है. एक भी मज़दूर एक दिन के लिए भी बिना काम के नहीं रहना चाहिए. रोज़गार पैदा करने, मज़दूरी के भुगतान या कानूनी अधिकारों में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।  उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने MGNREGA के तहत पहले ही 30,000 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए थे. इस नए आवंटन के साथ, स्कीम के तहत कुल फंड 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है। 

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह का पर्दाफाश; विदेश से मिल रहे थे निर्देश

अमृतसर  अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने सीमा पार से संचालित अवैध हथियार तस्करी के एक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 10 अत्याधुनिक पिस्तौल और कारतूस बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे एक तस्कर के निर्देश पर काम कर रहे थे। ये आरोपी सीमा पार से भेजी गई हथियारों की खेप प्राप्त कर उन्हें आगे अपराधी तत्वों तक पहुंचाते थे। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध से जुड़े हो सकते हैं। थाना छेहरटा और मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज इस मामले में थाना छेहरटा और थाना मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि हथियार कहां से आए, किन-किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे और इस तस्करी गिरोह में और कौन-कौन शामिल है। जांच में और गिरफ्तारियों की संभावना पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी और इस नेटवर्क से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही विदेशी तस्कर और उसके स्थानीय संपर्कों की भी पहचान की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।  

Master Plan-2031 में बड़े बदलाव की उठी मांग, फीस घटाने और FAR बढ़ाने से निवेश-रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ के उद्योग संगठनों ने मास्टर प्लान-2031, औद्योगिक नियमों और लैंड यूज पॉलिसी में ऐसे बदलाव करने की मांग की है, जिससे उद्योगों को लाभ हो। सार्वजनिक सुनवाई के दौरान व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्क्रीनिंग कमेटी को अपने सुझाव दिए।  उद्योग संगठनों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल कन्वर्टेड प्लॉट ओनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन चंदर वर्मा ने कहा कि अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) देने के लिए प्रशासन द्वारा रखी गई शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं। उनका कहना है कि शहर के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की क्षमता को आधार बनाकर FAR सीमित करना उचित नहीं है। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता है, तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसका बोझ उद्योगों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उद्योग संगठनों ने मांग की है कि अतिरिक्त FAR के लिए ली जाने वाली फीस कम की जाए। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा में यह शुल्क कम है, इसलिए चंडीगढ़ में भी इसे घटाया जाए, ताकि यहां के उद्योग अन्य राज्यों के उद्योगों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकें। कन्वर्टेड इंडस्ट्रियल प्लॉट को मिले अतिरिक्त FAR व्यापार संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन औद्योगिक प्लॉटों का उपयोग बदला गया है, उन्हें अनिवार्य सर्विस एरिया के कारण होने वाले स्थान के नुकसान की भरपाई के लिए 0.50 अतिरिक्त FAR दिया जाए। साथ ही, फैक्ट्री परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास को कुल FAR की गणना से बाहर रखा जाए। उद्योग संगठनों ने प्रशासन के उस प्रस्ताव का भी विरोध किया है, जिसमें अधिक FAR का लाभ लेने के लिए पुरानी इमारत को गिराकर दोबारा निर्माण करना अनिवार्य बताया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा इमारतों पर ही अतिरिक्त मंजिलें बनाने की अनुमति दी जाए और मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। इससे उद्योगों का समय और पैसों दोनों की बचत होगी। ग्राउंड कवरेज और मिक्स्ड लैंड यूज में छूट की मांग संगठनों ने सक्रिय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अधिक ग्राउंड कवरेज की अनुमति देने की मांग की है। इसके अलावा, फेज-3 की तरह फेज-1 और फेज-2 के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मिक्स्ड लैंड यूज की सुविधा लागू करने का सुझाव दिया गया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि अनिवार्य सेंट्रल कोर्टयार्ड (आंगन) जैसे नियमों से भवन का उपयोग प्रभावित होता है और उत्पादन क्षमता घटती है। इसलिए इन प्रावधानों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जाने चाहिए। साथ ही, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या कब्जे के दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति रखने वालों को भी अतिरिक्त FAR का लाभ देने, MSME अधिनियम के तहत सभी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मान्यता देने तथा भवन उल्लंघन और मिसयूज से जुड़े लंबित नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अधिक FAR, कम शुल्क, मिक्स्ड लैंड यूज और सरल नियमों वाली संतुलित नीति लागू करता है, तो चंडीगढ़ में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत! चंडीगढ़ के GMCH-32 में शुरू हुआ Adult Vaccination Clinic, एक ही जगह मिलेगी सलाह

 चंडीगढ़ बच्चों के टीकाकरण को लेकर जागरूकता तो काफी है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ बुजुर्गों के लिए जरूरी वैक्सीनेशन को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसी कमी को दूर करने के लिए चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH-32) में आज से देश का अपनी तरह का एक जागरूकता अभियान शुरू।  पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया आज इस विशेष क्लिनिक का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह क्लिनिक रोटरी क्लब चंडीगढ़ सेंट्रल और GMCH-32 के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहयोग से शुरू किया जा रहा है। इसे अस्पताल के बी-ब्लॉक स्थित जेरियाट्रिक ओपीडी में संचालित किया जाएगा। बच्चों के बाद अब बुजुर्गों के टीकाकरण पर फोकस स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बच्चों के टीकाकरण को लेकर व्यापक जागरूकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होती प्रतिरोधक क्षमता के कारण बुजुर्गों को जिन जरूरी टीकों की आवश्यकता होती है, उनके प्रति जानकारी और जागरूकता काफी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, खासकर मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा, सीओपीडी और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली से जूझ रहे लोगों में सामान्य संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकते हैं। ऐसे में समय पर टीकाकरण कई जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर सकता है। एक ही स्थान पर मिलेगी सलाह और टीकाकरण इस क्लिनिक के शुरू होने से बुजुर्गों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्हें एक ही स्थान पर विशेषज्ञ सलाह, काउंसलिंग और वैक्सीनेशन की सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर टीकाकरण से बुजुर्गों में गंभीर संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता और जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर होगी और परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ भी घटेगा। डॉक्टरों की अपील- बुजुर्गों को जरूर दिलाएं सलाह डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके परिवार में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग हैं या वे शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या फेफड़ों की बीमारी जैसी किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं, तो उन्हें GMCH-32 के इस नए क्लिनिक में लेकर जाएं और डॉक्टरों से उनके लिए जरूरी टीकों के बारे में परामर्श अवश्य लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की तरह बुजुर्गों के लिए भी समय पर टीकाकरण स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।