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डेंगू के बढ़ते खतरे से अमृतसर में चिंता, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

अमृतसर. बरसाती मौसम से पहले ही अमृतसर में डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में आ गया है। पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत सिविल सर्जन डॉ. सतिंदरजीत सिंह बजाज द्वारा “हर शुक्रवार डेंगू ते वार” मुहिम की शुरूआत करते हुए टीमों को शहर के विभिन्न हाट-स्पॉट क्षेत्रों की ओर रवाना किया गया। ये टीमें शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी लारवा गतिविधियों, फॉगिंग, स्प्रे के साथ-साथ लोगो को जागरूक भी करेंगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जून माह में डेंगू का डंक गंभीर रूप धारण कर सकता है इसलिए मई माह से ही तैयारियां तेज कर ली गई हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि बारिश के दौरान पानी जमा होना आम बात है लेकिन यही स्थान मच्छरों के पनपने के केंद्र बन जाते हैं। यदि लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसलिए हर घर की जिम्मेदारी बनती है कि कूलरों, टंकियों, गमलों और छतों पर पड़े बेकार सामान में पानी जमा न होने दिया जाए। डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इलाज करवाएं : डॉ. हरजोत कौर जिला एपिडैमियोलॉजिस्ट डॉ. हरजोत कौर ने बताया कि डेंगू एक वायरल बुखार है जो एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टियां तथा नाक या मसूड़ों से खून आना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच और इलाज करवाना चाहिए। पिछले वर्ष जिले में आए थे डेंगू के 69 मामले पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 69 मामले सामने आए थे और 11 स्थानों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया था। इस बार स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। इससे पहले आशा वर्करों और पैरामैडीकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि जमीनी स्तर पर अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। डेंगू से बचाव के लिए क्या करें? – कूलर, टंकी और गमलों में पानी जमा न होने दें। – सप्ताह में एक दिन पानी वाले बर्तनों की सफाई करें। – पूरी बाजू वाले कपड़े पहनें। – मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें।

हाईवे भूमि अधिग्रहण घोटाले पर शिकंजा, SDM अनुप्रीत कौर रंधावा को लिया गया हिरासत में

 गुरदासपुर  पंजाब में गुरदासपुर की एसडीएम और PCS अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा को शनिवार सुबह तरनतारन जिले की पटी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मामला जम्मू-कश्मीर-राजस्थान हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन में कथित गबन से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अनुप्रीत कौर रंधावा के खिलाफ करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये के कथित गबन का मामला चल रहा था। इसी मामले में पुलिस ने सुबह करीब 7 बजे उनके घर पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि यह मामला हाईवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित है। हालांकि पुलिस की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

रसूखदारों पर सख्ती: पंजाब में नेताओं की सिक्योरिटी घटाने पर मंथन तेज

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने राज्यभर में उन राजनीतिक नेताओं, लोगों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है, जिनको सुरक्षा मुहैया है। पुलिस विभाग का मानना है कि कुछ ऐसे नेता, जो सक्रिय राजनीति नेता और लोग प्रभाव और रसूख दिखाने के लिए सुरक्षा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अब जांच की जा रही है कि सुरक्षा वास्तव में खतरे के आधार पर दी गई थी या सिफारिश और प्रभाव के जरिए हासिल की गई। हाल ही में सेंट्रल ब्यूरो आफ इंवेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक भाजपा नेता राघव गोयल को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इस मामले में निजी व्यक्ति को पंजाब पुलिस के दो गनमैन उपलब्ध कराए गए थे, जो एके-47 से लैस थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सुरक्षा कवर का दुरुपयोग निजी प्रभाव बढ़ाने और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट के लिए सीआईडी हुई सक्रिय पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा और सीआईडी ने ऐसे नेताओं की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जिन्हें सुरक्षा तो दी गई है, लेकिन वे किसी सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि स्थानीय स्तर के नेता वरिष्ठ नेताओं के साथ नजदीकियां दिखाकर सुरक्षा हासिल कर लेते हैं। बाद में वे इसी सुरक्षा के सहारे सरकारी दफ्तरों और पुलिस महकमे में दबदबा बनाते हैं।अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग मंत्रियों और बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर खुद को प्रभावशाली दिखाते हैं। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी से लोगों और अधिकारियों में यह संदेश जाता है कि संबंधित व्यक्ति सत्ता के करीब है। इससे कई बार प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है। सुरक्षा वापस लेने पर मामले पहुंचे हाई-कोर्ट इधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह को मिली सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद भी सुरक्षा आवंटन प्रक्रिया चर्चा में है। अदालत ने पूछा था कि आखिर कितने पुलिस कर्मी आधिकारिक तौर पर सुरक्षा ड्यूटी पर हैं और कितने अनौपचारिक रूप से तैनात किए गए हैं। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सुरक्षा व्यवस्था को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार या अन्य मामलों के आरोप हैं, उन्हें भी सुरक्षा मुहैया कराई गई। अब पंजाब पुलिस की समीक्षा से कई नेताओं की सुरक्षा वापस लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

चुनाव आयोग की बड़ी तैयारी! मुक्तसर में हर वोटर तक पहुंचेगा अमला, शुरू होगा विशेष पुनरीक्षण अभियान

 श्री मुक्तसर साहिब  भारत चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी सह उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि जिले में 25 जून से 24 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर घर-घर जाकर मतदाताओं से फार्म भरवाए जाएंगे। जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे चुनावी अमले की ड्यूटी लगा दी गई है। जिले में 753 बूथ स्तरीय अधिकारी, 81 सुपरवाइजर, चार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और आठ सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ स्तरीय अधिकारी को औसतन 300 घर और लगभग 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है ताकि काम सुचारु रूप से पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि 15 जून से 24 जून तक बूथ स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और अन्य प्रशासनिक तैयारियों का कार्य किया जाएगा। इसके बाद 25 जून से घर-घर जाकर विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होगा। दोहरी वोट रखना अपराध जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोहरी वोट रखना भारतीय संविधान के अनुसार अपराध है, जिसके लिए एक वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी मतदाताओं को इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत फार्म भरना अनिवार्य होगा। उपायुक्त ने बताया कि जिला चुनाव कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक मैपिंग के तहत जिले के कुल 6 लाख 91 हजार 402 मतदाताओं में से 6 लाख 38 हजार 878 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। यह कुल मतदाताओं का 92.40 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जानें SIR के लिए जरूरी बातें उन्होंने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2003 को योग्यता तिथि निर्धारित की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों को तर्कसंगत बनाने का कार्य 24 जुलाई 2026 तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूची का प्रारूप 31 जुलाई 2026 को प्रकाशित होगा। उन्होंने जानकारी दी कि मतदाता सूचियों से संबंधित दावे और आपत्तियां 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक जमा करवाई जा सकेंगी, जबकि इनका निपटारा 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। जिला चुनाव अधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे इस अभियान में चुनाव अमले का पूरा सहयोग करें ताकि मतदाता सूचियों को पूरी तरह सही और पारदर्शी बनाया जा सके।

उम्मीदवारों के लिए नए निर्देश जारी, पंजाब में चुनाव प्रचार पर चुनाव आयोग की कड़ी नजर

बरनाला  राज्य चुनाव आयोग पंजाब के दिशा-निर्देशों के तहत नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव 26 मई को करवाए जाएंगे। चुनावों की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है। जिला चुनाव अधिकारी हरप्रीत सिंह ने सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनाव आचार संहिता का पूरी तरह पालन करने के आदेश दिए हैं।  जिला चुनाव अधिकारी ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार को धर्म, जाति या समुदाय के नाम पर वोट मांगने की अनुमति नहीं होगी। धार्मिक स्थलों का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए करने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी उम्मीदवार के निजी जीवन से जुड़े अप्रमाणित आरोप लगाने या भड़काऊ बयान देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। सरकारी इमारतों में नहीं होगा प्रचार प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार कोई भी उम्मीदवार या समर्थक बिना अनुमति सरकारी इमारतों या सरकारी संपत्ति पर पोस्टर, बैनर या होर्डिंग नहीं लगाएगा। निजी संपत्ति पर प्रचार सामग्री लगाने के लिए संपत्ति मालिक की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसकी प्रति संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करवानी होगी। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार सामग्री जैसे पोस्टर और पंपलेट पर छापने वाले और प्रकाशित करने वाले व्यक्ति का नाम और पता लिखना जरूरी होगा। इसके अलावा जनसभाओं, रैलियों और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के लिए पहले संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। स्पीकरों के प्रयोग को किया सीमित जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अनुमति मिलने के बाद भी स्पीकरों का उपयोग केवल सुबह सात बजे से रात दस बजे तक ही किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त मतदाताओं को किसी प्रकार का लालच, उपहार या शराब बांटने पर पूरी तरह रोक रहेगी। निर्देशों के अनुसार मतदान केंद्र के 100 मीटर दायरे में किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकेगा। किसी भी उम्मीदवार या उसके समर्थकों को ऐसी गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है, जिससे विभिन्न धर्मों, जातियों या समुदायों के बीच तनाव या नफरत फैलने की आशंका हो। विरोधियों के घरों के बाहर नहीं लगा पाएंगे धरने प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोधी उम्मीदवारों के घरों के सामने प्रदर्शन या धरना देने की अनुमति नहीं होगी। किसी अन्य उम्मीदवार की चुनावी सभा में बाधा डालना भी चुनाव कानून के तहत अपराध माना जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से अपील की कि वे चुनाव आचार संहिता का पालन करते हुए शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव करवाने में प्रशासन का सहयोग करें।

शादी का झांसा, करोड़ों की ठगी: NRI विधवा बन महिला ने पंजाब के युवाओं को बनाया शिकार

जालंधर. पंजाब के युवाओं में विदेश जाने और वहां बिजनेस स्थापित करने का बढ़ता क्रेज अब साइबर ठगों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है। पहले फर्जी ट्रैवल एजेंट नौकरी और वीजा दिलाने के नाम पर ठगी करते थे, लेकिन अब इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय एनआरआई विधवा बनकर नए और बेहद शातिर तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। यह गैंग खुद को कनाडा, आस्ट्रेलिया या दुबई में रहने वाली अमीर विधवा कारोबारी बताकर युवाओं से दोस्ती करती है और फिर उन्हें विदेश में बिजनेस पार्टनर बनाने, होटल मैनेजमेंट संभालने, प्रापर्टी में हिस्सेदारी देने या शादी के बाद विदेश में बसाने के सपने दिखाती है। ठग महिलाएं सोशल मीडिया प्रोफाइल पर महंगी गाड़ियों, आलीशान बंगले, विदेशी आफिस और करोड़ों के कारोबार की तस्वीरें डालकर खुद को सफल बिजनेस वुमन साबित करती हैं। इसके बाद लंबे समय तक बातचीत कर युवकों का भरोसा जीतती हैं और फिर अलग-अलग बहानों से पैसे मांगना शुरू कर देती हैं। जालंधर में तीन युवा हुए ठगी के शिकार जालंधर में ऐसे तीन मामलों में युवकों से करीब 92 लाख रुपए की ठगी सामने आई है- केस स्टडी 1 बस्ती नौ के रहने वाले साहिल को एक महिला ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया। महिला ने खुद को कनाडा में रहने वाली एनआरआई बिजनेस वुमन बताया और मनप्रीत को बड़ी कंपनी में नौकरी करने का झांसा दिया। करीब डेढ़ महीने तक लगातार बातचीत कर उसे भरोसे में लिया गया। ठगों ने नकली कनाडाई लोकेशन, फर्जी कंपनी दस्तावेज और इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट भेजकर युवक को यकीन दिलाया कि वह विदेश में बड़ा कारोबारी बनने जा रहा है। बाद में रिफंडेबल सिक्योरिटी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उससे 24 लाख रुपए ऐंठ लिए। रकम जुटाने के लिए मनप्रीत को अपनी पुश्तैनी जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी। केस स्टडी 2 दूसरे मामले में लकड़ी का काम को विदेश में सेटल होने का वादा किया गया। महिला ने खुद को वहां की पक्की नागरिक बताया और उसे बिजनेस पार्टनर बनने का प्रस्ताव दिया। भरोसा बढ़ाने के लिए एक व्यक्ति को फर्जी वीजा अधिकारी बनाकर वीडियो काल पर इंटरव्यू भी करवाया गया। इसके बाद अलग-अलग फीस और दस्तावेजों के नाम पर अमनदीप से 31 लाख रुपए ले लिए गए। बाद में जब उसने एग्रीमेंट और वेबसाइट की जांच करवाई तो उसमें अंग्रेजी की गलतियां मिलीं और वेबसाइट भी केवल तीन महीने पुरानी निकली। तब तक वह अपनी पूरी जमा पूंजी गंवा चुका था। केस स्टडी 3 जालंधर की रहने वाले राजेश को दुबई की महिला ने अपने जाल में फंसाया। महिला ने उसे दुबई में लग्जरी आफिस दिलवाले का झांसा दिया। धीरे-धीरे ट्रेड लाइसेंस, प्रोसेसिंग फीस और टिकट के नाम पर उससे 37 लाख रुपए ले लिए गए। यह रकम जुटाने के लिए गुरकीरत ने परिवार की बचत खर्च कर दी और मां के गहने तक बेच दिए। आखिर में टिकट भेजने का झांसा देकर महिला ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया और युवक को ब्लाक कर दिया। क्या कहते हैं साइबर विशेषज्ञ साइबर विशेषज्ञ पलविंदर सिंह का कहना है कि इंटरनेट मीडिया पर दिखाई जाने वाली लग्जरी लाइफस्टाइल और विदेशी बिजनेस आफर पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी विदेशी नौकरी, बिजनेस या निवेश प्रस्ताव की पुष्टि सरकारी पोर्टल और अधिकृत एजेंसियों से जरूर करनी चाहिए।

रिश्वतकांड की FIR से घिरे एसएस चौहान, क्या पंजाब DGP बनने की राह हुई मुश्किल?

चंडीगढ़ स्थायी डीजीपी पद के दावेदार आईपीएस अधिकारी एसएस चौहान का नाम सीबीआई की भ्रष्टाचार एफआईआर में आया है, जिसके बाद पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।हालांकि, एफआईआर में चौहान का आरोपित नहीं बनाया गया है, लेकिन आरोपित रीडर ओपी राणा उनके नाम पर रिश्वत मांग रहे थे यह साफ साफ लिखा है। सीबीआई की ओर से एसएस चौहान को आने वाले दिनों में पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से हाल ही में यूपीएसई को डीजीपी पद के लिए भेजे गए पैनल में चौहान सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। मामले का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पंजाब विजिलेंस प्रमुख एसएस चौहान का नाम एफआईआर में शिकायत और सत्यापन रिपोर्ट में दर्ज है, जबकि उन्हें आरोपित नहीं बनाया गया. उधर रिश्वतकांड में फरार आरोपित इंस्पेक्टर ओपी राणा पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। आरोपित के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राणा की तलाश में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।एफआईआर के अनुसार, यह मामला एक लंबित शिकायत को बंद कराने के नाम पर 13 लाख रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता फाजिल्का जिले के अबोहर निवासी ईटीओ अमित कुमार ने आठ मई को आरोप लगाया था कि कुछ निजी बिचौलिए पंजाब विजिलेंस अधिकारियों के नाम पर पैसे मांग रहे हैं। आरोप था कि यह रकम विजिलेंस प्रमुख एसएस चौहान के नाम पर और उनके रीडर ओपी राणा के जरिए मांगी जा रही थी। प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई ने 11 मई को चंडीगढ़ के एक होटल में जाल बिछाया। ट्रैप के दौरान अंकित वधावा नामक व्यक्ति को 13 लाख रुपये और एक मोबाइल फोन लेते हुए गिरफ्तार किया गया। सीबीआई के मुताबिक, यह रकम रीडर ओपी राणा और अन्य लोगों तक पहुंचाई जानी थी। कार्रवाई के दौरान राणा मौके से फरार हो गया। एफआईआर में ओपी राणा के अलावा निजी ठेकेदार राघव गोयल, उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल तथा कुछ अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों को आरोपित बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रैप के बाद राघव गोयल, विकास गोयल और दो गनमैन को अंबाला के पास पंजाब-हरियाणा सीमा से पकड़ लिया गया, लेकिन राणा अब तक गिरफ्त से बाहर है।

जिंदगी की लड़ाई जीत गया मासूम! 9 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया बच्चा

होशियारपुर पंजाब के होशियारपुर-दसूहा सड़क पर स्थित स्थानीय गांव चक समाना में एक चार साल का बच्चा बोरवेल में गिर गया था. जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल हो गया था. सूचना लगते ही NDRF, SDRF, पंजाब पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए. जिसके बाद स्थानीय निवासियों की संयुक्त से चलाए गए अभियान के 9 घंटे बाद बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया. बच्चे के पिता की पहचान हरिंदर और मां आशा के रूप में हुई है।  ऐसे किया गया बच्चे का रेस्क्यू जानकारी के अनुसार बच्चे को रात करीब 12:40 बजे बोरवेल से बाहर निकाला गया और मेडिकल जांच के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया. डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन और SSP संदीप कुमार मलिक ने इस अभियान का नेतृत्व किया और टीमों की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की, जिसके कारण यह अभियान पूरी तरह सफल रहा. अभियान की सफलता के बाद डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने बताया कि बचाए जाने के बाद बच्चे को एक मेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस में आगे की जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने बताया कि यह घटना शाम करीब 4:00 बजे हुई थी और सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए थे।  बच्चा अपने घर के पास स्थित एक खुले बोरवेल में फिसल गया था, जिसे एक दिन पहले खोदा गया था. 25 से 30 फीट की गहराई तक एक समानांतर गड्ढा खोदने के बाद बचाव दल ने एक संकरी सुरंग के रास्ते बोरवेल के शाफ्ट तक पहुंच बनाई. जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. लड़का करीब 30 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था और बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए मौके पर आवश्यक मशीनरी मंगवाई गई थी. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने शाफ्ट में एक कैमरा और ऑक्सीजन पाइप भी नीचे उतारा था और फुटेज में बच्चे की हलचल दिखाई दे रही थी. जिससे टीम को बोरवेल के अंदर की हर गतिविधि की जानकारी मिलती रही थी।  रेस्क्यू अभियान के दौरान मौजूद थे बड़ी संख्या में अधिकारी डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि 40 से अधिक अधिकारियों वाली NDRF की टीम ने इस कठिन समय के दौरान अपनी विशेषज्ञता से इस अभियान में अमूल्य सहयोग दिया. इस बीच, पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और होशियारपुर के सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, जो पूरे ऑपरेशन के दौरान मौके पर मौजूद रहे, ने गुरकरन को बचाने के लिए सभी टीमों द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की सराहना की. डॉ. रवजोत ने बताया कि ज़िला प्रशासन ने NDRF, अन्य टीमों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए थे।  सांसद डॉ. चब्बेवाल ने कहा कि यह एक बहुत ही संवेदनशील बचाव अभियान था. लेकिन टीमों के लगातार प्रयासों से लगभग सात घंटे की मशक्कत के बाद यह सफल हो पाया. SSP संदीप कुमार मलिक ने भी बच्चे की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए बचाव टीमों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि टीमों का जज़्बा बेहद सराहनीय था, जिसकी बदौलत गुरकरन की जान बचाई जा सकी। 

SIR मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, Sukhjinder Singh Randhawa ने दी आंदोलन की चेतावनी

चंडीगढ़. पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में शुरू किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से महज कुछ महीने पहले इस प्रक्रिया को लागू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर संदेह खड़ा करता है। पूर्व उप-मुख्यमंत्री रंधावा ने जारी बयान में कहा कि पंजाब में विधानसभा चुनावों के लिए दस महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के पीछे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव लगभग एक ही समय पर होने हैं तो SIR पंजाब में अब क्यों लागू किया जा रहा है। चुनाव के बाद SIR की मांग उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूचियों को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है तो यह प्रक्रिया चुनाव के बाद भी करवाई जा सकती थी। चुनावों से ठीक पहले इस कदम से लोगों में राजनीतिक मंशा को लेकर शंका पैदा होना स्वाभाविक है। रंधावा ने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्र सरकार के प्रभाव में चुनावी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहती है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजर रखने को कहा उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। पंजाब में किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाने या उसे मतदान से वंचित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांव-गांव और शहर-शहर अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से निगरानी करेगी ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे। साथ ही उन्होंने सभी विपक्षी दलों से भी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।

साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन! लुधियाना से पकड़ा गया अंतरराष्ट्रीय गिरोह, 132 आरोपी दबोचे गए

लुधियाना. पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 132 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अब तक के सबसे बड़े साइबर अपराध मामलों में से एक माना जा रहा है। पुलिस कमिश्नरेट लुधियाना की ओर से साइबर अपराध थाना में मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक फैला हुआ था तथा विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर बड़े स्तर पर ठगी की जा रही थी। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है। पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ छापेमारी कर कई अवैध कॉल केंद्रों का भंडाफोड़ किया। 1 करोड़ की राशि रिकवर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब एक करोड़ सात लाख रुपये नकद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 वाहन बरामद किए हैं। इसके अलावा 300 से अधिक बैंक खाते भी फ्रीज किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह विदेशी नागरिकों को नकली संदेश और वायरस अलर्ट दिखाकर डराता था। जानें कैसे डराते थे लोगों को संदेश के बाद स्क्रीन पर खुद को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का तकनीकी सहायता केंद्र बताकर सहायता नंबर दिखाया जाता था। जैसे ही पीड़ित संपर्क करता, उसे इंटरनेट आधारित प्रणाली के जरिए ठगों से जोड़ दिया जाता था। इसके बाद आरोपित पीड़ितों से एक विशेष सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाकर उनके संगणक और बैंक संबंधी जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। गिरोह के सदस्य कई बार खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को यह कहकर डराते थे कि उनका खाता खतरे में है। फिर अलग-अलग तरीकों से उनसे पैसे ऐंठे जाते थे। गिरोह के सदस्य खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे कि उनका बैंक खाता असुरक्षित है। इसके बाद उनसे कई तरीकों से पैसे ऐंठे जाते थे, जिनमें – घर से नकदी उठवाना सोना खरीदवाकर उसकी डोरस्टेप पिकअप अमेजन और एप्पल गिफ्ट कार्ड खरीदवाना फर्जी विदेशी खातों में वायर ट्रांसफर करवाना पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध माध्यमों से पहुंचाई जाती थी। हर एक दिन में 8 से 10 कॉल संभालता था प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह का हर संचालक प्रतिदिन आठ से दस कॉल संभालता था। कर्मचारियों को तय वेतन के साथ प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त भुगतान भी दिया जाता था। लुधियाना पुलिस ने कहा कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, हवाला नेटवर्क और अन्य आरोपितों की पहचान को लेकर जांच अभी जारी है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठित साइबर अपराध और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।