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झारखंड शराब घोटाला: गोवा से धराया मास्टरमाइंड नवीन केडिया, एसीबी की बड़ी कार्रवाई

  रांची, झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक छत्तीसगढ़ के दुर्ग का निवासी नवीन केडिया आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। उसे रांची से गिरफ्तार किया है। घोटाले की जांच कर रहा एंटी करप्शन ब्यूरो अब केडिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि घोटाले की परतों को और गहराई से खंगाला जा सके। नवीन केडिया की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। इससे पहले 7 जनवरी को एसीबी की टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर उसे गोवा से दबोचा था। वहां की अदालत ने उसे कुछ शर्तों के साथ 12 जनवरी तक रांची में सरेंडर करने के लिए ट्रांजिट बेल दी थी। लेकिन केडिया ने कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन किया और सरेंडर करने के बजाय फिर से फरार हो गया। इसके बाद उसने एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। लगातार चकमा दे रहे केडिया को पकड़ने के लिए एसीबी की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही थी। एसीबी की जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले का सिंडिकेट छत्तीसगढ़ से संचालित हो रहा था। छत्तीसगढ़ एसीबी की जांच के दौरान कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया के ठिकाने से मिली एक डायरी ने झारखंड के इस संगठित खेल का पर्दाफाश किया था। इस डायरी में झारखंड के शराब बाजार को नियंत्रित करने, विरोधियों को रास्ते से हटाने और सिंडिकेट को मैनेज करने की पूरी रणनीति दर्ज थी। जांच में सामने आया कि शराब दुकानों के संचालन के लिए जिन सात प्लेसमेंट कंपनियों को ठेका दिया गया, उन्होंने न केवल टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि उनकी बैंक गारंटी भी फर्जी पाई गई। झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने फर्जीवाड़े के जरिए सरकार को करीब 129.55 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। इस मामले में अब तक पूर्व आईएएस विनय कुमार चौबे, रिटायर्ड आईएएस अमित प्रकाश और कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया समेत कई रसूखदारों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नवीन केडिया की गिरफ्तारी इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि वह मैनपावर सप्लाई और सिंडिकेट के प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहा था।  

कांग्रेस का विरोध अब देश के खिलाफ दिखने लगा : संजय सरावगी का हमला

पटना,  बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एसआईआर को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिहार में जिस तरह चुनाव प्रचार कर रहे थे और बार-बार उन्हीं मुद्दों को उठा रहे थे लेकिन आम जनता ने इसे नकार दिया और कांग्रेस का सफाया कर दिया। उनके पास विधायकों की संख्या नाममात्र की है। संजय सरावगी ने कहा कि पूरे देश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। बिहार में भी एसआईआर हुआ और एक भी व्यक्ति न्यायालय में नहीं गया। इन बातों का जनता पर असर नहीं होता। मुद्दों को भटकाने वाली बातों को आम जनता नकार चुकी है। कांग्रेस का तो चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हो चुका है। कांग्रेस भाजपा का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगी है। देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। बता दें कि देश के कई राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है और विपक्ष एसआईआर का विरोध कर रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी एसआईआर के बाद मतदाताओं के नाम कटने का आरोप लगा रही हैं और धरना प्रदर्शन कर रही हैं। 10 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में एसआईआर को धोखाधड़ी करार दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने एसआईआर को लेकर राज्यसभा में कहा था कि एसआईआर के नाम पर हर जगह धोखाधड़ी हो रही है। यह सबसे बुरा है और सारी कवायद चुनाव जीतने के लिए हो रही है। इस तरह की कवायद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक में हो रही है। हर जगह और हर राज्य में धोखाधड़ी ही धोखाधड़ी है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 मार्च को आरोप लगाया था कि राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बदलाव का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाना है। ममता बनर्जी ने धरनास्थल से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुनौती देते हुए कहा था कि अगर भाजपा को चुनाव आयोग का समर्थन भी मिल जाए, तो भी वह चुनाव नहीं जीत पाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अपने अधिकार छीनने वालों को करारा जवाब देगी।  

गैस सिलेंडर महंगाई के खिलाफ मंत्री इरफान अंसारी का ऐलान, करेंगे धरना

रांची, झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। लेकिन, अफसोस की बात है कि सरकार को मौजूदा समय में इससे कोई असर नहीं पड़ रहा है। उन्होंने बुधवार को कहा कि हम आने वाले दिनों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दर्ज किए गए इजाफे के विरोध में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में समाज के विभिन्न तबके के लोग हिस्सा लेंगे। मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि उन्होंने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में की गई वृद्धि को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र भी लिखा है। सरकार को इस दिशा में कदम बढ़ाना होगा। सरकार को इस बारे में सोचना होगा कि कैसे आम जनता को महंगाई की मार से महफूज किया जाए। अगर सरकार ने इस दिशा में किसी भी प्रकार का कदम नहीं उठाया, तो हम आगे चलकर इसका प्रतिकार करेंगे। हम पहले ही स्पष्ट कर देते हैं कि इस तरह की स्थिति को हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे धर्मनिरपेक्ष किस्म का नेता हूं, जो हर धर्म के लोगों का सम्मान करते है। उन्होंने कहा कि हम किसी भी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाते हैं। हम विकास के नाम पर राजनीति करने वाले लोग हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई वृद्धि के विरोध में कई व्यापारियों, रेस्टोरेंट के मालिकों और माताओं-बहनों ने धरना दिया। हम आगामी दिनों में इस धरना को व्यापक रूप देंगे। इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। आज की तारीख में जरूरत है कि कैसे भी करके झारखंड के लोगों को महंगाई की मार से बचाया जाए।  

मता बनर्जी पर राम कृपाल यादव का आरोप, घुसपैठियों की मदद से सत्ता चाहती हैं

पटना, बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ममता बनर्जी पर तंज कसा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी के बयान को लेकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और यह कभी किसी दल से प्रभावित नहीं हुआ है। राम कृपाल यादव ने कहा कि मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसलिए चिंता जता रही हैं क्योंकि चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार अपना काम कर रहे हैं। उनकी समस्या यह है कि वे बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की मदद से सरकार बनाना चाहती हैं, लेकिन यह संभव नहीं है। कानून का राज है और संवैधानिक व्यवस्था पर अगर कोई उंगली उठाता है तो जनता उसको कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हिम्मत है तो महाभियोग लाएं। खारिज हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता उनके चेहरे को भी खारिज कर देगी। इस बार चुनाव में जनता ममता बनर्जी को हरा देगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार कातिल और असंवैधानिक है। वे कानून विरोधी काम करती है। ये सरकार भाजपा के कार्यकर्ताओं को चुन-चुन कर मरवा रही है। ममता बनर्जी के हाथ निर्दोषों के खून से रंगे हुए हैं। आने वाले वक्त में उनको इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार का सफाया होगा और भारतीय जनता पार्टी की दो तिहाई बहुमत से सरकार बनेगी। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन और गैस आपूर्ति में आई बाधाओं पर मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हुई है। इस स्थिति के चलते कुछ कठिनाइयां उत्पन्न हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत और राज्य की सरकार संयुक्त रूप से इस समस्या के निदान के लिए काम कर रही है। जिससे कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का कष्ट न उठाना पड़े। नियमित रूप से गैस और तेल इत्यादि मिलता रहे। कालाबाजारी करने वाले लोगों को लेकर उन्होंने कहा कि कालाबाजारी करने वाले लोगों को सरकार छोड़ेगी नहीं। जो कालाबाजारी करेंगे उनका लाइसेंस रद्द होगा और उनको जेल भी जाना पड़ेगा। इसलिए इन सब चीजों पर सरकार निगरानी रखे हुए हैं। सरकार का दायित्व है कि जनता के हित में काम करे। जनता के अहित में जो काम करेगा उसको सरकार छोड़ेगी नहीं।  

रामनवमी जुलूस में डीजे की अनुमति पर बवाल, झारखंड विधानसभा में भाजपा का जोरदार विरोध

रांची, झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को रामनवमी के जुलूस में डीजे बजाने पर लगी पाबंदी का मुद्दा छाया रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा और जमकर नारेबाजी की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक खास समुदाय को निशाना बना रही है और हिंदुओं की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है। भारी शोरगुल और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने सदन में मोर्चा खोलते हुए कहा कि रामनवमी जैसे महापर्व पर डीजे बजाने पर रोक लगाना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जानबूझकर बहुसंख्यक समाज की परंपराओं को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। नवीन जायसवाल के इस बयान का सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया, जिससे सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। भाजपा विधायक इस दौरान ‘आसन’ (वेल) के समीप आकर नारेबाजी करने लगे। विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि कुछ लोग समाज में नफरत फैलाने और धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियम और कानून सभी के लिए बराबर हैं और इसे किसी खास समुदाय से जोड़कर देखना गलत है। सदन में लगातार बढ़ते शोरगुल को देख स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सदन अब तक सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन इस तरह के व्यवधान से जनता के मुद्दों पर चर्चा प्रभावित हो रही है। हजारीबाग से भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने इस मुद्दे पर सदन के बाहर धरना दिया। उन्होंने हजारीबाग की विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय श्री चैत रामनवमी का जिक्र करते हुए मांग की कि इसे ‘राजकीय महोत्सव’ का दर्जा दिया जाए। प्रदीप प्रसाद ने सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा, “हजारीबाग की रामनवमी अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है। प्रशासन चाहे जो कर ले, हजारीबाग में हर हाल में डीजे बजेगा। हम अपनी परंपराओं और आस्था के साथ समझौता नहीं करेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर जुलूसों में अड़ंगा डाल रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

साइकिल से विधानसभा पहुंचे झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी

रांची. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी बुधवार को साइकिल से विधानसभा पहुंचे. उन्होंने यह कदम राज्य में गैस और तेल की सप्लाई से जुड़े संकट को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में उठाया. मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर ईरान युद्ध के प्रभाव के कारण देश में गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर झारखंड के कई क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से साइकिल से विधानसभा पहुंचकर विरोध जताया. केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर झारखंड में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति तुरंत बहाल करने की मांग की है. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि राज्य में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बाधित होने से कई औद्योगिक संस्थानों, होटलों और कैंटीनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उद्योग और होटल व्यवसाय पर पड़ रहा असर डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि एलपीजी की कमी का असर सिर्फ व्यवसाय पर ही नहीं, बल्कि हजारों कामगारों के भोजन की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि रांची स्थित उषा मार्टिन लिमिटेड समेत कई औद्योगिक इकाइयों की कैंटीनों में गैस की कमी के कारण भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है. इससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि औद्योगिक कैंटीनों और होटल व्यवसाय के लिए कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल की जाए. उन्होंने कहा कि यदि गैस की नियमित आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो इससे उद्योगों के कामकाज, होटल व्यवसाय और श्रमिकों की भोजन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. मंत्री ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी.

झारखंड में हिंडाल्को द्वारा ‘रेड मड सप्लाई’ की फिर होगी जांच

रांची. मुरी स्थित हिंडाल्को इंडस्ट्रीज द्वारा रेड मड आपूर्ति के मामले की फिर से जांच होगी। मंगलवार को सिल्ली से झामुमो के विधायक अमित कुमार द्वारा ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से इसे उठाया। विधायक अमित कुमार ने आरोप लगाया कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने बिना पर्यावरणीय अनुमति के रेड मड की आपूर्ति की है। उन्होंने यह भी कहा कि रेड मड तालाब से जुड़ी एक घटना में 25 से 30 लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी, जिसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। इस पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने सदन को बताया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बिना पर्यावरणीय अनुमति के लगभग दो लाख टन रेड मड की आपूर्ति राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को किए जाने के मामले में हिंडालको इंडस्ट्रीज पर 37,96,875 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड लगाया है। मंत्री ने कहा कि कथित मौतों की घटना को लेकर अब तक न तो किसी मीडिया में प्रमाणित रिपोर्ट सामने आई है और न ही किसी थाने में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई है। पहले गठित जांच टीम की रिपोर्ट में भी ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, विधायक अमित कुमार ने जांच टीम की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए विधानसभा की कमेटी से जांच कराने की मांग की। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार मामले की गंभीरता को देखते हुए नई कमेटी गठित कर दोबारा जांच कराएगी। यदि पहले की जांच रिपोर्ट और नई जांच रिपोर्ट में अंतर पाया जाता है, तो सरकार आगे की आवश्यक कार्रवाई करेगी। फर्जी हुकूमनामा और दस्तावेजों के सहारे सरकारी जमीन हेराफेरी का आरोप बोकारो जिले के चास अंचल स्थित नारायणपुर मौजा की 21 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री को लेकर उठे विवाद की जांच अब भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव करेंगे। चंदनक्यारी से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) विधायक उमाकांत रजक द्वारा विधानसभा में यह मामला उठाए जाने के बाद सरकार ने जांच कराने का फैसला लिया है। मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन में कहा कि सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी और विभागीय स्तर पर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि मामला फिलहाल न्यायालय में भी विचाराधीन है और कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान विधायक उमाकांत रजक ने बताया कि संबंधित 21 एकड़ जमीन सर्वे के अनुसार गैर आबाद मालिक की श्रेणी में दर्ज थी। इसमें से 1.98 एकड़ जमीन भूमिहीनों को दानपत्र के माध्यम से दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर आबाद जमीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा किया गया और सादा हुकूमनामा बनाकर रजिस्ट्री कर ली गई। विधानसभा में वार-प्रतिवार उन्होंने कहा कि एक जनवरी 1946 से पहले के हुकूमनामा के आधार पर जमीन की दर तय की जा रही है, जबकि इस जमीन की बंदोबस्ती केलू महतो के नाम से दर्ज थी। उनके अनुसार धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के सहारे साजिश के तहत सरकारी जमीन की हेराफेरी की गई है। मामले के सामने आने के बाद बोकारो जिला प्रशासन ने प्राथमिकी भी दर्ज की है। विधायक ने यह भी बताया कि करीब 2.8 एकड़ जमीन पर एक रिजॉर्ट का निर्माण कर लिया गया है। इस पर विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि न्यायालय ने केवल 2.8 एकड़ जमीन पर कार्रवाई पर रोक लगाई है, जबकि बाकी 21 एकड़ जमीन पर कोई रोक नहीं है।

झारखंड की हेमंत सरकार 20 हजार करोड़ का निवेश लाकर बढ़ाएगी रोजगार

रांची. झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को द्वितीय पाली में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग व उद्योग विभाग के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हुई। डुमरी विधानसभा से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन में उपरोक्त विभाग के बजट में कटौती का प्रस्ताव लाया था। सदन में चर्चा के बाद श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के 1168.73 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया। सरकार के उत्तर में विभागीय मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि रोजगार, नौकरी व श्रमिकों के हित में हेमंत सोरेन की सरकार बेहतर कार्य कर रही है। हर हाथ को काम, हर चेहरे पर मुस्कान, हेमंत सोरेन की सरकार का संकल्प है। उसे पूरा करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। उनकी सरकार राज्य में 20 हजार करोड़ का निवेश ला रही है, ताकि रोजगार को बढ़ावा मिल सके। राज्य में औद्योगिक विकास पर भी काम हो रहा है, ताकि यहां के लोगों को रोजगार मिल सके। सरकार ने गिनाए काम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में जनवरी तक तीन लाख 89 हजार 568 निर्माण श्रमिकों का निबंधन किया गया है। झारखंड भवन व अन्य बोर्ड के माध्यम से 277582 निबंधित लाभुकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए कुल 167.93 करोड़ रुपये का लाभ वितरित किया गया है। श्रमाधान पोर्टल पर अब तक निबंधित कुल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या 15 लाख 57 हजार 373 है, जिन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए 31 जनवरी 2026 तक कुल 83919 श्रमिकों को कुल 58 .19 करोड़ रुपये के समतुल्य योजनाओं का लाभ दिया गया है। बाल श्रमिकों की विमुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है और अब तक 80 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया है। इनमें से 22 बाल श्रमिकों का नामांकन विभिन्न विद्यालयों में कराया गया है, शेष के नामांकन की कार्रवाई चल रही है। उनके माता-पिता को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 273 प्रवासी मजदूरों के आश्रितों को उनकी मृत्यु के बाद 225.50 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। सामान्य मृत्यु की स्थिति में 219 श्रमिकों के पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक लाने के लिए 106.55 लाख रुपये आश्रितों को सहायता दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष में विदेश में दुर्घटना में छह मजदूर की मृत्यु होने पर उनके आश्रित को विभाग ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया। बेरोजगार युवकों को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 302 भर्ती कैंपों एवं 95 रोजगार मेलों का आयोजन कर 14748 युवाओं को रोजगार के लिए चयन किया गया। सीएम पर टिप्पणी को संसदीय कार्य मंत्री ने बताया गलत कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने कहा कि धनबाद की एक सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि अगर निजी संस्थान नौकरी नहीं देते हैं, तो लोग उसपर कब्जा कर लें। जयराम महतो ने कहा कि एक विधायक कहें तो शोभा देता है, लेकिन मुख्यमंत्री का पद एक शक्तिशाली पद है। उन्हें तमाम अधिकार प्राप्त है। उनका यह संबोधन उनके पद की गरिमा के विपरीत है। इसपर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री से संबंधित इस तरह का कोई सबूत जयराम महतो के पास नहीं है, इसलिए इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। बाद में जयराम महतो ने इंटरनेट मीडिया से संबंधित फुटेज व छपी खबरों से संबंधित कतरन उन्हें मोबाइल पर भेजने का दावा किया। इन विधायकों ने भी रखी अपनी बातें कटौती प्रस्ताव के पक्ष में विधायक आलोक कुमार चौरसिया, जनार्दन पासवान, रागिनी सिंह व सरयू राय ने अपनी बात रखी। वहीं, कटौती प्रस्ताव के विपक्ष में व सरकार के पक्ष में विधायक दशरथ गगराई, प्रदीप यादव, सुरेश पासवान, अरुप चटर्जी, सुदीप गुड़िया व जगत मांझी ने अपनी बात रखी। विधायक सुदीप गुड़िया ने खूंटी, रनिया कोरिडोर को विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पर्यटन के साथ-साथ रोजगार भी बढ़ेगा। सरयू राय ने कहा कि यहां उद्योगों के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन है। यहां के खनिज से दूसरे राज्यों में उद्योग-धंधे चल रहे हैं। सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए। उद्योग लगने से यहां के श्रमिकों को यहीं पर रोजगार मिलेगा। विधायक प्रदीप यादव ने भी कहा कि नए उद्योगों को लाकर सरकार झारखंड की बेरोजगारी दूर कर सकती है।

स्वास्थ्य मुख्यालय में तुरंत मदद के लिए दो नर्सें और एंबुलेंस रहेगी तैनात

पटना. स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत मुख्यालय में दो प्रशिक्षित ग्रेड-ए नर्सों की तैनाती की जाएगी। इस संबंध में विभाग की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव विनोद कुमार पाठक ने इस संबंध में असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पटना को पत्र भेजा है। पत्र में मुख्यालय में चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। साथ ही इस व्यवस्था को शीघ्र लागू करने का अनुरोध भी किया गया है। कार्यालय अवधि में रहेंगी तैनात नर्सें पत्र के अनुसार स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में दो प्रशिक्षित ग्रेड-ए नर्सों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। ये नर्सें कार्यालय अवधि के दौरान वहां मौजूद रहेंगी। उनका मुख्य कार्य अधिकारियों और कर्मचारियों की दैनिक और आकस्मिक स्वास्थ्य जांच करना होगा। आपात स्थिति में मिलेगी तुरंत मदद स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह है कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर तुरंत प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध हो सके। इसके लिए मुख्यालय परिसर में ही स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था की जा रही है। इससे आपात स्थिति में इलाज में देरी की संभावना कम हो जाएगी। सचिवालय के पास तैयार रहेगी एंबुलेंस इसके अलावा आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए सचिवालय के आसपास एक एंबुलेंस भी तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस के माध्यम से मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। इस व्यवस्था से कर्मचारियों को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। शीर्ष प्राथमिकता पर लागू होगी व्यवस्था पत्र में इस पूरी व्यवस्था को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का अनुरोध किया गया है। विभाग का मानना है कि इससे मुख्यालय में कार्यरत कर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर मुख्यालय में ही तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए होगी 1080 नए डॉक्टरों की नियुक्ति

पटना. बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए नेत्र रोग और ईएनटी (कान-नाक-गला) के 1080 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों के अतिरिक्त पद सृजित करने का प्रस्ताव सरकार ने स्वीकृत किया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य के 534 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ 6 अन्य सीएचसी, यानी कुल 540 केंद्रों में यह व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ को तैनात किया जाएगा। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इन रोगों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को किया जा रहा मजबूत उल्लेखनीय है कि कि भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (आइपीएचएस) के अनुरूप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ही जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट के पद सृजित हैं। अब सात निश्चय-3 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे को बढ़ाते हुए नेत्र रोग और ईएनटी विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को आंख तथा कान-नाक-गला से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें बेहतर व गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा अपने ही प्रखंड में उपलब्ध हो सकेगी।