samacharsecretary.com

घरेलू विवाद बना कानून व्यवस्था की चुनौती, झारखंड में ससुर के घर पर बुलडोजर एक्शन

गिरिडीह भारत में दामाद की ससुराल में खूब आवभगत होती है। इस आवभगत की बहुत सारी कहानियां हमारे सामने हैं, लेकिन कभी-कभी ससुराल में दामाद कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो कानूनन अपराध होता है। ऐसा ही एक मामला आया है झारखंड के गिरिडीह में। यहां एक शख्स की पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी। इस बात से नाराज होकर महिला का पति बुलडोजर लेकर ससुराल पहुंच गया और घर पर ही बुलडोजर चला दिया। शख्स ने घर पर बुलडोजर चलाकर बाउंड्री को गिरा दिया।   यह मामला गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र का है। यहां के सिरसिया गांव में एक शख्स की पत्नी बार-बार मायके चली जा रही थी। पत्नी के बार-बार मायके जाने से पति इतना नाराज हुआ कि एक दिन वो बुलडोजर लेकर ससुराल पहुंच गया। ससुराल पहुंचकर शख्स ने ससुर के घर पर ही तोड़फोड़ शुरू कर दी और घर के बाहर बनी बाउंड्री की दीवार को तोड़कर गिरा दिया। इस घटना की खबर मिलने के बाद जब मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई तो, शख्स जेसबी लेकर फरार हो गया। इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो मौके पर पुलिस पहुंची और मामला दर्ज कर लिया। मिली जानकारी के अनुसार, गादी-चुंगलो का रहने वाला पिंटू मंडल की शादी सिरसिया में हुई थी। शादी के बाद से ही पिंटू मंडल अपनी पत्नी उर्मिला को नशा करने के बाद मारता था और अभद्र व्यवहार करता था। इस वजह से उर्मिला अपने दो बच्चों को लेकर मायके रहने चली गई। इस घटना के बाद पिंटू पर मामला दर्ज कर लिया गया है।  

नौकरी के लालच में खून का रिश्ता शर्मसार: पिता की हत्या में शामिल निकला अपना ही बेटा, जानिए पूरी कहानी

भोजपुर भोजपुर जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है। चांदी थाना क्षेत्र के भगवतपुर गांव में झारखंड पुलिस में चालक हवलदार के पद पर तैनात पशुपतिनाथ तिवारी की हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि उनके ही बेटे ने की थी। संपत्ति और नौकरी के लालच में बेटे ने अपने ही पिता की जान ले ली। भोजपुर पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक के पुत्र ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर पिता की हत्या की साजिश रची थी। बताया गया कि पशुपतिनाथ तिवारी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले थे। बेटे को यह उम्मीद थी कि पिता की मौत के बाद उसे अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिल जाएगी। इसी लालच में उसने अपने पिता को रास्ते से हटाने की योजना बना ली। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि करीब दो साल पहले भी आरोपी पुत्र ने पिता को दुर्घटना में मारने की साजिश रची थी, लेकिन उस समय उसकी योजना नाकाम हो गई थी। पिछले दिसंबर महीने में जब पशुपतिनाथ तिवारी छुट्टी पर अपने गांव आए थे, उसी दौरान घर में सोए अवस्था में गला रेतकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में मामला संदिग्ध लग रहा था, लेकिन पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया। इस मामले में सदर अनुमंडल पदाधिकारी-2 रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि हत्या में शामिल मृतक के पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मृतक द्वारा कुछ जमीन का एग्रीमेंट कराए जाने को लेकर भी पुत्र उनसे नाराज था। पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।  

ठंड से कांपा बिहार: घना कोहरा, कोल्ड वेव के बीच 29 दिसंबर तक ऑरेंज अलर्ट

पटना बिहार इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। मौसम विभाग ने शीतलहर और घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और राज्य को 29 दिसंबर तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर बिहार के मैदानी जिलों में देखा जा रहा है। बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण ठंड बढ़ गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने पूरे राज्य के लिए शीतलहर और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट  जारी किया है, जो कम से कम अगले चार से पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा। बिहार में कोल्ड डे जैसे हालात मौसम विभाग के अनुसार, 29 दिसंबर तक राज्य के कई हिस्सों में भीषण शीतलहर का दौर जारी रहने की संभावना है। बीते एक सप्ताह से बिहार में ‘कोल्ड-डे' जैसी स्थिति बनी हुई है। लगातार धूप नहीं निकलने के कारण दिन के तापमान में असामान्य गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे दिन में भी अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। तापमान 10 डिग्री तक पहुंचा विशेषज्ञों का मानना है कि 30 दिसंबर के बाद ही मौसम में हल्का सुधार संभव है, उससे पहले राहत की उम्मीद कम है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बिहार का औसत न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी पटना में न्यूनतम तापमान गिरकर 11 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कई जिलों में दिन का तापमान भी 9 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इसी कारण ‘शीत दिवस' की स्थिति लोगों के लिए अधिक परेशानी का कारण बन रही है।   29 दिसंबर तक शीत दिवस की स्थिति बने रहने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तक हवाओं की दिशा में बदलाव नहीं होता और पहाड़ी इलाकों से आने वाली बर्फीली हवाओं की तीव्रता कम नहीं होती, तब तक बिहार को इस कंपकंपाती ठंड से राहत मिलना मुश्किल है। विभाग ने बताया कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का सीधा प्रभाव बिहार पर पड़ रहा है। 29 दिसंबर तक शीत दिवस की स्थिति बने रहने और न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है। इसके अलावा अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता काफी कम रह सकती है।

चुनावी नियम सख्त: दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार होंगे अयोग्य

रांची झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार नगर निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चे वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन के समय शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह घोषणा करनी होगी कि निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हैं। इस प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि इस संबंध में नगर विकास विभाग द्वारा पूर्व में जारी पत्र को आधार मानते हुए जिलों को कारर्वाई करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांकन के दौरान शपथ पत्र की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है। चुनावी तैयारियों की जानकारी देते हुए आयोग के सचिव ने बताया कि सभी जिलों में वाडरं के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस संबंध में आयोग को लगातार रिपोर्ट प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही चुनाव की अद्यतन तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए। इस बीच वाडर् आरक्षण को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद आयोग ने एक अहम स्पष्टीकरण भी जारी किया है। यदि किसी प्रत्याशी को आरक्षण के कारण अपने वाडर् से चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। वह नगर निकाय के किसी अन्य वाडर् से भी चुनाव लड़ सकता है, बशर्ते उस वाडर् में लागू आरक्षण नियमों का पालन किया जाए। प्रसाद ने बताया कि महापौर, नगर परिषद अध्यक्ष और वाडर् सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए योग्यता संबंधी दिशा-निर्देश तय कर दिए गए हैं। इसके तहत प्रत्याशी का संबंधित नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य होगा। हालांकि, नगर निकाय की मतदाता सूची में शामिल कोई भी व्यक्ति उस निकाय के किसी भी वाडर् से चुनाव लड़ सकता है, लेकिन आरक्षण नियमों का अनुपालन जरूरी होगा। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नगर निकाय चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लक्ष्य फरवरी महीने में शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा भी की जा सकती है।  

लाभार्थियों को राहत: मंईयां सम्मान योजना की नवंबर किस्त जारी, अब दिसंबर पर फोकस

रांची मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत नवंबर माह की राशि सभी महिला लाभुकों के खाते में हस्तांतरित कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने क्रिसमस के पूर्व राशि हस्तांतरित करने के निर्देश सभी जिलों को दिए गए थे। इसके बाद जिलों ने नवंबर माह की राशि हस्तांतरित की। दो-तीन जिलों में यह टास्क लंबित था, लेकिन अंतिम समय में सभी जिलों में भी राशि हस्तांतरित कर दी गई। राशि उन लाभुकों के बैंक खाते में ही हस्तांतरित की गई है, जिनकी आधार सीडिंग हो चुकी है। अब जिलों में दिसंबर माह की राशि हस्तांतरित करने की तैयारी चल रही है। इस योजना के तहत अगले वर्ष फरवरी माह तक की राशि जिलों में उपलब्ध है। इस योजना के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दूसरे अनुपूरक बजट में राशि का प्रविधान किया गया था। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 7,721.25 करोड़ रुपये के प्रविधान किए गए थे, जिनमें सबसे अधिक 2,082 करोड़ रुपये की राशि का प्रविधान महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए किया गया था। इस योजना का संचालन इस विभाग द्वारा ही किया जा रहा है। इससे पहले, चालू वित्तीय वर्ष के बजट में मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना के लिए 13,363.35 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था।  

कैप्टन कूल का मैजिक जारी: मैदान से बाहर रहकर भी धोनी ने झारखंड को दिलाया खिताब

रांची  ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड़ की टीम ने हाल ही में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का पहली बार खिताब जीता। ट्रॉफी जीतने पर युवाओं से सजी इस टीम के खिलाड़ियों और कप्तान की सबने खूब प्रशंसा की है। हालांकि झारखंड की इस ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण योगदान भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी का भी रहा है। झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के जॉइंट सेक्रेटरी शाहबाज नदीम ने बताया है कि सीजन शुरू होने से पहले कोचिंग स्टाफ से लेकर खिलाड़ियों के चयन करने के निर्णय के दौरान एमएस धोनी की सलाह ली गई थी और उन्होंने भी इसमें काफी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। भारतीय टीम के दिग्गज एमएस धोनी अपने इंटरनेशनल करियर के दौरान विकेट के पीछे से मैच का रूख बदल देते थे। फील्डिंग सेट करने से लेकर गेंदबाजों को हर एक गेंद की लाइन बताने तक, धोनी हर चीज में माहिर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर से संन्यास लेने के बाद भी धोनी का दिमाग खेल को लेकर उतना ही एक्टिव है, जितना क्रिकेट के मैदान पर रहता है। किशन की कप्तानी में झारखंड ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में हरियाणा को 69 रन से हराया। इस जीत के बाद कप्तान और कुमार कुशाग्र जैसे खिलाड़ियों की जमकर तारीफ हुई और होनी भी चाहिए। हालांकि झारखंड की टीम को इस मुकाम तक पहुंचाने में एमएस धोनी का बड़ा योगदान रहा। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव शाहबाज नदीम ने हाल ही में खुलासा किया है कि धोनी झारखंड के हर घरेलू खिलाड़ी के प्रदर्शन और आंकड़ों पर पैनी नजर रखते हैं। शाहबाज नदीम के अनुसार, सीजन की शुरुआत में हेड कोच रतन कुमार और गेंदबाजी कोच सनी गुप्ता की नियुक्ति धोनी की सलाह पर ही की गई थी। ईएसपीएनक्रिकइंफो के मुताबिक नदीम ने कहा, ''जब हमने सीजन की शुरुआत की, कोचिंग स्टॉफ की नियुक्ति से लेकर खिलाड़ियों तक, हमने हमेशा उनकी (धोनी) सलाह और सुझाव लिया। धोनी भाई हर मैच को बहुत बारीकी से फॉलो करते हैं। उन्हें झारखंड के प्रत्येक घरेलू खिलाड़ी के आंकड़े और उनकी ताकत-कमजोरियों के बारे में पूरी जानकारी है। यह देखना सुखद है कि इतना बड़ा खिलाड़ी हमारे राज्य की टीम को आगे बढ़ाने में इतनी गहरी दिलचस्पी ले रहा है।" टूर्नामेंट के दौरान धोनी लगातार झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों और कोचों के संपर्क में थे और खिलाड़ियों के सुधार के लिए अपने इनपुट्स दे रहे थे। धोनी ने अगस्त 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। हालांकि अब भी वह आईपीएल में खेलते हुए नजर आते हैं। बता दें कि सीजन शुरू होने से पहले, पूर्व खिलाड़ी शाहबाज नदीम और सौरभ तिवारी को झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) का जॉइंट सेक्रेटरी और सेक्रेटरी बनाया गया था।  

कोल्ड वेव का असर: जानें अपने शहर का मौसम और सावधानियां

रांची भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने झारखंड के 12 जिलों में अगले तीन दिन ठंड का पूर्वानुमान जताते हुए ‘येलो अलर्ट' जारी किया। आईएमडी के बुलेटिन के अनुसार, गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, रांची, खूंटी और बोकारो के लिए यह अलर्ट जारी किया गया है। इसके अनुसार, इन जिलों में बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे से शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक ठंड का प्रभाव रहने की संभावना है। तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचा भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, नौ जिलों में शीतलहर की स्थिति जारी है, जहां न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। बोकारो, कोडरमा, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़ और सिमडेगा में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। 27 दिसंबर तक कड़ाके की ठंड का अलर्ट रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, ‘‘झारखंड के निचले क्षोभमंडल में उत्तर-पश्चिम से पश्चिम की ओर हवाएं चल रही हैं। उत्तर-पश्चिमी और मध्य के कुछ जिलों में ठंड का प्रभाव जारी रहने की संभावना है और यह स्थिति 27 दिसंबर तक बनी रह सकती है।'' उन्होंने बताया कि अगले तीन दिन में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आ सकती है, इसके बाद अगले दो दिन तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होगा। अभिषेक आनंद ने कम दृश्यता के कारण सुबह के समय यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह भी दी।   गुमला में 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरा पारा बुलेटिन के अनुसार, गुमला में न्यूनतम तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो राज्य में सबसे कम रहा। इसके बाद डालटनगंज में 6.1 डिग्री और हजारीबाग व लोहरदगा में 7.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसमें कहा गया है कि रांची में न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस, चाईबासा में 11.6 डिग्री और जमशेदपुर में 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

ED की रडार पर भूमाफिया रिजवान उर्फ राजा, टॉप-10 सूची में सबसे ऊपर, सरकार ने कसा शिकंजा

दरभंगा बिहार में नई सरकार के गठन के बाद भूमाफिया और बालू माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी कड़ी में सरकार द्वारा जिन टॉप–10 भू माफियाओं की संपत्तियां जब्त करने की सूची प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजी गई है, उसमें दरभंगा के रिजवान उर्फ राजा का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के मोदामपुर एकमीघाट निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ राजा को प्रदेश का बड़ा भूमाफिया माना जा रहा है। वह फिलहाल पिछले दो वर्षों से जेल में बंद है। रिजवान पर जमीन के अवैध कारोबार और धोखाधड़ी से जुड़े करीब 32 आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। आरोप है कि रिजवान ने अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों से आलीशान मकान बनवाया है, जहां उसने अपने नाम के साथ जदयू के तीर निशान वाली बड़ी तस्वीर भी लगवा रखी है। इस मामले को लेकर इलाके में काफी चर्चा है। पीड़ित व्यवसायी ने लगाए गंभीर आरोप दरभंगा के बड़े व्यवसायी दिनेश दारुका ने सामने आकर रिजवान उर्फ राजा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार, एक जमीन के सौदे में उन्होंने 60 लाख रुपये दिए थे, जबकि उस जमीन का कुल सौदा 5 करोड़ 60 लाख रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद उसी जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति से भी 1 करोड़ 40 लाख रुपये लिए गए। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। सरकार द्वारा संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद पीड़ितों में यह उम्मीद जगी है कि अदालत के फैसले के बाद उन्हें उनका पैसा वापस मिल सकता है। आरोपी के भाई ने आरोपों को बताया साजिश आरोपी के भाई शम्स तबरेज ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिजवान के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जो संपत्तियां दिखाई जा रही हैं, वे पूर्वजों की हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रिजवान उर्फ राजा जमीन के कारोबार में सक्रिय था, लेकिन उनका कहना है कि साफ-सुथरे कारोबार में भी कई बार झूठे आरोप लग जाते हैं। शम्स तबरेज ने कई मामलों को साजिश करार दिया। फिलहाल, राज्य सरकार की सख्ती और ED को भेजी गई सूची के बाद दरभंगा समेत पूरे बिहार में भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर माहौल गरमाया हुआ है।  

नशे के कारोबार पर करारा प्रहार, पुलिस ने बरामद की चरस, लाखों की नकदी और हथियार

मनेर पटना जिले के मनेर थाना क्षेत्र में ड्रग्स कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग्स माफियाओं के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। गुप्त सूचना के आधार पर दानापुर डीएसपी-2 अमरेंद्र कुमार झा के नेतृत्व में मनेर पुलिस ने मनेर सरकारी अस्पताल मोड़ के पास ड्रग्स माफियाओं के तीन से चार घरों में छापा मारकर भारी मात्रा में मादक पदार्थ, नकदी और हथियार बरामद किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई में करीब 500 ग्राम ड्रग्स, 500 ग्राम चरस, एक देसी कट्टा, कुछ मैगजीन, लगभग 12 लाख रुपये नकद, इसके अलावा सोने-चांदी के गहने बरामद किए गए हैं। छापेमारी के दौरान एक महिला समेत कुल पांच लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। जानकारी के अनुसार, मनेर नगर परिषद क्षेत्र के मनेर सरकारी अस्पताल मोड़ के पास स्थित एक चाय दुकान में ड्रग्स कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस ने विशेष रूप से कार्रवाई की। चाय दुकानदार से जुड़े कई घरों में पुलिस टीम ने घंटों तक तलाशी अभियान चलाया और घर के सामानों को बारीकी से खंगाला। इस दौरान अलग-अलग घरों से मादक पदार्थों के साथ कुछ शराब, हथियार और कीमती सामान भी बरामद किए गए। पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें बस्ती रोड निवासी पवन कुमार का पुत्र वीरू कुमार, अस्पताल मोड़ निवासी शुभभ गुप्ता, एक महिला ड्रग्स कारोबारी समेत कुल पांच लोग शामिल हैं। सभी से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे पश्चिमी सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने ड्रग्स माफियाओं से खुद भी मामले को लेकर विस्तृत पूछताछ की। सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने बताया कि छापेमारी में मादक पदार्थों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए एक विशेष टीम गठित कर आगे भी छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल महिला समेत करीब पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।  

पेसा एक्ट को दी हरी झंडी, रांची में आदिवासी समुदाय में उल्लास का माहौल

रांची झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने की खुशी में रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर आदिवासी-मूलवासी समाज की ओर से भव्य जश्न मनाया गया। सैकड़ों की संख्या में जुटे लोगों ने राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए उत्साहपूर्वक खुशी जाहिर की। केंद्रीय सरना समिति के नेतृत्व में कार्यक्रम के दौरान पटाखे फोड़े गए, एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी गईं और नारेबाजी के साथ उत्सव मनाया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने इस फैसले को आदिवासी समाज के अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय तिर्की ने कहा कि पेसा नियमावली आदिवासी स्वशासन, आत्मनिर्भरता और अधिकारों की मजबूत रीढ़ है। उन्होंने कहा कि इस नियमावली के तहत ग्रामसभा को सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था का दर्जा दिया गया है, जिससे अब गांव से जुड़े विकास कार्य, योजनाएं और नियम ग्रामसभा की सहमति से ही लागू होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जल, जंगल, जमीन, खनिज एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और उपयोग का अधिकार ग्रामसभा को मिलना आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे आदिवासी समुदाय को अपने संसाधनों और भविष्य पर अधिकार मिलेगा लक्ष्मी नारायण मुंडा ने राज्य सरकार के इस फैसले को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय को अपने संसाधनों और भविष्य पर अधिकार मिलेगा। इस अवसर पर विजय कच्छप, प्रकाश हंस, अनिल पुरती, कृष्णा लोहरा, संजय लोहरा, श्यामलाल, गौतम उरांव, अजय कच्छप, बाहा उरांव, कृष्णा मुंडा, डब्लू कच्छप, माना, अशोक कच्छप, पुष्पा कुमारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।