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वोटिंग डे पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट में SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई

पटना/नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने पूरे भारत में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 11 नवंबर को सुनवाई करने पर शुक्रवार को सहमति जताई। गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मुद्दा लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है जिसके बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि वह 11 नवंबर से इन याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी। पीठ ने कहा कि हालांकि 11 नवंबर से कई महत्वपूर्ण मामले सूचीबद्ध हैं, फिर भी वह SIR मामलों की सुनवाई के लिए अन्य मामलों की सुनवाई को समायोजित करने का प्रयास करेगी। भूषण ने कहा कि मामले की तत्काल सुनवाई इसलिए आवश्यक है क्योंकि विभिन्न राज्यों में SIR प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शीर्ष अदालत बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण करने के निर्वाचन आयोग के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पहले से ही सुनवाई कर रही है। चुनाव आयोग ने क्या कहा निर्वाचन आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की कवायद को ‘सटीक’ बताते हुए न्यायालय से 16 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ता राजनीतिक दल और गैर सरकारी संगठन इस प्रक्रिया को केवल बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाकर संतुष्ट हैं। आयोग ने न्यायालय से यह भी कहा था कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद से नाम हटाने के खिलाफ किसी मतदाता ने एक भी अपील दायर नहीं की है। उसने याचिकाकर्ताओं के इस आरोप का खंडन किया था कि महीनों तक चली SIR प्रक्रिया के बाद तैयार की गई राज्य की अंतिम मतदाता सूची में 'मुसलमानों को अनुपातहीन तरीके से बाहर' किया गया। निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर को बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करते हुए कहा था कि इसमें मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 47 लाख घटकर 7.42 करोड़ रह गई है जो निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले 7.89 करोड़ थी। अंतिम संख्या हालांकि एक अगस्त को जारी की गई मसौदा सूची में दर्ज 7.24 करोड़ मतदाताओं से 17.87 लाख अधिक है। मृत्यु, प्रवास और मतदाताओं के दोहराव सहित विभिन्न कारणों से 65 लाख मतदाताओं के नाम मूल सूची से हटा दिए गए थे। मसौदा सूची में 21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए जबकि 3.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में 17.87 लाख की वृद्धि हुई है। बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीट पर पहले चरण का चुनाव गुरुवार को हो गया, जबकि शेष 122 निर्वाचन क्षेत्रों में 11 नवंबर को मतदान होगा। मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।  

कौन नहीं, कौन है? बिहार में महिला वोटर तय करेंगी जीत-हार, उम्मीदवार सिर्फ दर्शक!

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में महिलाओं ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। रिकॉर्ड 64.66% कुल मतदान में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं अधिक रही, जो राज्य की राजनीति में उनकी बढ़ती ताकत का प्रमाण है। लेकिन विडंबना यह है कि राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी बरती है। कुल 1,314 उम्मीदवारों में महज 122 महिलाएं हैं, जो मात्र 9.28% है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भागीदारी बनाम प्रतिनिधित्व की गहरी खाई को उजागर करता है, जहां महिलाएं वोटर के रूप में तो निर्णायक हैं, लेकिन उम्मीदवार के रूप में हाशिए पर धकेली जा रही हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण के 121 सीटों पर 3.75 करोड़ मतदाताओं में 1.76 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। मतदान के दौरान महिलाओं की सक्रियता ने कई जिलों में रिकॉर्ड तोड़े। बेगूसराय(67.32%), गोपालगंज(64.96%) और मुजफ्फरपुर (64.63%) में महिलाओं का टर्नआउट पुरुषों से 5-10% अधिक रहा। चुनाव में शानदार रही भागीदारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजि‍याल ने कहा, महिलाओं की भागीदारी शानदार रही। यह बिहार के लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है। अधिकारिक आंकड़ा मतगणना के बाद भी आएगा। यह ट्रेंड 2010 से चला आ रहा है। 2010 में महिलाओं का टर्नआउट 54.49% था (पुरुष: 51.12%), 2015 में 60.48% (पुरुष: 53.32%) और 2020 में 59.7% (पुरुष: 54.5%)। महिलाओं की यह ताकत नीतीश कुमार सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं—जैसे मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (10,000 रुपये की सहायता)और 35% सरकारी नौकरियों में आरक्षण का नतीजा मानी जा रही है। विपक्षी महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने भी महिलाओं के लिए 30,000 रुपये एकमुश्त सहायता का वादा किया है। राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद मुकेश कहते हैं, महिलाएं अब जाति से परे वोट दे रही हैं। वे बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही हैं। लेकिन पार्टियां उन्हें टिकट देकर सशक्तिकरण की बात तो करती हैं, काम कम करती हैं। सीनियर जर्नलिस्ट ओमप्रकाश अश्क कहते हैं, महिलाओं का वोट सबको चाहिए, मगर टिकट देने के मामले में परिवारवाद और वंशवाद को ही तवज्जो मिल पाता है।  

पोलिंग पार्टियों के ठहरने की व्यवस्था बदली, रात में बूथ पर रुकने पर लगी रोक

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में कुछ ही दिन बचे हैं। घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को मतदान हैं। वहीं, मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। 11 नवंबर की सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। जानकारी के मुताबिक 10 नवंबर को घाटशिला विस क्षेत्र के 300 बूथों में से 262 बूथों की पोलिंग पार्टियां अपने-अपने बूथों पर ही रुकेगी जबकि बाकी 38 बूथों की पोलिंग पार्टियां रात में इंटरमीडिएट स्ट्रांग रूम (आईएसआर) में रुकेंगी और तड़के मतदान वाले दिन बूथ पर पहुंचेगी क्योंकि ये सभी बूथ नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पड़ते हैं। इसलिए ये बूथ पर न रुक कर इंटरमीडिएट स्ट्रांग रूम में रुकेंगी। वहीं, निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदान से पहले तड़के साढ़े पांच बजे से डेढ़ घंटे तक मॉक पोल कराया जायेगा। मतदान के बाद 300 में से 297 बूथों की पोलिंग पार्टियां उसी रात तक ईवीएम लेकर को-ऑपरेटिव कॉलेज में स्थित स्ट्रांग रूम पहुंच जायेंगी, जबकि शेष तीन बूथों की पोलिंग टीम 12 नवंबर की सुबह वहां पहुंचेगी। बता दें कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, झामुमो के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग पांच प्रतिशत अधिक है। 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष मतदाता हैं।  

तेजप्रताप का RJD नेताओं पर हमला, भाई वीरेंद्र को कहा—‘बिहार को बर्बाद करने वाला’

पटना तेज प्रताप यादव ने राजद विधायक और मनेर से पार्टी के उम्मीदवार भाई वीरेंद्र पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने राजद नेता को गुंडा,मवाली और बिहार को बर्बाद करने वाला बता दिया। उन्होंने सरकार से उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। भाई वीरेंद्र पर एक दारोगा के साथ गाली, गलौज करने और जला देने की धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज किया गया है। मनेर में गुरुवार को मतदान के दौरान एक बूथ पर विवाद हुआ था। तेज प्रताप यादव शुक्रवार को पटना में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उनसे भाई वीरेंद्र पर सवाल पूछा गया तो भड़क गए। राजद नेता को गुंडा, मवाली बताने लगे। कहा कि इस पर कार्रवाई होना चाहिए। चाहे राजद के नेता हों या किसी भी दल के हो। तेज प्रताप ने कहा कि इन्हीं लोगों ने बिहार को बर्बाद किया है। ये गुंडे, मवाली हैं और दलितों की पिटाई करते हैं। सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए और गुंडे मवालियों पर कार्रवाई करना चाहिए। इससे पहले पंचायत सचिव को गाली गलौज करने के मुद्दे पर तेज प्रताप यादव ने भाई वीरेंद्र को भला बुरा कहा था। वे मनेर भी गए थे। तब भाई वीरेंद्र ने चंपारण निवासी पंचायत सेवक के साथ गाली गलौज और दुर्व्यवहार किया था। उसकी ऑडियो क्लिप काफी वायरल हुई। उस मामले में विधायक के खिलाफ एससी एसटी थाने में केस दर्ज है। ताजा बवाल में विधायक पर भी केस दर्ज कर लिया गया है।

रेलवे की बड़ी घोषणा: बिहार से दिल्ली, मुंबई, पुणे और कोलकाता के लिए अतिरिक्त 500 ट्रेनें चलेंगी

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल अब समाप्ति की ओर है। पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है और 11 नवंबर को दूसरे चरण की वोटिंग के बाद, दिवाली और छठ महापर्व मनाने और वोट डालने आए लाखों प्रवासी लोग वापस अपने काम पर लौटेंगे। इसके लिए राजधानी पटना और गया से प्रमुख शहरों के लिए अगले तीन हफ्तों में रोजाना 500 से अधिक स्पेशल ट्रेन चलेंगी। इस बात का ऐलान रेलवे ने किया है। भारतीय  रेलवे ने ऐलान करते हुए कहा है कि अगले तीन हफ्तों के दौरान लगभग 500 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये ट्रेनें मुख्य रूप से पटना और गया स्टेशनों से शुरू होकर देश के प्रमुख महानगरों तक जाएंगी। जानिए किस मार्ग से चलेंगी कितनी ट्रेन पटना से दिल्ली रोजाना 20 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। मुंबई रूट से रोजाना 15 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। पुणे, सूरत और अहमदाबाद से रोजाना 10-10 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। वहीं गया से कोलकाता रोजाना 12 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। इस बात की जानकारी देते हुए रेलवे के पीआरओ डायरेक्टर ने बताया कि इस बार छठ के तुरंत बाद लोग चुनाव के कारण रुके रहे, जिससे अब भीड़ अत्यधिक बढ़ने की संभावना है। यह कदम प्रवासियों की सुगम वापसी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इस संबंध में रेलवे अधिकारीका कहना है कि 3.75 करोड़ वोटरों में लाखों प्रवासी भी शामिल हैं, और उनकी सुरक्षित और समय पर वापसी रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रवासियों ने भी स्पेशल ट्रेनों की इस व्यवस्था पर खुशी जताई है, जिससे वे वोटिंग के बाद समय पर अपनी ड्यूटी पर लौट सकेंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए यह है व्यवस्था ज्यादातर ट्रेनें अनारक्षित होंगी, जिससे तुरंत यात्रा शुरू की जा सके। बुकिंग IRCTC ऐप और स्टेशन काउंटर दोनों जगह उपलब्ध रहेगी। स्टेशनों पर अतिरिक्त काउंटर, पीने का पानी और बैठने की बेहतर व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ जवान तैनात रहेंगे।

प्रशांत किशोर का दावा — बिहार में बदलाव की लहर, जनता जन सुराज को देख रही विकल्प के रूप में

गया जी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान के बाद जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर (पीके) ने कहा है कि इस बार रिकॉर्ड मतदान बदलाव का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की 60% से अधिक जनता परिवर्तन चाहती है और जन सुराज को अब एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रही है। गयाजी  में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “आजादी के बाद पहली बार बिहार में इतना ज्यादा वोटिंग प्रतिशत देखने को मिला है। यह दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए वोट कर रहे हैं। पिछले 30 वर्षों से बिहार की राजनीति में कोई ठोस विकल्प नहीं था, लेकिन जन सुराज के आने से लोगों को एक नया रास्ता मिला है।” पीके ने कहा कि इस बार प्रवासी मजदूर चुनाव के “एक्स फैक्टर” बन गए हैं। “छठ के बाद जो प्रवासी मजदूर बिहार में रुके हुए थे, उन्होंने खुद वोट किया और अपने परिजनों को भी वोटिंग के लिए प्रेरित किया। महिलाओं से ज्यादा इस बार प्रवासी मजदूरों की भूमिका अहम रही है। यही लोग बिहार में बदलाव की बयार ला रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि 14 नवंबर को बिहार का इतिहास लिखा जाएगा, क्योंकि जनता ने इस बार लोकतंत्र के पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। पीके ने कहा, “दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट किया है। यह दिखाता है कि जनता अब डर की राजनीति से बाहर निकल चुकी है।” राजनीतिक हमले करते हुए उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार के डर से लालू यादव को और लालू के डर से नीतीश कुमार को वोट देने की मजबूरी अब खत्म हो गई है। जनता को अब असली विकल्प मिल गया है।” पीके ने एनडीए और राजद-कांग्रेस गठबंधन दोनों पर निशाना साधते हुए कहा, “सम्राट चौधरी कहते हैं कि पार्टी का चेहरा साफ है, लेकिन बिहार में आज भी असुरक्षा का माहौल है। पहले जनता झेलती थी, अब नेता और मंत्री झेल रहे हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी जिसमें कहा गया था कि राजद और कांग्रेस एक-दूसरे का बाल नोचेंगे। पीके ने कहा, “बाल नोचेंगे या सिर नोचेंगे, यह उनका काम है, लेकिन बिहार की जनता ने कल दिखा दिया कि अब उन्हें एक नया विकल्प मिल गया है।” अंत में उन्होंने कहा, “अब चुनाव सिर्फ सत्ता तय नहीं करता, बल्कि यह भी तय करता है कि विपक्ष में कौन होगा और कौन जनता के मुद्दों पर सड़क पर उतरेगा। जन सुराज की सबसे बड़ी सफलता यही है कि उसने बिहार को विकल्प दिया है।”

तेजस्वी बोले—जनता ने 121 सीटों पर दिया महागठबंधन को एकजुट समर्थन, बदलाव तय

पटना बिहार चुनाव में ऐतिहासिक 64.46 फीसदी मतदान के बाद सियासत जारी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पहले चरण की वोटिंग में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन जीत का दावा किया था। अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन को एकमुश्त वोट मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि बिहार ने प्रथम चरण में बदलाव के लिए मतदान किया है। हर बिहारवासी ने 20 साल के अंधकार को मिटाने के लिए, घर से निकल कर परिवर्तन की ऐसी रोशनी जलाई कि पूरे बिहार में सुख, समृद्धि, सुरक्षा, सम्मान, सौहार्द, शांति और खुशहाली की दस्तक सुनाई देने लगी है। बिहार में महापरिवर्तन होने जा रहा है नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि 20 साल में पहली बार इस तरह की अभूतपूर्व बदलाव की लहर महागठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रही है। हर घर से ही नहीं, हर हृदय से भी सिर्फ एक ही आवाज सुनाई दे रही है कि इस बार नई युवा सरकार लायेंगे, हर घर से सरकार चलायेंगे और हर बिहारवासी को सीएम यानी चिंता मुक्त और चेंज मेकर बनायेंगे। बुजुर्ग और हमारे युवा साथियों ने जिस जोश, जुनून , जज़्बे, उम्मीद और उत्साह के साथ लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, उससे साफ हो चुका है कि बिहार में महापरिवर्तन होने जा रहा है। 20 वर्षों से बेरोजगारी, गरीबी, अपराध, अन्याय, गैर बराबरी, अत्याचार, भ्रष्टाचार और अनगिनत पीड़ाओं का अंत होने जा रहा है। सभी 121 सीटों पर बिहारवासियों ने महागठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में एकमुश्त वोट किया है। इसके लिए मैं सभी का धन्यवाद करता हूं। बिहार के परिवर्तन युग के प्रकाश पुंज है तेजस्वी यादव ने बिहारवासियों से कहा कि आप लोग मेरी शक्ति और बिहार के परिवर्तन युग के प्रकाश पुंज है। अभी थमना नहीं है, रुकना नहीं है। तकनीकी से तरक्की का प्रकाश थोड़ी ही दूर पर जगमगाता दिख रहा है। हमें विनम्रता के साथ मंजिल तक मजबूत कदम रखते हुए पहुंचना है। विपक्ष द्वारा उत्पन्न बाधाओं का सामना करते हुए, लोकतंत्र और संविधान पर आए खतरे को मिटाते हुए, जनता जनार्दन के हर सपने को लक्ष्य तक पहुंचाना है। आप सभी प्रथम चरण की भांति ही दूसरे चरण यानि 11 नवंबर को भी अपना प्रेम, आशीर्वाद, स्नेह और सहयोग तेजस्वी को दें। आपका बेटा, भाई और साथी, तेजस्वी वचन देता है कि अगले पांच साल में बिहार को इतना खुशहाल बनाएंगे कि 14 नवंबर की तारीख को लोग त्योहार के रूप में मनाने लगेंगे, एक ऐसे दिन के रूप में जिस दिन बिहार में विकसित बनने वाली तरक्की का आगमन हुआ था।

ठंड का नया रिकॉर्ड! मार्च तक sweaters और रजाई से नहीं मिलेगी राहत

रांची झारखंड में नवंबर महीने में ही ठंड ने सभी लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। अब लोगों के मन में बस यही सवाल है कि अभी से ये हाल है तो दिसंबर और जनवरी में हमारा क्या हाल होगा। वहीं, इसी बीच मौसम विभाग का कहना है कि होली में भी ठंड रहने वाली है। 48 घंटे बाद तापमान में आएगी और गिरावट बता दें कि वैसे तो झारखंड में अभी से ही ठंड देखी जा रही है, लेकिन 48 घंटे बाद न्यूनतम तापमान में और गिरावट देखने को मिलेगी जिससे राज्य भर में ठंड अधिक बढ़ जाएगी। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि रांची समेत राज्य में अगले 2 दिन सुबह के तापमान में स्थिरता रह सकती है, लेकिन इसके बाद हवा के रूख में तेजी आने से न्यूनतम तापमान में और गिरावट आएगी। इससे सुबह में ठंड और कुहासा बढ़ेगा। दोपहर के दौरान मौसम साफ रहेगा। इस बार स्वेटर पहनकर मनानी पड़ेगी होली मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मध्य मार्च तक ठंड देखने को मिलेगी। ऐसे में होली शायद स्वेटर पहनकर मनानी पड़े, लेकिन दिसंबर और जनवरी के 2 महीने हाड़ कपाने वाली ठंड देखने को मिलेगी। ऐसे में मौसम विभाग ने झारखंड के लोगों को आगामी दिनों में ठंड के लिए तैयार रहने और स्वयं का विशेष ख्याल रखने के लिए चेतावनी दी।  

RJD पर बरसे अमित शाह, बोले—बिहार में फिर नहीं आने देंगे जंगलराज

पटना बिहार के चुनावी मैदान में आज गृह मंत्री अमित शाह ने जमुई में लोगों के अंदर जोश भरने का काम किया। शाह ने मंच से कहा कि एक वक्त था जब जमुई लाल खून और लाल आतंक से सना हुआ था। यही वो जमीन थी जहां नक्सलवादियों ने अपना ठिकाना बनाया था। मगर आज, मोदी जी की सरकार ने बिहार से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया है। शाह ने रैली को संबोधित करते हुए जनता से कहा कि अगर आपसे जरा भी गलती हुई और आप कमल छाप या तीर छाप से जरा भी इधर-उधर गए तो फिर से जंगलराज आने वाला है। जमुई को जंगलराज चाहिए क्या? कल ही चुनाव का पहला चरण समाप्त हुआ है। लालू-राहुल की पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है। जमुई में भी उनका खाता नहीं खुलना चाहिए। यहां की सभी चारों सीटें आपको NDA के खाते में डालनी हैं। आरजेडी पर खूब बरसे अमित शाह रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “कभी गया, औरंगाबाद और जमुई में नक्सलियों का राज चलता था। उन्होंने 150 साथियों के साथ धनबाद-पटना एक्सप्रेस को हाईजैक किया था और तीन यात्रियों की हत्या कर दी थी। मगर आज हालात बदल चुके हैं, चोरमारा गांव, जो मुंगेर-जमुई बॉर्डर पर है, 25 साल बाद नक्सलमुक्त हुआ है।” उन्होंने कहा, “पहले बिहार में ऐसे जिले थे जहां तीन बजे तक ही मतदान होता था, डर के माहौल में। अब शाम पांच बजे तक वोटिंग चल रही है, क्योंकि डर खत्म हो गया है।” अमित शाह ने लालू-राबड़ी राज पर भी जमकर हमला बोला। शाह ने कहा बोले, “उन दिनों बारात जाती थी तो उगाही के लिए कट्टा लेकर लोग पहुंचते थे। अपहरण, फिरौती और बीस से ज्यादा नरसंहार होता था, यही था उस दौर का बिहार। उसी जंगलराज ने बिहार की फैक्ट्रियां और कारोबार बंद करवा दिए और राज्य को गरीबी की तरफ धकेला।”

पहले चरण में 8% ज्यादा मतदान — बिहार में फिर बदल सकती है सत्ता की तस्वीर?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के 18 ज़िलों की 121 सीटों पर उतरे 1314 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. गुरुवार को पहले चरण में मतदाताओं का उत्साह ज़बरदस्त देखने को मिला. पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी मतदान ज्यादा हुआ है. बिहार की सियासत में इस बार के मतदान को अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश के इतिहास में यह सर्वाधिक वोटिंग है. साल 2020 में पहले चरण में 56.1 फीसदी वोटिंग हुई, लेकिन उस समय पहले फेज में 71 सीटों पर चुनाव हुए थे जबकि इस बार 121 सीट पर चुनाव हुए हैं.  चुनाव आयोग के मुताबिक पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी मतदान रहा जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 56 फीसदी के करीब मतदान रहा। इस लिहाज़ से देखें तो वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई है। इस बार चुनाव में जिस तरह से मतदान बढ़ा है, उससे सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 ज़िलों की 121 सीटों पर वोटिंग हुई, जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर और समस्तीपुर जिले में सबसे ज़्यादा मतदान रहा तो पटना में सबसे कम वोटिंग हुई है। मुजफ़्फरपुर में 70.96 फीसदी, समस्तीपुर में 70.63 फीसदी, मधेपुरा में 67.21 फीसदी, वैशाली में 67.37 प्रतिशत हुआ. सहरसा में 66.84 फीसदी, खगड़िया में 66.36 फीसदी, लखीसराय में 65.05 फीसदी, मुंगेर में 60.40 फीसदी, सीवान में 60.31 फ़ीसदी, नालंदा में 58.91 फीसदी और पटना जिले में 57.93 प्रतिशत वोटिंग हुई। इस तरह से बिहार के पहले चरण में 64.69 फीसदी कुल मतदान रहा. बिहार में साढ़े 8 फीसदी मतदान रहा 2020 में पहले फेज में 3.70 करोड़ कुल वोटर थे, जिसमें से 2.06 करोड़ ने वोट किया था. लेकिन अबकी बार पहले फेज में कुल 3.75 करोड़ वोटर हैं, जो पिछली बार से 5 लाख अधिक हैं. इस बार की पहले चरण में 64.69 फासदी वोटिंग हुई. अब सियासी दल इस बढ़े वोटिंग पैटर्न को अपने-अपने लिहाज से मुफीद बता रहे हैं. बिहार में इससे पहले 1951-52 से 2020 तक सबसे अधिक 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57 फीसदी वोट पड़े थे जबकि 1951-52 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में बिहार में सबसे अधिक 1998 में 64.60 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि इस बार बिहार में पहले चरण की सीटों पर हुए वोटिंग ने इसे भी पछाड़ दिया. बिहार का वोटिंग पैटर्न के क्या संकेत वोटिंग फीसदी के घटने-बढ़ने का सीधा-सीधा असर चुनाव के नतीजों पर भी पड़ता है. भारत के चुनावी इतिहास में आमतौर पर माना जाता है कि जब वोटिंग ज़्यादा होती है, तो जनता बदलाव (एंटी इंकम्बेंसी) चाहती है. लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता. चुनाव में देखा गया है कि कई बार अधिक मतदान का मतलब सरकार के प्रति समर्थन (प्रो इंकम्बेंसी) भी रहती है.  मतलब साफ  है कि वोटर्स की ये सक्रियता किस दिशा में जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. एसआईआर के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं. एसआईआर में तमाम वोट काटे गए हैं तो कुछ नए वोट जोड़े गए हैं. इस तरह फर्जी वोटर हटाए जाने की वजह से भी वोटिंग बढ़ने का कारण माना जा रहा है,  लेकिन बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है तो सत्ता बदल जाती है.  बिहार में वोटिंग बढ़ने से बदली सरकार बिहार में विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो 1951-52 से 2020 तक केवल तीन बार ही 60 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई. 1990 में 62.04, 1995 में 61.79 और अब से पहले सबसे अधिक रिकॉर्ड 2020 में 62.57 वोट पड़े थे, लेकिन इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अभी पहले चरण में 64.69 फ़ीसदी वोटिंग रही है. ऐसे ही अगले चरण में वोटिंग हुई तो बिहार के इतिहास में यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा. बिहार में अभी तक सबसे कम 42.60 फ़ीसदी भी 1951-52 में ही वोट पड़े थे. आजादी के बाद से लेकर अभी तक बिहार में जितने चुनाव हुए हैं, उसके वोटिंग पैटर्न को देखते हैं तो साफ जाहिर होता है कि बिहार में जब-जब मतदान में 5 फीसदी से ज़्यादा इजाफा हुआ है, उसका असर चुनाव पर पड़ा है. बिहार में सरकार बदल गई है, तीन बार देखा गया है कि वोटिंग बढ़ने से कैसे सत्ता पर सियासी असर पड़ा है.  बिहार में 5% से कैसे बदल जाती है सरकार बिहार में सबसे पहले 1967 के चुनाव में वोटिंग में इजाफा हुआ तो सरकार बदली. 1962 में 44.5 फ़ीसदी वोटिंग के मुकाबले 1967 में 51.5 फीसदी मतदान रहा.  इस तरह 7 फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई थी और कांग्रेस के हाथों से सरकार निकल गई थी बिहार में पहली बार गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी. 1967 के बाद 1980 में भी यही पैटर्न दिखा. वर्ष 1980 में 57.3 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 1977 के चुनाव में 50.5 फ़ीसदी वोटिंग रही. इस तरह 6.8 फ़ीसदी ज़्यादा मतदान हुआ, जिसका नतीजा रहा कि सरकार बदल गई. जनता पार्टी को हार झेलना पड़ा और कांग्रेस वापसी कर गई. बिहार में इस बार समीकरण बदल गए हैं हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए हैं. 2020 में एनडीए से अलग चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा इस बार एनडीए के साथ थे तो मुकेश सहनी इस बार महागठबंधन के साथ हैं। इस बार 104 सीटों पर सीधा मुकाबला है, जबकि 17 सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई दिख रही है. पहले चरण में आरजेडी 72 सीट पर है तो उसके सहयोगी कांग्रेस 24 और सीपीआई माले 14 सीट पर किस्मत आजामा रहे हैं. वीआईपी और सीपीआई छह-छह सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सीपीएम तीन और आईपी गुप्ता की इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में थे। इस तरह छह सीटों पर महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट है. वहीं, एनडीए की तरफ से जेडीयू पहले फेज़ में 57 सीट मैदान में है तो बीजेपी ने 48 सीट पर थी। चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के दो प्रत्याशी मैदान में हैं और जीतनराम मांझी … Read more