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SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ, वोटर लिस्ट से नाम कटने पर क्या है चुनाव आयोग की भूमिका

पटना   एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट चल रही सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मैं चाहता हूं कि कोर्ट योगेंद्र यादव को 10 मिनट का समय दें, ताकि वे SIR के कारण महिलाओं, मुसलमानों आदि के अनुपातहीन बहिष्कार की वास्तविक पृष्ठभूमि बता सकें. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आप आगे कैसे बढ़ना चाहते हैं? SIR की वैधता पर या…? इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें न तो कोई नोटिस मिला, न ही कोई कारण बताया गया. उन्होंने कहा कि तीसरी बात, अपील का प्रावधान तो है, लेकिन जानकारी ही नहीं दी गई तो अपील कैसे करेंगे? वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि जिन भी लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें आदेश की जानकारी दी गई है. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अगर कोई हमें सूची दे सके कि 3.66 लाख मतदाताओं में से किन लोगों को आदेश की जानकारी नहीं दी गई, तो हम चुनाव आयोग को निर्देश देंगे कि उन्हें जानकारी दी जाए. हर व्यक्ति को अपील का अधिकार है.” क्या है संविधान का अनुच्छेद 329? संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव आयोग को यह अधिकार देता है कि वह चुनाव प्रक्रिया को बिना बाधा के पूरा कराए. संविधान का यह अनुच्छेद एक तरह से न्यायपालिका को चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने से रोकता है और उससे यह उम्मीद करता है कि वह चुनाव आयोग को चुनावी प्रक्रिया पूरी करने में बाधित नहीं करेगा. अनुच्छेद के खंड (क) में कहा गया है कि सीटों के परिसीमन या आवंटन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता पर अदालत में सवाल नहीं उठाया जा सकता है, जबकि खंड (ख) में प्रावधान है कि किसी चुनाव को केवल विधानमंडल द्वारा पारित कानून द्वारा निर्धारित तरीके से दायर चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है. विधायी मामलों के जानकार अयोध्यानाथ मिश्र बताते हैं कि भारत में हर संवैधानिक संस्था का अपना महत्व है. किसी भी संवैधानिक संस्था को संविधान ने सुप्रीम नहीं बताया है, बल्कि सबको अलग-अलग काम दिए हैं और सभी अपने कार्यों को करने के लिए स्वतंत्र हैं. हर संवैधानिक संस्था से यह उम्मीद की जाती है कि वो दूसरे के कार्यों में दखल नहीं देगा. संविधान के अनुच्छेद 329 में इसी बात की व्यवस्था की गई है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और बिना बाधा के चुनावी प्रक्रिया को पूरा कराए. जहां तक बात एसआईआर मामले में सुनवाई की है, तो अब चूंकि चुनाव की तिथि घोषित हो गई है, इसलिए इस बात की संभावना बहुत कम है कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर कोई चौंकाने वाला फैसला सुनाएगा, क्योंकि परंपरा ऐसी नहीं रही है. योगेंद्र यादव दे सकते हैं जानकारी प्रशांत भूषण ने दलील दी कि चुनाव आयोग को अपने ही नियमों के तहत प्रतिदिन प्राप्त आपत्तियों का विवरण अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना चाहिए था. उन्होंने कहा, “इसीलिए हम कह रहे हैं कि ये सारी जानकारियां वेबसाइट पर डालनी चाहिए थीं. उनके नियमों में स्पष्ट है कि हर दिन के अंत में प्रत्येक मतदाता से जुड़ी प्राप्त आपत्तियों की जानकारी प्रकाशित की जानी चाहिए. वे कह रहे हैं कि 3.66 लाख नाम आपत्तियों के आधार पर हटाए गए हैं. योगेन्द्र यादव इस पर तथ्यात्मक जानकारी दे सकते हैं इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर हम अंधेरे में रहेंगे तो कोई समाधान नहीं निकल सकता. वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि योगेन्द्र यादव व्यक्तिगत रूप से एक हलफनामा देकर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने भी कहा कि आज भी विस्तृत (disaggregated) डेटा उपलब्ध है, लेकिन हम अंधेरे में रखे गए हैं. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि सब लोग हवा में कह रहे हैं कि उन्हें जानकारी नहीं है. किसी को हलफनामा दाखिल करना चाहिए. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी को तो हलफनामा दाखिल करना होगा कि वह प्रभावित व्यक्ति है. वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऐसा करने के लिए और जानकारी की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि कुल 65 लाख नाम डिलीट किए गए थे, जिनमें से 42 लाख को वापस जोड़ा गया है. शेष नाम अभी भी हटे हुए हैं. जस्टिस कांत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत संख्या पर नहीं, बल्कि कुछ संभावित उदाहरणों की पहचान पर ध्यान दे रही है. उन्होंने कहा, “अगर मुझे पता है कि संशोधित वोटर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है, तो मैं हलफनामा दाखिल कर सकता हूं.” अगर सुप्रीम कोर्ट ने कोई बाधा डाली तो क्या होगा? संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव आयोग को यह विशेषाधिकार देता है कि वह निष्पक्ष ढंग से बिना बाधा के चुनाव कराए. उसकी यह जिम्मेदारी है कि चुनाव कराते वक्त वह संविधान की मूल भावना का पूरा सम्मान करे और किसी भी नागरिक को लिंग, जाति और धर्म के आधार पर मतदान से ना रोके. इसके लिए चुनाव आयोग अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है. मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य भी उसी में शामिल है, अगर चुनाव की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट कोई ऐसा निर्णय देता है, जिससे चुनाव पर असर हो, तो क्या हो सकता है? इसपर जानकारी देते हुए अयोध्यानाथ मिश्र कहते हैं कि पहली बात तो यह कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा कोई निर्णय नहीं करेगा, जिससे एक संवैधानिक संस्था के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन हो, फिर भी अगर यह मान लिया जाए कि इस तरह का कोई फैसला सुप्रीम कोर्ट सुनाता है, तो अब जबकि चुनाव की घोषणा हो चुकी है, क्या हो सकता है? क्या चुनाव को रोका जाएगा? वहां किसी भी हाल में 22 नवंबर से पहले चुनाव संपन्न होने हैं, क्योंकि वर्तमान सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है. अगर चुनाव संपन्न नहीं हुए तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का क्या होगा? इस लिहाज से इस बात की संभावना काफी कम है कि सुप्रीम कोर्ट कोई भी ऐसा निर्णय सुनाएगा, जिससे चुनाव प्रभावित हो. हां, यह जरूर संभव है कि वह वह कोई सकारात्मक सुझाव दे. क्या हैं … Read more

सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की CEC बैठक कल, बिहार चुनाव को लेकर तैयारी तेज

पटना कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के चयन के मकसद से बुधवार को बैठक करेगी। पार्टी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पार्टी यह बैठक उस वक्त करने जा रही है जब उसके सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत अंतिम दौर में है। निर्वाचन आयोग द्वारा सोमवार को बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया। राज्य विधानसभा चुनाव के लिए आगामी छह नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा तथा मतगणना 14 नवंबर होगी।

RJD में हलचल: बिहार चुनाव से पहले नेता का अचानक इस्तीफा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के अगले ही दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, पार्टी के मधुबनी प्रभारी अनिसुर रहमान ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। खबर है कि पार्टी में टिकट बंटवारे को उनकी नाराजगी चल रही थी, जिस वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला लिया। RJD नेतृत्व की टेंशन बढ़ी अनिसुर रहमान ने पार्टी पर उनको किनारे कर देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, मधुबनी सहित कई जिलों में टिकट तय करने में स्थानीय कार्यकर्ताओं और जिला इकाई से कोई राय नहीं ली गई। वहीं मधुबनी प्रभारी के इस्तीफे ने RJD नेतृत्व की टेंशन बढ़ा दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अनिसुर रहमान पिछले कुछ दिनों से पटना में नेतृत्व से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन बात नहीं बन पाई। बता दें कि सोमवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेंस कॉन्फ्रेस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तारीखों की घोषणा की है। राज्य में दो चरणों में चुनाव होंगे। राज्य विधानसभा चुनाव के लिए आगामी छह नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा तथा मतगणना 14 नवंबर होगी।

राजनीतिक विवाद: आदिवासी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन पर लगाए भेदभाव का आरोप

रांची  झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर आदिवासी धर्मस्थलों की सुरक्षा में भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। मरांडी ने कहा कि सरना स्थल, मसना स्थल, हड़गड़ी और जाहरथान जैसे आदिवासी धार्मिक स्थलों पर लगातार अतिक्रमण और हमले हो रहे हैं, परन्तु सरकार कोई प्रभावी सुरक्षा इंतजाम नहीं कर रही है। मरांडी ने सिमडेगा में चर्च की सुरक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा ईसाई धर्मगुरुओं के साथ की जा रही बैठकों को भी विवादित बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों केवल चर्च को विशेष सुरक्षा दी जा रही है और क्या इसका उद्देश्य मतांतरण कराने वाले गिरोहों को संरक्षण देना है। मरांडी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (पूर्व में ट्विटर) में लिखा कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में कई जगह संतालों के ज़ाहिर थान, मांझी थान की जमीनों पर कब्जा एवं अतिक्रमण की घटनाएं हुई, विवाद हुआ और ये सब हो रहा है। आदिवासियों के सरना स्थल, मसना स्थल, हड़गड़ी के ज़मीनों के अतिक्रमण का विरोध और सुरक्षा को लेकर लोगों को आये दिन आंदोलन करना पड़ रहा है। झारखंड के मंदिरों पर हमले हुए हैं। मंदिरों पर कहीं बम फेंके गए, कहीं पथराव हुआ, तो कहीं देवी-देवताओं की प्रतिमाएं खंडित की गईं, लेकिन क्या कभी राज्य सरकार ने इनसबों की सुरक्षा को लेकर उन समाज के धर्मगुरुओं के साथ कोई बैठक की? जवाब है, नहीं!   मरांडी ने कहा कि अब सिमडेगा में चर्च की सुरक्षा के लिए खुद डीसी, एसपी और प्रशासनिक अधिकारी ईसाई धर्मगुरुओं के साथ बैठक करने जा रहे हैं। आखिर चर्च को ही विशेष सुरक्षा की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है? क्या यह उन मतांतरण कराने वाले गिरोहों को सुरक्षा देने की तैयारी है, जो ‘चंगाई सभा' के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों को धर्मांतरण करा रहे हैं? चर्च की साजिश, ऐसे 'चर्च प्रेमी' अफसरों की कारगुजारी एवं चंगाई सभा में रोग भगाने जैसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने के कारण ही सिमडेगा में आज लगभग 51 प्रतिशत आबादी का ईसाई धर्म में मतांतरण हो चुका है। ऐसे में सरकार प्रायोजित इस बैठक के पीछे छिपी मंशा को लेकर लोगों के मन में संदेह है। उन्होंने लिखा है हेमंत सोरेन जेएमएम जी, अगर सुरक्षा व्यवस्था करनी ही है, तो सिर्फ चर्च के लिए क्यों? सरना, मसना, हड़गड़ी स्थल, ज़ाहिर थान, मांझी थान, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों की भी सुरक्षा की चिंता क्यों नहीं? सिमडेगा में होने वाली बैठक का मूल एजेंडा सार्वजनिक किया जाए, या फिर सभी धर्म/समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनसबों के धर्मस्थलों के सुरक्षा पर चर्चा की जाए।  

‘बेटे को बढ़ाएं या बेटी को दें चांस’ – भाजपा ने लालू यादव पर साधा निशाना

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के ऐलान के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने सोमवार 6 अक्टूबर को घोषणा की कि बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में 6 नवंबर और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधा। त्रिवेदी ने कहा कि लालू यादव 'अपने बेटों और बेटियों के बीच दुविधा में हैं' और परिवार में 'संकट' की स्थिति है। उन्होंने महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में तेजस्वी यादव की दावेदारी पर भी सवाल उठाया। त्रिवेदी ने कहा, 'वे खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पेश कर रहे हैं, लेकिन उनके गठबंधन के लोग ऐसा नहीं कह रहे। उन्होंने कई बार राहुल गांधी को प्रधानमंत्री कहा, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें (सीएम उम्मीदवार) नहीं कहा। अब स्थिति परिवार के भीतर भी अलग है।' त्रिवेदी ने बिहार में एनडीए की जीत का दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा, 'बिहार और पूरे देश की जनता देख रही है कि केंद्र में पीएम मोदी और राज्य में सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में किस तरह सकारात्मक दिशा में बदलाव आया है।' भाजपा नेता ने कहा कि इसलिए हमें विश्वास है कि भाजपा-एनडीए के पक्ष में मजबूत और प्रभावी जनादेश मिलेगा। चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण में 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान होगा। पटना सहित केंद्रीय और उत्तरी बिहार के जिले पहले चरण में मतदान करेंगे, जबकि सीमांचल और नेपाल सीमा से लगे जिले दूसरे चरण में मतदान करेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार बिहार में 7.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 14 लाख पहली बार वोट डालेंगे। चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी। राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो, एनडीए की अगुवाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे हैं।

सदर अस्पताल रांची में इतिहास: पहली बार बाएं तरफ की गॉल ब्लैडर स्टोन का सफल ऑपरेशन

रांची झारखंड के रांची के सदर अस्पताल में एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में सफलता हासिल की गई है। पहली बार बाएं तरफ गॉल ब्लैडर स्टोन की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई, जो एक कंप्लीट सूट्स इनवर्सस केस था। इस दुर्लभ बीमारी में शरीर के अंग जैसे हृदय, पित्ताशय, आदि, अपने सामान्य स्थान की बजाय उल्टे हिस्से में होते हैं। यह स्थिति लगभग 10,000 से 20,000 मरीजों में एक बार ही देखने को मिलती है। इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व सदर अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अजीत कुमार ने किया। ऑपरेशन के दौरान डॉ. अजीत और उनकी टीम ने बेहद सावधानी से काम किया क्योंकि इस तरह के मरीजों का ऑपरेशन करना बहुत मुश्किल होता है। सर्जन को उल्टी तरफ खड़े होकर ऑपरेशन करना पड़ता है, जो सामान्य शल्य चिकित्सा के विपरीत होता है। मरीज बी. बाड़ा, जो बेड़ो थाना के ईंटा चिंद्ररी की रहने वाली हैं और फिलहाल मोराबादी में रहती हैं, पिछले दो-तीन महीनों से पेट दर्द से परेशान थीं। जांच में पता चला कि उन्हें गंभीर बीमारी एक्यूट पेनक्रिएटाइटिस है और उनके पित्ताशय में कई पत्थर हैं जो सामान्य के विपरीत बाएं तरफ स्थित हैं। इको और सीटी स्कैन से यह भी पता चला कि उनका हृदय दाहिनी बजाय बाएँ तरफ है, यह पूरी स्थिति कंप्लीट सूट्स इनवर्सस दर्शाती है। मरीज के पति जोसेफ उरांव जो खेती-किसानी करते हैं, ने अस्पताल प्रशासन और डॉ. अजीत की टीम को धन्यवाद दिया। उनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया। इस ऑपरेशन में एडवांस्ड लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजीत कुमार, एनेस्थेटिस्ट डॉ. वसुधा गुप्ता, डॉ. विकास बल्लभ, सिस्टर स्नेहलता, और ओटी स्टाफ सहित संदीप, संतोष, सृष्टि, सुरेश, अमन, विरंजन, कल्पना व नंदिनी की टीम शामिल थी।  

बागमती के बाद अब बूढ़ी गंडक: मुजफ्फरपुर में मंडराया बाढ़ का खतरा

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी के बाद अब बूढ़ी गंडक नदी भी उफान पर आ गई है। बागमती नदी जहां पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और तटवर्ती इलाकों में कटाव मचा रही है, वहीं अब शहर के बीच से गुजरने वाली बूढ़ी गंडक के जलस्तर में भी तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। नेपाल और तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण जिले की नदियों में पानी बढ़ गया है, जिससे बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। बताया जा रहा है कि बागमती नदी ने औराई, कटरा और गायघाट में रौद्र रूप धारण कर लिया है, जबकि अब बूढ़ी गंडक भी उफान पर है और आसपास के इलाकों में पानी फैलने लगा है। स्थिति को देखते हुए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों में दहशत का माहौल है। विशेषकर मुजफ्फरपुर शहर क्षेत्र के शेखपुर ढाब, अखाड़ा घाट, नाजीरपुर, लकड़ी ढाई, चंदवारा, आश्रम घाट और सिकंदरपुर जैसे इलाकों में खतरा बढ़ गया है, क्योंकि ये क्षेत्र बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बसे हैं। अगर जलस्तर में और वृद्धि हुई, तो शहर के निचले इलाकों में पानी घुसने की संभावना है। जिला प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट मोड अपनाया है। संबंधित विभागों को तटबंधों की निगरानी और मरम्मत का निर्देश दिया गया है। जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को लगातार मॉनिटरिंग के आदेश दिए गए हैं। इधर, बागमती नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जिले के तीन प्रखंडों के कई गांवों में नदी का पानी घुस चुका है। कई स्कूलों में जलभराव होने से पठन-पाठन कार्य बाधित है, जबकि सड़कों पर पानी बहने से आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने संबंधित प्रखंडों के अंचल अधिकारियों और जल संसाधन विभाग को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

हजारीबाग में भव्य पासिंग आउट परेड, BSF के 345 नए जवान हुए तैयार

हजारीबाग सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में शामिल हुए कुल 345 जवानों ने सोमवार को झारखंड के हजारीबाग जिले में आयोजित पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। परेड का आयोजन मेरू स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र एवं स्कूल के रानी झांसी परेड ग्राउंड में किया गया। अधिकारी ने बताया कि ये 345 जवान सहायक प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) के सातवें और आठवें बैच से हैं। उन्होंने 44 सप्ताह का प्रशिक्षण पूर्ण किया और राष्ट्र की सेवा की शपथ ली। बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र एवं स्कूल के निरीक्षक महानिरीक्षक (आईजी) धीरेंद्र संभाजी कुटे ने परेड की सलामी ली और जवानों को उत्कृष्ट परेड प्रस्तुति के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि जवानों ने अनुशासन और देश की सीमाओं की रक्षा के प्रति समर्पण का शानदार प्रदर्शन किया है।  

JDU में चुनावी तैयारियों का संकेत, नीतीश कुमार ने की वरिष्ठ नेताओं से चर्चा

पटना बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच जनता दल (यूनाइटेड) के बड़े नेताओं की एक अहम बैठक पटना में हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू नेताओं की यह बैठक बुलाई है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा भी इस बैठक में शामिल हैं। एनडीए में अभी सीटों के बंटवारे का ऐलान नहीं हुआ है। सीट बंटवारे के ऐलान से पहले जदयू नेताओं की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। चुनाव आयोग ने बिहार में दो चरणों 6 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराने की बात कही है। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेताओं के साथ सीट बंटवारे के फॉर्मूले को लेकर चर्चा कर सकते हैं। जेडीयू की इस बैठक में संजय झा भी शामिल हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस बैठक में संगठनात्मक ढांचे और चुनाव प्रचार की रणनीति को लेकर भी नेताओं के बीच बातचीत होगी। एनडीए में शामिल घटक दलों के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा? अभी इसपर कुछ भी स्पष्ट नहीं है लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि जेडीयू इस बार 100 से 105 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बीजेपी भी इतनी ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। बता दें कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 115 तथा भारतीय जनता पार्टी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उम्मीदवारों के चयन पर भी चर्चा संभव जदयू की इस बैठक में पार्टी नेता बिहार चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के नाम पर भी गहन विचार-विमर्श कर सकते हैं। चर्चा है कि इस बैठक में उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लग सकती है। आपको बता दें कि हाल ही में जनसुराज पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने कुछ पार्टी प्रत्याशियों ने नामों का ऐलान किया था। जनसुराज की तरफ से कहा गया है कि 9 अक्टूबर को पार्टी उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करेगी। प्रशांत किशोर ने खुद कहा है कि इस लिस्ट में उनका भी नाम होगा। हालांकि, वो किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे अभी सामने नहीं आया है। यह भी बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा में बाद NDA में सीट शेयरिंग को लेकर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने हाल ही में दावा किया था कि सब कुछ फाइनल हो गया है, जल्द ही घोषणा की जाएगी।

यात्रियों के लिए खुशखबरी: बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस के स्टॉपेज और रूट में बड़ा बदलाव

पटना बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22843/22844) का विस्तार कर दिया गया है। अब यह ट्रेन बक्सर स्टेशन तक जाएगी। 10 अक्टूबर से बिलासपुर से रवाना होने वाली 22843 बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस बक्सर तक जाएगी। वहीं, 11 अक्टूबर से पटना से रवाना होने वाली 22844 पटना-बिलासपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस बक्सर रेलवे स्टेशन से चलेगी। इन स्टेशनों पर होगा स्टॉपेज पटना-बक्सर के बीच छह स्टेशनों के यात्रियों को भी इस ट्रेन का लाभ मिलेगा। रेलवे ने दानापुर, बिहटा, आरा, बिहिया, रघुनाथपुर और डुमरांव स्टेशनों पर ट्रेन को वाणिज्यक ठहराव देने का निर्णय लिया है। रेलवे ने इन स्टेशनों पर ट्रेन के आगमन और प्रस्थान का समय भी जारी कर दिया है। इसके तहत बिलासपुर से यह ट्रेन 20:30 बजे छूटेगी। पटना 13:48 बजे, दानापुर 14:11 बजे, बिहटा 14:29 बजे, आरा 14:50 बजे, बिहिया 15:09 बजे, रघुनाथपुर 15:23 बजे, डुमरांव 15:38 बजे पहुंचेगी। इसके बाद बक्सर स्टेशन पर यह ट्रेन 16:10 बजे पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन बक्सर से 21:35 बजे रवाना होगी और पटना रात 12:03 बजे पहुंचेगी।