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छिंदवाड़ा जिले में स्वच्छता की अनूठी पहल

छिंदवाड़ा   छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई मित्र का अभाव होने से ग्राम पंचायतो मे संस्थागत शौचालयों में साफ सफाई की कमी आमतौर पर रहती है एवं परम्परागत कार्यशैली के अनुसार साफ सफाई प्रभावी ढंग से नहीं हो पाती है, जिससे संस्थागत व व्यक्तिगत शोचालयो की उपयोगिता प्रभावित होती है शौचालयों के उपयोग न होने की वजह से टूट फूट व रख रखाव भी प्रभावित होता है अतः उक्त कमियों को दूर करने के लिए जिला प्रशाशन युद्ध गति से प्रयास रत है. स्वच्छता साथी Wash On Wheels सेवा का उद्देश्य – ग्रामीण क्षेत्र के संस्थागत एवं व्यक्तिगत शौचालयों को स्वच्छ एवं उपयोगी बनाना स्कूल, आंगनवाड़ी, पंचायत, स्वास्थ्य केन्द्र, छात्रावास आदि संस्थाओ के शौचालयो को एवं व्यकिगत शौचालयो के रख रखाव एवं उपयोग को बढावा देना ताकि स्वच्छ भारत मिशन फेज 2 में व्यकिगत शौचालयो की साफ सफाई को बढावा मिल सके ओडीएफ एंव ओडीएफ प्लस की निरंतरता बनाये रखने मे सहायता मिल सके स्वच्छता साथी Wash On Wheels सेवा की जिले की अवधारणा – स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत स्वच्छता साथी Wash On Wheels सेवा कार्यक्रम को शुरु करने हेतु निम्नानुसार कार्ययोजना बनायी गयी जिसके तहत 1 – इसमें सर्वप्रथम जिला पंचायत की सभी 11 जनपदों में क्लस्टर का चयन किया गया। 2- चयनित क्लस्टर हेतु स्वच्छता साथी का चिन्हांकन किया गया, तथा उन्हें प्रशिक्षण उपरांत आधुनिक उपकरण एवं व्यक्तिगत सुरक्षा किट जनपद स्तर पर उपलब्ध स्वच्छ भारत मिशन के आई ई सी मद से, 15 वे वित्त टाइड फण्ड एवं स्यवं के द्वारा उपलब्ध कराई गई है 3– जिसमे ईलेक्ट्रिक एवं बैटरी ऑपरेटेड वाशर मशीन के साथ, व्यक्तिगत सुरक्षा किट (हेलमेट, चश्मा, मास्क, ग्लब्स, पीपीई किट, गमबूट) स्वच्छता किट (टॉयलेट क्लिनर, फिलाईल, ब्रश, झाडू, वाईपर, मग, बाल्टी, आदि सुविधानुसार शामिल है 4- उक्त कार्यक्रम में स्वच्छता साथियों द्वारा वाहन के माध्यम से क्लस्टर पंचायतो में जाकर सभी संस्थागत शोचालयो में जिसमे स्कूल, आंगनवाडी, छात्रावास, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वच्छता परिसरों में बैटरी संचालित वॉशर मशीन द्वारा सफाई की जाएगी. प्रत्येक माह में न्यूनतम 04 बार उक्त संस्थाओ में मांग के आधार पर स्वच्छता साथी द्वारा जाकर निर्धारित शुल्क पर सफाई की जाएगी 5-उपरोक्त कार्यक्रम को विधि संगत बनाने के लिए जिले स्तर पर मॉडल अनुबंध पत्रक तैयार कराया गया जिसके उपरान्त जिले की सभी जनपद पंचायतो में उक्त अनुबंध प्रकिया की गई हैं जिसमे स्वच्छता साथी, सरपंच, संस्था प्रमुख शामिल हैं। 6– स्वच्छता साथी Wash OnWheels सेवा कार्यक्रम में सुविधा शुल्क जिसमे क्लस्टर मुख्यालय से 05 किमी0 तक 200 रू0 प्रति संस्थागत शौचालय यूनिट सफाई शुल्क निर्धारित की गई है.

MP में निगम, मंडल और आयोग के विभिन्न पदों पर नियुक्तियों का नया नियम लागू

भोपाल मध्‍य प्रदेश में जनवरी-फरवरी, 2024 के बाद से रुकी हुईं राजनीतिक नियुक्तियां यानी निगम, मंडल और आयोग के विभिन्न पदों पर नियुक्तियां अब फिर प्रारंभ होने जा रही हैं। क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को देखते हुए ये नियुक्तियां की जाएंगी। इसे लेकर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा संगठन की तैयारी अंतिम दौर में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री दो बार केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा भी कर चुके हैं। नियुक्तियां एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से होंगी। वर्तमान में निगम, मंडल, आयोग के अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री हैं या फिर वरिष्ठ अधिकारी।     प्रदेश में वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 से अधिक नियुक्तियां निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में की थीं।     चुनावी वर्ष यानी 2023 में फिर नियुक्तियां की गईं। कुछ नए प्राधिकरण बनाए गए।     मोहन सरकार ने सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद यानी जनवरी-फरवरी, 2024 में निगम-मंडलों के अध्यक्षों को हटा दिया और संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को पदेन अध्यक्ष बना दिया।     राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर दबाव भी बनता रहा लेकिन कोई निर्णय न होने की स्थिति में सितंबर 2024 में अधिकारियों के स्थान पर विभागीय मंत्रियों को जिम्मेदारी दे दी गई।     तभी से नियुक्तियों को लेकर तब-जब अटकलें लगाई जाती रहीं।     दरअसल, ये नियुक्तियां संगठन के नेताओं को उपकृत करने का माध्यम मानी जाती हैं। टिकट आदि से वंचित रहे नेताओं को इन नियुक्तियों के बहाने साधा जाता है।     नियुक्तियां न होने से संगठन में असंतोष भी रहता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति के साथ ही एक बार फिर निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्ति की कवायद तेज हो गई है।     मुख्यमंत्री ने गुरुवार शाम को फिर नई दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से भेंट की। माना जा रहा है कि पिछले दिनों हुए उनके दिल्ली दौरे में कुछ नामों को लेकर सहमति भी बन चुकी है।     चूंकि, सरकार एक साथ नियुक्ति के पक्ष में नहीं है इसलिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से सूचियां निकाली जाएंगी।     कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्हें लेकर यह तय होना बाकी है कि इनकी आगामी भूमिका संगठन में ही निर्धारित की जाए या फिर निगम, मंडल, प्राधिकरण आदि में काम करने का अवसर दिया जाए।

सागर में नहाने गए चार युवक लापता, दो के शव मिले, दो की खोज में जुटी टीम

सागर  रिछावर गांव के पास बेबस नदी में नहाते वक्त डूबे चार युवकों में से पुलिस ने दो के शवों को बरामद कर लिया है। यह युवक रक्षाबंधन के एक दिन पहले बेबस नदी में नहाने के लिए गए थे। नहाते वक्त एक दोस्त के डूबने पर एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में चार युवक बह गए थे। शुक्रवार शाम से ही इन युवकों की तलाश के लिए रेस्क्यू चलाया जा रहा था।  देर रात तक रेस्क्यू अभियान चला लेकिन ज्यादा अंधेरा होने पर यह काम बंद कर दिया गया। शनिवार को सुबह फिर रेस्क्यू चला तो दो युवकों के शव मिले। चार युवक सागर व एक रिछावर का रहने वाला पुलिस के मुताबिक सनी पिता रमेश अहिरवार, राज पिता साहब अहिरवार, सुमित पिता फूलचंद अहिरवार, अभिषेक पिता सुनील अहिरवार यह युवक सागर के खुशीपुरा निवासी थे। यह अपने रिछावर गांव निवासी निखिल पिता महेंद्र अहिरवार के यहां बेबस नदी के किनारे पिकनिक मनाने गए थे। जहां नहाते समय सनी अहिरवार, राज अहिरवार, सुमित अहिरवार और निखिल अहिरवार गहरे पानी में चले गए। तीन युवक खुशीपुरा और एक रिछावर गांव का सानौधा थाना प्रभारी भरत सिंह ठाकुर ने बताया कि नदी में डूबे चार युवकों में तीन युवक खुशीपुरा और एक रिछावर गांव का रहने वाला है। सभी की उम्र 22 से 25 साल की है। भरत सिंह ने बताया कि सुमित पिता फूलचंद अरिहवार निवासी खुशीपुरा सागर और राज अहिरवार पिता साहब अहिरवार का शव बरामद किया है। शेष की तलाश जारी है। वहीं प्रत्यक्षदर्शी और पांचवें युवक अभिषेक अहिरवार ने पुलिस को बताया कि वह अपने चार दोस्तों सनी, राज, सुमित और निखिल के साथ नदी में नहा रहा था। इसी दौरान अचानक एक युवक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे बचाने के लिए दूसरा कूदा, फिर तीसरा और फिर चौथा भी, लेकिन किसी को तैरना नहीं आता था। देखते ही देखते चारों डूब गए। अभिषेक ने शोर मचाकर आसपास मौजूद ग्रामीणों को बुलाया, लेकिन जब तक लोग पहुंचे, तब तक चारों पानी में समा चुके थे।  

मध्य प्रदेश में डॉग बाइट्स रिपोर्ट: रतलाम टॉप पर, भोपाल सबसे नीचे

भोपाल  नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) द्वारा राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश के छह बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रतलाम में डाग बाइट्स के मामलों का सर्वे किया गया। यह सर्वे वर्ष 2024 और जनवरी से जून 2025 की अवधि को लेकर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, छह शहरों में राजधानी भोपाल में डॉग बाइट्स के सबसे कम मामले दर्ज हुए, जबकि रतलाम इस मामले में पहले स्थान पर रहा। वहीं उज्जैन दूसरे, इंदौर तीसरे, जबलपुर चौथे और ग्वालियर पांचवें स्थान पर रहा। वर्ष 2024 में भोपाल में 19 हजार 285 डॉग बाइट्स के मामले सामने आए, जो औसत 0.8 प्रतिशत रहा। वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में यह औसत घटकर मात्र 0.07 प्रतिशत रह गया। आंकड़े बताते है शहर में डाग बाइट्स के मामलों में कमी आई है। हर साल 22 हजार आवारा श्वानों की कर रहे नसबंदी रैबीज मुक्त शहर-2030 कार्यक्रम के तहत भोपाल नगर निगम ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर भारत सरकार को भेजी है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में यह योजना भेजने वाला भोपाल ही एकमात्र शहर है। योजना के क्रियान्वयन के तहत नगर निगम शहर में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर संचालित कर रहा है, जहां हर साल लगभग 22 हजार आवारा डॉग्स की नसबंदी की जा रही है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक 10 वार्ड पर एक नसबंदी केंद्र होना चाहिए, लेकिन भोपाल में मानक से कम केंद्रों के बावजूद अधिक से अधिक आवारा डॉग की नसबंदी की जा रही है। उपलब्ध संसाधनों की तुलना में नसबंदी आपरेशन की संख्या काफी अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप डॉग बाइट्स के मामलों में कमी दर्ज की गई है।  

रक्षा बंधन से पहले हवाई सफर महंगा, भोपाल फ्लाइट का किराया दोगुना

भोपाल  भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने घर आ रहे हैं। एयरलाइंस कंपनियां इस मौके का भरपूर लाभ उठा रही हैं। रक्षाबंधन पर विमान से भोपाल आना महंगा हो गया है। स्पाट फेयर दो गुना तक हो गया है। 12 एवं 13 अगस्त के बाद विभिन्न शहरों से भोपाल आने का किराया कम है। माना जा रहा है कि 10 अगस्त के बाद भोपाल से जाने वाली उड़ानों में भी स्पॉट फेयर बढ़ेगा। भोपाल से बड़ी संख्या में युवा बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद एवं दिल्ली के आसपास के इलाकों की विभिन्न कंपनियों में काम करते हैं। छात्र वर्ग भी इन शहरों तक आता-जाते हैं। इन्हीं शहरों से भोपाल लौटने का किराया सामान्य से अधिक लिया जा रहा है। स्पॉट फेयर अधिक होने के कारण अंतिम समय में अपने घर आने का निर्णय लेने वालों को महंगा किराया देना मजबूरी है। माना जा रहा है कि 10 अगस्त के बाद भोपाल से वापस जाने वाली उड़ानों में स्पाट फेयर बढ़ेगा। हालांकि अब भी 10 से 13 अगस्त के बीच भोपाल से वापस जाने वाली उड़ानों का किराया सामान्य से अधिक है। पुणे जैसी लेट नाइट उड़ान में भी किराया 12 हजार रुपये से अधिक लिया जा रहा है। पहली बार दिल्ली से आना महंगा दिल्ली जैसे रूट पर चार उड़ानें होने के बावजूद कम किराये में सीट बुक नहीं हो पा रही है। आमतौर पर दिल्ली आने-जाने वाली उड़ानों में किराया सबसे कम होता है। यह पहला मौका है जब दिल्ली रूट पर किराया अधिक है। दिल्ली रूट पर इंडिगो की एक उड़ान कम हो गई है। इसका असर भी किराये में नजर आ रहा है। विंटर शेड्यूल में भोपाल से दिल्ली, बेंगलुरू एवं पुणे तक अतिरिक्त उड़ानें प्रारंभ होंगी। ऐसे में किराया कम होने की संभावना है।  

13 अगस्त से नया मौसम तंत्र, इंदौर-उज्जैन में धूप और पूर्वी-उत्तरी जिलों में बारिश का अनुमान

भोपाल मध्यप्रदेश में रक्षाबंधन के दिन मौसम के दो रंग देखने को मिलेंगे। इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 में से 13 जिलों में तेज धूप खिलेगी। वहीं, पूर्वी और उत्तरी हिस्से के 9 जिलों में तेज बारिश हो सकती है। भोपाल, ग्वालियर-जबलपुर में भी हल्के बादल छाए रह सकते है।  मौसम विभाग ने शनिवार को श्योपुर, मुरैना, पन्ना, कटनी, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट में तेज बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर, इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, धार, बड़वानी, अलीराजपुर और झाबुआ में मौसम साफ रहेगा। बाकी जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का यलो अलर्ट है। मंडला-सीधी में सवा इंच से ज्यादा पानी गिरा प्रदेश में शुक्रवार को मौसम ने फिर करवट बदली और हल्की बारिश का दौर रहा। मंडला और सीधी में सवा इंच बारिश हुई। छतरपुर के नौगांव में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। भोपाल में बादल छाए रहे। वहीं, बैतूल, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, रीवा, सतना, उमरिया, डिंडौरी, मऊगंज में हल्की बारिश हुई। एमपी में अब तक 28.8 इंच बारिश मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 28.8 इंच बारिश हो चुकी है, जो कुल बारिश का 78 प्रतिशत है। जून-जुलाई में स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से अब तक 34 प्रतिशत बारिश ज्यादा हो चुकी है। इसमें भी पूर्वी हिस्सा जैसे- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग ठीक है। इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। इंदौर संभाग के 8 में से 5 जिले ऐसे हैं, जहां 13 इंच से कम पानी गिरा है। सिर्फ अलीराजपुर और झाबुआ में ही 20 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। दूसरी ओर, ग्वालियर में सबसे ज्यादा 35 इंच बारिश हो चुकी है। यहां कुल बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। जबलपुर और भोपाल की तस्वीर भी बेहतर है। 13 अगस्त से नया सिस्टम सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, शुक्रवार को देश में दो टर्फ की एक्टिविटी रही, जो मध्यप्रदेश से काफी दूर है। शनिवार को कुछ जिलों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, 13 अगस्त के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) के एक्टिव होने का अनुमान है। इससे प्रदेश में बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है। दो महीने में गिरा 28 इंच, अगस्त में न के बराबर मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 31 जुलाई तक प्रदेश में औसत 28 इंच बारिश हो गई, लेकिन 1 से 7 अगस्त के बीच सिर्फ 0.8 इंच पानी ही गिरा। दूसरे सप्ताह में ही तेज बारिश के आसार वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलता रहेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 38% और पश्चिमी हिस्से यानी, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 39% बारिश अधिक हुई है। जुलाई में बने थे बाढ़ के हालात जुलाई में प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। आखिरी दिनों में रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया था। खेत-मंदिर और पुल डूब गए थे।वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए थे।

MP हाईकोर्ट की टिप्पणी: महिला बनी आदर्श पत्नी, लंबे अलगाव के बावजूद निभाया कर्तव्य

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ एक पति की अपील सुन रही थी, जिसमें उसने निचली अदालत के तलाक से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी थी. पति-पत्नी की शादी गांव पिपलाडा, इंदौर में हुई थी और 2002 में बेटे का जन्म हुआ था. पति का आरोप था कि पत्नी उसे पसंद नहीं करती, उस पर शराब पीने और अन्य महिलाओं से संबंध होने के आरोप लगाती, गर्भावस्था में खुश नहीं थी और बच्चे के जन्म के बाद मायके चली गई. पत्नी ने इन आरोपों को झूठा बताया और कहा कि पति का एक महिला सहकर्मी से प्रेम संबंध था, जबकि वह हमेशा वैवाहिक दायित्व निभाने के लिए तैयार रही. पति ने पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप कोर्ट ने पाया कि पति के दूर रहने के बाद भी पत्नी ससुराल में सास-ससुर और देवर-ननद के साथ संयुक्त परिवार में रही. उसने कभी घर नहीं छोड़ा, न ही पति या उसके परिवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज किया. उसने अपने विवाह के प्रतीक मंगलसूत्र और सिंदूर नहीं त्यागे और अपने कर्तव्यों को निभाती रही. पत्नी ने विपरीत परिस्थितियों में दिखाया धैर्य कोर्ट ने कहा कि यह पत्नी आदर्श भारतीय नारी के गुणों का प्रतीक है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और संस्कार बनाए रखती है. कोर्ट ने तलाक की याचिका खारिज करते हुए पति को अपने उपेक्षित और अनादरपूर्ण व्यवहार से लाभ लेने से रोका.

राहुल गांधी पर सीएम यादव का हमला, कहा– बयानबाजी में दिखी अर्बन नक्सल मानसिकता

भोपाल  कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले बयान पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की इस सार्वजनिक बयानबाजी से उनकी ‘अर्बन नक्सलाइट’ मानसिकता उजागर हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राहुल गांधी के अशोभनीय बयानों से देश में नेता प्रतिपक्ष की गरिमा धूमिल हो रही है। यह ठीक नहीं है और उन्हें इस मामले में तत्काल माफी मांगनी चाहिए।  डॉ. यादव ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग भारत की सबसे निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था है, जिसने लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में इस पर सवाल उठाना देश की संवैधानिक संस्थाओं का अपमान है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ता है।  सीएम यादव ने कांग्रेस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने बयान पर माफी मांगने को कहा। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह 2023 विधानसभा चुनाव में वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। राहुल के बयान पर सीएम मोहन का पलटवार मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों की कड़ी निंदा की है। सीएम यादव ने कहा कि राहुल गांधी का इस तरह का बयान उनकी अर्बन नक्सल (‘Urban Naxalite’) मानसिकता को दर्शाता है। इस बयान में उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ तीखी आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने अपनी बयानबाजी से खुद की गरिमा को धूमिल किया है और यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। राहुल का बयान लोकतांत्रित प्रक्रिया के खिलाफ राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में वोट चोरी का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि 2023 में उन्हें सिर्फ 65 सीटें मिलना ‘इम्पॉसिबल’ था, क्योंकि उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देखा था कि एंटी इन्कंबेंसी का असर बहुत ज्यादा था। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने 2018 में चुनाव जीते थे, लेकिन उनकी सरकार को ‘चोरी’ कर दिया गया। इस बयान के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राहुल गांधी का यह बयान उनकी मानसिकता को उजागर करता है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। भोपाल आए थे सिंधिया, चर्चा में कहा भोपाल प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में सिंधिया ने कहा 'जिन लोगों ने भारत को मृत रूप में देखा है, चाहे वो भारत की अर्थव्यवस्था हो, न्यायपालिका हो, सेना का सम्मान हो या फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता वे बार-बार इन संस्थाओं को अपमानित करते आए हैं। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता के आधार पर कार्य करती है। यह संस्था हर राज्य और देशभर में फेयर और फ्री इलेक्शन सुनिश्चित करती है।' सेना और न्यायपालिका पर भी किया कटाक्ष सिंधिया ने कहा, 'कांग्रेस का रवैया हमेशा से ही संस्थाओं के प्रति अविश्वास का रहा है। अगर सेना कोई वीरता का कार्य करती है तो वे सबूत मांगते हैं। न्यायपालिका पर आरोप लगाते हैं, प्रधानमंत्री को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं। अब चुनाव आयोग को भी बदनाम करने में लगे हैं। यह जनता सब देख रही है और उचित समय पर जवाब देगी।' जीतू पटवारी बोले- बीजेपी नेताओं में बौखलाहट मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा फर्जी वोटिंग को लेकर किए गए सनसनीखेज खुलासे के बाद बीजेपी और उसके नेताओं की बौखलाहट अब उनके बयानों में साफ झलक रही है। पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से बताया कि किस तरह चुनावी प्रक्रिया में सुनियोजित तरीके से धांधली कर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने अलोकतांत्रिक और पक्षपातपूर्ण रवैये का गंभीर आरोप लगाया है। यह सिर्फ कांग्रेस या विपक्ष का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के हर उस नागरिक का मुद्दा है जो अपने वोट की ताकत और लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास रखता है। फर्जी वोटों से मिली बीजेपी को जीत पटवारी ने बताया कि राहुल गांधी के प्रस्तुत किए गए तथ्यों और सबूतों से यह स्पष्ट हुआ है कि कर्नाटक की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर एक लाख से अधिक फर्जी मतदाता जोड़े गए, जिनकी वजह से बीजेपी को जीत मिली। हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को पूरे प्रदेश में कांग्रेस से केवल 22,000 वोट अधिक मिले, जबकि एक सीट पर ही 1 लाख फर्जी वोट जोड़े जाने का खुलासा हुआ। महाराष्ट्र में केवल पांच महीनों के भीतर एक करोड़ से अधिक मतदाता बढ़ा दिए गए, जो राज्य की वयस्क आबादी से भी अधिक थे। मध्य प्रदेश में पोस्टल बैलेट में हार के बावजूद ईवीएम से बीजेपी की जीत दर्ज हुई। बीजेपी को जनता के सामने बेनकाब होने का डर पटवारी ने कहा कि इन खुलासों से यह साफ होता है कि संवैधानिक और चुनावी संस्थाओं में बीजेपी का गहरा हस्तक्षेप है। बीजेपी के नेता मुद्दे पर जवाब देने के बजाय बेतुके बयान देकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके हालिया बयान इस बात का प्रमाण हैं कि सच ने उन्हें असहज कर दिया है। कमलनाथ का वीडियो पोस्ट पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राहुल गांधी के बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म X (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में राहुल गांधी मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में वोट चोरी के आरोप लगा रहे थे। राहुल गांधी ने कहा कि हमारी सरकार चोरी हुई थी। 2023 में चुनाव में हमे 65 सीटें मिलती हैं। यह असंभव था, यह हो ही नहीं सकता। कमलनाथ ने इस वीडियो के माध्यम से राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन किया और इस मुद्दे को और अधिक सार्वजनिक किया।

इंदौर में आयोजित पाठशाला में मोहन भागवत पढ़ाएंगे परिवर्तन के पांच चरण

 इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिनी प्रवास पर नौ अगस्त की शाम सात बजे इंदौर आएंगे। अगले दिन 10 अगस्त को दो कार्यक्रमों में भाग लेंगे। अगले दिन 10 अगस्त को सुबह नौ बजे से प्रांत की सामाजिक सद्भाव बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद शाम पांच बजे कैंसर केयर सेंटर का शुभारंभ करेंगे। डॉ. भागवत स्व जागरण एवं राष्ट्र निर्माण के लिए पंच परिवर्तन की पाठशाला में पांच सोपान पढ़ाएंगे। इंदौर में पहली बार हो रही प्रांत स्तर की इस सद्भाव बैठक में तीन सत्र होंगे। इसमें इंदौर-उज्जैन के 15 जिलों के 180 जाति-समाज के 300 प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें स्वदेशी जीवन शैली, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, नागरिक अनुशासन एवं समरसता पर संवाद होगा। इस मौके पर इन विषयों पर किए गए कार्य और इनके परिणाम के साथ आगामी कार्ययोजना भी बनेगी। तहसील स्तर पर आयोजित होती हैं बैठकें पंच परिवर्तन की शुरुआत श्री गुरुजी जन्म शताब्दी वर्ष 2006 से संपूर्ण देश में स्वयंसेवक व जाति समाज प्रमुखों ने आरंभ की थी। जिला व तहसील स्तर पर इसके लिए सतत बैठकें आयोजित की जाती हैं। इसके माध्यम से देश व समाज परिवर्तन के विभिन्न विषयों पर सभी समाज एक जाजम पर बैठकर अपने अनुभव साझा करते हैं। सब साथ मिलकर राष्ट्रीय सामाजिक व स्थानीय विषयों में क्या कर सकते हैं तथा एक-दूसरे की किस तरह सहायता कर सकते हैं, इस पर चर्चा करते हैं। मालवा प्रांत के सामाजिक सद्भाव के संयोजक दिनेश गुप्ता बताते हैं कि सद्भाव बैठक 10 अगस्त को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगी। इसके लिए सामाजिक सद्भाव के कार्यकर्ताओं द्वारा अपने-अपने जिला क्षेत्रों में प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर के समाज प्रमुखों से व्यक्तिगत संपर्क कर आमंत्रित किया गया है।  

सैफ अली खान पैतृक संपत्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई अस्थायी रोक

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के के पूर्वजों से जुड़े संपत्ति विवाद में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान की शाही संपत्ति से जुड़े दशकों पुराने संपत्ति विवाद को नए सिरे से सुनवाई के लिए निचली अदालत को वापस भेज दिया था। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया‌‌। बेंच ने नवाब हमीदुल्ला खान के बड़े भाई के वंशजों उमर फारुक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया, जो हाईकोर्ट के 30 जून के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें 14 फरवरी, 2000 के निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया गया था, जिसमें नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान) और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों, अभिनेता सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के संपत्ति पर विशेष अधिकार बरकरार रखे गए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत का फैसला 1997 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर आधारित था, जिसे बाद में 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। हालांकि, 2019 के उदाहरण को लागू करने और मामले का निर्णायक रूप से फैसला करने के बजाय, हाईकोर्ट ने मामले को पुनर्मूल्यांकन के लिए वापस भेज दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत उल्लिखित प्रक्रियात्मक मानदंडों के विपरीत है। यह मामला 1999 में नवाब के विस्तारित परिवार के सदस्यों द्वारा दायर दीवानी मुकदमों से जुड़ा है, जिनमें दिवंगत बेगम सुरैया राशिद और उनके बच्चे, महाबानो (अब दिवंगत), नीलोफर, नादिर और यावर के साथ ही नवाब की एक और बेटी नवाबजादी कमर ताज रबिया सुल्तान शामिल हैं। वादियों ने नवाब की निजी संपत्ति के बंटवारे, कब्जे और न्यायसंगत निपटान की मांग की थी। निचली अदालत ने साजिदा सुल्तान के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन नहीं है और संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें हस्तांतरित की गई थी। सन 1960 में नवाब की मृत्यु के बाद, भारत सरकार ने 1962 का एक प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 366(22) के तहत साजिदा सुल्तान को शासक और निजी संपत्ति की वास्तविक उत्तराधिकारी दोनों के रूप में मान्यता दी गई। हालांकि, वादी पक्ष ने तर्क दिया कि नवाब की निजी संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत सभी कानूनी उत्तराधिकारियों में बांटी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 1962 के प्रमाण पत्र पर औपचारिक रूप से कोई विवाद नहीं था, लेकिन दावा किया कि यह न्यायसंगत विभाजन को नहीं रोकता। अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार सहित प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि उत्तराधिकार में ज्येष्ठाधिकार के नियम का पालन किया गया और साजिदा सुल्तान को शाही गद्दी और निजी संपत्ति, दोनों का वंशानुगत उत्तराधिकार प्राप्त हुआ था। निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए, हाईकोर्ट ने मामले को वापस भेज दिया था। याचिकाकर्ताओं ने मामले को वापस भेजने के आदेश को पलटने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया।