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कूनो ने फिर दिखाई उम्मीद की किरण, चीता गामिनी ने 4 स्वस्थ शावकों को दिया जन्म

  श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बार फिर बड़ी और सुखद खबर सामने आई है. यहां मादा चीता गामिनी ने 4 शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत में चीता प्रोजेक्ट को एक नई मजबूती मिली है।  केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर शावकों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई 25 माह की मादा चीता गामिनी ने अपनी पहली संतान के रूप में इन 4 शावकों को जन्म दिया है. यह कूनो में चीतों की वंशवृद्धि की दिशा में एक बड़ी सफलता है।  चीतों का कुनबा बढ़ा इन 4 नए नन्हे मेहमानों के आने के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 57 हो गई है. इसमें कूनो में जन्मे शावक और बाहर से लाए गए चीते शामिल हैं।  प्रोजेक्ट चीता की सफलता  केंद्रीय मंत्री ने गामिनी और उसके शावकों की तस्वीरें शेयर करते हुए पार्क के अधिकारियों और डॉक्टरों की टीम को बधाई दी. उन्होंने इसे 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। गामिनी और उसके चारों शावक फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं और वन विभाग की टीम उन पर 24 घंटे निगरानी रख रही है.

वंदे मातरम पर इंदौर पार्षद रुबीना का बयान, पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने जताया कड़ा विरोध

इंदौर  जिले में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर छिड़े विवाद ने एक बार फिर सियासी माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस की मुस्लिम पार्षद रुबीना इकबाल खान के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है। 'संविधान सर्वोपरि, अपमान नहीं होगा सहन' उषा ठाकुर ने कहा कि जो लोग भारत में रहते हैं उन्हें ‘वंदे मातरम’ का सम्मान करना ही होगा। यह देश किसी एक धर्म का नहीं बल्कि सभी नागरिकों का है और यहां संविधान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ‘वंदे मातरम’ बोलने से इनकार करता है तो यह राष्ट्र के प्रति अनादर माना जाएगा। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस तरह की सोच देशहित के खिलाफ है। आजादी का प्रतीक है वंदे मातरम विधायक ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि आजादी के आंदोलन का प्रतीक रहा है। इस गीत के लिए देश के लाखों लोगों ने बलिदान दिया है। ऐसे में अगर कोई नागरिक इसे गाने से मना करता है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कांग्रेस की मानसिकता पर सीधा प्रहार उषा ठाकुर ने कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी की मानसिकता अब जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस तरह के बयानों को बढ़ावा देती है जिससे समाज में गलत संदेश जाता है। उनका कहना है कि जनता समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी। इंदौर में पहले भी इस तरह के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है जहां कथित तौर पर फंडिंग के जरिए इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा था। समाज को इस विषय में जागरूक होने की जरूरत है और परिवारों को अपनी बेटियों की सुरक्षा और संस्कारों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। लव जिहाद पर भी चेतावनी इसी दौरान उषा ठाकुर ने प्रयागराज की एक वायरल युवती के मामले पर भी बयान दिया। उन्होंने इसे ‘लव जिहाद’ से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज के लिए चिंता का विषय हैं। उनके अनुसार कुछ संगठित ताकतें युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित करती हैं। आकाश सिकरवार

वंदे मातरम् विवाद में कांग्रेस पार्षद का मुंह काला करने पर 51 हजार रुपये का इनाम

इंदौर  इंदौर नगर निगम के बजट सत्र से शुरू हुआ वंदे मातरम् विवाद लगातार उग्र होता जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच चल रही बयानबाजी के बीच अब एक हिंदू संगठन के पदाधिकारी द्वारा कांग्रेस पार्षद के खिलाफ विवादित घोषणा किए जाने से मामला और ज्यादा गरमा गया है। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि वंदे मातरम् का अपमान करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम का जो भी बहन मुंह काला करेगी, उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा के सामने आने के बाद शहर में माहौल और तनावपूर्ण हो गया है। कैसे शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद 8 अप्रैल को नगर निगम के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ था। आरोप है कि वंदे मातरम् के समय कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम सदन में मौजूद नहीं थीं। इस पर भाजपा पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने टिप्पणी की, जिस पर फौजिया ने जवाब देते हुए कहा कि वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं है और यह व्यक्तिगत इच्छा का विषय है। इसके बाद सभापति द्वारा उन्हें सदन से बाहर कर दिया गया, जिससे मामला और बढ़ गया। रुबीना का बयान भी बना विवाद का कारण इसी बीच कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान का बयान भी विवादों में आ गया, जिसमें उन्होंने जबरदस्ती वंदे मातरम् गवाने का विरोध किया और तीखी प्रतिक्रिया दी। उनके बयान के बाद कांग्रेस के भीतर भी मतभेद सामने आए। राजनीतिक हलचल तेज विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने दोनों पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन और पुलिस में शिकायत की है। वहीं कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने रुबीना इकबाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भोपाल भेज दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् गाना अनिवार्य करने का फैसला भी लिया है, जिससे पार्टी के भीतर भी असहज स्थिति बनती नजर आ रही है।

लाड़ली बहना योजना के तहत सीएम सीहोर में 12 अप्रैल को 35वीं किस्त जारी करेंगे, 184 करोड़ के विकास कार्यों का ऐलान

सीहोर  मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के खाते में जल्द ही पैसे आने वाले हैं। मुख्यमंत्री 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में योजना की 35वीं किश्त जारी करेंगे। 12 अप्रैल को सीहोर के आष्टा में सीएम विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे और वहीं से महिलाओं के खाते में पैसे भी डालेंगे। लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी महिलाएं 12 अप्रैल की शाम तक अपना खाता चेक कर सकती हैं। मुख्यमंत्री यादव 12 अप्रैल को सीहोर के आष्टा में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के साथ ही सीहोर की 2,40,287 लाड़ली बहनों के खाते में 35 करोड़ 39 लाख 32 हजार 500 रूपये की राशि अंतरित करेंगे। इस अवसर मुख्यमंत्री डॉ यादव 184 करोड़ 92 लाख रूपये लागत के विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे। इन कार्यों में 115 करोड़ 32 लाख रूपये के कार्यों का लोकार्पण एवं 69 करोड़ 60 लाख रूपये के कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। नवंबर में बढ़ाई गई थी योजना की राशि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में योजना के अंतर्गत नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब पात्र हितग्राही बहनों को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। प्रदेश में जून 2023 से प्रारंभ हुई यह योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान का नया आधार बनी है। जून 2023 से मार्च 2026 तक योजना के तहत 34 किश्तों का नियमित अंतरण किया जा चुका है। इन कार्यों का करेंगे लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव आष्टा में 115 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण करेंगे, जिनमें नगर पालिका आष्टा के वार्ड-16 घनश्यामपुरा में आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य (10.76 लाख रुपये), पार्वती नदी पर घाट निर्माण कार्य (97.31 लाख रुपये), नगर परिषद जावर में नेवज नदी रीज्यूवेशन कार्य (188.00 लाख रुपये) तथा वार्ड-03 में नेवज नदी पर पुलिया निर्माण कार्य (88.00 लाख रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आष्टा में सान्दीपनि विद्यालय भवन निर्माण (6100.00 लाख रुपये) एवं जावर में सान्दीपनि विद्यालय भवन निर्माण (3954.00 लाख रुपये), सिद्दीगंज में उपतहसील कार्यालय भवन निर्माण (85.00 लाख रुपये) तथा आष्टा में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन निर्माण (131.00 लाख रुपये) भी शामिल हैं। साथ ही ग्राम मेहतवाड़ा में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण (295.45 लाख रुपये) तथा आष्टा-शुजालपुर मार्ग से धनाना खड़ी अरनिया गाजी करमनखेड़ी मार्ग पर पुल निर्माण कार्य (582.50 लाख रुपये) का भी लोकार्पण किया जाएगा। इन कार्यों का करेंगे भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव 69 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इनमें आष्टा सिद्दीगंज से धर्मपुरी मार्ग निर्माण (200.78 लाख रुपये), हुसैनपुरखेड़ी से ओल्ड आष्टा बडला मार्ग निर्माण (160.11 लाख रुपये) तथा भंवरा से सिद्धेश्वर महादेव मंदिर तक मार्ग निर्माण (401.15 लाख रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सिद्दीगंज, कुरावर, मेहतवाड़ा, खड़ी, लोरासकला एवं धुराड़ाकला में शासकीय स्कूलों के निर्माण कार्य (894.51 लाख रुपये), मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना अंतर्गत 12 एनजीओ एवं 48 आरक्षक आवास निर्माण (1143.20 लाख रुपये), इछावर में महाविद्यालयीन बालक छात्रावास निर्माण (450.00 लाख रुपये) तथा पार्वती अर्द्धशहरी पुलिस थाना भवन निर्माण (192.13 लाख रुपये) शामिल हैं। साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत 96 निर्माण कार्य (1368.00 लाख रुपये) एवं 54 सामुदायिक भवन निर्माण (1320.00 लाख रुपये), नगर परिषद कोठरी में अमृत 2.0 अंतर्गत पेयजल योजना (114.00 लाख रुपये), आष्टा में पपनाश नदी से भोपाल नाका तक आरसीसी नाला निर्माण (240.39 लाख रुपये), सड़क चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य (410.39 लाख रुपये), वार्ड-14 में सब्जी मंडी विकास कार्य (26.25 लाख रुपये) तथा वार्ड-03 में पाण्डू शिला के पास सौंदर्यीकरण कार्य (39.19 लाख रुपये) का भूमिपूजन किया जाएगा।

ग्वालियर में 14 हजार से ज्यादा किसान बेचेंगे गेहूं, मिलेगा सरकारी समर्थन मूल्य

ग्वालियर  जिले में गेहूं की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी 15 अप्रैल से शुरू होगी। हालांकि प्रदेश के अन्य हिस्सों मसलन नर्मदापुरम, उज्जैन आदि में खरीद शुरू हो चुकी है। लेकिन अंचल में गेहूं की फसल इन क्षेत्रों की तुलना में देरी से कटती है। इसलिए 15 अप्रैल या इसके बाद ही खरीद केंद्रों पर पहुंचती है। इसलिए ग्वालियर चंबल में गेहूं की खरीद मध्य अप्रैल से शुरू होती है। यहां बता दें कि इस बार अंचल में सरकारी समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए 14 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। गेहूं खरीद को लेकर प्रशासन ने भी खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं करने के निर्देश संबंधित अफसरों को दिए हैं। इसके अलावा किसानों के लिए छाया, पानी आदि के इंतजाम करने के लिए कहा है। जिससे उन्हें परेशानी न हो। 41 केंद्रों पर होगी खरीदी गेहूं को सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए व्यवस्थाएं खाद्य आपूर्ति विभाग कर रहा है। विभाग ने जिले भर के विभिन्न क्षेत्रों में 41 केंद्र बनाए हैं। जहां पर किसान मैसेज मिलने के बाद अपनी फसल को बेचने के लिए पहुंचेंगे। यहां पर फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एफसीआइ के लोग गेहूं की गुणवत्ता की जांच करेंगे। जांच में गुणवत्ता युक्त गेहूं को खरीदेंगे। इस मई के अंतिम दिनों तक चल सकती है गेहूं की खरीद इस बार मौसम की वजह से गेहूं की बुवाई में देरी हुई और अब कटाई में भी देरी हो रही है। ऐसे में किसानों के गेहूं की खरीद मई के अंतिम दिनों तक जा सकती है। क्योंकि इस बार वर्षा की वजह से गेहूं की चमक व क्वालिटी बिगड़ी है। इसलिए किसान परेशानी में हैं। हालांकि प्रशासन ने कृषि महाविद्यालय के छात्रों को क्वालिटी चेक करने के लिए हर केंद्र पर तैनात करने के लिए भी कहा है, जिससे किसानों के साथ गड़बड़ी न हो। वारदाने की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता ईरान-अमेरिका के युद्ध की वजह से अभी खरीद केंद्र पर पर्याप्त बारदाना उपलब्ध होने को लेकर अनिश्चितता है। क्योंकि बारदाना प्लास्टिक से बनता है। इसलिए वारदाने की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर आशंका है। हालांकि विभाग के अफसरों का कहना है कि खरीद के लिए पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आत्मीय अगवानी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शनिवार को भोपाल के स्टेट हैंगर पर आत्मीय अगवानी की। केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव प्रर्दशनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए ट्रांजिट विजिट पर स्टेट हैंगर भोपाल आये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह का पुष्प-गुच्छ  एवं शॉल ओढ़ाकर प्रदेश में आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रक्षा मंत्री को   स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। स्टेट हैंगर में अल्प-विश्राम के बाद केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से रायसेन के लिए रवाना हुए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, भोपाल के लोकसभा सांसद आलोक शर्मा, विधायक विष्णु खत्री, महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भी केंद्रीय मंत्री सिंह को पुष्प-गुच्छ भेंट किए।  

दिनदहाड़े वारदात: CM हाउस के नजदीक डॉक्टर से छीना गया 11 तोला सोना

भोपाल. राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। श्यामला हिल्स इलाके में मुख्यमंत्री निवास के पास स्थित हाई सिक्योरिटी जोन में शुक्रवार सुबह एक वरिष्ठ डॉक्टर से दिनदहाड़े लूट की वारदात हुई। श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में चिनार पार्क के पास बदमाशों ने टीबी ट्रेनिंग सेंटर के डायरेक्टर डॉ. मनोज वर्मा (62) को निशाना बनाया। बदमाशों ने पहले बाइक से उनकी साइकिल को टक्कर मारकर गिराया, फिर आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर लूटपाट की और फरार हो गए। जानकारी के अनुसार, डॉ. वर्मा रोज की तरह सुबह साइक्लिंग के लिए बोट क्लब क्षेत्र गए थे। करीब 10 बजे घर लौटते समय पीछे से आए बाइक सवार बदमाशों ने साइकिल को टक्कर मारी। संतुलन बिगड़ने से डॉक्टर सड़क पर गिर पड़े। पहले से मौजूद दो बदमाशों ने उन्हें दबोच लिया। आंखों में मिर्च पाउडर डालकर उन्हें असहाय बना दिया। इसके बाद आरोपियों ने चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और 11 तोला सोने का कड़ा, स्मार्ट वॉच, मोबाइल और नकदी लूटकर मौके से फरार हो गए। डॉक्टर के कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर – घटना में गिरने के कारण डॉ. वर्मा के कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टर के अनुसार, “मिर्च पाउडर के कारण मैं कुछ देख नहीं पा रहा था और पूरी तरह असहाय हो गया था।” रेकी कर किया गया हमला – प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बदमाशों को पहले से पता था कि डॉक्टर सोने का कड़ा पहनते हैं। घटना स्थल पर पहले से उनके साथी मौजूद थे। पूरी वारदात सिर्फ 2 मिनट में अंजाम दी गई। यह साफ संकेत देता है कि लूट पूर्व नियोजित (planned) थी। पुलिस जांच जारी – श्यामला हिल्स पुलिस ने तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। संदिग्धों से पूछताछ जारी है।पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने पहले रेकी की थी।

धार भोजशाला पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, हिंदुओं को 24 घंटे पूजा का हक, मस्जिद या मंदिर?

धार  भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भी एक है। राजा भोज ने उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया था। उन्होंने यहां कई निर्माण कराए, जिनमें महाकालेश्वर मंदिर स्थित जूना महाकाल मंदिर भी शामिल है। यहां पत्थरों पर जिस लिपि में संस्कृत श्लोक, शिलालेख के रूप में मौजूद हैं, उसी तरह के शिलालेख परमार राजाओं के खरगोन में बनाए मंदिर में भी हैं और भोजशाला के शिलालेखों पर भी मिलते हैं। इससे साबित होता है कि यहां राजा भोज ने मंदिर का निर्माण कराया था। पांचवें दिन सुनवाई में क्या हुआ धार भोजशाला विवाद को लेकर लगातार पांचवें दिन हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका दायर करने वाले कुलदीप तिवारी की ओर से वकील मनीष गुप्ता ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भोजशाला के हिंदू मंदिर होने को लेकर दलीलें रखीं।  याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मांग की कि भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार दिया जाए और इसके परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रकांड विद्वान राजा भोज ने शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत काम किए। सिर्फ धार की भोजशाला ही नहीं, परमार काल में कई अन्य स्थानों पर शिक्षा के मंदिर बनाए गए थे। इन मंदिरों में मिले पत्थर और भोजशाला में मिले पत्थर एक ही काल के हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि भोजशाला का निर्माण परमार काल में हो चुका था। वाग्देवी की मूर्ति और लिपियों का साक्ष्य राजा भोज द्वारा लिखित पुस्तकों में 'समराड्गण सूत्रधार' और 'सरस्वती कंठाभरण' प्रमुख हैं। समराड्गण सूत्रधार में यहां तक बताया गया है कि देवताओं की मूर्ति कितनी बड़ी होनी चाहिए। भोजशाला में स्थापित रही वाग्देवी की मूर्ति का वर्णन इससे शत-प्रतिशत मिलता है। उज्जैन के जूना महाकालेश्वर मंदिर में लगे पत्थर पर उकेरी गई और भोजशाला के पत्थरों की लिपि समकालीन है। इससे यह सिद्ध होता है कि भोजशाला मंदिर है और इसका निर्माण मस्जिद से बहुत पहले हो चुका था। अब इस मामले में सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। इस दिन भी मनीष गुप्ता की ओर से ही तर्क रखे जाएंगे। डेढ़ घंटे चली बहस डेढ़ घंटे की बहस में उन्होंने पुराने साहित्य के साथ ही दार्शनिकों और भारत भ्रमण पर आए विदेशियों की किताबों का हवाला दिया। अब 15 अप्रेल से दोबारा शुरु होगी सुनवाई 5 दिन चली बहस के बाद अब भोजशाला मामले में 15 अप्रेल से दोबारा सुनवाई शुरू होगी। हिंदुओं को मिले पूजा का अधिकार गुप्ता ने अपनी दलीलों की शुरुआत करते हुए अपनी याचिका में आठ मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख मांग है कि पुरातत्व अधिनियम के तहत यहां पर अन्य लोगों को पूजा का अधिकार खत्म किया जाए। चूंकि ये मंदिर है, इसलिए यहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वर्ष 2003 में जो आदेश दिया था, वो गलत है। उसे खत्म किया जाए। उन्होंने कहा कि राजा भोज शिक्षा और शिक्षकों का सम्मान करते थे। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की थी, जिसमें समरांगण सूत्रधार भी है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से वास्तुशास्त्र और शिल्पशास्त्र पर आधारित है। इसमें उन्होंने उस समय की वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला के सिद्धांतों का विवरण दिया है। उनके समय के निर्माणों में इसकी छाप भी मिलती है। भोजशाला में जो वास्तुकला और अन्य बातें मिली हैं, वो भी इसमें दिए गए वर्णन के मुताबिक हैं। राजाभोज की किताब का उल्लेख सरस्वती कंठाभरण की कथाओं में राजा भोज ने भोजशाला का महत्व बताया था, अभिभाषक गुप्ता ने कहा कि राजा भोज ने अपनी किताब में लिखा है कि राजा पर उसके मंत्री अंकुश लगाते हैं, इसी तरह यहां (भोजशाला) में मौजूद 500 पंडित उनके मद पर अंकुश लगाएंगे, इन्हें समय पर ग्रास देने के लिए शासन की ओर से सहायता दी जाएगी। इसी तरह से सरस्वती कंठाभरण जो कि भोजशाला का ही एक नाम है। उसको लेकर राजाभोज की किताब है। ये संस्कृत रचना है। इसमें भोजशाला के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। मुस्लिम लेखक इब्न बतूता की किताब में भी सबूत कोर्ट में मुस्लिम विद्वान और दार्शनिक इब्न बतूता की किताब रिहला का भी उल्लेख किया गया। इसमें जिक्र मिलता है कि खिलजी के मालवा जीतने के बाद मंदिर को तोड़कर उसके सामान का ही उपयोग करते हुए कमाल मौला की मस्जिद बनाई गई थी। जैन दार्शनिक का भी जिक्र वर्ष 1303 में गुजरात से धार आए जैन दार्शनिक के अपनी किताब में भोजशाला के वर्णन की दलीलें भी कोर्ट में रखी गईं। वकील गुप्ता ने ललित सा के शिलालेखों का वर्णन कर उनकी यात्रा के समय यहां दी जाने वाली शिक्षा के बारे में बताया। सर्वे के तथ्यों से मंदिर होने का दावा मनीष गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के सर्वे में जो तथ्य सामने आए हैं, वे भोजशाला को मंदिर सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। वह राजा भोज और अन्य शोधार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों के माध्यम से यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि भोजशाला का निर्माण राजा भोज के समय यानी परमार काल में हुआ था। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि भोजकाल में शिक्षालयों को सरस्वती कंठाभरण, मंदिर को प्रसाद और घर को मंदिर भी कहा जाता था, जिसका उल्लेख पुस्तकों में मिलता है। परमारकालीन बनावट और शिलालेख सर्वे में मिले खंभे और पत्थरों पर संस्कृत में उकेरी बातें सिद्ध कर रही हैं कि भोजशाला के पत्थरों से मस्जिद बनाई गई थी। परमारकालीन अन्य मंदिरों में देवताओं की मूर्तियों की बनावट और मुद्राएं वैसी ही हैं, जैसी भोजशाला के सर्वे में मिली मूर्तियों की हैं। वकील ने जोर देकर कहा कि मंदिर के पत्थरों से ही मस्जिद का निर्माण हुआ था, जो पुरातात्विक साक्ष्यों से स्पष्ट होता है।    

जबलपुर में 5 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन रद्द, 121 क्लीनिक पर भी हुआ कार्रवाई

जबलपुर  जबलपुर शहर के पांच निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। इसी तरह जिले के 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, पंजीयन की आवश्यक औपचारिकता पूर्ण न करने पर कुल 121 क्लीनिकों का संचालन बंद करने का आदेश मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी ने दिए हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग होम शाखा प्रभारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि नियमानुसार निजी अस्पतालों व क्लीनिकों को पंजीयन तीन साल की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर संबंधित संस्थानों को पंजीयन नवीनीकरण हेतु आवेदन करना अनिवार्य है। इस साल नवीनीकरण की प्रक्रिया पोर्टल के माध्यम से एक जनवरी से 28 फरवरी तक संचालित हुई। इसके बाद मार्च में संबंधित अस्पतालों व क्लीनिकों का निरीक्षण किया गया और आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया। 55 में से पांच बंद, जिसमें दो ने स्वयं अस्पताल में लगाया ताला वर्ष 2025-26 में कुल 55 अस्पतालों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, जिसमें दो अस्पतालों बटालिया आई हास्पिटल, सरकार हास्पिटल ने स्वयं अस्पताल बंद करने आवेदन प्रस्तुत किया। वहीं एक अस्पताल नामदेव नर्सिंग होम ने आवेदन ही नहीं किया। जबकि संकल्प हॉस्पिटल ने दस्तावेज नगर निगम व अन्य विभागों से सत्यापित नहीं कराए। इस तरह एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर में निरीक्षण के दौरान उपयुक्त स्टाफ उपस्थित नहीं था। जिसके बाद अब इनका संचालन नहीं हो सकेगा। 89 क्लीनिक ने आवेदन नहीं किया, 32 के पास दस्तावेज कम जबलपुर जिले में कुल 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण इस बार प्रस्तावित था। जिनमें से 89 क्लीनिकों द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया। जबकि 32 क्लीनिक ने नियमानुसार पूरे दस्तावेज ही नवीनीकरण टीम को नहीं सौंपे। जिसके चलते पंजीयन नवीनीकरण नहीं हो सका। पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया को ऐसे समझें स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पताल व क्लीनिकों संचालन के लिए नियमानुसार प्रत्येक तीन साल में एक बार पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया से गुजरना होता है। अस्पताल-क्लीनिकों के पंजीयन का नवीनीकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 126 अस्पतालों की मान्यता खत्म कर दी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में यह कदम उन अस्पतालों पर उठाया गया है, जिन्होंने NABH सर्टिफिकेट की जानकारी तय समय में नहीं दी। आयुष्मान कार्यालय ने पहले अस्पतालों को नोटिस देकर मौका दिया था, लेकिन इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। रविवार 12 बजे इन अस्पतालों को नोटिस देकर जानकारी दी जाएगी। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान के तहत मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा। 4 शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कुल 398 अस्पताल योजना से जुड़े हैं। इनमें से 126 अस्पताल NABH सर्टिफिकेट की जानकारी नहीं दे सके, जिस कारण उन पर कार्रवाई हुई। इनमें भोपाल के 51, इंदौर-30, ग्वालियर-33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। आयुष्मान CEO बोले- मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के CEO डॉ. योगेश भरसट ने कहा, यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके। एनएबीएच सर्टिफिकेट न देने वाले अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता रद्द कर दी गई है। कई नोटिस देने के बावजूद डॉक्यूमेंट नहीं जमा हुए। निजी अस्पतालों का कहना है कि सर्टिफिकेट प्रक्रिया महंगी और लंबी है, इसलिए छोटे अस्पताल समय पर पूरा नहीं कर पाए। डॉ. योगेश भरसट ने कहा, अब इन अस्पतालों के मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जाएगा। नए मरीजों के क्लेम स्वीकार नहीं होंगे। पुराने पेमेंट के बाद भी सर्टिफिकेट जमा होने तक ये अस्पताल इंपैनल्ड सूची में नहीं लौटेंगे।

हाईकोर्ट का अहम फैसला: दिव्यांग रेप पीड़िता को गर्भ गिराने की अनुमति, महिला की इच्छा को रखा प्राथमिकता

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में 30 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता विधवा महिला को गर्भपात की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पीड़िता को 19 माह का गर्भ है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला की शारीरिक और मानसिक सेहत सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखना उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा। अदालत के आदेश के अनुसार गर्भपात की प्रक्रिया 11 अप्रैल को कराई जाएगी। पीड़िता दिव्यांग है और सुनने व बोलने में असमर्थ है, जिससे उसकी स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। मामले में पीड़िता की ओर से उसके भाई ने याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया कि गर्भावस्था यौन शोषण का परिणाम है, जिससे महिला को गंभीर मानसिक आघात और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। कोर्ट के निर्देश, डॉक्टरों की निगरानी में सुरक्षित तरीके से हो प्रक्रिया हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति दी। साथ ही मेडिकल कॉलेज के डीन को निर्देश दिया गया कि अनुभवी डॉक्टरों की विशेष टीम गठित की जाए, जिसमें मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ भी शामिल हों, ताकि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अहम कोर्ट के निर्देश पर गजराराजा मेडिकल कॉलेज और कमलाराजा अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच की। रिपोर्ट में गर्भ लगभग 19 सप्ताह का पाया गया और विशेषज्ञों ने उचित चिकित्सा सुविधाओं के साथ सुरक्षित गर्भपात संभव बताया।