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छतरपुर का हाईटेक अस्पताल, 32.50 करोड़ में बनेगा, केंद्रीय AC के साथ मिलेगा बेहतर इलाज

छतरपुर  जिला अस्पताल के इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। अब मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्वालियर, भोपाल या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केंद्र सरकार की योजना के तहत करीब 32.50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार 200 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह पांच मंजिला भवन न केवल छतरपुर बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी जीवनदायिनी साबित होगा। 18 हजार वर्ग फीट में फैला आधुनिक चिकित्सा का केंद्र यह भव्य पांच मंजिला अस्पताल करीब 18 हजार वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में निर्मित किया गया है। पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड एसी युक्त इस भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले मरीजों को किसी निजी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी सुविधाएं मिल सकें। जिला प्रशासन ने आगामी 30 सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा इस ब्लॉक के संभावित उद्घाटन की तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी हैं। इस ब्लॉक के शुरू होते ही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। सेंट्रल ऑक्सीजन और मॉड्यूलर ओटी इस नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की सबसे बड़ी ताकत यहां की अत्याधुनिक तकनीक है। भवन में कुल 200 बेड स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक पलंग तक सेंट्रल ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन पहुंचाई गई है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। भवन में कुल 5 अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और 2 माइनर ओटी बनाए गए हैं। खास रणनीतिक डिजाइन के तहत ग्राउंड फ्लोर पर ही एक माइनर और एक मॉड्यूलर ओटी रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई मरीज सडक़ दुर्घटना, हार्ट अटैक या अन्य गंभीर स्थिति में आता है, तो उसे ऊपरी मंजिल पर ले जाने में वक्त गंवाए बिना तत्काल सर्जरी की सुविधा मिल सके। आईसीयू, कार्डियो और डायलिसिस की एकीकृत सुविधाएं भवन के भीतर सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इसमें महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू)- गंभीर मरीजों के लिए उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम। कार्डियो यूनिट- हृदय रोगियों के लिए त्वरित उपचार और मॉनिटरिंग। डायलिसिस केंद्र- गुर्दा रोगियों के लिए आधुनिक मशीनों के साथ डायलिसिस की सुविधा। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य- बच्चों के लिए विशेष एसएनसीयू और पीएनसी वार्ड के साथ उच्च स्तरीय लेबर रूम। मरीजों की सुविधा के लिए 5 लिफ्ट और विशाल रैंप अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में कुल 5 लिफ्ट लगाई गई हैं, ताकि आवाजाही में भीड़ न हो। साथ ही, एक विशाल स्ट्रेचर रैंप भी बनाया गया है ताकि बिजली गुल होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में मरीजों को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित ऊपर-नीचे ले जाया जा सके। रेफर केस घटेंगे सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि प्रारंभ में भवन की अनुमानित लागत 29.81 करोड़ रुपए थी, लेकिन मरीजों के हित में जोड़ी गई अतिरिक्त आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों के कारण यह लागत बढकऱ 32.50 करोड़ रुपए तक पहुंची है। इस ब्लॉक के संचालन से जिला अस्पताल के पास पहले से उपलब्ध करोड़ों रुपए की हाईटेक मशीनों का पूर्ण सदुपयोग हो सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले से होने वाले रेफर केसों में भारी कमी आएगी, जिससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।

मप्र में 34.25 लाख मतदाता हटे, भाजपा और कांग्रेस दोनों कराएंगी सत्यापन

भोपाल  Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है। पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाते हुए अपने बूथ लेवल एजेंट बीएलए को सक्रिय करने का निर्णय लिया है। बूथवार सत्यापन का अभियान भाजपा अब बूथवार उन मतदाताओं की तलाश करेगी, जो या तो स्थानांतरित हो गए हैं या अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 31.50 लाख से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ये मतदाता पात्र हैं तो उनके नाम दोबारा सूची में जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश एसआइआर टोली के सहसंयोजक एएस उप्पल ने अभियान चलाने की घोषणा की है। कांग्रेस भी करेगी घर घर मिलान Indian National Congress ने भी अपने बीएलए के माध्यम से हटाए गए मतदाताओं का सत्यापन कराने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह पुरानी, प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची का मिलान कराएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो न्यायालय का रुख किया जाएगा। आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर     एसआइआर से पहले कुल मतदाता 5,74,06,143 थे। प्रारूप सूची के बाद यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई। अंतिम सूची में कुल मतदाता 5,39,81,065 दर्ज किए गए, यानी प्रारूप के बाद 8,49,082 की शुद्ध वृद्धि हुई। पूर्व सूची के अनुरूप 34,25,078 नाम हटाए गए।     श्रेणीवार देखें तो 8।46 लाख नाम मृतक श्रेणी में हटे, 31।50 लाख अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए और 2।77 लाख नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज थे। पुरुष मतदाता 2,93,91,548 से घटकर 2,79,04,975 और महिला मतदाता 2,80,13,362 से घटकर 2,60,75,186 रह गए।     राजनीतिक दलों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।  

मध्यप्रदेश में 1.50 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, होली से पहले एरियर की एकमुश्त राशि मिलेगी

भोपाल   होली से पहले प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। श्रम आयुक्त कार्यालय इंदौर द्वारा जारी आदेश के बाद दैनिक वेतन भोगी, श्रमिक और आउटसोर्स कर्मचारियों को 12 माह का एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि यह राशि त्योहार से पहले जारी की जाए, ताकि कर्मचारी और उनके परिवार होली का त्योहार बेहतर तरीके से मना सकें। किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ? जानकारी के अनुसार इस आदेश से विभिन्न विभागों के 60 हजार से अधिक दैनिक वेतन भोगी (दैवेभो), 35 हजार से अधिक निगम-मंडल कर्मियों के साथ-साथ डेढ़ लाख से ज्यादा आउटसोर्स और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक कर्मचारी को 20 से 24 हजार रुपए तक की अंतर राशि एकमुश्त एरियर के रूप में मिल सकती है, जो उनके लिए बड़ी आर्थिक राहत साबित होगी। हाईकोर्ट में आपत्ति के कारण रुका था लाभ मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार मार्च 2024 में दैनिक वेतन भोगी, श्रमिक और आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन 2,000 रुपए प्रतिमाह बढ़ाया गया था। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2024 से लागू होना थी। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में एक एसोसिएशन द्वारा आपत्ति दायर किए जाने के कारण इसका लाभ समय पर नहीं मिल पाया। बाद में वेतनवृद्धि का लाभ अप्रैल 2025 से मिलना शुरू हुआ, लेकिन एरियर का भुगतान लंबित रहा। श्रम आयुक्त कार्यालय ने दिया स्पष्ट निर्देश अब 18 फरवरी को श्रम आयुक्त कार्यालय इंदौर ने स्पष्ट आदेश जारी कर विभागों को निर्देश दिए हैं कि 2024 में बढ़ाई गई न्यूनतम वेतन की अंतर राशि का भुगतान एरियर के रूप में तत्काल किया जाए। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जिन विभागों ने भुगतान नहीं किया था, उन्हें भी अब कार्रवाई करनी होगी। भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न विभागों और निगम-मंडलों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। यदि आदेश का समय पर पालन होता है, तो होली से पहले हजारों परिवारों के घरों में आर्थिक खुशहाली की रंगत देखने को मिल सकती है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना की कड़वी सच्चाई: 21 साल में 58 हजार पंजीयन, 12 ही ग्रेजुशन तक पहुंची

भोपाल  मध्य प्रदेश में साल 2007 में शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना को मॉडल मानकर कई राज्यों ने इसे अपनाया, लेकिन मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मियां ही इस योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही हैं. साल 2007 में जिन 58 हजार 73 बच्चियों ने पंजीयन कराया था. कांग्रेस द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में खुलासा हुआ. योजना के तहत राज्य सरकार अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से बच्चियों को कुल 1 लाख 43 हजार रुपए देती है, लेकिन सिर्फ 20 फीसदी छात्राएं ही ग्रेजुएशन के अंतिम साल तक पहुंच पा रही हैं. हालांकि विभागीय मंत्री ने कहा कि इसमें बढोत्तरी हो रही है. क्या है लाड़ली लक्ष्मी योजना, कैसे मिलता है लाभ मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2007 में मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की थी. योजना के तहत 1 जनवरी 2006 और इसके बाद जन्मी बच्चियों का पंजीयन कराया गया. शर्त रखी गई कि माता-पिता दोनों मध्य प्रदेश के मूल निवासी हों, उनकी दो संतानें हों और दो संतानों के बाद परिवार द्वारा नियोजन कराया गया हो. इसके साथ ही वे आयकरदाता न हों. इस योजना में पंजीयन कराने वाली बालिकाओं को कक्षा 6वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं में प्रवेश लेने पर सरकार स्कॉलरशिप देती है. कक्षा 12 वीं के बाद स्नातक में प्रवेश पर 25 हजार रुपए और 21 साल की आयु पूरी होने पर 1 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है. इसके लिए लाड़ली लक्ष्मी को वेबसाइट पर ग्रेजुएशन में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी है. 2007 में पंजीयन कराने वाली 12 बच्चियां ही ग्रेजुएट जब योजना शुरू हुई, उस दौरान 2007 में 58 हजार 73 लाड़ली लक्ष्मियों का पंजीयन कराया गया. इनमें से सिर्फ 12 लाड़लियों को ही स्नातक अंतिम साल पूरा करने पर राशि उपलब्ध कराई जा सकी. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने लिखित जवाब दिया है. इसमें बताया गया कि इस योजना में पंजीयन कराने वाले लाड़लियों में से सिर्फ 52.33 फीसदी बच्चियां ही 6वीं तक पढ़ाई पूरी कर सकी हैं. इनमें से सिर्फ 19.97 फीसदी बच्चियों ने 12 वीं कक्षा में एडमिशन लिया. लेकिन इसके आगे की पढ़ाई करने वाली लाड़िलयों की संख्या लगातार घटती गई. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल कहते हैं कि स्नातक तक पहुंचने वाली लाड़ली लक्ष्मियों की संख्या सिर्फ 5.83 फीसदी और पोस्ट ग्रेजुएट तक सिर्फ 0.33 फीसदी बच्चियां ही पहुंच पाईं. बेटियों के उच्च शिक्षित होने की दशा में ये आंकड़े चिंताजनक हैं. 52.35 लाख में से 19.97 लाख पहुंची 12वीं में विधानसभा में दी गई जानकारी में पताचला कि 2007 से 2025 के दौरान लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रदेश में 52.35 लाख लाड़ली लक्ष्मियों का पंजीयन कराया गया. लेकिन साल-दर-साल बच्चियां जैसे-जैसे बड़ी हुईं और उनकी क्लास बढ़ती गई तो इन बच्चियों की संख्या कम होती चली गई. योजना में पंजीयन कराने वाली बच्चियों में से वर्ष 2025 तक के दौरान जब 26.13 लाख बच्चियां ने कक्षा छठी में जाने की उम्र पूरी की तो इनमें से सिर्फ 13.68 लाख ने ही प्रवेश किया. यानी सिर्फ 52.35 फीसदी लक्ष्मियों ने ही एडमिशन लिया. क्लास बढ़ते ही ऐसे घटती गई संख्या इसके बाद कक्षा 9 कक्षा में प्रवेश लेने वाली छात्राओं का प्रतिशत घटकर 42.21 फीसदी रह गया. 11 वीं क्लॉस में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या 24.72 फीसदी रह गई. 12 वीं क्लास में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या 19.97 फीसदी रहा गई. स्नातक में एडमिशन लेने वाली छात्राओं का प्रतिशत सिर्फ 5.38 फीसदी रह गया. स्नातकोत्तर तक पहुंचने वाली सिर्फ 0.33 फीसदी लाड़ली लक्ष्मियां ही रह गईं. सत्ता पक्ष व विपक्ष के अपने-अपने तर्क कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल कहते हैं "लाड़ली लक्ष्मी की शर्तों के अनुसार जिन बच्चियों ने कक्षा 12वीं में प्रवेश लिया है, उन्हीं को एक लाख की राशि 21 वर्ष पूर्ण करने पर दी जाएगी. आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2027 में करीबन 5 हजार और 2028 में सिर्फ 40 हजार लाड़ली लक्ष्मियां को ही लाभ मिल सकेगा. सरकार ने इस योजना में बच्चियों की शैक्षणिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया." वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया कहती हैं "इस योजना का बेहत सकारात्मक असर दिखाई दिया है. बड़ी क्लास तक पहुंचने वाली बच्चियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. आने वाले समय में इसके और सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे." 

मध्य प्रदेश में चतुर्भुज फ्लाईओवर का आगाज, सागर में बढ़ेगी कनेक्टिविटी और सफर होगा आसान

सागर  एक महानगर की तरह आकार ले रहे सागर शहर में मध्य प्रदेश के पहले चतुर्भुज फ्लाईओवर की उम्मीद को अब पंख लग गए हैं. दरअसल, केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने सेतुबंधन योजना के तहत सागर के उपनगर मकरोनिया के यातायात दबाव को कम करने के लिए 155 करोड़ की लागत से फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर के लिए स्वीकृति दे दी है. खास बात ये है कि इसके साथ ही मकरोनिया से जबलपुर और कानपुर रोड को जोड़ने के लिए फोरलेन की स्वीकृति भी मिल गयी है. इसके पहले भी मकरोनिया फ्लाईओव्हर के लिए स्वीकृति मिल गयी थी, लेकिन स्थानीय व्यापारियों के विरोध के चलते प्रोजेक्ट रुक गया था. सागर में बनेगा मध्य प्रदेश का पहला चतुर्भुजी फ्लाईओवर आखिरकार सागर शहर के उपनगर मकरोनिया में यातायात दबाव कम करने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के डीपीआर बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है. पिछले करीब तीन सालों से मकरोनिया पर चार दिशाओं में चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के लिए प्रयासरत स्थानीय विधायक प्रदीप लारिया के प्रयासों से ये प्रोजेक्ट स्वीकृति की ओर बढ़ रहा है. जल्द ही इस फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर बुलाए जाएंगे. डीपीआर बनने के बाद फ्लाईओवर के लिए अंतिम स्वीकृति मिलेगी. चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर में क्या खास है दरअसल, सागर का मकरोनिया चौहारा एक ऐसा चौराहा है, जहां से कानपुर, जबलपुर, नागपुर, झांसी मार्ग जुड़ते हैं. यहीं से छतरपुर, रीवा, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, झांसी, ललितपुर और सभी मार्ग जुड़ते हैं. इसके साथ ही सागर के उपनगर के रूप में विकसित हो रहे इस इलाके में बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम और आउटलेट्स आने के कारण काफी ट्रैफिक का दबाव रहता है. बाहर और स्थानीय यातायात के दबाव के चलते इस चौराहे पर हमेशा जाम की स्थिति रहती है. इसलिए विधायक प्रदीप लारिया द्वारा यहां पर चार भुजाओं वाला एक चतुर्भुजी फ्लाईओवर का प्रस्ताव सेतुबंधन योजना के तहत केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी के समक्ष रखा गया था. चतुर्भुज फ्लाईओवर की खासियत     मकरोनिया चौराहा सागर पर बनेगा फ्लाईओवर     2.2 किमी लंबा होगा फ्लाईओवर     155 करोड़ रुपए आयेगी फ्लाईओवर की लागत     कानपुर, नागपुर, झांसी मार्ग और सागर शहर की कनेक्टिविटी कानपुर-जबलपुर रोड के लिए फोरलेन इसके अलावा मकरोनिया चौराहे से कानपुर रोड और जबलपुर रोड को कनेक्ट करने के लिए फोरलेन के लिए भी लगभग हरी झंडी मिल गयी है. फिलहाल ये मार्ग मकरोनिया से लेकर बहेरिया तक टू-लेन है. जिस पर कानपुर और जबलपुर तरफ से आने वाले भारी वाहनों का दबाव रहता है. दूसरी तरफ नेशनल हाइवे 44 से भी इसी मार्ग के जरिए कनेक्टिविटी है, जो आगे जाकर भोपाल, बीना और दूसरे मार्गों से जुड़ता है. अब ये फोरलेन बन जाने के कारण यातायात की रफ्तार बढ़ेगी. क्या कहना है स्थानीय विधायक का नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने बताया कि "आए दिन मकरोनिया में जाम की स्थिति बनी रहती है. यहां पर फ्लाईओव्हर की आवश्यकता थी. उसके लिए सेतुबंधन योजना के जरिए 2022 में फ्लाईओवर स्वीकृत कराया था, लेकिन व्यापारियों के विरोध के कारण फ्लाईओवर नहीं बन पाया. फिर से इसके लिए प्रयास के बाद फ्लाईओवर की हमें प्रारंभिक स्वीकृति मिली है. अभी डीपीआर के टेंडर के लिए स्वीकृति मिली है. हमें 155 करोड़ के फ्लाईओवर और साथ ही मकरोनिया से बहेरिया तक 15 करोड़ के फोरलेन की सौगात मिली है. कुल मिलाकर 180 करोड़ के डीपीआर की स्वीकृति मिली है. साथ ही छतरपुर तक के पुल पुलिया, सागर कानपुर मार्ग बनने के दौरान छूटे हैं, उनको भी इस डीपीआर में समाहित किया है. बहुत जल्दी डीपीआर के लिए टेंडर होंगे, फिर डीपीआर बनेगी और डीपीआर से बाद अंतिम स्वीकृति मिलेगी. कुल मिलाकर फ्लाईओवर का मार्ग अब खुल गया है और मकरोनिया अब इस फ्लाईओव्हर के कारण तेज गति से विकास करेगा. "

ग्रामीण डाक सेवक देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की है नींव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों के हित में भारतीय डाक व्यवस्था ने अपनी सार्थक भूमिका सिद्ध की है। ब्रिटिश काल से प्रारंभ व्यवस्थाओं को नया स्वरूप मिलता गया। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डाक व्यवस्था में निर्णायक परिवर्तन आये हैं और डाक विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने की ठोस पहल हुई है। एक समय सिर्फ चिट्ठियां पहुंचाने वाला विभाग अब बाबा महाकाल के प्रसाद के वितरण के लिए नई पोस्टल सेवा लागू करने तक अपनी यात्रा तय कर चुका है। डाक घरों के माध्यम से नागरिकों को बीमा योजनाओं, बचत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। खाते प्रारंभ करने से लेकर तीव्र गति से स्पीड पोस्ट और अन्य माध्यमों से ग्राहकों को लाभान्वित किया जा रहा है। ग्रामीण डाक सेवक भारत की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्था की मजबूत नींव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे स्थित कार्तिक मेला ग्राउंड में आयोजित ग्रामीण डाक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता केंद्रीय संचार मंत्री  ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डाक सेवकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि अपने अथक परिश्रम से गांव-गांव तक डाक तथा अन्‍य जनउपयोगी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने वाले ग्रामीण डाक सेवकों की देश के निर्माण में अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण भूमिका है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मध्‍यपद्रेश के उत्‍कृष्‍ट कार्य करने वाले ग्रामीण डाक नायकों को सम्‍मानित किया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री  सिंधिया के द्वारा भारतीय डाक विभाग से उज्‍जैन के  महाकालेश्‍वर मंदिर तथा  ओंकारेश्‍वर ज्‍योर्तिलिंग मंदिर की प्रसादी आमजन तक पहुंचाने के लिए पोस्‍टल सेवा का शुभारंभ किया गया। इसके अतिरिक्त उज्‍जैन के प्रसिद्ध स्‍थानों के संकलन पर आधारित पि‍क्‍टोरियल पोस्‍ट कार्ड का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण डाक सेवक हमारे सैनिक तथा हमारी ताकत है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में डाक विभाग सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। हमारे देश में प्राचीन काल से ही डाक पहुंचाने की परंपरा रही है। हमारे देश में डाक सेवकों का हृदय से सम्मान रहा है। बदलते दौर में देश के पोस्ट ऑफिस तीव्र गति से कार्य कर रहे हैं। डाक विभाग को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है। विभाग को शत प्रतिशत कम्‍प्‍युटरीकृत तथा डिजिटलाईज किया जा रहा है। आमजन के हित में दिन रात अपनी भूमिका को सराहनीय रूप से निभाने के लिए हमारा डाक विभाग बधाई का पात्र है। सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण जीवन उपयोगी कार्यों में भी डाक विभाग की महती भूमिका है।  ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में डाक विभाग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मध्‍यप्रदेश में 16 हजार 800 से ज्यादा ऊर्जावान ग्रामीण डाक सेवक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का काम कर रहे है। डाक विभाग को सबसे बड़ी लाजिस्‍टि‍क शक्ति के रूप में करेंगे स्‍थापित : केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया केंद्रीय संचार मंत्री  सिंधिया ने कहा कि सभी ग्रामीण डाक सेवक मेरे परिवार के सदस्य हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में डाक विभाग देश के विकास में अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है। डाक विभाग को तक‍नीकी रूप से सुदृढ बनाने के लिए कई कदम उठाए गए है। हमारा संकल्‍प है कि देश के डाक विभाग को विश्‍व की सबसे बड़ी लाजिस्‍टि‍क शक्ति के रूप में स्‍थापित करेंगे। केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया ने कहा कि देश में ग्रामीण डाक सेवक एक सैनिक की भांती कार्य कर रहे हैं। रेगिस्तान हो या पहाड़ों की चोटियां या मैदानी क्षेत्र हर एक स्‍थान पर ग्रामीण डाक सेवक निर्भीक रूप से पहुंचकर आमजन की सेवा कर रहे है। दुर्गम स्‍थलों जहां कोई अन्‍य व्‍यक्ति जाने की हिम्‍मत नहीं करता है वहां भी हमारा डाक सेवक अपनी सेवाएं दे रहा है। सर्दी, गर्मी, बरसात की परवाह किए बगैर डाक सेवक अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहा है। ग्रामीण डाक सेवक का मान-सम्मान शासन का संकल्प है। डाक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में 30 करोड़ पोस्ट ऑफिस बचत खातों को खुलवाने तथा उनमें लगभग 22 लाख करोड़ की रुपए की राशि जमा कराने में ग्रामीण डाक सेवक की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। आज पूरे देश में 3 करोड़ 80 लाख सुकन्या समृद्धि खाते हैं, जो हमारे ग्रामीण डाक सेवकों ने खुलवाएं हैं। देश में 2 करोड़ पासपोर्ट बनवाने में तथा 15 करोड़ से अधिक आधार कार्ड वितरण में भी हमारे डाक सेवकों ने महत्‍वूर्ण भूमिका निभाई है। अब केंद्रीय विद्यालयों में ग्रामीण डाक सेवकों के बच्चों को भी प्रवेश मिलेगा। डाकघरों को मुनाफे का केंद्र बनाया जाएगा। पार्सल वितरण क्षेत्र में अब महत्वपूर्ण भूमिका डाक घरों द्वारा निभाई जाएगी। डाक विभाग में डिजिटल सिस्टम, ट्रैकिंग सिस्टम अपनाए जाएंगे। सामग्री वितरण शत-प्रतिशत रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। दुर्गम क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की भी सेवाएं ली जाएगी। विभाग अब ड्रोन का भी उपयोग करेगा। केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया ने कहा कि विभाग द्वारा तकनीकी दक्षता में वृद्धि, उपभोक्ता का विश्वास, अच्छा व्यवहार तथा ऑन टाइम डिलीवरी पर ध्‍येय केंद्रीत किया गया है। समय सीमा पर फोकस किया जा रहा है। 24 घंटे, 48 घंटे जैसी समय-सीमा में पार्सल अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचाने पर कार्य विभाग करेंगा। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला बाल विकास राज्‍य मंत्री सु सावि‍त्री ठाकुर, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  अनिल फिरोजिया, राज्‍यसभा सांसद  उमेश नाथ जी महाराज, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा, महापौर  मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्‍यक्ष मती कलावती यादव,  संजय अग्रवाल,  राजेन्‍द्र भारती सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण डाक सेवक उपस्थित थे।  

आंसर कॉपी जाँच में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: एमपी बोर्ड ने शुरू की ऐप आधारित निगरानी व्यवस्था

भोपाल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम उठाया है। बोर्ड अब आंसर कॉपी की चेकिंग की निगरानी के लिए एक मोबाइल ऐप का उपयोग करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य चेकिंग प्रक्रिया में तेजी लाना और काम में देरी या गड़बड़ी को रोकना है। क्या है आंसर कॉपी चेकिंग की नई तकनीक? वर्तमान में मध्य प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं, जिनमें 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हो रहे हैं। बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद जब आंसर कॉपी की चेकिंग का काम शुरू होगा, तब यह ऐप मुख्य भूमिका निभाएगा। पिछले वर्षों में यह शिकायतें आती थीं कि कुछ शिक्षक आसंर कॉपी चेकिंग केंद्र पर ड्यूटी से गायब रहते थे या निर्धारित कार्य समय पूरा नहीं करते थे। इस नई व्यवस्था से इन समस्याओं पर पूर्ण विराम लग जाएगा। इस ऐप के जरिए शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति, ड्यूटी पर बिताए गए घंटों और उनके द्वारा प्रतिदिन जांची गई आसंर कॉपी की संख्या का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। बोर्ड के मुख्य प्रणाली अधिकारी भूपेश गुप्ता ने बताया कि अब तक जो वेब-आधारित प्रणाली काम कर रही थी, उसे जल्द ही इस नए मोबाइल ऐप से बदल दिया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया पर होगा सख्त पहरा रियल-टाइम मॉनिटरिंग: बोर्ड के उच्च अधिकारी किसी भी केंद्र की प्रगति पर सीधे नजर रख सकेंगे। इससे किसी भी केंद्र पर होने वाली देरी या अनियमितताओं की पहचान तुरंत हो जाएगी। शिक्षकों की जवाबदेही: मूल्यांकन केंद्र पर तैनात 35,000 से अधिक शिक्षकों की हर गतिविधि ऐप के जरिए रिकॉर्ड होगी। डिजिटल रिकॉर्ड: हर दिन कितने पेपर चेक हुए, इसका सटीक डेटा बोर्ड के पास होगा, जिससे परिणाम घोषित करने में तेजी आएगी। शिक्षकों को हाल ही में आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में इस ऐप के फीचर्स और रिपोर्टिंग के तरीके के बारे में जानकारी दी गई है। बोर्ड का प्रयास है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम पूरी तरह से व्यवस्थित और केंद्रीकृत हो, ताकि परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए जा सकें। एमपी बोर्ड 10वीं परीक्षाओं का समापन 6 मार्च 2026 को होगा । वहीं, एमपी बोर्ड 12वीं परीक्षाओं का समापन 7 मार्च 2026 को होगा। इसके बाद छात्रों की आंसर कॉपी चेकिंग की जाएगी। इसके बाद एमपी बोर्ड की ओर से जल्द ही छात्रों की रिजल्ट की घोषणा की जाएगी। बोर्ड की ओर से अभी तक एमपी बोर्ड रिजल्ट तिथि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।छात्रों को बता दें कि आप अपना एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 आसानी से लाइव हिन्दुस्तान वेबसाइट पर भी चेक कर सकेंगे। आसानी से अपना रिजल्ट पाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपना रजिस्ट्रेशन करें।

“सोलर रथ सह मोबाइल बूथ वैन” को दिखाई हरी झण्डी

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रधानमंत्री सूर्य घर – मुफ्त बिजली योजना के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश विभाग के अधिकारियों और वेंडर्स की बैठक में दिए। इससे पहले उन्होंने ऊर्जा भवन परिसर से “सोलर रथ सह मोबाइल बूथ वैन” को भोपाल शहर में प्रचार-प्रसार के लिये हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर शाजापुर विधायक  अरूण भीमावद सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री  शुक्ला ने ऊर्जा भवन में पीएम सूर्य घर योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये वेंडर्स से संवाद कर क्रियान्वयन में आ रही परेशानियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में वेंडर्स को आने वाली समस्याओं का निराकरण विभागीय स्तर पर किया जाएगा। इससे कार्य को गति मिलेगी, अधिकतम घरों को सौर ऊर्जा से रोशन किया जा सकेगा और उपभोक्ताओं को बिजली के अधिक बिल की समस्या से राहत मिल सकेगी। अपर मुख्य सचिव  वास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के साथ मिलकर डिस्कॉम, बैंक और नगर निगम के सहयोग से प्रदेश में घरों पर सोलर सिस्टम लगाने का कार्य वृहद स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीएमएसजी एमबीवाय पोर्टल की सहायता से योजना का लाभ आसानी से उपभोक्ता उठा सकते हैं। उपभोक्ता स्वयं वेंडर्स का चयन कर योजना लाभ ले सकते है। सोलर रथ से नागरिकों को सोलर सिस्टम लगाने करेंगे प्रोत्साहित एमडी ऊर्जा विकास निगम  बैंस ने बताया कि सोलर रथ सह मोबाइल बूथ वेन अगले 7 दिनों तक भोपाल शहर में भ्रमण कर नागरिकों को अपने घरों पर बिजली के बिल में राहत के लिये सोलर सिस्टम लगवाने को प्रोत्साहित करेगी। रथ प्रतिदिन भोपाल के दो इलाके या कॉलोनियों में बूथ स्थापित कर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से लाभान्तिव होने की जानकारी प्रदान करेगा। मोबाईल वैन में एनएसईएफई की टीम डिस्कॉम के सदस्य, बैंकों को स्थानीय प्रतिनिधि के साथ नगरीय निकाय के अधिकारी भी रहेंगे। सभी सोलर सिस्टम लगवाने के इच्छुक उपभोक्ताओं को मौके पर ही लाभान्वित करने का प्रयास करेंगे।  

भोजशाला सर्वे रिपोर्ट पर बड़ा खुलासा: दो साल पहले ही पक्षकारों तक पहुंच चुकी थी रिपोर्ट

इंदौर धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जिस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट सीलबंद मान रहा था, वह दो साल से पक्षकारों के पास है। यह खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सर्वेक्षण रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट पूर्व में ही पक्षकारों को सौंपी जा चुकी है, लेकिन यह जानकारी न शासन ने सुप्रीम कोर्ट को दी न पक्षकारों ने, हालांकि इसके पीछे किसी की कोई दुर्भावना नहीं थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट पक्षकारों के पास है, वे चाहें तो इसे लेकर अपने सुझाव, आपत्ति 16 मार्च से पहले लिखित में कोर्ट में दे सकते हैं। आपत्ति, सुझाव पर सुनवाई के बाद कोर्ट इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए नियत कर देगी। बता दें कि भोजशाला मामले को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही है। सोमवार को इन सभी की सुनवाई एक साथ हुई। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को आदेश दिया था कि वह ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह सर्वे 98 दिन चला जिसके बाद एएसआई ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। 4 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई गई थी। इस बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया जिसके बाद कोर्ट ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखने के आदेश दिए थे।   जिन पक्षकारों के पास एएसआई सर्वे रिपोर्ट की प्रति है उन्होंने बताया कि-     एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सर्वे में पाए गए स्तंभों और स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है ये स्तंभ पहले मंदिर का हिस्सा थे, बाद में मस्जिद के स्तंभ बनाते समय उनका पुन: उपयोग किया गया था।     मौजूदा संरचना में चारों दिशाओं खड़े 106 और आड़े 82 इस तरह से कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से इस बात की पुष्टि होती है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिरों का ही हिस्सा थे।     उन्हें वर्तमान संरचना के लिए पुनर्उपयोग में लाने के लिए उन पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को विकृत कर दिया गया।     मानव और जानवरों की कई आकृतियां, जिन्हें मस्जिदों में रखने की अनुमति नहीं है, उन्हें छैनी जैसे किसी वस्तु का इस्तेमाल कर विकृत किया गया था।     एएसआई ने रिपोर्ट में यह दावा भी किया है कि मौजूदा संरचना में संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे कई शिलालेख मिले हैं, जो भोजशाला के ऐतिहासिक, साहित्यिक और शैक्षिक महत्व को उजागर करते हैं।     एएसआई टीम को सर्वे में एक ऐसा शिलालेख मिला जिस पर परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। नरवर्मन ने 1094-1133 इस्वी के बीच शासन किया था। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि पश्चिम क्षेत्र में लगाए गए कई स्तंभों पर उकेरे गए ''कीर्तिमुख'', मानव, पशु और मिश्रित चेहरों वाले सजावटी सामग्री को नष्ट नहीं किया गया था।

एमपी में फिल्मी अंदाज में फरारी: पुलिस को चकमा देकर भागा तस्कर

खरगोन,गोगावां शराब के अवैध परिवहन में कारों का उपयोग आम हो चुका है। ऐसे ही एक मामले में जिले की गोगावां पुलिस को सोमवार रात मुखबीर से सूचना मिली कि मोहम्मदपुर नहर किनारे के कच्चे रास्ते से एक कार से शराब का अवैध परिवहन किया जा रहा है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित मार्ग पर नाकाबंदी की। कुछ देर बाद जब कार आई तो चालक ने पुलिस को देख कार की स्पीड बढ़ा ली और नाकाबंदी तोड़ते हुए भाग निकला। जब पुलिस कार का पीछा करने लगी तो कार चालक नहर किनारे कार खड़ी कर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला। जांच करने पर कार से अवैध देशी-विदेशी शराब की कुल 38 पेटियां जब्त की गई। पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपित द्वारा नहर किनारे के कच्चे रास्ते का उपयोग किया जा रहा था। वहीं आरोपित द्वारा कार की मूल नंबर प्लेट हटाकर फर्जी नंबर प्लेट लगाई होना पाया गया है। गोगावां थाना प्रभारी दीपक यादव ने बताया कि शराब के अवैध परिवहन की सूचना मिलते ही उच्चाधिकारियों को सूचित किया। एसपी रविंद्र वर्मा के निर्देश पर टीम का गठन कर मुखबीर द्वारा बताए रास्ते पर भेजा गया। मोहम्मदपुर नहर किनारे के कच्चे रास्ते पर कार को रोकने के लिए नाकाबंदी भी की गई। लेकिन कार चालक नाकाबंदी तोड़कर फरार हो गया। पुलिस वाहन ने कार का पीछा किया तो चालक मोहम्मदपुर पेट्रोल पंप के पास नहर किनारे कार छोड़ भाग गया। थाना प्रभारी यादव ने बताया कि कार पर लगी नंबर प्लेट पर एमपी 04 सीझेड 1926 लिखा था। इस आधार पर जांच की गई तो नंबर प्लेट फर्जी पाई गई है। कार के चेचिस नंबर से ज्ञात हुआ है कि कार इंदौर पासिंग है। आगे विवेचना में कार मालिक की जानकारी निकाली जा रही है। पीछे की सीट व डिक्की में भरी थी पेटियां पुलिस टीम द्वारा बैलेनो कार को चेक करने पर उसमें पीछे की सीट व डिक्की में शराब की पेटियां रखी होना पाई गई। इसमें 16 पेटी देशी शराब, 15 पेटी बीयर व 7 पेटी अंग्रेजी शराब की पाई गई। 38 पेटी में कुल 385.344 लीटर शराब जब्त की गई। कार व शराब को जब्त कर आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि फरार आरोपित, कार मालिक व नेटवर्क की जानकारी निकाली जा रही है। स्कूटी से हो रहा था शराब का अवैध परिवहन     गोगावां पुलिस ने ही एक अन्य मामले में स्कूटी से हो रहे शराब के अवैध परिवहन पर कार्रवाई की है।     थाना प्रभारी यादव ने बताया कि पेट्रोलिंग टीम को मुखबिर ने सूचना दी कि एक स्कूटी पर ग्राम लाखी की ओर से हम्मदपुर        की ओर अवैध  शराब परिवहन किया जा रहा है।     इस पर मोहम्मदपुर लाखी बायपास रोड पुल के पास टीम को भेजा गया।     पुलिस को देख आरोपित स्कूटी छोड़कर भाग गया।     चेक करने पर स्कूटी में आगे रखी बोरी व डिक्की में कुल 56 लीटर कच्ची शराब भरी पाई गई।     स्कूटी के नंबर के आधार पर आगे की विवेचना की जा रही है।