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इंदौर में एआई-सैटेलाइट मॉडल से भूमि मूल्य तय करने का प्रस्ताव, तैयार हो रहा है

 इंदौर आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। शासन से प्राप्त ऑनलाइन डाटा और स्थानीय स्तर पर एकत्र जानकारी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से विश्लेषण कर नई गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों का आधार बनेगा। पंजीयन विभाग ने पहली बार एआई और सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर नई गाइडलाइन तैयार करना शुरू किया है। इससे नए विकास का सही आकलन हो सकेगा और जमीन का मूल्य वास्तविक बाजार के अनुरूप हो सकेगा। संपत्ति सौदों का अध्ययन किया गया उप पंजीयन कार्यालयों में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान हुए संपत्ति सौदों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। जिन स्थानों पर जमीन या संपत्ति की खरीद-फरोख्त तय गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर हुई है, वहां दर बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है। विशेष रूप से ऐसी लोकेशन को बढ़ोतरी में शामिल किया जा रहा है, जहां 10 प्रतिशत से अधिक दस्तावेज गाइडलाइन दर से ऊंचे मूल्य पर पंजीकृत हुए हैं। एआई तकनीक से बढ़ोतरी वाली लोकेशन का आकलन किया जा रहा है। अनुमान है कि जिले में तीन हजार से अधिक लोकेशन पर दरों में बढ़ोतरी होगी। मार्च में शासन को भेजेंगे प्रस्ताव वर्तमान में उप पंजीयन कार्यालयों में गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली समितियों की बैठक में स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। यहां पर स्वीकृति के बाद दावे-आपत्ति बुलाकर निराकरण कर प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति पूरे प्रदेश के प्रस्तावों का निराकरण कर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजेगी और इसके बाद नई दरें लागू होंगी। 270% तक बढ़ी थीं दरें मौजूदा वित्त वर्ष में भी कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 20 से लेकर 270 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी। सबसे ज्यादा वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में देखी गई थी। अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां होने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विरोध को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए गए थे।

भोपाल में सेंट्रल विस्टा डिजाइन को मंजूरी, स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स के निर्माण पर खर्च होंगे एक हजार करोड़ रुपये

भोपाल  नए सेंट्रल विस्टा (स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स प्रोजेक्ट) का डिजाइन फाइनल हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की बैठक में इस योजना के प्राथमिक स्वरूप पर सहमति दे दी गई है। बैठक में हाउसिंग बोर्ड को चार महीने यानी 30 जून के पहले इसकी डीपीआर फाइनल करने को कहा है। इसके तहत बोर्ड ने टेंडर के माध्यम से आर्किटेक्ट के रूप में फर्म मेसर्स सीपी कुकरेजा का चुनाव कर लिया है। प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट लगभग एक हजार करोड़ रुपये का होगा। 33 विभागों ने मांगी जगह जीएडी ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर उनकी ऑफिस की जरूरतों और स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। जीएडी को 58 विभागों के 84 कार्यालयों से पत्र प्राप्त हुआ है। 33 विभाग के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरण के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल एक लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह मांगी है। बाकी छह कार्यालय रेनोवेशन व प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं है। 19 अन्य के अपने स्वतंत्र और पर्याप्त ऑफिस हैं। हाईटेक होगा ऑफिस सूत्रों के मुताबिक जिन भी ऑफिस में रेनोवेशन या निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां काम रोका जा सकता है। किसी को भी नई जमीन आवंटित नहीं होगी। सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सभी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉर्पोरेट की तरह यह हाईटेक आफिस होगा। 12 नये टावर बनाने का प्लान पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पुराने दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर है। नये सेंट्रल विस्टा में लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होगा। नई योजना में 12 नये टावर बनाने की योजना है। ग्रीन एरिया और पार्किंग पर विशेष फोकस पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हरित क्षेत्र को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर (लगभग चार गुना) किया जा रहा है। साथ ही अगले 50 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए विशाल पार्किंग बनाई जाएगी। आम जनता की सुविधा के लिए मेट्रो स्टेशन से कवर्ड पाथ-वे, हाकर्स कार्नर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी इस मास्टर प्लान का हिस्सा है। साझा छत से बिजली व शीतलता प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता 12 टावरों को जोड़ने वाली एक साझा छत (परगोला) होगी। इससे न केवल परिसर का तापमान कम रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सोलर ऊर्जा भी पैदा की जाएगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का विवरण मांगा है। नागरिकों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट     प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आम नागरिकों की सुविधा के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मप्र शासन की मंशा के अनुरूप बोर्ड इस पर तेजी से काम कर रहा है। – गौतम सिंह, कमिश्नर, एमपी हाउसिंग बोर्ड  

आस्था पर संकट! ओंकारेश्वर में नर्मदा में गिर रहा सीवेज, पवित्रता पर उठे सवाल

खंडवा देश के बारह ज्योतिर्लिंग में शामिल ओंकारेश्वर में मां नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। यहां नालों का पानी नदी में मिल रहा है। नर्मदा में स्नान और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शनार्थ देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन घाटों पर गंदगी और गंदे पानी की वजह से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है। वहीं ओंकारेश्वर की छवि भी धूमिल हो रही है। सिंहस्थ-2028 को लेकर तीर्थनगरी में अरबों रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन यहां बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा गंदे पानी के उपचार के लिए एमपीयूडीसी को जिम्मेदार ठहरा कर दायित्वों की इतिश्री कर ली जाती है। तीर्थ नगरी में नर्मदा की बदहाली को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी वीडियो बहुत प्रसारित हो रहे हैं।   ओंकारेश्वर में पुण्य सलिला मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हालातों में बदलाव नहीं हो रहा है। नर्मदा क्षेत्र में नालों के माध्यम से लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन द्वारा पानी उपचार के बाद छोड़ने का दावा किया जाता है। वहीं स्थानीय लोग इसे खानापूर्ति बता रहे हैं। ओंकार मठ में मिल रहा गंदा पानी समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमी प्रदीप ठाकुर ने बताया कि ओंकार मठ घाट पर बना वाटर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है। इसकी क्षमता प्रतिदिन ढाई लाख लीटर पानी शुद्ध करने की है। ऐसे में कई क्षेत्रों का गंदा पानी अब सीधा नाली के माध्यम से ओंकार मठ घाट पर मिल रहा है। यह ओंकार पर्वत परिक्रमा का रास्ता भी है। घाट पर भी नाली का पानी फैलता रहता है। शिवपुरी क्षेत्र में चार से पांच स्थानों से बस्ती का पानी सीधे नर्मदा नदी में जाता है। इस ओर नगर परिषद ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगाए हैं। कांग्रेस ने भी लगाए थे आरोप ओंकारेश्वर में नर्मदा प्रदूषित होने से स्थानीय लोगों के साथ ही हाल ही में कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने घाटों का जायजा लेकर नर्मदा में गंदा पानी मिलने के आरोप लगाए थे। कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने ओंकारेश्वर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता अनुरूप नहीं होने और कई बंद होने के आरोप लगाए थे। इससे नर्मदा नदी में होटल और घरों के शौचालय का गंदा पानी मिल रहा है, जो प्रशासन की नाकामी और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ है। दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद ओंकारेश्वर में पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बाद भी नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। नगर का गंदा पानी आठ नालों के माध्यम से नर्मदा में मिल रहा है। ओंकारेश्वर में चार स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए गए, लेकिन आरोप है कि इसमें भी तीन प्लांट चल रहे है, दो बंद हैं, जिससे लाखों लीटर गंदा पानी प्रतिदिन नर्मदा में मिल रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट चालू होने का दावा ओंकारेश्वर में एमपीयूडीसी द्वारा संचालित एसटीपी की क्षमता और क्रियाशीलता को लेकर हमेशा आरोप लगते रहे हैं। एमपीयूडीसी के वरिष्ठ अधिकारी ट्रीटमेंट प्लान सही ढंग से काम करने के दावे करने के साथ ही इनकी कार्य क्षमता बढ़ाने का आश्वासन देखकर पल्ला झाड़ लेते हैं।  

अब हर महीने ₹3000! लाड़ली बहना योजना को लेकर CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा

भोपाल विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav Ladli Behna Yojana) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए राशि बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने का वादा भाजपा के संकल्प (घोषणा) पत्र में किया गया है। यह पांच साल यानी 2028 तक के लिए है। उन्होंने कहा कि किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, हम तीन हजार रुपये देकर रहेंगे। नए पंजीयन को लेकर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। कांग्रेस के सदस्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और विरोध स्वरूप बहिर्गमन कर गए। प्रश्नकाल में उठा मुद्दा प्रश्नकाल में कांग्रेस के महेश परमार ने नए पंजीयन न होने, तीन हजार रुपये का वादा करने के बाद भी न देने और 60 वर्ष के होते ही योजना से हितग्राही का नाम काटने का मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि सेना की अधिकारी सोफिया कुरैशी का अपमान करने वाले मंत्री विजय शाह यहां बैठे हैं। उन्होंने रतलाम में कहा कि सीएम के सम्मान कार्यक्रम में लाड़ली बहना नहीं आएंगी तो नाम काट देंगे। वहीं, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा पर भी धमकाने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पंजीयन प्रारंभ करने की तिथि पूछी। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि योजना के प्रारंभ से प्रश्न दिनांक तक 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीयन किया गया। वर्तमान में 1,25,29,051 पंजीयन सक्रिय हैं। नए पंजीयन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाड़ली बहना योजना में मृत्यु होने या 60 वर्ष से अधिक आयु होने पर हितग्राही को योजना से बाहर किया जाता है। 60 वर्ष से अधिक आयु होने पर अन्य योजना में पात्रता अनुसार आवेदन किया जा सकता है। राशि और व्यय का ब्यौरा वर्ष 2025-26 में 1,500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से लाड़ली बहनों को 18,528 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। एक हजार रुपये प्रतिमाह से प्रारंभ हुई योजना की राशि में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसका उपयोग बहनें शिक्षा, पोषण सहित अन्य कार्यों में कर रही हैं। विपक्ष ने किया बहिर्गमन मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब योजना लागू हुई थी तब कहा जाता था कि यह चुनावी योजना है और बंद हो जाएगी, लेकिन आज हम 1,500 रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं। तीन हजार रुपये देने की घोषणा हमारे संकल्प पत्र में है, जो पांच वर्ष के लिए है और हम देकर रहेंगे। पंजीयन पर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। विपक्ष जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए बहिर्गमन कर गया।

सतत जीवन शैली की ओर अग्रसर महाविद्यालय: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ कार्यशाला में नवाचारों की गूंज

भोपाल आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को महाविद्यालय में इको क्लब के तत्वावधान में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “सतत जीवन शैली : वेस्ट टू वेल्थ” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को शोध, नवाचार एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इको क्लब द्वारा आयोजित इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही। इसके पश्चात इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की। मुख्य वक्ता एवं पर्यावरणविद डॉ. आनंद पटेल हेक्सा हिवा इंटरनेशनल (HHI), भोपाल ने अपने उद्बोधन में “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप से समझाते हुए अनेक नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतरे एवं नींबू के छिलकों से बायो-एंज़ाइम तैयार कर घरेलू स्वच्छता एवं जैविक उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही प्लास्टिक कचरे के पुनः उपयोग हेतु इको ब्रिक निर्माण की प्रक्रिया समझाई, जिसमें खाली प्लास्टिक बोतलों में अपशिष्ट प्लास्टिक भरकर उपयोगी निर्माण सामग्री तैयार की जाती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु मल्टी लेयर सीड बॉल की तकनीक समझाई, जिसके माध्यम से बीजों को मिट्टी, खाद एवं सुरक्षात्मक परतों के साथ तैयार कर बड़े स्तर पर हरितावरण बढ़ाया जा सकता है। डॉ. पटेल ने सर्कुलर इकॉनॉमी के विचार को स्पष्ट करते हुए बताया कि संसाधनों का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग ही सतत विकास का आधार है। उन्होंने “मिशन लाइफ” की 7 थीम के आधार पर दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले 70 व्यवहारिक उपायों की जानकारी भी दी। अंत में उन्होंने महाविद्यालय को एक इको-फ्रेंडली सोलर लैंप भेंट स्वरूप प्रदान किया, जो ऊर्जा संरक्षण एवं हरित जीवन शैली का प्रेरणादायी प्रतीक रहा। द्वितीय वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ उषा दुबे नर्मदापुरम ने अपने संबोधन में दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने, रसोई अपशिष्ट से कंपोस्ट तैयार करने तथा कपड़े एवं कागज़ के पुनः उपयोग के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने घर और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाए, तो “वेस्ट टू वेल्थ” एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है। अंत में इको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “वेस्ट टू वेल्थ” केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाई जाने वाली जीवन शैली है। उन्होंने छात्राओं से घर एवं परिसर में कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण एवं पुनर्चक्रण की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस परिवर्तन संभव है। मंच संचालन डॉ. मनीष दीक्षित ने किया तथा डॉ. रजनीकांत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्राध्यापकगण रजनीश जाटव, मनोज कुमार प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. दुर्गा मीना, प्रवीण साहू, मयंक गौर, रजनी हरियाले, नीलम दुबे,  नीलू लोवंशी, राहुल मालवीय एवं इको क्लब इकाई की छात्राएँ तथा महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

बिजली व्यवस्था की पड़ताल: जायका टीम ने MP Transco के प्रोजेक्ट्स का लिया जायजा

एसएलडीसी और स्काडा सेंटर की प्रशंसा भोपाल जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) द्वारा मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण हेतु मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में संचालित जायका-2 वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत किए गए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।जायका जापान की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की। ढीमरखेडा लाइन एवं सब स्टेशन का किया निरीक्षण निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी सब स्टेशन ढीमरखेड़ा तथा इसके लिए निर्मित 132 केवी पनागर–ढीमरखेड़ा ट्रांसमिशन लाइन का अवलोकन किया। इवैल्यूएटर सुश्री ताकाहाशी ने लोन स्वीकृति के समय प्रस्तुत प्रारंभिक योजना, परियोजना के क्रियान्वयन, स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता, लागत एवं रखरखाव से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण उपरांत उन्होंने सब स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उपयोगिता जानने के लिए स्थानीय नागरिकों से भी की चर्चा जायका द्वारा वित्त पोषित फंड से निर्मित सब स्टेशन की उपयोगिता के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने के साथ-साथ जायका टीम ने स्थानीय महिलाओं को बुलाकर उनका प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया। महिलाओं ने बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त एवं निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे सिंचाई के लिए भी पर्याप्त विद्युत उपलब्ध हो रही है। इससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और स्काडा का भी किया अवलोकन जायका टीम ने एमपी ट्रांसको के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी )एवं स्वदेशी तकनीकी एवं उपकरणों से निर्मित स्काडा कंट्रोल सेंटर का भी अवलोकन किया और उसकी कार्य प्रणाली की प्रशंसा की। ये अधिकारी रहे उपस्थित निरीक्षण के दौरान एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री के.एम. सिंघल, अधीक्षण अभियंता श्री आर.सी. शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री ए.पी.एस. चौहान, श्री शशि शेखर, श्री रविराज पटेल, सहायक अभियंता श्री जितेन्द्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

इंदिरा कॉलेज में चला ‘अभिमन्यु/सृजन/सम्मान’ अभियान, बालिकाओं को किया जागरूक

सतना पुलिस मुख्यालय महिला सुरक्षा भोपाल के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) के मार्गदर्शन में महिला थाना प्रभारी निरीक्षक श्वेता मौर्या एवं स्टाफ द्वारा इन्द्रा कॉलेज में एकीकृत अभियान अभिमन्यु/सृजन/सम्मान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़े कानून, महिला अपराधों की जानकारी, हेल्पलाइन नंबर तथा साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय बताए गए। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं से संवाद कर उन्हें निर्भीक होकर शिकायत दर्ज कराने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन का उपयोग करने की सलाह दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी से ग्वालियर के कृषि मंथन में कृषि वैज्ञानिकों को दिया संदेश

कृषि में शोध बढ़ायेंगे, मंडी निर्यात नीति भी लायेंगे सरसों को भी लायेंगे भावांतर के योजना में दलहन-तिलहन, औषधीय और मसाला फसलों का भी बढ़ा रहे उत्पादन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। इनके अथक परिश्रम से ही हमारे बाजार गुलजार है। हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह वर्ष प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित और समग्र कल्याण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने कहा कि यह वर्ष 'खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक' की पूरी मूल्य संवर्धन श्रृंखला को एक सूत्र में जोड़ेगा। इस वर्ष हम क़ृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और इनमें वैल्यू एडिशन के लिए अधिकाधिक रोजगार आधारित उद्योगों के विकास, उन्नत किस्म के बीजोत्पादन, पशुपालन, दुग्धोत्पादन, मत्स्योत्पादन में वृद्धि सहित हर वो कदम उठाएंगे, जिनसे खेती और अन्नदाताओं का विकास हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से कृषि विश्वविद्यालय परिसर, ग्वालियर में हो रहे 'कृषि मंथन एवं कृषि प्रौद्योगिकी मेला 2026' को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना संबंधी कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में तेज़ी से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार प्रदेश में औषधीय और मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ाने के सभी प्रयास कर रही है। हम जल्द ही कृषि उत्पादन निर्यात नीति लाने वाले हैं। हम कृषि में शोध कार्य भी बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा कि हम खेती-किसानी और फल-फूलों की खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कृषि मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह हमें किसानो के कल्याण के लिये प्रभावी और कारगर कदम उठाने में सहायक होगा। 'कृषि मंथन' राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और कृषि विभाग, म.प्र. शासन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" की थीम पर हो रहा कृषि मंथन निश्चित ही किसानों को खेती में जरूरी सुधार और बदलाव लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करने पर फोकस कर रही है। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी। हम कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्र में भी नई सोच से आगे बढ़ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रही है। इस मंथन में देश के विभिन्न कृषि संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक विचार मंथन कर नई तकनीकों के विकास की राह प्रशस्त करेंगे। वीडियो काँफ्रेंसिंग में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग निशांत वरवड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने भोपाल से सहभागिता की। यूनिवर्सिटी परिसर में हो रहे इस कृषि मंथन में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलगुरू प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार शुक्ला, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डा. ब्रजेन्द्र सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़, कर्नाटक के कुलपति डॉ. पी.एल पाटिल, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों से आये वैज्ञानिक, आईसीएआर के पदाधिकारी सहित कृषि अधिकारी भी उपस्थित थे।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- बंदी पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप दे

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बंदी पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप में किया जाना चाहिए। कार्य का दृष्टिकोण मानवतावादी हो। भाव संवेदनशील और विचारशील होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रयासों में सकारात्मक सोच के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम बंदियों की सोच को रचनात्मक दिशा देने। भविष्य के प्रति विश्वास और आत्मबल को मजबूत करने में बहुत सहयोगी होगा। राज्यपाल पटेल सोमवार को लोकभवन में गृह एवं जेल विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विशेष महानिदेशक जेल अखितो सेमा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल ने अधिकारियों से कहा कि बंदी उत्पादक गतिविधियों के द्वारा बंदियों के परिवारों के जीवन निर्वाह में आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से नियोजन गतिविधियों का संयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि जेलों में बंद मामूली अपराधों के विचाराधीन कैदियों को केवल दंड देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सकारात्मक सुधार के जरिए समाज की मुख्य धारा में वापस भेजना पुनर्वास प्रयासों का मूलाधार होना चाहिए। भाव उनको अपराधी की पहचान से मुक्त होकर बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित होने में मदद का होना चाहिए। समाज के नव-निर्माण में वे अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर जेल की दीवारों के पीछे एकाकी जीवन जी रहे बंदियों को देश की प्रगति और प्रेरक कहानियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके जीवन में आशावाद और नव-निर्माण का संचार होगा। बंदियों के भीतर छिपी नकारात्मकता में कमी आएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-सुधार की भावना जागृत होगी। उन्होंने जेलों में लंबित दया याचिकाओं, महिला बंदियों के बच्चों के उचित लालन-पालन की व्यवस्थाओं, महिला बंदियों के पुनर्वास, दिव्यांग एवं बुजुर्ग बंदियों के लिए आवश्यक कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता और श्रम शक्ति के उत्पादक गतिविधियों में नियोजन के संबंध चर्चा की। अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्राप्त 18 दया याचिकाओं का प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है। जेल विभाग द्वारा विगत पांच वर्षों में प्राप्त सभी दया याचिकाओं का परीक्षण कराया जा रहा है। विभाग द्वारा उनके त्वरित निराकरण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 180 देशों के 11 लाख लोगों के द्वारा देखे जाने वाले गीता पाठ के ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रदेश की जेलों में प्रसारण की अभिनव पहल जेल विभाग द्वारा की गई है। साप्ताहिक प्रसारण में गीता के श्लोक का शुद्ध उच्चारण और श्लोक का भावार्थ कर समझाया जाता है।

एमपी में मंदिर प्रबंधन से पोस्ट ग्रेजुएशन और डिप्लोमा कोर्स शुरू, धार्मिक पर्यटन में होगी वृद्धि

भोपाल   मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और इसमें रोजगार सृजन के लिए मंदिर प्रबंधन में स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर में पत्रकारों को दी। उन्होंने कहा कि, मंदिर प्रबंधन से जुड़े कोर्स विश्वविद्यालयों के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। ये स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कोर्स दो वर्षीय होंगे। कोर्स में सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि मंदिर प्रबंधन को रोजगारपरक बनाया जा सके। इसके साथ ही प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा। काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक की तर्ज पर प्रदेश में 13 लोक बनाए जाएंगे। ओंकारेश्वर, चित्रकूट सहित कई धार्मिक स्थलों का विकास कार्य चल रहा है। धार्मिक पर्यटन का केंद्र बना उज्जैन – सीएम सीएम ने कहा- साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा के बाद उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन गया है। अब मध्य प्रदेश में महाकाल लोक की तर्ज पर ओंकारेश्वर, मैहर की माताजी, राजाराम लोक ओरछा और सलकनपुर जैसे धार्मिक स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि, मंदिर हमेशा से आस्था और श्रद्धा के केंद्र रहे हैं, लेकिन उनसे जुड़े वित्तीय और प्रबंधन पक्ष भी रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंधन के कोर्स शुरू करके मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था, प्रशासन, सुरक्षा, धार्मिक अनुष्ठान, कला और ललित कला को प्रोत्साहन दिया जाएगा।