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टेकऑफ के तुरंत बाद डगमगाया CM मोहन यादव का हेलीकॉप्टर, बाल-बाल टला हादसा

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा में मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलीकॉप्टर की उड़ान के दौरान कुल पल के लिए तब लोगों की सांसें थम गईं जब टेक ऑफ के तुरंत बाद यह आगे बढ़ने की बजाए पीछे हटने लगा। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोग सीएम की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए थे। यह घटना हाल ही में तब हुई जब CM मोहन यादव खंडवा जिले के पंधाना में लाड़ली बहना योजना के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। खंडवा के पंधाना में उड़ान भरने के दौरान अचानक मुख्यमंत्री मोहन यादव का हेलीकॉप्टर आगे जाने के बजाय पीछे और नीचे की ओर झुकने लगा। यह सीन देखकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी घबरा गए लेकिन पायलट ने सूझबूझ से हेलीकॉप्टर को संभाल लिया। आखिरकार हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से हवा में संतुलित कर जब आगे अपने सफर के लिए रवाना हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली।

भोपाल में महाशिवरात्रि का अनूठा आयोजन, किन्नर शंकराचार्य का अभिषेक और 60 किन्नरों की घर वापसी

 भोपाल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस भव्य आयोजन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में घोषित कर उनका पट्टाभिषेक किया गया। पुष्कर पीठ से संभालेंगी कमान किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। हिमांगी सखी राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में संभालेंगी। मूल रूप से मुंबई निवासी हिमांगी सखी 'मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा' की प्रमुख हैं और वे पहली किन्नर भागवत कथा वाचक भी हैं। 60 किन्नरों की हिंदू धर्म में वापसी सम्मेलन के दौरान एक बड़ा दावा किया गया कि विभिन्न कारणों से धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों की 'घर वापसी' कराई गई है। आयोजकों ने बताया कि मुस्लिम धर्म अपना चुके इन किन्नरों ने शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है। नए जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की नियुक्ति सम्मेलन में किन्नर समुदाय के धार्मिक नेतृत्व को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं…     घोषित जगद्गुरु: काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल), संचिता (महाराष्ट्र)।     घोषित महामंडलेश्वर: सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर, सागर। यह सम्मेलन किन्नर समुदाय के भीतर चल रहे गद्दी विवाद और धर्म परिवर्तन के आरोपों के बीच आयोजित किया गया, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आठ मुख, अद्भुत आस्था: नेपाल से भी विशिष्ट मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर

 मंदसौर मंदसौर में शिवना तट पर विराजे अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ महादेव की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की मूर्ति है, जबकि मंदसौर में मूर्ति अष्टमुखी है और अभी तक ज्ञात इतिहास में यह विश्व की एकमात्र अष्टमुखी मूर्ति है। पशुपतिनाथ महादेव की मूर्ति लगभग 1500 वर्ष पुरानी है। और 85 बरस पहले शिवना नदी से ही निकली थी। 19 जून 1940 को शिवना नदी से बाहर आने के बाद 21 साल तक भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति नदी के तट पर ही रखी रही। मूर्ति को नदी से बाहर निकलने के बाद चैतन्य आश्रम के स्वामी प्रत्यक्षानंदजी महाराज ने 23 नवंबर 1961 को प्राण प्रतिष्ठा की। 27 नवंबर को मूर्ति का नामकरण श्री पशुपतिनाथ महादेव किया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण हुआ। सावन में यहां डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। मुख्य आकर्षण श्रावण में पूरे माह होने वाला मनोकामना अभिषेक है। और अब तो यहां पशुपतिनाथ लोक बनने से पूरा परिसर आकर्षक बन गया है। 101 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर 100 किलो वजनी कलश स्थापित है जिस पर 51 तोला सोने की परत चढ़ाई गई है। शैव धर्म की 6 प्रमुख परंपराओं में से एक मंदसौर का पशुपतिनाथ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित हिंदू मंदिर है। यह पशुपतिनाथ परंपरा से संबंधित है जो शैव धर्म के भीतर 6 प्रमुख परंपराओं में से एक है। शिलालेखों के आधार पर मंदिर की मूर्ति 5वीं या 6ठी शताब्दी की है। प्राचीन समय में इस स्थल को दशपुर कहते थे। यह मालवा के ऐतिहासिक क्षेत्र में राजस्थान की सीमा के पास इंदौर से लगभग 200 किमी, उदयगिरि गुफाओं से लगभग 340 किमी पश्चिम में और शामलाजी प्राचीन स्थलों से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में है। दोनों ही गुप्त साम्राज्य युग की पुरातात्विक खोजों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। शिवना से प्रकटे अष्टमुखी महादेव माना जाता है कि प्रतिमा का निर्माण विक्रम संवत 575 ई. में सम्राट यशोधर्मन की हूणों पर विजय के आसपास का है। संभवत: मूर्ति भंजकों से रक्षा के लिए इसे शिवना नदी में दबा दिया गया था। अनुमान के अनुसार अज्ञात कलाकार ने प्रतिमा के ऊपर के चार मुख पूरी तरह बना दिए थे, जबकि नीचे के चार मुख निर्माणाधीन थे। श्री पशुपतिनाथ महादेव मूर्ति की तुलना नेपाल के काठमांडू स्थित श्री पशुपतिनाथ से की जाती है। मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति अष्टमुखी है। जबकि नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति चार मुखी है। मूर्ति में बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था व वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। इसमें चारों दिशाओं में एक के ऊपर एक दो शीर्ष हैं। प्रतिमा में गंगावतरण जैसी दिखाई देने वाली सफेद धारियां हैं। प्रतिमा की विशेषता मुख 8, ऊंचाई 7.3 फीट, गोलाई 11.3 फीट, वजन 6 क्विंटल अष्टमुख की विशेषता प्रतिमा के आठों मुखों का नामकरण भगवान शिव के अष्ट तत्व के अनुसार है। हर मुख के भाव व जीवन काल भी अलग-अलग हैं। 1 – शर्व, 2 – भव, 3 – रुद्र, 4 – उग्र, 5 – भीम, 6 – पशुपति, 7 – ईशान और 8 – महादेव। कैसे पहुंचें मंदसौर रेल सेवाएं – जयपुर-इंदौर रेलमार्ग पर मंदसौर प्रमुख स्टेशन है। और मुंबई, इंदौर, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, उदयपुर, मथुरा, भोपाल, नागपुर, हिसार, जोधपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है। बस सेवाएं – मंदसौर महू-नसीराबाद राजमार्ग पर स्थित है। मंदसौर से महज 30 किमी दूर से मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस वे भी निकल रहा है। सभी प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा – इंदौर (220 किमी), उदयपुर (190 किमी) मंदसौर में 25 करोड़ से 'पशुपतिनाथ लोक' तैयार श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में पशुपतिनाथ लोक का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। मंदिर के सभा हाल से लेकर पुराने पार्किंग स्थल तक पूरे परिसर में 25 करोड़ रुपये में पर्यटन विकास निगम ने कायाकल्प कर दिया है। मंदिर परिसर में पुराने खंभों पर भी लाल पत्थर का कार्य हो चुका है। माली धर्मशाला व उसके आस-पास बने भवन भी तोड़कर यहां ओपन थियेटर बना दिया गया है। मंदिर के आसपास दीवारों पर लगे लाल पत्थरों पर शिव लीलाएं उकेरी गई हैं।

मासूम बच्चियों को डायल 112 के जवानों ने परिजनों से मिलाया

ऑटो से उतरने के बाद मां से बिछड़ गई थी एक और तीन साल की बच्चियां भोपाल सागर जिले के थाना मोतीनगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की सतर्कता, मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही ने दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित उनके माता-पिता से मिलाया है। सड़क पर लावारिस अवस्था में भटकती लगभग 1 वर्ष एवं 3 वर्ष आयु की दो बच्चियों को सुरक्षित संरक्षण में लेकर, डायल-112 टीम ने जिस धैर्य, समझदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया, वह सेवा और करुणा का अनुकरणीय उदाहरण है।  जानकारी के अनुसार इस संबंध में राज्य स्तरीय डायल-112 कंट्रोल रूम भोपाल को सूचना प्राप्त हुई, जिसके तत्काल बाद थाना मोतीनगर क्षेत्र में तैनात एफआरव्ही वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक अभय विनोदिया एवं पायलट अनिकेत दुबे ने मौके पर पहुंचकर दोनों मासूम बच्चियों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। टीम द्वारा अत्यंत संवेदनशीलता, धैर्य और अपनत्व के साथ बच्चियों से संवाद किया गया।जिसके परिणामस्वरूप 3 वर्षीय बच्ची ने अपने परिजन का नाम बताया। इस जानकारी के आधार पर डायल-112 टीम ने आसपास के क्षेत्र में सक्रियता से पूछताछ करते हुए परिजनों की तलाश प्रारंभ की। लगातार प्रयासों और सतर्क खोज के बाद बच्चियों के माता-पिता का पता लगाया और उन्हें तत्काल मौके पर बुलाया। पूछताछ में परिजनों ने बताया कि बच्चियां अपनी माता के साथ थीं, लेकिन ऑटो में पर्स छूट जाने के कारण वे उसे लेने पीछे चली गई।इसी दौरान बच्चियां ठेले वाले के पास खड़ी रहीं और मां को तलाशते हुए आगे निकल गईं, जिससे वे एक-दूसरे से बिछड़ गईं। जवानों ने पहचान एवं सत्यापन उपरांत दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके माता-पिता के सुपुर्द किया। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना संदेश देती है कि मध्यप्रदेश पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी नहीं, बल्कि हर संकट में आमजन की सुरक्षा, संवेदनशीलता और भरोसे की मजबूत ढाल है।

इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाने वाले प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

इंदौर. इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) ने रैगिंग को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इन्हें सीनियर को रैगिंग दिए जाने को लेकर सहपाठियों पर दबाव बनाने का दोषी पाया गया है। एंटी रैगिंग कमेटी (एआरसी) ने चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में निष्कासन की अनुशंसा की गई है। जबकि 11 विद्यार्थियों को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है। इन पर अर्थदंड भी लगाया गया है। रैगिंग की रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई। करीब दो सप्ताह पहले प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। बताया गया था कि डी हॉस्टल में कुछ छात्र जूनियर्स पर दबाव बनाते हैं। आरोप था कि उन्हें सीनियर्स के पास जाकर जबरन परिचय देने के लिए उकसाया जाता है। इतना ही नहीं, सिगरेट पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है। बैच आउट कर दिया जाता है इन्कार करने पर विद्यार्थियों को ‘बैच आउट’ कर दिया जाता है। 'बैच आउट' यानी ऐसे विद्यार्थियों को सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रखा जाता है। उन्हें सीनियर्स के सामने सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर बात करने को कहा जाता है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संस्थान ने तुरंत जांच शुरू कर दी। शिकायत के अलावा एंटी रैगिंग कमेटी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी जांच की। इसमें प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थी अपने सहपाठियों को रैगिंग देने के लिए उकसाते हुए पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी भी इस पूरे मामले में शामिल थे। करीब दो सप्ताह की जांच के बाद कमेटी ने करीब 15 विद्यार्थियों को दोषी पाया। इनमें से चार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों पर गंभीर आरोप साबित हुए। कमेटी ने इन्हें बीटेक कोर्स से बाहर करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई है। अगले सप्ताह इस मुद्दे पर बैठक बुलाई गई है, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा। जुर्माना भी लगाया बीटेक के प्रथम व द्वितीय वर्ष के आठ विद्यार्थी ऐसे हैं, जो रैगिंग का समर्थन करते हैं। इन पर भी कमेटी ने सख्त कार्रवाई की है। भले ही इन्हें कोर्स से बाहर नहीं किया गया है, मगर इन विद्यार्थियों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर विद्यार्थियों को अर्थदंड की राशि जमा करना है। समयावधि निकलने के बाद विद्यार्थियों पर अर्थदंड के साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। प्रतिदिन 100 रुपये रखा गया है। तीन विद्यार्थियों को पूर्व में भी रैगिंग में शामिल होना पाया गया था। इन पर दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है और कैम्पस प्लेसमेंट की गतिविधियों से बाहर कर दिया गया है। यूजीसी को भी भेजी रिपोर्ट आईईटी के निदेशक डॉ. प्रतोष बसंल का कहना है कि रैगिंग को लेकर कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है। चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने की अनुशंसा की है। कुछ विद्यार्थियों को हॉस्टल और प्लेसमेंट से बाहर किया गया है। कुलगुरु और यूजीसी को रिपोर्ट भेज दी गई है। विश्वविद्यालय के अब फैसले के बाद कार्रवाई की जाएगी।

शिवपुरी में वकील संजय सक्सेना की हत्या के तीन आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार

शिवपुरी. शिवपुरी जिले में करैरा में कोर्ट जाते समय वकील संजय सक्सेना को गोली मारकर उनकी हत्या करने वाले शूटरों गोलू पुत्र अरविंद रावत, पपेंद्र पुत्र हरदास रावत, जहीर पुत्र रफीक को पुलिस ने अलसुबह हुए शॉर्ट एनकांउटर में गिरफ्तार कर लिया है। इस एनकाउंटर में पपेन्द्र को दो गोली लगने की जानकारी सामने आई है। करैरा में शनिवार सुबह करीब 11 बजे बदमाशों ने 57 वर्षीय वकील संजय कुमार सक्सेना की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह निचली बस्ती से गुर्जर दरवाजे होते हुए जंगल के सुनसान रास्ते से बाइक पर सवार होकर न्यायालय जा रहे थे। जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया है, उसे देखकर यह अंदेशा है कि बदमाशों ने पहले उनके आने-जाने के रास्ते की रैकी की थी और इसके बाद घात लगाकर उनके सीने में गोली उतार दी। करीब से मारी गई गोली पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने वकील को रोककर बहुत करीब से उन्हें गोली मारी। स्वजन के आरोपों के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था। अभिभाषक संघ ने भी दो दिन में आरोपितों की गिरफ्तारी न होने पर सोमवार से न्यायालय में काम बंद कर हड़ताल की चेतावनी दी थी। शाम करीब सात बजे पुलिस में अंतिम संस्कार किया गया। दूरी कम हो जाए इसलिए जंगल के रास्ते से जाते थे कोर्ट बताया जा रहा है कि एडवोकेट संजय सक्सेना अगर रोड वाले रास्ते से कोर्ट जाते तो उन्हें करीब आठ किमी की दूरी घर से कोर्ट जाने के लिए तय करनी पड़ती थी। वहीं जंगल वाले सुनसान रास्ते से महज चार किमी की दूरी तय करने पर वह कोर्ट पहुंच जाते थे। यही कारण था कि वह जंगल वाले सुनसान रास्ते का प्रयोग कोर्ट जाने में करते थे। इसी का लाभ हत्यारों ने उठाया।

बेटे के इलाज के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने की 1.59 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी

शहडोल. शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र से ऑनलाइन ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बेटे के इलाज के लिए डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च करना एक परिवार को भारी पड़ गया। ठगों ने डॉक्टर बनकर बात की और उपचार के नाम पर एक ऐप डाउनलोड कराकर शिक्षक की पत्नी से एक लाख उनसठ हजार रुपये की ठगी कर ली। अब पीड़ित परिवार पैसे वापस दिलाने की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन से गुहार लगा रहा है। जानकारी के अनुसार, ब्यौहारी निवासी शिक्षक शिवेश कुमार सिंह के छोटे बेटे का इलाज नागपुर में चल रहा है। बेटे की तबीयत खराब होने पर उसकी मां आरती सिंह डॉक्टर से अपाइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर नंबर सर्च कर रही थीं, इसी दौरान उनका कॉल असली डॉक्टर के बजाय साइबर ठगों के पास पहुंच गया। ठगों ने खुद को डॉक्टर का स्टाफ बताते हुए विश्वास में लिया और एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने को कहा। खाते से रकम निकालना शुरू कर दी महिला ने जैसे ही ऐप डाउनलोड किया, ठगों ने चरणबद्ध तरीके से उनके खाते से रकम निकालनी शुरू कर दी। पहले दो बार में 50-50 हजार रुपये और फिर एक बार में 59 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इस तरह कुल एक लाख 59 हजार रुपये की ठगी हो गई। महिला की छोटी सी गलती के चलते न सिर्फ मेहनत की कमाई चली गई, बल्कि डॉक्टर का अपाइंटमेंट भी नहीं मिल सका। अब शिक्षक पिता अपने बीमार बेटे के इलाज और ठगी के शिकार हुए पैसे की वापसी के लिए करीब 100 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय में पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में एडिशनल एसपी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। महिला द्वारा डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च किया गया था, जो ठगों के पास कनेक्ट हो गया। फिलहाल मामले की साइबर सेल के माध्यम से जांच कर उचित कार्रवाई की जा रही है।

ग्वालियर में बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की थी आत्महत्या

ग्वालियर. शहर के थाटीपुर क्षेत्र में 95 वर्षीय बुजुर्ग की आत्महत्या के मामले में बड़ा राजफाश हुआ है। बुजुर्ग अपनी बड़ी बहू से प्रताड़ित थे। सुसाइड नोट में बहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह तक लिखा है-वह प्रताड़ित करती है, मारपीट भी करती है। अब जीने की स्थिति नहीं रही, इसलिए जान दे रहा हूं। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है। सुसाइड नोट की जांच हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से होगी। इसके बाद ही इस मामले में एफआइआर होगी। थाटीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेहरू कॉलोनी में रहने वाले 95 वर्षीय रामाधार गुप्ता डेयरी संचालक थे। कुछ समय से उनकी डेयरी बेटा सुरेश चंद्र गुप्ता संभाल रहा है। बीती रात रामाधार ने खुद को लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को सुसाइड नोट मिला था, जिसमें आत्महत्या की वजह लिखी थी। सुसाइड नोट में बड़ी बहू द्वारा दिन-रात प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। पुलिस ने शनिवार को शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। सुसाइड नोट के अंश… मैं रामाधार अपनी बड़ी बहू की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर रहा हूं। बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किया गया है, जिसके कारण यह कदम उठा रहा हूं। बड़ी बहू सुनीता बहुत परेशान करती है। यह परेशानी इतनी बढ़ गई है, अब मुझसे झिल नहीं रही है। मैं इस कारण ही आत्महत्या कर रहा हूं। बहुत कुछ सह चुका हूं, लेकिन अब यह सब झिल नहीं रहा है। उम्र 95 वर्ष हो चुकी है। सुनीता से कई बार कहा- मेरी उम्र अब मरने लायक है। ऐसे में कहां जाऊंगा। मेरी मौत का मामला सुनीता पर जरूर दर्ज किया जाए। मेरी छोटी बहू ख्याल रखती है। बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी बुजुर्ग की आत्महत्या के मामले की जांच जारी है। सुसाइड नोट में बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। इसकी जांच कराई जा रही है। अभी मर्ग कायम किया है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। – विपेंद्र सिंह चौहान थाना प्रभारी, थाटीपुर।

इंदौर में नई ‘नेटम’ तकनीक से बनेगा छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन

इंदौर. छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। मेट्रो के अन्य सभी भूमिगत स्टेशन में इसके निर्माण की तकनीक अलग रहेगी। यह न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मैथ (नेटम) तकनीक से होगा। ओपन कट के बजाए इस तकनीक से निर्माण करने पर मल्हागंज क्षेत्र के 142 आवासीय व व्यावसायिक इमारतें बच जाएंगी यानी इन्हें नहीं तोड़ना पड़ेगा। गौरतलब है कि मल्हारगंज क्षेत्र में भवनों को तोड़े जाने की नौबत आने के कारण यहां के रहवासी पिछले कुछ महीनों से विरोध जता रहे थे। नौ फरवरी को इस संबंध में गांधी नगर स्थित मेट्रो डिपो कार्यालय में बैठक हुई। इसमें नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन और छोटा गणपति क्षेत्र के नागरिक भी शामिल हुए। मेट्रो के अधिकारियों ने सभी को छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन की निर्माण की तकनीक बदलने के बाद उससे आवासीय व व्यावसायिक भवनों के प्रभावित न होने की जानकारी दी थी। इसके बाद शुक्रवार को भी मेट्रो के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भूमिगत स्टेशन की तकनीक के बारे में बताया। रंगपंचमी के बाद शुरू होगा निर्माण एयरपोर्ट से रीगल तक सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें रीगल व छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। शेष के लिए बोरिंग मशीनों के माध्यम से पाइलिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन के निर्माण पर रहवासियों के विरोध के कारण निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ था। शनिवार को हुई बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने मेट्रो के अधिकारियों को जल्द से जल्द इस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। मेट्रो प्रबंधन रंगपंचमी के बाद इस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू करेगा। इस तरह तैयार होगा छोटा गणपति स्टेशन जियोटेक्नीकल इन्वेस्टिगेशन में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो स्टेशन की जमीन के 38 मीटर (लगभग 125 फीट) गहराई में कठोर चट्टानें मिली हैं। इस वजह से यह स्टेशन ज्यादा गहराई में बनेगा। मेट्रो के अन्य भूमिगत स्टेशन 18 से 22 मीटर गहराई पर बन रहे हैं। 146 मीटर होगी स्टेशन की लंबाई पूर्व में स्टेशन का निर्माण ओपन कट पद्धति से 190 मीटर की लंबाई में प्रस्तावित था। इससे निर्माण क्षेत्र में 142 निजी आवासीय एवं व्यावसायिक मकान टूट रहे थे। अब स्टेशन की लंबाई 146 मीटर होगी। 142 भवन नहीं तोड़े जाएंगे। निगम का गार्डन व मल्हारगंज थाना टूटेगा इस भूमिगत स्टेशन के निर्माण के लिए मल्हारगंज क्षेत्र में बने नगर निगम के दो उद्यान उनकी बीच की 22 मीटर चौड़ी सड़क पर खोदाई होगी। यहां निगम की बनी 12 दुकानें, मल्हारगंज पुलिस स्टेशन, छह पुलिस क्वार्टर तोड़े जाएंगे। प्रवेश निकास गेट के लिए लाल अस्पताल की 0.09 हेक्टेयर आंशिक भूमि ली जाएगी। भूमिगत निर्माण की तकनीकों में यह है अंतर ओपन कट तकनीक: भूमिगत स्टेशन के लिए जमीन के ऊपर 146 से 190 मीटर लंबाई वाले हिस्से 300 से ज्यादा पिलर बोरिंग मशीन के माध्यम से जमीन की गहराई 18 से 22 मीटर तक तैयार किए जाते हैं। इसके बाद जमीन की ऊपरी सतह से स्टेशन की गहराई तक मिट्टी की खोदाई कर मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाता है। नेटम तकनीक: स्टेशन के लिए जमीन के ऊपर कम जगह मिलने पर 80 मीटर लंबाई छोटा कट लगाकर जमीन में जहां कठोर चट्टानें मिलती हैं, उस गहराई तक पहुंचते हैं। उसके बाद जमीन की गहराई में कंट्रोल ब्लास्टिंग के माध्यम से अंडर ग्राउंड स्टेशन निर्माण के लिए जमीन के दोनों ओर लगभग 35-35 मीटर लंबाई में खोदाई कर विस्तार किया जाता है। इस तरह स्टेशन बनता है। सबसे छोटा होगा स्टेशन लेकिन गहराई में तीन मंजिला बनेगा वर्तमान में एयरपोर्ट से रीगल तक प्रस्तावित सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन में से छोटा गणपति स्टेशन सबसे छोटा होगा। अन्य भूमिगत स्टेशन 190 मीटर लंबाई में बन रहे हैं। यह 146 मीटर में तैयार होगा। अन्य भूमिगत स्टेशन जमीन में नीचे दो मंजिला बनेंगे, जबकि यह स्टेशन जमीन के नीचे तीन मंजिला होगा। कवि सत्तन ने प्रस्तावित स्टेशन की मौजूदा स्थिति को इस तरह काव्य भाव से समझाया न किसी की गटर जाएगी, न किसी की शटर जाएगी, नीचे से मेट्रो निकल जाएगी। सब सुरक्षित रहेंगे, जो लोग भयग्रस्त थे वो निश्चिंत रहें…। इस तरह बनी सहमति 9 फरवरी: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन व मल्हारगंज के स्थानीय लोगों के साथ मेट्रो के अधिकारियों की बैठक हुई। 13 फरवरी: मल्हारगंज क्षेत्र के व्यापारी व रहवासियों के साथ बड़ा गणपति स्थित मेट्रो के आफिस में बैठक हुई और उन्हें तकनीक समझाई गई।

बिना परमिट दौड़ रही बसों पर लगेगा ब्रेक, 16 फरवरी से स्पेशल ड्राइव शुरू

इंदौर मध्य प्रदेश की सड़कों पर नियमों का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से चल रही बसों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना परमिट या निर्धारित रूट का पालन न करने वाले बस ऑपरेटरों पर परिवहन विभाग शिकंजा कसने जा रहा है। नए परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है और 16 फरवरी से प्रदेशव्यापी विशेष जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में परमिट उल्लंघन की बढ़ती शिकायतों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते विस्तृत डेटा विश्लेषण भी किया जा रहा है। इंदौर में भी विशेष अभियान चलाकर बसों की जांच की जाएगी। पिछले वर्ष भी परिवहन कार्यालय इंदौर ने बसों की लगातार जांच का अभियान चलाया था, जिसमें लगभग 400 बसों पर कार्रवाई की गई थी।   नियमों का उल्लंघन जारी हालांकि, पूरे साल चले अभियान के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहा है। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर जांच की जाएगी। इंदौर से विभिन्न रूटों पर प्रतिदिन लगभग एक हजार बसों का संचालन होता है। इन बसों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग विशेष अभियान शुरू करेगा। जांच के दौरान बसों में कमियां पाए जाने पर जब्ती के साथ ही जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। लगातार की जा रही कार्रवाई के कारण बस संचालक अपनी बसों की कमियों को दूर कर लेते हैं, जिससे हादसों पर अंकुश लगता है। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग जांच अभियान को पुनः शुरू करने जा रहा है। स्लीपर बसों पर भी कार्रवाई की गई है, जिसमें फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम, आपातकालीन द्वार और ड्राइवर केबिन में नियमों के विरुद्ध पार्टीशन को लेकर कार्रवाई की गई है।