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सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय: कमजोर छात्राओं की बोर्ड परीक्षा तैयारी के लिए शिक्षक कर रहे घर-घर पढ़ाई

 ग्वालियर माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं सात फरवरी से शुरू हो रही हैं। परीक्षा को लेकर जहां शिक्षा विभाग स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और छुट्टी वाले दिन भी पढ़ाई करवा रहा है, वहीं सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय के शिक्षकों ने छात्राओं की तैयारी के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। स्कूल के शिक्षक अब छात्राओं के घर तक पहुंचकर उन्हें पढ़ा रहे हैं, ताकि कमजोर छात्राएं भी अच्छे अंक ला सकें और स्कूल का परिणाम शत-प्रतिशत बना रहे। यह पहल खास तौर पर उन छात्राओं के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया या जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं से नहीं जुड़ पा रही थीं। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने मिलकर ऐसी छात्राओं की सूची तैयार की और फिर उनके क्षेत्रों में जाकर सामूहिक पढ़ाई का प्रयोग शुरू किया। शिक्षक ऐसे इलाकों का चयन कर रहे हैं, जहां आसपास कई छात्राएं रहती हों, ताकि एक साथ अधिक छात्राओं को लाभ मिल सके। शिक्षक पहुंचे छात्राओं के घर विद्यालय के विज्ञान शिक्षक पवन चौरसिया, चंद्रभान तमोली, एनडी दीक्षित सहित अन्य शिक्षक अपने-अपने विषयों के अनुसार छात्राओं को उनके घर जाकर पढ़ा रहे हैं। तय समय पर शिक्षक छात्राओं के घर पहुंचते हैं और पाठ्यक्रम की दोहराई, प्रश्न-उत्तर अभ्यास और शंकाओं का समाधान करते हैं। इससे छात्राओं को न केवल विषयों की बेहतर समझ मिल रही है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। घर पर पढ़ाने की वजह शिक्षकों का कहना है कि कई छात्राएं घरेलू जिम्मेदारियों, दूरी या अन्य व्यक्तिगत कारणों से स्कूल नियमित नहीं आ पातीं। ऐसे में घर जाकर पढ़ाने से उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनी रहती है। खास बात यह है कि सांदीपनि स्कूलों में सामान्यतः तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले छात्र-छात्राओं को ही प्रवेश दिया जाता है, जिससे शिक्षकों को घर-घर पहुंचने में ज्यादा कठिनाई नहीं हो रही है। मुख्य विषयों पर विशेष फोकस इस पहल के तहत गणित, विज्ञान और हिंदी जैसे मुख्य विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षक सरल उदाहरणों और आसान भाषा में पाठ समझा रहे हैं, ताकि छात्राएं विषय को जल्दी और बेहतर तरीके से समझ सकें। कई अभिभावकों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा है कि इससे उनकी बेटियों की पढ़ाई को नई दिशा मिली है। घर पर जाकर कराएंगे परीक्षा की तैयारी रवींद्र शर्मा, प्राचार्य, सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय ने कहा कि कई छात्राओं को स्कूल की अतिरिक्त कक्षाओं में आने में परेशानी थी, इसलिए स्कूल के शिक्षकों ने तय किया कि वे उनके घर पर जाकर उन्हें पढ़ाएंगे और परीक्षा की तैयारी कराएंगे। अधिकारी की प्रतिक्रिया हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे शहर के अन्य स्कूलों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय की यह पहल उन छात्राओं के लिए उम्मीद की किरण बन रही है, जो किसी न किसी वजह से पढ़ाई की मुख्यधारा से पीछे छूट रही थीं।

बड़ी ऊर्जा योजना: अनूपपुर में निवेश से 4,000 मेगावॉट बिजली, 60 हजार करोड़ खर्च होंगे

अनूपपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में  समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में 4 हजार मेगावॉट बिजली के पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए. मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक  विशेष गढ़पाले तथा टोरेंट पॉवर लिमिटेड के  जिगिश मेहता, अदानी पॉवर लिमिटेड के  एस.बी. खिलया तथा हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स के  रतुल पुरी के बीच पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट का आदान-प्रदान हुआ. यह नए पॉवर हाउस अनूपपुर में स्थापित होंगे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बिजली का महत्व शरीर में प्राणों की समान है. जैसे समस्त गतिविधियों के संचालन के लिए शरीर में प्राण आवश्यक है, वैसे ही किसी भी राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता आवश्यक है. 4000 मेगावॉट से ऊर्जा का विस्तार- सीएम मोहन यादव सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में 60 हजार करोड़ रुपए की लागत से 4 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए हुए समझौते प्रदेश के स्थाई विकास का आधार बनेंगे. इससे प्रदेश में कुल विद्युत उपलब्धता में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ बिजली की मांग की शत-प्रतिशत आपूर्ति संभव होगी. डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट मॉडल पर स्थापित होने वाले इन नए विद्युत संयंत्रों से लगभग 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.  निवेशकों की पहली पसंद मध्यप्रदेश- सीएम मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग मित्र नीतियों, सशक्त अधोसंरचना और सुशासन आधारित व्यवस्था के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश -विदेश के निवेशकों और औद्योगिक समूहों के लिए पहली प्राथमिकता बनता जा रहा है. विद्युत उत्पादन में भूमि-जल- पर्यावरण-कोयला- रेलवे लाइन आदि का बेहतर समन्वय आवश्यक है. इन सब आधारों पर मध्यप्रदेश उपयुक्त है. प्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं. प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को मिला पीएम मित्र पार्क विकास के नए आयाम और रोजगार के भरपूर अवसर प्रदान करेगा. प्रदेश में साल-2026 को कृषक कल्याण साल के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है. इससे उद्यमिता, स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा.

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया, मध्य प्रदेश सरकार से जवाब तलब

भोपाल एमपी में प्रमोशन में आरक्षण मामले में बड़ा अपडेट सामने आय़ा है। हाईकोर्ट ने पॉलिसी के सबंध में जवाब मांगा है। दरअसल मध्य प्रदेश मे प्रमोशन में आरक्षण मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इस मामले में 27 जनवरी यानिकी आज एक बार फिर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट में सपाक्स और अजाक्स की ओर से प्रमोशन में आरक्षण को लेकर पक्ष रखा गया। इस दौरान सपाक्स कर्मचारियों के ग्रेडेशन आंकड़े भी पेश किए किए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य की नई प्रमोशन पॉलिसी पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने इस पॉलिसी में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के पालन के संबंध में प्रश्न पूछे है और राज्य सरकार को एक हफ्ते के अंगर ही जवाब देने का फरमान सुनाया है। इस अहम मामले में  हाईकोर्ट ने अजाक्स और सरकारी अधिवक्ताओं को अपने तर्क पेश करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश की प्रमोशन पॉलिसी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुरानी पॉलिसी को लेकर पूछा कि क्या सुधार करके नई पॉलिसी बनाई गई है। साथ ही कोर्ट ने पूछा कि आरबी राय मामले में बताई गई कमियों को पूरा करने के लिए सरकार ने क्या-क्या किया है? इस मामले की अगली सुनवाई अब 3 फरवरी प्रमोशन में आरक्षण मामले में अब अगली सुनवाई अगले महीने 3 फरवरी को होगी। लिहाजा अब राज्य  सरकार को जवाव देना होगा।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा 15 दिनों में फिर से होगी, बदलाव से प्रभावित कई अभ्यर्थी

इंदौर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एमपीपीएससी (MPPSC) के तहत मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती से जुड़े मामले में फैसला सुनाया है. इंदौर हाईकोर्ट ने मामले में पूरी प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने के निर्देश मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को दिए हैं. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद कई मेडिकल ऑफिसर्स को बड़ी राहत मिली है. अचानक जोड़ दिया गया एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम एमपीपीएससी द्वारा साल 2024-2025 में मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर वैकेंसी निकाली गई थी. जहां कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे. जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे, उनके इंटरव्यू किए गए. इसी बीच ऐन वक्त पर रजिस्ट्रेशन में एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम जोड़ दिया गया. जिसके चलते कई एमबीबीएस डॉक्टर भर्ती प्रक्रिया में से बिना दस्तावेज जांच बाहर हो गए. इस मामलों को लेकर जो डॉक्टर प्रक्रिया को पूरी होने के बाद अचानक से बाहर हुए, उन्होंने इंदौर हाई कोर्ट में एडवोकेट तुषार सोडानी के माध्यम से एक याचिका लगाई. अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका याचिका में एमपीपीएससी द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर मेडिकल ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू के दिन ही अचानक एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नया नियम जोड़ देने की जानकारी कोर्ट को दी गई. साथ ही जिन अभ्यर्थियों के पास यह रजिस्ट्रेशन नहीं था, उन्हें फोन कर इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया. अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ एक प्रतिनिधि भी भेजा, लेकिन एमपीपीएससी ने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली. 15 दिनों में फिर से परीक्षा आयोजित कराने का आदेश इंदौर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एडिशनल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नियमों में नहीं है. असल आवश्यकता केवल पीजी मार्कशीट और पीजी रिजल्ट की थी. जिसे अभ्यार्थी पहले ही प्रस्तुत कर चुके थे. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 'रूल ऑफ द गेम बीच में बदले नहीं जा सकते.' अब हाई कोर्ट की इंदौर बेच ने एमपीपीएससी को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर सभी प्रतिनिधित्व पर निर्णय लें और नई प्रक्रिया में पात्रता सुनिश्चित करें. साथ ही भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सभी अभ्यार्थियों को मौका दें और रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट करें. 

सिंहस्थ की तैयारी: उज्जैन में 100 एकड़ में फूलों का विशाल क्लस्टर, 30 जनवरी को भोपाल में फ्लॉवर एग्जीबिशन

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन में 100 एकड़ जमीन पर फूलों का विशेष उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर यह क्लस्टर धार्मिक नगरी उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में फूलों की बढ़ेगी खेती।  महाकालेश्वर सहित आसपास से आती है फूलों की डिमांड उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने बताया कि उज्जैन, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की बड़ी मांग रहती है। इसी को देखते हुए सरकार ने उज्जैन के आसपास व्यावसायिक पुष्प उत्पादन क्लस्टर विकसित करने की कार्य योजना बनाई है। सिंहस्थ 2028 को अवसर के रूप में देख रहा है विभाग मंत्री कुशवाह ने कहा कि सिंहस्थ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना के लिए फूलों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में बाहर से फूल मंगाने की बजाय स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस क्लस्टर के माध्यम से उज्जैन और आसपास के किसानों को गुलाब, गेंदा, जरबेरा, रजनीगंधा, सेवंती, ग्लेडियोलस जैसे अधिक मांग वाले फूलों की वैज्ञानिक और व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि पुष्प उत्पादन को केवल पारंपरिक खेती न मानते हुए कृषि-उद्यम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक मिलेगा सहयोग     उन्नत किस्मों के पौधों की उपलब्धता     आधुनिक खेती तकनीकों का प्रशिक्षण     कोल्ड स्टोरेज और भंडारण सुविधाएं     मंडी और बाजार से सीधा जुड़ाव     पुष्प प्रसंस्करण इकाइयों से कनेक्शन प्रदेश को पुष्प उत्पादन में अग्रणी बनाने की योजना मंत्री कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही पुष्प उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उज्जैन में 100 एकड़ का यह क्लस्टर राज्य को पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में नंबर-वन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अधिकारियों की फेरबदल की बंपर लिस्ट जारी, राज्य प्रशासन में बड़ा बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में कार्यरत एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों को इधर से उधर करते हुए नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। यह सभी अधिकारी राज्य पुलिस सेवा के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) संवर्ग से हैं। प्रदेश के गृह विभाग द्वारा मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए गए। जारी आदेश के मुताबिक 12 उप पुलिस अधीक्षकों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं उप सेनानी के पदों पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों एवं इकाइयों में तैनात किया गया है। यह तबादले तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। गृह विभाग के अपर सचिव आशीर्ष भार्गव द्वारा 27 जनवरी को जारी आदेश में सभी अधिकारियों को नवीन पदस्थापना स्थल पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह फेरबदल पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। 

ग्वालियर, भोपाल समेत कई शहरों में घना कोहरा, एमपी में मौसम ने बदला रुख; बारिश और ओले से फसलें प्रभावित

भोप्ला  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक रौद्र रूप ले लिया है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के असर से प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे जनजीवन और खेती दोनों प्रभावित हुए हैं। ठंड के बीच बारिश-ओलों के इस दौर ने तापमान और गिरा दिया है। मंगलवार को 20 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि गुना, उज्जैन, आगर-मालवा और शाजापुर में ओलावृष्टि हुई। ग्वालियर, सागर समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को भी हालात ऐसे ही बने रहने की चेतावनी दी है। ग्वालियर, सागर समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सागर और दमोह शामिल हैं। वहीं, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली में बादल छाए रहने के आसार हैं। बारिश के साथ कोहरे की चादर उत्तरी मध्य प्रदेश में जहां बारिश का अलर्ट है, वहीं सुबह के समय घना कोहरा भी परेशानी बढ़ा रहा है। ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई जिलों में मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन और सीहोर में भी दृश्यता प्रभावित हुई। ग्वालियर-शिवपुरी में स्कूल बंद लगातार बारिश और बढ़ती ठंड को देखते हुए ग्वालियर प्रशासन ने एहतियातन बुधवार को कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। शिवपुरी समेत आसपास के इलाकों में भी ठंड का असर तेज रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, खंडवा, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम, खंडवा, बड़वानी, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, रीवा, सतना, टीकमगढ़, छतरपुर, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा, देवास, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, खरगोन, सीहोर, सागर, मऊगंज, धार आदि जिलों में 24 घंटे के अंदर बारिश का दौर चला। ग्वालियर में सबसे ज्यादा ढाई इंच, गुना, शिवपुरी-सागर में 1 इंच, दतिया में पौन इंच और राजगढ़ में आधा इंच पानी गिर गया। उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, मुरैना, सीहोर, सागर, रायसेन व अन्य जिलों में ओले भी गिरे। बारिश, आंधी-ओले के मौसम के बीच बुधवार सुबह घना कोहरा भी छाया रहा। ग्वालियर में सबसे कम विजिबिलिटी दर्ज की गई। यानी, यहां 50 मीटर के बाद कुछ नहीं दिखा। खजुराहो, भोपाल, दतिया, नर्मदापुरम, नौगांव, रीवा, सतना, राजगढ़, सागर, गुना, रायसेन, श्योपुर, बालाघाट, उमरिया, सिवनी, मंडला, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर में कोहरा दर्ज किया गया। हालांकि, रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। बारिश के बाद एमपी में बढ़ी ठंड मध्य प्रदेश में मंगलवार को हुई बारिश के बाद एक बार फिर ठंड की वापसी हो गई है। तेज हवाओं के कारण कंपकंपी बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, देवास, खंडवा, शाजापुर, शिवपुरी, मऊगंज, सागर, उज्जैन समेत कई जिलों में बारिश हुई। जिसके बाद आज ठंड भी बढ़ गई है। ग्वालियर में बारिश के बाद आज कक्षा-8 तक के स्कूलों की छुट्टी भी घोषित कर दी गई है। मध्य प्रदेश का सबसे ठंडा जिला मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को एमपी में सबसे कम न्यूनतम तापमान शिवपुरी में रहा। यहां पर न्यूनतम पारा 7 डिग्री सेल्सियस डिग्री दर्ज किया गया। इसके बाद खुजराहों में 7.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम पारा रिकॉर्ड हुआ। वहीं सबसे कम अधिकतम तापमान मुरैना में 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान 3 जिलों में 30 डिग्री या उससे ऊपर अधिकतम पारा रहा। जिनमें मंडला, खंडवा और खरगौन शामिल हैं। ओलावृष्टि से खेती को झटका मंगलवार को प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का असर देखा गया। आगर-मालवा, शाजापुर और गुना में गिरे ओलों से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। रतलाम, शाजापुर और आगर में तेज हवा के चलते खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं। कई जगह सड़कों पर पानी बह निकला। रात के समय निवाड़ी, दतिया, श्योपुर, उज्जैन, खरगोन और धार में आकाशीय बिजली चमकती रही। 

खूबचंद की मौत के बाद प्रदर्शन जारी, इंदौर में दूषित पानी से संकट, ICU में तीन मरीज और वेंटिलेटर पर एक

इंदौर  भागीरथपुरा के खूबचंद पिता गन्नूदास की दूषित पानी से मंगलवार को मौत हो गई थी। बुधवार को उनके परिजनों ने अंत्येष्टी से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। खूबचंद की मौत के साथ ही भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या 29 हो चुकी है।  यह कहा जाता है कि द्यजल ही जीवन हैद्ग, लेकिन देश के सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर की एक बस्ती में पानी ही मौत की वजह बन गया है। दूषित पानी के कारण भागीरथपुरा में 30 दिन में 29 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी तीन लोग जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस कांड को एक माह पूरा हो रहा है, लेकिन अभी भी पूरी बस्ती में साफ पानी नहीं मिल पाया है और न ही अफसर यह बता पाए कि दूषित पानी के कारण आखिर इतनी मौतें कैसे हो गईं? यह कांड सामने आने के बाद कई सरकारी जांचें हुईं और आयोग का गठन भी हो चुका है। मामला कोर्ट में है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ है। 29 दिसंबर को भागीरथपुरा बस्ती के 20 मरीज दो अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। उन्हें देखने क्षेत्रीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे थे, जिसके बाद दूषित पानी से फैल रही बीमारी का खुलासा हुआ। 30 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती एक व्यक्ति की पहली मौत हुई थी। इन मौतों के पीछे नगर निगम की भारी लापरवाही उजागर हुई है। बस्ती की पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। भागीरथपुरा से जुड़ा नगर निगम का जोन शिकायतों के मामले में शहर में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो माह में यहाँ सबसे ज्यादा गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन अफसरों ने उन पर ध्यान नहीं दिया। शौचालय के नीचे से गुजरती रही पाइपलाइन हैरानी की बात यह है कि सालभर से लाइन बदलने के प्रस्ताव तैयार थे, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। गंदे पानी की शिकायतों को अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जिस नर्मदा लाइन से घरों में पानी जाता है, उसके ऊपर पुलिस चौकी का शौचालय बना दिया गया और मल-मूत्र का पानी नर्मदा लाइन में समाता रहा। जब मौतें होने लगीं, तब अफसरों ने शौचालय तोड़कर लीकेज खोजा। पूरी लाइन में 30 से ज्यादा लीकेज मिले, जिन्हें एक माह बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की पेश रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुरक्षित पानी की आपूर्ति, इलाज और जांच संबंधी निर्देशों का पूरा पालन नहीं हुआ है। मौतों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर असहमति सामने आई। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को जलजनित बीमारी से जोड़ा गया है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या लगभग 30 बताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। आयोग जल प्रदूषण के कारणों, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे पर रिपोर्ट देगा। कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश देते हुए चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी। आयोग को व्यापक अधिकार आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए गए हैं। वह अधिकारियों व गवाहों को तलब कर सकेगा, दस्तावेज मंगा सकेगा, जल गुणवत्ता परीक्षण करा सकेगा और स्थल निरीक्षण कर सकेगा। राज्य सरकार आयोग को आवश्यक स्टाफ, कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराएगी। रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि भागीरथपुरा के 30 प्रतिशत हिस्से में वाटर सप्लाई शुरू कर दी गई है। यह हिस्सा साढ़े 9 किमी का है। हालांकि, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में यूज किए गए वर्बल अटॉप्सी शब्द पर भी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने पूछा है कि यह शब्द मेडिकल का है या आपके द्वारा ईजाद किया है। अदालत ने यह भी पाया कि रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं और उसमें पर्याप्त तर्क एवं सहायक सामग्री का अभाव है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए अधिक उपयुक्त, ठोस और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करें। इसके अलावा अंतरिम राहत के स्वरूप पर भी चिंता व्यक्त की। सवाल उठाया है कि समिति अपने सुझावों का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन किस प्रकार सुनिश्चित करेगी। क्षेत्र में लगातार हो रही मौतें और उनके कारणों की अनिश्चितता अत्यंत चिंताजनक है। रिपोर्ट को बताया ‘आई-वॉश’ सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए उसे मात्र एक 'आई-वॉश' करार दिया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने नगर निगम को निर्देशित किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता के सुझाए गए परीक्षणों पर गंभीरता से विचार किया जाए। कोर्ट की सभी चिंताओं का स्पष्ट एवं ठोस उत्तर प्रस्तुत करें। इसके अलावा, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न्यायालय परिसर में स्वच्छता और जल की स्थिति का भी संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सिर्फ 8 पैरामीटर्स पर पानी की कैसी टेस्टिंग निगम की ओर से तर्क दिया कि पानी की टेस्टिंग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 8 मानकों पर पानी की टेस्टिंग की गई जबकि 2018 में मप्र प्रदूषण मंडल ने भागीरथपुरा समेत इंदौर के पानी की 34 मानकों पर टेस्टिंग की थी। इस पानी को फिकल कंटामिनेटेड पाया था। ऐसे में जब भागीरथपुरा में 28 मौतें हो चुकी हैं तो निगम सिर्फ 8 मानकों पर टेस्टिंग कैसे कर रही है। निगम ने यह भी नहीं बताया कि टेस्टिंग का तरीका क्या था। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से विश्वस्तरीय तीन पैरामीटर्स पर पानी की टेस्टिंग के तीन तरीके बताए गए। मदद रेडक्रॉस से, शासन की ओर से कुछ भी नहीं याचिकाकर्ता की ओर से बताया कि मुआवजे को लेकर भी झूठी जानकारी दी जा रही है। अभी मृतकों को जो 2-2 लाख रुपए की राशि दी गई है वह रेड क्रॉस सोसायटी की ओर … Read more

अयोध्या जाना हुआ आसान: 13 फरवरी से चलेगी स्पेशल ट्रेन, जानें किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी

भोपाल आने वाले फरवरी और मार्च के महीने में अगर आप अयोध्या जाने का प्लान कर रहे है तो ये खबर आपके काम की है। जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अयोध्या जाने वाले यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेन (Special Train) चलाने का फैसला लिया है। ये स्पेशल ट्रेन तीन राज्यों को कवर करके चलेगी। इसकी शुरुआत गुजरात के उधना जंक्शन से होगी। यह संचालन दोनों दिशाओं में सात-सात फेरे के लिए किया जाएगा। ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल श्रेणी की बोगियां होंगी। जानें क्या रहेगी ट्रेन की टाइमिंग रेलवे गुजरात के उधना जंक्शन से लखनऊ होकर अयोध्या कैंट के लिए 13 फरवरी से स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू होगा। ट्रेन नंबर 09093 उधना से 13 फरवरी से 27 मार्च तक प्रत्येक शुक्रवार की सुबह 7:25 बजे चलेगी। यह ट्रेन वडोदरा, गोधरा, रतलाम, उज्जैन, बीना, झांसी, कानपुर के रास्ते शनिवार 7:45 बजे लखनऊ पहुंचेगी।   यहां से छूटने के बाद ट्रेन बाराबंकी होकर सुबह 08:30 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी। इसी तरह वापसी यात्रा में 09094 स्पेशल अयोध्या कैंट से 14 फरवरी से 28 मार्च तक प्रत्येक शनिवार को शाम 5:17 बजे छूटेगी। यह ट्रेन शाम 6:40 बजे लखनऊ होते हुए रविवार शाम 5:15 बजे उधना पहुंचेगी। एमपी के इन स्टेशनों में होगा स्टॉपेज ये ट्रेन मध्यप्रदेश के रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, सीहोर, संत हिरदाराम, बीना में रुकेगी। आगे ये ट्रेन कानपुर, लखनऊ के रास्ते अयोध्या जाएगी। ये ट्रेन कुल 15 स्टेशनों में रुकेगी।   इस ट्रेन में टिकट बुक करने के लिए आप IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट (irctc.co.in) या IRCTC Rail Connect ऐप का उपयोग कर सकते हैं। ऐप में लॉगिन करें, यात्रा का विवरण (स्थान, तारीख) दर्ज करें, ट्रेन चुनें, यात्री विवरण भरें और UPI/डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करें। इसके अलावा, आप रेलवे स्टेशन काउंटर पर भी टिकट ले सकते हैं।

सड़कों पर उतरी करणी सेना, UGC नीति के विरोध में 1 फरवरी को देशव्यापी बंद

इंदौर विश्विद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के द्वारा नई नीति के विरोध में करणी सेना आ गई है। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के स्थित देवी अहिल्या बाई विश्विद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और साथ कुलपति को ज्ञापन भी सौंपा। परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया देवी आहिल्या बाई विश्वविद्यालय के आरएनटी मार्ग स्थित परिसर में करणी सेना के कार्याकर्ताओं द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस दौरान करणी सेना अध्यक्ष अनुराग प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को हनुमान जी सरकार सद्बुद्धि दें। हम लोग शिक्षा में समानता के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 1 फरवरी को भारत बंद का ऐलान अनुराग सिंह ने बताया कि यूजीसी के प्रस्ताव के खिलाफ हम एक फरवरी को भारत बंद करेंगे। इसके बाद दो फरवरी को मध्यप्रदेश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपकर, उनसे पूछेंगे कि वह यूजीसी के इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं या समर्थन करते हैं। अगर वह विरोध करते हैं तो उनके लिखित में आश्वासन लेंगे कि वह केंद्र सरकार के सामने हमारी बात को रखें। वहीं, यूजीसी के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को चूड़ियां भेंट की जाएंगी और उनकी अर्थी भी निकालेंगे। सभी जगह समर्थन करने वाले सांसदों का विरोध किया जाएगा। दरअसल, यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें 15 जनवरी से देशभर की यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में लागू कर दिया गया है। इसको लेकर सरकार ने दावा किया है कि इससे कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्मस्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। साथ ही नए नियम के अनुसार, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को ईओसी बनाना जरूरी होगा।