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मप्र में नई योजना: 600 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार, 100% सब्सिडी पर मिलेगा बगीचा लगाने का फंड

 राजगढ़  जिले की 600 महिलाएं 600 एकड़ जमीन में संतरे की फसल उगाएंगी। इसके लिए शासन स्तर पर उन्हें सब्सिडी प्रदान की जाएगी। तीन साल के लिए 2 लाख 70 हजार रुपए की राशि बगीचे और उससे जुड़े कार्यों के लिए देगी। करीब 15 करोड़ से अधिक की सब्सिडी जिले की महिलाओं को तीन साल के भीतर मिलेगी। एक बगिया मां के नाम योजना के तहत दी जाएगी छूट दरअसल, मप्र शासन की 'एक बगिया मां के नाम' योजना के तहत यह छूट स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दी जाएगी। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत खुद की जमीन में महिलाएं संतरे की पैदावार कर पाएंगी। हर ब्लॉक में 100-100 महिलाओं का चयन करना है। जिसके लिए संबंधित महिला का स्व-सहायता समूह से जुड़ा होना जरुरी होगा। साथ ही स्व-सहायता समूह की महिला सदस्य के पास न्यूनतम 0.5 और अधिकतम 1 एकड़ खुद की जमीन होना जरूरी है। यानी समूह का हिस्सा होने पर ही फायदा मिलेगा। चयन शासन स्तर पर होगा। संबंधित जमीन को भी जांचा जाएगा कि वह संबंधित फल, पौधे वहां लग पाएंगे या नहीं? हालांकि राजगढ़ जिले में संतरे की पैदावार अच्छी होती है इसीलिए उसी को फाइनल किया जाना है। पहले भी यहां संतरे के बगीचे लगाए जा चुके हैं, जिनसे किसानों को काफी लाभ मिल रहा है। हर महिला को 2.70 लाख रुपए देंगे जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत शासन स्तर पर पूरी सब्सिडी दी जाएगी। गड्‌ढा खोदने से लेकर पौधे बड़े होने तक का खर्च शासन उठाएगा। जिसके तहत प्रत्येक महिला को 2 लाख 70 हजार रुपए तक की राशि दी जाएगी। इसमें मजदूरी, गड्‌ढा खोदना, पौधों की लागत, तार फेंसिंग सहित अन्य कार्य रहेंगे। तीन साल में जब पौधे बड़े हो जाएंगे और फल आने लगेंगे तो वे सीधा उन्हें बेच पाएंगे। जिले की 600 महिलाओं के लिए संतरे के बगीचे की योजना है। मिलेगी सब्सिडी- जिपं सीईओ इसमें शासन स्तर पर सब्सिडी मिलेगी। हर ब्लॉक में 100 महिलाओं को 100 एकड़ में बगीचे लगाए जाएंगे। पूरी सुविधा उन्हें शासन स्तर पर मिलेगी। -डॉ. इच्छित गढ़पाले, सीईओ, जिला पंचायत, राजगढ़ स्व-सहायता समूह का सदस्य होना जरूरी- प्रबंधक संबंधित महिलाओं का स्व-सहायता समूह से जुड़ा होना जरूरी है। उन्हें ही इसका लाभ मिलेगा। तीन साल तक पौधों की देख-रेख, पौधों का खर्च, तार फेंसिंग इत्यादि का कुल 2.70 लाख का खर्च शासन देगा। – संदीप सोनी, प्रबंधक, एनआरएलएम, राजगढ़

नई व्यवस्था लागू: 1 जनवरी से पैसे होंगे ऑटो डिडक्शन, परिवहन विभाग का अपडेट

भोपाल  परिवहन विभाग एक जनवरी 2026 से चालान व्यवस्था में बड़ा बदलाव करेगा। अब टोल प्लाज़ा और हाईवे पर लगे उच्च-गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे वाहनों की हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRPs) स्कैन करेंगे। किसी भी कमी या उल्लंघन पर सीधे वाहन मालिक के मोबाइल पर ई-चालान भेज दिया जाएगा। इसके लिए वाहन मालिक का मोबाइल नंबर परिवहन विभाग के पोर्टल से जुड़ा होना अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग ने सभी वाहन स्वामियों को निर्देश दिए हैं कि दिसंबर 2025 तक अपना मोबाइल नंबर पोर्टल पर अपडेट करें और पुरानी नंबर प्लेट हटाकर नई एचएसआरपी लगवा लें।  हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य 62 हजार से अधिक वाहन अभी भी बिना एचएसआरपी दतिया जिले में 01 अप्रैल 2019 से 12 नवंबर 2025 तक कुल 1,11,617 वाहनों में एचएसआरपी लग चुकी है, जबकि 62,911 वाहनों में अभी भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगना बाकी है। पुराने वाहनों में एचएसआरपी न लगना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि विभाग का मानना है कि नए चालान सिस्टम लागू होने के बाद कठोरता और निगरानी दोनों में बढ़ोतरी होगी। एचएसआरपी के बिना नहीं होंगे कार्य नियमों के अनुसार परिवहन विभाग कार्यालय (Transport Department) में दोपहिया और चार पहिया वाहनों से जुड़े कार्य- जैसे परमिट, फिटनेस, वाहन स्थानांतरण, टैक्स जमा, एनओसी आदि- एचएसआरपी के बिना नहीं किए जाएंगे। परिवहन अधिकारियों की ई-चालान आईडी भी सक्रिय कर दी गई है। नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ( पोर्टल पर दर्ज होगी वाहन की जानकारी टोल प्लाज़ा और हाईवे के सभी सीसीटीवी कैमरों को परिवहन विभाग के पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। वाहन कैमरे के दायरे में आते ही, नंबर प्लेट स्कैन होकर पोर्टल पर वाहन की जानकारी पहुंच जाएगी। नियम विरुद्ध पाए जाने पर ई-चालान जारी हो जाएगा। स्वाति पाठक, जिला परिवहन अधिकारी

भंडारे और शादियों के पंडाल होंगे फायर सेफ, MP एक्ट 2025 के तहत 15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए प्रमाणपत्र अनिवार्य

भोपाल  मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2025 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट से जुड़ी सारी अनुमतियां ले ली गई हैं। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधेयक के रूप पेश किया जायेगा।  नए कानून के ड्राफ्ट के मुताबिक, अब 15 मीटर से ऊंची हर इमारत, स्कूल, अस्पताल, मॉल और फैक्ट्री के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। इसके बिना बिल्डिंग को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। वहीं शादी, पॉलिटिकल और धार्मिक आयोजन के पंडाल में इस्तेमाल होने वाला कपड़ा अग्निरोधी होना अनिवार्य होगा, यानी ऐसे मटेरियल का कपड़ा, जो जल्दी आग न पकड़े। पंडालों और बड़े आयोजनों की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों पर डालते हुए उन्हें 'सेल्फ-रेगुलेटरी' घोषित किया गया है। लापरवाही बरतने पर अब सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ेगी। 8 सवालों के जवाब से समझिए कि आखिर नए फायर सेफ्टी एक्ट की क्या जरूरत पड़ी? इमारतों के लिए क्या नियम रहेंगे और आम लोगों को क्या फायदा मिलेगा, कितना टैक्स देना पड़ेगा… 1. क्यों पड़ी एक नए और सख्त कानून की जरूरत? अब तक मध्य प्रदेश में फायर सेफ्टी के नियम अलग-अलग नगर निकायों और विभागों के अधीन थे, जिससे एकरूपता और जवाबदेही का अभाव था। पुराने नियम न तो आधुनिक निर्माण चुनौतियों का सामना करने में सक्षम थे और न ही उनमें लापरवाही बरतने वालों के लिए कोई कठोर दंड का प्रावधान था। 2. नया एक्ट इस समस्या को कैसे दूर करेगा? नया फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2025 इसी बिखरी हुई और कमजोर व्यवस्था को खत्म कर पूरे राज्य के लिए एक एकीकृत, आधुनिक और शक्तिशाली फायर सर्विस की स्थापना करेगा, जिसके पास नियम लागू करवाने के लिए अभूतपूर्व अधिकार होंगे। 3. कैसा होगा फायर सर्विस का स्ट्रक्चर?     कमिश्नर और डायरेक्टर की होगी नियुक्ति: नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का कमिश्नर ही फायर एंड इमरजेंसी सर्विस का कमिश्नर होगा। सरकार एक डायरेक्टर को भी नियुक्त करेगी। यह ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके पास अनुभव, जानकारी और इस क्षेत्र में अच्छे काम का रिकॉर्ड हो। यह डायरेक्टर, कमिश्नर के अधीन रहकर काम करेगा।     पुलिस थानों की तर्ज पर फायर स्टेशन: सरकार आबादी, औद्योगिक क्षेत्र, बिजनेस सेंटर्स के हिसाब से नए फायर स्टेशन खोल सकेगी। पुलिस थानों की तरह ही हर फायर स्टेशन की सीमा तय रहेगी ताकि आग लगने की घटनाओं के बाद तत्काल एक्शन लिया जा सके। हर फायर स्टेशन पर एक डिप्टी फायर ऑफिसर या उससे ऊपर के पद के फायर ऑफिसर की नियुक्ति होगी। 4. बिल्डिंग मालिकों की क्या जिम्मेदारियां रहेंगी? अब तक कई व्यवसायिक और रिहायशी इमारतें फायर सेफ्टी के मानकों को ताक पर रखकर चल रही थीं, लेकिन अब ऐसा करना असंभव होगा। नए कानून के तहत 15 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाली रिहायशी और व्यवसायिक इमारतों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल, गेस्ट हाउस, मॉल, मल्टीप्लेक्स, फैक्ट्री, गोदाम के लिए भी ये जरूरी होगा। वहीं, औद्योगिक प्रतिष्ठान और 500 वर्ग मीटर से बड़े क्षेत्रफल वाली कोई भी मिक्स-यूज बिल्डिंग के लिए ये अनिवार्य होगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के किसी भी बिल्डिंग को नगर निगम से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं मिलेगा, जिसका सीधा मतलब है कि बिल्डर तब तक बिल्डिंग को बेच या किराए पर नहीं दे पाएगा, जब तक कि वह आग से सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा न कर ले। साथ ही, सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव की रिपोर्ट साल में दो बार फायर विभाग को सौंपनी होगी। 5. शादी और धार्मिक आयोजन के पंडालों के लिए क्या होंगे नियम? त्योहार, मेले, सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में लगने वाले पंडाल आग के लिहाज से सबसे संवेदनशील होते हैं। नए कानून में पंडालों को 'सेल्फ-रेगुलेटरी' घोषित कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अब आयोजक की होगी।     लिखित घोषणा जरूरी: आयोजक को पंडाल में एक बोर्ड लगाकर यह लिखित घोषणा करनी होगी कि उसने फायर सेफ्टी के सभी नियमों का पालन किया है।     सुरक्षा मानक: आयोजक को फायर-रिटार्डेंट (अग्निरोधी) कपड़े का इस्तेमाल, पर्याप्त चौड़े प्रवेश-निकास द्वार, इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और सुरक्षित बिजली वायरिंग सुनिश्चित करनी होगी।     अधिकारी का अधिकार: फायर ऑफिसर किसी भी पंडाल का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। यदि घोषणा झूठी पाई गई या सुरक्षा में कोई कमी मिली, तो वे पंडाल को तुरंत सील कर सकते हैं। झूठी घोषणा करने पर आयोजक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। 6. फायर सर्टिफिकेट और एनओसी कैसे मिलेगी? इसके लिए एक ऑनलाइन सिस्टम डेवलप करने की सिफारिश की गई है। ये ICT आधारित ऑनलाइन प्रणाली होगी, जिसमें सभी तरह के फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एनओसी हासिल कर सकेंगे। इस सिस्टम को डेवलप करने का मकसद भ्रष्टाचार और देरी को खत्म करना भी है। 7. फायर अफसरों को क्या अधिकार मिलेंगे नया कानून फायर विभाग के अधिकारियों को इतने अधिकार देता है, जितने पहले कभी नहीं थे ताकि वे बिना किसी दबाव के सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।     इमारत सील करने का अधिकार : यदि कोई इमारत आग के दृष्टिकोण से खतरनाक है, तो फायर अधिकारी उसे तुरंत खाली करने और सील करने का आदेश दे सकते हैं। सील तोड़ने पर जेल का प्रावधान है।     तोड़-फोड़ और गिरफ्तारी: आग बुझाने के दौरान फायर ऑफिसर किसी भी रास्ते को बंद कर सकते हैं, बाधा डालने वाले लोगों को गिरफ्तार कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी दीवार या संरचना को तोड़ने का आदेश भी दे सकते हैं।     अतिक्रमण हटाना: आग के खतरे वाली जगहों पर रखे सामान या अतिक्रमण को फायर अधिकारी तुरंत हटाने का आदेश दे सकते हैं। आदेश न मानने पर एसडीएम की मदद से सामान जब्त कर नीलाम भी किया जा सकता है।     पानी पर पहला हक: आग बुझाने के लिए फायर सर्विस किसी भी निजी या सार्वजनिक स्रोत-जैसे कुआं, टंकी, तालाब या बोरवेल से पानी ले सकती है। पानी की आपूर्ति में बाधा डालने वालों पर कठोर दंड लगेगा।

भोपाल में खुलेगा नया साइबर पंजीयन ऑफिस, प्रदेश के सभी जिलों की रजिस्ट्री अब होगी केंद्रीकृत

 इंदौर  मध्य प्रदेश में संपत्ति की रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बदलाव कर अब भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित पंजीयन भवन में साइबर पंजीयन कार्यालय तैयार किया जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद प्रदेश के किसी भी जिले की रजिस्ट्री यहां हो सकेगी। खरीदार को संबंधित जिले में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। जानकारों का कहना है कि इस प्रक्रिया से संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित होगी। जिले की जिन संपत्तियों पर आपत्तियां हैं या न्यायालयीन विवाद हैं, उनकी भोपाल में निगरानी कैसे होगी। स्टे वाली संपत्तियों की रजिस्ट्रियां भी लोग आसानी से भोपाल में करवा सकेंगे। पंजीयन विभाग ने अक्टूबर में भोपाल में साइबर पंजीयन कार्यालय खोलने का नोटिफिकेशन जारी किया था। कार्यालय शुरू करने की तैयारी जारी है, जल्द ही साइबर सब रजिस्ट्रारों की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद रजिस्ट्री का कार्य शुरू होगा। वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के किसी भी जिले में रहने वाला खरीदार यहां से रजिस्ट्री करवा सकेगा। भोपाल कार्यालय में ट्रायल रजिस्ट्री का काम हो चुका है, जहां विदेश में बैठे खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई थी। स्टे वाली संपत्ति की रजिस्ट्री रोक नहीं पाएंगे पंजीयन कार्यालय अभिभाषक व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी का कहना है कि पंजीयन विभाग को आधुनिक सिस्टम से इंदौर के बाहर रजिस्ट्री कराने के लिए नई व्यवस्था करनी होगी। जिलों का लक्ष्य भी प्रभावित होगा, जिसकी भरपाई कैसे की जा सकेगी। आपत्ति वाली, न्यायालयीन विवाद और स्टे वाली संपत्ति की रजिस्ट्री को रोक नहीं पाएंगे, क्योंकि विभाग के पास अभी निगरानी का सिस्टम नहीं है। इनकी निगरानी जिला स्तर पर ही होती है। यहां पर भी लोग विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री एक पंजीयन कार्यालय में रुकने पर दूसरे में जाकर करवा लेते हैं। प्रशासनिक पकड़ होगी कमजोर व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी बताते हैं कि भोपाल में सभी जिलों की रजिस्ट्रियां होने से जिला स्तर पर प्रशासनिक पकड़ भी कमजोर होगी। अभी अवैध कालोनियों और विवादित संपत्तियों पर जिला प्रशासन स्थानीय स्तर पर निगरानी करते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रिया रुकवा देता है, इससे आमजन के साथ धोखाधड़ी नहीं होती। भोपाल में यह निगरानी प्रभावित होगी।

मध्य प्रदेश का डिजिटल सफर: SIR में 57% डिजिटाइजेशन, देश में टॉप राज्यों में स्थान

भोपाल  मध्य प्रदेश में चुनावी मतदाता सूची के डिजिटलीकरण का काम 57.05% पूरा हो गया है, जिससे यह इस काम में लगे 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चौथे स्थान पर आ गया है। यह प्रगति ऐसे समय में हुई है जब ड्यूटी पर तैनात बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की मौतें चिंता का विषय बन गई हैं। 11 नवंबर से अब तक कम से कम चार बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें से सभी सरकारी स्कूल शिक्षक थे। उनके रिश्तेदारों का आरोप है कि काम का अत्यधिक दबाव, लंबे काम के घंटे और लक्ष्य पूरा न करने पर निलंबन का डर इन मौतों का कारण बना है। 65 हजार से अधिक बीएलओ काम में लगे आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 5.73 करोड़ मतदाताओं को 65,014 बीएलओ द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म दिए गए हैं। 23 नवंबर तक इनमें से 3.27 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके थे। इस बीच, बीएलओ की मौतें चिंता बढ़ा रही हैं। इन इलाकों में हुई बीएलओ की मौतें दतिया जिले में एक शिक्षक की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई। परिवार का कहना है कि वह स्मार्टफोन से काम करने का दबाव और सजा का डर बर्दाश्त नहीं कर सका। दमोह और रायसेन जिलों में दो शिक्षकों की मौत हो गई। उनके परिवारों का आरोप है कि प्रतिदिन 100 मतदाताओं को सूचीबद्ध करने जैसे अवास्तविक लक्ष्य उन्हें परेशान कर रहे थे। अलीराजपुर में एक अन्य BLO, SIR ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित होने के एक दिन बाद सीढ़ियों से गिरकर मर गया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ये सभी आरोप रिश्तेदारों द्वारा लगाए गए हैं। पुलिस द्वारा की गई जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही सच्चाई सामने आएगी। बड़े राज्यों में दूसरे स्थान पर एमपी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में, मध्य प्रदेश, लक्षद्वीप (88.20%), गोवा (69.38%), और राजस्थान (65.52%) से पीछे है। लेकिन लक्षद्वीप और गोवा में मध्य प्रदेश की तुलना में बहुत कम मतदाता हैं। पांच करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले राज्यों में, मध्य प्रदेश केवल राजस्थान से पीछे है, जिससे यह प्रभावी रूप से दूसरी स्थिति में है। अन्य राज्यों का हाल अन्य राज्य जो SIR में भाग ले रहे हैं उनमें गुजरात (49.62%), पुडुचेरी (51.24%), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (44.13%), तमिलनाडु (40.40%), छत्तीसगढ़ (40.83%), पश्चिम बंगाल (47.72%), उत्तर प्रदेश (19.02%), और केरल (15.92%) शामिल हैं। क्या है SIR? SIR का उद्देश्य घर-घर जाकर मतदाता सूची में सुधार करना और BLOs द्वारा उन्हें डिजिटाइज करके त्रुटि-मुक्त मतदाता सूची तैयार करना है। जिन मतदाताओं को उनके फॉर्म नहीं मिले हैं, वे ECI पोर्टल पर ऑनलाइन भर सकते हैं। BLOs का विवरण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट या राष्ट्रीय मतदाता खोज पोर्टल पर उपलब्ध है।  

विद्यार्थियों हित में समय सीमा में करें केन्द्र से प्राप्त बजट का उपयोग

एसीएस अनुपम राजन ने पीएम ऊषा परियोजना की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश भोपाल उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने शनिवार को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम ऊषा) के अंतगर्त निर्माण, क्रय एवं सॉफ्ट कंपोनेट के तहत किए जा रहे कार्य प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर आयुक्त उच्च शिक्षा, प्रबल सिपाहा, अतिरिक्त परियोजना संचालक, सुनील कुमार सिंह, संचालक वित्त जितेन्द्र सिंह, वित्त नियंत्रक राज्य परियोजना संचालनालय, चंद्रमणि खोब्रागडे, सहित विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के पीएम ऊषा परियोजना के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। एससीएस अनुपम राजन ने विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के नोडल अधिकारियों को पीएम ऊषा परियोजना के अंतगर्त प्राप्त बजट का विद्यार्थियों के हित में समय सीमा में उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद़देश्य उच्च शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराना है। विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार के माध्यम से ही हम विद्यार्थियों को एक बेहतर वातावरण प्रदान कर सकते हैं। उन्हे उपकरणों से परिपूर्ण लैब, स्मार्ट क्लासरूम के साथ कम्प्युटर, इंटरनेट, बिजली एवं पानी जैसी बेसिक सुविधाओं भी प्राप्त हों। अनुपम राजन ने सॉफ्ट कंपोनेट के तहत दिए जा रहे कोर्सेस, प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के बारे में भी नोडल अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मद के तहत प्राप्त बजट के माध्यम से विद्यार्थियों को कौशल एवं व्यक्त्वि विकास संबंधी कोर्सेस कराए जाएं। उन्होंने कहा कि पोर्टल एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सर्टिफिकेट कोर्सेस भी इस मद के तहत विद्यार्थियों को उपलब्ध कराये जायें। इस अवसर पर आयुक्त उच्च शिक्षा, प्रबल सिपाहा ने निर्देश दिए कि सभी विश्वविद्यालय/महाविद्यालय अगले वर्ष के निर्माण एवं क्रय कार्यो के लिये अभी से अपनी डीपीआर एवं अन्य आवश्यश्क तैयारी कर लें, जिससे अगले वर्ष इन योजनओं पर शीघ्र कार्य प्रारंभ किया जा सके।  

भारत की ताकत, गांवों-पंचायतों और जनसामान्य की सामूहिक शक्ति में निहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

खेत तालाबों के निर्माण में श्रेष्ठ कार्य के लिए अनूपपुर और बालाघाट को किया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारियों को किया गया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय व्यवस्था की मूल आत्मा स्थानीय स्वशासन रही है। हमारे यहां शासन गांव से शुरू होकर राष्ट्र की ओर बढ़ने वाला रहा है। इसी का परिणाम है कि भारतीय चिंतन में गांव को स्वराज और आत्मनिर्भरता की प्रथम इकाई माना गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब आत्मनिर्भर भारत और सुशासन का दृष्टिकोण रखा, तब उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भारत की ताकत उसके गांवों, पंचायतों और जनसामान्य की सामूहिक शक्ति में निहित है। आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश विषय पर आयोजित यह वर्कशॉप, ग्राम स्वराज, स्थानीय आत्मनिर्भरता और विकसित भारत@2047 के लिए उठाया गया निर्णायक कदम है। गर्व का विषय है कि पंचायतों को प्रशासनिक रूप से दक्ष, वित्तीय रूप से सक्षम और सामुदायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की ठोस रणनीति तैयार करने की इस यात्रा का नेतृत्व प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधि कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के उपाध्यक्ष अभी शिक्षा समितियों के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान उनके सुझावों को शामिल नहीं किया जाता है। लेकिन अब उनके द्वारा किए विद्यालय के निरीक्षण और सुझावों को लिपिबद्ध किया जाएगा और शासन इन्हें अमल में लेकर कार्य करेगा। राज्य सरकार ने सरपंचों को पंचायत की गतिविधियों के लिए 25 लाख रूपए तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया है। यह तो केवल शुरुआत है, इस दिशा में आगे भी और पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंचायतों को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वाटर शेड विकास 2.0 के अंतर्गत वॉटर शेड महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों, सहयोगी संस्थाओं और नॉलेज पार्टनर संस्थाओं को पुरस्कृत भी किया। पुरस्कृत अधिकारियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव का समूह चित्र भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यशाला में पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, विषय-विशेषज्ञ व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग कि यह कार्यशाला 26 नवंबर तक चलेगी। पंचायतें निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए बनाएं मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान में पुरस्कार प्राप्त करने वाले अधिकारी-कर्मचारी और संगठनों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पंचायतों को पीने के पानी का प्रबंध करने का अधिकार दिया है। पंचायतें विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़ें। निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए मास्टर प्लान बनाएं। इसकी शुरुआत विदिशा जिले से की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को सोलर पंप योजना के माध्यम से लाभ पहुंचा रही है। अगर कोई किसान तीन हॉर्स पावर से 5 हॉर्स पावर तक का सोलर पंप लेता है तो उसे 90 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा। पंचायतें इस योजना को भी आगे बढ़ाएं। राज्य सरकार किसानों को बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश सरकार ने पंचायतों के माध्यम से एक बगिया मां के नाम की शुरुआत की है। इस दिशा में भी ग्राम स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पधारे जिला पंचायत प्रतिनिधियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों को बनाया जा रहा है सशक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश के गठन के बाद से इस कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में विभानसभा सत्र आयोजित होते थे, हमारी इच्छा है कि आप सभी (पंचायत प्रतिनिधि) नई विधानसभा तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा है कि आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी पंचायतें भी आत्मनिर्भर बने। उनके मार्गदर्शन में जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया जा रहा है। गत वर्ष के समान दूसरे सम्मेलन का आयोजन कर पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने आपको आमंत्रित किया है। राज्य सरकार पंचायतों के समग्र विकास के लिए हर कदम पर साथ खड़ी है। जिला, जनपद और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक : मंत्री पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि यह राज्य स्तरीय कार्यशाला त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। विकास और जनकल्याण गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और जिला जनपद अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। भारत में परम्परागत रूप से ग्राम विकास की व्यवस्था समाज और सरकार की संयुक्त भागीदारी पर आधारित थी। वर्तमान में भी गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए सामुदायिक सहभागिता आवश्यक है। मंत्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की हर पंचायत में दिसम्बर 2026 तक शमशान घाट और उसके लिए सभी बुनियादी सुविधाएं जुटाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांचवें वित्त की राशि 6 हजार करोड़ की गई है, जो वर्तमान में पंचायतों के विकास का आधार बनी है। प्रदेश के दूरदराज के गांव पीएम जनमन योजना से पक्की सड़क से जुड़ रहे हैं। हमारा प्रदेश पीएम जनमन और पीएम आवास में देश में अग्रणी है। मंत्री पटेल ने कहा कि पंचायतों को आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक सम्पन्नता और स्वतंत्रता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। गांवों में बीमारियां न हों, स्वच्छता के हरसंभव उपाय हों, गांव नशामुक्त हों, गांव में आपसी विवाद न हों और सामाजिक बुराइयों को रोकने में ग्राम पंचायतें सामूहिक इच्छा शक्ति के साथ कार्य करें, यह भी आदर्श आत्मनिर्भर पंचायत के लिए आवश्यक है। जल गंगा संवर्धन अभियान में श्रेष्ठ कार्य करने वालों का हुआ सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले … Read more

भोपाल के बड़े तालाब में होगी 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स एवं 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप

मुख्मंत्री डॉ. यादव करेंगे प्रतियोगिता का शुभारंभ मंत्री सारंग ने आयोजन स्थल का किया निरीक्षण भोपाल भोपाल के बड़े तालाब में खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा भारतीय रोइंग संघ के तत्वावधान में 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स एवं 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन 26 से 30 नवंबर तक किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 23 राज्यों के लगभग 500 खिलाड़ी प्रतिभागिता करेंगे।खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को आयोजन स्थल पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएँ अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे देशभर से आने वाले खिलाडियों और अधिकारियों को उत्कृष्ट अनुभव प्राप्त हो सकें। निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, सुरक्षा प्रबंधों, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण क्षेत्रों, उपकरणों की उपलब्धता एवं तकनीकी तैयारियों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव करेंगे शुभारंभ मंत्री सारंग ने बताया कि प्रतियोगिता का शुभारंभ 26 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े तालाब के प्राकृतिक और अद्भुत सौंदर्य के बीच होने वाली यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों और दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगी। राष्ट्रीय स्तर की वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का प्रमुख केंद्र बन रहा मध्यप्रदेश मंत्री सारंग ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का मध्यप्रदेश प्रमुख केंद्र बन रहा है। इस तरह के चैंपियनशिप के आयोजन से मध्यप्रदेश में वॉटर स्पोर्ट्स को और बढ़ावा मिलेगा तथा युवा खिलाड़ियों को नए अवसर प्राप्त होंगे। बड़े तालाब का विस्तृत क्षेत्र और अनुकूल जल परिस्थितियाँ देश के प्रमुख वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता स्थलों में से एक हैं। भोपाल का बड़ा तालाब वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के लिए एक बेहद खूबसूरत और उपयोगी डेस्टिनेशन मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल में इस स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। भोपाल का बड़ा तालाब वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के लिए एक बेहद खूबसूरत और उपयोगी डेस्टिनेशन है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वर्तमान में नेशनल रोइंग खेल में नेशनल चैंपियन भी है। यह हमारे खिलाड़ियों की मेहनत और प्रदेश की खेल नीतियों का परिणाम है। इस तरह की प्रतियोगिताओं से प्रदेश के वॉटर स्पोर्ट्स खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक उत्कृष्ट मंच मिलेगा। विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं करें सुनिश्चित मंत्री सारंग ने निरीक्षण के दौरान प्रतियोगिता के लिए सुरक्षा, चिकित्सा, जलपोत प्रबंध, टेक्निकल टीम, रेस ट्रैक मार्किंग सहित सभी व्यवस्थाओं को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं दर्शकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।  

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रावधानों को बनायें और पारदर्शी : मंत्री पटेल

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने सोमवार को मंत्रालय में बैठक लेकर विभागीय कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पटेल ने विशेष कर गौसंवर्धन गौसंरक्षण तथा प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिये नई प्रचलित डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के विषय में विस्तृत समीक्षा की। योजना के प्रावधानों को और अधिक पारदर्शी बनाए जाने के विषय में निर्देशित किया। विभाग में प्रचलित डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत पशुओं के वितरण व्यवस्था को सुधार किए जाने की आवश्यकता के लिये निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के कार्यपालिक संचालक डॉ. प्रवीण शिंदे और उपसंचालक डॉ. प्रियकांत पाठक उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए 8 आईएएस नोडल अधिकारी नियुक्त

भोपाल  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत प्रदेश के चयनित जिलों के लिए राज्य शासन द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला नोडल अधिकारी, भारत सरकार द्वारा निर्धारित टैम्पलेट्स अनुसार योजना के क्रियान्वयन के लिए अपने मार्गदर्शन में आवंटित जिलों की जिला कार्य योजना तैयार कराकर विकसित पोर्टल (Dashboard) पर अपलोड करायेंगे एवं जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित रूप से निगरानी एवं सघन अनुश्रवण करेंगे।   सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार किसान कल्याण तथा कृषि विकास संचालक  अजय गुप्ता को उमरिया, वि.क.अ., सह आयुक्त सह पंजीयक, सहकारी समिति  मनोज पुष्प को डिंडौरी, प्रबंध संचालक, मत्स्य महासंघ सु निधि निवेदिता को अलीराजपुर, प्रबंध संचालक, कृषि विपणन बोर्ड सह आयुक्त मंडी  कुमार पुरूषोत्तम को शहडोल, उप सचिव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग  संतोष कुमार वर्मा को सीधी, सदस्य सचिव नीति आयोग  ऋषि गर्ग को निवाड़ी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, रोजगार गांरटी परिषद  अवि प्रसाद को टीकमगढ़ और उप सचिव, नर्मदा घाटी विकास  राहुल धोटे को अनूपपुर का जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।