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टेक्नोलॉजी में नई उड़ान: डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव 2.0 में उद्योग प्रतिनिधियों से की सीधी बातचीत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से की वन-टू-वन चर्चा नए निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक क्लस्टरों की स्थापना पर हुई बातचीत भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन चर्चा की। इससे मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाओं, औद्योगिक क्लस्टरों, तकनीकी केंद्रों और नवाचार आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। वन-टू-वन में आईटी, ड्रोन, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, रक्षा, ईवी मैन्युफैक्चरिंग, फिल्म टेक्नोलॉजी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश, भूमि आवंटन, नीति प्रोत्साहन और प्रशिक्षण सुविधाओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय सेना के मेजर जनरल गौतम महाजन, ब्रिगेडियर एम.एस. रंधावा, ब्रिगेडियर दीपक पुरी, कर्नल मनोजित सिन्हा, लेफ्टिनेंट कर्नल अरिजीत चंद्र सेन से मुलाक़ात की। इस दौरान राज्य सरकार और भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के बीच साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिये एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता रक्षा एवं नागरिक तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ कर मध्यप्रदेश को तकनीकी नवाचार में अग्रणी बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एएनएसआर ग्लोबल के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक  विक्रम आहूजा से मध्यप्रदेश में नया "जीसीसी हब” स्थापित करने के संबंध में चर्चा की। बैठक में हब के लिए उपयुक्त स्थान, कार्यालय अवसंरचना, पूंजी निवेश, प्रशिक्षण एवं भर्ती प्रोत्साहन, जीसीसी पॉलिसी और इंसेंटिव फ्रेमवर्क के तहत सहयोग पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनंत टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के संस्थापक डॉ. सुब्बाराव पवुलुरी से मुलाक़ात की। इस दौरान डिफेंस क्लस्टर की स्थापना, निवेश प्रोत्साहन, भूमि आवंटन और अवसंरचना विकास पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने वेना इंडिया के निदेशक  गौतम यादव एवं सह-निदेशक  पार्थ सेन गुप्ता से भी वन-टू-वन चर्चा की। प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी द्वारा इंदौर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पहले ही स्थापित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी नीति 2025 के तहत प्रोत्साहनों और भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में भविष्य के विस्तार पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एमरॉल्ड इन्फ्राइस्पैट लिमिटेड के निदेशक  अनिल ज्ञानचंद भंसाली ने मुलाकात कर बिंदौरी (भोपाल) स्थित EMC-2 में पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की। एमपी सेमीकंडक्टर नीति-2025 के तहत विद्युत एवं गैर-विद्युत प्रोत्साहनों की मांग, भूमि आवंटन में छूट और राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। थॉमसन सेमीकंडक्टर्स प्रा. लि. के सीईओ डॉ. निवास अनंत ने बताया कि कंपनी प्रदेश में दो बड़ी परियोजनाओं में निवेश करना चाहती है, जिसमें पैकेजिंग-परीक्षण इकाई, ईवी बस और ट्रक मैन्युफैक्चरिंग इकाई शामिल हैं। भूमि आवंटन, पर्यावरण सहायता, ऊर्जा-जल आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स सुविधाएँ तथा पीएलआई, फेम, पीएम ई-ड्राइव जैसी योजनाओं के लाभ पर चर्चा हुई। बीवीजी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक  हनुमंत राव गायकवाड़ ने प्रदेश में वैश्विक ड्रोन एवं रोबोटिक्स क्लस्टर स्थापित करने की इच्छा जताई, जिसमें प्रशिक्षण, परीक्षण और अनुसंधान सुविधाएँ शामिल होंगी। मध्यप्रदेश ड्रोन नीति-2025 के अंतर्गत भूमि, बुनियादी ढांचा, पीएलआई लाभ और विनियामक सहयोग पर विचार हुआ। आर.डब्ल्यू.एस. मोराविया इंडिया प्रा. लि. के सेंटर हेड  विशाल डकोलिया ने बताया कि कंपनी ने इंदौर में अपनी जीसीसी सुविधा का निर्माण पूरा कर लिया है और अब उसका विस्तार करना चाहती है। लाइट एन लाइट ग्रुप के सैयद जावेद अली ने प्रदेश में आधुनिक फिल्म एवं शूटिंग उपकरण विनिर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। फिल्म पर्यटन नीति, जीएसटी एवं स्टाम्प ड्यूटी छूट, बिजली रियायत और सिंगल विंडो प्रणाली जैसे प्रोत्साहनों पर भी चर्चा हुई। सोलुजेनिक्स के डायरेक्टर  चंद्र कोठापु से निवेश प्रोत्साहनों और भोपाल-इंदौर में विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की। सोरिंग एयरोटेक प्रा. लि. के प्रतिनिधि  दैविश जैन और डॉ. मनोज देशपांडे से ड्रोन क्लस्टर भूमि आवंटन, ड्रोन नीति-2025, स्टार्टअप नीति तथा स्थानीय विश्वविद्यालयों के साथ स्किल डेवलपमेंट सहयोग पर चर्चा की गई। क्लिनीसप्लाइज लिमिटेड की निदेशक सु प्रेरीता बहेती और ऑपरेशनल हेड  अभिषेक वास्तव से भी चर्चा की। वन-टू-वन चर्चा ने निवेशकों में मध्यप्रदेश के प्रति विश्वास और उत्साह को नई गति दी है। प्रदेश सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियाँ, पारदर्शी प्रक्रियाएँ और मजबूत बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश अब भारत का तकनीकी और औद्योगिकी हब बनकर उभर रहा है।  

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील पहल: रिश्तों में लौटी मिठास, बढ़ा जन-विश्वास

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील पहल — रिश्तों में लौटी मिठास और बढ़ा भरोसा विदिशा की “पुलिस पंचायत” और टीकमगढ़ का “नवपहल अभियान” बने सामाजिक समरसता व महिला सुरक्षा के प्रतीक भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस आज जनसेवा के उस स्वरूप का परिचायक बन चुकी है, जहाँ कानून-व्यवस्था के साथ संवेदनशीलता, संवाद और सहयोग सर्वोपरि हैं। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिक–पुलिस संवाद, पारिवारिक समरसता और महिला सुरक्षा को लेकर निरंतर किए जा रहे प्रयास अब उल्लेखनीय परिणाम देने लगे हैं। प्रदेश के विदिशा की “पुलिस पंचायत” और टीकमगढ़ की “नवपहल” पहल ने मध्यप्रदेश पुलिस को संवेदनशीलता, संवाद और महिला सुरक्षा की नई पहचान दी है। इन पहलों से पारिवारिक रिश्तों में विश्वास लौटा है और महिला अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। विदिशा की “पुलिस पंचायत” — रिश्तों में लौटी मिठास विदिशा में प्रारंभ हुई “पुलिस पंचायत” पहल अब पारिवारिक विवादों के समाधान की मिसाल बन चुकी है। अब तक आयोजित 34 बैठकों में कुल 98 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से 72 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली इन पंचायतों में पारिवारिक विवाद, संपत्ति संबंधी मतभेद एवं वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों का संवाद, सहानुभूति और सामाजिक सहमति से निराकरण किया जाता है। पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के नेतृत्व में गठित पंचायत कोर कमेटी — डॉ. सचिन गर्ग, श्री आर. कुलश्रेष्ठ, श्री प्रमोद व्यास, श्री दिनेश वाजपेयी, श्री अजय टंडन, श्री अतुल शाह, श्री विनोद शाह एवं श्री पार्थ पित्तलिया सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल न केवल विवादों के निपटारे तक सीमित रही, बल्कि इसने संवाद और सहानुभूति के माध्यम से टूटते रिश्तों को फिर जोड़ने का कार्य किया है। वर्षों से बिछड़े परिवार एक-दूसरे से मिले, वृद्ध जनों को उनका हक मिला और समाज में यह संदेश गया कि पुलिस जनता की हमदर्द और सहभागी है। “पुलिस पंचायत” ने यह साबित किया है कि संवाद से बढ़कर कोई न्याय नहीं — यह पहल कानूनी समाधान के साथ सामाजिक समरसता का पुल बन चुकी है। टीकमगढ़ की “नवपहल” – महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी कदम टीकमगढ़ में पुलिस अधीक्षक श्री मनोहर सिंह मंडलोई के मार्गदर्शन में प्रारंभ “नवपहल” अभियान ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इस पहल से जिले में महिला अपराधों में लगभग 37% तक की कमी दर्ज की गई है। विशेष सुधार:     शीलभंग: 21.3% कमी     दहेज हत्या: 16.6% कमी     दहेज प्रताड़ना: 50.5% कमी     भ्रूण हत्या/गुप्त व्ययन: 42.8% कमी महिला सुरक्षा के लिए प्रमुख अभियान 1. नीड अभियान: कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, 42.8% कमी 2. परी अभियान: 55,309 बच्चियों को “गुड टच–बैड टच” की जानकारी 3. भरोसा अभियान: 6,328 किशोरियों को आत्मरक्षा व विधिक प्रशिक्षण 4. सहारा अभियान: 192 महिलाओं को आर्थिक व पारिवारिक सहायता 5. आसरा अभियान: 64 वृद्ध महिलाओं को सहयोग 6. परिवार जोड़ो अभियान: 72 परिवार टूटने से बचे, दहेज प्रताड़ना में 47.5% कमी इसके अलावा “मजनू अभियान” के अंतर्गत स्कूल–कॉलेजों के आस-पास असामाजिक तत्वों पर निगरानी से छेड़छाड़ के अपराधों में 22.3% की कमी दर्ज हुई है। इन अभियानों के माध्यम से महिला सुरक्षा, वन स्टॉप सहायता, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और जागरूकता से पुलिस और समाज के बीच नए भरोसे का रिश्ता बना है। महिला हेल्प डेस्क, संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय पेट्रोलिंग, सोशल मीडिया निगरानी और स्कूल–कॉलेज परिसरों में नियंत्रण गतिविधियाँ ने टीकमगढ़ पुलिस की छवि को समाज के प्रति समर्पित प्रहरी के रूप में स्थापित किया है। विदिशा की “पुलिस पंचायत” और टीकमगढ़ की “नवपहल” जैसी पहलें इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस अब केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी नहीं, बल्कि “जनभरोसे की पुलिस” के रूप में नागरिकों के बीच संवाद, समझ और सेवा का सेतु बन रही है।  

राज्य स्तरीय अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ कार्यशाला में ‘फिंगर प्रिंट मैनुअल 2025’ का हुआ विमोचन

राज्य स्तरीय अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ कार्यशाला में फिंगर प्रिंट मैनुअल 2025 का विमोचन अपराध अन्वेषण में नवाचार, वैज्ञानिक दक्षता और तकनीकी उत्कृष्टता पर जोर, अपराधियों की पहचान में आयेगी तेजी भोपाल राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, पुलिस मुख्यालय के तत्वावधान में 13 नवम्बर 2025 को पुलिस मुख्यालय के नवीन सभागार में प्रदेश के सभी जोन एवं जिलों में पदस्थ अंगुल चिन्ह विशेषज्ञों की राज्य स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में अंगुल चिन्ह विशेषज्ञों के कार्य को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना रहा। इस कार्यशाला की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो,  जयदीप प्रसाद द्वारा की गई। कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  जयदीप प्रसाद ने बताया कि मध्यप्रदेश, अंगुल चिन्ह संबंधी कार्यों में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से अपराधियों की पहचान एवं अपराध अन्वेषण में राज्य का योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने सभी विशेषज्ञों को निर्देशित किया कि वे अपने कार्य में तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यवसायिक दक्षता को प्राथमिकता दें, ताकि अपराधों की जांच और अपराधियों की पहचान में और अधिक तेजी लाई जा सके। कार्यशाला में केंद्रीय अंगुल चिन्ह ब्यूरो, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली की निदेशक डॉ. मती एस. इंदिरा सुधा द्वारा अंगुल चिन्ह तकनीक के नवीनतम आयामों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने देशव्यापी अनुभव साझा करते हुए मध्यप्रदेश के अंगुल चिन्ह विशेषज्ञों को उन्नत तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। इस अवसर पर “फिंगर प्रिंट मैनुअल 2025” का विमोचन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा किया गया। यह मैनुअल राज्य में अंगुल चिन्ह संबंधी कार्यों के लिए एक अद्यतन दिशा-निर्देश दस्तावेज के रूप में उपयोगी सिद्ध होगा। “फिंगर प्रिंट मैनुअल 2025” न केवल अपराध जांच की सटीकता और गति बढ़ाएगा, बल्कि मध्य प्रदेश पुलिस को वैज्ञानिक अन्वेषण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में भी सहायक सिद्ध होगा। अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक विधियों के सशक्त उपयोग की दिशा में यह मैनुअल अंगुल चिन्ह विशेषज्ञों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक एवं प्रशिक्षण साधन के रूप में कार्य करेगा। इसमें फील्ड कार्यप्रणाली, डिजिटल विश्लेषण, डेटा रिकॉर्डिंग और NAFIS प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश सम्मिलित हैं। कार्यशाला के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अंगुल चिन्ह विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया तथा उन्हें अपराध अन्वेषण के क्षेत्र में निरंतर नवाचार और दक्षता की दिशा में कार्यरत रहने हेतु प्रेरित किया गया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, सु चैत्रा एन., सहायक पुलिस महानिरीक्षक, मती ऋचा चौबे, एवं संचालक अंगुल चिन्ह ब्यूरो,  मनोज सिंह राजपूत सहित राज्यभर से आए अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ उपस्थित रहे।  

नशे के विरुद्ध बड़ी जीत: खरगोन पुलिस ने उजागर की पहाड़ी क्षेत्र में चल रही अवैध गांजा खेती

नशे के विरूद्ध खरगोन पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई पहाड़ी क्षेत्र में अवैध गांजा की खेती का भंडाफोड़ लगभग 1 करोड़ 78 लाख रुपए का 35.51 क्विंटल गांजे के पौधे जब्त भोपाल पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, खेती एवं वितरण के विरुद्ध निरंतर विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जारी धरपकड़ के तहत खरगोन पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने जिले के पहाड़ी और "नो नेटवर्क जोन" क्षेत्र में की जा रही गांजे की अवैध खेती का भंडाफोड़ करते हुए 3,200 गांजे के पौधे बरामद कर लगभग 35.51 क्विंटल (3,551 किलो) गांजा जब्‍त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत एक करोड़ 77 लाख 56 हजार 200 रुपये आंकी गई है। बरामद पौधों की ऊँचाई औसतन 5 से 7 फीट के बीच पाई गई। पुलिस टीम को गांजे के पौधों को उखाड़ने आदि में कई घंटे तक कठिन परिश्रम करना पड़ा। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में संचालित यह ऑपरेशन न केवल पुलिस की दक्षता को दर्शाता है, बल्कि समाज से मादक पदार्थों की बुराई मिटाने के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को भी प्रमाणित करता है। पुलिस महानिरीक्षक इंदौर जोन  अनुराग एवं उप पुलिस महानिरीक्षक निमाड़ रेंज  सिद्धार्थ बहुगुणा के दिशा-निर्देशों में, पुलिस अधीक्षक खरगोन  रविन्द्र वर्मा तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खरगोन (ग्रामीण) मति शकुन्तला रुहल के मार्गदर्शन में जिलेभर में ऑपरेशन “प्रहार” चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत चौकी हेलापडावा थाना चैनपुर पुलिस को यह सफलता मिली है। 12 नवंबर 2025 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि नवादीया फाल्या ग्राम टांडावाड़ी निवासी टिडीया अपने खेत के तीन अलग-अलग हिस्सों में बड़ी मात्रा में अवैध गांजे की खेती कर रहा है। सूचना पर एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई। सुनियोजित कार्य योजना के तहत पुलिस टीम ने टिडीया के खेत पर दबिश दी। घर बंद मिलने पर आसपास तलाशी में खेत के तीन हिस्सों में भारी मात्रा में गांजे के पौधे लगे पाए गए। मौके पर उपस्थित टीम ने कुल 3200 गांजे के पौधे (तौल 3551 किलो 240 ग्राम) नियमानुसार जब्त किए। आरोपी टिडीया पिता दीतु जमरे के विरुद्ध थाना चैनपुर पर एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई है। उल्‍लेखनीय है कि विगत 3 दिनों में मध्‍यप्रदेश पुलिस ने विभिन्‍न जिलों में कार्रवाही कर 75 लाख से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ, वाहन एवं उपकरण जब्त कर अनेक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। लगातार हो रही ये कार्रवाइयाँ यह दर्शाती हैं कि प्रदेश में मादक पदार्थों की खेती और तस्करी के विरुद्ध पुलिस सख्त रुख अपनाए हुए है। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पुलिस की सतर्कता, टीम भावना और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।  

केरला फेस्ट: सांस्कृतिक एकीकरण का शानदार प्रतीक — राज्यपाल मंगुभाई पटेल

केरला फेस्ट: सांस्कृतिक एकीकरण का शानदार प्रतीक — राज्यपाल मंगुभाई पटेल मंगुभाई पटेल बोले: केरला फेस्ट भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण मलयाली समुदाय का जड़ों से जुड़ाव प्रेरणादायी- विधानसभा अध्यक्ष  तोमर भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि “केरला फेस्ट” सांस्कृतिक एकीकरण और भाईचारे की भावना का जीवंत उदाहरण हैं। मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रदर्शन के अवसर के साथ ही केरल और मध्यप्रदेश के बीच समरसता का सशक्त सेतु है, जो मध्यप्रदेश को अपनी कर्म भूमि बनाने वाले मलयाली बहनों-भाइयों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव और हमारे देश की विविधता में एकता की भावना का सुंदर प्रतीक है। राज्यपाल  पटेल केरला फेस्ट सेकण्ड ऐडिशन के शुभारंभ कार्यक्रम में जन समुदाय को  स्थानीय दशहरा मैदान में गुरूवार को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मलयाली समुदाय का जड़ों से जुड़ाव अपनी भूमि संस्कृति और निष्ठा का आग्रह सभी के लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। कार्यक्रम में सचिव जल संसाधन विकास  जॉन किंगस्ली भी मंचासीन थे। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मध्यप्रदेश के विकास में मलयाली समुदाय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायक और सराहनीय रहा है। मलयाली समुदाय ने प्रशासन और सेवा क्षेत्र में भी अपनी कार्यकुशलता और ईमानदारी से प्रदेश मे विशिष्ट पहचान कायम की है। प्रदेश में डॉक्टर, नर्स और शिक्षक के रूप में अनुशासन, परिश्रम, शिक्षा और सेवा की उत्कृष्ट भावना के साथ असंख्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में उनकी सक्रिय भूमिका ने राज्य के प्रशासनिक और आर्थिक विकास को नई दिशा दी है। मलयाली समुदाय ने सामाजिक और मानवता की सेवा में भी हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रदेश के मलयाली समुदाय ने राज्य के विकास में योगदान के साथ ही अपने सांस्कृतिक मूल्यों को सहेज कर राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है। समाज के साथ-साथ समग्र मानवता की सेवा के लिए समर्पित भाव से कार्य करने के लिए युनाईटेड मलयाली एसोसिएशन को बधाई दी। विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मलयाली समुदाय कर्तव्यनिष्ठ समाज है इसीलिए साक्षरता और स्वच्छता में देश में अग्रणी है। समुदाय ने सेवा, समर्पण, रचनात्मक सृजनशीलता, सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्य क्षेत्र में कर्तव्य परायणता से विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी नेक नियति और कार्य संस्कृति ने सभी को प्रभावित किया है। उन्होंने मध्यप्रदेश कॉडर के पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी के द्वारा भोपाल जहाँ नौकरी के लिए आने वाले लोग बस जाते हैं वैसे शहर में बसने के बजाए अपने केरल स्थित छोटे से घर में बसने के निर्णय की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मलयाली समुदाय का अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण का ही प्रमाण केरल से इतनी दूर रहकर भी उन्होंने अपने जीवन मूल्यों और परंपराओं को जीवंत बनाएं रखा है। मुख्य महाप्रबंधक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया प्रबाश कुमार सुबुदि ने कहा कि गोड्स ओन कन्ट्री के कलर्स और फ्लेवर का प्रतीक केरला फेस्ट है। उन्होंने कहा कि मलयाली समुदाय जहाँ भी जाता है अपने सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को लेकर जाता है। वह भारत की विविधता में एकता के सच्चे राजदूत हैं। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विकास में सहयोग के लिए सामुदायिक प्रगति और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ाने के हर गतिविधि को सदैव प्रोत्साहित करता है।  नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक मती सी. सरस्वती ने कहा कि मलयाली समुदाय सांस्कृतिक चेतना, प्राकृतिक सौंदर्य, कला, परंपरा, अनुशासन और सोहार्द्र के लिए प्रसिद्ध है। केरल के वस्त्र, व्यंजन, कलाओं ने भारत की सांस्कृति धरोहर को समृद्ध किया है। समुदाय अपनी जड़ो को किस प्रकार जीवंत रख सकता है केरला फेस्ट का आयोजन उसका प्रमाण है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड ने ग्रामीण कौशल, सृजनशीलता को बढ़ाने और स्व-सहायता समूहों के आत्म विश्वास और स्वावलंबन को मजबूत करने के लिए फेस्ट में 10 स्टाँलो को एस.एच.जी के लिए प्रायोजित किया है। युनाइटेड मलयाली एसोसिएशन के अध्यक्ष ओ.टी. जोसेफ ने स्वागत उद्बोधन में बताया की संस्था चार दशकों से संस्कृति संवर्धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका के क्षेत्रों में सहयोग के साथ ही मानवता की सेवा प्रयासों, विद्यालयों, आश्रय गृहों की मरम्मत, मोबाइल मर्च्युरी और अंत्येष्टी सहायता भी प्रदान करती है। आभार प्रदर्शन ऐसोसिएशन के उपाध्यक्ष  अनिल कुमार ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मलयाली समुदाय की महिलाओं ने केरल के लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। अतिथियों को केरल के सांस्कृतिक प्रतीक हाथी के मस्तक पर शोभित किए जाने वाले आभूषण नेट्टी-पट्टम स्मृति स्वरूप भेंट किया गया। स्वागत पुष्प गुच्छ से किया गया। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन से शुभारंभ हुआ।       

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती गरिमामय रूप से मनाई जायेगी, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल

जबलपुर में होगा मुख्य कार्यक्रम जिला स्तर के कार्यक्रमों के लिए अतिथि हुए तय भोपाल  धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती गरिमामय रूप से मनाई जायेगी। जनजातीय गौरव दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम 15 नवम्बर को जबलपुर में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह और लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह शामिल होंगे। जिला स्तर के कार्यक्रमों में विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर, उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा में, नगरीय विकास, आवास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय धार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेलभिण्ड, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मासीहोर, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंहनरसिंहपुर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके मण्डला, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट इंदौर, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषानामुरैना, महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया झाबुआ, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिहं राजपूत सागर, खेल, युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग रायसेन, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण एवं उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह शाजापुर, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहानअलीराजपुर, ऊर्जा श्री प्रद्युम्न सिंह तोमरमंत्री शिवपुरी, नवीन एवं नवकरणीय मंत्री ऊर्जा श्री राकेश शुक्लाअशोक नगर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यपरतलाम, उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार आगर-मालवा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौरभोपाल, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व स्वतंत्र प्रभार श्री धर्मेद्र भाव सिंह लोधीदमोह, कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री दिलीप जायसवालअनूपपुर, कौशल विकास एवं रोजगार स्वतंत्र प्रभार मंत्री श्री गौतम टेटवालउज्जैन, पशुपालन एवं डेयरी स्वतंत्र प्रभार मंत्री श्री लखन सिंह पटेलविदिशा, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास स्वतंत्र प्रभार मंत्री श्री नारायण सिंह पंवारराजगढ़ राज्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणश्री नरेन्द्र शिवाजी पटेलबैतूल, राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं आवास श्रीमती प्रतिमा बागरीसतना, राज्यमंत्री वनएवं पर्यावरण श्री दिलीप अहिरवारछतरपुर एवंराज्यमंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती राधा सिंहसिगरौली में उपस्थित होंगी। सांसद श्री वी.डी. शर्मा कटनी, सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह शहडोल, सांसद श्रीमती संध्या राय दतिया, सांसद श्री ज्ञानेश्वर पाटिल खण्डवा, सांसद श्रीमती भारती पारधी बालाघाट, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह पटेल खरगौन, सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सीधी, सांसद श्री जनार्दन मिश्रा मऊगंज, सांसद श्री विवेक 'बंटी' साहू छिन्दवाड़ा, सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते सिवनी, सांसद श्री शिवमंगल सिंह तोमर श्योपुर, सांसद श्री सुधीर गुप्ता नीमच, सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी नर्मदापुरम, सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर मंदसौर, सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी बड़वानी एवं सांसद श्रीमती माया नरोलिया पांढुर्णा में उपस्थित रहेंगी। साथ ही विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस बुरहानपुर, विधायक श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना, विधायक सुश्री मीना सिंह मांडवे उमरिया, विधायक श्री हरिशंकर खटीक टीकमगढ़, विधायक श्री ओमप्रकाश ध्रुवे डिंडौरी, विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर, विधायक श्री पन्नालाल शाक्य गुना, विधायक श्रीमती गायत्रीराजे पंवार देवास, विधायक श्री अनिल जैन निवाड़ी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गजेन्द्र शाह हरदा में उपस्थित रहेंगे।  

भारतीय रेल की गति बढ़ाने की योजना: स्विहैग एजी की तकनीक उज्जैन में लागू हो सकती है

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन भारतीय रेल की गति बढ़ाने का नया केंद्र बन सकती है। स्विट्जरलैंड की रेल ट्रैक टेक्नोलॉजी कंपनी स्विहैग एजी ने विक्रम उद्योगपुरी में अपनी यूनिट लगाने की मंशा जताई है। यूनिट लगने पर यहां ऐसे मॉडर्न उपकरण तैयार होंगे, जो कई देशों में हाई-स्पीड रेल, हैवी ड्यूटी ट्रेनें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में उपयोग किए जाते हैं। स्विस कंपनी स्विहैग एजी पहले चरण में 70 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव रखा है। विक्रमपुर उद्योगपुरी में 5 एकड़ जमीन मांगी है। हाल ही में कंपनी के सीईओ डेनियल डाहिन्डन, भारत में कंपनी के प्रतिनिधि चेतन शर्मा और हर्ष वाजपेयी ने विक्रम उद्योगपुरी सेकंड फेज का दौरा भी किया। एमपी में स्विस कंपनी आने से नजर आएगा बदलाव ● स्विहैग एजी रेल ट्रैक टेक्नोलॉजी में विश्व की अग्रणी कंपनियों में एक है। यह जर्मनी, ब्रिटेन और अमरीका में उत्पादन केंद्र संचालित करती है। ● कंपनी के उत्पाद रेलवे ट्रैक की सुरक्षा, टिकाऊपन और लागत-कुशलता बढ़ाने में इस्तेमाल होते हैं। ● इसके स्विच कंपोनेंट्स, रेल फास्टनिंग सिस्टम का उपयोग हाई-स्पीड रेल, हैवी-ड्यूटी नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में होता है। ● कंपनी के उत्पाद 40 देशों में उपयोग में हैं। ऐसे में उज्जैन आगे रेल उपकरणों का निर्यातक केंद्र बन सकता है कंपनी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही स्विहैग इंडिया के लिए उपयुक्त भूमि का निरीक्षण कराया है। कंपनी प्रतिनिधियों को उज्जैनकी विशेषताएं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया है। कंपनी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। -राजेश राठौर, कार्यकारी निदेशक, मप्र औद्योगिक विकास

मध्यप्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी पहुंचेगा जल्द, नई हेलीकॉप्टर सेवा से समय कम हुआ

 पचमढ़ी   मध्यप्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी के सैर करने वाले सैलानियों के लिए अच्छी खबर है। अब पचमढ़ी को हवाई सेवा से जोड़ा जा रहा है। सैलानियों को यह नई सौगात 20 नवबर से मिलने लगेगी। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। बस 35 मिनट में पहुंच जाएंगे पचमढ़ी भोपाल से पचमढ़ी के पहुंचने के लिए अभी सड़क मार्ग है। इसमें सैलानियों को 6 से 7 घंटे का समय लगता है। हवाई सेवा शुरू होने से 6 घंटे का सफर महज 35 मिनट में पूरा हो जाएगा। कानूनी दांव पेंच में उलझी पचमढ़ी की हवाई पट्टी पर हेलीकाप्टर उतारने के लिए वीआईपी हेलीपैड को अपडेट कर दिया गया है। हेलिपैड के पास लगाए गए बेरिकेड्स लोक निर्माण विभाग ने हेलीपेड का रंग रोगन कर सुरक्षा के लिए चारों तरफ बेरिकेड्स लगा दिए गए हैं। अभी तक इस हेलीपैड का राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित देशभर से आने वाले अति विशिष्ट अतिथियों को लेकर आने वाले हेलीकॉप्टर लिए इस्तेमाल किया जाता है। अब इस पर सैलानियों को लाने वाले हेलीकॉप्टर को भी उतरा जाएगा। पर्यटन बोर्ड (mp tourism) की हेलीकॉप्टर सेवा शुरु करने के लिए विभागीय तैयारी हो गई है। यहां से वे सतपुडा टाइगर रिजर्व के (एसटीआर) के मढ़ई, नीमधान, चूरना तक सड़क यात्रा कर जा सकते हैं। कार से 4 और बस से 6 घंटे में होता है सफर पूरा भोपाल से पचमढ़ी की दूरी लगभग 211 किलोमीटर है। सड़क से पचमढ़ी आने के लिए सैलानियों को कार, टैक्सी से और यात्री बस से 6 घंटे का सफर करना पड़ता है। हेलीकॉप्टर सुविधा शुरु होने के बाद टूरिस्ट 35 मिनट में पचमढ़ी पहुंच जाएंगे। हेलीकॉप्टर सेवा का किराया निर्धारण होना बाकी भोपाल से पचमढ़ी तक हेलीकॉप्टर में सैलानियों को कितना किराया देना पड़ेगा। इसका निर्धारण होना बाकी है। इसके लिए एमपीटी व्यवस्थाएं कर रहा है। प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों की तरह पचमढ़ी आवागमन करने वाले सैलानियों से निर्धारित किराया लिया जाएगा। पर्यटन में होगा इजाफा भोपाल से पचमढ़ी के हेलीकॉप्टर सेवा शुरु की जा रही है। इसमें सैलानियों से कितना किराया लगेगा। इसका निर्धारण होना बाकी है। इस सुविधा से पचमढ़ी और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पर्यटन में इजाफा होगा। – एके श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक पर्यटन बोर्ड भोपाल

पेंच में बना दुनिया का सबसे बड़ा बाघ स्टैच्यू, मोगली लैंड को पीछे छोड़ा मध्य प्रदेश में अनावरण: पेंच टाइगर रिजर्व में दुनिया की हाईएस्ट टाइगर प्रतिमा

सिवनी  मध्य प्रदेश के सिवनी पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कबाड़ के जुगाड़ से दुनिया का सबसे बड़ा बाघ का स्टेच्यू बनाया है. जिसका अनावरण बुधवार को मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने किया है. पेंच टाइगर रिजर्व का दावा है कि अब तक सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जॉर्जिया प्रांत में थी लेकिन अब उससे बड़ी प्रतिमा कबाड़ के जुगाड़ से पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा तैयार करवाई गई है. अमेरिका को पछाड़कर बनाया सबसे बड़ा बाघ का स्टेच्यू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी में आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक से पेंच टाइगर रिजर्व के खवासा पर्यटन गेट पर लोहे के कबाड़ से बनाई गई 40 फीट लंबी, 8 फीट चौड़ी और 17.5 फीट ऊंची बाघ की मूर्ति का अनावरण किया. पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि ''इंटरनेट में उपलब्ध वर्ल्ड रिकार्ड एकेडमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अब तक अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में है, जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है. जबकि इस लिहाज से अब सबसे बड़ी आकृति का तमगा हमारे पास है.'' मिशन लाइफ के तीन सूत्रों पर बनाई गई आकृति पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश कुमार ने बताया कि, ''मिशन लाइफ के अंतर्गत पीएम द्वारा तीन आर (3R) सूत्रों, रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) के भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा का निर्माण किया गया है. जनवरी में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साइकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें जैसी कई सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारम्भ किया गया था. मेक इन इंडिया के लोगों से मिली थी प्रेरणा पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि, ''प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक शेर को बनाया था और वह सिंह भी लोहे के कबाड़ से बना डिजाइन था. उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ की कलाकृति बनाने का प्लान किया गया था.'' सामूहिक प्रयासों की मिसाल है मूर्ति पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि, जो कभी कबाड़ था, आज वही 40 फीट का बल, 17.5 फीट की गरिमा और 8 फीट के गर्व के रूप में खड़ा है. खवासा गेट पर स्थानीय कलाकारों के साथ ऋषभ कश्यप के नेतृत्व में और वनकर्मियों के सहयोग से तैयार, कबाड़ से निर्मित विशाल बाघ मात्र एक मूर्ति नहीं, यह सामूहिक प्रयास की शक्ति का प्रतीक है. जिस प्रकार लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों ने मिलकर इस विशाल बाघ को आकार दिया, उसी प्रकार स्थानीय समुदायों, वन विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों और नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही संरक्षण की महान कहानी रचते हैं. 12 नवम्बर को मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अनावरित यह अद्भुत सृजन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के लिए सच्चे मन से उठाया गया एक छोटा कदम भी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी विरासत बन सकता है.

एमपी में कर्मचारियों का पेंशन विकल्प पर उदासीन रवैया, संगठन स्तर पर कोई पहल नहीं

भोपाल  भारत सरकार द्वारा लागू एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों में कोई रुचि नहीं है। किसी भी संगठन ने इसे लेकर पहल नहीं की है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में भी कुछ ने ही इस विकल्प को चुना है। उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। अब कर्मचारी सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। इस योजना में चार लाख 60 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। पुरानी पेंशन बहाली की मांग के बीच सरकार ने कर्मचारियों को साधने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना के साथ-साथ एकीकृत पेंशन योजना का विकल्प कर्मचारियों को दिया है। भारत सरकार की इस योजना को लेकर अधिकारी-कर्मचारी उत्साहित नहीं हैं। प्रदेश में इसे लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति तो गठित की गई पर इसकी बैठक ही नहीं हुई। दरअसल, अभी योजना को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण सरकार भी जल्दबाजी में नहीं है। लगातार किए जा रहे हैं संशोधन उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना में लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। अब यह प्रविधान किया गया है कि जो कर्मचारी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं वे सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड सहित अन्य व्यवस्थाओं में निवेश के लिए अधिकतम सीमा को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। योजना में कर्मचारी को यह अधिकार दिया गया है वो निवेश के लिए फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं। एक वर्ष में फंड चयन की सुविधा एक बार और निवेश पद्धति में परिवर्तन के लिए दो बार ही रहेगी। क्यों नहीं जुड़ रहे हैं लोग? हालांकि, यूपीएस में लंबी सर्विस ड्यूरेशन, मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन, टाइम से पहले रिटायरमेंट की सिचुएशन में लिमिटेड बेनिफिट्स, और फैमिली पेंशन के लिए लिमिटेड डेफिनिशन को लेकर डिससैटिस्फैक्शन की वजह से, 27 लाख सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज में से सिर्फ करीब 1% ने ही यूपीएस को चुना. सर्विस के दौरान डेथ होने पर मिलने वाले बेनिफिट्स की क्लैरिटी न होने, टैक्सेशन और यूपीएस अपनाने से पहले कॉस्ट वर्सेज बेनिफिट की चिंता से लोग इसे चुनने से बच रहे हैं. क्योंकि एक बार सलेक्ट करने पर इससे बाहर नहीं जाया सकता है. हालांकि, इसके लिए अभी हाल में ही सरकार ने वनटाइम वन वे स्विच का ऑप्शन दिया है, लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं. UPS के लिए गवर्नमेंट के उठाए कदम जुलाई में, सेंटर ने मार्केट-लिंक्ड एनपीएस के तहत मिलने वाले इनकम टैक्स बेनिफिट्स को यूपीएस तक एक्सटेंड किया, जिसमें रिटायरमेंट पर 60% फंड की टैक्स-फ्री विड्रॉल शामिल है. इसने गवर्नमेंट एम्प्लॉई की डेथ, डिसएबिलिटी या डिसमिसल की सिचुएशन में ओपीएस के बेनिफिट्स को भी इंप्रूव किया. सेंटर ने यूपीएस के तहत एम्प्लॉइज को रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का बेनिफिट भी दिया. इसने एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की डेडलाइन को 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया. पिछले हफ्ते, इसने यूपीएस से एनपीएस में वन-टाइम वन-वे स्विच फैसिलिटी स्टार्ट की. यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी इसे रिटायरमेंट से एक साल पहले तक या वॉलंटरी रिटायरमेंट के केस में रिटायरमेंट डेट से तीन महीने पहले तक यूज कर सकते हैं. यूपीएस में फिस्कल इंप्लीकेशन यूपीएस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गवर्नमेंट फाइनेंस पर गैरजरूरी कॉस्ट का असर न डाले. गारंटी एलिमेंट की वजह से एक्स्ट्रा एक्सपेंडिचर का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 26 में सिर्फ 8,500 करोड़ रुपये था, जो टाइम के साथ ग्रैजुअली बढ़ेगा, क्योंकि सैलरी स्केल रिवाइज होते हैं और न्यू पीपल सर्विस में जॉइन करते हैं. हालांकि, कर्मचारियों के नंबर में न्यू एडिशन्स पर जनरल कंट्रोल से एक्सपेंसेस पर कंट्रोल रहने की उम्मीद है. चूंकि, 2036 के बाद लोग यूपीएस के तहत रिटायर होंगे और उनमें से कुछ के साथ-साथ फैमिली पेंशनर्स की भी डेथ हो सकती है. ऐसी स्थिति में उनकी पेंशन कैपिटल अमाउंट कर्मचारी के सक्सेसर्स को रिटर्न नहीं की जाएगी. इससे फ्यूचर में बजट पर ज्यादा डिपेंड हुए बिना पेंशन के लिए गवर्नमेंट के रिसोर्सेज को इंप्रूव करने में हेल्प मिलेगी. हर पे कमीशन के डिसीजन के बाद बेसिक पेंशन को रीसेट नहीं किया जाएगा, जैसा कि ओपीएस में होता था.