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भोपाल : 20 सालों में बना देश का अग्रणी राज्य

भोपाल . डॉ. मोहन यादव। मध्यप्रदेश आज अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आये मध्यप्रदेश में विकास की नई यात्रा विगत दो दशकों से आरंभ हुई, जो प्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने की संभावनाओं तक पहुंच गई है। यह सुखद संयोग है कि आज देवउठनी ग्यारस के पावन अवसर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे तीज, त्यौहार और परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। उत्सव के आनंद से ही भविष्य निर्माण के भाव निर्मित होते हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में सभी त्यौहारों को व्यापक स्वरूप में मनाया जा रहा है। अपने त्यौहारों का सांस्कृतिक संदर्भ ही हमें पुरातन से नूतन की प्रेरणा देता है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत का ह्दय मध्यप्रदेश वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। हमें मां नर्मदा, चंबल, पार्वती, शिप्रा नदियों का सान्निध्य और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त है। यह भगवान परशुराम की जन्मस्थली, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली और आदि शंकराचार्य जी की तपोस्थली है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में लंबा समय व्यतीत किया है। इतिहास प्रसिद्ध राजा नल, भर्तृहरि, विक्रमादित्य की जन्म स्थली भी मध्यप्रदेश रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने ही शकों के आतंक से भारत को मुक्त किया था। संसार की पहली वैज्ञानिक कालगणना "विक्रम संवत्" का आरंभ भी मध्यप्रदेश के उज्जैन से हुआ था। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि हम अपने ऐतिहासिक गौरव की दिव्यता और प्राकृतिक भव्यता के साथ विरासत से विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए विकसित भारत निर्माण का संकल्प दिया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी के इस संकल्प को साकार करने और विकसित भारत निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में उद्योग वर्ष मनाने के साथ राज्योत्सव की थीम 'उद्योग और रोज़गार' रखी गई है। इसमें प्रदेश के सतत विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और जनभागीदारी का भाव है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें निवेश और औद्योगिक विकास की यात्रा को परिणाम में बदलने का अवसर प्राप्त हो रहा है। विविधता से समृद्ध मध्यप्रदेश के हर क्षेत्र की अपनी विशेषता, क्षमता और दक्षता है, जिसमें अनंत संभावनाएं हैं। इसी को केन्द्र में रखकर हमने प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट का नवाचार किया। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश के हर क्षेत्र का कौशल और उद्योग इसमें शामिल हुआ है। व्यापार को सरल बनाने और निवेशकों से सीधे संवाद के लिए हमने मार्च 2024 से उज्जैन से निवेश यात्रा शुरू की और फिर जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, यूके, जर्मनी, जापान, दुबई तक इसे विस्तार दिया। विभिन्न सम्मेलनों, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो के माध्यम से मध्यप्रदेश के निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। निवेशकों को एक सक्षम, सरल और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है। प्रदेश में इनोवेशन हब, स्टार्टअप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट और इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर देश की स्टार्टअप क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि मध्यप्रदेश ने पिछले एक वर्ष में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरी रुचि दिखाई है। खनिज कॉन्क्लेव में प्रदेश को 56 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जो खनिज नीति और प्रशासनिक सरलता का परिणाम हैं। आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक निर्माण इकाइयां और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि प्रदेश एक ऐसे परिवर्तनकाल से गुजर रहा है जहां निवेश, नवाचार और रोज़गार आधार स्तंभ हैं। लगभग दो वर्षों में प्रदेश ने उद्योग, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यावरण, ऊर्जा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। भारत के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (GYAN) के सम्मान का मंत्र दिया है। विकास के इन आधार स्तंभ के अनुरूप प्रदेश विकास और कल्याण के लिए युवा शक्ति, गरीब कल्याण, किसान कल्याण और नारी सशक्तिकरण मिशन के तहत कार्य किया जा रहा है। गरीब कल्याण मिशन में स्वरोज़गार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा आदि की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश कौशल विकास मिशन और स्टार्टअप नीति 2025 ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर में परिवर्तित किया है। कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रोज़गार मेले, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम और डिजिटल स्किल सर्टिफिकेशन जैसे प्रयास युवाओं को रोज़गार से जोड़ रहे हैं। रोज़गार सृजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासकीय और निजी क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थायी, कुशल और सम्मानजनक अवसर उपलब्ध किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने शासकीय भर्ती का कैलेण्डर जारी किया और उसके अनुरूप भर्ती प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। कृषि क्षेत्र को नवाचार के साथ सशक्त बनाने की दिशा में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। प्रदेश सरकार ने ड्रोन आधारित फसल निरीक्षण, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन पर विशेष फोकस किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और मुख्यमंत्री खेत-तालाब योजना सहित अन्य प्रयासों से किसानों के लिए सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के किसानों को सिंचाई और पानी की सुविधा व्यापक स्तर पर उपलब्ध होगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। आगामी 3 वर्षों में सिंचाई क्षेत्र का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। कृषि उपज का प्रत्यक्ष भुगतान, ऑनलाइन मंडी व्यवस्था और जैविक खेती के प्रोत्साहन ने अन्नदाताओं की आय में वृद्धि की है। मध्यप्रदेश गेहूं, सोयाबीन, चना और मसालों के उत्पादन में अग्रणी प्रदेश हैं। महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में नारी शक्ति मिशन परिवर्तनकारी सिद्ध हो रहा है। लाड़ली बहना योजना … Read more

किन्नर विधायक को ठहरने नहीं दिया! — MP के गेस्ट हाउस में SDM की हरकत पर मचा बवाल

दतिया  यह किसी विडंबना से कम नहीं कि जिस अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन की वे मुख्य अतिथि थीं, उसी सम्मेलन में शामिल होने आईं देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी को ठहरने की जगह नहीं मिली। शबनम मौसी को दतिया के रेस्ट हाउस में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते उन्हें कई घंटे असुविधा झेलनी पड़ी। जानकारी के अनुसार, शबनम मौसी 22 से 31 अक्टूबर तक रामजी वाटिका में आयोजित किन्नर महासम्मेलन में शामिल होने दतिया पहुंचीं थीं। उन्होंने एसडीएम संतोष तिवारी से विश्राम गृह में रुकने की अनुमति मांगी, लेकिन एसडीएम ने अधिकृत लेटर पैड पर आवेदन की मांग की। शबनम मौसी ने बताया कि वे पूर्व विधायक हैं और वर्तमान में उनके पास कोई अधिकृत लेटर पैड नहीं है। उन्होंने सादे कागज पर हस्ताक्षर सहित आवेदन देने की बात कही, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। कई घंटे तक प्रयासों के बावजूद जब रेस्ट हाउस में प्रवेश नहीं मिला, तब स्थानीय कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रेस्ट हाउस में ठहरने की अनुमति दी गई। गौरतलब है कि शबनम मौसी वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश के शहडोल से देश की पहली किन्नर विधायक चुनी गई थीं। वे सामाजिक समानता और तीसरे लिंग के अधिकारों की आवाज़ बनकर लंबे समय से सक्रिय हैं। इस पूरे प्रकरण पर एसडीएम संतोष तिवारी का कहना है कि शबनम मौसी द्वारा विधिवत लेटर पैड या पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था। ऐसे में नियमों के तहत रेस्ट हाउस खुलवाना संभव नहीं था। बाद में जानकारी मिलने पर उन्हें ठहरने की अनुमति दे दी गई।  

जनरल द्विवेदी बोले सतना में: ऑपरेशन सिंदूर जारी, धार्मिक स्थलों पर हमले से हमेशा बचते हैं

सतना  थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को सतना के कृष्ण नगर स्थित सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे. यहां पर वह छात्र-छात्राओं के परिचर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उनका विद्यालय प्रबंधन द्वारा शॉल, श्रीफल और मोमेंटो देकर सम्मान किया गया. जनरल उपेंद्र द्विवेदी इसी विद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं. यहां उन्होंने कक्षा चौथी तक पढ़ाई की. उनकी यादें इस विद्यालय से जुड़ी हैं. स्कूल पहुंचकर अपने बचपन को याद किया थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को बड़ा और कामयाब अभियान बताया. उन्होंने विद्यालय में अध्ययन करने का अनुभव साझा किया. इसके साथ ही सतनावासियों के लिए संदेश दिया "आप चाहे वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में हों, राष्ट्रप्रेम और देश निर्माण के लिए लगातार कार्य करते रहिए. विकसित भारत में हम सबको साथ मिलकर मेहनत करनी है. तब जाकर विकसित भारत का सपना 2047 में साकार हो सकेगा. " ऑपरेशन सिंदूर से देश एकजुट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा "ऑपरेशन सिंदूर का नाम ही पूरे देश को एक साथ जोड़ देता है. भारतीय संस्कृति में सिंदूर का बहुत महत्व है. जब बहन या बेटी सिंदूर लगाती है तो वह हमेशा अपने सैनिकों को याद करती है. जो सरहद पर दिन-रात तैनात रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर इसलिए सफल हुआ, क्योंकि हमने सैद्धांतिक और टेक्निकल कंबाइंड करके लड़ाई की. इस दौरान हमने ये भी तय किया कि किसी नागरिक का नुकसान न हो. केवल आतंकियों के खिलाफ ये मुहिम थी."  आर्मी चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने देश को बांधा आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा, इस अभियान ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। सिद्धांत और तकनीक के संयोजन से मिशन सफल हुआ। पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि हम धर्म युद्ध के अनुयायी हैं और आगे भी यही नीति अपनाएंगे। 'स्कूल से मिली निर्णय लेने की क्षमता' उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में सीखी निर्णय क्षमता ने उन्हें सेना में कई सफलताएं दिलाईं। चौथी कक्षा में यहीं से निर्णय लेने की क्षमता मिली, इसी ने ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक सफलता दिलाई। उन्होंने आगे बताया कि यह वही स्कूल है, जिसने उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र सेवा के संकल्प को मजबूत किया। आर्मी चीफ ने छात्रों को सफलता का मंत्र दिया जनरल द्विवेदी ने छात्रों से कहा, सफलता की नींव विद्यार्थी जीवन में ही रखी जाती है। उन्होंने सफलता का मंत्र Three-A (Attitude, Adaptibility, Ability) बताया। उन्होंने कहा कि Attitude से सकारात्मक दृष्टिकोण और पॉजिटिविटी आती है। Adaptibility से आप अपने अंदर समय के साथ बदलाव ला सकते हैं और Ability आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगी। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम करने वाला ही भविष्य में देश का निर्माण करता है। आप वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में, राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दें। यह देश हमारा है। जब हम सब मिलकर काम करेंगे तभी 2047 का विकसित भारत बनेगा। सरस्वती स्कूल के अनुभव शेयर किए अपने स्कूल सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करने के अनुभव के बारे में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया "जब आप बालक होते हैं और छोटे होते हैं तो आप उस उम्र में जो भी सीखते हैं, वह आपके साथ जिंदगी भर रहता है. यह स्कूल किस तरीके से आगे बढ़ गया है, यहां से कितने आईपीएस, आईएएस, फौजी और कितने डॉक्टर और इंजीनियर निकले हैं, ये सब देख रहे हैं." वहीं, थल सेनाध्यक्ष के दौरे को देखते हुए सेना की टीमों ने डॉग स्क्वाड सहित अत्याधुनिक मशीनरी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उनके बारे में महापौर योगेश ताम्रकार ने भी उन्हें सहपाठी बताया. 

रतलाम में धर्मांतरण मामले में SIT जांच, केरल से पास्टर को हर महीने मिलती थी 60 हजार सैलरी; रिमांड में उगले राज

रतलाम  इलाज के बहाने धर्मांतरण कराने के आरोपों से जुड़े रतलाम केस में अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच के दौरान सामने आया है कि झाबुआ से पकड़े गए पास्टर गॉडविन को केरल स्थित संस्था से हर महीने ₹60,000 सैलरी मिलती थी, जिसमें से वह ₹4,000 से ₹5,000 मुख्य आरोपी विक्रम सिंह के खाते में भेजता था। दो दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट ने पास्टर गॉडविन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।  केरल की संस्था से जुड़ा था पास्टर गॉडविन पुलिस पूछताछ में पता चला कि गॉडविन झाबुआ जिले के मोहनपुरा में एक चर्च का पास्टर था, जो 'चर्च ऑफ साउथ इंडिया' नामक संस्था से जुड़ा है। यह संस्था केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम में स्थित है। पास्टर का काम धार्मिक प्रचार, प्रार्थना आयोजन और चर्च की गतिविधियों की देखरेख करना था। संस्था द्वारा उसे हर महीने वेतन दिया जाता था।  मुख्य आरोपी विक्रम को भेजता था रकम गॉडविन ने स्वीकार किया कि वह विक्रम सिंह के खाते में पैसे भेजता था, लेकिन उसका दावा है कि यह “मदद” के रूप में भेजे गए थे। पुलिस इस दावे से संतुष्ट नहीं है और पैसों के लेन-देन के पीछे के वास्तविक उद्देश्य की जांच कर रही है।  CSP सत्येंद्र घनघोरिया की अगुवाई में SIT धर्मांतरण के इस मामले की गहराई तक जांच के लिए SP अमित कुमार ने 6 सदस्यीय SIT गठित की है, जिसका नेतृत्व CSP सत्येंद्र घनघोरिया करेंगे। टीम में नामली थाना प्रभारी गायत्री सोनी, औद्योगिक थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी, सायबर सेल और अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम अब तक हुई पूरी जांच की समीक्षा करेगी और आवश्यकतानुसार केरल जाकर साक्ष्य जुटाएगी।  इलाज के बहाने धर्मांतरण का आरोप 5 सितंबर को शिवशक्ति नगर (रतलाम) में कई ग्रामीणों को “इलाज” के नाम पर एक जगह लाया गया था। सूचना मिलने पर बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी विक्रम सिंह को अगले दिन पकड़ा गया। छापे के दौरान पुलिस को क्रॉस, बाइबल और प्रार्थना के वीडियो मिले थे, जिससे धर्मांतरण की गतिविधियों की पुष्टि हुई थी।  पास्टर का नाम बैंक जांच में आया सामने मुख्य आरोपी विक्रम के बैंक खातों की जांच में गॉडविन का नाम सामने आया था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे झाबुआ से गिरफ्तार किया और रिमांड पर लेकर पूछताछ की।  यह था पूरा मामला रतलाम के थाना औद्योगिक क्षेत्र के शिवशक्ति नगर में 5 सितंबर को बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग मिले थे। आरोप लगा था कि इन्हें इलाज के बहाने धर्मांतरण के लिए लाया गया था। बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। मौके से पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी अगले दिन पकड़ाया था। सभी के खिलाफ धर्मांतरण करने का केस दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी के खाते से जुड़ा पास्टर का नाम जब पुलिस ने मुख्य आरोपी के बैंक खातों की जांच की, तो झाबुआ के मोहनपुरा चर्च के पास्टर गॉडविन का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर लाई थी। दो दिन के रिमांड के बाद कोर्ट ने उसे भी जेल भेज दिया है। छापे में मिला था धार्मिक साहित्य और वीडियो शिवशक्ति नगर में कार्रवाई के दौरान पुलिस को क्रॉस टंगा मिला, बाइबल मिली और इलाज के बहाने प्रार्थना करवाने का वीडियो भी सामने आया था। इसी आधार पर धर्मांतरण की गतिविधि की पुष्टि हुई। इनके खिलाफ दर्ज हुआ था केस     जगदीश (30) पिता शम्भूलाल निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम गंगासागर रतलाम। (नर्सिंग स्टूडेंट)     मांगीलाल (35) पिता शंकरलाल निनामा साल निवासी सागवा थाना बिलकुंआ जिला बांसवाडा (राजस्थान)     गुड्डु उर्फ गुड्डा (18 साल 07 माह) पिता बालू मईडा निवासी गेणी थाना शिवगढ जिला रतलाम।     विक्रम सिंह (35) पिता शम्भूलाल उर्फ शम्भू निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम शिव नगर रतलाम।  

कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना

मध्य प्रदेश कृषि में अव्वल: टमाटर में पहला, मटर में दूसरा स्थान; दुग्ध उत्पादन 20% बढ़ाने का लक्ष्य कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना मध्य प्रदेश ने बनाई अलग पहचान: टमाटर व मटर उत्पादन में शानदार प्रदर्शन, दुग्ध उत्पादन में 20% बढ़ोतरी का लक्ष्य भोपाल  कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की देशभर में अलग पहचान है। लगातार सात कृषि कर्मण अवार्ड जीतने वाला न केवल यह पहला राज्य है, बल्कि कोरोना महामारी के समय रिकॉर्ड 128 लाख टन गेहूं का उपार्जन करके पंजाब को भी पीछे छोड़ चुका है। टमाटर में पहला और मटर के उत्पादन में मप्र का देश में दूसरा स्थान है, तो दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। अब किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों में देखें, तो मध्य प्रदेश टमाटर और मटर उत्पादन में लगातार प्रगति कर रहा है। टमाटर के बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। 2024-25 में 1,27,740 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई, जिससे 36 लाख 94 हजार 702 टन उत्पादन हुआ। यही स्थिति मटर को लेकर भी है। अन्य प्रमुख उद्यानिकी उत्पादों में संतरे, धनिया, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश का पहला स्थान है। इसी तरह दुग्ध उत्पादन और गोपालन को लेकर भी सरकार काम कर रही है। गोशालाओं को चारा के लिए 40 रुपये तक अनुदान देने का प्रविधान किया गया है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। दुग्ध उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए नस्ल सुधार का कार्यक्रम छेड़ा गया है। वहीं, पशुओं की टैगिंग भी की जा रही है। सहकारी समितियों का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है, तो संयंत्रों को आधुनिक बनाने की पहल भी की गई है। बासमती को जीआई टैग दिलाने का प्रयास इधर, बासमती धान को बासमती की पहचान दिलाने के लिए जीआइ टैग दिलाने के प्रयास लंबे समय से किए जा रहे हैं। इसको लेकर कानूनी लड़ चल रही है। जीआइ टैग नहीं मिलने के कारण व्यापारी प्रदेश से बासमती सामान्य धान की तरह लेकर जाते हैं, तो बासमती के नाम से बेचते हैं। इसके कारण किसानों को जो लाभ मिलना चाहिए वह नहीं मिलता है। प्राकृतिक खेती पर जोर प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के अति उपयोग के कारण भूमि की मृदा शक्ति प्रभावित हो रही है। भविष्य के खतरे को भांपते हुए सरकार का जोर इस बात पर है कि किसान प्राकृतिक खेती करें, ताकि भूमि की मृदा शक्ति बनी रहे। इसके साथ ही पराली (नरवाई) जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक ओर जहां कड़ाई की जा रही है तो दूसरी ओर नरवाई को भूमि में ही मिलने के उपकरणों पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर से भी इसे जोड़ा गया है।  

रेरा की सख्त कार्रवाई भोपाल में, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पर हुई बड़ी कार्यवाही

भोपाल में रेरा की बड़ी कार्रवाई — एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भी गिरी गाज बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति, ₹50,000 मानसिक क्षति मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का आदेश भोपाल  राजधानी भोपाल में रियल एस्टेट के नाम पर ग्राहकों से ठगी और मनमानी करने वाले बिल्डरों पर अब रेरा का डंडा चलने लगा है।मध्यप्रदेश रेरा (RERA) ने एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर प्रोजेक्ट में ग्राहकों को समय पर पजेशन न देने के मामले में सख़्त कार्रवाई की है। रेरा ने अपने आदेश में कंपनी को निर्देश दिया है कि ग्राहकों को दुकान का पजेशन देने तक ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति राशि दी जाए, साथ ही ₹50,000 मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का भुगतान किया जाए।  ग्राहकों के आरोप — करोड़ों लेकर न दुकान दी, न जवाब ग्राहक आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार और सुरेश वर्मा ने रेरा और पुलिस कमिश्नर कार्यालय भोपाल में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा ने दुकानों की बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये लिए लेकिन न तो तय समय पर निर्माण पूरा किया और न ही पजेशन दिया। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया और मानसिक उत्पीड़न किया गया।  रेरा का सख़्त रुख — “अब खेल खत्म, जवाबदेही तय होगी” रेरा ने मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डरों की लापरवाही को “स्पष्ट धोखाधड़ी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन” बताया। प्राधिकरण ने कहा कि ग्राहकों की गाढ़ी कमाई से इस तरह खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों को अब बख्शा नहीं जाएगा। “रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। अब निवेशकों को ठगने वालों को हर कदम पर जवाब देना होगा।”   शुभ बिजनेस ज़ोन बना विवाद का केंद्र भानपुर क्षेत्र का यह कमर्शियल प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े-बड़े दावे कर दुकानों की बुकिंग की थी, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। कई निवेशक अब भी अपनी मेहनत की कमाई फँसी होने से परेशान हैं।  आदेश का प्रभाव — प्रदेश के बिल्डरों के लिए चेतावनी रेरा की यह कार्रवाई पूरे मध्यप्रदेश के बिल्डरों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। अब यदि कोई बिल्डर तय समय पर पजेशन नहीं देता या ग्राहकों से मनमानी करता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक और कानूनी कार्रवाई तय है।  सारांश में —     •    कंपनी: एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड     •    प्रोजेक्ट: शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर, भोपाल     •    बिल्डर: हर्षवर्धन दीक्षित एवं गौरव शर्मा     •    शिकायतकर्ता: आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार, सुरेश वर्मा     •    रेरा आदेश:     •    ₹12,000 प्रति माह क्षतिपूर्ति     •    ₹50,000 मानसिक एवं शारीरिक क्षति मुआवज़ा     •    ₹5,000 प्रकरण व्यय भोपाल में रेरा की यह सख़्त कार्रवाई उन बिल्डरों के लिए सीधा संदेश है जो निवेशकों की गाढ़ी कमाई को अपनी जागीर समझ बैठे हैं। अब हर परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता ही एकमात्र रास्ता है — वरना एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह हर लापरवाह बिल्डर को रेरा के शिकंजे में आना तय है।

MIT-WPU, पुणे में होगा वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट का आयोजन

दुनिया के 25 देशों के 500 से ज़्यादा दिग्गज एकजुट होकर इनोवेशन के भविष्य को नई दिशा देंगे भोपाल/पुणे  भारत में उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थानों में से एक, MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) आने वाले 6-7 नवंबर, 2025 को वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप के साथ मिलकर पहले वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025 की मेज़बानी करेगा। यह वैश्विक शिखर सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण है, जो टेक्नोलॉजी, विज्ञान और इनोवेशन के क्षेत्र में इंसानी कौशल को बढ़ावा देगा— इसमें दुनिया भर के संस्थानों, स्टार्टअप्स, नीति बनाने वालों और जाने-माने विचारकों के साथ-साथ 25 देशों के 500 से ज़्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी से यह ज़ाहिर है कि, दुनिया भर की टेक्नोलॉजी पर चर्चा और इनोवेशन पर आधारित सहयोग में देश की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। देश भर में शुरू की गई 'मेक इन इंडिया' जैसी पहल के तहत रजिस्ट्रेशन करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 1.6 लाख से ज़्यादा है, जिससे पता चलता है कि दुनिया में टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए बेहतर माहौल के विकास में भारत सबसे आगे है।  दो दिनों तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति पर चर्चा की जाएगी, और इस तरह जानकारी के आदान-प्रदान तथा विभिन्न क्षेत्रों में संवाद के लिए एक मंच उपलब्ध होगा। इस आयोजन में दुनिया भर के शोधकर्ता, टेक्नोलॉजी के जानकार, नीति-निर्माता और इंडस्ट्री के दिग्गज एकजुट होकर आने वाले दशक के लिए टेक्नोलॉजी की दिशा तय करेंगे। इस मौके पर डॉ. गणेश काकंदीकर, डीन (इनोवेशन, स्टार्टअप्स, एवं कोलैबोरेशन MIT-WPU), तथा वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025, भारत के संयोजक, ने कहा: "इस शिखर सम्मेलन में विज्ञान और इनोवेशन के क्षेत्र के सभी प्रमुख विशेषज्ञ एकजुट होंगे, जो आने वाले कल की टेक्नोलॉजी और इंसान की भलाई के बीच के रिश्ते को और मज़बूत बनाएगा। यह सम्मेलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल बदलाव में भारत के योगदान को बढ़ावा देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मंच की भूमिका निभाएगा।" इस अवसर पर MIT-WPU के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा, "MIT-WPU में हम मानते हैं कि, टेक्नोलॉजी को सिर्फ नई-नई खोज के ज़रिए नहीं, बल्कि नेक इरादे के साथ इंसानियत की सेवा करनी चाहिए। भारत में वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट की मेज़बानी दुनिया को यह संदेश देती है कि, भविष्य में पूरी दुनिया में होने वाला इनोवेशन सबको साथ लेकर चलने वाला, नैतिकता पर आधारित और शांति की भावना से जुड़ा हुआ होना चाहिए। हम विज्ञान और अध्यात्म को जोड़कर, टेक्नोलॉजी को इंसानियत की तरक्की का जरिया बनाना चाहते हैं।" वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप के फाउंडर एवं एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, पॉल जे. फोस्टर ने कहा, "वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट ने विश्व स्तर पर चर्चा के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है, जो टेक्नोलॉजी, विज्ञान और इनोवेशन के साथ-साथ हमारे साझा भविष्य को आकार देने वाले लोगों को बढ़ावा देता है। भारत के पुणे में मौजूद बेहद सम्मानित संस्थान, MIT-WPU में हमारा पहला सम्मेलन 'इनोवेशन का प्रभाव, ग्लोबल कनेक्टिविटी तेजी लाने की जरूरत' की थीम पर आधारित है। यह सम्मेलन दुनिया भर के विचारकों और इनोवेशन करने वालों से ऐसी टेक्नोलॉजी के उपयोग की गुजारिश करता है, जो नेक इरादे और ज़िम्मेदारी के साथ इंसानियत की सेवा करे।"  इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले गणमान्य अतिथियों और दुनिया भर के प्रतिनिधियों में शामिल हैं: ●    डॉ. राहुल वी. कराड, एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, MIT-WPU ●    डॉ. आर. एम. चिटनिस, वाइस-चांसलर, MIT-WPU ●    डॉ. प्रसाद खांडेकर, चीफ़ एकेडमिक ऑफिसर, MIT-WPU ●    पॉल जे. फोस्टर, को-फाउंडर एवं एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप ●    स्टीव हेलमैन, को-फाउंडर एवं बोर्ड सदस्य, वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप ●    डेबोरा पंडित-सवाफ, चेयरमैन, कोऑर्डिनेशन कमिशन, वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025, इंडिया ●    नंदन झा, सेक्रेटरी-जनरल एवं फाउंडर, गांधी मंडेला फाउंडेशन ●    जूलियन गोरनॉल-थॉड, जनरल मैनेजर, शंकाई स्पोर्ट्स     ●    स्टेफी बाउ, सीईओ, INIT ईस्पोर्ट्स इस शिखर सम्मेलन में 100 से ज़्यादा स्टार्टअप्स भाग लेंगे, जिनमें करीब आधे स्टार्टअप्स की कमान महिलाएँ संभाल रही हैं। यह शिखर सम्मेलन महिलाओं की अगुवाई में होने वाले इनोवेशन और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव को उजागर करेगा। प्रमुख सत्रों में शामिल हैं: •    कल की आवाज़– इनोवेशन करने वाली पीढ़ी: युवाओं की आवाज़ और विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी का भविष्य •    इंडिया विज़न 2030– दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत का ब्लूप्रिंट •    इंसानी कौशल का सम्मान– शुरुआत, वर्तमान और भविष्य •    ग्लोबल साउथ का उदय – हमारे साझा भविष्य को नया रूप देने में ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव के बारे में जानना •    दुनिया के लिए एक नई व्यवस्था को आकार देना •    अल्फा इनोवेशन नाउ– इंसानी कौशल का प्रदर्शन: वैज्ञानिक और युवा एंटरप्रेन्योर्स करेंगे बेहतरीन विचारों और इनोवेशन का प्रदर्शन इस शिखर सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य, गहन चर्चा और विचार-विमर्श भी होंगे, जिन्हें शिक्षा जगत, उद्योग जगत और इनोवेशन करने वालों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हेल्थ-टेक, क्लाइमेट-टेक और शिक्षा में इनोवेशन पर होने वाली चर्चाओं में इस बात पर ज़ोर दिया जाएगा कि, टेक्नोलॉजी किस तरह सतत विकास और सामाजिक बदलाव लाने में मददगार है। जो लोग इस कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, वे कृपया आगे की जानकारी और रजिस्ट्रेशन के विवरण के लिए आयोजकों से संपर्क करें।

इलाज के बहाने धर्मांतरण: रतलाम में SIT गठित, पास्टर के सैलरी और राज खुले रिमांड में

रतलाम में धर्मांतरण मामले में SIT जांच, केरल से पास्टर को हर महीने मिलती थी 60 हजार सैलरी; रिमांड में उगले राज इलाज के बहाने धर्मांतरण: रतलाम में SIT गठित, पास्टर के सैलरी और राज खुले रिमांड में रतलाम मामला: धर्मांतरण की जांच में SIT सक्रिय, केरल से पास्टर को मिलती थी भारी सैलरी; रिमांड में मिले अहम खुलासे रतलाम  इलाज के बहाने धर्मांतरण कराने के आरोपों से जुड़े रतलाम केस में अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।  जांच के दौरान सामने आया है कि झाबुआ से पकड़े गए पास्टर गॉडविन को केरल स्थित संस्था से हर महीने ₹60,000 सैलरी मिलती थी, जिसमें से वह ₹4,000 से ₹5,000 मुख्य आरोपी विक्रम सिंह के खाते में भेजता था। दो दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट ने पास्टर गॉडविन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।  केरल की संस्था से जुड़ा था पास्टर गॉडविन पुलिस पूछताछ में पता चला कि गॉडविन झाबुआ जिले के मोहनपुरा में एक चर्च का पास्टर था, जो 'चर्च ऑफ साउथ इंडिया' नामक संस्था से जुड़ा है। यह संस्था केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम में स्थित है। पास्टर का काम धार्मिक प्रचार, प्रार्थना आयोजन और चर्च की गतिविधियों की देखरेख करना था। संस्था द्वारा उसे हर महीने वेतन दिया जाता था।  मुख्य आरोपी विक्रम को भेजता था रकम गॉडविन ने स्वीकार किया कि वह विक्रम सिंह के खाते में पैसे भेजता था, लेकिन उसका दावा है कि यह “मदद” के रूप में भेजे गए थे। पुलिस इस दावे से संतुष्ट नहीं है और पैसों के लेन-देन के पीछे के वास्तविक उद्देश्य की जांच कर रही है।  CSP सत्येंद्र घनघोरिया की अगुवाई में SIT धर्मांतरण के इस मामले की गहराई तक जांच के लिए SP अमित कुमार ने 6 सदस्यीय SIT गठित की है, जिसका नेतृत्व CSP सत्येंद्र घनघोरिया करेंगे। टीम में नामली थाना प्रभारी गायत्री सोनी, औद्योगिक थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी, सायबर सेल और अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम अब तक हुई पूरी जांच की समीक्षा करेगी और आवश्यकतानुसार केरल जाकर साक्ष्य जुटाएगी।  इलाज के बहाने धर्मांतरण का आरोप 5 सितंबर को शिवशक्ति नगर (रतलाम) में कई ग्रामीणों को “इलाज” के नाम पर एक जगह लाया गया था। सूचना मिलने पर बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी विक्रम सिंह को अगले दिन पकड़ा गया। छापे के दौरान पुलिस को क्रॉस, बाइबल और प्रार्थना के वीडियो मिले थे, जिससे धर्मांतरण की गतिविधियों की पुष्टि हुई थी।  पास्टर का नाम बैंक जांच में आया सामने मुख्य आरोपी विक्रम के बैंक खातों की जांच में गॉडविन का नाम सामने आया था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे झाबुआ से गिरफ्तार किया और रिमांड पर लेकर पूछताछ की।  यह था पूरा मामला रतलाम के थाना औद्योगिक क्षेत्र के शिवशक्ति नगर में 5 सितंबर को बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग मिले थे। आरोप लगा था कि इन्हें इलाज के बहाने धर्मांतरण के लिए लाया गया था। बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। मौके से पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी अगले दिन पकड़ाया था। सभी के खिलाफ धर्मांतरण करने का केस दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी के खाते से जुड़ा पास्टर का नाम जब पुलिस ने मुख्य आरोपी के बैंक खातों की जांच की, तो झाबुआ के मोहनपुरा चर्च के पास्टर गॉडविन का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर लाई थी। दो दिन के रिमांड के बाद कोर्ट ने उसे भी जेल भेज दिया है। छापे में मिला था धार्मिक साहित्य और वीडियो शिवशक्ति नगर में कार्रवाई के दौरान पुलिस को क्रॉस टंगा मिला, बाइबल मिली और इलाज के बहाने प्रार्थना करवाने का वीडियो भी सामने आया था। इसी आधार पर धर्मांतरण की गतिविधि की पुष्टि हुई। इनके खिलाफ दर्ज हुआ था केस     जगदीश (30) पिता शम्भूलाल निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम गंगासागर रतलाम। (नर्सिंग स्टूडेंट)     मांगीलाल (35) पिता शंकरलाल निनामा साल निवासी सागवा थाना बिलकुंआ जिला बांसवाडा (राजस्थान)     गुड्डु उर्फ गुड्डा (18 साल 07 माह) पिता बालू मईडा निवासी गेणी थाना शिवगढ जिला रतलाम।     विक्रम सिंह (35) पिता शम्भूलाल उर्फ शम्भू निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम शिव नगर रतलाम।

मध्य प्रदेश का विकास रिकॉर्ड: 70 साल में आय 584 गुना, आबादी में पौने तीन गुना वृद्धि

भोपाल  राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर मध्य प्रदेश का जन्म हुआ था। जनसंख्या, कृषि, उद्योग आदि विकास के मापदंडों की समीक्षा के बाद 1956 में इस नए राज्य का गठन किया गया था। निर्माण के बाद लगातार प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनाना गया। इसके बाद भी मध्य प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा बड़ा राज्य है। एक नवंबर को मध्य प्रदेश अपनी स्थापना का 70वां वर्ष मना रहा है। पांच वर्ष बाद यह अपने जन्म की 75वीं जयंती यानि हीरक जयंती मनाएगा। 70वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के विकास का आकलन करें तो पाते हैं राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 584 गुना बढ़ोतरी हुई तो आबादी में 2.78 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य पुनर्गठन आयोग और मध्य प्रदेश आजादी के बाद 29 दिसंबर 1953 को भारत के राज्यों के पुनर्गठन के लिए जस्टिस सैयद फैसल अली की अध्यक्षता और हृदयनाथ कुंजरू, वल्लभ माधव पणिकर की सदस्यता में एक आयोग गठित हुआ था। इस आयोग ने 30 सितंबर 1955 को अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को प्रस्तुत की थी। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश द्वारा की गई अनुशंसाओं को अमल में लाने के लिए लोकसभा में 18 अप्रैल 1956 को संविधान में नवम संशोधन विधेयक पेश हुआ और अक्तूबर में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 1 नवंबर 1956 को यह पूर्ण रूप से अधिनियम बना। आयोग की सिफारिशों के आधार पर सेंट्रल प्रोविजंस एंड बरार में शामिल मराठी भाषी जिले महाराष्ट्र में शामिल हो गए और 43 जिलों के साथ नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया। क्या कहा था नए प्रदेश के गठन के वक्त राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपने प्रतिवेदन में नए मध्य प्रदेश के संबंध में तर्क दिया था कि यह बहुत ही समृद्ध कृषि वाला राज्य होगा, क्योंकि यहां गेहूं, चावल पैदा करने वाला संपूर्ण क्षेत्र इसमें शामिल है। हालांकि, वर्ष 2000 में चावल का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में गठित हो गया।   पं. रविशंकर शुक्ल थे पहले सीएम 1956 की 31 अक्तूबर और 1 नवंबर की मध्य रात्रि को नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ तब प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने अपने संदेश में नए मध्य प्रदेश को राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्त्रोत बताते हुए कहा था कि 'ऊपर लहलहाते खेत और नीचे भूमि रत्नगर्भा है'। वहीं, उनके बाद सीएम बने कैलाशनाथ काटजू ने कहा था प्रकृति ने इस भू-भाग के निवासियों को पुरस्कृत करने में अत्यंत उदारता से काम लिया है। मप्र शक्ति का अविरल स्रोत बना आज प्रदेश की स्थापना के 70 वर्ष पूर्ण होने के बाद यह आकलन किया जाए कि क्या मध्य प्रदेश राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्रोत बन सका? क्या प्रकृति की अत्यंत उदारता प्रदेश के निवासियों को पुरस्कृत कर सकी? प्रदेश ने आर्थिक विकास की रफ्तार और प्रगति की राह को चुना और प्रगति के नए सोपान तय किए हैं। प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये से बढ़कर 1.52 लाख हुई मध्य प्रदेश ने बीते 70 वर्षों में कितनी प्रगति की है, इसकी झलक प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय से मिलती है। 1956 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये थी, जो वर्तमान में 1.52 लाख रुपये है। राज्य की प्रगति के साथ प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी वृद्धि हुई है। तीसरा सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादक राज्य कृषि के क्षेत्र में प्रदेश ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, देश के किसी भी राज्य को लगातार सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए यह खिताब मध्य प्रदेश ने हासिल किया है। गेहूं की पैदावार में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। दलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कपास उत्पादन में देश में प्रदेश का पांचवा स्थान है। जाहिर है कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने काफी उन्नति की है। सवा सात करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश में उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिलाकर 3,08,252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 93,000 वर्ग किलोमीटर इलाका जनजाति क्षेत्र में है। ग्रामीण क्षेत्र 309505.59 वर्ग किलोमीटर है, शहरी क्षेत्र में 7746 वर्ग किलोमीटर है, इस प्रकार 97.49 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है। इस तरह प्रदेश की 7.26 करोड़ जनसंख्या तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। बजट बढ़कर कई गुना हुआ वर्ष 2000-2001 राज्य का बजट 1,06,393 करोड़ रुपये का था, जो वर्ष 2024-25 में 3,26,383 करोड़ रुपये का अनुमानित है। राज्य में वर्तमान में 8586 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही है। जो 33 प्रतिशत ग्रामीण और 67 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त 38 जिला सहकारी बैंक 4536 प्राथमिक कृषि ऋण समिति भी कार्यरत है। निवेश के नए द्वार खुले उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे कई क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने प्रगति की है। प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोले हैं और नई सुविधाएं मुहैया करवाने की घोषणाए की हैं। प्रदेश में रोजगार पर्याप्त उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश के युवकों को रोजगार मिले इसके लिए प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया, प्रदेश में निवेश के लिए इंवेस्टर समिट का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इससे उद्योगों को उचित सुविधा देकर प्रदेश में आमंत्रित किया जा रहा है। परिवहन के क्षेत्र में प्रदेश ने नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्य प्रदेश के गठन से आज तक की स्थिति एक नजर में… क्रमांक विवरण वर्ष 1956 वर्ष 2025 1 क्षेत्रफल (वर्ग किमी) 4,43,452 3,08,000 2 जिले (संख्या) 43 55 3 संभाग (संख्या) 8 10 4 प्रतिव्यक्ति आय (रुपये में) 261 1,52,615 5 जनसंख्या 2,60,71,637 7,26,26,809 (2011 जनगणना के अनुसार अनुमानित 2025) 6 साक्षरता प्रतिशत (%) 16.83 69.32 7 शिक्षण संस्थाएं (संख्या) 22,800 79,215 8 विश्वविद्यालय (संख्या) 1 16 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (संख्या) 100 1,440 10 स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय (करोड़ रुपये में) 10 15,744 11 सड़कें (कुल लंबाई किमी में) 28,173 80,875 12 रेलमार्ग (किमी में) 4,891 5,188 13 वन क्षेत्र (वर्ग किमी) 1,56,386 (छत्तीसगढ़ का भाग शामिल) 85,724 14 सिंचित कृषि क्षेत्र (लाख हेक्टेयर में) 8.24 55 15 प्रदेश का … Read more

बच्चों से लेकर रोमियो तक, 5 लाख फर्जी कॉल्स ने 108 एम्बुलेंस की सेवा बाधित की, FIR प्रक्रिया शुरू

भोपाल  भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश में आपातकाली 108 एम्बुलेंस सेवा को लोगों ने मजाक बना दिया है. पिछले छह महीनों में 5.72 लाख से ज्यादा फर्जी कॉल्स आने से न केवल कॉल सेंटर का स्टाफ परेशान है, बल्कि करीब 1500 घंटे की एम्बुलेंस सेवा भी बर्बाद हो गई है. कई कॉलर गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप, अकेलापन या मस्ती के लिए एम्बुलेंस सेवा पर फोन करते हैं. इन फर्जी कॉल्स की वजह से जरूरमतमंद मरीजों को कई बार समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती है. अब इन फर्जी कॉलर्स पर एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है.  एम्बुलेंस बुलाकर समय खराब किया भोपाल के कोलार रोड इलाके में गुरुवार को एक व्यक्ति पर एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया और कहा कि उसकी तबीयत खराब है. एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन वहां कोई बीमार नहीं मिला. जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा कि अब सब ठीक है, इसकी जरूरत नहीं. करीब 30 मिनट बर्बाद हो गए. इस तरह के सैकड़ों कॉल हर रोज आते हैं. इन फर्जी कॉल से निपटने की तैयारी की जा रही है. जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.  जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने मीडिया बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इन कॉल्स के कारण कई बार जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती। 108 सेवा आपातकालीन है। इसे मजाक या टाइमपास के लिए इस्तेमाल करना अपराध है। जानकारी के अनुसार गुरुवार को भोपाल के कोलार रोड से एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे हजारों कॉल रोज आते हैं। कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।" पहले बुलाई एम्बुलेंस फिर कहा अब जरूरत नहीं गुरुवार को कोलार रोड के एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे सैकड़ों कॉल रोज आते हैं। फर्जी कॉलर्स की पहचान के लिए हो रही स्टडी कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। कैसे फर्जी कॉल्स बिगाड़ रहे सिस्टम 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।”