samacharsecretary.com

‘परिक्रमा-कृपा सार’ से झलका आध्यात्मिक अनुभव, प्रहलाद पटेल ने लॉन्च की नई पुस्तक

इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के श्रम, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की किताब ‘परिक्रमा-कृपा सार’ का विमोचन किया. यह किताब नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों पर लिखी गई है. प्रहलाद पटेल ने सूबे की नदियों के उद्गम को बचाने के लिए ‘उद्गम मानस यात्रा’ शुरू की थी. उन्होंने बुक लॉन्चिंग के दौरान कहा कि अगर वो केंद्र से मध्य प्रदेश की राजनीति में न लौटते, तो शायद नदियों के उद्गम को बचाने का संकल्प न ले पाते.  प्रहलाद पटेल नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों पर लिखी अपनी किताब ‘परिक्रमा-कृपा सार’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने 2 साल पहले ‘उद्गम मानस यात्रा’ शुरू की थी. इसके तहत वो अब तक 108 नदियों के उद्गम स्थलों तक पहुंच चुके हैं. प्रहलाद पटेल की इस यात्रा का मकसद मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों के पुनर्जीवन और संरक्षण को लेकर जनता में जागरूकता फैलाना है. इसके साथ ही पर्यावरण के प्रति लोगों में चेतान फैलाना भी है.  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे मोहन भागवत प्रहलाद पटेल की किताब ‘परिक्रमा-कृपा सार’ का विमोचन इंदौर के ‘ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर’ में 14 सितंबर (हिंदी दिवस) पर मोहन भागवत और महामंडलेश्वर श्री ईश्वरानंद जी महाराज की विशेष उपस्थिति में किया गया. विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भागवत ने कहा, ‘नर्मदा परिक्रमा में जो कुछ प्रहलाद जी को बोध मिला होगा, उस बोध (पुस्तक) को सरसरी तौर पर जो मैंने पढ़ा है, उसमें तो यही है कि मैं और मेरा छोड़ो; अंतःकरण पवित्र करो. स्वार्थ बिल्कुल मत रखो. कर्तव्य, कर्म करते चलो, सबको अपना मानकर चलते जाओ.’ कार्यक्रम के दौरान प्रहलाद पटेल ने किताब के लेखन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि 30 साल पहले उन्होंने अपने आराध्य श्रीश्री बाबाश्री जी की सेवा करते हुए नर्मदा परिक्रमा की थी. इस यात्रा का राजनीति से कोई संबंध नहीं था. उसी दौरान के अनुभव और अनुभूतियों को संकलन करके यह किताब सामने आई है. पुस्तक विमोचन से पहले मोहन भागवत को प्रहलाद पटेल ने अपनी ‘उद्गम मानस यात्रा’ के दौरान इकट्ठा किए गए 108 नदियों का पवित्र जल भी सौंपा.

राष्ट्रीय लोक अदालत में 39 हजार से ज्यादा बिजली मामलों का समाधान, ऊर्जा मंत्री तोमर ने दी जानकारी

राष्ट्रीय लोक अदालत में हुए 39 हजार से अधिक बिजली संबंधी प्रकरण निराकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर उपभोक्ताओं को मिली 14 करोड़ रूपये की छूट भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि गत दिनों आयोजित हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रदेश में 39 हजार 337 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। राष्ट्रीय लोक अदालत में पात्रता अनुसार बिजली उपभोक्ताओं को 14 करोड़ 3 हजार रूपये की छूट दी गई है। बिजली कम्पनियों को 45 करोड़ 13 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा 17 हजार 486 प्रकरणों का निराकरण कर विद्युत उपभोक्ताओं को 7 करोड 33 लाख 83 हजार रूपये की छूट दी गई है। कम्पनी को 21 करोड़ 8 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा 13 हजार 233 प्रकरणों का निराकरण कर विद्युत उपभोक्ताओं को 3 करोड़ 92 लाख रूपये की छूट दी गई है। बिजली कम्पनी को 13 करोड़ 22 लाख रूपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा 8 हजार 618 प्रकरणों का निराकरण कर विद्युत उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 77 लाख रूपये की छूट दी गई है। बिजली कम्पनी को 10 करोड़ 11 लाख रूपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि लोक अदालत में 10 लाख रूपए तक के सिविल दायित्व के प्रकरणों में समझौते की सीमा निर्धारित थी। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135, धारा 126 के तहत दर्ज बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरणों का समझौता किया गया। प्री लिटिगेशन स्तर सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट, लिटिगेशन स्तर के प्रकरणों में आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई। धारा 126 के प्रकरणों में सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं विलंब होने पर ब्याज में सौ प्रतिशत की छूट देय थी।  

मुख्यमंत्री ने की घोषणा: मध्यप्रदेश में बनेगा इंजीनियर्स रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंजीनियरों को बताया देश का शक्ति स्तंभ

भोपाल   इंजीनियरिंग डे के अवसर पर सोमवार को राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कंवेंशन सेंटर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप, न्यूज लेटर और लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीकी नवाचार विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाएंगे और पारदर्शिता लाएंगे। मुख्यमंत्री ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि प्रदेश में इंजीनियर्स रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी, जहां अभियंताओं को नवीन तकनीक और कार्यपद्धति का प्रशिक्षण मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “इंजीनियर्स एक प्रकार से भगवान हनुमान के समान हैं, जिन्होंने हर अवसर पर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है। इस अवसर पर 7 इंजीनियरों को मोक्षगुंडम विश्वैशरैया पुरस्कार और 4 ठेकेदारों को विश्वकर्मा पुस्कार से सम्मानित किया। "ईश्वर सबसे बड़ा अभियंता है" – सीएम यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियंता शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि अभियंता का मतलब है आरंभ और शुभारंभ करने वाला। उन्होंने कहा कि “ईश्वर ने इस संसार की रचना की है, वही सबसे बड़े अभियंता हैं। सर मोक्षगुंडम विश्वैश्वरैया ने 20वीं शताब्दी में अभियांत्रिकी के नए कीर्तिमान रचे। देश के अभियंताओं ने चिनाब ब्रिज जैसे कठिन प्रोजेक्ट बनाकर अपनी अद्वितीय क्षमता साबित की है। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंजीनियरों को गति शक्ति योजना जैसे प्रोजेक्ट से लगातार प्रेरित कर रहे हैं। “जब अंतरिक्ष मिशन असफल हुआ तो पीएम मोदी वैज्ञानिकों के साथ खड़े रहे। यह संदेश है कि राष्ट्र निर्माण में तकनीक और अभियंता कितने अहम हैं।  लोक निर्माण से लोक कल्याण की ओर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग केवल सड़कें और पुल नहीं बना रहा बल्कि लोक कल्याण की नई परंपरा गढ़ रहा है। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा का उल्लेख करते हुए कहा कि “उन्होंने पुष्पक विमान जैसी रचना की थी। आज हमारे इंजीनियर तकनीक के सहारे अनेक ताजमहल खड़े करने की क्षमता रखते हैं। अधोसंरचना में नई इबारत लिख रहा मध्यप्रदेश कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अधोसंरचना विकास की नई गाथा लिख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का विकास तेजी से हुआ है और मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसे प्रदेश में पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर केवल पुल-पुलिया नहीं बनाते, बल्कि वे देश की तकदीर और तस्वीर गढ़ते हैं। सिंह ने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में 500 लोक कल्याण सरोवर बनाए जा चुके हैं। विभाग ने लोकपथ ऐप सहित कई नवाचार किए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में एक विशेष ऐप लाया जाएगा जो कार्यों की समय-सीमा का आकलन करेगा। पीएम गति शक्ति पोर्टल से पुलों और संरचनाओं के डिजाइन में मदद मिल रही है। भारत के विकास में इंजीनियरों की विरासत प्रसिद्ध इंजीनियर और लेखक प्रशांत पॉल ने अपने वक्तव्य में भारत की इंजीनियरिंग परंपरा को याद किया। उन्होंने कहा कि आज से 2,000 साल पहले विश्व की जीडीपी का एक तिहाई भारत के पास था और इसमें हमारे इंजीनियरों का बड़ा योगदान था। “राजा भोज ने हाइड्रोलिक पावर और यांत्रिकी डिजाइन तैयार किए, चोल राजाओं ने अनाईकट्टू बांध बनाया, वराहमिहिर ने खगोल विज्ञान में क्रांति की। यह हमारी गौरवशाली विरासत है। इस अवसर पर कई अभियंताओं और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। – मोक्षगुंडम विश्वैशरैया पुरस्कार : सुनील कौरव, प्रीति यादव, प्रमेश कोरी, संजीव कालरा, भुवना जोशी, राजीव श्रीवास्तव, दीपक शर्मा और विक्रम सोनी को प्रदान किया गया। – विश्वकर्मा पुरस्कार : हैदराबाद की एनसीसी लिमिटेड, भोपाल की निविक कंस्ट्रक्शन, गुरुग्राम की आरके जैन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. और नौगांव की हरगोविंद गुप्ता को मिला। – रानी दुर्गावती पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार : एमपीआरडीसी भोपाल के सहायक महाप्रबंधक डॉ. दीपक पांडे को दिया गया। 

अलीराजपुर जिले का नाम अब हुआ ‘आलीराजपुर’

भोपाल राज्य शासन ने जिला अलीराजपुर का नाम परिवर्तित कर आलीराजपुर करने की अधिसूचना जारी की है। राजस्व विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार जिला अलीराजपुर का नाम अब "आलीराजपुर" होगा। यह निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 21 अगस्त 2025 को जारी अनापत्ति पत्र के आधार पर लिया गया है। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू होगी।  

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: 1 अक्टूबर को होंगे सम्मान और जागरूकता से जुड़े विविध कार्यक्र

1 अक्टूबर को मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस, बुजुर्गों के लिए आयोजित होंगे विविध आयोजन भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस एक अक्टूबर को मध्यप्रदेश में विशेष रूप से मनाया जाएगा। इस अवसर पर राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। दिवस का प्रमुख उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों की समाज में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें समावेशी भविष्य के निर्माण में सशक्त पहचान दिलाना है। कार्यक्रम की थीम “समावेशी भविष्य के लिए वृद्धजन की पहचान को सशक्त बनाना” निर्धारित की गई है। जिला स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, संवाद सत्र एवं जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित होंगी। इन आयोजनों का मुख्य फोकस यह रहेगा कि वृद्धजन केवल परिवार और समाज के अनुभव का आधार ही नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी के माध्यम से समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। विशेष आकर्षण के रूप में प्रत्येक जिले में ‘शतायु सम्मान’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 100 वर्ष या उससे अधिक आयु पूर्ण कर चुके वृद्धजनों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। इस पहल से राज्य सरकार का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश देना है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने सभी जिला कलेक्टर और विभाग के जिला अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि कार्यक्रमों का स्वरूप स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुरूप तैयार किया जाए तथा प्रत्येक जिले में अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के आयोजन से प्रदेश में न केवल वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि समाज में उनके अनुभव और मार्गदर्शन की उपयोगिता को भी पुनः रेखांकित किया जाएगा। यह आयोजन प्रदेश की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें बुजुर्गों को समाज की धरोहर मानते हुए उन्हें सम्मान और सहयोग प्रदान करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

राज्य सरकार का अहम फैसला, आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान के निर्देश जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य शासन ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।श्रम विभाग ने आउटसोर्स कर्मियों के वेतन की तिथि निर्धारित कर दी है। इसके तहत हर महीने की 7 से 10 तारीख के बीच सभी कर्मियों के वेतन का भुगतान करना होगा यह आदेश सभी शासकीय कार्यालयों, निगमों, मंडलों और प्राधिकरणों पर लागू होगा। हर माह की 7 से 10 तारीख के बीच वेतन भुगतान अनिवार्य श्रम विभाग के अपर सचिव बसंत कुर्रे ने बताया है कि शासकीय कार्यालयों, निगमों मंडलों और प्राधिकरणों में अगर 1000 से कम आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं तो उन्हें भुगतान 7 तारीख तक किया जाना अनिवार्य है। इसी तरह 1000 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी होने पर उन्हें माह की 10 तारीख तक वेतन का भुगतान किया जाना अनिवार्य है। इसके लिये विभाग ने एक व्हाट्सअप नंबर भी जारी किया है, ताकी कोई भी परेशानी आने पर कर्मचारी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं और फिर विभाग उसका समाधान करेगा।     7 तारीख तक वेतन: 1000 से कम आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं तो उन्हें भुगतान 7 तारीख तक किया जाना अनिवार्य है।     10 तारीख तक वेतन: 1000 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी होने पर उन्हें माह की 10 तारीख तक वेतन का भुगतान किया जाना अनिवार्य है। व्हाट्सअप नंबर जारी, कर सकते है शिकायत यदि किसी आउटसोर्स कर्मचारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर वेतन प्राप्त नहीं होता है, तो उसके पास सीधे शिकायत दर्ज कराने का विकल्प उपलब्ध होगा।आउटसोर्स कर्मचारी शासन द्वारा संचालित WHATSAPP नंबर 07552555582 पर कर्मचारी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।विभाग उनकी शिकायत का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा।

बीजामंडल में रोजाना पूजा की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

 विदिशा  विदिशा शहर के किलेअंदर स्थित बीजामंडल (विजय मंदिर) को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। कोर्ट ने विदिशा निवासी शुभम वर्मा सहित पांच याचिकाकर्ताओं की याचिका को स्वीकार कर लिया है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से इस संबंध में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं में शामिल विदिशा निवासी शुभम वर्मा ने रविवार को यह जानकारी दी है। बीजामंडल को लेकर की जा रही मांगों के संबंध में शुभम ने बताया कि बीजामंडल के आगे मंदिर लिखे जाने और पूजा-अर्चना के लिए हर रोज गेट खोले जाने की मांग की जा रही है।  20 अगस्त को याचिका की थी दायर, कोर्ट ने किया मंजूर इसको लेकर 20 अगस्त को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पैरवी कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के अनुसार कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है। आठ सितंबर को याचिका स्वीकृत किए जाने संबंधित पत्र भी प्राप्त हुआ है। शुभम के अनुसार इस मामले में प्रथम याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन है। जबकि स्वयं शुभम द्वितीय याचिकाकर्ता हैं। इसके अलावा राकेश, मनी व राहुल का नाम भी संयुक्त रूप से दायर की गई याचिका में शामिल है। हरिशंकर जैन अधिवक्ता है और अयोध्या राममंदिर के पक्ष में याचिकाकर्ता भी रहे है। काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर दायर की गई याचिका में भी उनका नाम याचिकाकर्ताओं में शामिल है। पिछले कई वर्षों से गेट खोलने की मांग शुभम ने बताया कि बीजामंडल को लेकर उनके द्वारा कई बार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है। हर रोज पूजा के लिए गेट खोलने की मांग की गई है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसलिए उन्होंने न्यायालय की शरण ली। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष से वह बीजामंडल को लेकर अध्ययन करते हुए कई साक्ष्य जुटाए हैं। साक्ष्यों के साथ ही न्यायालय में 118 पेज की याचिका लगाई गई है। दावा है कि 1962 में बीजामंडल मंदिर को तोड़ दिया गया। कई वर्षों तक मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां थी, जिसे संग्रहालय में रखवा दिया गया है। बीजामंडल मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित हो, इसके लिए न्यायालय की शरण ली गई है।

SC के फैसले पर BJP की प्रतिक्रिया: मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, वक्फ संपत्तियों से हटेगा अवैध कब्जा

भोपाल  भारत की सर्वोच्च अदालत ने यानि सुप्रीम कोर्ट ने आज वक्फ़ बोर्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अपना निर्णय सुना दिया, कोर्ट ने वक्फ़ कानून से जुडी कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है लेकिन पूरे कानून पर रोक नहीं लगाई, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भाजपा ने स्वागत किया है, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा अब वक्फ संपत्तियों पर हुए कब्जे हटेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा फैसले में  CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कलेक्टर के अधिकारों पर सुप्रीम  कलेक्टर का फैसला अंतिम फैसला नहीं होगा, इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने वक्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 की उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसमें वक्फ़ बनाने के लिए किसी व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना आवश्यक बताया गया था। अदालत ने कहा कि यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक राज्य सरकारें यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बना लेतीं कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सकारात्मक परिणाम देगा  सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ये फैसला निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देगा,  उन्होंने कहा वक्फ संपत्तियों पर चंद लोगों ने बेजा कब्जा कर रखा था l वक्फ संपत्ति का उपयोग उन लोगों के लिए होना चाहिए जिन्हें इन संपत्तियों के माध्यम से सहायता की जरूरत है। कुछ मुस्लिम नेताओं ने मारा गरीबों का हक़  उन्होंने कहा गरीब लावारिस बच्चों को पनाह देना, शिक्षा देना इसके लिएय वक्फ़ संपत्तियों का इस्तेमाल होना चाहिए लेकिन चंद मुस्लिम नेताओं ने अपने बच्चों के ऐशो आराम के लिए इन संपत्तियों का इस्तेमाल किया था, अब जब कानून वक्फ कानून तो उनके पेट में दर्द हुआ था। वक्फ़ संपत्तियों से हटेगा बेजा कब्ज़ा  आज सुप्रीम कोर्ट ने गलत मंतव्य से लगाई गई याचिकाओं को आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है उसने कहा जो कानून बना है उस पर रोक नहीं  सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद वक्फ संपत्तियों पर लोगों ने अपने वुँक्तिगत हित साधने के लिए बेजा कब्ज़ा किया था अब वो हटेगा।  

MP में भारी बारिश की संभावना, 13 जिलों में जारी किया अलर्ट

भोपाल   मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया की एक्टिविटी की वजह से बारिश का दौर चल रहा है। सोमवार को इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ग्वालियर-चंबल संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।अगले 2 दिन भी तेज बारिश हो सकती है। भोपाल में हुई घंटा तेज बारिश  रविवार को दोपहर में भोपाल में करीब एक घंटा तेज बारिश हुई। जबलपुर, बैतूल, पचमढ़ी, राजगढ़ में भी बारिश का दौर चला। नर्मदापुरम के इटारसी में भी तेज पानी गिरा।खरगोन, खंडवा, डिंडौरी, मंडला, शहडोल, अनूपपुर, नर्मदापुरम, सागर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, रीवा, सतना, मैहर, पन्ना, बुरहानपुर, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, जबलपुर, कटनी, दमोह समेत कई जिलों में हल्की बारिश हुई। प्रदेश में अब तक औसतन 42 इंच बारिश दर्ज मध्यप्रदेश में अब तक औसत 42 इंच बारिश हो चुकी है। जबकि अब तक 34.9 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.1 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। इस सीजन में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां सबसे कम पानी गिरा है। सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा खरगोन और शाजापुर शामिल हैं। जबकि जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई।ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। 

सलकनपुर धाम में आस्था का सैलाब! 22 सितंबर से मेला, प्रशासन ने की सुरक्षा व सुविधा की पूरी तैयारी

सलकनपुर  सीहोर जिले में स्थित विजयासन देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सलकनपुर धाम में शारदीय नवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। आगामी 22 सितंबर से शुरू हो रहे नौ दिन के मेले में लाखों श्रद्धालुओं की उम्मीद है। इस वर्ष भी मेला स्थल पर व्यवस्था को पूर्णत: चाक-चौबंद किया गया है। कलेक्टर बालागुरू के. और एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने सलकनपुर मंदिर परिसर एवं नर्मदा आंवलीघाट का निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर परिसर में बैठक आयोजित कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर बालागुरू के. ने निर्देश दिए कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। मंदिर परिसर में आगमन और निर्गमन की सुगम व्यवस्था के लिए पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए जाएं। फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी सेवाओं की भी पूर्ण तैयारी रहे। मेला स्थल पर दुकानों को व्यवस्थित ढंग से लगवाने और बेहतर प्रबंध के निर्देश कलेक्टर ने दिए। प्रत्येक दुकानदार और स्टॉल का स्थान सुनिश्चित किया जाएगा ताकि भीड़ नियंत्रण और सुविधाओं में कोई बाधा न आए। 200 से अधिक पुलिस बल रहेगा तैनात एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों को सभी मुख्य स्थानों पर पर्याप्त बल तैनात करने के निर्देश दिए। ड्यूटी दौरान किसी भी स्थान पर यातायात बाधित होने पर तुरंत उसे सुचारु करने का निर्देश दिया गया। मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निगरानी के लिए 200 से अधिक पुलिस बल तैनात रहेगा। मंदिर प्रांगण में रोपवे का निरंतर संचालन निश्चित किया जाएगा। कलेक्टर बालागुरु के. ने निर्देश दिए कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ कैंप लगाए जाएं। आवश्यकतानुसार एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया जाएगा। ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके। अस्थायी बस स्टैंड और बाहरी वाहनों की पार्किंग बाहर से आने वाली बसों और वाहनों के लिए अस्थायी बस स्टैंड बनाए जाएंगे। इससे सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात सुचारु रहेगा। कलेक्टर ने कहा कि बाहरी वाहनों के खड़े होने के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया जाए। मुख्य स्थानों पर हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे। मंदिर परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा ताकि अधिकारी-कर्मचारी सतत संपर्क में रहें और किसी भी प्रकार की समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। मुख्य स्थानों पर अस्थाई शौचालय और चेंजिंग रूम भी स्थापित किए जाएंगे। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा और आराम दोनों सुनिश्चित होंगे। आंवलीघाट का विशेष निरीक्षण कलेक्टर और एसपी ने नर्मदा आंवलीघाट का निरीक्षण किया। घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान और पूजा कार्यक्रम व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जाएंगे। पर्याप्त पार्किंग, बैरिकेडिंग, प्रकाश और बिजली आपूर्ति, अस्थाई शौचालय और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए गए। कलेक्टर ने कहा कि श्रद्धालु स्नान के दौरान गहरे पानी में न जाएं। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे। घाट और मंदिर परिसर में सभी आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित कर हर श्रद्धालु को सुरक्षित और सहज दर्शन-अर्चना का अवसर मिलेगा। इस वर्ष भी प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि मेले का संचालन सुचारू और व्यवस्थित हो। पार्किंग, यातायात, सुरक्षा, हेल्थ, पेयजल और साफ-सफाई सहित सभी व्यवस्थाओं का विस्तृत नियोजन किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी परिस्थिति में श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।