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हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए, लेकिन अपनी रक्षा करेंगे: राजनाथ सिंह

महू  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए लेकिन अपनी जमीन की रक्षा के लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। जब हम आगे की ओर देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि भारत के सामने चुनौतियां बड़ीं हैं. उन्होंने कहा- देश की रक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों द्वारा ही नहीं की जाती, बल्कि नई तकनीक विकसित करने वाले वैज्ञानिकों, हथियार प्रणाली बनाने वाले उद्योगपतियों और अगली पीढ़ी को युद्ध के लिए तैयार करने वाले शिक्षकों द्वारा भी की जाती है। राजनाथ ने यह बात महू में आयोजित रण संवाद 2025 के दूसरे दिन बुधवार को कही। उन्होंने कहा- हमें अपनी एकता, अपनी स्पष्ट नीयत और पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस देश को आगे ले जाना है। इसी आत्मविश्वास के साथ हम 2047 की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। रणनीति को मजबूत करेगा रण संवाद रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा- मैं कहना चाहूंगा कि आज का 'रण संवाद' सिर्फ विचारों का आदान-प्रदान नहीं है बल्कि सुरक्षा, नीति-निर्माण और तीनों सेनाओं के विभिन्न पहलुओं को समझने का एक अवसर है। यहां होने वाली चर्चाएं हमें यह सोचने का अवसर देंगी कि हम भारत को कैसे और अधिक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना सकते हैं। ये न केवल रक्षा रणनीति को मजबूत करेंगी बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाने में भी मददगार साबित होंगी। युद्ध का स्वरूप बदल रहा है आधुनिक दौर में युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर स्पेस तक फैल चुके हैं। सैटेलाइट सिस्टम, एंटी-सैटेलाइट हथियार और स्पेस कमांड सेंटर अब शक्ति के नए साधन बन गए हैं। आज साइबर वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट आधारित निगरानी युद्ध की नई दिशा तय कर रहे हैं। नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर की चुनौती आज के समय में युद्ध का कोई तयशुदा स्वरूप नहीं है। यह युग नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर का है। ऐसे में हमें अपनी रणनीति को लचीला और समयानुकूल बनाना होगा। किसी निश्चित युद्ध नीति पर आंख मूंदकर भरोसा करना अब संभव नहीं है। संवाद है भारत की परंपरा वैश्विक माहौल में संवाद की कमी ही टकराव और शत्रुता का बड़ा कारण बनती है। युद्धकाल में भी संवाद के रास्ते खुले रखना जरूरी है। भारतीय परंपरा में युद्ध और संवाद हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। युद्ध से पहले संवाद हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। रणनीतिक-कूटनीतिक दृष्टिकोण को नई दिशा मिलेगी रण संवाद केवल अकादमिक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की सामरिक और कूटनीतिक सोच को परिष्कृत करने वाला मंच है। यहां से निकलने वाले विचार भविष्य में भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करेंगे और दीर्घकालिक कूटनीति को दिशा देंगे। लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह शाही ने कहा कि रण संवाद यानी युद्ध पर संवाद, एक प्लेटफॉर्म है। जिसका उद्देश्य युद्ध कला और युद्ध संचालन की ट्रेनिंग है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि जो लोग युद्ध की योजना बनाते हैं, प्रशिक्षण देते हैं और उसको अंजाम देते हैं, उन्हें युद्ध के प्रमाणों की सामूहिक जिम्मेदारी उठानी है। ये सेमिनार ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां यूनिफॉर्म लर्नर, स्कॉलर्स, टेक्नोलॉजिस्ट, पॉलिसी मेकर, इंडस्ट्री और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर विचार विमर्श करते हैं। इस साल के सेमिनार का थीम है- इम्पैक्ट ऑफ टेक्नोलॉजी ऑफ वॉर फेयर। दो सब थीम भी हैं। एक- इमरजिंग टैक्नोलॉजी इन्टरेक्ट ऑफ फ्यूचर वॉर…दूसरी- जिस पर आज चर्चा हो रही है रिफॉर्म इन ट्रेनिंग कैटेलाइज टेक्नोलॉजिकल एंड डेवलपमेंट। इसमें ट्रेनिंग इनिशिएटिव ऑफ सिस्टम, इनडिकेटर एक्सरसाइजेज एंड टेक्नोलॉजी पर विचार-विमर्श करेंगे। पहले दिन सीडीएस ने कहा था- ऑपरेशन सिंदूर जारी है रण संवाद 2025 के पहले दिन मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा था- भले ही भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन हम शांतिवादी नहीं हैं। दुश्मन गलतफहमी में न रहे। देश की सेनाएं युद्ध के लिए हमेशा तैयार हैं। सीडीएस चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई सबक सीखे। उनमें से ज्यादातर पर अमल चल रहा है।

खजराना गणेश का भव्य श्रृंगार, सीहोर में 10 दिवसीय मेला और उज्जैन में भोग

उज्जैन/सीहोर/इंदौर  प्रदेश भर में आज से 10 दिवसीय गणेश उत्सव शुरू हो गया है। इस बार चित्रा नक्षत्र, भाद्रपद चतुर्थी और बुधवार के खास संयोग में गणेश जी विराजमान होंगे।उज्जैन का चिंतामण गणेश मंदिर देश का एकमात्र मंदिर है, जहां एक साथ तीन स्वरूप चिंतामन, इच्छामन और सिद्धि विनायक के दर्शन होते हैं। भगवान को एक लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया। इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में भगवान का 5 किलो सोने के आभूषणों से श्रृंगार किया गया है। आभूषणों की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए है। सीहोर के विक्रमादित्य कालीन चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर में उल्टा स्वास्तिक बनाकर मनोकामना मांगते हैं। ग्वालियर के अर्जी वाले गणेश जी को राजस्थान से आए मोटी बूंदी के लड्‌डू का ही भोग लगता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर हम आपको प्रदेश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों से रूबरू कराएंगे। बताएंगे कि क्या रहेगा आरती का समय, कब मंदिर खुलेंगे और कब बंद होंगे पट। विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर आस्था का जन सैलाब उमड़ा. मंदिर प्रशासन के मुताबिक इस बार गणेश चतुर्थी के पहले दिन 5 लाख से ज्यादा भक्त खजराना गणेश के दर्शन कर सकते हैं. पहला दिन 24 घंटे मंदिर का पट भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा.  खजराना गणेश का गणेश चतुर्थी के पहले दिन 5 करोड़ के गहनों से होगा मनमोहक श्रृंगार किया गया. प्रशासन का दावा है कि 5 लाख श्रद्धालु बुधवार को खजराना गणेश के दर्शन कर सकते हैं. विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर का लगभग 300 साल पुराना इतिहास है. बिग बी अमिताभ बच्चन, अभिनेत्री सारा अली खान, क्रिकेटर रोहित शर्मा हर साल खजराना गणेश के दर्शन के लिए इंदौर आते हैं. वृंदावन के फूलों से खजराना गणेश के गर्भ ग्रह को सजाया गया है. पूरा मंदिर विदेशी फूलों से डेकोरेट किया गया है. सुबह से मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है. 24 घंटे गर्भ गृह का पट खजराना गणेश के दर्शन के लिए भक्तों के लिए आज खुले रहेंगे.  खजराना गणेश मंदिर, खजराना गणेश मंदिर इंदौर, खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश, खजराना गणेश मंदिर के दर्शन, खजराना गणेश मंदिर कहां है, गणेश चतुर्थी  देश के अमीर मंदिरों में से एक है इंदौर का खजराना गणेश मंदिर. लगभग 5 करोड़ रुपये के सोने और हीरे से बना मुकुट खजराना गणेश के सिर पर है. खजाना गणेश का गर्भ गृह चांदी से चमक रहा है.  सोने हीरे और नवरत्न से खजराना गणेश का मनमोहक श्रृंगार किया गया है. बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के देवता भगवान गणेश का दर्शन करने के लिए इंदौर में आस्था का जनसैलाब उमड़ रड़ा. सुबह से ही खजराना गणेश मंदिर में भक्तों की लगी लंबी-लंबी कतार देखने को मिल रही है. रात 12 बजे से खजराना गणेश मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए. खजराना गणेश मंदिर का निर्माण होलकर वंश की महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर ने 1735 में करवाया था. उन्होंने औरंगजेब के हमलों से बचाने के लिए कुएं में छिपाकर रखी गई मूर्ति को बावड़ी से बाहर निकालकर मंदिर स्थापित करवाया था. यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है. यहां बुधवार और रविवार को भक्तों की भारी भीड़ रहती है. मंदिर का प्रबंधन भट्ट परिवार करता है, जिसने मूर्ति की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.एक कथा के अनुसार औरंगजेब के आक्रमण के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को तत्कालीन पुजारियों को एक कुएं में सुरक्षित छिपा दिया गया था. फिलहाल जो अब बावड़ी बन चुका हैं और आज भी खजराना गणेश मंदिर के परिसर में हैं. कहते हैं कि पंडित मंगल भट्ट को सपने में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और मूर्ति को कुएं से निकालकर उसे स्थापित करने का आदेश दिया था.  

भाषाई एकता का केंद्र बनेगा मध्य प्रदेश, परमार बोले- पूरे देश में जाएगा संदेश

हिंदी भाषी मप्र से, देश भर में गुंजायमान होगा "भाषाई एकात्मता" का संदेश: उच्च शिक्षा मंत्री परमार प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में सिखाई जाएगी भारतीय भाषा : मंत्री परमार उच्च शिक्षा मंत्री ने मंत्रालय में समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की समीक्षा की भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में, प्रदेश के समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक हुई। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि देश के हृदय प्रदेश की संज्ञा से सुशोभित हिंदी भाषी मध्यप्रदेश, भारत की अनेकता में एकता की संस्कृति को चरितार्थ करते हुए एक नई पहल करने जा रहा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में देश की सभी प्रमुख भाषाओं को सिखाने के लिए कोर्स कराए जाएंगे ताकि प्रदेश का युवा देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र में जाए तो वहां के निवासियों से सहजता से संवाद कर सकें और एकरूप हो सकें। परमार ने कहा कि हम इस नवाचार के माध्यम से सभी भाषाओं के प्रति अपना प्रेम संदेश भी प्रेषित करना चाहते हैं। परमार ने कहा कि भारत अलग- अलग भाषाओं और बोलियों का देश है लेकिन इसकी आत्मा एक है। हमारा यह नवाचार, देश भर में भाषाई एकात्मता का संदेश देगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में, देश की विभिन्न भारतीय भाषाओं को सिखाने के लिए सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स अथवा क्रेडिट के साथ सामान्य पाठ्यक्रम में सम्मिलित करके, प्रारंभ किए जाने को लेकर व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन करें। परमार ने कहा कि समस्त विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषाओं को सिखाने के लिए, भाषाएं आबंटित की गई हैं। प्रत्येक विश्वविद्यालय आवंटित भाषाओं को सिखाने के लिए कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करेंगे। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालयों से, पूरे देश में भाषाई सौहार्दता का संदेश जाएगा। भाषाएं जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं; यह व्यापक संदेश प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों से देश भर में गुंजायमान होगा। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा को लेकर धारणाओं मे परिवर्तन आना चाहिए, इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए निरंतर क्रियाशील रहना होगा। परमार ने समस्त विश्वविद्यालयों से रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी प्राप्त की और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों में भर्ती की प्रक्रिया, रोस्टर के पालन के साथ नियमानुरूप शीघ्र करने के निर्देश दिए। परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को इकाई मानकर, रोस्टर का निर्धारण कर पदपूर्ति की प्रकिया पूर्ण करें और पदपूर्ति के लिए सभी विश्वविद्यालय शीघ्र विज्ञापन जारी करें। परमार ने नकल पर नकेल कसने के लिए, उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन एवं डिजिटल सिक्योरिटी पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय परीक्षा एवं मूल्यांकन की पारदर्शिता के लिए डिजिटल मूल्यांकन को बढ़ावा दें और मेधावी विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को अपने पोर्टल पर सार्वजनिक उपलब्ध कराए ताकि इससे अन्य विद्यार्थी प्रोत्साहित हों। परमार ने विश्वविद्यालय परिसर को विद्यार्थी केन्द्रित एवं आकर्षक बनाने को भी कहा। विद्यार्थियों की अंकसूची एवं डिग्री की उपलब्धता, डिजिलॉकर में सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए। बैठक में मंत्री परमार ने समस्त विश्वविद्यालयों के विविध कार्यों, गतिविधियों, संस्थागत आवश्यकताओं एवं कार्ययोजनाओं पर बिंदुवार विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में विश्वविद्यालयों के रिक्त पदों पर भर्ती, उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन एवं डिजिटल सिक्योरिटी, भारतीय भाषा का अध्ययन एवं क्रेडिट से जोड़ना, अपार/स्वयं/समर्थ पोर्टल पर प्रगति, विभिन्न परियोजनाओं (वर्ल्ड बैंक/रुसा/राज्य) के अंतर्गत निर्माण कार्य, सेंटर फॉर एक्सीलेंस के अनुदान व्यय, विश्वविद्यालय परिसर को विद्यार्थी केंद्रित एवं आकर्षक बनाने की कार्ययोजना, छात्रावासों को सुविधायुक्त बनाए जाने की कार्ययोजना, सुदृढ़ वित्तीय एवं लेखांकन प्रणाली अपनाया जाना, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की गतिविधियां एवं मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी पुस्तक सहायता केंद्र में पुस्तकों की उपलब्धता एवं विक्रय को लेकर व्यापक विमर्श हुआ। बैठक में भाषाओं को सिखाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाकर, कोर्स सिलेबस एवं शेष प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए चार विवि के कुलगुरुओं की एक समिति का गठन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालयों को सिखाए जाने को लेकर भारतीय भाषाएं आबंटित की गई। इसमें बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल को तमिल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर को कन्नड़, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर को मराठी एवं तेलगू, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को तेलगू एवं पंजाबी, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा को सिंधी और गुजराती, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को मलयालम,सिंधी और असमिया, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर को गुजराती, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिन्दवाड़ा को तमिल और मराठी, पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल को बांग्ला, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन को गुजराती, महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय चित्रकूट को उड़िया और महर्षि पाणिनी विश्वविद्यालय उज्जैन को उड़िया भाषा सिखाने के लिए भाषा का आवंटन किया गया है। ये विश्वविद्यालय, उक्त आवंटित भाषा सिखाने के लिए क्रियान्वयन करेंगे। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलगुरुओं ने उच्च शिक्षा में गुणात्मक वृद्धि के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा एवं सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलगुरू एवं कुलसचिव सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।  

सितंबर में मिलेगी ‘लाड़ली बहना’ की 28वीं किस्त, जानें पूरी जानकारी

भोपाल मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। एमपी की सबसे चर्चित योजनाओं में से एक लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त का महिलाओं को बेसब्री से इंतजार है। जानकारी के लिए बता दें कि लाड़ली बहना योजना के तहत आने वाली महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये की राशि दी जाती है। ये राशि जल्द ही 1500 रुपये होने वाली है। सीएम मोहन यादव ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया था कि दीवाली के दो दिन बाद यानी भाईदूज से लाडली बहनों को 1500 रुपये हर महीने दिए जाएंगे। कब आएगी 28वीं किस्त लाड़ली बहनों को योजना की 27वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त को जारी की गई थी। जिसके तहत 1.27 करोड़ हितग्राही महिलाओं के खाते में 1500 रुपये जारी किए गए थे। जिसमें रक्षाबंधन का शगुन भी शामिल था। वहीं 28वीं किस्त के लिए इतंजार कर रही महिलाओं को बता दें कि हर महीने योजना की राशि 10 से 15 तारीख के बीच जारी होती है। इस बार भी इन्हीं तारीखों के बीच राशि जारी की जाएगी।   इस महीने से मिलेंगे 1500 रूपये मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के ऑफिसियल एक्स अकाउंट पर भी सीएम के ऐलान का वीडियो शेयर करते हुए इस बात की जानकारी दी गई है। इस बार दीपावली 18 अक्टूबर को है यानी की दो महीने बाद लाड़ली बहना योजना की किस्त में 250 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाएगी।

विभागीय गतिविधियों की निगरानी के लिये परख मोबाइल ऐप का शुभारंभ

भोपाल  जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जनजातीय विद्यार्थ‍ियों के लिये संचालित छात्रावासों में हर हाल में मेस संचालन में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने के निर्देश दिये हैं। उन्होने कहा कि मेस संचालन में किसी भी स्तर पर शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। वे आज यहां मंत्रालय में छात्रावासों की प्रबंधन व्यवस्था, छात्रावास भवन निर्माण की स्थ‍िति, बालिकाओं की शैक्षणिक सुविधाओं की समीक्षा कर रहे थे। मंत्री डा कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय परिवारों के विद्यार्थ‍ियों के शैक्षणिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत संचालित महाविद्यालयीन छात्रावासों में उपस्थ‍िति के आधान पर मेस संचालन के लिए शिष्यवृत्ति 10 माह के स्थान पर 12 माह के लिये दी जायेगी। विद्यार्थियों के व्यापक हित में यह निर्णय दूरगामी परिणाम देने वाला है। डॉ. कुंवर विजयशाह ने निर्देश दिये कि छात्रावासों में अधीक्षकों सहित सभी पद खाली न रहें। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। राज्य सरकार की कोशिश है कि जनजातीय समुदायों के शैक्षणिक विकास में कोई कमी नहीं आये। माबाइल ऐप – परख का शुभारंभ डॉ. शाह ने जनजातीय क्षेत्रों में विभागीय गतिविधियों की मैदानी स्तर पर समीक्षा और स्थ‍िति के आकलन के लिये मोबाइल ऐप – परख – का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से छात्रावास और आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण करना आसान होगा। निरीक्षण प्रक्र‍िया सरल और पारदर्शी होगी। भवन, सुविधाएं, भोजन व्यवस्था, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर 30 से अधिक बिन्दुओं का परीक्षण आसानी से हो पायेगा। परख माबाइल एप में भौगोलिक टेगिंग, फोटो अपलोड और अंकल प्रणाली की सुविधा उपलब्ध है। गुणवत्ता के साथ जवाबदेही तय होगी। निरीक्षण के अलावा इस परख ऐप के माध्यम से विभागीय कार्यालयों, छात्रावासों और विद्यालयों की परसिंपत्तियों का प्रबंधन भी आसान हो जायेगा। परिसंपत्त‍ियों के रखरखाव, उपयोग और स्थानांतरण की ट्रेकिंग और डेटा की शुद्धता से निर्णय लेना आसान हो जायेगा। इसके साथ ही कार्य प्रबंधन व्यवस्था भी आसान होगी। रियल टाइम मानिटरिंग और रिपोर्टिंग, कार्य वितरण और कार्यों की प्राथमिकता तय करने में भी आसानी होगी। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा, आयुक्त श्री श्रीमन शुक्ला एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थ‍ित थे।  

गणेश उत्सव पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री गणेश चतुर्थी पर्व पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्री सिद्धि विनायक से प्रदेश के नागरिकों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि गजानन की कृपा से सभी नागरिक सुखमय और आनंद पूर्वक जीवन बिताएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गणेश प्रतिमाओं के निर्माण और झांकियों की साज-सज्जा में स्वदेशी के उपयोग की अपेक्षा भी नागरिकों से की है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष श्री गणेश उत्सव में स्वदेशी के उपयोग पर जोर दिया गया है। इस दिशा में सामाजिक स्तर पर भी जागृति देखी जा रही है।    

श्री महाकालेश्वर उज्जैन से इंदौर तक मेट्रो सेवा का ऐलान, पीथमपुर भी जुड़ेगा

भोपाल भोपाल व इंदौर के बाद बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी मेट्रो दौड़ेगी। श्री महाकालेश्वर से इंदौर और पीथमपुर तक मेट्रो रेल चलाई जाएगी। इन तीन शहरों के बीच 84 किलोमीटर का सफर मेट्रो से हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव में श्री महाकालेश्वर, उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो कॉरीडोर के लिए डीपीआर बनाने के लिए परामर्श शुल्क की वित्तीय स्वीकृति दी गई। मेट्रो सिंहस्थ के बाद ही चल पाएगी उज्जैन-पीथमपुर तक मेट्रो चलाने के लिए सर्वे का काम दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसीएल) को दिया गया है। सर्वे का काम सिंहस्थ तक हो जाएगा लेकिन मेट्रो सिंहस्थ के बाद ही चल पाएगी। उज्जैन -इंदौर-पीथमपुर लाइन के प्रथम चरण में श्री महाकालेश्वर उज्जैन- लवकुश चौराहा इंदौर एवं द्वितीय चरण में लवकुश चौराहा इंदौर से पीथमपुर, मेट्रो रेल परियोजना की डीपीआर बनाई जा रही है।   नौ लाख रुपये प्रति किमी की दर पर बनेगी DPR महाराष्ट्र व ओडिशा में मेट्रो की डीपीआर बनाने का काम 12 लाख प्रति किमी पर दिया गया है, लेकिन मप्र में यह काम नौ लाख रुपये प्रति किमी की दर पर किया जाएगा। अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने का कार्य दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया है। देश की सबसे अनुभवी दिल्ली मेट्रो शासकीय कंपनी है। डीपीआर बनाने का कार्य प्रक्रियाधीन वर्तमान में प्रथम चरण के प्रथम भाग की डीपीआर बनाने का कार्य प्रक्रियाधीन है। उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर लाइन के प्रथम चरण पर डीपीआर के लिए 4.23 करोड़ रुपये साथ में जीएसटी का व्यय होगा। द्वितीय चरण में लवकुश चौराहा, इंदौर से पीथमपुर पर डीपीआर के लिए 3.51 करोड़ रुपये व जीएसटी का व्यय होगा।  

खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- उपार्जन केन्द्रों पर पारदर्शिता अनिवार्य, किसानों के हितों से नही होगा समझौता

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) की समर्थन मूल्य पर खरीदी की तैयारियां युद्ध स्तर पर की जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं कि जायेगी। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े। श्री राजपूत ने मंगलवार को मंत्रालय में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) उपार्जन तैयारियों की समीक्षा करते हुए ये निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरुण शमी, प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि खरीदी कार्य की तैयारियों में कोई ढिलाई न बरती जाये। उन्होंने सभी उपार्जन केन्द्रों पर सतत् निगरानी रखने के निर्देश अधिकारियों को दिये। श्री राजपूत ने कहा कि किसी भी उपार्जन केन्द्र पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी की किंचित भी शिकायत बर्दाश्त नहीं कि जायेगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि खरीदी के दौरान किसानों की सुविधा के सभी इंतजाम किये जायें, ताकि किसानों को कतारों में खड़े न रहना पड़े और तौल एवं भुगतान प्रक्रिया सरल और तेज रहे। खाद्य मंत्री ने निर्देश दिये कि किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाये। बैठक में उपार्जन केन्द्रों की व्यवस्थाओं, परिवहन, भंडारण और भुगतान की समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री श्री राजपूत ने निर्देश दिये कि विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर मूँग एवं उड़द की खरीदी के दौरान उपार्जन केंद्रों में कराई गई जांच की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि अनियमितताओं को लेकर संबंधित खरीदी केन्द्रों और अधिकारियों की जबाहदेही तय की जायेगी। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी, गुणवत्ता परीक्षण में लापरवाही या किसानों को भुगतान जैसी शिकायतों पर कठोर कदम उठाये जाएंगे। खाद्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों से समझौता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। जिन केन्द्रों में अनियमितता सामने आई है उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई होगी भविष्य में खरीदी केन्द्रों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया जायेगा, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न उठाना पड़ें। 

धांधली का पर्दाफाश: लाड़ली बहना योजना में आवेदन बंद होने के बाद भी जुड़ गए हजारों नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार की ओर से संचालित कई योजनाओं में लाड़ली बहना एक प्रमुख योजना है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर उन्हें जरूरत की चीजों के लिए सक्षम बनाना है। योजना के तहत महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद के रूप में समय समय पर निर्धारित राशि प्रदान की जाती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की लगभग सवा करोड़ महिलाएं योजना का लाभ ले रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के आकड़ों के अनुसार, लाड़ली बहना योजना में महिलाओं की संख्या में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। कुछ महीनों में योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ जाती है तो कुछ महीनों में घट जाती है। आवेदन बंद, तब भी बढ़ गई संख्या योजना के लाभार्थियों की संख्या में उतार-चढ़ाव एक जटिल समस्या बनी हुई है। सरकार ने सितंबर 2023 से नए आवेदन लेने बंद कर दिए हैं, बावजूद इसके पिछले दो महीनों के दौरान 42 हजार नई महिलाएं इस योजना से जुड़ी हैं। वहीं, जनवरी 2025 में ये संख्या अचानक घटकर 1.52 लाख कम हुई थी। ये हैं आंकड़े सितंबर 2023 में योजना से 6 लाख नए नाम जोड़े गए थे। इसके बाद ये उम्मीद जताई जा रही थी कि, लाभार्थियों की संख्या स्थिर हो जाएगी। लेकिन, जनवरी 2025 में ये संख्या घटकर 1 करोड़ 26 लाख 74 हजार 282 हो गई। फरवरी और मार्च में इस संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन जून 2025 ये संख्या बढ़कर 1 करोड़ 26 लाख 47 हजार 784 हो गई तो वहीं अगस्त 2025 में ये संख्या बढ़कर 1 करोड़ 26 लाख 89 हजार हो गई। इस हिसाब से सिर्फ दो माह के भीतर योजना में करीब 42 हजार महिलाओं के नाम जोड़े गए हैं। ऐसे में योजना में धांधली की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं। योजना में महिलाओं के नाम घटने और बढ़ने के कारण -आधार और बैंक खाता लिंक न होना बहुत सी महिलाओं के आधार और बैंक खाते लिंक नहीं होते, जिसके कारण उनकी भुगतान प्रक्रिया अटक जाती है। लेकिन, जब ये आदार बैंक से लिंक हो जाते हैं, प्रक्रिया दोबारा शुरु हो जाती है। -खुद योजना से बाहर हो जाना कुछ महिलाएं अपनी स्वेच्छा से योजना से बाहर हो जाती हैं। -पात्रता की जांच कुछ महिलाओं की पात्रता की दोबारा जांच की जाती है, जिसके बाद उनके नाम अपात्र होने के चलते कट सकते हैं। -आपत्ति निराकरण समितियों के फैसले स्थानीय स्तर पर आपत्ति निराकरण समितियों के निर्णयों का भी इस पर प्रभाव पड़ता है। -खाते की सक्रियता या मृत्यु कुछ महिलाओं के बैंक खाते निष्क्रिय हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है, जिससे उनका नाम योजना से हटा दिया जाता है। पिछले वर्षों का तुलनात्मक आंकड़ा जून 2023 में इस योजना के अंतर्गत 1 करोड़ 24 लाख 42 हजार 587 महिलाओं को कुल 1203.62 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था। लेकिन, जून 2025 तक, इस संख्या में बढ़ोतरी के साथ-साथ भुगतान राशि भी बढ़कर 1544.05 करोड़ रुपए पहुंच गई है। लाभार्थियों की संख्या में उतार-चढ़ाव महिला एवं बाल विकास विभाग के पेश किए गए आकड़ों में ये देखा गया कि दिसंबर के बाद, जनवरी में लाभार्थियों की संख्या घटने का पैटर्न सामने आया है। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2023 में 1 करोड़ 30 लाख 33 हजार 803 महिलाएं योजना से जुड़ी थीं, लेकिन जनवरी 2024 में यह घटकर 1 करोड़ 28 लाख 75 हजार 738 हो गई। इसी तरह, दिसंबर 2024 में लाभार्थियों की संख्या 1 करोड़ 28 लाख 26 हजार 571 थी, जो जनवरी 2025 में घटकर 1 करोड़ 26 लाख 74 हजार 282 हो गई। लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण करना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इस योजना में 21 से 59 वर्ष की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को हर महीने 1250 रुपए की सहायता मिलती है। वित्त वर्ष 2025-26 तक इस योजना पर कुल 6198.88 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जो महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक उत्थान में एक अहम कदम है। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया लाड़ली बहना योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो मध्य प्रदेश की निवासी हैं। साथ ही, उनके परिवार का कोई सदस्य आयकर दाता या सरकारी कर्मचारी न हो। योजना का लाभ विवाहित, तलाकशुदा, या विधवा महिला को दिया जाता है। यहां से प्राप्त करें सहायता अगर किसी महिला को योजना से संबंधित कोई समस्या हो या सहायता राशि न मिल रही हो, तो वह 0755 2700800 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती है। इसके अलावा, वे लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल cmladlibahna.mp.gov.in पर भी जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकती हैं।

भोपाल मेट्रो को मिलेगी हाईटेक सुरक्षा, SAF जवानों की होगी तैनाती

भोपाल   मेट्रो ट्रेन के स्टेशन से लेकर पूरे प्रोजेक्ट की सुरक्षा में अब आपको स्पेशल आर्म्ड फोर्स यानी एसएएफ के जवान नजर आएंगे। प्रदेश सरकार मेट्रो की सुरक्षा के लिए एसएएफ की विशेष कंपनी गठित करने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। इससे इंदौर और भोपाल मेट्रो में यात्रियों और स्टेशनों की सुरक्षा अब इसी एसएएफ के हाथों में होगी। इसके लिए 40 से 45 वर्ष आयु वर्ग के निरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक के एसएएफ अधिकारियों और जवानों को रखा जाएगा। हालांकि अभी रिटायर्ड आर्मी मैन और सुरक्षा के लिए युवकों को मिलाकर एक व्यवस्था बनी हुई है। जब तक कंपनी का गठन नहीं होता और एसएएफ की कंपनी नहीं मिलती, जब तक मौजूदा व्यवस्था से ही सुरक्षा की जाएगी। सीएमआरएस निरीक्षण की तैयारी इस समय भोपाल में मेट्रो रेल प्रबंधन से जुड़े तमाम अफसर- इंजीनियर कमिश्रर मेट्रो रेल सेफ्टी की जांच की तैयारियों में लगे हुए हैं। एम्स से अलकापुरी और डीआरएम मेट्रो स्टेशन पर काम काफी बाकी है। सितंबर तक 6.22 किमी का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया हुआ है। एमडी चैतन्य एस कृष्णा लगभग रोजाना इसे लेकर समीक्षा कर रहे हैं। हर सेगमेंट पर एक अफसर को काम पर लगाया हुआ है। अक्टूबर में सीएमआरएस के निरीक्षण की उम्मीद है। लखनऊ से आई आरडीएसओ की टीम ने भोपाल मेट्रो को 90 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ाकर परीक्षण किया। मेट्रो का विस्तार होगा मध्यप्रदेश में मेट्रों का विस्तार होगा। ये अतिरिक्त शहरों और उज्जैन जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए भी चलाई जा सकती हैं तो बिजली पैदा करने के लिए नए थर्मल पावर प्लांट व उनकी यूनिटें स्थापित की जा सकती हैं। ऐसे प्रस्तावों को मंगलवार होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाना है। सबकुछ ठीक रहा तो इन्हें मंजूरी भी मिल सकती है।