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हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय मनेन्द्रगढ़/एमसीबी नगरीय निकायों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे प्लेसमेंट कर्मचारियों की पीड़ा अब शब्दों से आगे बढ़कर आंदोलन की दहलीज पर पहुंच गई है। लंबे समय से लंबित केन्द्रीय वेतनमान की मांग को लेकर कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ यादव के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कर्मचारियों की पीड़ा साफ झलकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा श्रम सुधार के तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नए श्रम कोड लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और “समान कार्य के लिए समान वेतन” का अधिकार देना है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक इन प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे हजारों कर्मचारियों के मन में गहरी निराशा घर कर गई है। कर्मचारियों का कहना है कि आज के महंगाई भरे दौर में उनका वर्तमान वेतन उनके जीवन की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम नहीं है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्च हर मोर्चे पर वे संघर्ष कर रहे हैं। सबसे अधिक पीड़ा उन्हें इस बात की है कि समान कार्य करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी असमानता बनी हुई है। महासंघ ने शासन से मांग की है कि नए श्रम कोड के अनुरूप केन्द्रीय दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सर्कुलर जारी किया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षित इन कर्मचारियों को राहत मिल सके और उनके साथ हो रहे आर्थिक अन्याय का अंत हो सके। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो पहले चरण में प्रदर्शन और ज्ञापन, दूसरे चरण में कार्य बहिष्कार और अंततः अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर नगरीय निकायों की दैनिक सेवाओं पर पड़ना तय है। फिलहाल शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों के तेवर और उनके भीतर पनपता आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, जहां सिर्फ मांग नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे का काला धब्बा, दो शिक्षक निलंबित

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे की कालिख, दो शिक्षक निलंबित मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा, जिसे समाज की आत्मा और भविष्य की नींव माना जाता है, जब उसी के मंदिर में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का साया पड़ जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी बन जाती है। ऐसा ही एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला मामला जिले के प्राथमिक शाला बाला, विकासखंड मनेंद्रगढ़ (तहसील केल्हारी) से सामने आया, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया। यहां पदस्थ प्रधान पाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह, जिनके कंधों पर नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, वे अपने कर्तव्यों से भटकते हुए शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। यह दृश्य केवल एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के मूल्यों पर गहरी चोट जैसा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली थी, बल्कि अत्यंत निराशाजनक भी। दोनों शिक्षक ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए गए। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए गए, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में चिकित्सकीय परीक्षण हेतु ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में भी इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लग गई। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी देरी के कड़ा निर्णय लिया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 एवं 23 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई केवल दो व्यक्तियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक सशक्त संदेश है—कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिन हाथों में हमारे बच्चों का भविष्य सौंपा जाता है, वे हाथ कितने जिम्मेदार और सजग होने चाहिए। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई निश्चित ही व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन साथ ही यह समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए आत्ममंथन का भी अवसर है। क्योंकि अंततः, बच्चों का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और आदर्शों से भी निर्मित होता है।

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान मनेन्द्रगढ़/एमसीबी राजनीतिक मजबूती का असली आधार केवल पद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की ऊर्जा होती है – इसी सोच के साथ नगर पंचायत नई लेदरी में कांग्रेस ने संगठन को नई धार देने का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को आयोजित अहम बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि अब हर मंडल और हर बूथ पर मजबूत, जागरूक और सक्रिय टीम तैयार की जाएगी। बैठक में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विष्णु दास ने स्पष्ट कहा कि संगठन निर्माण का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर ऐसी टीम खड़ी करना है जो जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं होंगे, तब तक संगठन की असली ताकत सामने नहीं आ पाएगी। मंडल अध्यक्ष राजाराम कोल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस को क्षेत्र में और सशक्त बनाने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नियमित संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि मकबूल अख्तर, हसदेव मंडल प्रभारी लक्ष्मी दास, मंडल सचिव राम भजन, नेता प्रतिपक्ष विकास दीवान, ब्लॉक उपाध्यक्ष शंभु घोष सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्षद अनामिका, अजय लाल, रानी मैना, शेखर टंडन, अंकित खरे, अमर पाव और अन्य कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब संगठन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत में उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजबूत रणनीति और सक्रिय टीम के सहारे पार्टी आने वाले समय में क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण: पक्के घर से सम्मानजनक जीवन की शुरुआत

नक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत किया। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकना, असुरक्षा और असुविधा उनके जीवन का हिस्सा था। किन्तु अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान प्राप्त हुआ है, जिसने उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षा प्रदान की है।  यह पक्का मकान उनके लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। उनके पुत्र जगत बुचम्मा के अनुसार, अब परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और दैनिक जीवन में काफी सुविधा महसूस कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में नक्सल प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ है। शासन की योजनाएं अब दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। धर्मावरम की यह कहानी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते बीजापुर की तस्वीर है, जहां अब भय और असुरक्षा की जगह विकास, विश्वास और उम्मीद ने ले ली है। शासन की सतत पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।

केंद्र सरकार की उर्वरक सब्सिडी पहल: अन्नदाताओं को मिलेगी 41 हजार करोड़ की मदद

अन्नदाताओं को उरर्वकों पर सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार ने दी 41 हजार करोड़ से अधिक की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को मंजूरी दी है जो अन्नदाताओं के हित में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय है। खरीब सीजन- 2026 में इससे किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन-2026 के लिए फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के लिए 41 हजार 533.81 करोड़ की बजटीय व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की है। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। गत वर्ष स्वीकृत राशि से यह 4,317 करोड़ रुपए अधिक है। वैश्विक चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के रुझानों के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि उर्वरक रियायती, किफायती एवं उचित दरों पर उपलब्ध हों और उन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। मध्यप्रदेश में किसान-कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय कृषि लागत को संतुलित कर किसानों की आय और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करेगा। मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण वर्ष है। इस नाते ऐसे निर्णय मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसानों को नई तकनीक से अवगत करवाने के लिए उन्नत कृषि महोत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को शिक्षित जागरूक बनाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्रीमंडल का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  

बालाघाट के 100 गांवों में बिजली, स्कूल और अन्य सुविधाओं की मिलेगी सौगात, बदलेगा माहौल

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में बीते 35 सालों से भी अधिक समय से न केवल डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर रहे, बल्कि इस लम्बे अरसे के दौरान विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर रह गए. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही यहां के लोगों का जीवन भयमुक्त और खुशहाल नजर आने लगा है. अब यहां विकास की बयार नजर आने लगी है. यह कहना गलत नहीं होगी कि कभी नक्सलवाद का दंष झेलने वाले गांवों में अब विकास का पहिया घूमने लगा है।  100 गांवों में होगा विकास कार्य नक्सलवाद की चपेट में रहे तकरीबन 100 से अधिक गांवों में 300 करोड़ से अधिक की राशि से बिजली पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराया जायेगा. नक्सलवाद जिले के लिए नासूर की तरह था. जिसके कारण वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव विकास की मुख्य धारा से अलग थलग पड़े रह गए. चूंकि जब भी इन ग्रामीण अंचलों में कार्य किये जाते थे, तो नक्सली उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करते थे, कभी मशीनों को जला देते थे, तो कभी ठेकेदारों को डराते धमकाते थे।  नक्सली इन क्षेत्रों का विकास कभी नहीं चाहते थे. नक्सलवाद यहां पर विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. लेकिन अब समय बदला है और समय के साथ यहां की तस्वीर भी बदलने लगी है. बरसों विकास से दूर रहने वाले गांवों में अब जीवन खुशहाल नजर आ रहा है।  शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि, ''जिले के बैहर, परसवाड़ा, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित बालाघाट विकासखण्ड के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में रहे. अब उन सभी गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जहां पर उन इलाकों के सभी जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन को भेज कर स्वीकृति ली जा सकेगी।  सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर की स्थापना फिलहाल इन वनांचल क्षेत्रों के 16 गांवों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिचांई की योजनाएं तैयार कर खेती को बेहतर बनाने काम जारी है. वहीं विद्युत विभाग द्वारा सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए तकरीबन 13.50 करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 37 गांवों में उचित मूल्य की दुकान और 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की योजना है. इसके अलावा तीन करोड़ की राशि से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्य प्रस्तावित हैं।  इसी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शाला भवन निर्माण, उद्योग एवं तकनीकि विभाग द्वारा आईटीआई भवन व छात्रावास, मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पेड़, कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ की राशि से कृषि विकास कार्य, उद्यानिकी विभाग द्वारा नर्सरी स्थापना, पीएम सड़क योजनांतर्गत 189 किमी लंबाई की 41 सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों का सुधार, आयुष विभाग द्वारा 3.45 करोड़ के औषधालय निर्माण के प्रस्ताव शामिल हैं।  डर से निकल खुशहाली की तरफ बढ़े ग्रामीण इस तरह अब कभी लाल आतंक का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में जीवन खुशहाली की ओर है. डर और भयमुक्त माहौल निर्मित होने से लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे हैं. वहीं शासन प्रशासन द्वारा यहां के विकास का खाका तैयार कर जिस तरह से कार्यों का संपादन किया जा रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में यहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में भी बदलाव होगा। 

बालोद का औराटोला बना मिसाल: आत्मनिर्भरता से ‘लखपति दीदी ग्राम’ की पहचान

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।  जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’  तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है।  इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है।      औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं। कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है। बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है। प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे … Read more

मंत्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात, सम्मानित किए गए पत्रकार समिति के नेता

भोपाल मध्य प्रदेश शासन के मंत्री भाई दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर,समिति अध्यक्ष अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति डल्लू कुमार सोनी एवं मध्य प्रदेश समिति अध्यक्ष प्रीतम कुमार वर्मन,छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र वस्त्रकर  संयुक्त मुलाकात कर वार्तालाप कर स्मृति चिन्ह देकर देकर सम्मान करते हुए। 

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई दिशा

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई गति अभियान में 6242 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश में बड़ी संख्या में खेत तालाब, अमृत सरोवर, रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सूखे कुँओं को नया जीवन देने का कार्य किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा समूचे अभियान की निरंतर निगरानी रखी जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अभियान के तहत पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य किए जा रहे हैं, जिसकी लागत 6242 करोड़ रुपये हैं। इस वर्ष के जल गंगा संवर्धन अभियान में पूर्व के कार्य की पूर्णता पर विशेष जोर दिया गया है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि इस साल जल गंगा संवर्धन अभियान: 2025 के लंबित कार्यों तथा महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत चल रहे पानी से संबंधित कार्यों की पूर्णता लक्षित की गई है। लक्ष्य के अनुक्रम में 84 हजार से अधिक कार्य पूरे प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान: 2026 की प्रगति भी दिखाई देने लगी है। 19 मार्च से शुरू हुए अभियान के तीसरे चरण को महज 20 दिन ही पूरे हुए और 84 हजार से अधिक कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। ये वे कार्य हैं जो पिछले वर्ष अधूरे रह गए थे। जल गंगा संवर्धन अभियान में टॉप 5 जिले जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा, उज्जैन, खरगोन, डिंडौरी और बालाघाट टॉप 5 जिलों में शामिल हैं।  

पांच अग्रणी राज्य देश के कुल दूध का करते हैं 54 फीसदी उत्पादन, इसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 फीसदी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने संभाली कमान, पांच कंपनियों के जरिए जुड़ीं चार लाख महिला किसान सीएम योगी के कार्यकाल में पहली बार इतनी सशक्त हुईं महिलाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहले की तुलना में 40 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन बढ़ गया है। यही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यूपी सबसे सशक्त बनकर उभरा है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में पांच अग्रणी राज्यों की 54 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 16 फीसदी तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की बढ़ती ताकत और मजबूत डेयरी संरचना का स्पष्ट उदाहरण है। सीएम योगी के कार्यकाल में दुग्ध उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2016-17 में जहां उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।  सीएम योगी के जमीनी स्तर पर किए प्रयासों का परिणाम : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 40 प्रतिशत की यह वृद्धि प्रदेश में योजनाबद्ध विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जमीनी स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों का परिणाम है। बड़ी ताकत बनीं ग्रामीण महिलाएं इस दुग्ध क्रांति की बड़ी ताकत ग्रामीण महिलाएं बनीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिला समूह प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं और करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं। प्रदेश में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के जरिए करीब चार लाख महिला किसान जुड़ीं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’, पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’, अवध क्षेत्र में सामर्थ्य एमपीसीएल, गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल, तराई क्षेत्र में सृजन एमपीसीएल’ से जुड़कर महिलाएं रिकॉर्ड बना रही हैं। उत्तर प्रदेश की बदल रही तस्वीर पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिलाओं को इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया गया है। दुग्ध उत्पादन में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का भी प्रतीक बन गई है।