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स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: रांची नगर निगम बनाएगा इंडोर स्टेडियम

रांची. सिर्फ राजधानी रांची की साफ सफाई ही नहीं खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए रांची नगर निगम पहली बार इंडोर स्टेडियम बनाने जा रहा है। वार्ड-3 एदलहातू मोरहाबादी में बनने वाले इस अत्याधुनिक इंडोर के निर्माण पर निगम करीब पांच करोड़ रुपये खर्च करेगा। एक साल में स्टेडियम बनाने का लक्ष्य निगम ने रखा है। जारी टेंडर के अनुसार इंडोर स्टेडियम में चार बैडमिंटन कोर्ट बनाए जाएंगे। बैडमिंटन कोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। जहां वार्मअप से लेकर चेजिंग रूम, शौचालय, पार्किंग की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा इंडोर स्टेडियम के साथ लैंडस्केपिंग कार्य भी कराया जाएगा। वर्तमान में रांची में बैडमिंटन खेलने के लिए इंडोर स्टेडियम की संख्या गिनी चुनी है। खिलाड़ी के अलावा आम लोग में खेल सकेंगे इस परियोजना की अनुमानित लागत 4 करोड़ 9 लाख 52 हजार 68 रुपये तय की गई है। इच्छुक एजेंसियां 2 अप्रैल 2026 से 17 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी बोली जमा कर सकेंगी। वहीं, टेंडर खोलने की तिथि 18 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस इंडोर स्टेडियम के बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ी के अलावा शहरवासी भी बैडमिंटन खेल सकेंगे। इसके एवज निगम कितना शुल्क लेगा इसकी घोषणा स्टेडियम का निर्माण पूरा होने के बाद होगा। इंडोर स्टेडियम की देखरेख का जिम्मा निगम निजी कंपनी को देगा। खिलाड़ियों के लिए कोचिंग की सुविधा मिलेगी। नगर आयुक्त ने उठाए बड़े कदम व्यापक डोर टू डोर सर्वे सत्यापन शहर के सभी वार्डों में विशेष अभियान चलाकर अज्ञात और छूटे हुए होल्डिंग्स की पहचान संपत्तियों के भौतिक सत्यापन के माध्यम से टैक्स बेस को मजबूत किया वार्ड स्तरीय लक्ष्य और दैनिक मानिटरिंग प्रत्येक वार्ड के लिए स्पष्ट राजस्व संग्रह लक्ष्य निर्धारित किए दैनिक और साप्ताहिक समीक्षा के माध्यम से प्रगति की निरंतर निगरानी कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में विशेष फोकस कर अभियान चलाया गया डिजिटल प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन प्रोपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से रीयल टाइम डेटा ट्रैकिंग की गई डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देकर पारदर्शिता और सुविधा में वृद्धि की गई बड़े बकायेदारों पर विशेष कार्रवाई उच्च बकाया वाले मामलों की पहचान कर विशेष वसूली अभियान चलाया गया आवश्यकतानुसार नोटिस, दंडात्मक कार्रवाई एवं प्रवर्तन उपाय अपनाए गए नागरिक सहभागिता और जागरूकता अभियान विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को कर भुगतान के लिए प्रेरित किया गया समय पर भुगतान करने वाले करदाताओं को प्रोत्साहित किया गया फील्ड में टीमों की सक्रियता और समन्वय पर विशेष ध्यान टैक्स कलेक्टरों और फील्ड स्टाफ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की टीम-आधारित कार्यप्रणाली से कार्य में गति एवं परिणाम दोनों प्राप्त हुए

गेहूं और सरसों की फसल पर बेमौसम मार, यूपी सरकार अलर्ट मोड पर, किसानों के खातों में सीधे पहुंचेगा राहत का पैसा

लखनऊ यूपी में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. मार्च महीने का अंत और अप्रैल की शुरुआत में ही हुई बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान चिंता में हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात का संज्ञान लेते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर कर दिया है और सभी जिलों के जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई तेज बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं. जिन खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, वहां पानी भरने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है. खासतौर पर गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों पर इसका असर देखा जा रहा है. गांवों से आ रही शुरुआती जानकारी में बताया जा रहा है कि कई जगहों पर फसलें गिर गई हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने का खतरा बढ़ गया है. मुख्यमंत्री ने मांगी जमीनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अधिकारी फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और प्रभावित क्षेत्रों की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजें. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट केवल कागजी न हो, बल्कि जमीनी सच्चाई को दर्शाने वाली हो, ताकि राहत कार्य सही तरीके से संचालित किए जा सकें. सरकार ने फसल नुकसान के आकलन के लिए एक संयुक्त सर्वे कराने का फैसला लिया है. इसके तहत राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की टीम मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी. मुआवजा देने की तैयारी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही नुकसान का आंकलन पूरा होगा, मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो और समयबद्ध तरीके से किसानों के खातों में पैसा पहुंचाया जाए. सरकार का कहना है कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. अधिकारियों को संवेदनशील रहने के निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खासतौर पर संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े. जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे खुद फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लें और यह सुनिश्चित करें कि राहत कार्य तेजी से और पारदर्शिता के साथ पूरे हों. सीएम ने प्रमुख सचिव (कृषि) और राहत आयुक्त को भी निर्देश दिया गया है कि वे फील्ड अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें. सभी सूचनाओं का सही समय पर संकलन कर शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि निर्णय लेने में देरी न हो. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रशासनिक मशीनरी एक टीम की तरह काम करे और किसानों को जल्द से जल्द राहत मिले.

इंदौर से खाटू श्याम की सीधी यात्रा, 2 अप्रैल से चलेगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर  इंदौर से खाटू श्याम जाने के लिए 2 अप्रैल से रेल विभाग ने स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया है। इसके लिए आरक्षण भी शुरू हो चुके हैं। यह ट्रेन लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से संचालित होगी। इंदौर और आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में भक्त खाटूश्याम जाते हैं और इस रूट पर ट्रेन चलाने की लंबे समय से मांग भी थी। रेलवे ने समर स्पेशल के रूप में इस ट्रेन को चलाने का फैसला लिया है, लेकिन यदि अच्छा प्रतिसाद मिलता है तो इसका संचालन नियमित भी किया जा सकता है। इंदौर से श्रीगंगानगर तक जाने के लिए पहली बार सीधी रेल सेवा शुरू होने जा रही है। श्रीगंगानगर से यह ट्रेन 2 अप्रैल से चलेगी और 3 अप्रैल को इंदौर पहुंचेगी। इस ट्रेन का अंतिम स्टॉप लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन होगा। रेलवे विशेषज्ञ नागेश नामजोशी ने बताया कि यह समर स्पेशल ट्रेन है। अभी तक यात्रियों को अलग-अलग ट्रेन बदलकर खाटूश्याम जाना पड़ता था, लेकिन इस रूट पर यह पहली सीधी रेल सेवा है, जिससे मालवा से राजस्थान तक यात्रा आसान हो जाएगी। रेल से खाटूश्याम तक जाने के लिए यात्रियों को भोपाल या कोटा से ट्रेन बदलनी पड़ती थी। लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से यह ट्रेन दोपहर 1:55 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 9:55 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी। वहीं वापसी में श्रीगंगानगर से ट्रेन दोपहर 12:50 बजे चलेगी और अगले दिन दोपहर 1:55 बजे इंदौर पहुंचेगी।   यह ट्रेन इंदौर से निकलकर फतेहाबाद, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, चंदेरिया, भीलवाड़ा, अजमेर, मदनगंज किशनगढ़, किशनगढ़, फुलेरा, रिंगस, सीकर, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर शेखावाटी, चूरू, सादुलपुर, तारानगर रोड, नूरसर, एलनाबाद, हनुमानगढ़, सूरतगढ़ होते हुए श्रीगंगानगर तक जाएगी। यह ट्रेन 2 अप्रैल से 10 जुलाई तक चलेगी।

गोरखपुर मंडल में 19 हजार परिवारों को मिली पक्की छत, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत खर्च हुए 219 करोड़

गोरखपुर पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है।  जिन्हें तकनीकी वजहों से PM आवास नहीं मिला, वे इस योजना से पूरा कर रहे घर का सपना  उत्तर प्रदेश में रहने वाले ऐसे जरूरतमंद लोग जिन्हें किसी तकनीकी कारण से पीएम आवास नहीं मिल पाया उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण, उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले निर्धन और वंचित परिवारों के लिए अपने पक्के घर का सपना साकार कर रही है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह योजना उन वर्गों के लिए बड़ा सहारा बनी है जो किन्हीं तकनीकी कारणों से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ नहीं ले पाए। गोरखपुर मंडल के ही चार जिलों में अब तक 19 हजार से अधिक जरूरतमंद इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इनमें से 17 हजार से अधिक खुद के पक्के मकान में रहने लगे हैं। इन आवासों के लिए सरकार करीब 219 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के हर निराश्रित और पात्र परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए कई प्रयास किए हैं। इस क्रम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर ठीक से लागू कराया गया है। गोरखपुर मंडल में ही 199984 जरूरतमंदों को पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत पक्के आवास स्वीकृत हुए और इनमें से 199103 के आवास बनकर पूरे भी हो गए। पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही प्रदेश में सीएम योगी के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित हो रही है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है। इसमें दैवीय आपदा से प्रभावित परिवारों और वनटांगिया, मुसहर जैसे विशेष पिछड़े समुदायों को प्राथमिकता पर रखा गया। योजना के तहत मिलती हैं ये सुविधाएं मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को न केवल आवास निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है, बल्कि उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। आवास निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी 1.20 लाख रुपये देने के अलावा उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। साथ ही सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन और उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन भी दिया जाता है। क्या बोले अधिकारी गोरखपुर के मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने इस योजना के बारे में बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में हर जरूरतमंद को पीएम आवास योजना (PM Awas Yojna) और सीएम आवास योजना (CM Awas Yojna) के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

रतलाम मंडल से होकर चलेंगी तीन नई स्पेशल ट्रेनें, रेलयात्रियों को मिलेगी राहत

 रतलाम  यात्रियों की सुविधाओं तथा विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये ट्रेनें बांद्रा टर्मिनस से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, सूबेदारगंज और आगरा कैंट के बीच विशेष किराये पर संचालित होंगी।  रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें रतलाम मंडल के विभिन्न स्टेशनों के साथ ही आसपास के अनेक रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। इससे यात्रियों को ग्रीष्मकालीन अवधि में यात्रा के दौरान आवागमन में सुविधा मिलेगी। बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्पेशल ट्रेन प्रत्येक शनिवार को 4 अप्रैल से 11 जुलाई 2026 तक चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 5:10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 5:00 बजे झांसी पहुंचेगी। यह ट्रेन रतलाम मंडल के दाहोद (12:43/12:45), रतलाम (14:30/14:40), नागदा (15:43/15:45), उज्जैन (16:55/17:10) और मक्सी (18:00/18:02) स्टेशनों पर रुकेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 02199 झांसी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 2 अप्रैल से 9 जुलाई 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को झांसी से शाम 16:50 बजे प्रस्थान कर अगले दिन शाम 16:10 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, ब्यावरा, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 04126 बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 11:15 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन शाम 17:00 बजे सूबेदारगंज पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04125 सूबेदारगंज-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 04 अप्रैल से 13 जुलाई 2026 तक प्रत्येक सोमवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन सूबेदारगंज से सुबह 5:20 बजे प्रस्थान कर रतलाम (21:45/21:55) होते हुए अगले दिन सुबह 9:30 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, आगरा क्षेत्र सहित कई स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। उधना-आगरा कैंट स्पेशल ट्रेन ट्रेन संख्या 01908 उधना-आगरा कैंट स्पेशल 8 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक प्रत्येक बुधवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन उधना से दोपहर 15:25 बजे प्रस्थान कर रतलाम (22:25/22:30) होते हुए अगले दिन सुबह 8:30 बजे आगरा कैंट पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 01907 आगरा कैंट-उधना स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन आगरा कैंट से शाम 18:45 बजे प्रस्थान कर रतलाम (06:15/06:20) होते हुए अगले दिन दोपहर 13:25 बजे उधना पहुंचेगी। यह ट्रेन सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, बयाना, फतेहपुर सीकरी आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और जनरल कोच उपलब्ध रहेंगे। 

नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ने को तैयार, BJP के इशारे का इंतजार! कब होगा बिहार में सरकार का बदलाव?

पटना  बिहार में सरकार का बदलना तय है. नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को तैयार हैं. विधान परिषद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. यानी अब अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जल्द ही इस आशंका पर भी विराम लग जाएगा कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा की शपथ लेने के बाद 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं. नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति में जाने का पक्का मन बना लिया है. यही वजह रही कि उन्होंने ससमय विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के लिए भी वे तारीख तय होने का इंतजार कर रहे हैं. अनुमान है कि सीएम पद से इस्तीफा की औपचारिकता भी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पूरी हो जाएगी।  इस्तीफा शपथ के पहले या बाद में? यह सवाल जरूर बनता है कि नीतीश कुमार सीएम पद कब छोड़ेंगे. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के पहले पद छोड़ देंगे या बाद में, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. चूंकि नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होना बंद कर दिया है, इसलिए इसे लेकर संशय बना हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कोई कह रहा कि वे इस्तीफा अभी नहीं देंगे. 6 महीने की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ लेते हुए वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि जेडीयू के सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं, बशर्ते भाजपा चेहरा घोषित कर दे. चर्चा यह भी है कि सरकार के स्वरूप पर एनडीए में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसीलिए विलंब हो रहा है. इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम भाजपा से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा।  अगला सीएम नीतीश की पसंद का? सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपनी पसंद जाहिर कर दी है. यात्रा के दौरान जनसंवाद के दौरान वे मंच पर सम्राट के कंधे पर हाथ रखते रहे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है. भाजपा ने 2014 से ही यह परिपाटी शुरू की है कि सीएम वह नहीं बनता, जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है. हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी भजपा ने यही किया।  बिहार की राजनीति में सम्राट फिट बिहार का मिजाज जातीय समीकरण को पसंद करता है. नीतीश कुमार ने भले जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया, लेकिन उनके उत्थान के पीछे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण सहायक बना. इस समीकरण को अक्षुण्म रखते हुए नीतीश ने हर जाति में अपने रणनीतिक कौशल से वोट बैंक बनाया. कुर्मी-कोइरी की 10 फीसद से भी कम आबादी के बावजूद वे 20 साल तक बिहार के सीएम बनते रहे. चूंकि सम्राट चौधरी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के पैटर्न में दूसरों के मुकाबले ज्यादा फिट बैठेंगे. नीतीश अगर उन्हें अपना उत्तराधिकारी बता रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यही हो सकती है. भाजपा भी वोट बैंक की राजनीति में माहिर है. संभव है, वह दूसरे राज्यों के प्रयोग से बिहार में बचे।  भाजपा भी बढ़ाती रही है सम्राट को सम्राट का पलड़ा एक और वजह से भारी दिखता है. भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़ा फलक मिला है. भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी. उन्हें दूसरी बार डेप्युटी सीएम बनाया. इस बार तो भाजपा ने नीतीश के पास शुरू से ही रहने वाला गृह विभाग भी उनसे लेकर सम्राट को सौंप दिया है. सम्राट के प्रमोशन के संकेत उस वक्त भी मिले थे, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के अलावा बोलने का भी अवसर दिया. मसलन भाजपा सम्राट को प्रमोट करने का काम शुरू से ही इसीलिए कर रही है कि समय आने पर उन्हें सूबे की कमान सौंपी जा सके।  नीतीश कर रहे BJP का इंतजार जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश ने अब सीएम पद का मोह छोड़ दिया है. वे इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा नए सीएम का ऐलान करे तो वे बागडोर सौंप कर मुक्त हो जाएं. यानी वे भाजपा के ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि राज्यसभा की शपथ के पहले ही भाजपा नाम की घोषणा कर देगी. चूंकि लंबे इंतजार के बाद भाजपा को बिहार में सरकार बनाने का मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस आयोजन को भव्य बनाना चाहती है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय स्तर के नेता नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं. 5 राज्यों में चुनाव प्रचार तेज होने के कारण सबका शिड्यूल देखा जा रहा है. नए नेता के चुनाव की औपचारिकताएं भी पूरी करनी हैं. अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते के आरंभ में नेता चयन की रस्म पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले भाजपा बिहार में नई सरकार का गठन कर लेगी। 

एम्स भोपाल और ग्वालियर आयुर्वेद संस्थान मिलकर खोजेंगे घुटनों के दर्द का परमानेंट इलाज

ग्वालियर  घुटनों के दर्द (आस्टियोआर्थराइटिस) से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एम्स भोपाल और क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर मिलकर इस बीमारी का समाधान खोज रहे हैं। जल्द ही दोनों संस्थानों के बीच आधिकारिक समझौता होने वाला है, जो जोड़ों के दर्द के इलाज की दिशा बदल सकता है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय से इस रिसर्च प्रोजेक्ट की अनुमति मिल गई है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि घुटने के आस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियां, आधुनिक एलोपैथी की तुलना में कितनी सुरक्षित और असरदार हैं। शोध का मुख्य कार्यक्षेत्र एम्स भोपाल रहेगा, जहां की आधुनिक लैब और डाक्टरों की देखरेख में मरीजों पर आयुर्वेदिक उपचार के प्रभावों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। यह रिसर्च आधुनिक मानकों पर आधारित होगी, ताकि इसके परिणामों पर भरोसा किया जा सके। एम्स भोपाल के अस्थिरोग विभाग के प्रोफेसर डा. रेहान उल हक प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे। वहीं क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर के विशेषज्ञ डा. अनिल मंगल इसके सह-अन्वेषक और कोआर्डिनेटर होंगे। मरीजों को क्या होगा फायदा?     इस शोध से मरीजों को पता चलेगा कि आयुर्वेद की कौन-सी दवाएं विज्ञानी रूप से सुरक्षित हैं।     अगर आयुर्वेदिक औषधियां प्रभावी साबित होती हैं, तो मरीजों को पेन-किलर (दर्द निवारक दवाओं) के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है।     यह रिसर्च गठिया और जोड़ों के दर्द के उपचार का तरीका बदल सकती है।

मध्यप्रदेश में 2 हजार से ज्यादा सैंपल फेल, 60% डेयरी प्रोडक्ट मिलावटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में दूध, मावा, पनीर, घी, मिर्च, धनिया पाउडर समेत कई चीजों में मिलावट हो रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में यह खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए है। करीब 30 जिलों में दो हजार सैंपल फेल हुए। इनमें ग्वालियर नंबर वन पर है। आइए जानते है कहां कौन से सैंपल फेल हुए है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल की तीन साल की रिपोर्ट सामने आई है। मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब तक करीब एक लाख सैंपल लेने का दावा किया गया है। जिसमें रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए है। मिठाइयों के साथ मसाले और तेल भी सुरक्षित नहीं है। जलेबी, लड्डू, बर्फी गजक और नमकीन में मिलावट मिली। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हो गए। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की हाल में एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए। सबसे ज्यादा मामले करीब 420 ग्वालियर से सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिलावट केवल फूड पॉइजनिंग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल बीमारियों तक का कारण बन रही है। FDA की यह रिपोर्ट मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनकी टेस्ट रिजल्ट के आधार पर तैयार की गई है। जिसमें बीते तीन साल के आंकड़े शामिल हैं। यह पहली बार है जब मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब कर लिए गए एक लाख सैंपल की कंपाइल रिपोर्ट सामने आई है। ग्वालियर सबसे आगे, कई जिलों में फैला मिलावट का जाल राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा मिलावट के मामले सामने आए हैं, जहां करीब 420 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर सहित 30 से अधिक जिलों में मिलावट का जाल फैला हुआ है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। मिलावट से शरीर को कैसे हो रहा नुकसान गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि मिलावटी भोजन में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (जैसे माइक्रोप्लास्टिक, हेवी मेटल) शरीर में जाकर हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे गट हेल्थ खराब होती है। बॉडी में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। शरीर में पोषण की कमी होती है। इसके साथ ही मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां बढ़ती हैं। मसाले और तेल भी नहीं सुरक्षित सिर्फ डेयरी ही नहीं, मसाले और खाद्य तेल भी मिलावट से अछूते नहीं हैं। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनका लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट सामने आई है। त्योहारों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं। लगातार चल रही मॉनिटरिंग FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि फेल सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की लगातार की जा रही है। निगरानी सख्त की गई है। मिलावट का यह नेटवर्क खत्म करने के लिए नई योजना के तहत प्रदेश में काम किया जा रहा है। मोबाइल वैन प्रदेशभर में घूमकर सैंपल एकत्र कर उनकी टेस्टिंग कर रही हैं। मिलावट में ग्वालियर नंबर वन     ग्वालियर जिला मिलावट में पहले स्थान पर है। यहां दो हजार में से लगभग 420 सैंपल फेल हुए है।     गुना – 110     उज्जैन – 95     भिंड – 90,     बुरहानपुर – 75,     जबलपुर – 75     शाजापुर – 70     खरगोन – 65     सीहोर – 55     धार – 40     राजगढ़ – 35     नीमच – 30     नरसिंहपुर – 28     रीवा – 25     दमोह – 20     हरदा – 20     अलीराजपुर – 20     विदिशा – 18     झाबुआ – 18     सागर – 15     मंडला – 15     दतिया – 15     शिवपुरी – 12     छिंदवाड़ा – 12     बालाघाट – 10     डिंडोरी – 08     पन्ना – 08     कटनी – 06     शहडोल – 06 कहां कौन से सैंपल फेल     ग्वालियर- दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालाई बर्फी, चावल, आटा     इंदौर- लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली, सांभर     शाजापुर- दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर, कुकिंग ऑयल     दमोह- जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाउमीन, घी, पनीर, दही     भिंड- मालाई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च     मुरैना- मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू     धार- मावा, पनीर, धनिया पाउडर, पताशे     सागर- मोतीचूर लड्डू में मिलावट     रीवा- तुअर दाल और मिठाई     सिवनी- गुजिया, सेव और पनीर     नरसिंहपुर- दूध में मिलावट     खंडवा- गुड़ चिक्की का सैंपल फेल     बैतूल- दही और काली मिर्च में मिलावट     सीहोर- खाने का तेल  

गैस किल्लत और ओवररेटिंग से मिलेगी मुक्त,गुरुग्राम DC ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर, तुरंत होगी कार्रवाई

गुरुग्राम डीसी अजय कुमार ने बताया कि जिले में एलपीजी की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. LPG की कालाबाजारी को लेकर बना कंट्रोल रूम गुरुग्राम में एलपीजी गैस को लेकर आने वाली शिकायतों पर अब तुरंत कार्रवाई होगी. जिला प्रशासन ने आम लोगों की सुविधा के लिए लघु सचिवालय में 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम शुरू कर दिया है. इसके साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है, ताकि लोगों को गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े. डीसी अजय कुमार ने बताया कि जिले में एलपीजी की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में निरीक्षण कर रही हैं. प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी हालत में उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होने दी जाएगी और गैस की सप्लाई पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी. अब 24 घंटे दर्ज कर सकते हैं शिकायत शिकायतों के समाधान को और मजबूत बनाने के लिए लघु सचिवालय के एनआईसी रूम में 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहां लोग गैस सिलेंडर की कमी, सप्लाई में देरी, ज्यादा कीमत वसूली या अवैध भंडारण जैसी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो और लोगों को जल्दी राहत मिले. फोन नंबर जारी, तुरंत होगी कार्रवाई डीसी ने बताया कि कंट्रोल रूम के लैंडलाइन नंबर 0124-2868930 पर आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा. अगर किसी जगह कालाबाजारी या अवैध स्टॉक की जानकारी मिलती है तो संबंधित अधिकारी तुरंत जांच कर सख्त कार्रवाई करेंगे. लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कहीं गड़बड़ी दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें. एलपीजी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए रोजाना 6 टीमें फील्ड में सक्रिय कर दी गई हैं. ये टीमें गैस एजेंसियों, गोदामों और संदिग्ध स्थानों पर लगातार छापेमारी और निरीक्षण कर रही हैं. इससे किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत पकड़कर कार्रवाई की जा रही है. गैस का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं डीसी अजय कुमार ने साफ किया कि जिले में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. फिलहाल 58 गैस एजेंसियों के पास कुल 15,311 सिलेंडर मौजूद हैं और सप्लाई पूरी तरह सुचारू है. विभाग रोजाना निगरानी कर रहा है, ताकि आगे भी किसी तरह की कमी न आए. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गुरुग्राम में एलपीजी को लेकर कोई संकट नहीं है. लोगों को सिर्फ सतर्क रहने और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तुरंत देने की जरूरत है, ताकि सिस्टम साफ और मजबूत बना रहे.  

JAC मॉडल स्कूल एंट्रेंस टेस्ट का सफल आयोजन, मेरिट से होगा कक्षा 6 में नामांकन

 रांची झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची द्वारा संचालित राज्य के 82 मॉडल विद्यालयों में कक्षा 6 में सत्र 2026–27  के नामांकन  के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा आज 28 मार्च (शनिवार) को राज्य भर के 19 जिलों के 60 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई. परीक्षा का आयोजन पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक किया गया. सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों का आगमन समय से पहले ही प्रारंभ हो गया था, जिससे विद्यार्थियों में इस परीक्षा को लेकर उत्साह, अनुशासन एवं आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से देखने को मिला. 100 अंकों की ऑब्जेक्टिव परीक्षा परीक्षा 100 अंकों की  बहुविकल्पीय  प्रश्न आधारित थी, जिसमें अंग्रेजी (30 अंक), गणित (30 अंक) एवं सामाजिक विज्ञान (40 अंक) से प्रश्न पूछे गए.  जिसमें प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी, जिसके पश्चात चयनित छात्र मॉडल विद्यालयों में नामांकन करा सकेंगे. परीक्षा के सफल संचालन हेतु सभी जिला प्रशासन, जिला शिक्षा पदाधिकारी, केंद्राधीक्षक एवं संबंधित कर्मियों द्वारा समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई. सभी केंद्रों पर कदाचार मुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा सम्पन्न कराई गई. मॉडल स्कूल का उदेश्य क्या है? झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची द्वारा संचालित मॉडल विद्यालयों में JAC बोर्ड के अंतर्गत अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 6 से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है. इन विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उत्कृष्ट एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें. परिषद राज्य के अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से अपील करता है कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु इन मॉडल विद्यालयों में अधिक से अधिक नामांकन कराएं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ उठाएं.