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अजमेर कड़ेल में मुख्यमंत्री का ग्रामीणों के साथ आत्मीय मिलन और सुबह की सैर

अजमेर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अजमेर जिले के कड़ेल गांव में सोमवार सुबह की सैर के साथ एक बार फिर आमजन के बीच पहुंचकर जन संवाद और जनविश्वास का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। रविवार रात को ग्राम चौपाल में ग्रामीणों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री सुबह गांव की गलियों में पैदल भ्रमण करते नजर आए। ग्रामीण जब अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने मुख्यमंत्री को सहज और सरल भाव से गांव के बीच उपस्थित पाया। मुख्यमंत्री ने गांव की गलियों में भ्रमण करते हुए बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया तथा महिलाओं, किसानों, पशुपालकों, युवाओं, फल एवं सब्जी विक्रेताओं और सफाईकर्मियों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लिया और आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप में पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को दुलारते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई की जानकारी ली साथ ही, उन्हें चॉकलेट वितरित की। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव के प्राचीन शेषनाग भगवान मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थय की कामना की। मंदिर परिसर में भी उन्होंने श्रद्धालुओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से गुलाब, आंवला, लेसवा, जामुन और प्याज सहित स्थानीय कृषि उत्पादों एवं पारंपरिक खेती की पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उन्नत कृषि पद्धतियों और जल संरक्षण आधारित प्रयासों से उत्पादन और आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है। ग्रामीणों की मांग पर मौके पर ही संवेदनशील निर्णय- ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने गांव के प्राथमिक स्वास्थय केंद्र को सामुदायिक स्वास्थय केंद्र में क्रमोन्नत करने की घोषणा की। साथ ही, परिवहन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त बस संचालन सुनिश्चित करने तथा बालिका विद्यालय की चारदीवारी निर्माण के लिए भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने गांव में लंबित राजस्व प्रकरणों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को विशेष शिविर आयोजित कर राजस्व वादों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को त्वरित राहत पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ पी चाय, सुने अभाव अभियोग- ग्राम भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठकर चाय पी तथा गांव के विकास, खेती-किसानी, शिक्षा और दैनिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर आत्मीय चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री की सहजता ने ग्रामीणों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

गेहूं की उपज में एमपी का जलवा, हरियाणा और पंजाब से आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी में लाभान्वित होनेवाले किसानों की संख्या 10 लाख से पार हो गई है। इसी के साथ प्रदेश ने हरियाणा और पंजाब को पछाड़ा दिया है। राज्य सरकार ने तमाम चुनौतियों के बीच शनिवार रात तक 10 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 63 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। मप्र ने इसी के साथ रेकॉर्ड बना दिया है। प्रदेश में रोज औसतन 5 लाख मीट्रिक टन खरीदी हो रही है। गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख 23 मई तय की गई है। तब तक प्रदेशभर में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी होगी। भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर संभाग के जिलों में 9 अप्रेल से और बाकी संभाग में 15 मई से खरीदी चल रही प्रदेश के भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर संभाग के जिलों में 9 अप्रेल से और बाकी संभाग में 15 मई से खरीदी चल रही है। गेहूं बेचने कुल 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। खरीदी कोटा पूरा होने पर भी सभी किसान गेहूं नहीं बेच पाए तो सरकार तारीख बढ़ा सकती है। मध्यप्रदेश में हो रहे सर्वाधिक किसान लाभान्वित, अभी तक 10 लाख से अधिक किसान उपार्जन प्रक्रिया में लाभान्वित हो चुके सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में अभी तक 9.10 लाख किसान, पंजाब में 7.5 लाख किसान, उत्तरप्रदेश में 2 लाख किसान और राजस्थान में 1.67 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। वहीं मध्यप्रदेश में अभी तक 10 लाख से अधिक किसान उपार्जन प्रक्रिया में लाभान्वित हो चुके हैं। स्वयं मैदान में उतरे मुख्यमंत्री, केंद्रों पर किसानों से संवाद किया, संगठनों के प्रमुखों से मिले गेहूं खरीदी के दौरान शुरू के दिनों में जब किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा तो सीएम डॉ. मोहन यादव स्वयं मैदान में उतरे। केंद्रों पर किसानों से संवाद किया। किसान संगठनों के प्रमुखों से मिले। संभागायुक्तों, कलेक्टरों के साथ वीसी में दो टूक कहा कि किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाए। किसान परेशान न हों, ऐसा माहौल बनाएं। पिछली कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को भी केंद्रों पर जाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खरीदी में तेजी से सुधार आया। राज्य- किसानों ने गेहूं बेचा- खरीदी की अंतिम तारीख मध्यप्रदेश- 10 लाख- 23 मई हरियाणा -9.10 लाख- 15 मई पंजाब- 7.5 लाख- 10 मई उत्तरप्रदेश- 2 लाख- 15 जून राजस्थान- 1.67 लाख- 31 मई प्रमुख बिंदु एमपी में 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य अभी 63 लाख टन की हुई खरीदी किसानों के आंकड़ों में मध्यप्रदेश आगे हरियाणा और पंजाब को पछाड़ा एमपी में 10 लाख किसानों से गेहूं खरीदा

प्रधानमंत्री के नेतृत्व से बढ़ा देश की सनातन संस्कृति का गौरव, बोले मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति को मिला नया गौरव : मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए मुख्यमंत्री 75 वर्ष पूर्व आज ही के दिन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण का कार्य हुआ था पूरा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं के साथ गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर से वर्चुअली जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पूजा – अर्चना का अवलोकन कर उनका संबोधन सुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान सोमनाथ मंदिर के स्वर्णिम इतिहास, विदेशी आक्रांताओं द्वारा किए गए हमलों, मंदिर के पुनरनिर्माण यात्रा, वर्तमान सरकार द्वारा किये जा रहे आस्था के केंद्रों का संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प सहित विभिन्न विषयों पर अपनी बातें देशवासियों से साझा की।                मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेशवासियों को “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पूर्व आज ही के दिन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ था और इसी ऐतिहासिक अवसर को देशभर में स्वाभिमान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर अनेक बार बाहरी आक्रांताओं द्वारा हमले किए गए, लेकिन मंदिर की आस्था और परंपरा को समाप्त नहीं किया जा सका। साय ने कहा कि पहली बार आक्रमण के दौरान मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने मंदिर नहीं छोड़ा तथा अपने प्राणों का बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका त्याग आज भी इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।              साय ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद तत्कालीन गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने तमाम विरोधों के बावजूद सोमनाथ मंदिर पहुंचकर पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लिया था। साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को नया गौरव मिला है। उन्होंने कहा कि आज देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों का विकास तेजी से हो रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि बनारस के काशी विश्वनाथ, उज्जैन स्थित महाकाल से लेकर सोमनाथ मंदिर तक व्यापक विकास कार्य किए जा रहे हैं।           मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में देवी माताओं के मंदिरों को शक्तिपीठ योजना के माध्यम से विकसित किया जा रहा है। इसी तरह कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव महादेव मंदिर को स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 148 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है और यहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। सनातनियों के लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या के मंदिर में भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं और यह योजना लगातार जारी है।              मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में सभी लोगों से भाईचारे, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की एकता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।            कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सनातन संस्कृति और आस्था केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य लगातार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे मुखिया भी प्रदेश में धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ ही विभिन्न योजनों के माध्यम से लोगों को आस्था से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर देश की संस्कृति, वैभव और स्वाभिमान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सल उन्मूलन के बाद पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि सोमनाथ मंदिर सनातनियों के आस्था का बड़ा केंद्र है। उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के इतिहास में अनेक आक्रमणों के बावजूद सनातन संस्कृति की आस्था को कोई डिगा नहीं पाया है और न कभी ऐसा होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वर महादेव मंदिर पहुँचे। उन्होंने भगवान शिव की पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

धमतरी में ‘समर कैम्प 2026’ का आगाज़, 36 केंद्रों पर खेल और व्यक्तित्व विकास का संगम

धमतरी में 'समर कैम्प 2026' का आगाज़,  36 केंद्रों पर खेल और व्यक्तित्व विकास का संगम ​रायपुर      धमतरी ​जिले के बच्चों और युवाओं की खेल प्रतिभा को तराशने तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश को रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से धमतरी में “समर कैम्प 2026” की शुरुआत हो गई है। जिला प्रशासन और खेल विभाग के समन्वय से आयोजित यह 30 दिवसीय शिविर 9 मई से 8 जून तक चलेगा, जिसमें खेल तकनीक के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।   समर कैम्प का उद्देश्य केवल खेल प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि बच्चों को एक सकारात्मक वातावरण प्रदान कर उन्हें नशामुक्ति, स्वास्थ्य और अनुशासित जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है। ​30 दिन, 36 केंद्र और अनगिनत अवसर     ​इस वर्ष समर कैम्प का दायरा बढ़ाते हुए जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 36 केंद्र बनाए गए हैं। फ्रीडम फिजिकल ट्रेनिंग सहित विभिन्न खेल संघों और क्लबों के माध्यम से बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार खेलों का चयन करने का विकल्प मिल रहा है। ​शिविर में ​मैदानी खेल में फुटबॉल, कबड्डी, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, रग्बी को शामिल किया गया है। ​मार्शल आर्ट्स में कराटे, जूडो, ताइक्वांडो, बॉक्सिंग, कुडो के साथ-साथ​पारंपरिक एवं अन्य में योग, शतरंज, कुश्ती, तीरंदाजी, स्केटिंग, वेटलिफ्टिंग को शामिल किया गया है । ​अनुभवी प्रशिक्षकों की देखरेख में निखरेगी प्रतिभा     ​शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ के अनुभवी प्रशिक्षक हैं, जो न केवल खेल की बारीकियां सिखा रहे हैं, बल्कि बच्चों में फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता (Leadership) जैसे गुणों का संचार कर रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से ऐसी प्रतिभाओं की पहचान करना है, जिन्हें भविष्य में खेल अकादमियों और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा सके। ​योग और आत्मरक्षा पर विशेष फोकस     ​बदलते दौर की चुनौतियों को देखते हुए शिविर में योग और मार्शल आर्ट्स को प्राथमिकता दी गई है। इसके माध्यम से बच्चों को आत्मरक्षा (Self-defense) के गुर सिखाने के साथ-साथ उनकी मानसिक एकाग्रता और स्वास्थ्य जागरूकता पर बल दिया जा रहा है। ​इस वृहद आयोजन में जिले की प्रतिष्ठित संस्थाएं अपनी सहभागिता दे रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से ​सेजेस (SAGES) चर्रा और शौर्य क्रीड़ा क्लब कुण्डेल,​कला केन्द्र इतवारी बाजार और नगर निगम स्पोर्ट्स एकेडमी,​जिला वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, कुडो और कराटे संघ शामिल है। धमतरी जिले में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू हुए इस "समर कैम्प" के लिए ​जिला प्रशासन ने सभी केंद्रों पर खेल सामग्री और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

पथ निर्माण विभाग का बड़ा फैसला, 185 अभियंताओं को मिलेगा करोड़ों का वेतन लाभ

 रांची  वित्तीय वर्ष 2022-23 में नियुक्त सहायक अभियंताओं को लगभग चार वर्षों के बाद विनियमन का फायदा देने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर पथ निर्माण विभाग ने आदेश जारी भी कर दिया गया है लेकिन, यह आदेश वित्त विभाग की ओर से जारी आपत्ति को दरकिनार कर निकाला गया है। अब सहायक अभियंताओं को विनियमन का लाभ मिलता है तो खजाने से करोड़ों की राशि निकल जाएगी। जेपीएससी के माध्यम से बहाल 185 सहायक अभियंताओं को 23 दिनों से लेकर 125 दिनों तक का वेतन बैठे-बिठाए मिलेगा। पूरी सूची में कुल मिलाकर चार लोग ही ऐसे हैं जिन्हें एक भी दिन के विनियमन का लाभ नहीं मिलेगा। झारखंड में सरकार की आंख में धूल झोंककर गबन करनेवाले कर्मियों का एक और कारनामा सामने आया है। राज्य में लगभग तीन वर्ष पूर्व नियुक्त सहायक अभियंताओं की नियुक्ति के साथ शर्त यह थी कि उन्हें प्रभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन मिलेगा। कुछ कर्मियों ने पत्र जारी होने के साथ ही प्रभार ग्रहण कर लिया और कुछ अन्य को सेवा आवंटित होने में तीन-चार महीने का समय लग गया। इसके बाद वेतन के भुगतान काे लेकर सहायक अभियंताओं ने अपने विभाग से लेकर वित्त विभाग तक दौड़ लगाई। लंबे प्रयास के बावजूद वित्त विभाग ने पूर्व से निर्धारित सेवा शर्तों का हवाला देते हुए अभियंताओं की इस मांग का ठुकरा दिया और उनके मूल विभाग को भी आपत्ति की जानकारी दे दी। इसके बाद कई अभियंता कोर्ट भी गए लेकिन उनको अभी तक राहत नहीं मिली। इस बीच पथ निर्माण विभाग के द्वारा न्यायालय में लिए गए विभागीय निर्णय के विपरीत यूटर्न लेते हुए वित्त विभाग की सहमति के बगैर अपने स्तर से भुगतान का आदेश निर्गत कर दिया गया। इसके तहत जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि कोर्ट के निर्णय से फैसला प्रभावित होगा। हास्यास्पद यह है कि पथ निर्माण विभाग उच्च न्यायालय में अपील में भी गया हुआ है और वो मांग भी न्यायालय के बाहर ही पूरा कर दिया। सेवा शर्त में योगदान देने की तिथि से वेतन भुगतान की बात सहायक अभियंताओं की नियुक्ति के लिए विभाग की ओर से जारी सेवा शर्तों में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि पदभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन एवं भत्ता मिलेगा। आदेश की कंडिका 12 के अनुसार सेवा संहिता के नियम -58 एवं वित्तीय नियमावली के नियम 74 के तहत वेतन एवं भत्ता पदभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। इस बीच, अभियंताओं ने लगातार प्रयास कर इस पत्र के इस अंश को संशोधित करवा लिया और नया आदेश जारी करवाया। नवंबर 2022 को जारी हुई थी अधिसूचना, मार्च में नियुक्त हुए सहायक अभियंताओं की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना 14 नवंबर 2022 को जारी हुई थी। इसके कुछ दिनों के बाद इन अभियंताओं को पथ निर्माण विभाग में नियुक्ति का निर्देश मार्च 2023 में जारी किया गया है। इस आदेश के बाद लगभग 5 करोड़ रुपये तक का भुगतान करना पड़ेगा। डोरंडा में ज्वाइन करने को 30 दिन और साहेबगंज के लिए एक दिन का समय इन सहायक अभियंताओं को डोरंडा में ज्वाइन करने के लिए तीस दिनों का समय दिया गया तो साहिबगंज में ज्वाइन करने के लिए एक दिन का समय दिया गया। ज्ञात हो कि डोरंडा राजधानी के बीचों बीच है और विभाग से चंद किमी की दूरी पर है जबकि साहिबगंज एक तरह से झारखंड का अंतिम छोर है। वित्त विभाग की ओर से पूर्व में निर्धारित नियमों के अनुसार अधिकतम सात दिनों में ज्वाइन करने का प्रविधान है लेकिन कर्मियों को एक महीने का समय दिया गया है। आश्चर्यजनक है कि कुछ अभियंताओं की पोस्टिंग योगदान दिये बिना ही कर दी गई है।

ओबीसी आयोग रिपोर्ट और संसाधन कमी का हवाला, पंचायत चुनाव टालने पर अर्जी पर बहस

जयपुर पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में हाईकोर्ट सोमवार (11 मई) को सुनवाई करेगा. राज्य सरकार की ओर से 6 महीने के लिए चुनाव टालने को लेकर दलील दी जा चुकी है. सरकार ने कोर्ट में आवेदन दाखिल करते हुए था कि मौजूदा परिस्थितियों में दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है. इस तर्क के साथ समय बढ़ाने की अर्जी दायर की गई थी. वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग भी भजनलाल सरकार के तर्क के पक्ष में है. दिसंबर तक कई परिषद का कार्यकाल होगा खत्म सरकार की ओर से कहा गया कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उस अवधि के बाद चुनाव कराना ज्यादा उचित होगा. सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया था. साथ ही  प्रार्थना पत्र में स्कूल स्टाफ, ईवीएम और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के भी तर्क जोड़े गए. 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिए थे निर्देश पिछले कई महीनों से पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में कानूनी दांव-पेंच जारी है. हाईकोर्ट ने पहले सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. उस वक्त भी सरकार ने समय सीमा के भीतर चुनाव कराने में असमर्थता जताई थी. एक बार फिर चुनाव टालने की अर्जी दायर होने के बाद आज की सुनवाई अहम होगी.  

10 वीं का पंजाब बोर्ड रिजल्ट घोषित, हरलीन शर्मा के साथ 94.52% छात्रों ने पास किया परीक्षा

चंडीगढ़   पंजाब मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए छात्रों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) ने सोमवार को कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। पंजाब बोर्ड की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इस वर्ष रेगुलर छात्रों का पास प्रतिशत 94.52 रहा जबकि ओपन स्कूल का 58.61 फीसदी दर्ज किया गया है। ऐसे में जो छात्र-छात्राएं इस वर्ष पंजाब 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए थे और रिजल्ट जारी होने का इंतजार कर रहे थे, वे अब आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर ऐप के माध्यम से अपना परिणाम चेक करने के साथ स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। पंजाब बोर्ड की परीक्षा में एक बार फिर से लड़कियों ने बाजी मारते हुए 95.96 फीसदी पास प्रतिशत के साथ लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, लड़कों का पास प्रतिशत 93.23 फीसदी रहा। हरलीन शर्मा ने 99.38 प्रतिशत अंक के साथ पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त करके टॉप किया है। वहीं, दूसरे स्थान पर 99.23 प्रतिशत अंक के साथ मनिमहेश शर्मा और तीसरे स्थान पर रिया रानी ने 99.23 प्रतिशत अंक हासिल किए। पंजाब बोर्ड 10वीं की परीक्षा में इस वर्ष कुल 2,69,505 छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिनमें 1,27,753 छात्राएं और 1,41,746 छात्र शामिल थे। वहीं, जारी परिणाम के अनुसार, परीक्षा में कुल 2,54,744 स्टूडेंट्स पास हुए हैं, जिनमें 1,22,595 छात्राएं और 1,32,143 छात्र शामिल हैं। पंजाब 10वीं बोर्ड परिणाम चेक करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद 'मैट्रिक परीक्षा परिणाम मार्च 2026' लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एक नया पेज खुलेगा; वहां अपना नाम और रोल नंबर दर्ज करें। फिर रिजल्ट आपके स्क्रीन पर खुल जाएगा। नतीजा देखने के बाद मार्कशीट डाउनलोड कर लें। भविष्य के लिए मार्कशीट का प्रिंट आउट निकाल लें। बता दें कि पिछले वर्ष पंजाब 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 2,69,505 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 2,54,744 छात्र 94.52 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण हुए थे। वहीं, इससे पिछले वर्ष 2,77,746 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से कुल 2,65,548 छात्र 95.61 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण हुए थे।

शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति सुधार की तैयारी, 100 करोड़ की लागत से पाइपलाइन विस्तार

 रांची  राज्य के शहरी इलाकों में पेयजल स्वच्छता विभाग जलापूर्ति के लिए घरों तक पाइप लाइन बिछा चुका है। हालांकि कई शहरों में नए बसे क्षेत्र या नगर निगम की सीमा पर स्थित मोहल्लों में पाइप लाइन नहीं पहुंचाया जा सका है। अब नगर विकास विभाग और पेयजल स्वच्छता विभाग ने शहरों के बचे हुए क्षेत्र में भी पाइप लाइन बिछाने और साल के अंत तक घरों में पानी पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके लिए 100 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। बचे हुए तीन लाख घरों तक पानी पहुंचाने के अलावा इस पाइप लाइन में विस्तार की संभावना भी है। राज्य सरकार अपने बजट से यह योजना पूर्ण करेगी। नगर निकायों से इसके लिए लिस्ट सौंपने को कहा गया है। जिन घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुका है, वहां भी जल्द ही जलापूर्ति प्रारंभ कर दी जाएगी। अमृत योजना पूर्ण होने पर आठ लाख घरों तक पहुंचेगा पानी राज्य में अमृत- एक और अमृत- दो के अलावा सुनिश्चित जल सुविधा की योजना चल रही है। इस साल तीनों योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड भी उपलब्ध है। इसके पूर्ण होने पर आठ लाख नए घरों तक पानी पहुंचने लगेगा। केंद्र सरकार ने इन योजनाओं के अगले चरण की प्रारंभिक रिपोर्ट भी मांगी है। तीनों योजनाओं के पूर्ण होने के बाद इसका विस्तार भी किया जाएगा बरसात में जल की शुद्धता बनाए रखना चुनौती पेयजल स्वच्छता विभाग ने बारिश के बाद भूगर्भ जल में होने वाले प्रदूषण मानकों की जांच के लिए जिला स्तर पर तैयारियां की हैं। इसके अलावा खुले जल स्रोत की भी जांच की जाएगी। जल सहियाओं को इसके लिए किट उपलब्ध कराए गए हैं। जल में किसी तरह के प्रदूषण की जानकारी होने पर स्थानीय निकाय इसकी जगह दूसरे स्रोत से आपूर्ति की व्यवस्था करेंगे।  

कस्टम विभाग ने अमृतसर में पकड़ा 25 किलो MDMA, सॉफ्ट टॉय में छिपाकर लाया गया

अमृतसर  अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक यात्री को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से करीब 25.25 किलोग्राम संदिग्ध नशीली टैबलेट्स बरामद की गई हैं। यह कार्रवाई एपीआईयू प्रोफाइलिंग के आधार पर की गई।  जानकारी के अनुसार यात्री कंबोडिया से कुआलालंपुर के रास्ते फ्लाइट संख्या एमएच-118 से अमृतसर पहुंचा था। संदेह होने पर कस्टम अधिकारियों ने उसे रोककर सामान की जांच की। एक्स-रे स्कैनिंग और तलाशी के दौरान अधिकारियों को चार सॉफ्ट टॉय के अंदर छिपाकर रखी गई टैबलेट्स मिलीं। आरोपी ने खिलौनों को इस तरह तैयार किया था कि अंदर पैकेट छिपाए जा सकें। अधिकारियों के मुताबिक बरामद टैबलेट्स का कुल वजन करीब 25.25 किलोग्राम है। प्रारंभिक जांच में इन टैबलेट्स के मेथिलीनडाइऑक्सीमेथामफेटामाइन (एमडीएमए) होने का संदेह जताया गया है, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित मादक पदार्थ है। कस्टम विभाग ने बरामद माल को जब्त कर आरोपी यात्री को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क और इस खेप के पूरे रूट को लेकर भी जांच की जा रही है। 

इंदौर में भयावह हादसा, 5 बसें जलकर खाक, 4 धमाकों से मचा हड़कंप, चश्मदीद बोले – गैस सिलेंडर फटा

इंदौर इंदौर के तीन इमली चौराहे पर सोमवार दोपहर को बड़ा हादसा हो गया। यहां खड़ी बसों में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते चार से पांच बसें उसकी चपेट में आ गईं। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। काफी ऊंचाई तक उठी आग की लपटें प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठती दिखाई दीं, जिससे आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया। शॉर्ट सर्किट की आशंका  प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि आग लगने की असली वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। घटना में फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर मौजूद है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पार्किंग में 20 से ज्यादा बसें खड़ी थीं प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह एक बस में मरम्मत का काम किया जा रहा था। इसी दौरान वेल्डिंग के दौरान बस ने आग पकड़ ली। कुछ ही देर में लपटें एक के बाद एक पांच बसों तक पहुंच गई।स्थानीय नागरिकों ने बताया कि हादसे के वक्त मौके पर 20 से ज्यादा बसें खड़ी थीं। आनन-फानन में इन्हें यहां से हटाया गया। आसपास रिहायशी बस्ती होने की वजह से लोगों में घबराहट फैल गई। वे घरों से बाहर निकल आए। इंदौर के नवलखा की घटना  घटना इंदौर के नवलखा इलाके की बताई जा रही है. यहां पर बसों की पार्किंग होती है, साथ बसों की मरम्मत का काम भी किया जाता है. जानकारी के मुताबिक वेल्डिंग में एकदम से चिंगारी निकली थी, जिससे आग लग गई. आग एकदम से फैली और बसों को चपेट में लेना शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि गैस सिलेंडर फटने जैसी आवाजें भी आई हैं. जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. क्योंकि आसपास बड़ी बस्ती बनी हुई है. ऐसे में लोग घरों से बाहर निकल आए थे. क्योंकि धमाका तेज हुआ था. जबकि आग लगने की वजह से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।  इंदौर में लोगों ने जताया गुस्सा  बताया जा रहा है कि यह रिहायशी इलाका है. यहां बसों की पार्किंग और मरम्मत का पहले विरोध हो चुका है. कई बार चेतावनी भी दी गई है. लेकिन लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों पर रोक नहीं लगाई जा रही है. जिससे परेशानियां हो रही हैं. वहीं इस घटना ने एक बार फिर से चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. क्योंकि इस तरह की घटना से बड़ी जनहानि का डर बना रहता है. जबकि लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  फिलहाल बसों में लगी आग पर काबू पाया जा रहा है. क्योंकि एक बाद एक लाइन से खड़ी कई बसों में आग लगी है. जिसे लपटे फैल रही हैं. दमकल की गाड़ियां आग बुझाने की कोशिश में जुटी हैं।  पार्षद बोले- कई बार शिकायत की स्थानीय पार्षद मनीष शर्मा ने कहा- रिहायशी इलाके में निजी बसों की पार्किंग और मरम्मत को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। सुनवाई नहीं होने से हमेशा बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। पार्षद शर्मा मौके पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा- जब तक बसें यहां से नहीं हटतीं और इसका समाधान नहीं निकलता, मैं धरने पर ही बैठा रहूंगा।