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ESIC अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहल, राज्यमंत्री गौर ने केंद्रीय मंत्री से किया आग्रह

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की मांग की केंद्रीय मंत्री मांडविया को राज्यमंत्री गौर ने लिखा पत्र भोपाल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल, सोनागिरी के उन्नयन के संबंध में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उल्लेख किया है कि यह अस्पताल भोपाल, मंडीदीप, सतलापुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों तथा उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। वर्तमान में लगभग 6.5 लाख बीमित कामगार इस अस्पताल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में यह अस्पताल राज्य शासन के श्रम विभाग द्वारा राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं द्वारा संचालित था, लेकिन दिनांक 22 जून 2023 को भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने इसका संचालन अपने हाथ में ले लिया और आज भी भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के नियंत्रण में है। इसलिए बीमित श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए इसका 300 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेष चिकित्सकों एवं मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता और सेकेंडरी व सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है।  

औद्योगिक विकास को नई दिशा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 10वें अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश समित के पूर्व रवींद्र भवन में ही दो पवेलियन में विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के एमएसएमई एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की उद्यमिता, नवाचार तथा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनेक उत्पादों की जानकारी ली और स्टार्टअप एवं सूक्ष्म,लघु मध्यम उद्यमियों से चर्चा कर उनका उत्साह वर्धन किया प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टाल लगाये गए थे ।ड्रोन निर्माण समाधान, आईओटी-आधारित फिजियोथेरेपी उपकरण, सोलर वाटर हीटर एवं डीट पंप, रेलवे तथा रक्षा इंजीनियरिंग उत्पाद, पेटेंटयुक्त इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स एवं ईवी चार्जिंग समाधान, कृषि-अवशेष पैलेट्स तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उत्पादों सहित विविध नवाचारी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बाजार से' नामक एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया, जो ग्राहकों एवं व्यवसायों को जोड़ता है तथा इसे देश के पहले एआई-संचालित बाज़ार के रूप में स्थापित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांसकारी स्टॉल पर बांस से बनी अनेक वस्तुओं की जानकारी ली। एमएसएमई विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के सात जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक समर्पित पवेलियन (एमपी पवेलियन) भी स्थापित किया गया। इसके साथ ही औद्योगिक नीतियों एवं योजनाओं संबंधी एमएसएमई की जिज्ञासाओं के निवारण संबंधी एक हेल्पडेस्क तथा उद्यमियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फेसिलिटेशन डेस्क की भी स्थापना की गई। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई), एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) सहित विभिन्न संस्थानों ने भी राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के विकास के लिये इस प्रदर्शनी में सहभागिता की। 

रेलवे की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन 75 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी, सिर्फ जल-वाष्प उत्सर्जन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने पिछले महीने 27 मई को नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन चलाने को मंजूरी दी थी। रेल मंत्रालय के मुताबिक यह ट्रेन जल्द ही शुरू होने के लिए तैयार है। यह 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी। शुक्रवार को दिल्ली और जींद के बीच इसका ट्रायल रन किया गया। इस टेस्ट में इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस और ट्रेन के हिलने-डुलने जैसे अहम पहलुओं पर ध्यान दिया गया। सिर्फ जल-वाष्प ही निकलता है देश में हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का मकसद साफ-सुथरे और ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट रेल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है। रेलवे मंत्रालय ने कहा कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन के जरिए बिजली बनाती है, जिसमें सिर्फ जल-वाष्प ही निकलता है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल-बेस्ड ट्रैक्शन सिस्टम का एक साफ-सुथरा विकल्प बन जाती है। इस पहल के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन देशों में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं। जींद-सोनीपत सेक्शन को पायलट रूट चुना गया हरियाणा में जींद-सोनीपत सेक्शन को ऑपरेशन के लिए पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेनसेट के लिए जींद में ही हाइड्रोजन स्टोर करने और रिफ्यूलिंग की सुविधा भी बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ने साइट पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को स्टोर करने और भरने के लिए जरूरी लाइसेंस दे दिया है।      सभी तरह की व्यवस्था की गई है रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, भरोसेमंद और बिना किसी रुकावट के काम करने को पक्का करने के लिए रिफ्यूलिंग ऑपरेशन के लिए हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम लगाया गया है। साथ ही टेक्निकल सपोर्ट और जरूरी स्पेयर पार्ट्स की भी व्यवस्था की गई है। एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट का इंतजाम भी किया जा रहा है। मंत्रालय ने आगे कहा कि हाइड्रोजन बनाने, स्टोर करने और सप्लाई करने वाली जगह पर लगे सेफ्टी सेंसर की नियमित रूप से जांच और सफाई की जाएगी ताकि सुरक्षित कामकाज सुनिश्चित हो सके। ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ ट्रेन के साथ रहेगा इंडियन रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेनसेट और हाइड्रोजन प्लांट के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस मैनुअल भी तैयार किए हैं, जिन्हें आरडीएसओ ने मंजूरी दी है। इसके साथ ही, शकूरबस्ती में मेंटेनेंस सुविधा के लिए सुरक्षा उपाय, ऑडिट और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी तय किए गए हैं। इस मंजूरी में हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी, ​​जरूरी कामों के लिए ट्रेंड और सर्टिफाइड कर्मचारियों की तैनाती और नियमित जांच व मेंटेनेंस शेड्यूल शामिल हैं। शुरुआती दौर में ट्रेन के सुचारू रूप से चलने को सुनिश्चित करने के लिए ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ ट्रेन के साथ रहेगा।

झारखंड में ऊर्जा विस्तार: पतरातू विद्युत परियोजना से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता और रोजगार

 रांची पतरातू स्थित पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की तीसरी 800 मेगावाट क्षमता वाली इकाई को 15 मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. यह जानकारी पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एके सहगल ने रामगढ़ जिले के पतरातू में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी. उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से पुराने ताप विद्युत संयंत्र की जगह अत्याधुनिक सुपर क्रिटिकल और पर्यावरण अनुकूल बिजली उत्पादन प्रणाली स्थापित की जा रही है, जिससे राज्य की ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. वर्तमान में 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन सीईओ ने बताया कि वर्तमान में पीवीयूएनएल की उत्पादन क्षमता 1600 मेगावाट है. पहले चरण के तहत स्थापित दो इकाइयां पहले ही वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं. पहली 800 मेगावाट इकाई 5 नवंबर 2025 को और दूसरी इकाई 25 जून 2026 को उत्पादन से जुड़ी. उन्होंने कहा कि तीसरी इकाई का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इसे चालू वित्तीय वर्ष के भीतर उत्पादन प्रणाली से जोड़ने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है. कुल पांच इकाइयों की है योजना एके सहगल ने बताया कि पीवीयूएनएल परियोजना के तहत पतरातू में 800-800 मेगावाट की कुल पांच इकाइयां स्थापित की जानी हैं. पहले चरण में तीन इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण की शेष दो इकाइयों के लिए स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है. उन्होंने कहा कि सभी इकाइयों के चालू होने के बाद राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और झारखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी. स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर जोर सीईओ ने कहा कि पीवीयूएनएल की प्राथमिकता रामगढ़ जिले और झारखंड के स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना है. निर्माण कार्य के दौरान परियोजना में करीब आठ से नौ हजार श्रमिक कार्यरत थे. अब दो इकाइयों के संचालन शुरू होने के बाद ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) कार्यों में भी बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जा रहा है. अनुभवी स्थानीय कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य से जोड़ा जा रहा है. सहकारी समितियों के माध्यम से बढ़ेगा रोजगार उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई से छह सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जिनसे वर्तमान में 400 से 550 लोग जुड़े हुए हैं. भविष्य में इन समितियों को ओएंडएम कार्यों के अलावा अन्य गतिविधियों में भी अवसर दिए जाएंगे. इसके साथ ही फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. महिलाओं को फ्लाई ऐश उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी पीवीयूएनएल ने पहल की है. सीईओ ने बताया कि आसपास के 30 गांवों की 30 महिलाओं को 15 दिवसीय प्रशिक्षण देकर फ्लाई ऐश से सजावटी और उपयोगी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है. इन उत्पादों को झारक्राफ्ट सहित अन्य बाजारों से जोड़ने की योजना बनाई गई है, ताकि महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिल सके और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें. बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए युवाओं का प्रशिक्षण उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विद्युत वितरण प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से रामगढ़ जिले के आसपास के गांवों के 20 युवाओं को जमशेदपुर स्थित प्रशिक्षण संस्थान में चार माह का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण में 11 केवी ट्रांसफार्मर के रखरखाव, संचालन और सुरक्षा संबंधी तकनीकी जानकारी दी जा रही है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवा स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगे और राज्य की बिजली व्यवस्था को भी तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे.

जयपुर में पोलियो अभियान की तैयारियां तेज, 75 हजार टीमें घर-घर जाकर पिलाएंगी दवा

जयपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 28 जून से 30 जून तक राज्य के 1.04 करोड़ से अधिक बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान के प्रथम दिन 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को बूथ पर दवा पिलाई जाएगी तथा अगले 2 दिन पर घर-घर जाकर टीमों के द्वारा बच्चों को खुराक पिलाई जाएगी ताकि दवा पीने से कोई भी बच्चा वंचित नहीं रहे। खींवसर ने बताया कि 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियोरोधी खुराक पिलाने के लिए प्रदेश में 59 हजार 217 बूथ स्थापित किए गए हैं एवं 75 हजार 232 टीमें बनाई गई हैं, जो पोलियो की खुराक पिलाएगी। इसमें 7011 ट्रांजिट व 9004 मोबाइल टीम भी है। अभियान के दौरान 1.38 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मी एवं अन्य विभागों के कार्मिक सक्रिय रूप से भाग लेंगे। प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि अभियान के पहले दिन सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित बूथों पर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। अभियान में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, एएनएम, आशा सहयोगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात रहेंगे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे 5 वर्ष तक के अपने बच्चों को बूथों पर लाकर पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि तीन दिन के अभियान के लिए मोबाइल एवं ट्रांजिट टीम द्वारा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं अन्य आवागमन स्थलों पर आने जाने वाले बच्चों को भी दवा पिलाई जाएगी। अभियान में घुमक्कड़ जनजाति के डेरों, ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के पांच साल तक बच्चों और दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए चिकित्सा विभाग, आईसीडीएस, आयुर्वेद विभाग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य विभागों से सहयोग लेते हुए वैक्सीनेटर्स एवं मॉनिटर्स की व्यवस्था की गई है ताकि एक भी बच्चा वंचित नहीं रहे। भारत में वर्ष 1995 में पल्स पोलियो अभियान के शुरूआत की गई। जनवरी, 2011 के पश्चात गत 15 वर्षों में भारत में कोई भी पोलियो का नया केस नहीं पाया गया है। 27 मार्च, 2014 को भारत को पल्स पोलियो मुक्त प्रमाण पत्र मिल चुका है। वर्ष 2026 में अभी तक पाकिस्तान में 3, अफगानिस्तान मे 4 पोलियो पाए गए हैं।

हांसी में पेयजल समस्या का समाधान, गांव को मिलेगा 1 करोड़ का विकास फंड

 हांसी  प्रदेश के लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि चानौत गांव की पेयजल समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री और धरना कमेटी की बैठक सकारात्मक रही है। बैठक में मुख्यमंत्री ने गांव की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए भाखड़ा नहर से चानौत तक अलग पाइपलाइन बिछाकर पर्याप्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। साथ ही गांव के विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की राशि देने की घोषणा करते हुए संबंधित अधिकारियों को राशि जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पीडब्ल्यूडी के विश्रामगृह में प्रेसवार्ता में कैबिनेट मंत्री गंगवा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने धरना कमेटी की सभी बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि गांव में अन्य विकास कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे और किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि बैठक में पेयजल समस्या पर विस्तार से चर्चा हुई। चनौत गांव को मिलेगा स्वच्छ पेयजल मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता चानौत गांव को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से अलग पाइपलाइन बिछाने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि हांसी शहर के लिए अमृत-2 योजना के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइन से टी-कनेक्शन देकर गांव को पानी देना नियमों के अनुरूप नहीं है। सीएम ने दिए ये प्रमुख आश्वासन     चानौत तक अलग पाइपलाइन बिछाकर स्वच्छ पेयजल दिया जाएगा।     गांव के विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा।     अधिकारियों को राशि जारी करने के मौके पर ही निर्देश।     गांव के अन्य विकास कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे।     पेयजल समस्या का स्थायी समाधान सरकार की प्राथमिकता होगी। अवैध टी-कनेक्शन लगाने वालों पर होगी कार्रवाई कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन में अवैध टी-कनेक्शन लगाने के मामले में कुछ लोगों की पहचान कर ली गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। अभय ने दी चानौतवासियों के लिए आंदोलन की चेतावनी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला ने शुक्रवार को हांसी के चानौत गांव के मुद्दे पर कहा कि सरकार पहले से बिछी पाइपलाइन से गांव को पानी देने को तैयार नहीं है। चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए चौटाला ने दावा किया कि 30 जून तक सफाई पूरी करने की समय सीमा तय थी, लेकिन अब तक करीब 60 प्रतिशत नहरों और ड्रेनों की सफाई नहीं हो सकी है। सरकार ने नहरों से गाद निकलवाने की बजाय अपने चहेतों को बिना लाइसेंस क्रशर चलाने की छूट दे दी। इससे सिरसा, फतेहाबाद और यमुनानगर सहित कई जिलों में बाढ़ की आशंका है।

बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में ट्राइबल बाजार, संस्कृति और प्रदर्शनी बनेगी आकर्षण

रांची  राज्य सरकार विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष नौ अगस्त को आदिवासी महोत्सव का आयोजन करती है। पिछले वर्ष दिशोम गुरु शिबू सोरन के निधन के कारण इस अवसर पर आदिवासी महोत्सव का आयोजन नहीं हो सका था। इस वर्ष आदिवासी महोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी है। इस बार यह आयोजन तीन दिनों का होगा। राज्य सरकार इसकी तैयारी में जुट गई है। इस वर्ष भी आदिवासी महोत्सव रांची स्थित बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में आयोजित किया जाएगा। इस बार ट्राइबल बाजार इस महोत्सव का विशेष आकर्षण होगा, जिसमें जनजातीय समुदाय द्वारा तैयार सामग्री की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा जनजातीय कला एवं संस्कृति, उनके खान-पान, झारखंड और राष्ट्र के निर्माण में जनजातीय समुदाय की भूमिका को रेखांकित करनेवाली भी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस बार प्रदर्शनी को एक पारंपरिक प्रदर्शनी के बजाय एक इमर्सिव कल्चरल इकोसिस्टम के तौर पर डिज़ाइन करने का निर्णय लिया गया है। एक नालेज ज़ोन भी होगा, जिसमें लोगों को जनजातीय समुदाय की विशेषताओं की जानकारी दी जाएगी। इकोनामिक जोन में आगंतुकों के खाने-पीने आदि के अलावा सेल्फ हेल्प ग्रुप द्वारा तैयार हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम आदि के स्टाल भी लगाए जाएंगे। महोत्सव की शुरुआत जतरा से होगी, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकार सम्मिलित होंगे। इसमें 10 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है। ड्रोन, लेजर एवं लाइट शो में दिखेगी जनजातीय संस्कृति तीन दिनों के आयोजन में ड्रोन एवं लाइट शो भी हाेगा। लेजर शो भी होगा। इसमें जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर फायरवर्क शो भी हाेगा। दिशोम गुरु पर केंद्रित कई कार्यक्रम इस बार आदिवासी महोत्सव में पद्म भूषण दिशोम गुरू शिबू सोरेन पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। विभिन्न प्रकार के शो के अलावा एलईडी के माध्यम से झारखंड के निर्माण में उनके योगदान को दर्शाया जाएगा।  

क्लीन ट्रांसपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार, इंदौर में EV-ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव; निवेशकों ने दिखाई रुचि

इंदौर  इंदौर में आयोजित कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों। ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस सकॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शहर की स्वच्छ और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आई। कॉन्क्लेव में ईवी इकोसिस्टम, बैटरी एवं ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर एक्सपर्टस ने विस्तृत चर्चा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चयनित स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। लगभग 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के समक्ष अपने नवाचार और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गए। सम्मेलन में कईअग्रणी कंपनियों की भागीदारी रही। आयोजन ने उद्योग, निवेशकों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया। एचईवी सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे मंच नवाचार तथा निवेश को नई गति प्रदान करते हैं। वहीं, सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय पहचान और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और ईवी आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।  

सुरक्षा दावों के बीच धनबाद में बढ़ा अवैध कोयला कारोबार, ड्रोन निगरानी भी नाकाम

धनबाद कोयला चोरी पर अंकुश लगाने के तमाम दावों के बावजूद धनबाद में अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि कोयला चोरों को स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ के कुछ कर्मियों का संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी जारी है। जनवरी से मई 2026 के बीच कोयला चोरी के 522 मामले बीसीसीएल ने दर्ज किए गए। यह आंकड़ा बीसीसीएल मुख्यालय के पास दर्ज है। इसी को लेकर लगातार सुरक्षा एजेंसी, बीसीसीएल प्रंबधन के साथ समीक्षा भी हो रही है। इस दौरान करीब 2972.13 मीट्रिक टन कोयला चोरी करने का प्रयास हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 2.37 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी, ड्रोन सर्विलांस और संयुक्त अभियान के बावजूद चोरी की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। कोयला कंपनियों और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगातार कार्रवाई के बावजूद चोरी के प्रयास जारी हैं। पांच महीनों में कुल 30 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि कई मामलों में तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई की गई। मई में सबसे अधिक मामले सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन का मानना है कि संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई के बिना कोयला चोरी पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं होगा। ड्रोन से 333 बार निगरानी, फिर भी नहीं थमी चोरी कोयला चोरी रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। जनवरी से मई तक कुल 333 बार ड्रोन सर्विलांस किया गया। निगरानी के आधार पर 140 कार्रवाई की गईं, लेकिन चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी। जनवरी में 78, फरवरी में 87, मार्च में 120, अप्रैल में 109 और मई में 128 घटनाएं दर्ज होने के बावजूद पुलिस और प्रबंधन की ओर से लगातार कार्रवाई जारी है। 232 अवैध खनन स्थलों को किया गया बंद अवैध खनन रोकने के लिए पांच महीनों में 232 अवैध माइनिंग साइटों को भरकर बंद किया गया। अप्रैल में सबसे अधिक 57 और मई में 51 स्थलों पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा मार्च में 44, फरवरी में 39 तथा जनवरी में 41 अवैध खनन स्थलों को बंद कराया गया। आईसीसीसी की निगरानी से पकड़े गए 476 मामले इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की निगरानी से 476 मामले चिन्हित किए गए। इनमें 474 मामलों में कार्रवाई की गई तथा 118 मीट्रिक टन कोयला बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत 10.12 लाख रुपये बताई गई है। मानसून से पहले बढ़ी चुनौती अधिकारियों के अनुसार मानसून से पहले अवैध खनन और कोयला चोरी की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इसे देखते हुए सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस और कोयला कंपनियों की सुरक्षा टीमों द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है। रात में गश्त बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात करने की भी व्यवस्था की गई है। सबसे ज्यादा मामले मई : 128 मामले मार्च : 120 मामले अप्रैल : 109 मामले फरवरी : 87 मामले जनवरी : 78 मामले  

रक्षा तकनीक में बड़ा कदम, IIT रोपड़ विकसित करेगा AI टैंक और लेजर ड्रोन-रोधी सिस्टम

चंडीगढ़ भारतीय सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाब स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रोपड़ ने आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) से कुल 120 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। 27वें आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड साइकिल के तहत दिए गए इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए 'स्वायत्त बख्तरबंद वाहन' (Autonomous Armoured Vehicles) और 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (Directed Energy Weapons) विकसित करना है। यह कदम न केवल सीमा पर सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की युद्ध तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। बिना इंसानी मदद के चलेंगे बख्तरबंद वाहन इस पहल का पहला प्रमुख हिस्सा अगली पीढ़ी के कॉम्बैट प्लेटफॉर्म यानी स्वायत्त बख्तरबंद वाहनों का विकास है। ये ऐसे वाहन या टैंक होंगे जिन्हें चलाने के लिए इंसानों की कम से कम जरूरत पड़ेगी। आईआईटी रोपड़ के निदेशक राजीव आहूजा के अनुसार, ये सिस्टम नेविगेशन, खतरों की पहचान करने और युद्ध के मैदान में सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे दुश्मन के चुनौतीपूर्ण इलाकों और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम कर रहे हमारे सैनिकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाएगा। भविष्य की तकनीक: डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) आईआईटी रोपड़ का दूसरा प्रोजेक्ट 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' के विकास से जुड़ा है। ये हथियार आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए 'गेम-चेंजर' माने जा रहे हैं। इनमें दुश्मनों के खतरों को बेअसर करने के लिए अत्यधिक केंद्रित विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा बीम का इस्तेमाल किया जाता है। निदेशक आहूजा ने बताया कि एंटी-ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) अनुप्रयोगों के लिए इन प्रणालियों को आधुनिक युद्ध में बेहद मारक और उपयोगी माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट भारतीय सेना के सैन्य संचालन निदेशालय ) के तहत काम करने वाला एटीबी (ATB) उभरती तकनीकी आवश्यकताओं की पहचान करता है और उन्नत समाधान देने में सक्षम संस्थानों को महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास कार्य सौंपता है। आईआईटी रोपड़ को ये दोनों प्रोजेक्ट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, फोटोनिक्स और लेजर तकनीक में उसकी विशेषज्ञता के आधार पर मिले हैं। संस्थान के निदेशक ने इसे सेना द्वारा उनके रिसर्च इकोसिस्टम पर जताए गए भरोसे का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा, "हमारे संकाय और छात्र रक्षा प्रौद्योगिकी डोमेन में कठोर परिश्रम कर रहे हैं। हम इसे राष्ट्रीय सुरक्षा में सीधे योगदान के रूप में देखते हैं और इसे सामरिक रक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक अनुशासन के साथ पूरा करेंगे।" इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी रोपड़ के अधिकारियों का कहना है कि इन रक्षा कार्यक्रमों से क्षेत्र में भारी आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होंगी। कलपुर्जों के निर्माण और परीक्षण के लिए स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के बड़े तकनीकी कार्यक्रमों से रिसर्च संस्थानों के आसपास एक 'इनोवेशन इकोसिस्टम' तैयार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और विशेष उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।