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दुखद खबर: अखिलेश यादव के भाई प्रतीक नहीं रहे, अस्पताल में इलाज के दौरान निधन

लखनऊ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव (38) का लखनऊ में निधन हो गया है. प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के छोटे बेटे थे. वे अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे।  प्रतीक यादव को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. वे बीजेपी लीडर अपर्णा यादव के पति थे. हालांकि, पिछले दिनों पति-पत्नी के बीच विवाद की भी खबरें आई थीं. हालांकि, मौजूदा वक्त में वे परिवार के साथ ही रह रहे थे लेकिन कहा जा रहा है कि पारिवारिक कलह जारी थी।  बीते कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब थी और इलाज चल रहा था. आज यानी बुधवार को सुबह उन्हें हॉस्पिटल लाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रतीक यादव के निधन की खबर मिलते ही यादव परिवार और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है।  अपर्णा यादव के पति थे प्रतीक प्रतीक यादव, बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति थे और राजनीतिक तौर पर लो-प्रोफाइल रहते हुए बिजनेस और फिटनेस सेक्टर से जुड़े थे. फिलहाल इस खबर को लेकर परिवार की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. मौत के कारणों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और विस्तृत जानकारी का इंतज़ार किया जा रहा है।  शरीर पर चोट के कोई निशान हीं फिलहाल पुलिस मामले को गंभीरता से देख रही है. शव का पंचनामा किया जा रहा है और कुछ ही देर में डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा. सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया है।  फेफड़ों की समस्या से परेशान थे प्रतीक अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी. जानकारी के मुताबिक प्रतीक लंबे वक्त से फेफड़ों की समस्या से परेशान थे. उनके लंग्स में क्लॉट था, जिसका इलाज मेदांता में चल रहा था. सुबह जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो वो रिएक्ट नहीं कर रहे थे. तभी तुरंत परिजन सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे।  KGMU में होगा पोस्टमार्टम प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का पैनल करेगा, ताकि मौत की वजह साफ हो सके. बता दें कि 38 वर्षीय प्रतीक, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे थे।  – समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पोस्टमार्टम हाउस से निकलने के बाद प्रतीक यादव को लेकर एक भावुक बयान दिया. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक था और हमेशा अपने बिजनेस में व्यस्त रहता था. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी, जिस दौरान उन्होंने प्रतीक को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी।  – अखिलेश यादव ने प्रतीक यादव को एक 'बहुत अच्छा लड़का' बताते हुए कहा कि वह परिवार के लिए हमेशा समर्पित रहा. बिजनेस के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार व्यापार में नुकसान होने पर व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित हो जाता है।  – अखिलेश ने यादव परिवार की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पूरा परिवार इस वक्त दुख में एक साथ खड़ा है. भविष्य की कार्रवाई के बारे में बात करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि परिवार जो भी फैसला करेगा, उसी के मुताबिक कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी परिवार कहेगा, उस पर ही आगे की प्रक्रिया और जांच की जाएगी।  – प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम लखनऊ में KGMU के डॉक्टरों का पैनल कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम के लिए KGMU की डॉ. मौसमी और डॉ. शिवली के नाम तय किए गए हैं, जबकि एक सीनियर डॉक्टर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. पोस्टमार्टम से पहले वीडियोग्राफी की औपचारिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है. अब कुछ ही देर में पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू की जाएगी. पूरे मामले को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।  क्यों हुई मौत? किस बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई है यह पता नहीं चला है. कुछ वक्त पहले वे मेदांता में भर्ती किए गए थे. इस दौरान अपर्णा यादव और अखिलेश यादव मिलने भी पहुंचे थे. हालत स्थिर होने के बाद उन्हें वापस घर लाया गया था।  जिम करना, कई तरह की दवाइयां लेने जैसी बातें उन्हें लेकर कही जा रही थी. वे कुछ दिनों से पूरी तरह से स्वस्थ नहीं दिखाई दे रहे थे. लेकिन बीमारी जानलेवा हो सकती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।  प्रतीक यादव का शव अस्पताल में रखा हुआ है. मौके पर परिवार को लोग पहुंचे हैं।  जिम का बिजनेस अपने परिवार की राजनीतिक बैकग्राउंड से दूर, प्रतीक यादव रियल एस्टेट और फिटनेस एंटरप्रेन्योरशिप के सेक्टर में काम करते थे. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के लंदन स्थित लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया था।  प्रतीक यादव फिटनेस फ्रीक थे. लखनऊ में उनके जिम का बिजनेस भी है. उन्हें जिम करने और फिट रहने का बहुत ज्यादा शौक था।  प्रतीक ने अब तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ा और न ही पार्टी में कोई बड़ा पद संभाला था. वे आम तौर पर सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे. साल 2017 में दिए गए एक इंटरव्यू में यादव ने कहा था कि वह जब तक संभव हो सकेगा, राजनीति से दूर रहेंगे और अपने कारोबार पर ध्यान देंगे. हालांकि, पार्टी के अंदरूनी हलकों से कभी-कभार उनके चुनाव लड़ने की मांग उठती रही, लेकिन उन्होंने कभी भी सियासत में अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा। 

पंजीकृत श्रमिकों के लिए वरदान बनीं सरकारी योजनाएं: शिक्षा, इलाज और आवास की मिल रही गारंटी

पंजीकृत श्रमिकों के लिए संजीवनी बनीं शासकीय योजनाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की गारंटी भोपाल प्रदेश के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा व्यापक कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं। श्रम विभाग और विभिन्न बोर्ड्स के माध्यम से अब श्रमिकों को जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक हर कदम पर आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। इनमें प्रसूति सहायता ₹16 हजार, बेटियों के विवाह के लिये अनुदान 49 हजार रूपये और 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क चिकित्सा लाभ (आयुष्मान भारत) शामिल है। इसके अतिरिक्त श्रमिकों के बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा देने के लिए 'विदेश अध्ययन योजना' के तहत 40 हज़ार डॉलर तक की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अधिकतम 10 हजार यू.एस. डॉलर प्रतिवर्ष बतौर वार्षिक निर्वाह भत्‍ता भी प्रदान किया जाता है। राज्‍य एवं संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 50 हज़ार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। श्रमिकों के आवास निर्माण के लिए एक लाख रूपये तक, ई-स्कूटर खरीदी के लिए 40 हजार रूपये तक और औजार अनुदान भी सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में भेजा जा रहा है। पात्र श्रमिक निर्धारित समय-सीमा के भीतर 'श्रम सेवा पोर्टल' या 'लोक सेवा केंद्र' के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। 'श्री' और 'श्रमणा' पहल से मिल रहा सम्मान सुरक्षा और संपूर्ण गारंटी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी इन योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए शासन द्वारा '(SHREE)' अभियान चलाया जा रहा है। इस विशेष जनसंपर्क और आउटरीच अभियान के माध्यम से ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन हो और कोई भी शिक्षा, स्वास्थ्य या पेंशन के लाभ से वंचित न रहे। इसके साथ ही कार्यस्थल पर श्रमिकों विशेषकर महिला श्रमिकों की गरिमा, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए 'श्रमणा' योजना भी संचालित की जा रही है। योजना में कार्यस्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे महिला श्रमिकों को एक अनुकूल और सुरक्षित वातावरण मिल सके।  

UP में चुनावी रणनीति तेज: योगी कैबिनेट विस्तार के बाद BJP ने साधीं 60 महत्वपूर्ण सीटें

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होने हैं। इस तरह एक साल से भी कम का वक्त बचा है और भाजपा ने योगी कैबिनेट का विस्तार करने के बाद अब चुनाव पर फोकस कर दिया है। मंगलवार को हिमंत बिस्वा सरमा सरकार का शपथ समारोह है और उसके बाद भाजपा लीडरशिप तैयारी में जुट सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंगलवार के बाद किसी भी दिन यूपी चुनाव को लेकर भाजपा की अहम बैठक हो सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन 50 से 60 सीटों पर फोकस करने के लिए कहा है, जहां पहले भाजपा नहीं जीत पाई थी। ये वह सीटें हैं, जहां भाजपा को 2012 से 2022 तक के तीन चुनावों में जीत नहीं मिल सकी है। पार्टी लीडरशिप का कहना है कि यदि इन सीटों में से करीब आधी भी जीत ली गईं तो नतीजे बदल सकते हैं। भाजपा जिन 60 सीटों पर जोर देने की बात कर रही है, उनमें से 22 तो पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर में हैं। इसके अलावा 13 सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे जिलों में हैं। पश्चिम यूपी के इन जिलों में मुस्लिम बहुल आबादी वाली सीटों पर ऐसी स्थिति है। इसके अलावा पूर्वांचल के जिलों की बात करें तो सपा यहां मजबूत रही है। अब यदि भाजपा ने यहां फोकस किया तो वह अपने गढ़ों के अलावा कमजोर इलाकों में भी ताकत बढ़ा पाएगी। समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में इन 35 सीटों में से 22 पर जीत हासिल की थी। पूर्वी यूपी के मऊ, गाजीपुर जैसे जिलों में सपा की झोली भर गई थी और इसी के चलते 2017 के मुकाबले वह अच्छी स्थिति में आ गई थी। इस बार भाजपा की प्लानिंग यह है कि सपा को उसके ही मजबूत इलाकों में घेरा जाए। मैनपुरी, फर्रूखाबाद, इटावा जैसे जिलों में भाजपा तैयारियों में जुट गई है। बता दें कि चुनाव की महीनों पहले से ही तैयारी करने में भाजपा आगे रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी वह महीनों पहले से ऐक्टिव थी और जब उसे सत्ता मिली है तो उसकी सक्रियता को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। क्यों बूथ लेवल रणनीति पर इतना फोकस करती है भाजपा यूपी में भाजपा एक बार फिर से बूथ लेवल पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का कहना है कि बूथ लेवल पर फोकस करने से जमीनी स्तर तक कार्यकर्ता ऐक्टिव हो जाते हैं और वे वोटरों को घरों से निकालने में भी जुटते हैं। पहले के चुनावों में भी भाजपा को इस रणनीति का फायदा मिला है। अब नए तेवर और कलेवर के साथ एक बार फिर पार्टी इस रणनीति पर जुटने की तैयारी में है।

सरकारी खर्चों पर लगाम की तैयारी, सीएम काफिले में वाहनों की कटौती पर विचार

 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल उपयोग का उपयोग कम करने की अपील का असर मध्य प्रदेश सरकार में दिखने लगा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब शासकीय कार्यों में उपयोग के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को टैक्सी के रूप में लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में से वाहनों की संख्या कम कर सकते हैं। इसके अलावा वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगा रखी है। मुख्यमंत्री के काफिले में बदलाव की तैयारी मुख्यमंत्री के काफिले में लगभग 13 गाड़ियां हैं। इसमें से पांच से छह गाड़ियां कम की जा सकती हैं। सुरक्षा के हिसाब से कुछ वाहन काफिले में खाली चलते हैं, इन्हें कम किया जा सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जहां भी दौरे पर जाते हैं उनके स्वागत के लिए वाहनों से जुटने वाली भीड़ पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस बीच, वन विभाग और पुलिस को छोड़कर सभी विभागों में नए वाहन क्रय करने पर रोक लगा दी गई है। खर्चों में कटौती के सख्त निर्देश जल्द ही कम खपत वाले वाहनों के उपयोग के निर्देश जारी किए जाएंगे। वित्त विभाग यह भी निर्धारित करने जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का कितना और कब उपयोग हो, जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों से कहा है कि पेट्रोल-डीजल के मद में खर्च कम करें और खुद के खर्चों में भी कटौती करें। मंत्रियों के काफिले पर स्थिति केवल जनता से पेट्रोल-डीजल के किफायती उपयोग की अपील की जा रही है, लेकिन मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या घटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 30 मंत्री हैं। मंत्रियों के काफिले में तीन से चार वाहन चलते हैं। स्टेट गैराज से इन्हें वाहन आवंटित होता है और पेट्रोल-डीजल भी मिलता है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा अव्वल: अब सड़कों से बहने वाला पानी भी होगा संरक्षित

खंडवा  जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में खंडवा नई पहचान बना रहा है. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए अनोखी पहल की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ों पर लाखों कंटूर खोदने के बाद अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर (गड्ढा) खोदकर जल संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ बहने के बजाय जमीन में समा सके और भूजल स्तर में वृद्धि हो। प्रदेश में खंडवा का पहला स्थान जल संचय जन भागीदारी अभियान में खंडवा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में खंडवा देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचा है, जबकि जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर चल रहा है. खंडवा में प्रशासन द्वारा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से लगातार व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। मिशन मोड में चल रहा अभियान वर्षा जल संरक्षण और जल बचाने के लिए जिला प्रशासन मिशन मोड में अभियान चला रहा है. कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि "जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. खेत तालाब, कुएं रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, रिचार्ज शाफ्ट, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। सड़कों के किनारों पर भी कंटूर पुराने तालाबों, जलाशयों और गड्ढों को भी नए तरीके से ठीक किया जा रहा है. अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे नालों में बहने के बजाय जमीन में रिस सके. इससे आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार होने के साथ जल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है। अब तक एक लाख कंटूर खोदे जिले में अब तक एक लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जबकि करीब ढाई लाख संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वर्ष 2025 में भी खंडवा ने जल संचय करने वाले जिलों में देश में पहला स्थान हासिल किया था. प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी और सतत प्रयासों से खंडवा आने वाले वर्षों में जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

बायपास पर राहत: रालामंडल ब्रिज दोबारा चालू, लेकिन बिजली के पोल अब भी नहीं लगे

इंदौर राऊ-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद ब्रिज के बाद रालामंडल के समीप बना ब्रिज भी ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। दोनों ब्रिजों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। दोनों ब्रिजों को बिना लोकार्पण के शुरू कर दिया गया है। रालामंडल ब्रिज डेढ़ माह पहले ट्रायल के लिए खोला था, लेकिन चार दिन बाद उसे फिर बंद कर दिया गया, क्योंकि ब्रिज का लोड टेस्ट नहीं हुआ था और रेलिंग के बाद कुछ गलत निर्माण भी हो गए थे। गलती समझ में आने पर बाद में अफसरों ने उसे तुड़वा दिया था। ब्रिज की दोनों भुजाएं ट्रैफिक के लिए बंद होने के कारण वाहन को सर्विस रोड से गुजरना पड़ रहा था। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों की कतार लग जाती थी। राऊ से देवास के बीच 35 किलोमीटर के बायपास पर तीन जगह ब्रिजों का निर्माण चल रहा है। दो स्थानों पर ब्रिज ट्रैफिक के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे ट्रिपल लेयर ब्रिज के शुरू होने में छह माह से अधिक का समय और लगना है। यहां मध्य हिस्से को तो ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी अंडरपास और फ्लायओवर का काम बाकी है। इस ब्रिज के बनने से बायपास से इंदौर शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों को आसानी होगी। अभी बोगदों से होकर वाहनों को आना पड़ता है, जबकि भारी वाहन तो बोगदों से आए ही नहीं पाते हैं। इस ब्रिज के बनने से शहर में एंट्री आसान होगी।रालामंडल ब्रिज ट्रैफिक के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन ब्रिज पर बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। यहां ट्रैफिक अंधेरे में ही चलेगा, जबकि बायपास के दूसरे ब्रिजों पर विद्युत पोल लगाए गए हैं।  

वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग, CM डॉ. यादव की पहल से देशभर में पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश बन रहा देश का वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन हब वाइल्डलाइफ संरक्षण, इको-टूरिज्म और रोजगार का उभरता केंद्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में ग्लोबल पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दायित्व तक सीमित न रखते हुए उसे विकास, पर्यटन, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इसी दूरगामी सोच से मध्यप्रदेश आज ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ही देश के सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वन्यजीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है कि प्रदेश के वन और नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। मध्यप्रदेश के वन देश की अनेक प्रमुख नदियों का मायका हैं। इस तरह ये वन कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित और समुदाय केंद्रित वन प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ा रही है। कूनो बना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का ग्लोबल प्रयोगशाला श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। एक शताब्दी पूर्व लुप्त हो चुके चीतों की देश में सफल वापसी ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बल पर विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। मध्यप्रदेश में चीतों साथ ही लुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति को भी कान्हा की घास-भूमि में आबाद किया जा रहा है। राज्य सरकार अब कूनो को ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य को चीतों का दूसरा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौरादेही को तीसरा बड़ा चीता लैंडस्केप बनाया जा रहा है। नौरादेही में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा के निर्माण से परियोजना के अगले चरण का शुभारंभ हो चुका है। विलुप्त प्रजातियों की वापसी का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में चीतों के साथ ही कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों का पुनर्वास इस दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रयास केवल एक प्रजाति को बसाने तक सीमित नहीं, बल्कि खो चुकी जैव-विविधता और पारिस्थितकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का अभियान है। इसी प्रकार चंबल, कूनो और नर्मदा क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी पहले से ही दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़ना तथा ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी में मगरमच्छों का संवर्धन शुरू करना प्रदेश की जलीय जैव विविधता संरक्षण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिवस पर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति और जैव विविधता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध संरक्षण में देश का नेतृत्व मध्यप्रदेश गिद्ध संरक्षण में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की संख्या राज्य में अब 14 हजार से अधिक हो चुकी है, जो देश में सर्वाधिक है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन विहार में उपचार के बाद मुक्त किया गया एक गिद्ध पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक की लंबी यात्रा पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। वन विहार को पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए वहां 40 ई-व्हीकल भी उपलब्ध कराए गए हैं। नए टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से बढ़ा संरक्षण क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और जैव- विविधता संपन्न क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिसंबर-2024 में रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के दर्जे के साथ वन एवं वन्य जीव संरक्षणको नया आयाम मिला। यह निर्णय वर्ष 2008 में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक लंबित रहा था, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। इस टाइगर रिजर्व का नाम विश्वप्रसिद्ध पुरातत्वविद् पं. विष्णुदेव श्रीधर वाकणकर के नाम पर रखा गया। मार्च-2025 में शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई गई है। इसी क्रम में अप्रैल 2025 में सागर जिले के 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया। साथ ही ओंकारेश्वर और जहानगढ़ को नए वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। अगस्त 2025 में ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया, यहाँ टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।  हाथी संरक्षण में वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ का गठन, ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि होने पर मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही कर्नाटक, केरल और असम जैसे राज्यों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। टाइगर कॉरिडोर और वाइल्डलाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर वन्यजीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना … Read more

आज 13 मई को मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे नरसिंहपुर से 1835 करोड़ का अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

भाजपा में सियासी हलचल: संगठन से सरकार तक बदलाव की अटकलें, महिला चेहरे को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर छत्तीसगढ़ भाजपा में संभावित बड़े फेरबदल को लेकर चर्चा हो रही है। यहां पार्टी के अंदर सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर बदलाव की अटकलें तेज हैं। दरअसल, प्रदेश में 12 और 13 मई को दो दिन बैठकें आयोजित की गई है। 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति होगी। जहां पार्टी इसे सामान्य संगठन की बैठक बता रही है, वहीं, भाजपा के अंदर की चर्चाएं देखे तो इसे आने वाले बदलावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, छत्तीसगढ़ भाजपा इस समय दो बड़े मुद्दों पर ध्यान दे रही है। पहला, राज्य सरकार अपने ढाई साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है। दूसरा, संगठन के कई बड़े नेताओं का कार्यकाल खत्म होने वाला है। प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के कार्यकाल को लेकर भी पार्टी में चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि संगठन में कुछ नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है और कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका मिल सकती है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में सरकार और संगठन के कामकाज को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है। इसी के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है। इसलिए अब सिर्फ छोटे बदलाव नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर फेरबदल की चर्चा हो रही है। सीएम विष्णुदेव साय (Vishnu Deo Sai) के नेतृत्व को लेकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा कायम बताया जा रहा है। फिलहाल मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले चुनाव भी उनके नेतृत्व में ही लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खबर है कि 2 से 4 मंत्रियों के चेहरे बदले जा सकते हैं और उनकी जगह नए नेताओं को मौका मिल सकता है। इस बार पार्टी पुराने और वरिष्ठ विधायकों के बजाय नए चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है। चर्चा यह भी है कि मंत्रिमंडल में एक और महिला मंत्री को शामिल किया जा सकता है। पार्टी महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक गलियारों में जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें भावना बोहरा,पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम प्रमुख है। वहीं, डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव में भाजपा एक महिला चेहरे को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। राजनीतिक गलियारों में लता उसेंड़ी और रेणुका सिंह जैसे नाम चर्चा में हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा इसके जरिए कई सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधना चाहती है। यदि किसी महिला आदिवासी या ओबीसी चेहरे को डिप्टी सीएम बनाया जाता है, तो इससे महिलाओं, आदिवासी समाज और पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही सरगुजा और बस्तर जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि भाजपा सिर्फ वर्तमान सरकार पर नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी और नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजनाओं से जटिल बीमारियों का मिल रहा निशुल्क उपचार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का जीवन अनमोल है और उनकी जिंदगी को किसी भी कीमत पर बचाने के लिए राज्य सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है। मंगलवार को उज्जैन के असनोरिया क्षेत्र में निवासरत परिवार के 5 माह के बालक यथार्थ सिंह  को ‘पीएम  एयर एम्बुलेंस सेवा’ के माध्यम से बेहतर इलाज के लिए बेंगलुरु के नारायणा अस्पताल भेजा गया है। बच्चा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है। यथार्थ इलाज इंदौर के एक अस्पताल में चल रहा था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अति मुश्किल परिस्थितियों में राज्य सरकार  सभी जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ी है। गंभीर बीमारी से पीड़ित बालक यथार्थ का उपचार आयुष्मान निरामय योजना के अंतर्गत निःशुल्क कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रार्थना की है कि बालक यथार्थ पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर जल्द ही अपने घर लौट आए। प्रदेश में सुदृढ़ हो रही स्वास्थ्य सेवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता निरंतर बेहतर हो रही है। राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को समय पर और उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजना जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।इन योजनाओं से अब जटिल और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी बड़े अस्पतालों में निशुल्क एवं त्वरित उपचार की सुविधा मिल रही है।