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खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 14.78 करोड़ रुपये स्वीकृत

खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 14.78 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर, छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 14 करोड़ 78 लाख 61 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।      जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के टेकापार जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 94 लाख 42 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूरा होने से 133 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी तरह से साल्हेवारा जलाशय का जीर्णोद्धार, नहरों का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 85 लाख 33 रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 164 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। सिंगारपुर व्यपवर्तन शीर्ष कार्य का जीर्णोद्धार एवं नहरों का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 98 लाख 86 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 111 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

भारी बारिश से खदानें जलमग्न, झारखंड के बिजली संयंत्रों में कोयले का संकट

 रांची झारखंड के बिजली संयंत्रों में कोयला का संकट है। लगातार भारी बारिश के कारण बीसीसीएल, सीसीएल समेत कोल कंपनियों की खुली खदानों में पानी भर चुका है, जैसा कि हरेक साल होता रहा है। झारखंड सरकार के तेनुघाट थर्मल पावर संयंत्र में भी कोयला का संकट है। कोल कंपनियों से तेनुघाट संयंत्र को पर्याप्त कोयला नहीं मिला है। नतीजतन, कोल भंडार बेहद कम हो चुका है। महज चार दिन तक संयंत्र चलाने भर का कोयला शेष है। पतरातू सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट में भी उत्पादन कार्य को सुचारू रखने के लिए जितना कोयला होना चाहिए, उतना नहीं है। ऐसे प्रतिकूल हालात को भांप ऊर्जा विभाग के कान खड़े हो चुके हैं। ऊर्जा सचिव के श्रीनिवासन ने अधीनस्थों को निर्देश दिया है कि कोल कंपनियों के साथ बिजली उत्पादन संयंत्रों के शीर्ष प्रबंधन के साथ सतत संवाद करे। यह सुनिश्चित करे कि विद्युत संयंत्रों को इतना कोयला अवश्य मिले कि किसी भी परिस्थिति में उत्पादन बंद न हो। कोल इंडिया लिमिटेड के मातहत संचालित भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के खनन का कार्य क्षेत्र धनबाद और आसपास का इलाका है। सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड (सीसीएल) के खनन क्षेत्र का दायरा, हजारीबाग, चतरा, रामगढ़, बोकारो, पलामू, गिरिडीह और लातेहार तक है। कोयला की अधिकतर खदानों खुली हुई है। पिछले एक पखवाड़ा में लगातार बारिश ने खुली खदानों को पानी से लबालब कर दिया है। पानी निकालने के लिए मशीनें लगातार चल रही है तो आसमान उन्हें दोबारा भरने को आतुर है। ऐसे हालात में कोयला के उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। विद्युत संयंत्रों में कोयला की खूब मांग है। डिस्पैच बिल्कुल कम। ऊर्जा विभाग को सूचना मिली है कि कई प्लांटो में कोयला का भंडार चेतावनी के स्तर पर। सो, ऊर्जा विभाग ने इस दिशा में कवायद तेज की है। ऊर्जा सचिव के श्रीनिवासन में गुरुवार को इस मसले पर अधीनस्थ अधिकारियों से हालात की जानकारी ली है। यद्यपि, ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द हालात सुधर जाएंगे। इतने हैं बिजली संयंत्र     झारखंड में दस से अधिक थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट सरकारी व केंद्रीय इकाइयां हैं। छोटे और औद्योगिक कैप्टिव प्लांट मिलाकर इनकी संख्या 40 से अधिक है।     रामगढ़ का पतरातू सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट एनटीपीसी और झारखंड सरकार का संयुक्त उपक्रम है। इसकी उत्पादन क्षमता 16 सौ मेगावाट है। तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन राज्य सरकार का प्रमुख संयंत्र है।     डीवीसी का कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन, चंद्रपुरा थर्मल पावर प्लांट और बोकारो थर्मल पावर प्लांट है। चतरा में एनटीपीसी का सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट है।  

पंजाब में फिर बदलेगा मौसम, 3 जिलों में बारिश की संभावना

पटियाला  पंजाब के तीन जिलों पठानकोट, होशियारपुर और गुरदासपुर में आज (25 सितंबर) हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। हालांकि, राज्य में मानसून की विदाई का दौर जारी है। राज्य के अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। अब यह सामान्य के करीब बना हुआ है।  पंजाब और चंडीगढ़ से मानसून की विदाई जारी है। मानसून की वापसी की रेखा अभी गुरदासपुर और चंडीगढ़ से होकर गुजर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश कम होने और मौसम ज्यादातर सूखा रहने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ का असर पंजाब और चंडीगढ़ पर ज्यादा नहीं पड़ेगा। वहीं, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बना कम दबाव का हवाओं का सिस्टम भी अब कमजोर हो गया है। एक अक्टूबर तक मौसम ड्राई रहने की संभावना इस सप्ताह पंजाब के सभी हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बारिश की संभावना कम है। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली और पटियाला में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री, जबकि बाकी हिस्सों में 34 से 36 डिग्री रह सकता है। तापमान 30 से 32 डिग्री भी रह सकता है उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में कुछ समय तापमान 30 से 32 डिग्री भी रह सकता है। पठानकोट में न्यूनतम तापमान 16 से 18 डिग्री, अमृतसर, गुरदासपुर और होशियारपुर-रूपनगर के कुछ हिस्सों में 18 से 20 डिग्री, जबकि बाकी पंजाब में 20 से 22 डिग्री रहने का अनुमान है। बिजली की मांग 14 हजार मेगावाट के पार गर्मी बढ़ने से पंजाब में बिजली की मांग भी बढ़ी हुई है। आज राज्य में बिजली की मांग 14,120 मेगावाट रही। पंजाब ने 5,004 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया, जबकि बाहर से 9,118 मेगावाट बिजली ली गई।

छत्तीसगढ़ में बारिश का असर, सभी स्कूलों में छुट्टी का आदेश

बालोद. बालोद. छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश को देखते हुए छात्र हित में बड़ा फैसला लिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 25 सितंबर को जिले में संचालित सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आज 25 सितंबर को स्कूल बंद रहेंगे। यह आदेश जिले के सभी संबंधित स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 28 सितंबर को होगी परीक्षा आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 25 सितंबर को आयोजित होने वाली सभी परीक्षाएं अब 28 सितंबर को होंगी। परीक्षाएं पूर्व निर्धारित समय के अनुसार ही संचालित की जाएंगी। जीपीएम के कई इलाकों में बारिश गुरुवार शाम से गौरेला, पेंड्रा, मरवाही सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश होती रही. शुक्रवार सुबह भी घने बादल छाए रहे और कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा. बारिश के कारण सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, वहीं सुबह अपने कामकाज के लिए घरों से निकलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. कई स्थानों पर लोग बारिश थमने का इंतजार करते नजर आए. धमतरी में बारिश से स्कूल बंद इधर धमतरी में भी लगातार बारिश जारी है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने आज सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की है. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर जिले में संचालित सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में आज किसी भी तरह की शैक्षणिक गतिविधियां नहीं होंगी. लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव और आवागमन की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से ये फैसला लिया है. मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट मौसम विज्ञान विभाग ने छत्तीसगढ़ में बारिश और गरज-चमक को लेकर चेतावनी जारी की है. आईएमडी के 24 सितंबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है. 26 और 27 सितंबर को भी गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां जारी रहने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणाली के प्रभाव से आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर बना रह सकता है. ऐसे में लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और गरज-चमक के समय खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है. मौसम केंद्र के अनुसार दक्षिण छत्तीसगढ़ से जुड़े मौसम तंत्र का प्रभाव प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश के रूप में दिखाई दे रहा है. बारिश से जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है. खेतों में नमी बढ़ने से कृषि कार्यों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बम की धमकी, पुलिस ने खाली कराया पूरा परिसर

 चंडीगढ़   पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद शुक्रवार सुबह हड़कंप मच गया। धमकी भरी कॉल मिलने की सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया। हाई कोर्ट परिसर में तत्काल पीसीआर वाहन, दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस पहुंच गईं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें हाईकोर्ट परिसर में संदिग्ध वस्तुओं और वाहनों की जांच कर रही हैं। फिलहाल जांच के दौरान पुलिस को परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। धमकी देने वाले व्यक्ति और कॉल के स्रोत के संबंध में अभी आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। सूचना मिलते ही पुलिस ने हाई कोर्ट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बम की धमकी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं। परिसर में संदिग्ध वस्तुओं और वाहनों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल धमकी देने वाले व्यक्ति और कॉल के स्रोत के संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। सुरक्षा के मद्देनजर हाई कोर्ट परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पहले भी कई सरकारी जगहों को मिल चुकी धमकी चंडीगढ़ में इससे पहले भी स्कूल, पासपोर्ट ऑफिस और हाईकोर्ट को कई बार बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। चंडीगढ़ जिला अदालत को भी बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है। इसके अलावा पंजाब सचिवालय और सेक्टर-43 बस स्टैंड को भी बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। इन सभी मामलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी, लेकिन जांच के दौरान वहां से कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी। कॉल के स्रोत की जांच जारी धमकी भरी कॉल मिलने के बाद पुलिस कॉल के स्रोत और धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे परिसर की जांच कर रही हैं और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।  

टाइगर टेरिटरी में खनन की मंजूरी, 2008 से एक भी कंजर्वेशन प्लान पास नहीं

जयपुर  राजस्थान के बाघ अभयारण्यों, कॉरिडोर और इको-सेंसिटिव जोन में खनन की मंजूरी के बीच वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था सवालों में है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, 2008 से अब तक चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन कार्यालय ने एक भी 'वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन प्लान' (डब्ल्यूसीपी) को अंतिम मंजूरी नहीं दी। इस वजह से वन्यजीव विकास, हैबिटेट सुधार और वाटर होल निर्माण के लिए करीब 300 करोड़ रुपए फाइलों में अटके हैं। पर्यावरण मंजूरी देने वाले राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) ने इस बारे में वन विभाग को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। दूसरी ओर, खदान मालिकों को एडवांस फंड जमा करने की बाध्यता से छूट दे दी गई। आदेश वापस लिया सिया ने 17 जुलाई 2025 को वन्यजीव संरक्षण मद की राशि अग्रिम जमा कराना अनिवार्य किया था और 3 नवंबर 2025 को नया कार्यालय आदेश (संख्या 1361) जारी कर यह आदेश वापस ले लिया। अब कंपनियों को सरकार को एडवांस पैसा नहीं देना है। उन्हें सिर्फ 'पर्यावरण प्रबंधन योजना' में लिखकर देना है कि वन्यजीवों के लिए बजट रखा गया है। प्रोजेक्ट को मंजूरी न मिलने पर कंपनी पर पैसा खर्च करने की बाध्यता नहीं रहती और कंपनियां इसी का फायदा उठाती हैं। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन केसी अरुण प्रसाद ने कहा, हम इन सभी कंजर्वेशन प्लान्स को रिवाइज कर रहे हैं। इनमें जरूरी संशोधन ला रहे हैं, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और व्यावहारिक बन सके। टाइगर टेरिटरी-इको-सेंसिटिव जोन में अनुमति जिला स्तरीय कमेटियों (डीईआईएए) ने शुरुआत में इको-सेंसिटिव जोन और टाइगर टेरिटरी के दायरे में 50 से 60 माइनिंग प्रोजेक्ट्स को खनन की अनुमति दे दी थी। सिया ने बाद में इन फाइलों की पुनर्समीक्षा की, तब यह चूक पकड़ में आई। सूत्रों के अनुसार, अब भी करीब 500 खदानें बिना उचित अनुमति के चल रही हैं। ग्राउंड स्टडी की जगह रेडीमेड रिपोर्ट राजस्थान में किसी भी खनन या प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी से पहले केंद्र के पोर्टल से टीओआर जारी होता है। इसकी अहम शर्त है कि प्रोजेक्ट के 10 किमी दायरे में वन्यजीवों का अध्ययन कराया जाए, जिसे संबंधित डीएफओ सत्यापित करता है। इसके बाद कंजर्वेशन प्लान बनता है, जिसे चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन से मंजूर कराना होता है। मंजूरी के बाद ही कंपनी को अधिकतम राशि जमा करनी होती है। अधिकांश मामलों में ग्राउंड रिपोर्ट के बजाय कंसल्टेंट से तैयार रिपोर्ट ली जाती है। कागजात के मुताबिक, फाइलें डीएफओ स्तर पर सत्यापन के लिए जाती हैं और वहीं अटक जाती हैं। मुख्यालय स्तर पर कोई फॉलो-अप नहीं होता। कुछ अधिकारियों के अनुसार, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कंपनियां अपने प्रभाव से काम जल्दी करा लेती हैं, जबकि छोटे खननकर्ताओं के प्लान पास नहीं होते।

जमुई छात्रा कांड पर बड़ा ऐलान, स्पीडी ट्रायल से 1 महीने में सजा

जमुई जमुई कांड की पीड़िता ने अपने माता-पिता और परिवार के लोगों के साथ गुरुवार को लोकसेवक आवास में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने लोक सेवक आवास में पीड़िता और उसके परिवार से बात की। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने उक्त घट की पूरी जानकारी ली और दुख व्यक्त किया और परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा जताया। साथ ही दोषियों को जल्द कानूनी दंड दिलाने का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि जमुई में छात्रा के साथ हुई घटना के मामले में दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सुनवाई करा एक माह में सजा दिलाई जायेगी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पीड़िता के माता-पिता ने पत्रकारों से बातचीत में सरकार की कार्रवाई पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया लेकिन, सरकार और प्रशासन ने काफी तेजी से कार्रवाई की। जिन लोगों ने बेटी को प्रताड़ित किया उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है। मुख्य आरोपी नंदन यादव के एनकाउंटर पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी मिली तो खुशी मिली कि बदमाशों को सीख मिलेगी जो बेटियों पर बुरी नजर रखते हैं। किसी की बेटी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। कार्रवाई होने के बाद अब डर नहीं लगता है। सीएम बुलाए थे। उनसे मिलकर काफी अच्छा लगा। सीएम ने मेरी बेटी को अपनी बेटी कहा पीड़िता की मां ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मेरी बेटी को अपनी बेटी कहा। उन्होंने बिना डर भय के पढ़ाई करने और आगे बढ़ने की सीख दी है। इससे बेटी का मनोबल बढ़ा और वह पहले से ठीक हुई। परिजनों को सीएम ने आश्वासन दिया है कि कोई भी दिक्कत होगी तो सरकार उनके साथ है। बच्ची के पिता ने कहा कि जो भी आरोपी गिरफ्तार हुए हैं उन्हें कठोर सजा मिलना चाहिए। मामला सामने आने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की जिससे कानून व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। सीएम पर विश्वास करें परिजनों ने यह भी कहा कि सरकार सबकी सुनती है और कार्रवाई करती है। सम्राट चौधरी ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो गलत करने वालों को सजा देते हैं। आमजनों को भी उनपर भरोसा करना चाहिए। वे सबकी बात अच्छे से सुनते हैं और समाधान करते हैं। 225 आईडी पर केस दर्ज जमुई छात्रा से छेड़खानी मामले में कुल 225 सोशल मीडिया आईडी पर भी मामला दर्ज किया है। साथ ही तीन लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। जमुई के एसपी और डीएम ने कहा कि स्पीडी ट्रायल के लिए कोर्ट से समन्वय करने को एसडीपीओ और डीडीसी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इस केस में स्पीडी ट्रायल से सजा दिलाने की बात जमुई डीएम नवीन ने कही है। इसके लिए एक महिला आईएएस और महिला आईपीएस को जिम्मा दिया गया है कि कोर्ट से आग्रह करके 15 से 20 दिनों में सजा दिलाने का प्रयास करें।

अब लखनऊ में कट्टा-बम नहीं, बनेंगी ब्रह्मोस मिसाइल: CM योगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि पिछली सरकारों की तरह अब लखनऊ में कट्टा और बम नहीं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। एयरपोर्ट और मेट्रो का विस्तार हो रहा है तथा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर लखनऊ को नई पहचान दे रहा है। दो नई योजनाओं से 10 लाख लोगों को घर की सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा एक्सप्रेसवे के पास दोना गांव में 12 हजार करोड़ से 10,680 एकड़ में विकसित होने वाली लखनऊ विकास प्राधिकरण की वरुण विहार और नैमिष नगर आवासीय योजनाओं का भूमिपूजन करने के साथ भूखंडों के पंजीकरण का शुभारंभ किया। उन्होंने 2,166 करोड़ से प्रस्तावित पांच बहुमंजिला अपार्टमेंट का भी शिलान्यास किया। योजनाओं का लेआउट देखकर अधिकारियों को कई सुझाव दिए। अनियोजित विकास के परिणाम गलत मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियोजित विकास के परिणाम गलत होते हैं। लोग जहां-तहां जमीन खरीद लेते थे, पर वहां सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होती थी। जलभराव से लोगों को नारकीय जीवन व्यतीत करना पड़ता था। जमीन किसी दबंग या गुंडे को बेच दिए जाने पर नई समस्या खड़ी हो जाती थी। इसलिए बढ़ती आबादी के लिए नियोजित शहरी विकास आवश्यक है। गत वर्ष 785 एकड़ में अनंत नगर आवासीय परियोजना को 23 वर्ष बाद आगे बढ़ाया गया। अब दो बड़ी परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। किसान पथ, ग्रीन कॉरिडोर दे रहे नई पहचान योगी ने कहा कि लखनऊ शिक्षा, हेल्थ केयर, आधुनिक तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग के हब के रूप में आगे बढ़ा है। टाटा की ऑटोमोबाइल फैक्टरी, अशोक लीलैंड का इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, किसान पथ, ग्रीन कॉरिडोर और आईटी सिटी इसे नई पहचान दे रहे हैं। विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक मोबिलिटी, शिक्षा, पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी पर काम होगा। एससीआर से होगा छह जिलों का विकास सीएम ने कहा कि वरुण विहार 6,500 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित होगा, जहां छह लाख से अधिक लोगों के लिए आवासीय सुविधा होगी। नैमिष नगर 4,100 एकड़ में विकसित होगा और चार लाख से अधिक लोग इसका लाभ ले सकेंगे। लखनऊ को महानगर या जनपद तक सीमित न रख कर स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में व्यवस्थित विकास किया जा रहा है। लखनऊ के साथ उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी व रायबरेली के क्षेत्रीय विकास की योजना बन रही है। वरुण देव-ऋषि की प्रतिमा लगेगी महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं वरुण विहार और नैमिष नगर को उनकी विशिष्ट पहचान देने की तैयारी भी शुरू हो गई है। गुरुवार को आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान दोनों योजनाओं के लिए तैयार कराई गई विशेष प्रतिमाएं कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित की गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनका अवलोकन किया और योजनाओं की अवधारणा से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। वरुण विहार योजना में जल और जीवन के प्रतीक माने जाने वाले वरुण देव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जबकि नैमिष नगर योजना के प्रवेश द्वार पर ऋषि की प्रतिमा लगाई जाएगी। इन प्रतिमाओं के माध्यम से दोनों योजनाओं की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को प्रमुखता से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल प्रतिमाओं को कार्यक्रम स्थल पर अस्थायी रूप से रखा गया था ताकि आगंतुक अवलोकन कर सकें। भूमिपूजन में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे आवासीय योजनाओं के भूमिपूजन कार्यक्रम में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि पहले किसी आवासीय योजना को लाने में 20 साल तक लग जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब एक साल भी नहीं लगता और नई योजनाएं सामने आ जाती हैं। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने सीएम को योजनाओं की जानकारी दी। अदिति अपार्टमेंट में सबसे ज्यादा 1932 फ्लैट होंगे पांचों योजनाओं में सबसे अधिक फ्लैट अनंत नगर में प्रस्तावित अदिति अपार्टमेंट में 1932 प्रस्तावित हैं। गोमती नगर के विराज खंड में लेक व्यू अपार्टमेंट में 646 फ्लैट बनेंगे। शारदा नगर विस्तार में बागेश्वरी अपार्टमेंट में 824, ऐशबाग स्क्वायर में 384 फ्लैट, बसंत कुंज स्थित पार्क व्यू अपार्टमेंट में 364 फ्लैट प्रस्तावित हैं। एक माह तक खुला रहेगा भूखंडों का पंजीकरण दोनों योजनाओं में पंजीकरण 24 अक्तूबर तक खुला रहेगा। इच्छुक लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विभिन्न आकार के भूखंडों के लिए आवेदन कर सकेंगे। नैमिष नगर में 72 वर्गमीटर से 450 वर्गमीटर तक तथा वरुण विहार में 112.5 वर्गमीटर से 450 वर्गमीटर तक के भूखंड उपलब्ध हैं। भूमि पूजन के साथ ही पंजीकरण शुरू होने से लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। 14 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजना का शुभारंभ टाउनशिप और अपार्टमेंट परियोजनाओं को मिलाकर कुल 14,166 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ, जिन्हें राजधानी के साथ प्रदेश भर के लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमन्त्री के शुभारम्भ करने के साथ दोनों टाउनशिप में 4526 भूखंडों के लिए पंजीकरण शुरू हो गया। नैमिष नगर और वरुण विहार परियोजनाएं करीब 10,680 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही हैं। इनके विकास पर लगभग 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। राजधानी विकास का प्रमुख केंद्र बनेंगी योजनाएं एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के अनुसार दोनों परियोजनाएं आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ विकसित की जा रही हैं और भविष्य में राजधानी के विस्तार का प्रमुख केंद्र बनेंगी। मुख्यमंत्री के भूमि पूजन के साथ ही दोनों योजनाओं में भूखंडों के लिए पंजीकरण भी शुरू कर दिया गया। वरुण विहार में 2,847 तथा नैमिष नगर में 1,679 भूखंडों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस प्रकार कुल 4,526 भूखंडों के लिए पंजीकरण खोला गया है। वरुण विहार में 2800 और नैमिष नगर में 3800 रुपए प्रतिवर्ग फुट की दर से प्लॉट मिलेगा। कनेक्टिविटी पर सबसे ज्यादा जोर दोनों योजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी कनेक्टिविटी मानी जा रही है। नैमिष नगर सीतापुर रोड पर भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के निकट स्थित है। एलडीए वरुण विहार को सीधे आगरा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए यूपीडा को पत्र भेजा जा चुका है। भविष्य के सुनियोजित विस्तार की आधारशिला हैं आवासीय योजनाएं सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनके विधानसभा क्षेत्र में 5,700 कार्य और 48 हजार करोड़ के कार्य धरातल पर उतर रहे हैं। वरुण विहार और नैमिष नगर लखनऊ के भविष्य के सुनियोजित … Read more

छत्तीसगढ़ के गांव बने विदेशी पर्यटकों की पसंद, ग्रामीण पर्यटन मॉडल दे रहा नई पहचान

विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन के अतिथियों ने ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और हाट-बाजार का लिया अनुभव लमना में दिखी संस्कृति और अपनत्व की खूबसूरत तस्वीर रायपुर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवनशैली, लोक संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है। पर्यटन के बदलते स्वरूप में अब पर्यटक केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गांवों की मिट्टी की खुशबू, स्थानीय खान-पान, परंपराओं, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन से पहुंचे पर्यटकों का प्रवास इसी बदलती पर्यटन तस्वीर की जीवंत मिसाल है। ब्रिटेन से आए श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन का लमना गांव पहुंचने पर ग्रामीणो ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ तिलक लगाकर तथा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच स्वागत किया। विदेशी अतिथियों ने भी ग्रामीणों के इस आत्मीय स्वागत का आनंद लिया और स्थानीय लोगों के साथ सहजता से घुल-मिलकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस किया। लमना विलेज स्टे में अतिथियों का  अनुभव केवल ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों, पारंपरिक परिवेश और स्थानीय जीवन से परिचित कराने के लिए ‘विलेज वॉक’ कराया गया। इस दौरान अतिथियों ने ग्रामीणों से संवाद किया, स्थानीय जीवनशैली को समझा और गांव के सहज वातावरण का आनंद लिया।  अतिथियों ने ग्रामीण परिवारों, बच्चों, महिलाओं और स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद भी किया।  ग्रामीण हाट बना खास आकर्षण लमना प्रवास के दौरान स्थानीय ग्रामीण हाट का भ्रमण विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हाट में उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्थानीय खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों को करीब से देखा। ग्रामीण बाजार की चहल-पहल, स्थानीय उत्पादों की विविधता और लोगों के सहज व्यवहार ने अतिथियों को भारतीय गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव कराया।   ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ने का अनुभव लमना विलेज स्टे की खासियत यह है कि यहां पर्यटक केवल किसी स्थान को देखने नहीं आते, बल्कि स्थानीय जीवन का हिस्सा बनकर उसे महसूस करते हैं। ब्रिटिश अतिथियों ने ग्रामीण परिवेश में समय बिताया, स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की और पारंपरिक ग्रामीण वातावरण को नजदीक से जाना। गांव की सादगी, प्राकृतिक परिवेश और लोगों की सहज आत्मीयता ने उनके प्रवास को एक अलग तरह का अनुभव दिया। छत्तीसगढ़ के पर्यटन पहचान में जुड़ रहा नया अध्याय छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब प्रकृति और दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर अनुभव आधारित पर्यटन की ओर विस्तार कर रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को जोड़ने वाले पर्यटन मॉडल को महत्व मिल रहा है।  प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का संगम है लमना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मैकल पर्वत श्रृंखला, जंगल, जलप्रपात, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन की विविध संभावनाएं मौजूद हैं। शिवघाट मनौरा, जलेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोजा जलप्रपात और धनपुर सहित अनेक प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल शामिल हैं।  लमना विलेज स्टे जैसे ग्रामीण पर्यटन केंद्र पर्यटकों को  प्रकृति और स्थानीय जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर से लमना तक—छत्तीसगढ़ में अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती तस्वीर पर्यटक अब केवल पर्यटन स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जीवन, खान-पान, हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और समुदाय के साथ जुड़ने वाले अनुभवों को भी महत्व दे रहे हैं। होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के पर्यटकों का अनुभव इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। यहां विदेशी मेहमानों ने किसी पर्यटन स्थल को दूर से देखने के बजाय गांव के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की, ग्रामीण हाट में स्थानीय गतिविधियों को समझा और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन की सहजता को महसूस किया। विदेशी मेहमानों के लिए यादगार बना छत्तीसगढ़ का अपनापन लमना प्रवास के दौरान श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ग्रामीणों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बच्चों से बातचीत करते और स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताते नजर आए।  वे ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ आत्मीयता से मिले ।  विदेशी पर्यटकों का गांवों तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं अब नए क्षेत्रों और नए अनुभवों तक विस्तार पा रही हैं। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय परिवारों, छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्पकारों, ग्रामीण बाजारों, स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए आय एवं रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के मेहमानों की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के उस पर्यटन मॉडल की खूबसूरत झलक है, जहां प्रकृति के साथ संस्कृति, गांव के साथ आतिथ्य और पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। छत्तीसगढ़ की यही सहज, आत्मीय और जीवंत पहचान देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

महिलाओं ने संवारा हरित अभियान, 2170 पौधों की होगी जियो-ट्रैकिंग

महिलाओं ने संवारा हरित अभियान, 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से होगी निगरानी -निवी ट्रंचिंग ग्राउंड और देवरी गौशाला में लगाए गए पौधों की लोकेशन होगी दर्ज, जीवित पौधों की स्थिति भी सामने आएगी मुरैना  शहर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से अमृत हरित महा अभियान एवं वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग की जाएगी। नगर निगम द्वारा लगाए गए पौधों को अमृत मित्र पोर्टल के माध्यम से जियो टैग किया जाएगा। इससे पौधों की वास्तविक लोकेशन दर्ज होने के साथ उनकी स्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी गई है। नगर निगम क्षेत्र में वूमेन फॉर ट्री अभियान के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को कुल 2170 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करते हुए निवी ट्रंचिंग ग्राउंड में 1070 और देवरी गौशाला में 1000 पौधे लगाए हैं। पौधरोपण के बाद अब नगर निगम प्रशासन इनकी निगरानी और संरक्षण पर जोर दे रहा है। तीन माह बाद होगी स्थिति की निगरानी नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र धाकरे ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार लगाए गए पौधों की जियो ट्रैकिंग किया जाना अनिवार्य है। लगाए गए पौधे करीब तीन माह पुराने हो चुके हैं। ऐसे में इनकी जियो ट्रैकिंग कर लोकेशन दर्ज की जा रही है। इससे भविष्य में यह पता लगाने में आसानी होगी कि पौधरोपण वाले स्थान पर कितने पौधे मौजूद हैं और कितने पौधे जीवित हैं। महिलाओं के जिम्मे पौधों की देखभाल अभियान के तहत केवल पौधे लगाने तक ही जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पौधों की देखभाल का जिम्मा भी स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। महिलाओं द्वारा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है। नगर निगम का उद्देश्य पौधरोपण के साथ इन पौधों को संरक्षित कर उन्हें पेड़ के रूप में विकसित करना है।  जियो ट्रैकिंग से सामने आएगी वास्तविक स्थिति जियो ट्रैकिंग के बाद प्रत्येक पौधे की लोकेशन डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी। आगे पौधों के बड़े होने के बाद उनकी स्थिति की दोबारा निगरानी की जाएगी। इससे पौधरोपण अभियान के परिणामों का आकलन करने और पौधों के जीवित रहने की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।