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नगरी महाविद्यालय में युवाओं को मिला जागरूकता संदेश, 1098 हेल्पलाइन की दी जानकारी

धमतरी में 'सेवा संकल्प अभियान'  नगरी महाविद्यालय के युवाओं को दी गई बाल अधिकारों, साइबर सुरक्षा व '1098' हेल्पलाइन की जानकारी ​रायपुर        ​सेवा संकल्प अभियान के तहत शासकीय सुखराम नागे महाविद्यालय, नगरी में बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन के संयुक्त तत्वावधान में जिला प्रशासन के निर्देश पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।        ​कार्यक्रम में परियोजना समन्वयक ने विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और उनसे संबंधित कानूनों की सरल एवं व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को साइबर अपराध, बाल शोषण, लैंगिक हिंसा, बाल श्रम, बाल विवाह और मानव तस्करी जैसे गंभीर विषयों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। डिजिटल सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने सलाह दी कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दूरी बनाएं और अपनी व्यक्तिगत जानकारी या दस्तावेज किसी के साथ साझा न करें।         ​इसके साथ ही विद्यार्थियों को बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बने प्रमुख कानूनों, जैसे पॉक्सो (POCSO) एक्ट 2012, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के मुख्य प्रावधानों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में 24 घंटे संचालित निःशुल्क आपातकालीन चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और आपातकालीन सेवा 112 की भूमिका को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे किसी भी प्रकार के शोषण या हिंसा को देखकर चुप न रहें, बल्कि तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।         ​इस अवसर पर नशे के दुष्प्रभावों और शासकीय बाल देखरेख संस्थाओं के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम में चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर, जिला महिला संरक्षण अधिकारी,मिशन शक्ति समन्वयक,महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ BJP संगठन में फेरबदल, कर्मवीर को मिली संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को राष्ट्रीय सह महामंत्री और प्रदेश महामंत्री की नियुक्ति की है. शिवप्रकाश को आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के साथ छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन) और कर्मवारी को छत्तीसगढ़ प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया है. इसके साथ ही पार्टी ने छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल रहे राष्ट्रीय सह महामंत्री अजय जामवाल को महाराष्ट्र का प्रदेश महामंत्री (संगठन) और छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय संगठन महामंत्री पवन साय को झारखंड की जिम्मेदारी सौंपी है. इनके अलावा मधुकर को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, पवन राणा को दिल्ली एवं हरियाणा तथा चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश का प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया है. सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी. कर्मवीर का अब तक का सफर बात करें प्रदेश महामंत्री नियुक्त कर्मवीर मूलतः उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला के रहने वाले ने 1993 से संघ के प्रचारक जीवन का प्रारंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म स्थली से किया था. तहसील प्रचारक, नगर प्रचारक रहे. इसके साथ उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सिकरी (आगरा) व अलीगढ़ महानगर प्रचारक एवं मथुरा जिला के जिला प्रचारक रहे. इसके बाद उत्तर प्रदेश के एटा, अलीगढ़ व बरेली विभाग के विभाग प्रचारक रहे. 2015 में मेरठ प्रांत (पश्चिम उत्तर प्रदेश) के सह प्रांत प्रचारक बने. 2019 में ब्रज प्रांत के सह प्रांत प्रचारक के रूप में कार्य किया. 2020 से भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश के प्रदेश सह महामंत्री (संगठन) के रूप में कार्य किया. अगस्त 2022 से झारखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री (संगठन) के रूप में कार्य कर रहे थे.

अखिलेश यादव को M से केवल एक वर्ग दिखता है, मल्लाह नहीं दिखता: संजय निषाद

अखिलेश मल्लाह समाज के बेटे को विधान परिषद का नेता बनाते तो वह निषाद समाज की आवाज उठाता: मंत्री संजय निषाद अखिलेश यादव को M से केवल एक वर्ग दिखता है, मल्लाह नहीं दिखता: संजय निषाद समाजवादी पार्टी के मंच से धकिया दिए जाते हैं पिछड़ा समाज के नेता: अखिलेश पर बरसे संजय निषाद सपा को सहयोगी के रूप में केवल दल दिखते हैं, लेकिन उनके दिल में जगह नहीं: संजय निषाद  लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने सपा प्रमख अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर तीखा निशाना साधा है। संजय निषाद ने कहा है कि सपा का पीडीए फॉर्मूला एक ढकोसला है। सपा अपने परंपरागत मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण में से केवल M को फायदा पहुंचा रही है। दरअसल एक दिन पहले ही समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद में अपना नेता मोहम्मद जासमीर अंसारी को बनाया है। निषाद ने सपा पर पिछड़ा समाज के अपमान का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा के मंच से निषाद समाज और राजभर समाज के नेता धकिया दिए जाते हैं। किसी अन्य जाति के नेताओं का फोटो, पोस्टर और विजन नहीं दिखता है। महाभारत में अर्जुन के रथ में सभी घोड़ों को बराबर जगह दी गई थी, तब ही जाकर अर्जुन को जीत मिल पाई थी। अखिलेश यादव को तो केवल M दिखाई देते हैं, मल्लाह नहीं दिखाई देते हैं। अगर मल्लाह के बेटे को विधान परिषद का नेता बनाया होता तो वह निषाद समाज के लोगों की आवाज उठाता।  ‘जो पीड़ित है, वही पीडीए है’ फॉर्मूले पर भड़के संजय   अखिलेश यादव ने नारा दिया है कि जो पीड़ित है, वही पीडीए है। इस पर संजय निषाद ने कहा कि पीड़ित, दुखी, अपमानित सभी लोग एनडीए के साथ हैं। समाजवादी पार्टी केवल पीडीए समाज को ठगना चाहती है। निषाद ने कहा कि 07 जून 2015 को रेल आंदोलन हुआ था उसमें निषादों पर गोली सपा सरकार ने चलवाई थी। रेलवे की भूमि केंद्र सरकार से संबंधित थी, उसमें राज्य सरकार को गोली चलवानी ही नहीं चाहिए थी। लेकिन निषादों पर गोली चली, मेरा भाई मारा गया। निषादों पर बहुत अत्याचार हुआ।  निषाद-कश्यप एकता मंच का किया जिक्र संजय निषाद ने कहा कि मनोहर लाल निषाद और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने निषाद-कश्यप एकता मंच बनाया था। मनोहर जी के बेटे राम कुमार जी हैं। कहां हैं, कोई पता ही नहीं चलता है। कहीं नेपथ्य में चले गए। सपा को केवल दल दिखते हैं लेकिन उनके दिल में जगह नहीं है। समाजवादी पार्टी में पिछड़ा समाज केवल दरी बिछाने के लिए है।

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: लक्ष्मी राजवाड़े

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ -लक्ष्मी राजवाड़े  मंत्री, महिला एवं बाल विकास, छत्तीसगढ़ शासन     रायपुर  विकास का अर्थ केवल नई सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब एक महिला अपने भविष्य के निर्णय आत्मविश्वास से ले सके, एक मां को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता में सहयोग मिले और हर बच्चे को पोषण, शिक्षा तथा सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का अवसर है।     प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ उन परिवारों तक भी पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। महिलाओं का आत्मविश्वास ही समाज की शक्ति     छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। आज वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से उद्यमिता तथा सामाजिक नेतृत्व में भी नई पहचान बना रही हैं। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार के खर्च से जुड़े निर्णय लेने में संबल दिया है। किसी ने इस राशि से बचत शुरू की है, तो किसी ने इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बनाया है।     स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल और उद्यम से जुड़ रही हैं। हमारा प्रयास है कि उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने के अवसर भी मिलें। जब महिला आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है। आँगनवाड़ी से जुड़ें परिवार और समुदाय     एक स्वस्थ और सक्षम समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आँगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं को आवश्यक जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन केंद्रों की सफलता में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों के साथ परिवार और समुदाय का सहयोग भी जरूरी है। ‘हमारी आँगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ इसी साझा दायित्व की भावना को व्यक्त करता है।     25 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आँगन मिलन’’ इस भागीदारी को और मजबूत करेगा। इस दौरान अभिभावकों और समुदाय के लोगों को आँगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ने, बच्चों के भोजन और स्वच्छता की व्यवस्था को समझने तथा पोषण पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। घर में बच्चों को क्या खिलाया जाए, भोजन में विविधता कैसे लाई जाए और स्वच्छता की अच्छी आदतें कैसे विकसित हों-इन विषयों पर संवाद पोषण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाएगा।          पोषण केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। बच्चे को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार मिले, उसकी वृद्धि पर ध्यान दिया जाए और परिवार उसकी देखभाल में सक्रिय रहे-यह हम सबकी जिम्मेदारी है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सोच को हर घर तक ले जाने का आह्वान है। सुरक्षित बचपन के लिए साझा संकल्प     हर बच्चे को भय और शोषण से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना केवल कानून के भरोसे नहीं किया जा सकता। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आँगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर सजग रहना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर समय से सहायता पहुंचाना सुरक्षित बचपन की दिशा में आवश्यक कदम हैं।     सेवा संकल्प अभियान हमें याद दिलाता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण संबंधी सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिलना-यही इस अभियान की सार्थक उपलब्धियां होंगी।     आइए, ‘आँगन मिलन’ से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को निरंतर बनाए रखें। जब परिवार, समुदाय और शासन साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित, सुरक्षित बचपन के संकल्प से विकसित छत्तीसगढ़ का आधार मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का आगाज, MP में आज से शुरू होगी नई सुविधा

मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू होगी. 15 हजार बसों, PPP मॉडल, GPS-CCTV, डिजिटल ट्रैकिंग और EV-CNG बसों की योजना है।  भोपाल  मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया है कि आने वाली तारीख 25 सितंबर से 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' शुरू की जाएगी. करीब दो दशक बाद प्रदेश में राज्य परिवहन व्यवस्था को नए मॉडल के साथ फिर से खड़ा करने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज 25 सितंबर को बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत सावर्जनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शुरू होने वाली इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अंतर्गत सड़कों पर दौड़ने वाली बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। इसके लिए बस चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों से परिचित कराने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नई तकनीक वाली बसों का सुरक्षित और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पैनिक बटन और जीपीएस से बढ़ेगी सुरक्षा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस की सुविधा रहेगी। जीपीएस के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करेगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट-2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों को सरल, सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बस सेवा उपलब्ध कराना है. सरकार की योजना में भविष्य में प्रदेश में करीब 15 हजार बसों के संचालन की क्षमता विकसित करने की बात कही गई है।  20 साल बाद नई व्यवस्था के साथ बस सेवा की वापसी 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट का प्लान परिवहन सचिव मनीष सिंह के मुताबिक, प्रदेश के सभी 55 जिलों में रूट सर्वे किया जा चुका है. डेटा के आधार पर करीब 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट विकसित किए जाने की योजना है।  बसों में CCTV, GPS, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा होगी. साथ ही EV और CNG बसों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।  सरकार की व्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे      PPP मॉडल के तहत बस संचालन     Intelligent Transport Management System (ITMS)     आधुनिक बस टर्मिनल, बस स्टैंड, डिपो और बस स्टॉप का विकास सरकार का लक्ष्य है कि यात्रियों को 'सही बस, सही मार्ग और सही समय' के आधार पर भरोसेमंद परिवहन सेवा मिल सके।  भोपाल-इंदौर में Rapido के साथ पायलट प्रोजेक्ट समिट के दौरान MPYPIL और Rapido के बीच फर्स्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एमओयू भी हुआ. इसके तहत बस स्टैंड, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशन जैसी परिवहन सुविधाओं की जानकारी Rapido के तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ी जाएगी।  महिलाओं की संचालित Rapido Pink बाइक-टैक्सी सेवा को भी बढ़ावा देने की योजना है. शुरुआती चरण में यह व्यवस्था भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू की जाएगी।  15 हजार बसों के साथ रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में करीब 5 लाख किमी का सड़क नेटवर्क है और यहां 15 हजार से अधिक बसें चलाने की संभावना है. प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करना सरकार के लिए चुनौती के साथ बड़ा अवसर भी है. उन्होंने निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माता कंपनियों, इंडस्ट्री पार्टनर्स और अन्य हितधारकों से मध्यप्रदेश की इस विकास यात्रा में भागीदार बनने की अपील की।  मुख्यमंत्री के मुताबिक नई बस सेवा से यात्रियों के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।  ई-बस और ग्रीन मोबिलिटी पर जोर नई परिवहन व्यवस्था में पर्यावरण-अनुकूल तकनीक को भी प्राथमिकता दी जा रही है. इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि PPP मॉडल पर तैयार होने वाला क्लीन और सेफ बस सिस्टम गांवों को शहरों से जोड़ेगा।  वहीं, एका मोबिलिटी के अध्यक्ष सुधीर मेहता ने बताया कि कंपनी पीथमपुर में अपना इलेक्ट्रिक बस निर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है. इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 हजार ई-बसों की बताई गई है।  MP Mobility Innovation Challenge भी लॉन्च समिट में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने MP Mobility Innovation Challenge 2026 की भी शुरुआत की. इसका उद्देश्य प्रदेश की वास्तविक परिवहन समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीक और इनोवेशन तलाशना है।  चैलेंज में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस रहेगा     AI और डेटा आधारित इंटेलिजेंट मोबिलिटी     वित्तीय और परिचालन स्थिरता     समावेशी मोबिलिटी     इंफ्रास्ट्रक्चर और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी     ग्रीन मोबिलिटी इस पहल के जरिए स्टार्टअप, MSME, शोधकर्ता, शैक्षणिक संस्थान और नवप्रवर्तक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में भाग ले सकेंगे।  25 सितंबर को मिलेगा ‘प्रदेश की अपनी बस सेवा’ का तोहफा मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू होगा और 25 सितंबर को प्रदेशवासियों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए ‘प्रदेश की अपनी बस सेवा’ की सौगात मिलेगी।  इस योजना के जरिए सरकार सार्वजनिक परिवहन को सिर्फ बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे डिजिटल, सुरक्षित, तकनीक-सक्षम, पर्यावरण-अनुकूल और यात्री-केंद्रित व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।  7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 … Read more

मत्स्य पालन से संवरी गांधीराम की ज़िंदगी

सेवा_ संकल्प_ अभियान मत्स्य पालन से संवरी गांधीराम की ज़िंदगी  0.20 हेक्टेयर के तालाब से सालाना 100 क्विंटल उत्पादन, 8 लाख तक मुनाफा ​रायपुर,         कहते हैं कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग हो, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है जिले के ग्राम बरदूला निवासी श्री गांधीराम अजगल्ले ने। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन-यापन करने वाले गांधीराम के लिए आज मछली पालन केवल आजीविका का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की किस्मत बदलने वाला एक मजबूत जरिया बन चुका है।     प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने दिखाया नया रास्ता        गांधीराम की जिंदगी में यह सकारात्मक मोड़ 'प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना' के तहत आया। उन्होंने अपनी खुद की जमीन पर 0.20 हेक्टेयर जलक्षेत्र में 'तालाब लाइनर' का निर्माण कराया। 16.80 लाख रुपए की कुल लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें सरकार की ओर से 4 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। योजना से मिली इस शुरुआती मदद ने उन्हें स्वावलंबन का नया मार्ग दिखाया। ​उत्पादन और आय का नया कीर्तिमान         तालाब तैयार होने के बाद गांधीराम ने पूरे लगन और नियमित प्रबंधन के साथ मत्स्य पालन की शुरुआत की। आज परिणाम यह है कि मात्र 0.20 हेक्टेयर के इस छोटे से जलक्षेत्र से वे प्रतिवर्ष औसतन 100 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार में बिक्री के बाद तमाम खर्चे निकालकर उन्हें सालाना 5 से 8 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। ​आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर          योजना का लाभ मिलने से पहले गांधीराम का जीवन काफी संघर्षमय था। परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने मत्स्य पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया। आज इस व्यवसाय से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनका भविष्य भी सुरक्षित हो चुका है।श्री गांधीराम अजगल्ले ने कहा कि योजना से मिले सरकारी सहयोग ने मेरे लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया। अब परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और आर्थिक रूप से एक बेहतर आधार तैयार हुआ है। ​सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई 'बदलाव की कहानी'       राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ऐसी ही वास्तविक बदलाव की कहानियों को सामने लाया जा रहा है, जो यह दर्शाती हैं कि शासकीय योजनाएं किस प्रकार आम नागरिक के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। गांधीराम अजगल्ले की यह सफलता की कहानी प्रदेश के उन तमाम युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं।

रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, किसान चंद्रशेखर को नहीं लगाने पड़े दफ्तर के चक्कर

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, किसान चंद्रशेखर को नहीं लगाने पड़े दफ्तर के चक्कर ऑटोम्यूटेशन से संपत्ति पंजीयन के साथ आगे बढ़ी नामांतरण प्रक्रिया, समय और दौड़भाग से मिली राहत तकनीक से आसान हो रही पंजीयन सेवाएं, ऑनलाइन भुगतान से आधार प्रमाणीकरण तक बढ़ी सुविधा और पारदर्शिता रायपुर संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद यदि नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, तो नागरिकों के लिए पूरी प्रक्रिया कितनी सहज हो सकती है, इसका अनुभव किसान श्री चंद्रशेखर निषाद ने किया। संपत्ति का पंजीयन कराने के साथ ही ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। इससे न केवल उनका समय बचा, बल्कि अलग से कार्यालय जाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस बदलाव का अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया में नागरिकों का समय बचाने के साथ अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव और उनके अनुभवों को भी जान रहा है। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण ने बचाया समय श्री चंद्रशेखर निषाद ने बताया कि पहले संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण के लिए अलग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी और इसमें समय भी लगता था। इस बार ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। श्री निषाद ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेरा नामांतरण तुरंत हो गया। इससे मेरे समय की बहुत बचत हुई और मुझे अलग से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।” ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था में संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से आवेदन और कार्यालयों में जाकर प्रक्रिया पूरी कराने की आवश्यकता कम हुई है। किसानों और आम नागरिकों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। आधार प्रमाणीकरण से पहचान सत्यापन हुआ मजबूत पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग केवल नामांतरण तक सीमित नहीं है। पक्षकारों की पहचान के सत्यापन को अधिक मजबूत बनाने के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा भी अपनाई गई है। इसके माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान सत्यापित करने में मदद मिलती है, जिससे गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका को कम करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायता मिल रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं ने पंजीयन प्रक्रिया को और सहज बनाया है। नागरिक पंजीयन शुल्क का भुगतान नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से कर सकते हैं। तकनीक ने घटाई प्रक्रिया, नागरिकों को मिली सहूलियत श्री चंद्रशेखर निषाद की कहानी बताती है कि पंजीयन व्यवस्था में तकनीक आधारित सुधारों का लाभ केवल रजिस्ट्री तक नहीं, बल्कि उससे जुड़ी आगे की प्रक्रियाओं में भी नागरिकों को मिल रहा है। ऑटोम्यूटेशन से नामांतरण की प्रक्रिया सहज होने से समय और अनावश्यक दौड़भाग दोनों कम हुए हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान सामने आया उनका अनुभव नागरिक सेवाओं में तकनीक के उपयोग से आ रहे बदलाव की एक तस्वीर पेश करता है। रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने की पहल से संपत्ति पंजीयन का अनुभव अधिक सरल और सुविधाजनक बन रहा है।

राजस्थान स्कूल टाइमिंग: 16 अक्टूबर से समय बदलने की मांग, शिक्षा विभाग के फैसले पर नजर

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में एक अक्टूबर 2026 से शीतकालीन समय लागू होना प्रस्तावित है। इसके तहत एक पारी में संचालित विद्यालयों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाना है। वहीं, वर्तमान में एक पारी वाले स्कूलों का संचालन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जा रहा है। हालांकि, समय परिवर्तन की तारीख नजदीक आने से पहले ही शिक्षक संगठनों ने इसे आगे बढ़ाने की मांग उठानी शुरू कर दी है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), राजस्थान ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि एक अक्टूबर के बजाय 16 अक्टूबर 2026 से विद्यालयों का समय बदला जाए। महासंघ का कहना है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का असर बना रहता है। ऐसे में सुबह के समय स्कूल शुरू करने की बजाय दोपहर तक चलने वाला वर्तमान समय विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है। छोटे बच्चों और ग्रामीण विद्यार्थियों का हवाला महासंघ ने अपनी मांग के पीछे विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रमुख आधार बनाया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि एक अक्टूबर से स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते हैं तो प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चों को दोपहर बाद घर लौटना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए भी गर्म मौसम में यह व्यवस्था परेशानी पैदा कर सकती है। पहले भी बदली जा चुकी है समय परिवर्तन की तारीख राजस्थान में एक अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू करने की व्यवस्था शिविरा पंचांग में निर्धारित रही है। सामान्य तौर पर एक पारी वाले स्कूलों का समय इस अवधि में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहता है। हालांकि, पिछले वर्षों में अक्टूबर की शुरुआत में तापमान अधिक रहने के कारण समय परिवर्तन की तारीख आगे बढ़ाई गई थी। वर्ष 2024 में भी गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मकालीन समय 15 अक्टूबर तक बढ़ाया गया और 16 अक्टूबर से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक शीतकालीन समय लागू किया गया था। अब शिक्षा विभाग के फैसले पर नजर इस बार भी मौसम को देखते हुए शिक्षक संगठनों ने समय परिवर्तन की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में एक अक्टूबर से समय परिवर्तन का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में अब निगाहें शिक्षा विभाग के अगले आदेश पर हैं। यदि विभाग शिक्षक संगठनों की मांग पर विचार करता है तो स्कूलों का वर्तमान प्रातःकालीन समय अक्टूबर के मध्य तक जारी रह सकता है। वहीं, यदि कोई संशोधित आदेश जारी नहीं होता है तो निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एक अक्टूबर से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक हो जाएगा। पिछले चार वर्षों में से तीन बार 16 अक्टूबर से बदला था स्कूल टाइमिंग पिछले चार वर्षों यानी 2022 से 2025 तक राजस्थान में स्कूलों के समय में अक्टूबर के दौरान बदलाव की स्थिति देखें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है। सामान्य व्यवस्था के अनुसार 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू होता है और एक पारी के स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते हैं। लेकिन 2022, 2023 और 2024 में गर्मी के कारण समय परिवर्तन को आगे बढ़ाया गया था। 2025 के शिविरा पंचांग में 1 अक्टूबर से ही स्कूलों का समय बदला गया। 2022 में 1 अक्टूबर का बदलाव टला, 16 अक्टूबर से लागू शिविरा पंचांग के अनुसार 1 अक्टूबर 2022 से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे किया जाना था। लेकिन मौसम की असामान्य परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने समय परिवर्तन को 15 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया। इस दौरान स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलते रहे। 16 अक्टूबर को रविवार होने के कारण वास्तविक रूप से स्कूलों में नया समय 17 अक्टूबर 2022 से लागू हुआ। 2023 में भी 1 अक्टूबर की जगह 16 अक्टूबर से बदलाव 2023 में भी गर्मी के कारण स्कूलों का समय 1 अक्टूबर से नहीं बदला गया। शिक्षा विभाग ने शीतकालीन समय 16 अक्टूबर 2023 से लागू किया। इसके बाद एक पारी वाले स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होने लगे। दो पारी वाले स्कूलों में पहली पारी सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे और दूसरी पारी दोपहर 12:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रखी गई। 2024 में भी 1 अक्टूबर से बदलाव नहीं हुआ 2024 में भी यही स्थिति बनी। शिविरा कैलेंडर के अनुसार 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू होना था, लेकिन गर्मी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसे 15 अक्टूबर तक टाल दिया। इस दौरान स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलते रहे। शीतकालीन समय 16 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया और एक पारी के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे कर दिया गया। लेकिन 2025 में एक अक्टूबर से ही हुआ था स्कूलों का समय परिवर्तन 2025-26 के शिविरा पंचांग में स्पष्ट रूप से 1 अक्टूबर 2025 को विद्यालय समय परिवर्तन की तारीख निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार एक पारी के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे और दो पारी वाले स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित था। उपलब्ध पंचांग में 1 अक्टूबर को ही समय परिवर्तन दर्ज है।

कलेक्टर मिश्रा ने किया EVM गोदाम का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

कलेक्टर  मिश्रा ने ईवीएम गोडाउन का किया निरीक्षण राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सुरक्षा व्यवस्था और एसओपी अनुपालन की समीक्षा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध भोपाल     कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री प्रियंक मिश्रा ने भोपाल स्थित ईवीएम गोडाउन का निरीक्षण किया। उन्होंने गोडाउन की सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रबंधन तथा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की।   निरीक्षण के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी सर्विलांस, सीलिंग प्रक्रिया तथा ईवीएम के सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। कलेक्टर श्री मिश्रा ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए कहा कि ईवीएम की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।  

पटना में तेजी से फैल रहा डेंगू, रोज मिल रहे 9-12 मरीज; प्लेटलेट्स गिरने से बढ़ी चिंता

पटना बिहार की राजधानी पटना में डेंगू तेजी से बढ़ने लगा है। सितंबर के 23 दिनों में डेंगू के 140 नए मरीज मिल चुके हैं। डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफे से हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार को नौ नए मरीज सामने आए। हर दिन नौ से 12 मरीज डेंगू से संक्रमित पाए जा रहे हैं। इस साल अब तक पटना में डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या 307 हो गई है। इस बार डेंगू में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि इस सीजन में अब तक 55 डेंगू मरीजों को भर्ती किया गया है। डेंगू मरीजों के लिए 20 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। वहीं, आईजीआईएमएस में डेंगू के 79 मरीजों को भर्ती कराने की जरूरत पड़ी है। आईजीआईएमएस में डेंगू मरीजों के लिए पांच समर्पित बेड रखे गए हैं। पटना के सिविल सर्जन डॉ.योगेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि यदि लगातार तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण हों तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर डेंगू की जांच कराएं। घर और आसपास हीं भी पानी जमा नहीं होने दें। यहां बढ़ रहे डेंगू के मरीज कंकड़बाग, हनुमान नगर, भागवत नगर, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर, भूतनाथ रोड, बाजार समिति, मुसल्लहपुर हाट, सुलतानगंज, संदलपुर, कदमकुआं, महेंद्रू, भिखनापहाड़ी, पाटलिपुत्र, बोरिंग रोड, राजाबाजार, इंद्रपुरी, आशियाना, दीघा, एजी कॉलोनी, एसकेपुरी, तारामंडल, सिपारा, मीठापुर, अगमकुआं, बजरंगपुरी, गुलजारबाग, आलमगंज, खाजेकलां, मालसलामी, गर्दनीबाग, राजीवनगर, शास्त्रीनगर, फुलवारीशरीफ, मैनपुरा, महेंद्रू और ट्रांसपोर्ट नगर