samacharsecretary.com

‘आपातकाल और युवा’ विषय पर मथेंगे देश के प्रबुद्ध विचार

 'आपातकाल और युवा' विषय पर मथेंगे देश के प्रबुद्ध विचार  इमरजेंसी के 50 वर्ष पूर्ण होने पर: भोपाल में जुटेगा दिग्गजों का जमावड़ा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे मुख्य अतिथि भोपाल वर्ष 1948 में स्थापित देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी द्वारा आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। "इमरजेंसी के 50 साल: आपातकाल और युवा" विषय पर केंद्रित यह विचार संगोष्ठी 19 फरवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 02:00 बजे से रायसेन रोड स्थित "सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी" परिसर भोपाल में आयोजित होगी। सत्ता और संगठन के प्रमुख चेहरों की होगी मौजूदगी***  इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। वहीं, मुख्य वक्ता के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश जोशी (उपाख्य भैयाजी जोशी) अपने विचार साझा करेंगे। उनके संबोधन में आपातकाल के संघर्ष और वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए इसके सबक पर विशेष ध्यान केंद्रित रहने की संभावना है। कार्यक्रम की रूपरेखा को साझा करते हुए हिन्दुस्थान समाचार के क्षेत्रीय संपादक डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि आयोजन में अतिथियों का विशिष्ट पैनल शामिल है, जिसमे विशिष्ट अतिथि: राजेंद्र शुक्ला (उपमुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश शासन) एवं कैलाश सोनी (पूर्व राज्यसभा सदस्य), अध्यक्षता: अरविन्द भालचंद्र मार्डीकर (अध्यक्ष, हिन्दुस्थान समाचार समूह) एवं स्वागताध्यक्ष: डॉ. हरप्रीत सलूजा *(चेयरमैन, सैम ग्रुप, भोपाल) रहेगे।  क्यों खास है यह आयोजन* ? आपातकाल (1975-77) भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह कालखंड है, जिसने देश की राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दिशा बदल दी थी। 50 साल बाद, आज की युवा पीढ़ी को उस समय के संघर्ष, प्रेस की आजादी पर लगे अंकुश और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की कहानी बताना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। हिन्दुस्थान समाचार, जो स्वयं भारतीय पत्रकारिता के मूल्यों का संवाहक रहा है, इस चर्चा के माध्यम से इतिहास और भविष्य के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है। उक्त जानकारी बड़वानी प्रतिनिधि राजेश राठौड़ ने बताया कि  इमरजेंसी के 50 साल: आपातकाल और युवा विषय पर दिनांक  19 फरवरी 2026 (गुरुवार) दोपहर 02:00 बजे से सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, रायसेन रोड, भोपाल मे आयोजन संपन्न होगा।

पोड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव ने ₹126 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के पोड़ी में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात देते हुए ₹88 करोड़ से अधिक की लागत के 59 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा ₹38 करोड़ से अधिक की लागत के 82 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन विकास परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में अधोसंरचना सुदृढ़ होगी और जनसुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि सड़क, भवन, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक अधोसंरचना से जुड़े ये कार्य क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें तेज गति, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारना है। हमारी सरकार  परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति के साथ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक विकास की पहुँच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और जनसुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिकों को सीधे लाभ मिल सके।

CM साय ने बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थियों का बढ़ाया आत्मविश्वास

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने प्रदेश के छात्र-छात्राओं को परीक्षाओं के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए उन्हें आत्मविश्वास और हौसले के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है. उन्होंने विद्यार्थियों के नाम अपने आत्मीय संदेश में कहा कि परीक्षाओं का समय जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसमें उत्साह के साथ थोड़ा तनाव भी स्वाभाविक है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है. मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि परीक्षाओं का समय आ गया है. मैं जानता हूं कि इन दिनों आपके मन में उत्साह भी है और थोड़ा सा तनाव भी. लेकिन सबसे पहले यह जान लीजिए — आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का समय कभी-कभी मन में घबराहट भी लेकर आता है. यह स्वाभाविक है. यदि आपको डर लग रहा है तो इसका अर्थ है कि आप अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य को गंभीरता से लेते हैं.     मेरे प्यारे बच्चों,     परीक्षाओं का समय आ गया है। मैं जानता हूँ कि इन दिनों आपके मन में उत्साह भी है और थोड़ा सा तनाव भी। लेकिन सबसे पहले यह जान लीजिए-आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं।     परीक्षाओं का समय कभी-कभी मन में घबराहट भी लेकर आता है। यह स्वाभाविक है। यदि आपको डर लग रहा…     — Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) February 17, 2026 उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह समझ लीजिए — डर कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकेत है. लेकिन इस डर को अपने आत्मविश्वास पर हावी न होने दें. आपने पूरे वर्ष मेहनत की है. हर दिन का प्रयास, हर अभ्यास, हर दोहराव — सब आपकी ताकत बनकर आपके साथ खड़े हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी नियमित पढ़ाई करें, कठिन विषयों को दोहराएं, समय का संतुलन बनाए रखें. पर्याप्त नींद लें, पौष्टिक भोजन करें और कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करें. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के सभी विद्यार्थी इस बार भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और अपने परिवार तथा प्रदेश का नाम रोशन करेंगे.

शहीद निरीक्षक आशीष शर्मा के भाई अंकित को मिली एसआई पद पर नियुक्ति

शहीद निरीक्षक आशीष शर्मा के भाई अंकित को मिली एसआई पद पर नियुक्ति  भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस ने शहादत का सम्मान करते हुए बालाघाट में नक्कल आपरेशन के दौरान पिछले दिनों शहीद हुए है हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर स्वर्गीय आशीष शर्मा के भाई अंकित शर्मा को उपनिरीक्षक पद पर नियुक्ति प्रदान की है। अंकित शर्मा ने जिला नरसिंहपुर में उपनिरीक्षक पद का पदभार ग्रहण कर लिया है। अमर शहीद स्वर्गीय आशीष शर्मा पुलिस-नक्सल मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार अमर शहीद के भाई अंकित को उपनिरीक्षक पद पर विशेष अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है।

हरियाणा दहला: रोहतक में ताबड़तोड़ गोलियां, IG ऑफिस के नजदीक मर्डर से सनसनी

  रोहतक हरियाणा के रोहतक में शुक्रवार को हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आईजी ऑफिस से कुछ ही दूरी पर दिल्ली बाईपास के पास अज्ञात हमलावरों ने दिनेश उर्फ गोगा पर 22 गोलियां दाग दीं. मौके पर ही उसकी मौत हो गई. बिजी रोड पर हुई इस वारदात से आसपास अफरा-तफरी मच गई और राहगीरों में दहशत फैल गई. मृतक दिनेश गोगा का भी आपराधिक रिकार्ड बताया जा रहा है. मौके से मिले 28 से 30 राउंड गोलियां के खोल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर तेज रफ्तार वाहन में आए और एकाएक गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस की टीमें पहुंचीं और इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी गई. आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. पुलिस को मौके से करीब 28 से 30 राउंड हुए गोलियां के खोल मिले है. '2-4 कीड़े मकोड़े हैं इनका टाइम आ लिया है' घटना के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसने मामले को और सनसनीखेज बना दिया. पोस्ट में 'जय भोले की' लिखते हुए दावा किया गया कि दिनेश गोगा की हत्या अमेरिका में बैठे कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और मोस्ट वांटेड नीरज फरीदपुरिया के इशारे पर कराई गई है. पोस्ट में आगे धमकी भरे लहजे में अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है. लिखा है – बाकी ये और 2-4 कीड़े मकोड़े हैं इनका टाइम आ लिया है. साथ ही इसमें कुछ पुलिसकर्मियों पर करप्ट होने का आरोप भी लगाया गया है. पोस्ट में लिखा है- हम देश के कानून और ईमानदार खाकी का सम्मान करते हैं लेकिन कुछ करप्ट पुलिसवालों के कारण आज ये दिन देखना पड़ रहा है.  

भोजशाला विवाद: 18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई, अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण स्थगित

 इंदौर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में होने वाली सुनवाई आगे बढ़ गई है।कल  अधिवक्ता संघ द्वारा की गई हड़ताल की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। इसके लिए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में यह प्रकरण क्रम संख्या- 62 पर सूचीबद्ध किया गया था। यह सुनवाई गत 22 जनवरी को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रारंभ की जानी है। सुनवाई में भोजशाला को लेकर किए गए 98 दिनों के एएसआई सर्वे की रिपोर्ट खुली अदालत में खोली जाएगी और उसकी कॉपी दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था। बता दें कि हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष सुनवाई में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फार जस्टिस एएसआई सर्वे को आधार बनाकर भोजशाला के वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर होने के पक्ष में अपने तर्क रखने हैं। इसके लिए हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहेंगे, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन (नई दिल्ली) तथा अधिवक्ता विनय जोशी (इंदौर) पैरवी करेंगे। निर्णय होने तक 2003 का आदेश प्रभावशील सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तक भोजशाला की संरचना एवं स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसका सात अप्रैल 2003 को एएसआई महानिदेशक द्वारा जारी आदेश यथावत प्रभावी रहेगा। एएसआई सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष 17000 अवशेष मिले थे। 96 मूर्तियां प्राप्त हुईं। 25 फीट से अधिक खुदाई में दीवार का ढांचा मिला। पीछे के खेत क्षेत्र से भी मूर्तियां बरामद की गईं। चारों दिशाओं में 106 स्तंभ पाए गए। 82 भित्ति चित्रयुक्त स्तंभ मिले। 33 प्राचीन सिक्के मिले। ये सिक्के 10वीं–11वीं शताब्दी एवं परमार युग के बताए गए हैं।  

नई आबकारी नीति लागू, रायपुर एयरपोर्ट के होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को मिली बड़ी राहत, बार खुलने की अनुमति

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई आबकारी नीति 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्व में वृद्धि और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नई शराब दुकानें नहीं खोली जाएंगी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लाभप्रद बनाया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, अब शराब की आपूर्ति से पहले ही टैक्स का भुगतान अनिवार्य होगा, जिससे सरकारी खजाने में समय पर राजस्व सुनिश्चित हो सकेगा। रायपुर एयरपोर्ट पर बार और लाइसेंस फीस में राहत पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रायपुर एयरपोर्ट पर ‘विमानपत्तन रेस्टोरेंट बार’ (FL-3 घ) शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही, होटल, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लाइसेंस फीस में उल्लेखनीय कटौती की गई है। इस रियायत का उद्देश्य (CG New Excise Policy) राज्य में निवेश आकर्षित करना और आतिथ्य सत्कार क्षेत्र को मजबूती देना है। हालांकि, बार संचालन के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक ही संचालित होंगे। प्लास्टिक बोतलों में मिलेगी शराब पर्यावरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव पैकेजिंग में किया गया है। अब छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। विभाग का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल करोड़ों का नुकसान होता है और इससे कर्मचारियों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है। प्लास्टिक पैकेजिंग से परिवहन आसान होगा और स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। महंगी होगी शराब: नया टैक्स स्लैब लागू शराब प्रेमियों के लिए खबर थोड़ी कड़वी हो सकती है क्योंकि नई नीति में आबकारी ड्यूटी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से विदेशी और प्रीमियम ब्रांड्स (CG New Excise Policy) पर अब ‘रिटेल सेल प्राइस’ (RSP) के आधार पर टैक्स लगेगा। जितनी महंगी बोतल होगी, उस पर उतना ही अधिक ड्यूटी टैक्स देना होगा। बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थों पर भी नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का मानना है कि उच्च श्रेणी के ब्रांड्स पर टैक्स बढ़ाने से राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए ड्यूटी की न्यूनतम दरें बरकरार रखी गई हैं। प्रशासनिक सुधार और निगरानी नई नीति के तहत प्रशासनिक शक्तियों में भी बदलाव किया गया है। अब कंपोजिट लाइसेंस जारी करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त के पास होगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही, अवैध शराब की तस्करी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

रतलाम का सरकारी स्कूल छाया खास, बच्चों में बैग नहीं और मुंहजबानी से 40 तक के पहाड़े याद

रतलाम  सरकारी स्कूलों का जब जिक्र आता है, तब ज्यादातर समय दिमाग में पहली तस्वीर बदहाल व्यवस्था की बनती है लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा अनूठा स्कूल है, जो इसके विपरीत एक नजीर पेश कर रहा है. यह स्कूल अपने आप में एक मिसाल है. इसके बारे में यह कहना हरगिज गलत नहीं होगा कि यह सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहा है. स्कूल की अपनी कार्यशैली के चलते इसे ‘समस्या मुक्त विद्यालय’ नाम दिया गया है. यहां के प्रधानाध्यापक ने अपने खर्च पर स्कूल को सजाया-संवारा है. वहीं उनका शिक्षा की गुणवत्ता पर भी खासा फोकस रहता है. हम बात कर रहे हैं रतलाम के जावरा स्थित रूपनगर के सरकारी प्राथमिक स्कूल की. प्राथमिक स्कूल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया है. स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ वह तमाम जानकारी मुहैया करवाई जा रही है, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक है. स्कूल में इस तरह हरियाली छाई हुई है कि एक बार के लिए लगता है कि आप किसी गार्डन में आ गए हों. स्कूल की साफ-सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है ताकि बच्चे अभी से स्वच्छता के महत्व को समझ सकें और इसे अपने जीवन में अपना सकें. खाली हाथ स्कूल आते हैं बच्चे पहली से पांचवीं क्लास तक यह स्कूल पूरी तरह से एक बैगलेस स्कूल है. बच्चे घर से बैग लेकर स्कूल नहीं आते हैं ताकि उनके नाजुक कंधों पर वजनी बोझ न पड़े. स्कूल में पढाई के साथ-साथ होमवर्क भी करवाया जाता है. बच्चों की यूनिफॉर्म पूरी तरह से व्यवस्थित है. इन नन्हे-मुन्ने स्टूडेंट्स की छोटी-छोटी बातों पर पूरा ध्यान दिया जाता है ताकि वे भी अच्छी बातें सीख सकें. बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद स्कूल से प्रधानाध्यापक की मेहनत का ही यह नतीजा है कि उन्होंने इस सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी. यहां बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद हैं. जावरा के रूपनगर का यह सरकारी स्कूल रतलाम ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मिसाल पेश करता नजर आ रहा है.

मैट्रिक एग्जाम शुरू: बिहार बोर्ड के 15 लाख विद्यार्थी आज से परीक्षा में शामिल

पटना  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा आज से पूरे राज्य में शुरू हो गई है. इस साल परीक्षा को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं और इसे कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बीच आयोजित किया जा रहा है. इस साल मैट्रिक परीक्षा के लिए कुल 15 लाख 12 हजार 687 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें 7 लाख 85 हजार 726 छात्राएं और 7 लाख 26 हजार 961 छात्र शामिल हैं. पूरे बिहार में परीक्षा के लिए 1699 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है. दो पालियों में होगी परीक्षा पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी. परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले शुरू हो जाएगा और परीक्षा शुरू होने से आधे घंटे पहले प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे. सुबह 8:30 बजे से शुरू होगा छात्रों का प्रवेश  पहली पाली के लिए छात्रों का प्रवेश सुबह 8:30 बजे से शुरू हो गया है और उन्हें सुबह 9 बजे तक ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. वहीं, दूसरी पाली के परीक्षार्थियों का प्रवेश दोपहर 1 बजे से शुरू होगा और 1:30 बजे तक ही उन्हें अंदर जाने दिया जाएगा. इसके बाद किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं मिलेगा. पटना जिले में भी परीक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है. यहां कुल 71 हजार 22 परीक्षार्थियों के लिए 70 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. सभी केंद्रों पर प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से निगरानी की जा रही है, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके.  समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह बोर्ड ने परीक्षार्थियों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी है, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. साथ ही परीक्षा केंद्रों पर सख्त नियम लागू किए गए हैं और बिना एडमिट कार्ड के किसी भी छात्र को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है.बिहार बोर्ड की यह परीक्षा छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए छात्र पूरी तैयारी और अनुशासन के साथ परीक्षा में शामिल हो रहे हैं.

उज्जैन में महाभारत की ताकत का अनुभव, महाकाल नगरी में पहली बार सजे 100 से अधिक युद्धास्त्र

उज्जैन  महाभारत, जिसे विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य और भारतीय युद्ध विज्ञान का मूल स्रोत माना जाता है, अब उज्जैन में शोध आधारित अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शनी के रूप में जीवंत हो उठा है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर में सजी इस प्रदर्शनी का शुभारंभ महाशिवरात्रि पर हुआ, जो 19 मार्च तक देशभर के दर्शकों के लिए खुली रहेगी। उद्देश्य, महाभारत को धार्मिक आख्यान से आगे बढ़ाकर भारतीय सैन्य परंपरा, व्यूह रचना और रणनीतिक चिंतन के वैज्ञानिक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करना है। प्रदर्शनी में महाभारत युद्ध में वर्णित 100 से अधिक अस्त्र-शस्त्रों के बड़े माडल प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें गदा, धनुष-बाण, तलवार, भाला, ढाल, सुदर्शन चक्र और वज्र की प्रतिकृतियां शामिल हैं। 18 दिन चले युद्ध की 14 प्रमुख व्यूह रचनाओं के त्रि-आयामी माडल तैयार किए गए हैं, जिनसे सेना की संरचना, घेराबंदी और आक्रमण-रक्षा की रणनीति को समझाया जा रहा है। युद्ध आचरण-नियमों की भी जानकारी दी जा रही 45 पताकाएं और 11 शंख प्रतिरूप प्राचीन युद्ध संकेत प्रणाली को दर्शाते हैं, जो उस काल की संचार व्यवस्था और सैन्य अनुशासन का प्रमाण हैं। इस प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि यहां केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके प्रयोग की तकनीक, संबंधित योद्धाओं, रथ व्यवस्था, सेना संरचना और युद्ध आचरण-नियमों की भी जानकारी दी जा रही है। आयोजक विक्रमादित्य शोधपीठ से जुड़े राहुल रस्तोगी के अनुसार महाभारत को इतिहास, नीति, कूटनीति और युद्धशास्त्र के समन्वित ग्रंथ के रूप में समझाना ही इसका उद्देश्य है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े। राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रदर्शनी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले ऐसी पहल भोपाल के भारत भवन में हुई थी और अब उज्जैन में इसे स्थायी शैक्षणिक स्वरूप देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। इतिहासकारों और शिक्षाविदों का मानना है कि यह पहल भारतीय युद्ध विज्ञान, रणनीतिक सोच और सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक विमर्श से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। 14 माह का शोध, 12 लाख की लागत सभी प्रतिकृतियां गहन शोध पर आधारित हैं। इंदौर के शोधकर्ता राज बेन्द्र ने आठ माह तक ग्रंथों और ऐतिहासिक स्रोतों का अध्ययन कर रूपरेखा तैयार की, जिसके बाद छह माह में माडल निर्मित कराए गए। निर्माण पर लगभग 12 लाख रुपये खर्च हुए। आकार, अनुपात और उपयोग विधि को प्रमाणिक बनाने के लिए पारंपरिक विवरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। युद्ध पद्धति को समझने का दुर्लभ अवसर महाभारत केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि सैन्य संगठन, व्यूह रचना, संचार प्रणाली, मनोवैज्ञानिक युद्ध और आचरण नियमों का विस्तृत दस्तावेज माना जाता है। इसमें सेना संरचना, रथ युद्ध, गदा युद्ध, धनुर्विद्या और संकेत पद्धति का वैज्ञानिक वर्णन मिलता है, जो भारतीय रणनीतिक परंपरा की प्राचीन जड़ों को दर्शाता है। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सैन्य इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह प्रदर्शनी प्राचीन भारत की तकनीकी क्षमता, संगठन कौशल और नीति-आधारित युद्ध पद्धति को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान कर रही है।