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सीएम की बड़ी घोषणा: जैतपुर बना नगर परिषद, धनपुरी में शुरू हुआ वाटर पार्क

शहडोल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शहडोल में धनपुरी वाटर पार्क का फीता काटकर शुभारंभ किया। सीएम ने कहा कि इससे क्षेत्र के पर्यटन को रफ्तार मिलेगी। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने जैतपुर नगर को नगर परिषद का दर्जा देने की घोषणा की। सीएम ने कहा- बहनों को आगे बढाना है। विधायक जी ने कुछ मांगा है तो हम मना कैसे कर सकते हैं। 2300 करोड़ की सिंचाई योजना देने की घोषणा करता हूं। जैतपुर में महाविद्यालय का भवन बनेगा। शहडोल में नए महाविद्यालय की शुरूआत किया जाएगा। अब अगली बार भी आना है शेष बात हम बाद में करेंगे। सीएम ने लोगों की मांग पर जैतपुर को नगर पंचायत देने की घोषणा करता हूं।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुझे धनपुरी के अंदर इतना बढिया स्विमिंग पुल देखकर इंदौर, उज्जैन जैसे बड़े नगर की याद आ गई। जब मैं जय जयकार कराता हूं तो कांग्रेस वालों की पार्टी पर सांप लोट जाते हैं। हम भगवान श्रीराम की जयकार करने वाले लोग हैं। माता शबरी ने वर्षों तक राम का इंतजार किया। भगवान राम प्रेम के वशीभूत होकर शबरी माता के पास पहुंचे। श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए। मनुष्य से मनुष्य का प्रेम यह है सनातन संस्कृति की विशेषता। हम जब पूरे शहडोल की तरफ देखते हैं तो देखते हैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कितना काम यहां हुआ है। किसानों के हित का पूरा ध्यान रखा। मोदी जी का पूरा जीवन देश के विकास के लिए ही है। भारत का मान सम्मान बढाने के लिए सशक्त बनाने के लिए हम देश के प्रधानमंत्री का जोरदार अभिनंदन करें। धनपुरी धन्य हो गई आज धनपुरी में जो सौगात मिली है वह जंगल में मंगल हो गया है। धनपुरी धन्य हो गई। नगरपालिका अध्यक्ष को बधाई इतनी अच्छी सौगात इस क्षेत्र को मिली है। सभी क्षेत्र में काम करते हुए आज मप्र सबसे आगे बढ रहा है। हम लगातार काम कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण का काम किया गया है। बहुत जल्दी युवाओं को सभी तरह के कल कारखाने की सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की ओर ध्यान नहीं दिया। हमारी सरकारों के काम करने का तरीका ही अलग है। सांसद बोलीं, मुख्यमंत्री जी छोटी बहन को निराश नहीं करेंगे शहडोल में हुए कार्यक्रम मंच से नगर पालिका धनपुरी की अध्यक्ष रविंद्र कौर छाबड़ा ने विकास कार्य का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। क्षेत्रीय विधायक जयसिंह मरावी ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मांग पत्र पढ़कर सुनाया। सांसद हिमाद्रि सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मंच भरा पूरा है और समय की सीमा है। आप सबको राम राम करती हूं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देश व प्रदेश विकास कर रहा है। सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आपके समक्ष जो मांगें विधायक जयसिंह मरावी ने रखी हैं, उनको पूरा करेंगे और छोटी बहन को निराश नहीं करेंगे। माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण इसके बाद मुख्यमंत्री गंधिया जनपद पंचायत जयसिंह नगर के लिए प्रस्थान कर स्थानीय कार्यक्रम में सहभागिता निभाएंगे। वह यहां पर सीतामढ़ी धाम में स्थापित की गई माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। प्रवास के दौरान शहडोल जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण, भूमि पूजन एवं योजनाओं के लाभांवित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण करेंगे।  

दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों का नामकरण बदला, राज्य नामकरण प्राधिकरण की रिपोर्ट के बाद लिया गया निर्णय

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने दो मेट्रो स्टेशनों के नाम बदल दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली राज्य नामकरण प्राधिकरण (SNA) की सिफारिश के बाद पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार पॉकेट-I मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ कर दिया गया है, जबकि पीतमपुरा मेट्रो स्टेशन अब ‘मधुबन चौक’ के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने की मंजूरी मिलने के बाद DMRC ने दोनों स्टेशनों पर साइनेज और सूचना बोर्ड अपडेट कर दिए हैं। यात्रियों को किसी असुविधा से बचाने के लिए आवश्यक घोषणाएं और डिजिटल डिस्प्ले भी बदले जा रहे हैं। सालों से मांग कर रहे थे लोग त्रिलोकपुरी के विधायक रविकांत उज्जैन ने स्टेशन का नाम बदले जाने पर कहा कि इससे लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक मांग पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि लोग वर्षों से यह मांग कर रहे थे कि मेट्रो स्टेशन का नाम मंदिर के नाम पर रखा जाए, लेकिन पहले इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायक ने कहा, “पिछले छह महीनों से मैं इस मामले को गंभीरता से देख रहा था। मैंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सामने भी यह मुद्दा उठाया और इस संबंध में पत्र लिखे। आखिरकार यह नाम परिवर्तन हुआ, जो वास्तविक जन-भावना की पूर्ति है।” मयूर विहार स्टेशन प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट त्रिलोकपुरी के विधायक ने आगे कहा कि श्री राम मंदिर मयूर विहार मेट्रो स्टेशन, जो दिसंबर 2018 में दिल्ली मेट्रो के फेज-III विस्तार के तहत शुरू किया गया था, आज पूर्वी दिल्ली के यात्रियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह स्टेशन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सबसे लंबे कॉरिडोर पर स्थित है और आवासीय इलाकों को प्रमुख कमर्शियल हब से जोड़ता है। साथ ही यह क्षेत्र की भीड़भाड़ वाली मुख्य सड़कों का प्रभावी विकल्प भी प्रदान करता है, जिससे रोज़ाना यात्रियों को काफी सुविधा मिलती है। क्या है राज्य नामकरण प्राधिकरण (SNA)? राज्य नामकरण प्राधिकरण (State Naming Authority – SNA) दिल्ली सरकार का एक गैर-संवैधानिक निकाय है, जो राजधानी दिल्ली के भीतर सड़कों, पार्कों, कॉलोनियों और अन्य संस्थाओं के नामकरण या नाम परिवर्तन से जुड़े मामलों का निर्णय करता है। हालांकि, इसके अधिकार क्षेत्र में दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के अधीन आने वाले क्षेत्र शामिल नहीं होते। इस प्राधिकरण में मुख्यमंत्री अध्यक्ष, मुख्य सचिव सदस्य होते हैं, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (शहरी विकास) सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

क्यों दादरी बना सपा का चुनावी लॉन्चपैड? 2027 के चुनाव से पहले पार्टी की बड़ी सियासी चाल

लखनऊ समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर पूरे प्रदेश में समाजवादी समानता भाईचारा रैली करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को नोएडा के दादरी से इसकी शुरुआत करेंगे। इसके बाद ये रैलियां प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित की जाएंगी। इस रैली की जिम्मेदारी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी संभालेंगे।  नोएडा से इस अभियान की शुरूआत के पीछे माना जा रहा है कि पार्टी इस कमजोर गढ़ में अपने को मजबूत दिखाने का संदेश देना चाहती है। पार्टी का मानना है कि अगर इन इलाकों में संगठन मजबूत किया गया, तो चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है विधानसभा चुनावों के करीब 11 महीने पहले नोएडा से शुरू होने वाली इस रैली की तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समाजवादी पार्टी के नेता स्थानीय स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। इन रैलियों के आयोजन के जरिये सपा की कोशिश उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है, जहां समाजवादी पार्टी को 2022 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। रैलियों की शुरुआत के साथ ही समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि ऐसे नेताओं को प्रत्याशी बनाया जाए, जिनकी विधानसभा क्षेत्र में स्वीकार्यता हो। इसके अलावा टिकट के चयन में एसआईआर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं का भी अहमियत दी जाएगी। सपा हर सीट पर प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए सर्वे भी करा रही है। पार्टी शुभ संकेत के रूप में देख रही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अखिलेश यादव ने 2012 में  गौतमबुद्धनगर से साइकिल यात्रा की शुरुआत की थी। उसी वर्ष समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। एक बार फिर नोएडा से अभियान की शुरुआत को उसी ‘शुभ संकेत’ से जोड़कर देखा जा रहा है। नोएडा को लेकर लंबे समय से राजनीतिक मिथक भी रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है। वह छह महीने के भीतर कुर्सी गवां देता है। इसी कारण मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान अखिलेश यादव नोएडा नहीं गए थे। 2017 और 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अभियान की शुरुआत दूसरे जिलों से की, लेकिन सत्ता हासिल नहीं कर सके।  

शहडोल में तनाव: मुख्यमंत्री मोहन यादव के आगमन से पहले किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता पकड़े गए

शहडोल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शहडोल आगमन से पहले ही जिले में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक ओर रामपुर बटूरा मेगा प्रोजेक्ट से प्रभावित किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। प्रशासन ने दोनों ही समूहों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। रामपुर बटूरा प्रोजेक्ट से प्रभावित करीब 10 गांवों के किसान लंबे समय से एसईसीएल (SECL) प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कोयला उत्खनन के कारण उनके घरों में दरारें पड़ रही हैं, स्कूल जर्जर हालत में पहुंच गए हैं और तीन साल बीत जाने के बावजूद न तो उन्हें स्थायी रोजगार मिला और न ही उचित पुनर्वास।मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे किसानों को बुढार पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि समाजसेवी भूपेश शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए थे।   जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल ने भी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी और ब्लॉक अध्यक्ष अंकित सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी धनपुरी में वाटर पार्क के उद्घाटन को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए काले झंडे दिखाने की तैयारी कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं ने नगर पालिका में भ्रष्टाचार, अवैध कोयला उत्खनन, रोजगार में स्थानीय लोगों की अनदेखी, कानून-व्यवस्था की स्थिति, दूषित पेयजल और खाद संकट जैसे मुद्दे उठाए। नारेबाजी के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर शहडोल भेज दिया। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही जिला प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाने और विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। फिलहाल मुख्यमंत्री के शहडोल पहुंचने से पहले ही जिले में विरोध के हालात बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अलग-अलग समूह भी विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी में हैं, जिस पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

नक्सलवाद के खात्मे की तैयारी तेज, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक, मार्च 2026 पर नजर

रायपुर देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन को लेकर केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच आज रायपुर में निर्णायक दौर की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इन बैठकों को मार्च 2026 की तय समय-सीमा से पहले की सबसे अहम रणनीतिक बैठक माना जा रहा है। पहली समीक्षा बैठक सुबह शुरू हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, इंटेलिजेंस नेटवर्क की मजबूती, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की गति और बचे हुए संवेदनशील क्षेत्रों में कार्रवाई को तेज करने पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद के अंतिम गढ़ों को समाप्त करने के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। दिनभर चलेगा मंथन पहली बैठक दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा, जबकि शाम 3 बजे से 4:15 बजे तक एक बार फिर उच्चस्तरीय चर्चा होगी। इसके पश्चात शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक “छत्तीसगढ़ @ 25 – शिफ्टिंग द लेंस” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के भविष्य और विकास के नए दृष्टिकोण पर विचार किया जाएगा। दो प्रमुख एजेंडों पर होगा फैसला उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठक है। बैठक में दो मुख्य मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हो रही है। पहला, देश को तय समय सीमा तक पूरी तरह सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने की रणनीति। दूसरा, बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति देने का रोडमैप।

विवादों में मंत्री की माफी: कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान के बाद स्क्रिप्ट लेकर आए, हँसी बनी सवाल

भोपाल अपने ही गैर-जिम्मेदाराना और विवादित बयानों के लिए मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह अब तक चार बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। 13 मई 2025, 14 मई 2025, फिर 23 मई 2025 और अब 07 फरवरी 2026, एक ही बयान और एक ही विषय पर इतनी बार माफी मांगने का रिकॉर्ड शायद ही किसी मंत्री के नाम दर्ज हो। यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हो या नहीं, लेकिन सियासी शर्मनाक घटनाओं की सूची में जरूर दर्ज किया जाना चाहिए। हैरानी की बात यह है कि शनिवार को इंदौर के रेसिडेंसी क्षेत्र में जब मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया को लेकर माफीनामा पढ़ रहे थे, तो वह भी बिना तैयारी के नहीं, बल्कि पूरी लिखित स्क्रिप्ट के साथ।   मीडिया के सवालों के दौरान शाह का रवैया भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता नजर आया। माफी मांगने आए मंत्री जी के हाव भाव ऐसे थे मानों वह किसी गंभीर गलती पर पछतावा जताने नहीं, बल्कि सिर्फ औपचारिकता निभाने आए हों। “बोल दिया था, इसलिए माफी मांगनी पड़ रही है।” अगर वास्तव में उन्हें अपने बयान पर जरा भी मलाल या आत्मग्लानि होती, तो वह मीडिया से चर्चा से पहले कैमरों के सामने इस तरह बेशर्मी भरी मुस्कान के साथ खड़े नजर नहीं आते। उनके चेहरे पर न पश्चाताप था, न संकोच और न ही शब्दों की जिम्मेदारी का कोई भार। औपचारिकता निभाने आए थे? पूरा घटनाक्रम यही संकेत देता है कि शाह इंदौर केवल औपचारिकता निभाने आए थे, न कि अपने बयान की गंभीरता को समझने। कैमरों के सामने मुस्कुराते रहना और माफी को एक मजबूरी की तरह पेश करना, यह साफ दर्शाता है कि सत्ता के अहंकार में संवेदनशील मुद्दों को भी हल्के में लिया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह वही गंभीरता है, जिसकी उम्मीद जनता एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से करती है, या फिर अब माफी भी एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह गई है? सवाल यह है कि क्या अब मंत्री को माफी मांगने के लिए भी स्क्रिप्ट की जरूरत पड़ने लगी है? क्या शब्द इतने अविश्वसनीय हो चुके हैं कि बिना कागज के बोलना भी जोखिम भरा हो गया है? 11 मई को दिया था विवादित बयान बीते वर्ष 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह द्वारा दिया गया विवादित और आपत्तिजनक बयान अब कानूनी शिकंजे में बदल चुका है। कार्यक्रम में मंत्री शाह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि जिन आतंकियों ने लोगों को मारा, उन्होंने कपड़े उतरवाए और हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए कहा था कि “प्रधानमंत्री ने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई।” मंत्री द्वारा सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी ने सियासी और सामाजिक हलकों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया। 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश मंत्री विजय शाह को यह बयान देना अब भारी पड़ रहा है। हाईकोर्ट जबलपुर के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हुई और इंदौर जिले के मानपुर थाने में शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। चूंकि आपत्तिजनक बयान मानपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया था, इसलिए मूल प्रकरण यहीं दर्ज किया गया था । मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए थे।

सिद्धू की ‘घर वापसी’ की अटकलें तेज, नवजोत कौर ने राहुल गांधी को बताया ‘पप्पू’

चंडीगढ़ पंजाब की राजनीति में पिछले दो महीनों से जारी अनिश्चितता और बयानबाजी के दौर का अंत आखिरकार एक बड़े धमाके के साथ हुआ है। पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव भूपेश बघेल ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा की। हालांकि, इस निष्कासन से पहले ही 31 जनवरी को नवजोत कौर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान के इस कड़े कदम ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी अब सिद्धू परिवार की बयानबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के तेवर और भी तल्ख हो गए हैं। उन्होंने न केवल इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी को 'पप्पू' कहकर संबोधित किया जो आमतौर पर विपक्षी खेमे द्वारा उनके उपहास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। नवजोत कौर का यह बयान कांग्रेस के साथ उनके रिश्तों की कड़वाहट को चरम पर ले गया है। 500 करोड़ का सूटकेस विवाद की जड़ें पिछले साल दिसंबर में जमीं, जब नवजोत कौर ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा वही बनता है जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू सक्रिय राजनीति में तभी लौटेंगे जब उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाएगा। उस समय उन्होंने कहा था, "कांग्रेस में इतनी गुटबाजी है कि वे नवजोत सिद्धू को आगे नहीं बढ़ने देंगे। वहां पहले से ही पांच दावेदार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और वे खुद कांग्रेस को हराने पर तुले हुए हैं।" क्या भाजपा में होगी घर वापसी? राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवजोत सिंह सिद्धू का अगला कदम क्या होगा? हालांकि सिद्धू अभी भी तकनीकी रूप से कांग्रेस में हैं, लेकिन उनकी पत्नी के बयानों को उनके भविष्य के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में नवजोत कौर ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की जमकर तारीफ की। इससे इन अटकलों को बल मिला है कि सिद्धू परिवार एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकता है, जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। विद्रोह और सिद्धू परिवार का पुराना नाता यह पहली बार नहीं है जब सिद्धू परिवार अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़ा हुआ है। इनका राजनीतिक इतिहास बगावती सुरों से भरा रहा है। 2012 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर पूर्व से जीतने के बाद डॉ. नवजोत कौर ने अपनी ही अकाली-भाजपा सरकार पर फंड के भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। 2014 में जब भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काटकर अरुण जेटली को दिया, तो दूरियां और बढ़ गईं। 2016 में ऐसी खबरें थीं कि सिद्धू आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बनी। अंततः 2017 के चुनाव से ठीक पहले यह जोड़ा कांग्रेस में शामिल हो गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह से जंग कांग्रेस सरकार में मंत्री बनने के बाद सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच टकराव जगजाहिर था। सिद्धू ने अपनी ही सरकार को बेअदबी के मामलों पर घेरा, जिसके कारण अंततः कैप्टन को पद छोड़ना पड़ा। कैप्टन के बाद जब चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब भी नवजोत कौर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके पति सिद्धू एक बेहतर विकल्प थे। फिलहाल नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है, लेकिन राजनीति में खामोशी अक्सर बड़े तूफान का संकेत होती है। राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले के बाद कांग्रेस में उनके लिए रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। अब देखना यह होगा कि क्या पंजाब की राजनीति का यह 'धुरंधर' खिलाड़ी एक बार फिर भगवा चोला पहनता है या कोई नई राह चुनता है।

पर्यावरण की ओर बड़ा कदम: दिल्ली में 500 इलेक्ट्रिक बसें शामिल, दिल्ली–पानीपत रूट फिर चालू

नई दिल्ली दिल्ली में भाजपा सरकार के एक साल पूरा होने पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने आज रामलीला मैदान से डीटीस की 500 नई ईवी बसों और दिल्ली-पानीपत बस सेवा का शुभारंभ किया। इस मौके पर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह समेत तमाम मंत्री और भाजपा विधायक और अधिकारी मौजूद रहे। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह, लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंच से इन इलेक्ट्रिक बसों और दिल्ली-पानीपत बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पिछली सरकार सिर्फ बात बनाने वाली सरकार थी : नितिन नबीन इस दौरान रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि आज के दिन 8 फरवरी को ही दिल्ली का मैंडेट आया था और दिल्ली की जनता ने कमल खिलाने का काम किया था। आज के दिन आपने दिल्ली की जनता को जो 500 ईवी बसों का तोहफा देने का काम किया है, यह निश्चित रूप से आप बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पिछली सरकार के झूठे वादे से दिल्ली की जनता त्रस्त हो गई थी। पिछली सरकारों ने दिल्ली की जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया था। यूं कहें तो पिछली सरकार सिर्फ बात बनाने वाली सरकार थी, लेकिन आज भाजपा की सरकार दिल्ली की जनता के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यहां तेजी से विकास के कार्य कर रही है। इसके लिए मैं दिल्ली की भाजपा सरकार को बहुत बहुत बधाई देता हूं। 11 सालों तक दिल्ली विकास में पिछड़ी रही : रेखा गुप्ता इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "11 सालों तक दिल्ली विकास में पिछड़ी रही। दिल्ली के लोगों की उम्मीदें और सपने खत्म हो गए। दिल्ली ने विकास के सपने देखना बंद कर दिया। दिल्ली के लोग पानी-सीवेज और हेल्थकेयर जैसी बेसिक सुविधाओं के लिए तरसते रह गए। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनावों में दिल्ली के लोगों ने उन लोगों को करारा जवाब दिया, जो खुद को दिल्ली का मालिक समझते थे।'' रेखा गुप्ता ने केजरीवाल को बताया घमंडी उन्होंने कहा कि घमंडी केजरीवाल कहता था, "मुझे हराने के लिए तुम्हें दोबारा जन्म लेना पड़ेगा", लेकिन दिल्ली के लोगों ने इसी जन्म में इसी रामलीला मैदान में बीजेपी सरकार बनाकर दिल्ली का माहौल बदल दिया। दिल्ली के लोगों ने दिखा दिया कि अगर वे किसी को प्यार और स्नेह से सत्ता की कुर्सी पर बिठा सकते हैं, तो उसे नीचे गिराना भी जानते हैं।'' रविवार को भाजपा द्वारा दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के एक वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर दिल्ली सरकार द्वारा जल्द ही दिल्लीवासियों को कई और तोहफे देने की योजना है। 20 फरवरी को दिल्ली सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड भी पेश करेगी, जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि हो सकते हैं। दिल्ली के लोगों से किए वादों को पूरा करने की अधिक खुशी : पंकज सिंह दिल्ली के मंत्री पंकज सिंह ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि आज हमारी सरकार को सत्ता में आए एक साल पूरा हो गया है। इसी दिन मैं विधायक बना था। इससे भी अधिक खुशी की बात यह है कि हम दिल्ली के लोगों से किए गए वादों को पूरा कर रहे हैं। आज हमने दिल्ली के लोगों के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की हैं। हम दिल्ली और पानीपत के बीच कनेक्टिविटी भी बढ़ा रहे हैं। इसलिए, मैं खुश हूं कि हमारा काम दिन-ब-दिन आगे बढ़ रहा है। वहीं, दिल्ली से बीजेपी विधायक अनिल गोयल ने भी एएनआई से बातचीत में कहा कि यह जश्न दिल्ली के लिए और दिल्ली के पर्यावरण को ठीक करने के लिए है। दिल्ली की प्रदूषित हवा को ठीक करने के लिए, आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष 500 ईवी बसों का उद्घाटन कर रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री पंकज सिंह और हमारी पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं।  

सिर्फ ‘नीच’ बोलना SC/ST ऐक्ट के तहत अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने दी बड़ी व्याख्या

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे सामान्य अपमानजनक शब्द कह देने मात्र से एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) ऐक्ट अपने-आप लागू नहीं होता। जस्टिस वीरेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह ऐक्ट तभी लगाया जा सकता है, जब यह साबित हो कि अपमान खास तौर पर जाति के आधार पर किया गया था और आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी।   क्या है मामला यह मामला वर्ष 2011 में आईआईटी जोधपुर से जुड़े एक विवाद से संबंधित है। उस समय सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और कथित रूप से अधिकारियों को ‘नीच’ और ‘भिखारी’ जैसे शब्द कहे। अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान मानते हुए एफआईआर दर्ज करवाई और एससी/एसटी ऐक्ट की धारा के साथ आईपीसी की धाराएं भी जोड़ी गईं। आरोपियों की क्या दलील आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका देते हुए कहा कि उन्हें अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी नहीं थी और बोले गए शब्द जाति का संकेत नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए इसे जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस्तेमाल किए गए शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करते और ना ही ऐसा कोई प्रमाण है कि आरोपियों को अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी ऐक्ट लगाने के लिए जाति-आधारित अपमान का स्पष्ट और ठोस प्रमाण होना आवश्यक है। इस आधार पर कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने और उनसे धक्का-मुक्की से संबंधित आईपीसी की धाराएं बनी रहेंगी और इन्हीं धाराओं पर मामला आगे चलेगा।  

दरभंगा शर्मसार: मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या, सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा

दरभंगा बिहार के दरभंगा में एक छह साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की गई। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के बेला में शनिवार की रात छह साल की बच्ची से रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके कपड़े पर खून के धब्बे मिले हैं। उसकी पहचान विकास महतो (22) के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया है। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया है। आरोपी को सौंपने की मांग पर अड़े लोग उसे तालिबानी सजा देने की जिद पर अड़े हैं। पुलिस और पब्लिक आमने सामने है। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया। मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरीय अधिकारी मौजूद हैं।   घटना के विरोध में स्थानीय लोगों और परिजनों ने मुख्य मार्ग को सुंदरपुर बेला मंदिर के पास जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी आरोपित को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी भी घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के लिए एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया है। मौके पर पांच थानों की पुलिस तैनात है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। रेप-मर्डर के बाद सड़क पर आगजनी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि बच्ची का शव बरामद कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बच्ची कादिराबाद की रहने वाली थी। वह बेला में अपने ननिहाल आयी थी। वह शनिवार की शाम से ही घर से लापता थी। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। देर रात गांव के बाहर तालाब के पास कुछ कुत्ते भौंक रहे थे। इसके बाद परिवार के लोगों को शक हुआ। परिजन मौके पर पहुंचे तो तालाब के किनारे दीवार के पास बच्ची खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि घटना के समय तीन बच्चियां तालाब किनारे खेल रही थीं। इसी दौरान आरोपित ने तीनों को पकड़ने की कोशिश की। एक बच्ची उसके हाथ लग गई, जबकि दो अन्य बच्चियां वहां से भाग निकलीं। आरोपित बच्ची को अंधेरे की ओर ले गया और जहां उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।