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भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक मेट्रो सेवा शुरू, राजधानी को मिलेगा सैटेलाइट शहरों से कनेक्शन

भोपाल  मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा। भोपाल शहर में 6 लाइनें तय अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा। उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी। सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी? बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है। -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त

चंबल में रेत माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 2 दिन में 4 करोड़ से अधिक की अवैध रेत नष्ट, मुरैना में पकड़े गए माफिया

मुरैना  चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की. चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी.  कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा. 

फर्जी बिल और दोहरे भुगतान के मामले में जिला प्रबंधक की सेवा समाप्त, 2.80 लाख के गबन पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई

उमरिया जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया है। फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सामने आई खबरों के बाद कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला प्रबंधक (कृषि) महेन्द्र कुमार बारसकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। यह आदेश मध्य प्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला स्तर पर प्रदत्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के आधार पर जारी किया गया है।  कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महेन्द्र कुमार बारसकर पर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इन्हीं कारणों से उनकी संविदा नियुक्ति को तत्काल समाप्त किया गया है। आदेश जारी होते ही प्रभावशील हो गया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि शासकीय योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब अमर उजाला ने ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए फर्जी भुगतान और गबन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में बताया गया था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय की स्वीकृत राशि का एक बार भुगतान होने के बावजूद उसी दावे का दोबारा भुगतान किया गया। इस दोहरे भुगतान से 1,43,440 रुपये का गबन सामने आया। इसके अलावा बिना सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कुल मिलाकर 2,80,123 रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ। मामले की शिकायत जिला परियोजना प्रबंधक चंद्रभान सिंह द्वारा की गई थी। इसके बाद जिला मिशन प्रबंधन इकाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अंतरिक निरीक्षण के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि कुछ भुगतान एक ही स्वीकृति आदेश के आधार पर दो बार किए गए, जबकि कुछ भुगतान बिना किसी वैध स्वीकृति के कर दिए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया के निर्देश पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर राशि निकाले जाने की पुष्टि हुई है। धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है, हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।  प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई और आखिरकार कलेक्टर ने कड़ा निर्णय लेते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की। यह फैसला न केवल इस मामले में अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मीडिया की सक्रियता और पारदर्शिता कैसे सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभाती है। अब सबकी निगाहें आगे की पुलिस जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।  

लक्ष्मण तिवारी ने मऊगंज से पूर्व विधायक रहते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दिया

रीवा  रीवा में कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में लक्ष्मण तिवारी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी हावी हो चुकी है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। 

बिहार विधानसभा में चर्चा के केंद्र में NEET मामला और बजट

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है और सदन का माहौल गरम रहने के आसार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही नीतीश सरकार द्वारा पेश बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। वहीं NEET छात्रा की मौत के मामले में विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की संभावना जताई जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नोत्तर काल से शुरू होगी। इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का संबंधित मंत्री जवाब देंगे। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक श्याम रजक ने उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर विभागीय प्रभारी मंत्री को जवाब देना होगा। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से जुड़े मुद्दों पर विधायक राणा रंधीर, अनिल सिंह समेत पांच विधायकों ने सरकार का ध्यान खींचा है। NEET छात्रा मौत पर विपक्ष का आक्रामक रुख NEET परीक्षा से जुड़ी छात्रा की मौत का मामला आज सदन में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में हैं। सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा कर सकता है। बजट पर होगी तीखी बहस बजट सत्र के दूसरे दिन नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह पिछले बजट से करीब 30,694 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए पांच नए एक्सप्रेस-वे, सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन करने और पटना मेट्रो के विस्तार जैसी घोषणाएं की हैं। शिक्षा और किसानों पर खास फोकस इस बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे अधिक 68,216.95 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं किसानों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि के साथ मिलाकर अब किसानों को सालाना 3,000 रुपये मिलेंगे। इससे 75 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। कल्याण, स्वास्थ्य और उद्योग की बड़ी योजनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। PMCH में पहले चरण में 1100 बेड तैयार हो चुके हैं और 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का भी ऐलान किया गया है। सदन में सियासी तल्खी भी दिखी बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तल्खी भी सामने आई। बीजेपी विधायक भगवान कुशवाहा ने राजद विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने दौर के नरसंहार और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस बयान से सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज के सत्र पर सबकी नजर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, बजट की समीक्षा और NEET मामले पर संभावित हंगामे के चलते आज का सत्र काफी अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

देवघर की शिव बरात में साइबर ठगी के खिलाफ ‘हैकर दैत्य’ झांकी करेगी जागरूक

देवघर. महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है। इस माैके पर देवघर में शाम में निकलने वाली शिव बरात में समाज से भटक गयी पीढ़ी को संदेश देने वाली झांकी आपको अपनी ओर खींच लेगी। साइबर अपराध में देवघर पहचान बना रहा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा बैद्यनाथ की नगरी में महाशिवरात्रि के दिन 32 साल से अदभुत शिव बारात निकलता है। बारात में हर साल आकर्षक झांकी निकलती है। वह किसी ना किसी थीम पर आधारित होती है। साल 2026 के शिव बरात का मुख्य आकर्षण में एक समाज को जागरूक करता हैकर दैत्य होगा। कलाकार ने साइबर क्राइम करने वाले को दानव के तुल्य माना है। जिसकी झांकी तैयार हो रही है। हैकर दैत्य को लैपटाप पर क्राइम करते दर्शाया जाएगा। कलाकार लक्ष्मण राउत बताते हैं कि युवा पीढ़ी में आए भटकाव को रोकने के लिए यह जागरूक करती झांकी होगी। साइबर क्राइम करने वाले समाज में दैत्य की तरह हैं जो किसी की खून-पसीने की कमाई को चट कर जाते हैं। आज बदलते जमाने में साइबर ठगी की घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गयी है। एक से एक तकनीक का इजात कर वह भोले भाले लोगों को मिनटों में ठग लेते हैं। उनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को उनके बैंक एकाउंट से उड़ा देते हैं। इधर सरकारी रिपोर्ट को देखें तो साइबर ठगी में देवघर तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। नेशनल क्राइम इंडेक्स की मानें तो साइबर ठगी के मामले में देवघर देश में पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। सुलगता मुंड के माथा से आग और मुंह से निकलेगा धुंआ शिव बरात में निकलने वाली झांकी व साज-सज्जा के अध्यक्ष मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि बरात की हर एक झांकी समाज को संदेश देने वाली होगी। सबसे भयावह और डरावना सुलगता मुंड होगा। जो 12 फीट लंबा और पांच फीट चौड़ा होगा। सुलगता मुंड चारों ओर घूमता रहेगा। जिसके माथा और कान से आग निकलेगा। जबकि वह मुंह खोलेगा तो धुंआ निकलेगा। एक झांकी में यह दिखाया जाएगा कि पिंजरा में एक झूला लगा है और उस पर कंकाल झूल रहा है। यह उन युवाओं को सचेत करेगा जो नशा का सेवन कर रहे हैं। एक समय ऐसा आएगा कि वह इसी तरह एक पिंजरे में बंद होकर बैठे रहेंगे। अंतरिक्ष में शिव की पूजा का एक दृश्य होगा। यह बाबा मंदिर में स्थापित शिवलिंग को केंद्रित कर होगी।  पहली बार महाकाल का विकराल आकार शिव बरात में पहली बार महाकाल का विकराल आकार दिखेगा। यह लाइव होगा। जिसकी तैयारी चल रही है। शिव बारात को 1999 से आकार देने वाले और झांकी को नयी दिशा देने वाले ख्याति प्राप्त कलाकार मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि नारी शक्ति को केंद्रत करती एक झांकी होगी। भारत ने अभी विश्व कप जीता है। समिति के अध्यक्ष अभिषेक आनंद के सुझाव पर नारी शक्ति को खेल में आगे बढ़ाने वाली झांकी होगी। झांकी में नरभक्षिणी को गुड्डा राउत आकार दे रहे हैं। जिसमें नरभक्षिणी बारात में खड़े लोगों पर झपट्टा मारती दिखेगी।

पाकिस्तान से भेजी 12 किलो हेरोइन के साथ आठ आरोपी भी गिरफ्तार

अमृतसर. पुलिस और सीमा सुरक्षा बल ने अमृतसर, तरनतारन व लुधियाना के जगराओं में 12 किलो हेरोइन बरामद कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया है अमृतसर में काउंटर इंटेलिजेंस (सीआइ) की टीम ने हेरोइन तस्करी गिरोह के चार सदस्यों को बुधवार की दोपहर गिरफ्तार किया है। आरोपितों से पांच किलो हेरोइन बरामद करके स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल में केस दर्ज किया गया है। इसी तरह तरनतारन में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ ने मंगलवार रात को पाकिस्तान से आए ड्रोन को फायरिंग कर गिरा दिया। बुधवार सुबह सर्च अभियान के दौरान ड्रोन के अलावा चार किलो 375 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। थाना वल्टोहा में अज्ञात तस्करों के खिलाफ केस दर्ज करके पड़ताल की जा रही है। वहीं, जगराओं में पाकिस्तान से हेरोइन मंगवा कर क्षेत्र में बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को सीआइए टीम ने गिरफ्तार किया है।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की पहल से सड़कों के लिए 2155.97 लाख रुपए मंजूर

रायपुर. आरंग विधानसभा क्षेत्र में विकास अब घोषणा नहीं, जमीनी सच्चाई बनता जा रहा है। क्षेत्र की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और निर्णायक कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने सड़क विकास की बड़ी योजना को हरी झंडी दे दी है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की सतत पहल और प्रभावी समन्वय का परिणाम है। लोक निर्माण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतर्गत जिला रायपुर के गोढ़ी–तोड़गांव–बड़गांव मार्ग के 9.00 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के लिए ₹2155.97 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना में सड़क निर्माण के साथ-साथ पुल–पुलिया का निर्माण भी शामिल है, जिससे क्षेत्रीय यातायात को स्थायी समाधान मिलेगा। इस सड़क के उन्नयन से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। किसानों को मंडियों तक पहुंच, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों तक सुविधा और व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह योजना आरंग विधानसभा के आर्थिक और सामाजिक विकास की धुरी साबित होगी। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकास को प्राथमिकता नहीं, प्रतिबद्धता मानकर कार्य कर रही है। आरंग विधानसभा क्षेत्र में लगातार मिल रही स्वीकृतियां इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार विकास को काग़ज़ों से निकालकर ज़मीन पर उतार रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए जन प्रिय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री अरुण साव एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में भी आरंग विधानसभा को अधोसंरचना, सड़क, सिंचाई एवं जनसुविधाओं से जुड़ी अनेक नई सौगातें मिलती रहेंगी।

भोपाल में विकसित होगी देश की सबसे उन्नत नॉलेज और AI सिटी, 3700 एकड़ में होगा प्रोजेक्ट

 भोपाल  भोपाल अब देश के भविष्य के टेक–एजुकेशन मैप पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। राजधानी के भौंरी क्षेत्र में 3700 एकड़ (1500 हेक्टेयर) भूमि पर देश की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित की जाएगी। यह प्रोजेक्ट केवल एक एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश को देश का बड़ा AI हब बनाने की दिशा में काम होगा। इस परियोजना के लिए 20 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल किए हैं। एजेंसी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और फरवरी के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। भौंरी में 3700 एकड़ जमीन पर भारत की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी विकसित होने जा रही है। यह प्रोजेक्ट केवल एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि यह रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनेगा। बीडीए इसकी नोडल एजेंसी है, जबकि आइसर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च) इसका पूरा रोडमैप तैयार करेगा। प्रोजेक्ट के लिए अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट को लेकर 20 से ज्यादा ग्लोबल एजेंसियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट दाखिल किया है। चयन प्र्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस माह के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। नॉलेज एवं एआई सिटी के रोडमैप पर गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी रखी गई है। इसमें नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित केंद्रीय संस्थानों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्य भाग लेंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने आइसर को एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए 8 सदस्यीय कोर कमेटी बनी है, जिसके कन्वीनर प्रो. सौरभ दत्ता हैं। सुपरविजन आइसर डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। बीडीए ने जमीन की पहचान के बाद ईओआई प्रक्रिया पूरी कर ली है। बीडीए सीईओ श्यामवीर सिंह ने बताया कि देश-विदेश की 20 से ज्यादा एजेंसियों ने रुचि दिखाई है। डेवलपमेंट एजेंसी क्या करेगी     पूरे प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करेगी     ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर कैंपस डिजाइन     बड़े पैमाने पर ग्रीन जोन और ओपन स्पेस     ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन आधारित स्मार्ट ट्रांसपोर्ट     पीपीपी मॉडल, जॉइंट वेंचर और इंटीग्रेटेड पार्टनरशिप के विकल्प भौंरी क्षेत्र में पहले से मौजूद है एजुकेशन इको-सिस्टम देश के कई राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र एजुकेशन सिटी की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन भोपाल की नॉलेज–AI सिटी का कॉन्सेप्ट अलग होगा। भौंरी क्षेत्र में पहले से आईसर भोपाल, निफ्ट, राष्ट्रीय फॉरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, अटल बिहारी वाजपेयी पॉलिसी रिसर्च सेंटर, एमपी पुलिस अकादमी और शंकर दयाल शर्मा आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट मौजूद हैं। इसी क्लस्टर में ट्रिपल आईटी (IIIT) कैंपस के निर्माण का प्रस्ताव भी है। इन संस्थानों की मौजूदगी से यहां पहले से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार है, जहां AI, स्पेस टेक, फॉरेंसिक, पब्लिक पॉलिसी, हेल्थ और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में साझा रिसर्च की जा सकेगी। IISER तैयार कर रहा है रोडमैप नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र शासन ने नॉलेज–AI सिटी के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी IISER भोपाल को सौंपी है। IISER ने पिछले वर्ष फरवरी में एक ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन किया था, जिसके बाद इस परियोजना को सभी संस्थानों को साथ लेकर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी IISER के डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। फरवरी के आखिर तक एजेंसी नियुक्त होगी भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने जमीन की पहचान के बाद EOI प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले यह परियोजना 2000 एकड़ में प्रस्तावित थी, जिसे बढ़ाकर अब 3700 एकड़ कर दिया गया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में नॉलेज–AI सिटी को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाए। प्रोजेक्ट के कन्वीनर प्रोफेसर सौरभ दत्ता ने बताया कि इस परियोजना पर पिछले एक वर्ष से योजना बनाई जा रही है। नॉलेज और AI सिटी के माध्यम से ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है, जहां शिक्षा के साथ रिसर्च और इंडस्ट्री मिलकर काम करें। यह एक पूरी सिटी होगी, जिसे हायर एजुकेशन के साथ अर्बन डेवलपमेंट, हॉस्पिटल और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा।

राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन

राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन लखनऊ  गन्ना किसानों की प्रदेश के अंदर क्या स्थिति थी..वर्ष 2000 से 2017 के बीच में गन्ना किसानों को कुल ₹2,14,000 करोड़ का भुगतान हुआ है, यानी 17 वर्षों में ₹2,14,000 करोड़ का. और 2017 से लेकर 2025 के बीच में, इन 8-9 वर्षों में हम लोगों ने ₹3,00,000 करोड़ अन्नदाता किसानों के खाते में गन्ना किसानों के खाते में सीधे पैसा दिया है,17 वर्ष में जितना नहीं हुआ, उसके आधे वर्षों में उससे भी हम लोगों ने ₹86,000 करोड़ अधिक किसान के खाते में भेजे हैं.. आज एक क्विंटल का हम ₹400 अन्नदाता किसान को दे रहे हैं, गन्ना किसान को दे रहे हैं,  ये सरकार के द्वारा उठाए गए कदम हैं और इसके माध्यम से लाभान्वित होने वाले किसानों का परिणाम है.. आज यूपी इथेनॉल उत्पादन में देश के अंदर नंबर एक पर है। गन्ना उत्पादन में देश का कुल गन्ना उत्पादन का 55 फीसदी केवल यूपी कर रहा है, चीनी उत्पादन में भी देश के अंदर यूपी नंबर एक पर है..