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मध्य प्रदेश में मानसून मेहरबान, 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी; मौसम विभाग ने बताया कब तक जारी रहेगा दौर

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून ने पूरी ताकत के साथ एंट्री मार दी है. मानसून ने मध्य प्रदेश को पूरे तरीके से कवर कर लिया है. भोपाल, इंदौर सहित हर जिले में बारिश का दौरा देखने को मिल रहा है. इसी बीच बिजली गिरने सहित हादसों की खबरें भी सामने आ रही है. अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. अब चूंकि इस बार मध्य प्रदेश में मानसून तय टाइम से देरी से आया था. ऐसे में मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी भरपाई के लिए मानसून अधिक समय तक सक्रिय रह सकता है. आर्टिकल में जानिए मानसून की गतिविधियां।  कब तक एक्टिव रहेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है. इसलिए फिलहाल सितंबर तक इसके प्रभावी बने रहने की संभावना है. लेकिन मानसून की सक्रियता पूरी तरह मानसूनी ट्रफ की स्थिति पर डिपेंड करती है. ऐसे में बीच-बीच में कुछ दिनों के लिए बारिश कम हो सकती है. इसके बाद ट्रफ के अनुकूल होने पर बारिश का दौर फिर से तेज होने की संभावना रहेगी. सितंबर के बाद मानसून लौटना शुरु हो जाएगा।  मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ''मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव सामान्यतः जून से सितंबर तक रहता है. इस दौरान मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं रहता, बल्कि इसकी तीव्रता मानसून ट्रफ की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है. वहीं बीच-बीच में ब्रेक की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन फिर मानसून दोबारा सक्रिय हो जाता है. मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई सामान्यतः सितंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी होती है।  कैसे आता है मानसून, कैसे बनते हैं बादल मानसून भारत में सबसे पहले केरल में पहुंचता है. मानसून के बनने का प्रोसेस भी काफी रोचक है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून गर्मियों में जमीन के तेजी से गर्म होने और समुद्र से उठने वाली नमी वाली हवाओं के कारण आता है. हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर हवाएं भारत की ओर आती हैं. नमी वाली हवाएं ठंडी होकर घने बादलों में तब्दील हो जाती हैं और बारिश होने लगती है. मानसून 15 जून से भारत में एक्टिव हो जाता है. जो सितंबर तक चलता है. सिंतबर के बाद मानसून विदा लेने लगता है।  22 जिलों में होगी भारी बारिश 7 जुलाई सुबह 8:30 से 8 जुलाई सुबह 8:30 तक विदिशा, रायसेन, शहडोल और उमरिया जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, सीधी, रीवा, मऊगंज, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, सिंगरौली, सतना और अनूपपुर सहित 22 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात एवं तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल सहित 28 जिलों में झंझावात, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।  7 जुलाई सुबह 8:30 से 9 जुलाई सुबह 8:30 तक रायसेन, गुना, अशोकनगर और सागर जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, श्योपुरकलां, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित 16 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट है. वहीं भोपाल सहित 34 जिलों में झंझावात, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।  9 जुलाई सुबह 8:30 से 10 जुलाई सुबह 8:30 तक गुना और अशोकनगर में अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है. राजगढ़, आगर, मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, श्योपुरकलां, कटनी, पन्ना, दमोह, सागर और छतरपुर सहित 13 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा सहित 39 जिलों में वज्रपात, झंझावात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। 

दतिया उपचुनाव का बिगुल बजा! 13 जुलाई को नामांकन, क्या दोहराई जाएगी मिश्रा बनाम भारती परिवार की सियासी टक्कर?

दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां पहले से ही तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने बैठक कर संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की है। भाजपा की भोपाल स्थित 74 बंगला में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा कर पैनल तैयार किया गया, जिसे उसी दिन केंद्रीय नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दिया गया। 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान निर्वाचन आयोग ने दतिया उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और मतगणना 4 अगस्त को की जाएगी। भाजपा ने शुरू की चुनावी रणनीति भाजपा नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की टीम दतिया में उतारने की रणनीति बनाई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संगठन बूथ से लेकर जिला स्तर तक लगातार सक्रिय है और उपचुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत सूत्रों के अनुसार भाजपा में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सबसे प्रमुख दावेदार हैं। वे पिछले कुछ समय से लगातार दतिया के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुनावी माहौल तैयार कर रहे हैं। पार्टी के भीतर भी उन्हें सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है। कांग्रेस में टिकट को लेकर कई दावेदार     कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और सिद्धार्थ कुशवाहा की समिति गठित की है, जो राजनीतिक हालात का आकलन कर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को रिपोर्ट सौंपेगी। टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक घनश्याम सिंह, अवधेश नायक और अन्य नेता सक्रिय हैं।     सूत्रों के अनुसार आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। माना जा रहा है कि वह अपने बेटे अंकित भारती को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वह पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात करा चुके हैं। आसपा ने घोषित किया प्रत्याशी दतिया उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवार के रूप में दामोदर यादव के नाम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही दतिया का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावनाएं भी चर्चा में हैं, हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है।

सभी सरकारी दस्तावेज होंगे ऑनलाइन, हरियाणा सरकार ने विभागों को दिए निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा में दस्तावेजों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने को लेकर सरकार ने सभी विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश में सभी कानूनों, नियमों, सरकारी आदेश, सर्कुलर, अधिसूचनाओं, नीतियों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों का केंद्रीकृत ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जाना है। ताकि सभी दस्तावेज विभागवार, विषयवार और अंतिम अपडेट की तारीख के साथ ऑनलाइन उपलब्ध हो जाए और आसानी से सर्च किए जा सके। मुख्य सचिव ने भेजा रिमाइंडर मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों को रिमाइंडर जारी कर कहा है कि नौ जून को दिए गए निर्देशों के बावजूद कई विभागों से अब तक कार्रवाई रिपोर्ट नहीं मिली है। विभागों से कहा गया है कि बिना और देरी किए एक्शन टेकन रिपोर्ट निर्धारित ई-मेल पर भेजी जाए, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। साथ ही सभी विभागों को अपने-अपने कानूनों, नियमों और अन्य दस्तावेजों की संपादन योग्य डिजिटल कॉपी तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी बताना होगा कि कौन-से नियम या कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं और किनमें संशोधन, सरलीकरण या निरस्तीकरण की जरूरत है। विभागों की छह बिंदुओं पर समीक्षा सरकार नियामकीय सुधार के तहत सभी विभागों के नियमों की छह बिंदुओं पर समीक्षा करा रही है। इसमें अनावश्यक लाइसेंस खत्म करना, पुराने और अप्रासंगिक नियम हटाना, जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू करना तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है।  

राम मंदिर विवाद के बीच BJP सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की कांग्रेस को खुली चेतावनी, RSS पर बयान से गरमाई सियासत

खंडवा  मध्य प्रदेश की सियासत में अयोध्या के श्री राम मंदिर को लेकर एक बार फिर जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि मंदिर में बिना कलश स्थापना के ही प्राण प्रतिष्ठा की गई और भगवान राम की प्रतिमा का रंग भी काला है। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं वजहों से देश में 'दंड' मिल रहा है और वर्तमान की अप्रिय घटनाएं इसी का नतीजा हैं। बीजेपी सांसद का करारा पलटवार दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद बीजेपी पूरी तरह हमलावर हो गई है। बुरहानपुर पहुंचे खंडवा संसदीय क्षेत्र के बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सांसद ने साफ लफ्जों में कहा कि ऐसी ही बातें कह-कहकर दिग्विजय सिंह ने खुद का और अपनी कांग्रेस पार्टी का सत्यानाश कर लिया है। 'प्रभु राम ने कर दिया बेड़ापार' जो लोग कभी भगवान राम और रामसेतु को काल्पनिक बताते थे, प्रभु श्री राम ने आज उनकी और उनकी पार्टी की क्या स्थिति कर रखी है, यह सब देख रहे हैं। दरअसल, इनका खुद का मन काला है। इन्हें हर समय हिंदू समाज पर उंगली उठाने में ही आनंद आता है। प्रभु श्री राम इनको ऐसी ही सद्बुद्धि देते रहें और इनका जो बेड़ापार हुआ है, वह आगे भी ऐसे ही होता रहे। जब से राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ है, इनके पेट में दर्द हो रहा है। ये लोग गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।- ज्ञानेश्वर पाटिल, सांसद, खंडवा आरएसएस पर दिया बड़ा बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भी सांसद पाटिल ने सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि संघ एक पवित्र संस्था है और इसके मार्गदर्शन में सब काम कर रहे हैं। इस पर गलत आरोप लगाने वाले और उंगली उठाने वाले तत्वों की उंगली और हाथ तोड़ दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि चंदे के मामले में जिन कर्मचारियों की गड़बड़ी सामने आई थी, उन पर पहले ही एक्शन लिया जा चुका है और दोषियों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।  

इंदौर हाईकोर्ट का अहम फैसला, महिला अपनी इच्छा से गर्भ जारी रखने या खत्म करने का निर्णय ले सकती है

इंदौर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कानून में निर्धारित अवधि के भीतर गर्भावस्था होने पर यह निर्णय पूरी तरह महिला का होगा कि वह गर्भ जारी रखना चाहती है या उसका समापन कराना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक नहीं है। इसी के साथ खंडपीठ ने 13 सप्ताह की गर्भवती विवाहित महिला को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) ऐक्ट के तहत गर्भसमापन की अनुमति प्रदान कर दी। यह आदेश 29 जून 2026 को पारित किया गया। मामला इंदौर संभाग के एक हाई प्रोफाइल दंपती से जुड़ा है, जिनका विवाह करीब दो वर्ष पहले हुआ था। विवाह के बाद दोनों के बीच लगातार विवाद बढ़ने लगे। इसी दौरान महिला गर्भवती हो गई। गर्भावस्था लगभग 13 सप्ताह की थी, लेकिन पति-पत्नी के रिश्तों में आई खटास के कारण दोनों अलग रहने लगे। महिला का कहना था कि वैवाहिक संबंध टूटने की स्थिति में बच्चे का जन्म उसके लिए मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से कठिन होगा। भविष्य को देखते हुए उसने गर्भ जारी नहीं रखने का निर्णय लिया और अधिवक्ता जी.पी. सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी। कोर्ट ने क्या कहा जब महिला अलग रहने लगी तो महिला नहीं चाहती थी कि बच्चा जन्म ले. इसलिए उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. फिर कोर्ट ने 13 सप्ताह की गर्भवती विवाहित महिला को गर्भपात की अनुमति दी है. साथ ही स्पष्ट किया है कि कानून द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर गर्भावस्था है तो महिला खुद तय कर सकती है कि वह गर्भ रखना चाहती है या नहीं. उसे गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक नहीं है।  क्या है प्रेगनेंसी एक्ट कोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भावस्था का मानसिक और शारीरिक प्रभाव सबसे अधिक महिला पर पड़ता है, इसलिए गर्भ जारी रखना है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय महिला का ही होगा. कोर्ट ने कहा कि महिला की गर्भावस्था 13 सप्ताह और एक दिन की है, जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) एक्ट, 1971 की निर्धारित सीमा के भीतर है. ऐसे मामलों में अधिकृत डॉक्टर्स कानून के अनसार गर्भसमापन की प्रक्रिया कर सकते हैं।  पति को नोटिस, फिर भी कोर्ट में नहीं हुआ उपस्थित सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पति को नोटिस जारी किया था, जिसकी विधिवत तामील भी हो गई थी, लेकिन वह किसी भी तारीख पर अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। वहीं, राज्य शासन की ओर से भी याचिका का कोई विरोध नहीं किया गया। अनुच्छेद-21 के तहत महिला की स्वायत्तता को बताया अधिकार खंडपीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले 'एक्स बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर' का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक महिला को अपने शरीर और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह उसकी व्यक्तिगत गरिमा और मौलिक अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने फैसले में महिला के प्रजनन अधिकारों को बताया सर्वोपरि हाई कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि अवांछित गर्भावस्था का सबसे अधिक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रभाव महिला पर पड़ता है। इसलिए यह निर्णय कि गर्भावस्था को जारी रखा जाए या उसका समापन कराया जाए, पूरी तरह महिला का व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध मातृत्व स्वीकार करने या गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की गर्भावस्था 13 सप्ताह और एक दिन की थी, जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम, 1971 में निर्धारित वैधानिक सीमा के भीतर आती है। ऐसे मामलों में कानून अधिकृत चिकित्सकों को आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण और प्रक्रिया का पालन करते हुए गर्भसमापन की अनुमति देता है। इसलिए याचिकाकर्ता का मामला भी कानूनी रूप से गर्भपात की अनुमति दिए जाने योग्य पाया गया। सहमति के बाद पीछे हट गया पति महिला ने अपने एडवोकेट जीपी सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई और गर्भपात की अनुमति मांगी गई। कोर्ट को बताया कि पति के साथ वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय हो चुका था, लेकिन बाद में पति अपने रुख से पीछे हट गया। ऐसे में गर्भावस्था जारी रखना उसके लिए मानसिक तनाव, असुरक्षा और भावनात्मक पीड़ा का कारण बन रहा है। पति को नोटिस, फिर भी नहीं हुआ पेश मामले में पति को नोटिस जारी किया गया था और उसकी तामील भी हो चुकी थी, लेकिन वह सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। राज्य शासन की ओर से भी याचिका पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। कोर्ट ने माना प्रजनन स्वतंत्रता मौलिक अधिकार मामले में कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले ‘एक्स बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत महिला को अपनी शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। जानिए क्या और क्यों दी गर्भपात की अनुमति     कोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भावस्था का मानसिक और शारीरिक प्रभाव सबसे अधिक महिला पर पड़ता है, इसलिए गर्भ जारी रखना है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय महिला का ही होगा।     कोर्ट ने कहा कि महिला की गर्भावस्था 13 सप्ताह और एक दिन की है, जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) एक्ट, 1971 की निर्धारित सीमा के भीतर है। ऐसे मामलों में अधिकृत डॉक्टर्स कानून के अनुसार गर्भसमापन की प्रक्रिया कर सकते हैं।     कोर्ट ने यह भी माना कि वैवाहिक स्थिति में बदलाव, पति-पत्नी का अलग रहना और तलाक की स्थिति भी गर्भपात की अनुमति के लिए वैध आधार हो सकते हैं।     आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। महिला की गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार हैं।     कोर्ट ने डॉक्टर्स को निर्देश दिया कि गर्भपात की प्रक्रिया स्वास्थ्य मंत्रालय और कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ की जाएं। याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने महिला को गर्भपात की अनुमति प्रदान कर दी और मामले … Read more

साइबर अपराध पर हरियाणा पुलिस की सख्ती, 31% धनवापसी के साथ जांच में बड़ी सफलता

चंडीगढ़ हरियाणा में साइबर अपराधियों से निपटने में सख्ती और जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है। विशेषकर हाट स्पाट नूंह में साइबर ठगों का नेटवर्क तोड़ने में खासी सफलता मिली है। पिछले छह महीन में 14 हजार 139 अवैध आनलाइन सामग्री हटाई गई और 3947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। डेढ़ साल के दौरान नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की है। यह राष्ट्रीय औसत 3.85 प्रतिशत से आठ गुना अधिक है। पिछले डेढ़ साल में 9100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 25 जून से ई-जीरो एफआईआर सुविधा लागू पुलिस अधीक्षक (साइबर) मयंक गुप्ता ने बताया कि साइबर अपराधियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है। 25 जून से ई-जीरो एफआइआर सुविधा लागू कर दी गई है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रानिक जीरो एफआइआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं। इससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित हो रही है। इस दौरान गृह सचिव सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल तथा गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव डा. वंदना दिसोदिया ने भी अपनी बात रखी। नूंह में पकड़े सर्वाधिक साइबर अपराधी नूंह में सर्वाधिक साइबर अपराधी पकड़े गए हैं। पिछले डेढ़ साल में हरियाणा पुलिस ने 473 एफआइआर दर्ज करते हुए 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोपितों से 751 मोबाइल फोन तथा 1442 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अतिरिक्त 43 हजार 354 मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े 5007 आइएमईआइ को ब्लाक किया गया। प्रदेश में साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है। 675 पुलिसकर्मी साइबर अपराध की जांच में जुटे प्रदेश में 675 पुलिस कर्मी साइबर अपराध जांच में कार्यरत हैं। इसके अलावा 3742 अधिकारियों ने साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से आनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में 5390 पुलिस कर्मियों को विशेष आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। हरियाणा पुलिस के दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किए गए हैं तथा 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं। समन्वय पोर्टल पर हरियाणा ने अन्य राज्यों से प्राप्त 8872 अनुरोधों में से 8,625 का निपटान कर 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता दर्ज की है।

हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल, हर जिले में मेडिकल कॉलेज की योजना

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को दैनिक जागरण के यूफोरिया कार्यक्रम में राज्य की कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर दूरगामी कार्ययोजना स्पष्ट की। बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष में बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की आधारशिला रख देंगे। सभी 534 ब्लाॅक में माॅडल स्कूल और 38 जिलों में खुलेंगे मेडिकल काॅलेज राज्य के 14 हजार से अधिक हाई स्कूलों में से सभी 534 ब्लाॅकों को चिन्हित कर वहां शानदार माॅडल स्कूल बनाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 में वोट मांगने से पहले बिहार के सभी 38 जिलों में सर्वसुविधायुक्त मेडिकल काॅलेज व अस्पताल बना दिए जाएं। इसके पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, कला संस्कृति मंत्री डाॅ. प्रमोद चंद्रवंशी, दैनिक जागरण बिहार के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी, राज्य संपादक आलोक मिश्रा, दैनिक जागरण बिहार के डिप्टी एडिटर अश्विनी कुमार सिंह आदि ने किया। 126 किमी लंबा मरीन ड्राइव बनेगा राज्य की समृद्धि में दैनिक जागरण की बड़ी भूमिका की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी माह से 213 नए डिग्री काॅलेज स्थापित करने का काम शुरू किया जा रहा है। राज्य में 126 किलोमीटर लंबा शानदार मरीन ड्राइव बनाने का काम किया जाएगा। उन्‍होंने कई अन्‍य बिंदुओं पर भी अपनी बातें रखीं। कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार के सारे जिलाधिकारियों व एसपी को पत्र भी लिख दिया गया है।राज्य में कहीं भी किसी तरह से कोई फूहड़ गाने बजते हैं, उसको कड़ाई से बंद कराएं। इसमें किसी तरह की कोताही स्‍वीकार्य नहीं है।  

बाबा बैद्यनाथ से टांगीनाथ धाम तक, जानिए झारखंड के प्रमुख शिवालय

 रांची  भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन शुरू होते ही झारखंड पूरी तरह शिवमय हो गया है। राज्य के प्रसिद्ध शिवालयों में सुबह से ही बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं। देवघऱ से लेकर रांची, गुमला और खूंटी तक लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। अगर आप भी इस सावन बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेना चाहते हैं, तो झारखंड के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों की यात्रा आपकी आस्था को और मजबूत बना सकती है। बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सावन के महीने में यहां लाखों कांवरिये और श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। हर साल आयोजित होने वाला श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, इसलिए इसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। बासुकीनाथ धाम, देवघर-दुमका मार्ग देवघर-दुमका मार्ग पर स्थित बासुकीनाथ धाम का धार्मिक महत्व बेहद खास है। मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ में पूजा किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। सावन के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा रहता है। पहाड़ी मंदिर, रांची राजधानी रांची का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर सावन में श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बन जाता है। करीब 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 468 सीढ़ियां चढ़़नी पड़ती है। सावन में रोजाना फूलों से बाबा का भव्य श्रृंगार होता है और सुबह तड़के से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। आमरेश्वर धाम (अंगराबाड़ी), खूंटी खूंटी जिले में स्थित आमरेश्वर धाम, जिसे श्रद्धालु अंगराबाड़ी के नाम से भी जानते हैं, सावन में आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। इस प्राचीन मंदिर को झारखंड का मिनी बाबा धाम कहा जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने और भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। टांगीनाथ धाम, गुमला गुमला जिले का टांगीनाथ धाम अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव के अनेक प्राचीन शिवलिंग और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। मान्यता है कि भगवान परशुराम का दिव्य फरसा आज भी यहां स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां विशेष पूजा और श्रावणी मेले का आयोजन होता है। क्यों खास है झारखंड का सावन? झारखंड में सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा, लाखों श्रद्धालुओं की पदयात्रा और शिवालयों में होने वाले विशेष अनुष्ठान इस महीने को और भी खास बना देते हैं। अगर आप इस सावन आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो झारखंड के ये शिव मंदिर आपकी सूची में जरूर होने चाहिए।  

दिल्ली-पंजाब से 6 संदिग्ध गिरफ्तार, हथियार और पेट्रोल बम बरामद

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली और पंजाब से 6 संदिग्धों को दबोचा है। गिरफ्तार किए गए संदिग्ध दो अलग-अलग नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे। एक नेटवर्क आतंकी गतिविधियों से जुड़ा था जबकि दूसरा अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल था। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई पिस्तौल और पेट्रोल बम बरामद किए हैं दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क के 3 संदिग्धों को पंजाब से जबकि एक को दिल्ली से पकड़ा गया था। बताया जाता है कि इन संदिग्धों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी थी। आतंकी अपने नापाक मंसूबे में कामयाब हो पाते उससे पहले ही पुलिस ने नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। दिल्ली को दहलाने की थी योजना दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया था कि संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके गुर्गों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश में जुटे थे। ये सभी संदिग्ध पकड़े जाने से बचने के लिए पाकिस्तानी आकाओं की ओर से मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। खुफिया इनपुट पर ऐक्शन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया इनपुट मिले थे कि पाकिस्तानी ISI एजेंट शहजाद भट्टी अपने गुर्गों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी वारदात को अंजाम देने की कोशिशों में जुटा है। इसके लिए इस टेरर नेटवर्क ने पंजाब के युवाओं की भर्ती की है। इसके बाद मुखबिरों से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली और पंजाब में कई जगहों पर छापेमारी की गई। टेरर नेटवर्क पर लगातार कस रहा शिकंजा दिल्ली पुलिस सेल के हाथ लगे एक गुर्गे ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह शहजाद भट्टी नेटवर्क के पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था। वह ड्रोन के जरिए हथियार जुटा रहा था। उसके खुलासे के बाद पंजाब से दो और संदिग्धों को दबोचा गया था। उनके पास से एक जिगाना पिस्टल, 4 कारतूस और 2 मोबाइल बरामद किए गए थे। बाद में दिल्ली से चौथे संदिग्ध गगनप्रीत को दबोचा गया था। इसके बाद से लगातार इस टेरर नेटवर्क के गुर्गों को पकड़ा जा रहा है।

परिवार पहचान पत्र अपडेट पर सरकार का बड़ा फैसला, वृद्धावस्था पेंशन जारी रहेगी

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हजारों बुजुर्गों में यह आशंका पैदा हो गई थी कि यदि उनके पास उम्र साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हुए तो उनकी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन बंद हो सकती है। सरकार ने अब इस चिंता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन केवल दस्तावेजों के अभाव में नहीं रुकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की जन्मतिथि का सत्यापन अभी बाकी है, उन्हें पहले की तरह नियमित रूप से पेंशन मिलती रहेगी। हरियाणा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन बुजुर्गों की थी, जिनका जन्म कई दशक पहले हुआ था और जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या अन्य सरकारी रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों की संख्या काफी अधिक है। इसे देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए नई व्यवस्था पर काम शुरू किया है। बुजुर्ग की आयु का होगा सत्यापन नई व्यवस्था के तहत यदि किसी बुजुर्ग के पास जन्मतिथि सत्यापित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो परिवार पहचान पत्र में दर्ज उसके सबसे बड़े बेटे या बेटी के जन्म संबंधी रिकार्ड के आधार पर बुजुर्ग की आयु का सत्यापन किया जा सकेगा। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला ने बताया कि इसके लिए जरूरी होगा कि बड़ी संतान का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो तथा उसकी जन्मतिथि पहले से सत्यापित हो। इस व्यवस्था से हजारों ऐसे लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो केवल दस्तावेजों की कमी के कारण परेशान थे। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और इसका सीधा संबंध पेंशन भुगतान से नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश हैं कि कोई भी पात्र नागरिक केवल सत्यापन प्रक्रिया लंबित होने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं होगा। जन्मतिथि सत्यापन के लिए चाहिएं पांच प्रमुख दस्तावेज वर्तमान में जन्मतिथि सत्यापन के लिए पांच दस्तावेज मान्य हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं कक्षा की मार्कशीट, वर्ष 2019 तक बना मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट तथा पेंशन पेमेंट आर्डर (पीपीओ) शामिल हैं। जिन लाभार्थियों के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध है, उन्हें सरकार की ओर से भेजे गए संदेश के अनुसार 30 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र में दर्ज सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपडेट और सत्यापित करने का लक्ष्य रखा गया है। हरियाणा सरकार का उद्देश्य किसी भी पात्र व्यक्ति की पेंशन या अन्य सरकारी सुविधा बंद करना नहीं, बल्कि रिकार्ड को अधिक प्रमाणिक बनाना है ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी विवाद और रुकावट के पात्र लोगों तक आसानी से पहुंचता रहे।