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मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और संरक्षित करने में देश में प्रथम

दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और संरक्षित करने में मध्यप्रदेश देश में प्रथम देश की प्राचीन मेधा को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने का महायज्ञ- अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ज्ञान भारतम् ऐप पर मध्यप्रदेश ने अपलोड की सबसे अधिक दुर्लभ पांडुलिपियाँ प्रदेश की 34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपियों पन्नों का पंजीकरण, 12 लाख से अधिक पांडुलिपियों का हुआ सत्यापन भोपाल : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सशक्त नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की धरती ने भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के विषय में देश भर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार की डिजिटल पहल 'ज्ञान भारतम् ऐप' के अनुसार, दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना दर्ज करने और उनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर आ गया है। यह सफलता राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनः स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से 3 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश ने अब तक कुल 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपियों पन्नों का पंजीकरण किया जा चुका है। 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का 'ज्ञान भारतम्' द्वारा सफलतापूर्वक सत्यापन हुआ है शेष सत्यापन की प्रक्रिया में हैं, जिनका चरणबद्ध तरीके से परीक्षण एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है। देश की प्राचीन मेधा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महायज्ञ- अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन श्री शिव शेखर शुक्ला ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि आज भी विश्वभर के मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों और संग्रहालयों में संरक्षित भारतीय पाण्डुलिपियाँ हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण, डिजिटलीकरण और पुनर्प्रसार भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इसी के साथ भारत अपनी ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करते हुए 'विश्व गुरु' की अपनी गौरवशाली पहचान को सशक्त बना रहा है। मध्यप्रदेश के जिलों के उत्कृष्ट प्रयासों ने न केवल प्रदेश की समृद्ध ज्ञान परंपरा के संरक्षण को नई दिशा दी है, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर को संरक्षित करने के राष्ट्रीय अभियान को भी मजबूती प्रदान की है। प्रदेश में पांडुलिपियों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत पांडुलिपियों के पंजीकरण में मध्यप्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 1 जुलाई तक के आकंड़ों के अनुसार इनमें भोपाल ने सबसे अधिक 24 लाख 26, हजार 172 पांडुलिपियों का पंजीकरण किया है। इसके बाद इंदौर में 3,99,477, रीवा में 2,68,763, बैतूल में 1,00,593 तथा छिंदवाड़ा में 77,094 पांडुलिपियां दर्ज की गईं। पन्ना से 64,257, सागर से 60,025, ग्वालियर से 29,870, उज्जैन से 20,995, रायसेन से 15,539, मंदसौर से 12,412, अनूपपुर से 11,829, नीमच से 8,950, मऊगंज से 8,406, खंडवा से 5,740, जबलपुर से 4,715, सतना से 4,061, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) से 4,049, गुना से 3,937, उमरिया से 3,824, दतिया से 3,179, विदिशा से 2,745, सीधी से 2,497, अशोकनगर से 1,908, बालाघाट से 1,741, शहडोल से 1,397, टीकमगढ़ से 1,290, मंडला से 957, शिवपुरी से 943, धार से 870, भिंड से 800, रतलाम से 731, मुरैना से 655, शाजापुर से 638, बड़वानी से 614, सीहोर से 607, सिवनी से 564, छतरपुर से 381, देवास से 330, श्योपुर से 310, नरसिंहपुर से 254, राजगढ़ से 198, निवाड़ी से 177, खरगोन से 171, मैहर से 146, दमोह से 133, बुरहानपुर से 120, हरदा से 84, कटनी से 83, आगर मालवा से 57, सिंगरौली से 33, झाबुआ से 17, अलीराजपुर से 8, पांढुर्ना से 3 तथा डिंडोरी से 1 पांडुलिपि का पंजीकरण किया गया। यह व्यापक सहभागिता दर्शाती है कि प्रदेश के सभी जिलों ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के राष्ट्रीय अभियान में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 'ज्ञान भारतम् ऐप' और इसका उद्देश्य 'ज्ञान भारतम् ऐप' भारत सरकार की एक अनूठी डिजिटल पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना और दुर्लभ पांडुलिपियों का एक विशाल डिजिटल अभिलेख (Digital Archive) तैयार करना है। ये भारतीय पांडुलिपियाँ केवल अतीत की स्मृतियाँ नहीं हैं, बल्कि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (विश्व एक परिवार है) की भावना से प्रेरित ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों का जीवंत स्रोत हैं, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इस डिजिटल अभियान के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए इन अमूल्य ग्रंथों तक पहुँच बेहद आसान हो गई है। पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण में नागरिक भी बन सकते हैं भागीदार ज्ञान भारतम् ऐप न केवल सूचना देता है, बल्कि आम जनता को भी इस सांस्कृतिक महायज्ञ से जोड़ता है। स्मार्ट सर्च: उपयोगकर्ता शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय और संग्रह स्थल के आधार पर किसी भी पांडुलिपि की जानकारी आसानी से खोज सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास कोई दुर्लभ पांडुलिपि उपलब्ध है, तो वे ऐप के माध्यम से उसके संरक्षण या डिजिटलीकरण के लिए सीधे अनुरोध दर्ज कर सकते हैं। आम नागरिक अपने पास मौजूद प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की जानकारी साझा कर भारत को पुनः 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान दे सकते हैं। जिलों से मिलीं दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियाँ ज्ञान भारतम् मिशन से हुए संरक्षण कार्य से कई प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का पता चला है। टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का रहस्यमयी नक्शा मिला है। इसमें प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाने वाला 'जम्बूद्वीप' का एक अत्यंत रहस्यमयी और दुर्लभ नक्शा अंकित है।चित्र में बीच में वृत्ताकार संरचना है, उसके चारों ओर पर्वत-मालाएं और क्षेत्र दिखाए गए हैं। इसी तरह पन्ना से महाकवि केशव दास रचित रसिक प्रिया(1591 ई) की हस्त लिखित पांडुलिपि श्री राम जानकी मंदिर में मिली है। यह रीतिकाल का एक प्रतिष्ठित 'लक्षण-ग्रंथ' है जो काव्यशास्त्र, श्रृंगार रस और नायिका-भेद पर आधारित है। इसमें अमूर्त शास्त्रीय नियमों को राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों और मौलिक छंदों के माध्यम से समझाया गया है। बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना हस्तलिखित 20 फीट लंबा प्राचीन … Read more

यूपी में स्टार्टअप, डेटा सेंटर और पशुधन बीमा नीति को हरी झंडी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित 5 कालीदास मार्ग पर कैबिनेट बैठक हुई। जिसमें 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शाहजहांपुर जिले की तहसील जलालाबाद नगर का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का फैसला लिया गया। सरकार के इस निर्णय के बाद नाम परिवर्तन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। बैठक के बाद आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि प्रदेश में निवेश, नवाचार और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। साथ ही यूपी स्टार्टअप नीति-2026 और डेटा सेंटर नीति-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इन नीतियों से प्रदेश में नए निवेश आकर्षित होंगे और युवाओं को उद्यमिता के बेहतर अवसर मिलेंगे। योगी कैबिनेट में 27 प्रस्तावों पर मुहर पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी। इसके तहत लघु एवं सीमांत किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा, ताकि महामारी, दुर्घटना, अपंगता या मृत्यु की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके। इसके अलावा गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड का अस्पताल और वाराणसी में ईएसआई का मेडिकल कॉलेज बनेगा। इनके लिए निशुल्क जमीन हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गईं। वाराणसी के मेडिकल कॉलेज में 50% सीटें श्रमिकों के परिवार के लिए आरक्षित होगी। तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें कानपुर के बिल्हौर में महर्षि योगी इंटरनेशनल कृषि विश्वविद्यालय, फतेहपुर में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय और गाजियाबाद में अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। एक देश में दो विधान, दो प्रधान के खिलाफ शंखनाद इससे पहले लखनऊ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने देश की अखंडता के लिए 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' के खिलाफ शंखनाद किया और 1953 में कश्मीर में बलिदान दिया। नेहरू सरकार की तुष्टीकरण नीति और धारा 370 के खिलाफ उनके सपने को पीएम मोदी के नेतृत्व में 2019 में धारा 370 हटाकर और संविधान लागू करके पूरा किया गया। सीएम ने यह भी कहा कि जिस बंगाल को उन्होंने बचाया, आज वहां भाजपा की डबल इंजन सरकार उनके स्थलों के पुनरुद्धार के लिए प्रभावी काम कर रही है।

एक जिला एक क्यूज़ीन से महिलाओं, किसानों और युवाओं को मिलेगा नया रोजगार

लखनऊ किसी भी शहर की असली रौनक उसके बाजार, गलियों और खाने की खुशबू में दिखती है। सुबह चाय की दुकान पर भीड़ लगती है, दोपहर में कचौड़ी, पूड़ी, सब्जी या चाट की दुकान चलती है और शाम को मिठाई, नमकीन, स्नैक्स और लोकल ड्रिंक की डिमांड बढ़ती है। इन छोटी-छोटी दुकानों के पीछे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि रोजगार की पूरी चेन चलती है। यूपी में ODOC यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन इसी फूड चेन को नई दिशा दे सकता है। इसका मतलब सिर्फ किसी जिले की एक डिश को नाम देना नहीं है, बल्कि जिले के फूड सेक्टर को एक एक सही तरह का सिस्टम देना है, जहां लोकल रेसिपी, किचन ट्रेनिंग, साफ-सफाई, सर्विस, पैकिंग, सप्लाई, डिलीवरी और छोटे बिजनेस को साथ जोड़ा जा सके। अगर हर जिले में उसकी खास क्यूज़ीन के आसपास फूड सेंटर, ट्रेनिंग और बिजनेस सपोर्ट बने, तो यूथ को अपने ही शहर में काम के नए मौके मिल सकते हैं। रसोई से रोजगार, फूड चेन का विस्तार फूड सेक्टर में रोजगार केवल खाना बनाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं होता। एक छोटी दुकान भी कई लोगों को काम देती है। कोई सब्जी लाता है, कोई दूध देता है, कोई मसाला सप्लाई करता है, कोई किचन में मदद करता है, कोई पैकिंग करता है, कोई पेमेंट संभालता है और कोई डिलीवरी करता है। ODOC इसी पूरी चेन को मजबूत कर सकता है। अगर किसी जिले की खास डिश पर काम बढ़ता है, तो उससे जुड़े छोटे-छोटे काम भी बढ़ते हैं। हलवाई को हेल्पर चाहिए, स्नैक यूनिट को पैकिंग स्टाफ चाहिए, लोकल कैफे को सर्विस स्टाफ चाहिए, डिलीवरी के लिए यूथ चाहिए और ऑनलाइन ऑर्डर संभालने के लिए डिजिटल स्किल वाले लोग चाहिए। इस तरह एक डिश केवल प्लेट में नहीं रहती, बल्कि रोजगार का पूरा नेटवर्क बन सकती है। जिला फूड सेंटर, स्किल का नया ठिकाना ODOC को रोजगार से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका जिला फूड सेंटर है। ऐसा सेंटर जहां लोकल यूथ को कुकिंग, किचन मैनेजमेंट, फूड सेफ्टी, सर्विस, पैकिंग, प्राइसिंग और ऑनलाइन ऑर्डर की ट्रेनिंग मिले। हर युवा अपना रेस्टोरेंट नहीं खोल सकता, लेकिन हर युवा फूड सेक्टर में कोई न कोई काम सीख सकता है। कोई असिस्टेंट कुक बन सकता है, कोई बेकरी या मिठाई यूनिट में काम कर सकता है और कोई क्लाउड किचन में काम सीख सकता है। जिला फूड सेंटर यूथ को यह समझा सकता है कि फूड बिजनेस केवल स्वाद नहीं, बल्कि टाइमिंग, साफ-सफाई, लागत, सर्विस और ग्राहक भरोसे का भी काम है। महिलाओं के हाथ का स्वाद, कमाई का नया रास्ता यूपी के घरों में कई रेसिपी ऐसी हैं, जिन्हें महिलाएं सालों से संभालती आ रही हैं। अचार, पापड़, मसाले, मिठाई, नमकीन, लड्डू, मठरी, सेव, ठेकुआ, चिप्स, चटनी और कई लोकल स्नैक्स घरों में बनते हैं। इनमें स्वाद भी होता है और भरोसा भी। ODOC महिलाओं को इस घरेलू हुनर से कमाई का रास्ता दे सकता है। अगर महिलाओं को साफ पैकिंग, सही वजन, रेट तय करने, डिजिटल पेमेंट और ऑर्डर संभालने की ट्रेनिंग मिले, तो उनका काम घर से बाहर बाजार तक जा सकता है। सेल्फ हेल्प ग्रुप भी इस मॉडल में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक समूह मिलकर लोकल डिश या स्नैक बना सकता है, दूसरा समूह पैकिंग कर सकता है और तीसरा समूह सप्लाई व ऑर्डर संभाल सकता है। इससे महिलाओं को घर के पास काम मिलता है और परिवार की इनकम को सपोर्ट मिलता है। घर का स्वाद, बाजार का साथ, महिलाओं को मिला कमाई का नया हाथ। किसान और फूड बिजनेस का सीधा लिंक फूड सेक्टर बढ़ेगा, तो उसका फायदा केवल दुकानदार को नहीं होगा, बल्कि किसान को भी इसका फायदा मिल सकता है। हर लोकल डिश के पीछे कोई न कोई कच्चा माल होता है। दूध, गन्ना, गेहूं, चावल, आलू, सब्जी, मसाले, दाल, तेल, फल और मेवा जैसे सामान सीधे खेती से आते हैं। अगर जिले की खास क्यूज़ीन पर डिमांड बढ़े, तो लोकल सोर्सिंग का रास्ता मजबूत हो सकता है। मिठाई यूनिट को दूध चाहिए, नमकीन यूनिट को बेसन और तेल चाहिए, अचार यूनिट को आम, मिर्च, नींबू या सब्जी चाहिए और पेठा जैसे प्रोडक्ट को कच्चे माल की लगातार जरूरत होती है। इससे किसान, डेयरी, छोटे सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और फूड मेकर के बीच नई चेन बन सकती है। यानी ODOC खेत से किचन और किचन से बाजार तक रोजगार का रास्ता बना सकता है। सर्विस सेक्टर को नई स्पीड आज खाने का बिजनेस केवल दुकान पर बैठकर ग्राहक का इंतजार करने तक सीमित नहीं है। अब डिलीवरी, ऑनलाइन ऑर्डर, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, रिव्यू, कस्टमर सपोर्ट और फोटो-वीडियो भी इस सेक्टर का हिस्सा हैं। ODOC के साथ अगर जिले की डिश की डिमांड बढ़ती है, तो सर्विस सेक्टर में भी काम बढ़ेगा। डिलीवरी बॉय, पैकिंग असिस्टेंट, ऑर्डर मैनेजर, सोशल मीडिया हैंडलर, फूड फोटोग्राफर, मेन्यू डिजाइनर, अकाउंट हेल्पर और कस्टमर सपोर्ट जैसे कई रोल बन सकते हैं। यूथ इन रोल्स में जल्दी ट्रेनिंग लेकर काम शुरू कर सकता है। खास बात यह है कि यह काम बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी फूड सर्विस से जुड़े मौके बन सकते हैं। स्कूल, कॉलेज और ट्रेनिंग, सीखो स्किल और बनाओ अर्निंग ODOC को लंबे समय तक मजबूत बनाना है, तो इसे स्किल एजुकेशन से जोड़ना जरूरी है। स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्किल सेंटर यूथ को फूड सेक्टर की बुनियादी ट्रेनिंग दे सकते हैं। इसमें किचन हाइजीन, बेसिक कुकिंग, फूड कॉस्टिंग, मेन्यू प्लानिंग, पैकेजिंग, ग्राहक से बात, डिजिटल पेमेंट और बिजनेस की बेसिक समझ शामिल हो सकती है। इससे यूथ पढ़ाई के साथ काम की तैयारी भी कर सकता है। कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी खोजते हैं। अगर उन्हें अपने जिले की फूड इकॉनमी की समझ पहले से मिले, तो वे लोकल स्तर पर भी काम ढूंढ सकते हैं या छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हैं। फूड इवेंट से लोकल कमाई जिले की क्यूज़ीन को आगे बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे फूड इवेंट भी बड़ा रोल निभा सकते हैं। जिला स्तर पर फूड डे, कॉलेज फूड फेस्ट, लोकल मेले, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर टेस्ट काउंटर और बाजारों में फूड स्टॉल लगाए जा सकते हैं। ऐसे इवेंट से दो … Read more

लखपति दीदी अभियान से ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर उद्यमी

भिवानी  हरियाणा के गांवों में अब कहावत बदलती नजर आ रही है जिस गांव म्हैं बहु बेटी कमाऊ हो ली, समझो उस गांव की तकदीर चमक ली…। मामूली बचत से शुरू हुई यह मुहिम अब आत्मनिर्भर हरियाणा की सबसे मजबूत पहचान बनती जा रही है। जी हां कभी चौके-चूल्हे और घर-आंगन तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं आज हरियाणा के विकास की ऐसी कहानी लिख रही हैं, जिस पर पूरा गांव गुमान कर रहा है। बचत की छोटी-सी पोटली तै शुरू हुआ सफर अब लाखों के कारोबार तक पहुंच गया है स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान ने गांव की बहु बेटियां म्हैं ऐसा भरोसा जगाया है कि अब वे केवल अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने तक ही सीमित नहीं, बल्कि पूरे गांव की तरक्की की मजबूत धुरी बन चुकी हैं। कहीं अचार-पापड़ की खुशबू है तो कहीं देशी अनाज के बिस्कुट, कहीं ड्रोन उड़ाती दीदी है तो कहीं जैविक उत्पादों से दूसरे राज्यों तक पहचान बना रही महिलाएं। गांव की चौपालों में अब खेती-किसानी के साथ कारोबार की बातें भी सुनाई देने लगी हैं। साफ है, हरियाणा के गांवों में बदलाव की बयार चल पड़ी है और इस बदलाव की अगुवाई महिलाएं कर रही हैं। बचत तै बरकत… यही बन गया गांव का नया मंत्र हरियाणा में आज 63 हजार से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 6.21 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। प्रदेश में 5300 ग्राम संगठन और 270 क्लस्टर लेवल फेडरेशन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कड़ी बने हुए हैं। कभी हर महीने 100-200 रुपये की बचत करने वाली महिलाएं आज उसी बचत के दम पर बैंक से ऋण लेकर अपना कारोबार खड़ा कर रही हैं। डेयरी, हस्तशिल्प, अचार, पापड़, मसाले, देशी खाद्य उत्पाद, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, अगरबत्ती, जैविक खेती और कई छोटे उद्योग अब गांव की महिलाओं की पहचान बन चुके हैं। पहले जो महिलाएं घर की चौखट लांघने में झिझकती थीं, आज वे अपने उत्पादों की मार्केटिंग कर रही हैं, ऑनलाइन आर्डर ले रही हैं और दूसरे राज्यों तक सामान भेज रही हैं। गांव की चौपाल में अब केवल फसलों की नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने की भी चर्चा होती है लखपति दीदी बनण की होड़, बढ़ रहया आत्मविश्वास स्वयं सहायता समूहों की इस मुहिम को लखपति दीदी अभियान ने नई रफ्तार दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 58 हजार से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यानी वे सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। कमाई बढ़ने के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे केवल घर के खर्च तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और पंचायतों के फैसलों में भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा रही हैं। गांव की दूसरी महिलाएं भी इन्हें देखकर आगे बढ़ने का हौसला जुटा रही हैं। हरियाणवी जायके का स्वाद देशभर में पहुंच रहा गांव की दीदियों का हुनर अब हरियाणा की सरहदों से बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है। बहल की रेखा के बनाए देशी अचार, पापड़ और मिर्च-मसाले नोएडा, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में पसंद किए जा रहे हैं। गुरुग्राम के चंदू गांव की पूजा शर्मा देशी अनाज से तैयार बिस्कुट दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश तक भेज रही हैं। ताजनगर की रवि प्रजापति जैविक उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। ढिगावा निवासी सुषमा देवी के मिर्च-मसाले, रोस्टेड अनाज, बेसन, पापड़, देशी घी और दूध ग्राहकों की पहली पसंद बन चुके हैं। मंढाणा की शकुंतला आधुनिक तकनीक अपनाकर ड्रोन दीदी के रूप में किसानों की मदद कर रही हैं। साहलेवाला की विद्या के पायदान, कृष्णा के तैयार किए हरियाणवी परिधान, नीलम का ब्यूटी पार्लर और प्रमिला की देशी गुड़ की सुहाली व साबुन भी बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं। भिवानी बस अड्डे पर बनाई कैंटीन की थाली का जायका ही न्यारा है। गांव खरक की सुमन के अचार और सुनीता की तैयार की गई चूड़ियों की भी अच्छी मांग है। ये केवल कुछ उदाहरण हैं। प्रदेश में ऐसी हजारों महिलाएं हैं जो कभी बेरोजगार थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद आज अपने परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। अब गांव में अक्सर यह बात सुनने को मिल जाती है हमारी बहु बेटियां ईब किसे तै कम कोन्या। अब बाजार भी साथ, सरकार भी साथ महिलाओं के उत्पाद केवल गांव तक सीमित न रहें, इसके लिए सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में 13 सांझा बाजार संचालित किए जा रहे हैं, जहां स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री होती है। इसके अलावा 420 मिशन कैंटीन और 18 बस अड्डों पर 20 दुकानें महिलाओं के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध करा रही हैं। डिजिटल प्लेटफार्म, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं ने भी महिलाओं के कारोबार को नई पहचान दी है। अब गांव की बहु बेटियां मोबाइल पर आर्डर ले रही हैं और अपने उत्पादों को दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचा रही हैं। नंबर गेम प्रदेश में महिला ग्राम संगठन : 5300 महिला स्वयं सहायता समूह : 63,000 समूहों से जुड़े परिवार : 6.21 लाख क्लस्टर लेवल फेडरेशन : 270 सांझा बाजार : 13 मिशन कैंटीन : 420 18 बस अड्डों पर संचालित दुकानें : 20 लखपति दीदी : 58,000 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरजभान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को बेहतर बाजार, डिजिटल प्लेटफार्म और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत महिलाएं ही होंगी। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ता है।  

जिला प्रशासन की बैठक में रियल एस्टेट पर बड़ा फैसला, नई दरें जल्द लागू होंगी

जयपुर जयपुर में जमीन खरीदना अब महंगा हो सकता है. शहर में जमीने 49 फीसदी तक महंगी हो सकती है, जिसे 7 दिन के भीतर ही लागू कर दिया जाएगा. जिला प्रशासन की बैठक में डीएलसी दरों में बड़े बदलाव का फैसला लिया गया है. जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला दर निर्धारण समिति की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में डीएलसी दरों को लेकर रिवाइज करने का निर्णय लिया है. शहर की डीएलसी दरों में 10% से लेकर 49% तक की बढ़ोतरी को प्रस्तावित किया गया है. गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल महीने में भी डीएलसी दरों में 10% की वृद्धि की गई थी. इस बार जिन क्षेत्रों में बाजार मूल्य अधिक है और जहां तेजी से विकास हो रहा है, वहां दरों में बढ़ोतरी की गई है. वहीं, कुछ इलाकों में डीएलसी दरें घटाने के प्रस्ताव भी सामने रखे गए हैं. क्या होती है डीएलसी रेट किसी भी जमीन की बाजार कीमत सरकार निर्धारित करती है. यही डीएलसी रेट होती है, जिसे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक में तय किया जाता है. डीएलसी की दरों पर जमीन की रजिस्ट्री या भूमि का आवंटन होता है. नगर निकाय द्वारा आरक्षित दर पर जमीन आवंटन के साथ ही विकास शुल्क को भी शामिल किया जाता है.   50 फीसदी से अधिक की दरों पर सरकार करेगी फैसला जानकारी के मुताबिक, 50% से कम बढ़ोतरी वाले प्रस्ताव 7 दिन के भीतर लागू कर दिए जाएंगे. जबकि 50% से अधिक वृद्धि वाले प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे. इसी तरह, दरों में कमी से जुड़े प्रस्तावों पर भी अंतिम फैसला राज्य सरकार ही करेगी. नई डीएलसी दरों का सीधा असर संपत्ति की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री पर पड़ेगा.

मानसून बना किसानों का सहारा, झारखंड के खेतों में लौटी हरियाली और उम्मीद

 रांची मानसून की सक्रियता और लगातार हो रही बारिश ने पंच परगना क्षेत्र (सिल्ली, बुण्डू, बरेंदा, राहे और तमाड़) के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. पिछले दो दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने लगा है. इसके साथ ही धान की रोपाई का कार्य भी रफ्तार पकड़ चुका है. ग्रामीण इलाकों में खेतों की रौनक लौट आई है और किसान पूरे उत्साह के साथ खेती-किसानी में जुट गए हैं. सुबह से शाम तक खेतों में जुटे किसान इन दिनों सुबह से लेकर शाम तक किसान परिवार के सदस्य और खेतिहर मजदूर धान रोपाई में लगे हुए हैं. खेतों में महिलाएं धान की पौध रोप रही हैं, जबकि पुरुष जुताई, पाटा चलाने और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं. गांवों का माहौल पूरी तरह खेती-किसानी के रंग में रंग गया है. नर्सरी से निकाली जा रही धान की पौध पंच परगना क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों और गांवों में किसानों ने पहले से तैयार नर्सरी से धान की पौध निकालकर रोपाई शुरू कर दी है. वहीं, कुछ स्थानों पर अभी खेतों की अंतिम तैयारी की जा रही है, ताकि अगले कुछ दिनों में रोपाई पूरी की जा सके. अच्छी बारिश से बेहतर उत्पादन की उम्मीद किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नियमित रूप से बारिश होती रही तो इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है. उनका मानना है कि समय पर बारिश होने से खेती की लागत भी कम होगी और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा. कृषि विशेषज्ञों ने बताया मौसम अनुकूल कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी और पानी का होना जरूरी है. वर्तमान मौसम धान की खेती के लिए अनुकूल है. समय पर रोपाई पूरी होने से फसल की वृद्धि बेहतर होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है. यदि बीच सीजन में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो फसल प्रभावित हो सकती है. गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी मिली रफ्तार खेती शुरू होने के साथ ही कृषि कार्यों से जुड़े मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा है. गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. कृषि उपकरण, खाद और बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है. किसान धान की खेती के लिए आवश्यक उर्वरक, बीज और अन्य कृषि सामग्री की खरीदारी में जुटे हैं.

महतारी वंदन योजना से बदली सुनीता साहू की जिंदगी, बच्चों की बेहतर शिक्षा का बना मजबूत आधार

मुंगेली : महतारी वंदन योजना बनी सुनीता साहू के बच्चों की बेहतर शिक्षा का आधार प्रतिमाह की सहायता राशि से बच्चों की पढ़ाई और स्कूल वैन का खर्च हो रहा आसान मुंगेली  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना जिले की हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। जिले के ग्राम लिम्हा की निवासी श्रीमती सुनीता साहू भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने परिवार के भविष्य को संवार रही हैं। उन्हें प्रतिमाह मिलने वाली 01 हजार रुपये की सहायता राशि बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने का अवसर दे रही है।       सुनीता ने बताया कि इस राशि से वे अपने बच्चों की स्कूल वैन का किराया और पढ़ाई से जुड़ी आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रही हैं। पहले बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों का प्रबंधन करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता ने काफी राहत दी है। इससे बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले से अधिक संतुलित हुई है। उन्होंने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि छोटी जरूर है, लेकिन नियमित रूप से मिलने के कारण यह परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गई है। इससे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देना आसान हुआ है और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा है। सुनीता साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और परिवार की आर्थिक मजबूती का प्रभावी माध्यम बन रही है। 

बिजली कंपनी का बड़ा फैसला, जिस ठेकेदार के नाम कार्य आदेश वही करेगा काम

बिजली कंपनी फैसला: जिस ठेकेदार के नाम पर कार्य आदेश, वही करेगा काम भोपाल  मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने लाइन एवं सबस्टेशन से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जिस पैनलबद्ध (Empanelled) ठेकेदार के नाम पर कार्य आदेश (Purchase Order) जारी किया गया है, वही संबंधित कार्य करेगा। किसी भी स्थिति में वह कार्य किसी अन्य ठेकेदार, एजेंसी या व्यक्ति को नहीं सौंपा जा सकेगा। कंपनी के संज्ञान में आया था कि कुछ स्थानों पर कार्य आदेश एक ठेकेदार के नाम पर जारी होने के बावजूद काम किसी अन्य व्यक्ति या ठेकेदार से कराया जा रहा था। इसे कंपनी ने नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है। जारी निर्देशों के अनुसार संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्य केवल अधिकृत ठेकेदार द्वारा ही किया जाए। इसके लिए नियमित रूप से कार्यस्थलों का निरीक्षण भी किया जाएगा। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि कार्य किसी अन्य व्यक्ति या ठेकेदार से कराया जा रहा है, तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार दोनों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। ठेकेदार का कार्य आदेश निरस्त किया जा सकता है, उसे भविष्य के कार्यों से वंचित किया जा सकता है, सुरक्षा राशि जब्त की जा सकती है तथा आवश्यकता होने पर ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। कंपनी ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।  

मौसम विभाग की चेतावनी: भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट

लखनऊ यूपी में अगले एक हफ्ते तक झमाझम बारिश होने वाली है। इसे लेकर मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। वैज्ञानिकों की मानें तो आज और कल पूर्वी और पश्चिमी यूपी के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं, कई जिलो में यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। वहीं, बीते दिनों बारिश से कई स्थानों पर तापमान में गिरावट भी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक उत्तर प्रदेश के मौसम में सक्रियता बनी रहने की संभावना व्यक्त की है। छह जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है। इस बीच सोमवार सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और पिछले कई दिनों से पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। हालांकि, महज कुछ घंटे की बारिश से ही कई इलाकों में जलभराव हो गया। इससे पहले रविवार को पूरे दिन तेज धूप और उमस के कारण लोग बेहाल रहे, लेकिन सोमवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने बादल छा गए और शहर के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण मौसम सुहावना हो गया, वहीं कई प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, अगले सात दिनों तक प्रदेश के मौसम में सक्रियता बनी रहने की संभावना है। 6 और 7 जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के झोंके (60 किमी प्रति घंटे तक) आने की चेतावनी जारी की गई है। 12 जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी यूपी में बारिश मौसम विभाग ने सात से 12 जुलाई के दौरान पूर्वी यूपी के अनेक स्थानों तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है। 10 और 11 जुलाई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने, आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी परामर्श का पालन करने की सलाह दी है। आज इन जिलों में मेघगर्जन के साथ वज्रपात की संभावना वैज्ञानिकों के मुताबिक 6 जुलाई को बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, संभल, जालौन, महोबा, हमीरपुर, झांसी, ललितपुर और आसपास के जिलों में मेघगर्जन के साथ वज्रपात की संभावना है। 7 जुलाई को इन जिलों में झमाझम बारिश का यलो अलर्ट बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर में झमामझ बारिश के साथ यलो अलर्ट जारी है।

झारखंड में निवेश को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े प्रोत्साहन का ड्राफ्ट जारी

रांची  झारखंड में नई उद्योग नीति के तहत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पर अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक सब्सिडी (अनुदान) देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही झारखंड की नई उद्योग नीति 2026 के तहत माइक्रो उद्योगों को 25 लाख रुपये तक का ब्याज अनुदान देने का प्रस्ताव दिया गया है। राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में मुख्य रूप से कैपिटल इन्वेस्टमेंट (पूंजी निवेश) पर दी जाने वाली सब्सिडी की अधिकतम सीमा को काफी बढ़ा दिया गया है, जबकि अन्य प्रोत्साहन जैसे कि स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की 100% प्रतिपूर्ति को बरकरार रखा गया है। शैक्षणिक संस्थानों को बड़ा लाभ, पूंजी निवेश सब्सिडी को डेढ़ गुना बढ़ाया गया झारखंड औद्योगिक निवेश प्राेत्साहन नीति के तहत 2021 में 20 करोड़ रुपये की सीमा थी, जिसे नए ड्राफ्ट में डेढ़ गुना बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये (भूमि को छोड़कर) कर दिया गया है। यह सब्सिडी कुल निवेश के 25% तक होगी। इसके साथ ही ब्याज सब्सिडी पांच साल की अवधि के लिए पांच प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ रुपये निर्धारित की गई है (2021 में इसकी कोई अलग सीमा नहीं थी)। सरकार की ओर से प्रस्तावित इस सुविधा को लेने के लिए उद्योगों को न्यूनतम सौ सीटें और इंजीनियरिंग की कम से कम पांच स्ट्रीम के साथ पर्याप्त बुनियादी ढांचा होने की शर्त को अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिलेगी बढ़ी हुई सहायता ड्राफ्ट में अस्पतालों और नर्सिंग कालेजों की स्थापना के लिए सब्सिडी की लीमिट में भी बढ़ोतरी की गई है। पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत की सब्सिडी अब अलग-अलग श्रेणियों में इस प्रकार होगी :     मल्टी-स्पेशियलिटी हास्पिटल (ग्रेड 1) : पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये।     मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (ग्रेड II) : 12.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये।     सुपर-स्पेशियलिटी हास्पिटल : 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये।     नर्सिंग कालेज : पहले की तरह अधिकतम 1 करोड़ रुपये सब्सिडी का प्रविधान बरकरार रहेगा। इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी पांच साल के लिए 5 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी नई अधिकतम सीमा तीन करोड़ रुपये (2021 में इस पर कोई निर्धारित सीमा नहीं थी) रखी गई है। इसके अलावा, पूर्ण स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की 100 प्रतिशत वापसी का प्रविधान भी यथावत रखा गया है। सरकार के इस ड्राफ्ट का उद्देश्य राज्य में निजी निवेश को आकर्षित करना और क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना है।