samacharsecretary.com

ऊर्जा मंत्री तोमर बोले: समाधान योजना के तहत ₹653 करोड़ से ज्यादा जमा, ₹281 करोड़ सरचार्ज माफ

समाधान योजना में 653 करोड़ 60 लाख मूल राशि हुई जमा, 281 करोड़ 54 लाख सरचार्ज हुआ माफ : ऊर्जा मंत्री तोमर अब 31 जनवरी 2026 तक मिलेगी योजना में सौ फीसदी तक सरचार्ज में छूट भोपाल  समाधान योजना 2025-26 के प्रथम चरण में अब तक 653 करोड़ 60 लाख रूपये मूल राशि जमा हुई है। साथ ही 281 करोड़ 54 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। योजना में 12 लाख 77 हजार 753 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि बकायादार उपभोक्ताओं की सतत भागीदारी और उनके उत्साह को देखते हुए समाधान योजना के प्रथम चरण की अवधि में 31 जनवरी 2026 तक विस्तार किया गया है। पिछले साल 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में शामिल होकर लाखों बकायादार उपभोक्ताओं ने सौ फीसदी तक छूट का लाभ लिया। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ता योजना के प्रथम चरण में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा कर 100 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठायें। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 4 लाख 2 हजार 593 बकायादार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 411 करोड़ 49 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 218 करोड़ 44 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 4 लाख 39 हजार 397 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। मूल राशि 130 करोड़ 50 लाख रूपये जमा हुई है तथा 45 करोड़ 41 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत 4 लाख 35 हजार 763 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। कुल मूल राशि 111 करोड़ 61 लाख रूपये जमा हुई है। साथ ही 17 करोड़ 69 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना 'जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं' के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ हो रहा है जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कुछ कम हो जाएगा। दो चरणों में प्रारंभ हुई योजना को प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर 2025 से हुई जो 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। इसमें बकाया बिल एकमुश्त जमा करने पर 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जा रहा। इसके बाद द्वितीय और अंतिम चरण शुरू होगा जो 01 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। दूसरे चरण में 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने उपभोक्ताओं के लिए कंपनी के ऐप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।  

शुक्रवार को बसंत पंचमी: दिनभर पूजा की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इंदौर  उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी की तरह ही मध्य प्रदेश के धार में मौजूद भोजशाल भी विवादों में है. वहीं बसंत पंचमी आते ही मध्य प्रदेश की 800 साल पुरानी भोजशाला की चर्चा शुरू हो जाती है, खासकर बसंत पंचमी अगर शुक्रवार को पड़े तो प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था का खास ख्याल रखना पड़ता है. इसकी वजह है कि भोजशाला को लेकर दो पक्षों के बीच स्वामित्व का विवाद चल रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट में है. शुक्रवार को बसंत पंचमी होने पर सांप्रदायिक तनाव न बने इसे लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर रहता है. इस बार भी बसंत पंचमी 23 जनवरी यानि शुक्रवार को है, जिसे लेकर भारी संख्या में भोजशाला में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. कई सालों से इस स्थिति का सामना इस साल फिर बसंत पंचमी शुक्रवार को है और इसी दिन जुमा भी पड़ रहा है. पूजा और नमाज के दौरान यहां किसी तरह का सप्रदायिक तनाव न हो, इसके लिए 20 जनवरी से ही धार शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाएगा. करीब ढाई हजार पुलिस अधिकारी, कर्मचारी यहां मोर्चा संभालेंगे. जो फुल सिक्योरिटी प्लान के तहत बसंत पंचमी के दिन किसी भी तरह के हालात बिगड़ने पर तत्काल कार्रवाई करेंगे. एक ही दिन पूजा और नमाज वाली ऐसी ही स्थिति यहां साल 2006, 2013 और 2016 में भी बनी थी. उस दौरान पहले भी यहां तीनों मौके पर आगजनी पथराव और कर्फ्यू की स्थिति बन गई थी. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा दोनों ही पक्षों को समझाकर इस आयोजन को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न कराया था. इस बार फिर यहां हिंदू फ्रेंड फॉर जस्टिस नामक संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है कि बसंत पंचमी पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आदेश के आधार पर दिनभर पूजा की अनुमति दी जाए. एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के मुताबिक "सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई यचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है, क्योंकि बसंत पंचमी 23 जनवरी को है." आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया भी बेबस भोजशाला को लेकर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 7 अप्रैल 2003 को जो आदेश दिया था, उसमें हिंदू समाज को बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति दी थी, लेकिन बसंत पंचमी पर शुक्रवार होने की स्थिति में इस आदेश में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था. लिहाजा बसंत पंचमी पर जुम्मा होने के कारण यहां विवाद की स्थिति बनने की आशंका रहती है. इस स्थिति के चलते इस मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भोजशाला के पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे. इसके बाद यहां किए गए सर्वे की 2000 पेज वाली रिपोर्ट में आर्कियोलॉजिकल सर्वे में स्पष्ट किया गया है कि गौशाला परिसर से विभिन्न धातुओं के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो दसवीं से 16वीं शताब्दी के बीच के हैं. इसके अलावा यहां 94 मूर्तियों के टुकड़े मिले जो मूर्तियां गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव की है. वहीं पशु-पक्षियों की प्रतिकृतियों के अवशेष भी मिले हैं. हालांकि इसके स्वामित्व पर फैसला कोर्ट में ही लंबित है. यह है गौशाला को लेकर पुराना विवाद धार में पुरातात्विक इमारत को हिंदू समाज माता सरस्वती वाग्देवी का मंदिर मानकर यहां बसंत पंचमी पर पूजा अर्चना करता है. वही मुस्लिम समाज इसी स्थान को मौलाना कमाल अहमद की दरगाह मानता रहा है. 1935 में धार रियासत के दीवान ने भोजशाला में मुस्लिम समाज को शुक्रवार के दिन नमाज की अनुमति दी थी. इसके बाद से ही धार के गौशाला विवाद की शुरुआत हुई. लिहाजा बसंत पंचमी के दिन जब भी शुक्रवार अथवा जुम्मे का दिन आता है, तो यहां एक ही दिन पूजा और नमाज होने की मजबूरी के चलते पूरा शहर सांप्रदायिक हिंसा की आशंका में पुलिस छावनी में तब्दील हो जाता है. इसके बाद यहां भोजशाला परिसर पूजा और नमाज के अलग-अलग समय के निर्धारण के बाद पूजा और फिर नमाज अता कराई जाती है. यह है इस स्थान का महत्व और इतिहास धार जिला प्रशासन के मुताबिक 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने भोजशाला का निर्माण कराया था, इस दौरान यहां माता सरस्वती वाग्देवी की प्रतिमा की स्थापना का भी उल्लेख बताया जाता है. परमार काल के बाद यह स्थान राजपूत शासकों की राजधानी और मालवा की राजधानी भी रहा. मुगल काल में अलाउद्दीन खिलजी ने 1305 में भोजशाला को ध्वस्त कर दिया. इसी दौरान यहां अन्य मुगलकालीन शासकों ने परिसर में मस्जिद का निर्माण कराया. मुगल काल समाप्त होने के बाद 1875 में ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश मेजर किन केड यहां स्थापित वाग्देवी की मूर्ति को लेकर लंदन चले गए, जो आज भी लंदन के म्यूजियम में मौजूद है.

साइबर अटैक से लेकर प्राकृतिक आपदा तक, MP में पावर सप्लाई रहेगी सुरक्षित

भोपाल  बिजली की ग्रिडों पर साइबर अटैक या युद्ध जैसे हालातों में भी मध्य प्रदेश की बिजली गायब नहीं होगी. मध्यप्रदेश के जबलपुर, भोपाल और इंदौर समेत अन्य शहरों में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग नाम की एक रणनीतिक बिजली व्यवस्था पर काम शुरू हो चुका है. यह सिस्टम ग्रिड से कटते ही शहर को खुद का पावर स्टेशन बना देता है. इसके लिए सबसे पहले जबलपुर को चुना गया है, जहां सेना से जुड़े बड़े रक्षा प्रतिष्ठान मौजूद हैं. इसके बाद भोपाल और इंदौर को भी इसी सुरक्षा कवच से जोड़ा जाएगा. जानें क्या होता है इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग क्या है इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग? इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बिजली सिस्टम के एक हिस्से को जानबूझकर मुख्य ग्रिड से अलग कर दिया जाता है. जब राष्ट्रीय या क्षेत्रीय ग्रिड में कोई बड़ा व्यवधान आता है, तो यह हिस्सा स्वतः आइलैंड मोड में चला जाता है. उस स्थिति में स्थानीय बिजली उत्पादन स्रोतों से शहर की जरूरी सेवाओं को बिजली मिलती रहती है. सरल शब्दों में कहें तो पूरा शहर कुछ समय के लिए खुद का स्वतंत्र पावर ग्रिड बन जाता है. आइलैंडिंग के लिए जबलपुर क्यों बना पहली पसंद? जबलपुर देश के रणनीतिक शहरों में शामिल है. यहां आर्मी प्रोडक्शन यूनिट्स, गोला-बारूद निर्माण इकाइयां और रक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब देश रणनीतिक मोर्चे पर सक्रिय था, उसी समय जबलपुर में इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग परियोजना को स्वीकृति दी गई. इसके जरिए सरकार ने संदेश दिया कि अब युद्ध के हालात और आपातकालीन परिस्थितियों में भी शहर अंधेरे में नहीं डूबना चाहिए. ऐसे काम करेगा यह सिस्टम जबलपुर में पहले से एक थर्मल पावर स्टेशन से सीधी ट्रांसमिशन लाइन उपलब्ध है. आपात स्थिति में उस पावर स्टेशन की एक यूनिट सक्रिय की जाएगी और शहर को ग्रिड से अलग कर बिजली सप्लाई दी जाएगी. इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 7 करोड़ रु खर्च होंगे. इसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन कर रही है. फिलहाल टेंडर जारी हो चुके हैं और काम तेजी से चल रहा है. अगले तीन से चार महीनों में यह सिस्टम पूरी तरह तैयार हो जाएगा. भोपाल और इंदौर में क्या तैयारी? भोपाल और इंदौर में फिलहाल किसी बिजली उत्पादन केंद्र से सीधी ट्रांसमिशन लाइन नहीं है. इसलिए यहां नजदीकी थर्मल पावर स्टेशनों से समर्पित ट्रांसमिशन लाइनें बिछानी होंगी. दोनों शहरों के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं. बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि मंजूरी मिलते ही इन महानगरों में भी इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग लागू कर दी जाएगी. 2012 का ब्लैकआउट, जो चेतावनी बन गया विशेषज्ञ बताते हैं कि जुलाई 2012 में भारत ने अब तक का सबसे बड़ा बिजली संकट देखा. 30 और 31 जुलाई को ग्रिड ओवरलोड के कारण देश के 22 राज्य अंधेरे में डूब गए थे. उसी घटना के बाद यह समझ आया कि केवल एक राष्ट्रीय ग्रिड पर निर्भर रहना, जोखिम भरा हो सकता है. तभी से इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग जैसे विकल्पों पर गंभीरता से काम शुरू हुआ. इलेक्ट्रिकल ग्रिड क्या होती है? ग्रिड, जनरेटर और ट्रांसमिशन लाइनों की आपस में जुड़ी प्रणाली होती है. सभी जनरेटर एक साथ काम करते हैं. लेकिन यदि किसी एक हिस्से में बड़ी गड़बड़ी होती है, तो उसका असर पूरी प्रणाली पर पड़ सकता है. यही श्रृंखला प्रभाव पूरे देश में ब्लैकआउट की वजह बनता है. पावर आइलैंड क्यों हैं जरूरी? इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग से अस्पताल, रक्षा प्रतिष्ठान, ट्रैफिक सिग्नल, जलापूर्ति और संचार सेवाएं सुरक्षित रहती हैं. यह सिस्टम अपने आप ग्रिड से अलग होकर स्थानीय उत्पादन से बिजली देता है. इसी कारण इसे पावर आइलैंड या वोल्टेज आइलैंड भी कहा जाता है. शहरों को सुरक्षित रखेंगे पावर आईलैंड मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक सुनील तिवारी ने बताया, '' इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग परियोजना पूरी होने के बाद किसी भी आपात स्थिति में शहर की बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी. जबलपुर में काम तेजी से चल रहा है और तीन से चार महीनों में इसे पूरा कर लिया जाएगा. भोपाल और इंदौर के लिए भी प्रस्ताव भेजे गए हैं. स्वीकृति मिलते ही वहां भी काम शुरू होगा.'' उन्होंने आगे बताया, '' इलेक्ट्रिकल आइलैंडिंग न सिर्फ युद्ध बल्कि साइबर अटैक, तकनीकी खराबी और प्राकृतिक आपदा के समय भी शहरों को सुरक्षित रखेगी.''

अमृत मंथन–2026 : अमृत 2.0 परियोजनाओं की प्रगति को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला हुई

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा अमृत 2.0 मिशन अंतर्गत प्रदेश के नगरीय निकायों में संचालित जलप्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं को गति प्रदान करने के उद्देश्य से “अमृत मंथन–2026” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में किया गया। कार्यशाला में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजय दुबे विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि नगरीय निकायों द्वारा किया जा रहा कार्य सीधे आमजन के जीवन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे पूरी जिम्मेदारी, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपको आपातकालीन शक्तियाँ दी गई हैं, जिनका उपयोग जनता के हित में करते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए। श्री दुबे ने कहा कि परियोजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, प्रगति की डिजिटल रिपोर्टिंग और पोर्टल आधारित समीक्षा से जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। समीक्षा बैठक की अध्यक्षता आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग श्री संकेत भोंडवे द्वारा की गई। कार्यशाला में आयुक्त नगर पालिक निगम, संभागीय अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद/नगर परिषद के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान अमृत 2.0 मिशन अंतर्गत प्रदेश में संचालित जलप्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने नगरीय निकायों के अधिकारियों से वन-टू-वन संवाद कर परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। कार्यशाला की मुख्य थीम “संवाद, समाधान और सफलता” रही। इसके अंतर्गत भूमि उपलब्धता, ड्राइंग-डिजाइन लंबित होना, भुगतान में विलंब एवं तकनीकी अड़चनों जैसी समस्याओं पर चर्चा करते हुए त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए। समीक्षा के दौरान कई परियोजनाओं में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की गई। पुअर परफार्मेंस करने वालों के विरुद्ध सस्पेंशन, एलडी अधिरोपण एवं ब्लैकलिस्टिंग जैसी कठोर कार्यवाही के निर्देश दिए गए। साथ ही ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए। आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाओं में विलंब हो रहा है, अतः डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोषी पाए जाने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। गौरतलब है कि समीक्षा के दौरान 35 परियोजनाओं के कार्यो में प्रगति धीमी पाई जाने से संबंधित संविदाकारों को नोटिस जारी करने एवं 13 संविदाकार को ब्लैक लिस्ट किये जाने तथा 6 संविदाकारों को आगामी निविदा में भाग लेने के लिये निलम्बित किया गया है। उन्होंने परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति प्रतिदिन पोर्टल पर अद्यतन करने तथा बिना पूर्व अनुमति किसी भी परियोजना में ईओटी जारी न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। कार्यशाला में अमृत मित्र योजना अंतर्गत जल गुणवत्ता परीक्षण कार्य में संलग्न स्व-सहायता समूह की महिलाओं से भी संवाद किया गया तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का डेमोंस्ट्रेशन देखा गया। अमृत मंथन–2026 कार्यशाला के माध्यम से अमृत 2.0 परियोजनाओं को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता श्री प्रदीप मिश्रा, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, समस्त संभागीय संयुक्त संचालक एवं संभागीय अधीक्षण यंत्री उपस्थित रहे।  

वंदे मातरम् गीत और बिरसा मुण्डा के संघर्ष ने स्वतंत्रता आंदोलन को दिया जनाधार : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल राष्ट्रीय चेतना के दो स्वर विषय पर आयोजित संगोष्ठी में हुए शामिल भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा का जमीनी, जन-आधारित संघर्ष और ‘वंदे मातरम्’ के वैचारिक–आध्यात्मिक स्वरों ने मिलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जनाधार प्रदान किया था। आंदोलन को स्पष्ट दिशा और आत्मिक शक्ति देने के साथ ही भारत की विविधता में निहित शक्ति और एकता को प्रमाणित किया। उन्होंने कहा कि आजादी के संघर्ष में शिक्षित, शहरी, ग्रामीण और वंचित वर्गों ने मिलकर स्वतंत्र राष्ट्र का स्वप्न साकार किया। इसी भाव-भावना के साथ संकल्पित होकर युवाओं को विकसित भारत–2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल राष्ट्रीय चेतना के दो स्वर विषय पर आयोजित विचारोत्तेजक आयोजन में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें है। भारत की आत्मा और चेतना का यह भाव राष्ट्र के प्रति निष्ठा, समाज के प्रति संवेदना और संस्कृति के प्रति सम्मान का है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा एवं ‘वंदे मातरम्’ के रचनाकार बंकिम चंद्र चटर्जी की 150वीं जयंती के पावन प्रसंग का यह प्रकल्प “स्वतंत्रता के दो स्वर” भारत की आज़ादी के बहुआयामी, समावेशी और जन–जन की साझी साधना का स्मरण है। भगवान बिरसा मुण्डा केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि जनजातीय चेतना, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक स्वाभिमान के महान प्रतीक थे। उनका “अबुआ दिशुम, अबुआ राज”, जनजातीय समुदाय की स्वतंत्रता–आकांक्षा का उद्घोष था, जिसने जल, जंगल और जमीन पर अधिकार के साथ ही आत्मनिर्णय की चेतना को सशक्त किया। स्वतंत्रता आंदोलन को ग्रामीण भारत की आत्मा तक पहुँचाया। ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक और भावनात्मक आत्मा बनकर उभरा। इस गीत ने राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना को जनमानस में प्रतिष्ठित किया। देशवासियों को मानसिक और नैतिक रूप से एकजुट किया। ‘वंदे मातरम्’ ने भारत माता की सजीव कल्पना के माध्यम से भारतवासियों में आत्मगौरव और सांस्कृतिक एकता का संचार किया आज़ादी के दीवानों को संघर्ष के कठिन क्षणों में अदम्य साहस और नैतिक बल प्रदान किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुण्डा और बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया। कलाव्योम फाउंडेशन को सार्थक और विचारोत्तेजक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओ.पी. रावत ने कहा कि भगवान के स्तर पर पहुँच गए जनजातीय नेतृत्व और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक गीत की 150वीं वर्ष गांठ का प्रसंग उनकी जीवनी, चरित्र और गतिविधियों को अपने जीवन, चरित्र और दिनचर्या में अमल करना होगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री रमेश शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम् गीत, भगवान बिरसा मुण्डा का अबुआ दिशुम अबुआ राज और उलगुलान के सूत्र एक समान है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा किया गया अलगाव भारतीय दर्शन और विज्ञान दोनो के अनुसार अनुचित है। उन्होंने कहा कि भारत के जनजातीय समुदाय के तार ऋषि-परंपरा से जुड़े हुए है। यही कारण है कि भारत में संस्कार, शिक्षा, अनुसंधान और शोध के केंद्र वनों में ही थे। भगवान श्रीराम भी अध्ययन के लिए वन में गए थे। उन्होंने कहा कि समय की जरूरत है कि इतिहास से सबक लें अलगाववादी प्रवृत्तियों से सावधान रहें। विषय प्रवर्तन चिंतक विचारक डॉ. अमोद गुप्ता ने किया। इस अवसर पर जनजातीय लोक कलाकार श्री गजेन्द्र आर्य ने भगवान बिरसा मुण्डा के व्यक्तित्व और कृतित्व का शौर्य गान किया। आभार प्रदर्शन श्री चित्रांश खरे ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने भगवान बिरसा मुण्डा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट किए।  

कोडरमा में धान की बंपर खरीदी से पैक्स गोदाम फुल

कोडरमा. धान क्रय के मामले में कोडरमा जिला पूरे राज्य में नंबर वन पर है। जिले को मिले एक लाख क्विंटल धान क्रय के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 50 प्रतिशत धान की खरीद की जा चुकी है। इस वर्ष धान क्रय के साथ ही किसानों को उनके बैंक खाते में समय पर भुगतान भी किया जा रहा है, जिससे किसानों में संतोष देखा जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद पैक्स स्तर पर धान क्रय की प्रक्रिया फिलहाल प्रभावित हो रही है। जिले में इस बार धान क्रय के लिए कुल 30 पैक्स एवं दो महिला मंडलों का चयन किया गया है। 15 दिसंबर से शुरू हुई धान खरीद में अब तक करीब 50 हजार क्विंटल धान किसानों से खरीदा जा चुका है। इनमें से लगभग 20 हजार क्विंटल धान मिलरों को भेजा गया है। लेकिन बीते एक सप्ताह से अधिकांश पैक्सों में धान क्रय लगभग ठप है। पैक्स संचालकों के अनुसार गोदाम पूरी तरह धान से भर चुके हैं। मिलों की ओर से धान का उठाव नहीं हो पाने के कारण आगे क्रय संभव नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा है कि मिल संचालकों को एफसीआई को दिए जाने वाले चावल के बदले धान उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन समय पर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की आपूर्ति नहीं होने के कारण धान का उठाव प्रभावित हुआ है। पैक्स गोदामों में धान डंप, आगे की खरीद हो रही प्रभावित  इसके चलते पैक्स गोदामों में धान डंप हो गया है। गोदाम खाली होने के बाद ही आगे धान क्रय किया जा सकेगा। इस स्थिति से किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है, हालांकि प्रशासन उन्हें धैर्य रखने की अपील कर रहा है। इस संबंध में जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) प्रदीप शुक्ला ने कहा कि धान क्रय के लिए 31 मार्च तक का समय निर्धारित है, इसलिए किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। कोडरमा जिला राज्य में धान क्रय में सबसे आगे है और लक्ष्य का 50 प्रतिशत पहले ही हासिल कर लिया गया है, जबकि अभी ढाई माह से अधिक का समय शेष है। इस बार सरकार की ओर से लागू की गई हैं कई शर्तें उन्होंने बताया कि इस बार सरकार की ओर से कई शर्तें लागू की गई हैं, जिनमें अग्रिम धान नहीं लेना, छुट्टी व रविवार को धान क्रय नहीं करना तथा पैक्सों को लक्ष्य निर्धारित करना शामिल है। डीएसओ ने बताया कि पैक्सों में किसानों का धान पहुंचते ही दो से सात दिनों के भीतर भुगतान किया जा रहा है। मिल संचालकों द्वारा सीएमआर की आपूर्ति होते ही धान का उठाव शुरू होगा और इसके बाद क्रय प्रक्रिया फिर से तेज हो जाएगी।

तेंदूपत्ता संग्राहकों में खुशियों की लहर, छत्तीसगढ़ सरकार ने फिर शुरू की चरणपादुका योजना, 12.40 लाख वनवासियों को मिला लाभ

रायपुर तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को सरकार द्वारा कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, जिसमें संग्रहण लाभ का 80% हिस्सा, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, बीमा कवर (दुर्घटना मृत्यु या विकलांगता पर), और विभिन्न वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होता है l छत्तीसगढ़ में 5500 सौ रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक और राजमोहिनी देवी योजना के तहत लाभ दिए जा रहे हैं l छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई यह जनहितैषी योजना अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उनकी संवेदनशीलता के कारण फिर से शुरू की गई है। यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की "गारंटी" के अनुरूप गरीब हितैषी शासन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग ने इस योजना को तेज गति और पारदर्शिता के साथ धरातल पर लागू किया है। 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को लाभ  वितरित हुई उच्च गुणवत्ता की चरणपादुकाएं        वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखिया को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं प्रदान की गईं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये व्यय किए। इस कदम से जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा दोनों मिली हैं। वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ            वन मंत्री श्री कश्यप के विशेष प्रयासों से सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह निर्णय संग्राहक परिवारों के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी सिद्ध होगा। पारदर्शी प्रक्रिया — खरीदी जेम पोर्टल से                सरकार ने चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रहे। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता पूर्ण हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी जा रही है। यह सरकार की गुणवत्ता और लाभार्थी हितों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।           वनांचल क्षेत्रों में उमंग, सुरक्षा और सम्मान की भावना मजबूत मुख्यमंत्री श्री साय और वन मंत्री श्री कश्यप के इस निर्णय से वनांचल क्षेत्रों में खुशी और उत्साह का माहौल है। चरणपादुका योजना सीधे उन मेहनतकश तेंदूपत्ता संग्राहकों तक राहत पहुँचा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों में कार्य करते हैं और अपनी आजीविका जुटाते हैं।          यह योजना न केवल सुरक्षा और सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि वनवासियों को सम्मान और आत्मविश्वास भी दे रही है जो सुशासन और अंत्योदय की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बन गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जन-हितैषी पहल, ‘मिशन कनेक्ट’ से चौपाल तक पहुँचा प्रशासन

गाँव-गाँव जाकर अधिकारियों ने सुनी समस्याएँ, मौके पर हुआ समाधान रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अंत्योदय और सुशासन की सोच को साकार करने के लिए सुकमा जिले में 'मिशन कनेक्ट' की शुरुआत की गई है। संभागायुक्त बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशन और कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर सरकारी सेवाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाना है। गाँव-गाँव पहुँचे अधिकारी, मौके पर हुआ समाधान          विगत दिनों मिशन कनेक्ट के तहत छिंदगढ़ विकासखंड की लगभग 60 पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुँचे। यह केवल निरीक्षण नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर मौके पर उनका समाधान करने की एक नई पहल थी। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी स्कूलों, आंगनबाड़ियों, आश्रम-छात्रावासों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में सक्रिय दिखाई दिए। गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान            निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मध्यान्ह भोजन और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की स्वयं जांच की। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की गंभीरता से जाँच की गई। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई, ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ और सुझाव सुने, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ। कलेक्टर और सीईओ ने की विस्तृत समीक्षा           निरीक्षण के बाद जनपद पंचायत छिंदगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाए, जबकि राज्य स्तर के विषयों को संबंधित विभागों को तत्काल भेजा जाए। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि मिशन कनेक्ट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना हमारी प्राथमिकता है।         सुशासन की ओर मजबूत कदम 'मिशन कनेक्ट' ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि अब योजनाएँ सिर्फ कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएँगी। अधिकारियों की सक्रियता से क्षेत्र में लोगों में उत्साह और भरोसा बढ़ा है।

आरसीपी सिंह पर ललन सिंह की दो-टूक: बोले– जेडीयू अपने दम पर मजबूत, प्रशांत किशोर पर भी खुलकर हमला

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह की वापसी की अटकलें जोरों पर हैं। हालांकि, जदयू के वरीय नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि जेडीयू को अब आरसीपी सिंह की जरूरत नहीं है। उन्होंने जन सुराज पार्टी के चीफ प्रशांत किशोर की जेडीयू में वापसी की संभावनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी।   केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने रविवार को कहा कि प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, “इन दोनों नेताओं को जनता ने खारिज कर दिया है और अब बिहार की राजनीति में उनका कोई स्थान नहीं है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पीके ने भविष्यवाणी की थी कि जदयू केवल 25 सीटों पर सिमट जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री के रूप में यह आखिरी राजनीतिक पारी होगी।” जदयू नेता ने सवाल किया कि प्रशांत किशोर के उन दावों और भविष्यवाणियों का क्या हुआ? ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीते बिहार चुनाव में जदयू की सीटें 42 से बढ़कर 85 हो गईं। वह फिर से मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद किशोर की राजनीतिक हैसियत अब कुछ भी नहीं है। बता दें कि हालिया चुनाव में जन सुराज पार्टी की करारी हार मिलने के बाद पीके के जेडीयू में लौटने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही थीं। इसी सवाल का जवाब देते हुए ललन सिंह ने ये बातें कहीं। उन्होंने पीके की पार्टी के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की संभावनाओं को भी खारिज किया। ललन सिंह ने कहा कि आरसीपी के जेडीयू का अध्यक्ष रहते 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटें 71 से घटकर 42 रह गई थीं। ऐसे लोगों की अब पार्टी में कोई जरूरत नहीं है। दरअसल, आरसीपी सिंह ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह और नीतीश कुमार कभी अलग नहीं हुए। उन्होंने कहा था कि नौकरशाही के अपने करियर और बाद में राजनीति में भी वे और नीतीश हमेशा एक ही पन्ने पर रहे हैं और दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छे से जानते और समझते हैं। आरसीपी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए थे। उन्होंने जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर की सराहना की थी और कहा था कि व्यवस्था और राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का उनका प्रयास बिहार की राजनीति में बड़े अच्छे परिणाम देगा। मगर अब उनके जन सुराज छोड़ने की चर्चा चल रही है।

अमिताभ जैन मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त, अग्रवाल और मिश्रा ने भी ली शपथ

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने आज यहां लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन एवं राज्य सूचना आयुक्त उमेश कुमार अग्रवाल एवं शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। मुख्य सचिव विकास शील ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई। शपथ ग्रहण समारोह में राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, और अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, राज्य शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक, राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आलोक चंद्रवंशी, राज्य सूचना आयोग के पूर्व आयुक्त मनोज त्रिवेदी, अशोक अग्रवाल, धनवेंद्र जयसवाल, राज्य सूचना आयोग के सचिव नीलम नागदेव एक्का सहित गणमान्य नागरिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञात हो कि नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं। राज्य सूचना आयुक्त उमेश अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस हैं तथा शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े हुए है।