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धुस्सी बांध सड़क परियोजना शुरू, जालंधर के ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत; सीचेवाल ने जताई खुशी

 जालंधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज जालंधर दौरे के दौरान शाहकोट में सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर बनने वाली 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का शिलान्यास किया। गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ेगी। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के लंबे प्रयासों और मान सरकार की इस पहल से बाढ़ प्रभावित इलाके के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। इससे उनकी वर्षों पुरानी मांग भी पूरी हो गई है। बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि इससे लोगों का सफर आसान होगा। भारी सुरक्षा के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को विशेष रूप से जालंधर दौरे पर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। जालंधर में सतलुज नदी के पूरे किनारे को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इसी कड़ी सुरक्षा के बीच उन्होंने शाहकोट पहुंचकर धुस्सी बांध सड़क का शिलान्यास किया। 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण इस प्रोजेक्ट के तहत सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक एक मजबूत और पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क लगभग 35 किलोमीटर लंबी होगी। इसके बनने से पूरे क्षेत्र और आसपास के लोगों की आवाजाही में बड़ा सुधार होगा, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। संत सीचेवाल के प्रयासों की सराहना इस शिलान्यास समारोह के दौरान राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल विशेष रूप से मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए संत सीचेवाल लंबे समय से लगातार प्रयास कर रहे थे। स्थानीय लोग उनके इन प्रयासों को बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। 2023 की बाढ़ के बाद उठी थी मांग सीचेवाल ने इस मौके पर 2023 की पुरानी आपदा को याद करते हुए कहा कि मंडाला छन्ना के पास अचानक धुस्सी बांध टूट गया था। बांध टूटने के कारण पूरे इलाके में बाढ़ आ गई थी, जिससे लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। तभी से बांध को मजबूत करने और उस पर पक्की सड़क बनाने की मांग लगातार उठ रही है। दर्जनों गांवों को मिलेगा सीधा फायदा संत सीचेवाल ने आगे बताया कि गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह पक्की सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में सीधे जोड़ेगी। इससे लोगों का सफर आसान होगा और बांध की मजबूती भी बढ़ेगी। इस इलाके की यह मांग पिछले कई सालों से लंबित थी, जिसे अब भगवंत मान सरकार ने पूरा कर दिया है। पिछली सरकारों के प्रति स्थानीय लोगों में था रोष इस मौके पर मंडाला छन्ना, गट्टा मुंडी कासू, गिदड़पिंडी समेत आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे कई सालों से इस सड़क के निर्माण की मांग कर रहे थे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया। मान सरकार का जताया आभार ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए कहा कि मौजूदा मान सरकार द्वारा इस सड़क का नींव पत्थर रख दिया गया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जिससे क्षेत्रवासियों को वर्षों पुरानी समस्या से निजात मिलेगी और उनका जीवन अधिक सुगम हो जाएगा।  

बिजली उत्पादन में बढ़ेगी दक्षता, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विकसित किया मॉनिटरिंग मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी। 4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है। कैसे होगी निगरानी इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा। क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है। निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।  

सिकंदरा थाना क्षेत्र के रवैय मुसहरी गांव में तनाव, पुलिस ने महिला को भीड़ से बचाकर अस्पताल पहुंचाया

जमुई जमुई जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित रवैय मुसहरी गांव में शुक्रवार सुबह एक युवक की मौत के बाद अंधविश्वास और अफवाहों ने तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। युवक की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने एक महिला को डायन बताकर उसके साथ मारपीट की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा। मृतक की पहचान रवैय मुसहरी निवासी भीम मांझी के 22 वर्षीय पुत्र मुश्क मांझी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार उसकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। महिला को पकड़कर गांव लाए, फिर की मारपीट जानकारी के अनुसार, कुछ ग्रामीणों ने युवक की मौत के लिए एक महिला को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। आरोप है कि ग्रामीण जानसिहडीह गांव निवासी अर्जुन मांझी की पत्नी अनवा देवी को पकड़कर रवैय मुसहरी ले आए और उसके साथ मारपीट की। घटना के दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसी ने मामले की सूचना सिकंदरा थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने महिला को अस्पताल भेजा पुलिस ने महिला को भीड़ से सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है कि मारपीट में महिला को चोटें आई हैं। वहीं ग्रामीणों और मृतक के कुछ परिजनों का आरोप है कि महिला ने मोहल्ले के कई लोगों को पानी पिलाया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौत के कारणों की जांच जारी सिकंदरा थाना पुलिस ने बताया कि युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें और कानून को अपने हाथ में न लें। घटना के बाद गांव में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।  

जल संरक्षण और सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए सरायकेला-खरसावां में नई योजना की शुरुआत

  कुचाई सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत छोटासेगोई पंचायत के कुलाचाकी गांव में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 48 लाख रुपये की लागत से बनने वाले चेकडैम (वीयर) जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया. खरसावां विधायक दशरथ गागराई की धर्मपत्नी और समाजसेवी बासंती गागराई और विधायक प्रतिनिधि अर्जुन उर्फ नायडू गोप ने संयुक्त रूप से शिलापट्ट का अनावरण कर योजना की आधारशिला रखी. चेकडैम से किसानों को मिलेगा लाभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी बासंती गागराई ने कहा कि चेकडैम निर्माण से क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा. राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतार रही है. उन्होंने कहा कि चेकडैम बनने से वर्षा जल का संचयन होगा, जिससे भू-जल स्तर में सुधार आएगा और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसका सीधा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिलेगा तथा खेती-किसानी को नई मजबूती मिलेगी. किसान हित योजनाओं और चेकडैम निर्माण पर जोर विधायक प्रतिनिधि अर्जुन गोप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है. स्थानीय विधायक दशरथ गागराई भी क्षेत्र के विकास के लिए सचेत हैं. इस योजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगी. कृषि को बढ़ावा मिलेगा. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. उन्होंने संवेदक को समय सीमा में पूरी गुणवत्ता के साथ चेक डैम का निर्माण करने को कहा. कार्यक्रम में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए इस मौके पर धर्मेंद्र सिंह मुंडा, सचिव मुन्ना सोय, मुखिया करम सिंह मुंडा, कारू मुंडा, राहुल सोय, नरेश मुंडा, बनवारी लाल सोय, संवेदक राकेश कुमार, पंकज कुमार, नित्यानंद शर्मा, गोवर सिंह मुंडा, जोन मुंडा, गुरूचरण मुंडा, रीसा गागराई, बुधू सोय, दुर्गाचरण गागराई, लखन मुंडा, निरंजन लेंका, कृष्णा हेंब्रम, संजय हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.

रुदौली में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण के दौरान सीएम योगी बोले 15 दिन रुकें, जांच करेगी सच उजागर

लखनऊ राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी की खबरों और एसआईटी जांच के बीच शुक्रवार को पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार बयान दिया। अयोध्या के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे सीएम योगी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से कहा कि आपने राम मंदिर के लिए 500 सालों तक इंतजार किया है। 15 दिन और इंतजार कर लीजिए। ट्रस्ट के कहने पर एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी दूध का दूध पानी का पानी करेगी। कोई अपराधी होगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अयोध्या और रामभक्तों को बदनाम करने की कोशिश न की जाए। सीएम योगी ने 15 दिनों तक किसी तरह की बयानबाजी नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि राम भक्तों और जयश्रीराम का नारा लगाने पर लाठी गोली चलाने वाले आज उपदेश देने चले हैं। कहा कि अयोध्या के बारे में जो समाचार पत्रों में देखने सुनने को मिला। उसके बाद ट्रस्ट के कहने पर हमने एसआईटी जांच बैठाई है। एसआईटी पूरे दूध का दूध पानी का पानी करेगी। कोई सबूत हो तो एसआईटी को दे दें सीएम योगी ने कहा कि जब तक जांच हो रही है कोई भी ऐसी अनर्गल बात न हो जो राम भक्तों की भावना को आहत करती हो। यह भी कहा कि किसी के पास इससे संबंधित दस्तावेजी सबूत हो तो एसआईटी को दे दें वह जांच करेगी। प्रभु श्रीराम ने मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा दी है, ऐसे में सभी को मर्यादा का पालन करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि जांच के बीच बयानबाजी होती है तो जांच प्रभावित करती है। जांच के बाद किसी को कोई बात कहनी होगी तो एसआईटी से कह सकते हैं। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या और श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। यह लोग नहीं चाहेंगे कि अयोध्या को सम्मान मिले। यह लोग अयोध्या को बदनाम करना चाहते हैं। अयोध्या और यहां के लोगों को अपमानित करते हैं। हम इनके बहकावे में कत्तई न आएं। इन लोगों का आचरण पहले से ही सभी के सामने है। राम भक्तों को बदनाम करने वाले बाबर को मानने वाले लोग कहा कि जो लोग रामभक्तों को अपमानित करते थे, अपराधियों के कब्र पर जाकर फातिया पढ़ते थे। जिन लोगों ने अब तक राम जन्मभूमि में दर्शन नहीं किया, अपने विधायकों को भी जाने से रोका, वह लोग बाबर को मानने वाले लोग हैं। उनके ही विधायक मनोज पांडेय ने जब सभी विधायकों को अयोध्या लाने की बात कही तो उन्हें अखिलेश ने फटकार दिया था। मनोज पांडेय को धुतकार कर भगा दिया था। आज मनोज पांडेय हमारी सरकार में मंत्री हैं। अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा कि यह लोग कभी अयोध्या नहीं आए और अयोध्या को बदनाम करने के लिए क्या-क्या कर रहे हैं, इसे देखते रहिए। उन लोगों की सोच कब्रिस्तान और कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने तक ही सीमित रही है। हम लोग अयोध्या के विकास में लगे हैं। आज एक ही विधानसभा में 126 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है। कांग्रेस का दोगला चरित्र कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वह लोग दोगले चरित्र के हैं। उन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर न बनने पाए, इसके लिए एड़ी चोटी का दम लगा दिया था। अयोध्या की पहचान का संकट खड़ा किया था। आज कांग्रेस बोल रही है कि राम भक्तों का अपमान हो गया। जब कांग्रेस कहती थी कि राम है ही नहीं, तब अपमान नहीं होता था? श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करने वाली कांग्रेस आज राम भक्तों के नाम पर मचल रही है।

पंजाब में सतलुज सफाई परियोजना को कोर्ट की हरी झंडी, विरोध में उतरी संघर्ष समिति

 रूपनगर  सतलुज नदी पर स्थित अगमपुर पुल के निकट डी-सिल्टिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ताजा आदेशों को लागू करने से पहले विभाग को मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए व कानून और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही कार्य किया जाना चाहिए। जिससे आगामी बरसाती मौसम में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान का सामना न करना पड़े। ये मांग संघर्ष समिति के सदस्यों ने करते हुए कहा कि प्रशासन पहले इस क्षेत्र का सीमांकन कर उसे पूरी तरह स्पष्ट करे और तारबंदी करने के बाद ही डी-सिल्टिंग का कार्य शुरू किया जाए। जिससे कि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। संघर्ष समिति ने यह भी सवाल उठाया कि सतलुज नदी का पानी पुल के पिल्लर नंबर-1 की ओर ही अधिक दबाव के साथ क्यों बह रहा है। क्या इसका कारण पुल के ऊपरी क्षेत्र में पूर्व में हुए अवैध खनन के कारण नदी की प्राकृतिक धारा का बदल जाना है। यदि ऐसा है तो विभाग इस तथ्य को सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है। 30 जून को दी गई थी डी-सिल्टिंग की अनुमति सदस्यों ने करते हुए कहा कि 8 जून को दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश में संशोधन करते हुए हाईकोर्ट ने पुल के पिलर नंबर-1 की मरम्मत व पुल से 35 से 50 मीटर अपस्ट्रीम तक सीमित क्षेत्र में 30 जून 2026 तक डी-सिल्टिंग की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 जून के बाद न्यायालय की अनुमति के बिना किसी प्रकार की डी-सिल्टिंग नहीं की जाएगी। इसके साथ ही रूपनगर के उपायुक्त को स्वयं मौके पर निगरानी रखने, अवैध खनन पर रोक सुनिश्चित करने व अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालती आदेश के बाद संघर्ष समिति ने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार और संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सार्वजनिक करने चाहिए। संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरदेव सिंह माजरी टिब्बा, यशवीर चंद भलाण, पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, एडवोकेट विशाल सैनी, सुरजीत सिंह ढेर, बलवीर सिंह शाहपुर, कीर्ति किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बड़वा, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता धर्मपाल सैनी माजरा व निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुख बाबा अच्छर सिंह महाकाल ने संयुक्त रूप से कहा कि विभाग द्वारा अदालत के समक्ष नए खसरा नंबर प्रस्तुत किए गए हैं। ऐसे में सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाए कि पुल से 35 से 50 मीटर तक डी-सिल्टिंग का वास्तविक क्षेत्र कौन-सा है। 2020 की पीडब्ल्यूडी विभाग की रिपोर्ट पर सरकार ने क्या कार्रवाई की पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने वर्ष 2020 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय स्वयं विभाग ने स्वीकार किया था कि अवैध खनन के कारण पुल के पिलर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे और पुल की सुरक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित करने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस रिपोर्ट के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की, समिति का गठन हुआ या नहीं और पिछले छह वर्षों में पुल की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए। उन्होंने मांग की कि यदि वर्ष 2020 में पिल्लर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे तो वर्ष 2026 में उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही पुल की वर्तमान स्थिति, नदी की जलधारा की दिशा तथा डी-सिल्टिंग के संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी भी जनता के सामने रखी जाए।  

15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश

 जोधपुर जोधपुर समेत राज्य के  कई जिलों में 21 जून को  रीनीट यूजी-2026 परीक्षा होगी। इसी दिन राज्यभर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम होगा। दोनों आयोजन का शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संचालन सुनिश्चित करने  के लिए जोधपुर जिला प्रभारी सचिव भवानी सिंह देथा ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर अटल सेवा केंद्र  में सम्बंधित अधिकारियों की बैठक ली, समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। प्रभ्ज्ञारी सचिव ने बताया कि रीनीट यूजी-2026 परीक्षा जिले के 46 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित होगी, जिसमें 15 हजार 407 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए हैं। प्रभारी सचिव ने परीक्षा के निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कदाचारमुक्त संचालन के लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रश्न पत्रों एवं गोपनीय सामग्री के सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, अभ्यर्थियों के बायोमीट्रिक सत्यापन, दोहरे स्तर की फ्रिस्किंग, परीक्षा केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था तथा सतत निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला कलक्टर आलोक रंजन को जिला स्तरीय समन्वय समिति के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, ड्यूटी मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति एवं उनके प्रशिक्षण, परीक्षा केन्द्रों के आसपास कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा नकल एवं संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने के निर्देश दिए। परीक्षा केन्द्रों के 300 मीटर परिधि क्षेत्र में ई-मित्र, फोटोकॉपी एवं साइबर कैफे सहित संबंधित गतिविधियों पर नियमानुसार नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा।  21 जून को सम्राट अशोक उद्यान में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की तैयारियों की भी प्रभारी सचिव ने समीक्षा की। उन्होंने योग संगम पोर्टल पर अधिकाधिक पंजीकरण करवाकर जनभागीदारी बढ़ाने तथा कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी उपखण्ड अधिकारियों को उपखण्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर योग दिवस कार्यक्रमों का प्रभावी आयोजन सुनिश्चित करने, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं आमजन की सहभागिता बढ़ाने तथा व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यक्रम स्थलों पर माइक, योगा मैट, पेयजल, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित विभागों को पारंपरिक समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रभारी सचिव ने कहा कि योग स्वस्थ जीवनशैली का आधार है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से आमजन को योग को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयास करते हुए दोनों आयोजनों को सफल बनाने का आह्वान किया।

फैमिली आईडी और रिकॉर्ड मिलान के साथ राशन डिपो की स्थिति की होगी जांच, डेटा होगा अपडेट

करनाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने प्रदेशभर में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो का विशेष सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारियों और खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षकों को अगले चार दिनों के भीतर सभी राशन डिपो का रिकॉर्ड सत्यापित कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार से इसकी शुरुआत होगी। सरकार की ओर से इस अभियान का उद्देश्य विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध राशन डिपो से संबंधित जानकारी को पूरी तरह शुद्ध, प्रमाणित और अद्यतन करना है, ताकि भविष्य में सरकारी नीतियां बनाने, योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक निर्णय लेने में सही एवं विश्वसनीय आंकड़ों का उपयोग किया जा सके। प्रदेश भर में राशन के करीब 9081 डिपो हैं। इनमें से करीब 9060 मैप भी किए जा चुके हैं। जबकि जिले में करीब 656 राशन डिपो हैं। इनसे करीब 4.72 लाख लोग राशन ले रहे हैं। अब इन सभी की जांच की जाएगी। फैमिली आईडी का भी होगा मिलान सत्यापन के दौरान प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान यानी डिपो की वर्तमान स्थिति की जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित डिपो वर्तमान में सक्रिय, रद्द, निलंबित (या स्वेच्छा से सरेंडर किया जा चुका है। अगर पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो उसे तत्काल अपडेट किया जाएगा। विभाग ने केवल डिपो की स्थिति की जांच तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रखी है। सत्यापन के दौरान प्रत्येक डिपो धारक की परिवार पहचान पत्र, पीपीपी यानी फैमिली आईडी और उसके परिवार के सदस्यों के विवरण का भी मिलान किया जाएगा। इससे विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी की भी पुष्टि हो सकेगी और भविष्य में किसी प्रकार की विसंगति की संभावना कम होगी। चार चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया विभाग ने सत्यापन के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की है। सबसे पहले संबंधित क्षेत्र का खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक यानी आईएफएस अपने अधिकार क्षेत्र के सभी राशन डिपो का भौतिक एवं रिकॉर्ड सत्यापन करेगा और रिपोर्ट तैयार कर संबंधित सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी यानी एएफएसओ को भेजेगा। इसके बाद एएफएसओ रिपोर्ट की जांच कर अपनी टिप्पणियां दर्ज करेगा और उसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के पास भेजेगा। डीएफएससी पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद रिकॉर्ड को स्वीकृत या अस्वीकृत करेगा। जिन रिकॉर्ड को मंजूरी मिलेगी, उन्हें विभाग का क्लीन और प्रमाणित डेटा माना जाएगा, जबकि जिन मामलों में कोई त्रुटि मिलेगी, उन्हें दोबारा सत्यापन के लिए संबंधित निरीक्षक के पास भेज दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अगले चार दिनों के भीतर सत्यापन, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर लें। विभाग का मानना है कि शुद्ध और प्रमाणित डेटा उपलब्ध होने से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड अपडेट रहेगा और भविष्य में योजनाओं के बेहतर संचालन तथा नीतिगत निर्णय लेने में आसानी होगी। -मुकेश कुमार, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, करनाल।  

लखनऊ से झांसी तक बेहतर सड़क संपर्क, औद्योगिक विकास और निवेश को मिलेगी रफ्तार

लखनऊ झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारे और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए 106 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा। परियोजना से क्षेत्र में निवेश, रोजगार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारे और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए 106 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा। परियोजना से क्षेत्र में निवेश, रोजगार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारा और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास क्षेत्र (बीडा) से बेहतर कनेक्टिविटी देगी। इससे झांसी, जालौन और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क संपर्कता मजबूत होगी। झांसी सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ जाएगी। दिल्ली, लखनऊ, आगरा और पूर्वांचल की ओर आवागमन आसान हो जाएगा। यूपीडा के निविदा दस्तावेजों के अनुसार, पहला खंड 50 किलोमीटर लंबा होगा।   यह जालौन जिले के फूलपुरा के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के चेनज 170+300 से शुरू होकर झांसी जिले के पिपरा गांव तक जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 2262.28 करोड़ रुपये है। दूसरा खंड 56.3 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी अनुमानित लागत 2,739.46 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। पिछले वर्ष ड्रोन सर्वे के दौरान 63 गांवों को चिह्नित किया गया था। परियोजना का महत्व यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा। मालवहन और कृषि उत्पादों के परिवहन में भी सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण और रक्षा औद्योगिक गलियारे को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा।   लागत और अन्य एक्सप्रेसवे से तुलना झांसी लिंक एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत करीब 47.05 करोड़ रुपये है। प्रति किलोमीटर लागत के हिसाब से यह उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे महंगा एक्सप्रेसवे है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पहले स्थान पर है, जिसकी प्रति किलोमीटर लागत करीब 64 करोड़ रुपये है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत लगभग 50 करोड़ रुपये है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत 33.9 करोड़ रुपये है।  

शिक्षक तबादला प्रक्रिया शुरू, लेकिन नई ट्रांसफर नीति से नाराजगी; शुक्रवार से आवेदन आमंत्रित

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि एक दिन बढ़ाते हुए अब 19 जून से आनलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्णय लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। 28 से 30 जून तक आदेश जारी होंगे। पहले आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण तिथि आगे बढ़ाई गई। हालांकि, स्थानांतरण नीति में शामिल नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियम इतने कड़े बनाए गए हैं कि अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले की प्रक्रिया का लाभ ही नहीं उठा पाएंगे। साथ ही, आवेदन के लिए केवल कुछ दिनों का समय दिए जाने पर भी आपत्ति जताई जा रही है। 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त सबसे बड़ी बाधा शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने तबादले के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जो कई शिक्षकों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी कारणों का खामियाजा अब उन्हें तबादला प्रक्रिया से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है। जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ नए नियमों के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण की पात्रता से बाहर रखा गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि जिनके प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें भी ड्यूटी अवधि में स्वतः निरस्त माना जाएगा। नियमों में राहत की मांग शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक ढंग से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को इन नियमों से राहत मिलने के बजाय निराशा हाथ लग रही है।