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दिल्ली की हवा अब होगी साफ? चीन की तकनीक देगी प्रदूषण पर ‘नियंत्रण’

नई दिल्ली दिल्ली में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर के बीच चीन ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस समस्या से निपटने के लिए मदद की पेशकश की है। 2010 के दशक की शुरुआत में दिल्ली और बीजींग दोनों ही धुंध और वायु प्रदूषण के अत्यधिक और खतरनाक स्तर से जूझ रहे थे, जहां पीएम 2.5 की सांद्रता नियमित रूप से 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक थी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर वार्षिक दिशानिर्देश से 50 गुना ज्यादा थी। नवंबर 2025 तक बीजींग ने निरंतर सुधारों के जरिये वायु प्रदूषण की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लगाने में सफलता हासिल कर ली है। आइये जानते हैं चीन ने बीजींग की हवा को कैसे साफ किया।   चीन की दिल्ली को प्रदूषण में मदद की पेशकश नई नीतियों के साथ कड़ाई से लागू किए गए नियम चीनी सरकार ने एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया, जिसमें नई नीतियों के साथ नए नियम बना कर उनको कड़ाई से लागू किया। चीन ने सबसे पहले बीजींग को चुना। यहां दूसरे देशों के दूतावास हैं और वायु प्रदूषण की समस्या चीन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण बन गई थी। तमाम बदलाव लाने वाली तकनीकों का परीक्षण बीजींग में किया गया और इसके सकारात्मक नतीजे सामने आने के बाद इसे दूसरी जगहों पर भी लागू किया गया। लो एमिसन जोन की रणनीति वायु प्रदूषण से निपटने और विशिष्ट क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की बीजींग की रणनीति में लो एमिसन जोन(एलईजेड) जैसी पहलों ने महत्पपूर्ण भूमिका निभाई। बीजिंग ने प्रदूषण नियंत्रण में सफलता पाई ये क्षेत्र उच्च-उत्सर्जन वाले वाहनों के प्रवेश को सीमित करते हैं, जिससे परिवहन के स्वच्छ और अधिक पर्यावरण-अनुकूल साधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त, शहर ने प्रदूषणकारी औद्योगिक सुविधाओं को बंद करके और ही¨टग प्रणालियों को उन्नत करके कोयले की खपत को कम करने के लिए काम किया।गैस आधारित इंडस्ट्री बीजींग ने कोयले के इस्तेमाल में कमी लाने में अग्रणी भूमिका निभाई। 3,000 छोटे बायलरों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया और 2017 तक कोयले के इस्तेमाल को 1.5 करोड़ टन तक सीमित कर दिया। यानी 30 प्रतिशत की कटौती। प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों ने इस कमी को पूरा किया, और शहर ने 4 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ाई। वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण का तरीका बीजींग ने लाइसेंस प्लेट लाटरी के •ारिए वाहनों की संख्या सीमित कर दी और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 1,000 किलोमीटर तक कर दिया। कैसे साफ हुई बीजींग की हवा? बीजींग ने सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से चलने वाले ई-वाहनों को अपनाया है, जिससे शहर के परिवहन परि²श्य में नया बदलाव आया है। 2020 तक, सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से नई बिक्री में इलेक्टि्रक वाहनों का योगदान 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2,000 से ज्यादा कारखाने बंद हो गए या स्थानांतरित हो गए, और सर्दियों के दौरान इस्पात उत्पादन में कटौती की गई। निगरानी और पेड़ लगाने पर जोर निगरानी के मोर्चे पर काफी काम किया गया। 1,500 स्टेशनों के एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क ने रियल टाइम पीएम2.5 डाटा उपलब्ध कराया। सार्वजनिक ट्रेकिंग के लिए 'ब्लू स्काई' जैसे एप को सशक्त बनाया गया। बीजींग के आसपास 10 करोड़ पेड़ लगाए। इससे पेड़ों ने बड़ी मात्रा में कार्बन का अवशोषण किया और हवाओं के प्रदूषण को कम करने में बड़ा योगदान दिया। ये रहे नतीजे 2013 से 2017 तक, बीजींग में पीएम2.5 का स्तर 35 प्रतिशत से घटकर 89.5 से 58 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत में 25 प्रतिशत की गिरावट आई। 2020 तक, तीन-वर्षीय कार्य योजना ने कोयले की खपत में 15 करोड़ टन की और कटौती की और कुल खपत में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक बढ़ा दी। सांस की दिक्कतों से जुड़े मामलों में 20 प्रतिशत की कमी आई। औसत आयु पर असर वायु गुणवत्ता में सुधार ने लोगों की जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में योगदान दिया है। बीजींग में, पीएम2.5 के स्तर में गिरावट से स्थानीय जीवन प्रत्याशा में लगभग 4.6 वर्ष की वृद्धि होने का अनुमान है। राष्ट्रीय स्तर पर 2013 से औसत जीवन प्रत्याशा में दो वर्ष की वृद्धि हुई है। 2013 और 2020 के बीच, चीन वायु प्रदूषण में कुल वैश्विक कमी के लगभग तीन-चौथाई के लिए जिम्मेदार था। इसके विपरीत, बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान सहित दक्षिण एशियाई देशों में 2000 के बाद से कण प्रदूषण में ¨चताजनक वृद्धि देखी गई है।  

IPS प्रमोशन पर लगी ब्रेक: MP में पहली बार डीपीसी निरस्त, पांच अधिकारियों को निराशा

भोपाल राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए 12 सितंबर को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्रवाई निरस्त कर दी गई है। प्रदेश में पहली बार है जब इसे निरस्त किया गया है। इसमें पांच अधिकारियों को पदोन्नत किया जाना था। बताया जा रहा है कि 1997 बैच के अधिकारी अमृत मीणा के जाति प्रमाण पत्र संबंधी दस्तावेजों में कुछ उलझन के चलते छानबीन की जा रही है। साथ ही एक अन्य दावेदार की विभागीय जांच भी चल रही है। मामले पर कोई भी बोलने के लिए तैयार नहीं डीपीसी की कार्रवाई रद होने की इन्हें ही मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, कोई भी अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की उपस्थिति में भोपाल में ही डीपीसी हुई थी, जिसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला सम्मिलित हुए थे। सामान्यत: 15 से 20 दिन में पदोन्नति की अधिसूचना जारी कर दी जाती है, पर डेढ़ माह बाद इसे रद कर दिया गया है।   डीपीसी में 15 लोगों के नामों पर विचार किया गया डीपीसी में 1997 और 1998 बैच के 15 अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया था। इसमें सीताराम सस्त्या, अमृत मीणा, विक्रांत मुराब, सुरेंद्र कुमार जैन, आशीष खरे, राजेश रघुवंशी, निमिषा पांडेय, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसाची सर्राफ और समर वर्मा का नाम शामिल था। अगले वर्ष यानी 2025 में सात अधिकारियों की पदोन्नति राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस में होनी है, पर वर्ष 2024 की डीपीसी में देरी के चलते वर्ष 2025 में भी देरी होगी। 

मध्यप्रदेश पुलिस एक्शन मोड में: 80% बाइक सवार बिना हेलमेट, शुरू हुआ बड़ा अभियान

भोपाल प्रदेश में प्रतिवर्ष छह से सात हजार दोपहिया वाहन चालक और सवारी की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो रही है। इसका बड़ा कारण यह है कि लगभग 80 प्रतिशत वाहन चालक हेलमेट नहीं पहन रहे हैं। इस कारण अब पुलिस प्रदेश भर में अभियान चलाकर हेलमेट नहीं लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करेगी। छह नवंबर (गुरुवार) से इसके लिए विशेष अभियान की शुरुआत हो रही है जो लगातार चलेगा। दोपहिया वाहन पर सवार दूसरी सवारी के लिए भी हेलमेट लगाना अनिवार्य होगा। मौतों के आंकड़े इस अभियान में सबसे अधिक सख्ती भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में की जाएगी। कारण, इन जिलों में सड़क हादसे और मौतों की संख्या अधिक है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 14,791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई। जिसमें इंदौर शहर में 2425, ग्रामीण में 290, भोपाल शहर में 945 और ग्रामीण में 235, उज्जैन में 1536, जबलपुर में 2035 और ग्वालियर में 1049 लोगों की मौत हुई। यानी इन पांच जिलों में 8,515 लोगों की मौत हुई जो कुल मौतों का 58 प्रतिशत है।   यही कारण है कि इन जिलों में अभियान के अंतर्गत बहुत अधिक सख्ती की जानी है। DIG, पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (PTRI) टीके विद्यार्थी ने बताया कि हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीछे बैठी सवारी को भी हेलमेट पहनने के लिए समझाइश देंगे। सभी जिलों में हर दिन की कार्रवाई की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह अभियान लगातार चलेगा।

बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश, लालू, राबड़ी और तेजस्वी ने डाला वोट, मोकामा में महिलाओं की लंबी कतारें

पटना   बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आज 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग हो रही है. इस सियासी जंग में कुछ खास सीटें हैं- तेजस्वी यादव की राघोपुर सीट, तेज प्रताप यादव की महुआ, और तारापुर, जहां से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं.  फोकस में रहने वाली दूसरी सीटें हैं- अलीनगर, जहां से सिंगर मैथिली ठाकुर बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं; डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की लखीसराय; JDU के उम्मीदवार बाहुबली अनंत सिंह की मोकामा सीट, जिन्हें अपने विरोधी दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है और RJD के उम्मीदवार दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब की रघुनाथपुर सीट है. इसके अलावा, 122 सीटों पर वोटिंग दूसरे चरण में 11 नवंबर को होगी. चुनाव नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. चुनाव आयोग ने वोटिंग को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और बूथों पर निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए हैं. आयोग लाइव वेबकास्टिंग के जरिए सभी बूथों की निगरानी करेगा. चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण में तीन करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 1.98 करोड़ पुरुष, 1.76 करोड़ महिलाएं और थर्ड जेंडर शामिल हैं. इस चरण में कई बड़े दिग्गजों की किस्मत का फैसला होगा.  मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, दायित्व भी: नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "लोकतंत्र में मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, दायित्व भी है. आज बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो रहा है. सभी मतदाताओं से आग्रह है कि अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें. मतदान करें और दूसरों को भी प्रेरित करें. पहले मतदान, फिर जलपान!"  वैशाली में भैंस पर बैठकर वोट डालने पहुंचा शख्स बिहार के वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड में मतदान के दौरान एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला. यहां के निवासी केदार प्रसाद यादव भैंस पर चढ़कर वोट डालने पहुंचे.  बिहार चुनाव पर बोलीं दिल्ली CM – NDA बहुमत से सरकार बनाएगा बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बिहार की जनता अपने भले-बुरे को अच्छी तरह जानती है. उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में जो विकास बिहार में हुआ है, वह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में ही संभव हुआ. रेखा गुप्ता ने विश्वास जताया कि इस बार भी एनडीए गठबंधन पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगा और पहले से ज्यादा वोट और सीटें जीतेगा. उन्होंने कहा, “जो खुद को ‘नायक’ समझते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि बिहार की जनता के दिलों पर राज करने वाला ही सच्चा ‘जननायक’ है. जिन्होंने जनता का पैसा लूटा, वो ‘खलनायक’ हैं और जेल जाएंगे. जो जनता को गुमराह करने वाले ‘नालायक’ हैं, वे विदेश जाकर छुट्टियां मनाएंगे.” तेज प्रताप यादव की अपील – बिहार की जनता ज़रूर करे मतदान, हर वोट की अहमियत जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महुआ विधानसभा सीट से उम्मीदवार तेज प्रताप यादव ने बिहार की जनता से मतदान करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हर वोट की अपनी कीमत होती है और जनता के आशीर्वाद का अपना अलग महत्व है. तेज प्रताप यादव ने कहा, “बिहार की जनता को अपने मताधिकार का उपयोग ज़रूर करना चाहिए. हर एक वोट बहुत अहम है. माता-पिता का आशीर्वाद जैसा महत्वपूर्ण होता है, वैसे ही जनता का आशीर्वाद भी हमारे लिए सबसे बड़ा वरदान है.” 'तवा से रोटी पलटती रहनी चाहिए…', फर्स्ट फेज इलेक्शन के बीच बोले लालू बिहार में पहले चरण के मतदान के बीच सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "तवा से रोटी पलटती रहनी चाहिए नहीं तो जल जाएगी. 20 साल बहुत हुआ! अब युवा सरकार और नए बिहार के लिए तेजस्वी सरकार अति आवश्यक है."  सुबह 9 बजे तक 13.13% वोटिंग, सहरसा सबसे आगे और लखीसराय सबसे धीमा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए 6 नवंबर 2025 को मतदान जारी है. राज्य के विभिन्न जिलों में मतदान की शुरुआत उत्साहजनक रही है. सुबह 9:00 बजे तक के आंकड़े के अनुसार, लगभग 13.13% मतदान दर्ज किया गया है. राज्य के जिलों में मतदान का रुझान अलग-अलग दिखाई दिया है. सहरसा जिला 15.27% वोटिंग के साथ सबसे आगे रहा है. वहीं, लखीसराय जिले में मतदान की गति सबसे कम रही, जहाँ केवल 7.00% मतदान दर्ज किया गया है. जिलों में मतदान का हाल राज्य के औसत मतदान 13.13% से ज्यादा वोटिंग दर्ज करने वाले जिलों में बेगूसराय (14.60%), मुजफ्फरपुर (14.38%), वैशाली (14.30%), खगड़िया (14.15%), गोपालगंज (13.97%) और मधेपुरा (13.74%) शामिल हैं. मुंगेर (13.37%), सीवान (13.35%), सारण (13.30%) और बक्सर (13.28%) में भी औसत के करीब मतदान हुआ है. राजधानी पटना में मतदान का प्रतिशत 11.22% रहा, जो राज्य के औसत से कम है. नालंदा में भी 12.45% मतदान दर्ज हुआ है, जबकि दरभंगा का आँकड़ा 12.48% रहा है. 'तेजस्वी हारेंगे, तेज प्रताप बहुत अच्छे आदमी…', बोले केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय  केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बिहार चुनाव को लेकर कहा, "बीजेपी प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी. नीतीश कुमार ही हमारे मुख्यमंत्री होंगे. तेजस्वी यादव राघोपुर से हारेंगे. तेज प्रताप बहुत अच्छे आदमी हैं, भगवान के भक्त हैं. हमारी उनको शुभकामनाएं हैं लेकिन तेजस्वी को हम हर कर्दम लेंगे और हमारे सतीश यादव वहां से जीतेंगे." उन्होंने आगे कहा कि हम तेज प्रताप को अच्छा मानते हैं तो भगवान के भक्त हैं लेकिन हम NDA का समर्थन करते हैं, इसलिए महुआ से भी एनडीए जीतेगा.

इंदौर-जबलपुर में गणना पत्रक नहीं पहुंचे, MP में प्रशासन हुआ परेशान

भोपाल मतदाता सूची के जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर पूरे देश में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, वह मध्य प्रदेश में बिना तैयारी के शुरू करा दिया गया। इंदौर, जबलपुर, सागर, विदिशा, राजगढ़ सहित अधिकतर जिलों में अब तक एसआईआर के फॉर्म (गणना पत्रक) ही नहीं पहुंच पाए हैं। कलेक्टर परेशान हैं क्योंकि आयोग का दबाव है कि बीएलओ को जल्दी फॉर्म बांटे जाएं। इधर, जिन प्रिंटरों (प्रकाशकों) को फॉर्म छापने का काम दिया गया है, वह इसे कर ही नहीं पाएं हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी इसका कारण प्रिटिंग न होने और कहीं तकनीकी गलतियों को बता रहे हैं। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का कोई भी अधिकारी इस गंभीर मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं और गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रहे हैं। प्रदेश में 5.74 करोड़ मतदाता हैं। इन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को घर-घर जाकर गणना पत्रक देना है और भरवाकर वापस लेना है। यह काम चार नवंबर से चार दिसंबर तक पूरा किया जाना है।   नहीं हुआ है छपाई का काम पूरा इसके लिए आवश्यक है कि समय से बीएलओ को गणना पत्रक मिल जाएं लेकिन अभी छपाई ही पूरी नहीं हुई है। इंदौर जिले में 2,625 बूथों में से छह सौ से अधिक बूथों पर ही प्रपत्र मिल सके। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि दो-तीन दिन में प्रपत्र की छपाई पूरी होगी। मंदसौर जिले में दूसरे दिन भी काम प्रभावित हुआ। करीब 100 मतदान केंद्रों पर ही प्रपत्र पहुंचे। उज्जैन में साढ़े तीन लाख फॉर्म बांटे हैं और जब बाकी आ जाएंगे तो उन्हें बांटा जाएगा। खंडवा के उप जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश सावले का कहना है कि प्रपत्र प्रिंट होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे-जैसे उपलब्ध होते जा रहे हैं, बीएलओ तक पहुंचाए जा रहे हैं। धार जिले में कुछ स्थानों पर तकनीकी गलतियों के कारण प्रपत्र पहुंचने में दिक्कत आई है। नीमच जिले में महज 25 प्रतिशत प्रपत्र की आपूर्ति हो सकी। रतलाम जिले में 1,297 में से 150 बूथ के ही प्रपत्र आए हैं। महाकोशल क्षेत्र की बात करें तो डिंडौरी जिले में 6,55 मतदान केंद्रों में केवल 21 बीएलओ के लिए फॉर्म आए हैं। जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, दमोह में भी यही स्थिति रही। दमोह में 20 लाख फॉर्म की आवश्यकता के विरुद्ध मात्र एक लाख फॉर्म उपलब्ध हैं। कलेक्टर सुधीर कोचर का कहना है कि फॉर्म भोपाल से आने के कारण काफी परेशानी हो रही है। मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा का कहना है कि अभी पूरे फॉर्म नहीं आएं हैं, जैसे-जैसे आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बीएलओ को वितरित किए जा रहे हैं। यही स्थिति मध्य क्षेत्र के जिलों की भी है। राजगढ़ जिले के किसी भी बीएलओ को बुधवार शाम तक गणना पत्रक ही नहीं मिल सका। जिसके कारण वे घर-घर भी नहीं पहुंचे। जिला निर्वाचन अधिकारी डा. गिरीश कुमार मिश्रा का कहना है कि फॉर्म राज्य स्तर से प्रिंट हो रहे हैं। आज 250 से ज्यादा बूथों के फॉर्म आए हैं। विदिशा जिले में मंगलवार को 1,347 मतदान केंद्रों से केवल 184 केंद्रों में ही गणना पत्रक पहुंचे थे। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने माना कि गणना पत्रक की कमी के कारण मतदाता गहन पुनरीक्षण के लिए पहले दिन बीएलओ घर-घर नहीं जा पाए। हरदा और सागर में भी गणना पत्रक की कमी बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप, बिना तैयारी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की कांग्रेस की एसआईआर के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि बिना किसी तैयारी के चुनाव आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिना आवश्यक फॉर्म उपलब्ध कराए बीएलओ को दबाव में काम करने को कहा जा रहा है। हम इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और चुनाव आयोग से पत्राचार कर पूछेंगे कि बिना पर्याप्त तैयारी के एसआईआर की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई है।

राज्यपाल पटेल से अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति के सदस्यों ने की सौजन्य मुलाकात

राज्यपाल  पटेल से अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने की सौजन्य भेंट राज्यपाल  मंगुभाई पटेल के साथ विभिन्न विषयों पर किया विचार-विमर्श भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल से अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सदस्यों ने बुधवार को राजभवन के बैंक्वेट हॉल में सौजन्य भेंट की। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने समिति के सदस्यों के राजभवन आगमन पर उनका स्वागत किया। पारस्परिक परिचयात्मक चर्चा की। संसद के दोनों सदनों में अनुसूचित जातिऔर जनजाति के प्रतिनिधित्व के संबंध में जानकारी ली। समिति के मध्यप्रदेश प्रवास और कार्यों के संबंध में विचार-विमर्श किया। राज्यपाल  पटेल को अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष  फग्गन सिंह कुलस्ते ने बताया कि समिति अनुसूचित जाति जनजातियों के प्रतिनिधित्व की स्थिति के अध्ययन के लिए 03 नवंबर से 07 नवंबर तक मध्यप्रदेश और गोवा राज्य के भ्रमण पर है। समिति मध्यप्रदेश में पचमढ़ी प्रवास उपरांत भोपाल आई है। प्रवास के दौरान समिति द्वारा शासन के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक प्रतिष्ठानों, संगठनों और स्वशासी संस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है। इस अवसर पर समिति के सदस्य मती प्रतिमा मंडल,  जगन्नाथ सरकार,  हरीशचन्द्र मीणा,  गोविंद एम. करजोल,  डी. प्रसादराव, मती सुमित्रा बाल्मीक,  मिथलेश कुमार,  आर. नारज़ारी, मती फूलोदेवी नेताम,  देवेन्द्रप्रताप सिंह, प्रतिनिधि मण्डल के सचिव  डी.आर. शेखर और उपसचिव  मोहन अरूमला उपस्थित थे।  

टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर में 9 नवंबर को देशभर के नामचीन वक्ता साझा करेंगे अपने विचार

टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर का टेड एक्स आयोजन 9 नवंबर को, देशभर के प्रतिष्ठित वक्ता होंगे शामिल आईसेक्ट के सहयोग से मिंटो हॉल में होगा नवाचार और प्रेरणा का संगम भोपाल  राजधानी भोपाल एक बार फिर नई सोच, नवाचार और प्रेरक विचारों का केंद्र बनने जा रही है। टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर, आईसेक्ट (AISECT) के सहयोग से 9 नवंबर 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में टेड एक्स का विशेष आयोजन करने जा रहा है। यह कार्यक्रम युवाओं, उद्यमियों, नवोन्मेषकों और सृजनशील लोगों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। टेडएक्स शाहपुरा लेक चैप्टर के इस आयोजन में प्रेरक व्याख्यानों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को सीखने, समझने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। यह कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इनमें म.प्र. क्रिकेट संघ (MPCA) एवं MPL के चेयरमैन और Kuberha AI व Ethara AI के को-फाउंडर महानार्यमान सिंधिया, गूगल में स्टार्टअप्स पार्टनरशिप लीड नूपुर वर्मा, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड की लीड – कंटेंट प्रोग्रामिंग दिव्या मूरजानी, मैनेजमेंट गुरु, लेखक एवं स्तंभकार एन. रघुरमन, स्टैंडअप कॉमेडियन और ‘ऑल वूमन इंक’ की फाउंडर आंचल अग्रवाल, तथा कवयित्री, गीतकार और अभिनेत्री गुंजन सैनी शामिल हैं। ये सभी वक्ता अपने अनुभवों और जीवन-यात्रा के माध्यम से प्रतिभागियों को नए दृष्टिकोण और प्रेरणा से परिचित कराएँगे। आईसेक्ट के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने इस पहल पर बात करते हुए कहा,“TEDx शाहपुरा लेक चैप्टर जैसे मंच युवाओं को वैश्विक दृष्टि, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के लिए प्रेरित करते हैं। आईसेक्ट का सदैव प्रयास रहा है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम न रहे, बल्कि यह विचार, संवाद और प्रयोग का मंच बने। इस आयोजन से हम चाहते हैं कि युवा अपने भीतर की क्षमता को पहचानें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।” टेडएक्स शाहपुरा लेक के मुख्य क्यूरेटर डॉ. दीपक मोटवानी ने कहा, “मैंने हमेशा देखा है कि मेट्रो शहर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि उनके पास टेडएक्स जैसे वैश्विक मंचों तक पहुँच है। इसी सोच से हमने तय किया कि भोपाल और यहाँ के युवाओं के लिए भी ऐसा ही एक मंच लाया जाए, जहाँ वे अपने विचारों और क्षमताओं को दुनिया के सामने रख सकें।”

BSP सुप्रीमो मायावती आज बिहार दौरे पर, रैली से भरेंगी चुनावी जोश

पटना बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आज बिहार के कैमूर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी। बसपा के एक बयान के अनुसार, रैली दोपहर में भभुआ हवाई पट्टी के पास एक मैदान में आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में आसपास के जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी ने कहा कि बसपा लगभग सभी सीटों पर बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ रही है। बयान में कहा गया है कि राज्य में पार्टी के अभियान का नेतृत्व बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम, राष्ट्रीय समन्वयक अनिल सिंह और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद कर रहे हैं। 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। 2025 के बिहार चुनाव (Bihar Election 2025) में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच होगा। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस पार्टी, दीपांकर भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई-एमएल), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने भी राज्य की सभी 243 सीटों पर दावा ठोका है।

UPSC की चुनौती और वजन की जंग: IAS परी ने कैसे 45 किलो कम कर खुद को बनाया फिट और फाइनली IAS अधिकारी

 जयपुर  परी बिश्नोई के लिए आईएएस अधिकारी बनने की राह बिल्कुल भी आसान नहीं थी. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर यूपीएससी की तैयारी के दौरान अपने भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बारे में खुलकर बात की. 2017 में अपने पहले यूपीएससी अटेम्प्ट में असफलता का सामना करने से लेकर तनाव के कारण बढ़ते वजन से जूझने तक उनकी कहानी लाखों उम्मीदवारों के लिए प्रेरणादायक है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी एक लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें अक्सर उम्मीदवारों को भावनात्मक और शारीरिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक कहानी है एक महिला IAS अधिकारी की, जिन्होंने अपनी पहली असफलता के बाद न सिर्फ भारी वजन बढ़ने की समस्या से लड़ाई लड़ी, बल्कि उसे हराकर अपने IAS बनने के सपने को भी पूरा किया। हम बात कर रहे हैं आईएएस परी बिश्नोई की। पहली असफलता और वजन बढ़ने की चुनौती UPSC की तैयारी कर रहे हर उम्मीदवार की तरह, इस अधिकारी ने भी पूरी लगन से अपना पहला प्रयास दिया था। लेकिन, जब उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली, तो यह उनके लिए एक बड़ा झटका था। इस भावनात्मक तनाव और अनिश्चितता के दौर में, उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खो दिया और इसका सीधा असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ा। देखते ही देखते उनका वजन 45 किलोग्राम तक बढ़ गया। इस दौरान, वह अपनी पसंदीदा चीजें, जैसे बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना भी बंद कर चुकी थीं। उन्हें लगा कि उनका सपना अधूरा रह गया है और शायद वह कभी IAS नहीं बन पाएंगी। असफलता के बाद सफलता का स्वाद  हालांकि निराशा का यह दौर हमेशा के लिए नहीं रहा. जब परी को दो साल बाद यूपीएससी के इंटरव्यू का कॉल आया तो उसके अंदर कुछ बदल गया. उन्होंने तय किया कि इस बार उनकी लड़ाई सिर्फ रैंक या पद के लिए नहीं बल्कि अपने आत्मविश्वास और पहचान को फिर से हासिल करने के लिए है. नए दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल बदलने पर फोकस किया. लगातार एक्सरसाइज, वजन उठाकर, पौष्टिक खाना और ताजा भरपूर स्वस्छ आहार के साथ उन्होंने कठोर अनुशालन का पालन किया. उनके शारीरिक परिवर्तन ने उसके मानसिक विकास को भी प्रभावित किया और वह एनर्जेटिक महसूस करने लगीं. गलतियों से सीखा सबक परी ने अपनी पिछली तैयारी के दौरान की गई गलतियों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पिछले टॉपर्स की अपनाई गई रणनीतियों का विश्लेषण किए बिना कोचिंग क्लासेस को आंख मूंदकर फॉलो किया. उनके पास कोई निर्धारित टाइम टेबल नहीं था और कोई सब्जेक्ट स्पेसिफिक लक्ष्य नहीं थे और दृष्टिकोण में स्पष्टता का अभाव था. परीक्षा पैटर्न या पिछले पेपरों पर ध्यान देने के बजाय उन्होंने केवल वही पढ़ा जिसमें उनकी रुचि थी. इन गलतियों को उन्होंने सुधारा.  2019 में परी बिश्नोई ने आखिरकार 30वीं रैंक के साथ यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली और अपने लंबे समय से देखे गए सपने को हकीकत में बदल लिया. उनकी शादी भाजपा नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल बिश्नोई के पोते भव्य बिश्नोई से हुई है. इस साल की शुरुआत में इस जोड़े ने अपनी बेटी वेदा का स्वागत किया. परी की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्ची जीत कभी न गिरने में नहीं, बल्कि हर बार जब ज़िंदगी आपको गिराए, तब उठ खड़े होने में है. आत्मविश्वास की वापसी और वजन घटाने का संकल्प हालांकि एक दिन उन्हें महसूस हुआ कि अगर उन्हें अपने सपने को पूरा करना है, तो उन्हें सबसे पहले खुद पर विश्वास करना होगा और अपने शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करना होगा। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने सबसे पहले अपना बढ़ा हुआ वजन कम करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने कुछ सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाए: नियमित व्यायाम: उन्होंने हर दिन व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। शुरू में यह मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन गई। स्वस्थ आहार : उन्होंने अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दिया। जंक फूड और अनहेल्दी भोजन से दूरी बनाकर संतुलित और पौष्टिक आहार लेना शुरू किया। सकारात्मक सोच : उन्होंने नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मक सोच अपनाई। हर छोटे बदलाव और सफलता के लिए खुद को सराहा। इन प्रयासों के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपना 45 किलो वजन कम किया, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत महसूस करने लगीं। IAS बनने का सपना हुआ साकार वजन कम करने के बाद, उन्होंने एक नए आत्मविश्वास के साथ UPSC परीक्षा की तैयारी में खुद को फिर से झोंक दिया। इस बार उनकी रणनीति ज्यादा फोकस और अनुशासन वाली थी। उन्होंने पिछली गलतियों से सीखा और अपनी कमियों पर काम किया। आखिरकार, उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयासों से UPSC परीक्षा क्रैक कर IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया। यह कहानी उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है, जो असफलता और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह दिखाती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मुश्किल आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती, फिर चाहे वह वजन कम करना हो या देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करना।

लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी: 1500 रुपये की 30वीं किस्त कब आएगी, देखें अपडेट

भोपाल   मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए नवंबर का महीना बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इसी महीने से उन्हें बढ़ी हुई किस्त का फायदा मिलने जा रहा है. राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा साल 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की राशि मिलेगी. यह दूसरी बार होगा जब लाड़ली बहनों को बढ़ी हुई किस्त का लाभ नवंबर 2025 और भविष्य में जारी रहेगी जबकि मध्य प्रदेश सरकार तीसरी बार किस्त की राशि बढ़ाने का फैसला नहीं कर देती. शुरुआत में लाड़ली बहनों को योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये दिए जा रहे थे. योजना की पहली किस्त 10 जून 2023 को जारी की गई थी. इसके बाद अक्टूबर 2023 से राशि बढ़ाकर 1250 रुपये कर दी गई थी, जो लगातार अक्टूबर 2025 तक महिलाओं के खातों में भेजी गई. अब नवंबर 2025 से फिर एक बार किस्त में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, यानी अब हर लाभार्थी महिला को मंथली 1500 रुपये मिलेंगे. लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1500 रुपये नवंबर महीने में प्रदेश की मोहन सरकार लाड़ली बहनों के खाते में 1500 रुपये ट्रांसफर करेगी। बता दें कि, लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में महिलाओं के खाते में हर महीने 1000 रुपये भेजे जाते थें। इस राशि को धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रदेश सरकार ने 1000 से बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये कर दिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार योजना की 30वीं किस्त(Ladli Behna Yojana 30th installment) 5 नवंबर से 10 नवंबर 2025 के बीच महिलाओं के खातों में भेज सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। 12 अक्टूबर को मिली थी 29वीं किस्त जानकारी के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना की 29वीं किस्त 12 अक्टूबर को जारी की गई थी। मोहन सरकार ने 1.26 लाख लाड़ली बहनों के खाते में 1,541 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थें। इसी महीने भाई दूज पर और 250 रुपये सरकार ने ट्रांसफर किए। अब जल्द ही योजना की 30वीं किस्त लाड़ली बहनों को मिलेगी। लाड़ली बहनों को मिलेंगे 3 हजार रुपये? सरकार की घोषणा के मुताबिक, लाड़ली बहनों को 2028 तक 3000 हजार रुपये मिलेंगे। योजना की राशि में साल-दर-साल बढ़ोत्तरी की जाएगी। जिस तरह सरकार ने राशि 1000 से बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये कर दिए। उसी तरह साल 2028 तक ये राशि 3 हजार कर दी जाएगी। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने     1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।