भोपाल देश में मानसून की पश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर तक प्रदेश के उत्तर पश्चिमी क्षेत्रों से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी. प्रदेश में 22 जून को मानसून के आगमन हुआ था. मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में करीब 20 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. प्रदेश में अलीराजपुर जिले में सबसे कम बारिश हुई है. यहां बारिश का आधा कोटा ही पूरा हो सका। हालांकि, मानसून की विदाई के पहले एक बार मानसून पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के एक दर्जन जिलों को तरबतर करेगा. अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र के ऊपर बन रहे निम्न दबाव का क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। इन जिलों को भिगोने के बाद शुरू होगी विदाई अलनीनो की वजह से इस बार बारिश में कमी की आशंका जताई गई थी, इसका प्रदेश के कई हिस्सों में असर दिखाई दिया है. प्रदेश में औसतन 6 फीसदी कम बारिश हुई है. प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में औसत से 2 फीसदी कम और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 10 फीसदी कम बारिश हुई है. देश में मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो गई है. पश्चिमी राजस्थान से मानसून ने विदा लेना शुरू कर दिया है. मध्य प्रदेश में 30 सितंबर से बारिश की विदाई शुरू होने जा रही है. हालांकि, विदाई के पहले प्रदेश में झमाझम बारिश होने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिक अरूण शर्मा के मुताबिक "अंडमान सागर और आसमान क्षेत्र के ऊपर स्थित निम्न दवाब का क्षेत्र आगे बढ़ रहा है. इसके चलते 23 और 24 सितंबर को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के जिलों में अच्छी बारिश होगी. इसके चलते जिन जिलों में कम बारिश हुई है, वहां भी बारिश के कोटे में सुधार की उम्मीद है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में बारिश का दौर रहेगा। मौसम विभाग ने 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले रिमझिम जारी रहेगी। प्रदेश में अब तक औसत 33.9 इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार तक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) उत्तर अंडमान सागर एवं आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके आगे बढ़ने और 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। ऐसा होने से 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश शुरू होगी। इस दिन प्रदेश के छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया। बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा। 32 जिलों में 5% से 49% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 24% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। रविवार तक आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% कम पानी गिरा है। मध्य प्रदेश के 20 जिले रह गए प्यासे मध्य प्रदेश में 1 जून से 20 सितंबर तक के आंकड़ों को देखा जाए तो मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 10 फीसदी से लेकर 49 फीसदी तक कम बारिश हुई है. प्रदेश में सबसे कम बारिश अलीराजपुर जिले में हुई है. यहां बारिश का कोटा आधा ही पूरा हो सका. अलीराजपुर के अलावा कई जिले हैं जहां बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका. इसके अलावा विदिशा, नर्मदापुरम, रायसेन जैसे जिलों में भी कम बारिश हुई है, जहां बड़े पैमाने पर गेहूं और धान की फसल होती है. कम बारिश से यह फसलें प्रभावित होंगी। इसके अलावा इंदौर, उज्जैन में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि राजधानी भोपाल में सामान्य से 12 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और भोपाल का बड़ा तालाब भरने से भदभदा और फिर कलियासोत डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं। मध्य प्रदेश के बांधों में पहुंचा भरपूर पानी हालांकि, मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश के बाद भी प्रदेश में गर्मी के सीजन में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना होगा. प्रदेश के बांधों में भरपूत पानी पहुंचा है. प्रदेश के बड़े बांध 80 फीसदी और उससे ज्यादा भर चुके हैं. मंदसौर जिले में आने वाला गांधी सागर बांध 79.35 फीसदी भर चुका है, जबकि तवा बांध 87.26 फीसदी भर चुका है. जबलपुर के बरगी बांध का बारिश में कई बार गेट खोलना पड़ा है. यह बांध पूरी तरह से लबालब हो चुका है। यही स्थिति बाणसागर डैम की है. प्रदेश के 45 प्रमुख बांधों में से 34 बांध 80 फीसदी से ज्यादा भर चुके हैं, इनमें प्रदेश के सभी बड़े बांध शामिल हैं. प्रदेश में ऐसा कोई बांध नहीं है, जो 50 फीसदी से कम भरा हो. सबसे कम जल भराव वाला बांध ओंकारेश्वर है, वह भी 69.84 फीसदी पानी भर चुका है। इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई … Read more