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लालघाटी चौराहे पर भीखमंगाई पर कड़ा अभियान, भोपाल प्रशासन का सख्त कदम

भोपाल राजधानी को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन पिछले 10 महीनों से प्रयासरत है। साल की शुरुआत में अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाया गया था और कईयों को सुधार गृह तक भेजा गया था। कुछ मामलों में एफआइआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन वक्त के साथ अभियान धीमा पड़ गया। नतीजा यह हुआ कि शहर के चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भिक्षुकों की संख्या फिर से बढ़ गई। इसी को देखते हुए प्रशासन ने भिक्षावृत्ति रोकने के लिए सात टीमों का गठन किया है। प्रत्येक टीम की जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है। शुक्रवार को संत हिरदाराम नगर क्षेत्र की टीम ने लालघाटी चौराहे पर निरीक्षण किया। टीम ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समझाया कि वे भीख न मांगें और अपने घर लौट जाएँ। चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा भीख मांगते पकड़े गए तो कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे चला अभियान तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में सुबह 10 बजे शुरू हुआ अभियान शाम चार बजे तक चला। नगर निगम सहायक प्रभारी उद्यान अवध नारायण मकोरिया की अगुवाई में टीम लालघाटी चौराहे पर पहुंची। टीम को देखकर कई भिक्षुक भाग निकले, लेकिन कुछ वहीं लौटकर वाहन चालकों से पैसे मांगने लगे। टीम ने जब आधार कार्ड देखे तो पाया कि अधिकांश भिक्षुक राजस्थान और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्हें समझाया गया कि भोपाल में भिक्षावृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसलिए वे अपने गृह राज्य लौट जाएँ। मासूम बच्चों के साथ मिली महिला निरीक्षण के दौरान लालघाटी फ्लाईओवर के नीचे एक महिला अपने छोटे बच्चों के साथ बैठी मिली। पूछताछ में उसने बताया कि वह महाराष्ट्र की रहने वाली है और इलाज के लिए भोपाल आई है। उसके पति यहां मजदूरी कर रहे हैं। टीम ने उसे भी चेतावनी दी कि सड़क पर बैठकर भिक्षा न मांगे। नहीं माने तो होगी एफआईआर हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि यदि भिक्षुक समझाईश के बाद भी नहीं मानते और भीख मांगते पाए जाते हैं तो लेने और देने वाले दोनों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद भिक्षुकों को सुधार गृह भेजकर स्वजनों से संपर्क कर सौंपा जाएगा। नोडल अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने बताया कि शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए सभी एसडीएम के नेतृत्व में टीमें गठित की गई हैं। अभी भिक्षुकों को समझाया जा रहा है, लेकिन आगे सड़क से हटाकर सुधार गृह भेजने और एफआइआर दर्ज करने की कार्रवाई होगी।

स्वर्ण से सजी मिठाई: एक किलो ‘स्वर्ण प्रसादम’ की कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

जयपुर शहर में एक मिठाई की दुकान ने दीपावली और त्योहारी सीजन के मौके पर भारत की सबसे महंगी मिठाई ‘स्वर्ण प्रसादम’ बाजार में उतार दी है। इस मिठाई की कीमत 1 लाख 11 हजार रुपये रखी गई है। दुकान की मालिक अंजलि जैन ने बताया कि यह मिठाई न सिर्फ स्वाद में खास है, बल्कि पैकेजिंग और रूप में भी बेहद प्रीमियम है। स्वर्ण प्रसादम को एक गहनों के बॉक्स में पैक किया गया है और इसकी बनावट में सबसे महंगी और प्रीमियम ड्राय फ्रूट चिलगोजा का इस्तेमाल किया गया है। मिठाई में 24 कैरेट का शुद्ध सोना, जिसे स्वर्ण भस्म या गोल्ड ऐश भी कहा जाता है, मिलाया गया है। इसके अलावा मिठाई पर जैन मंदिर से प्राप्त गोल्ड वर्क भी किया गया है, जो पशु क्रूरता मुक्त है। अंजलि जैन ने बताया कि मिठाई के ऊपर के हिस्से में केसर लगाया गया है और चिलगोजा के टुकड़े सजाए गए हैं, इसलिए इसकी कीमत बहुत अधिक रखी गई है। उन्होंने बताया कि इसमें शामिल गोल्ड ऐश भारतीय आयुर्वेद से प्राप्त किया गया है, जिससे यह पूरी तरह भारतीय परंपरा और विरासत को दर्शाता है। दुकान मालिक ने कहा कि जो भी चीज भारतीय परंपरा को दर्शाती है, उसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती। यही कारण है कि यह मिठाई इतनी खास और महंगी है।

ईडी गिरफ्तारी पर चुनौती: चैतन्य बघेल की याचिका हाईकोर्ट ने ठुकराई

बिलासपुर ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली चैतन्य बघेल की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में यह निर्णय लिया गया है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद 24 सिंतबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था. याचिका में ईडी की कार्रवाई को असंवैधानिक और नियम विरुद्ध बताया गया था. ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई। ईडी की जांच में पता चला है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के 16.70 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया है। इस पैसे का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया, जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया। पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे ईडी ने शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।

तीन युवकों की दर्दनाक मौत: उज्जैन में कार और डंपर की भयानक टक्कर

उज्जैन  आगर रोड पर घट्टिया के ग्राम जैथल के पास कार और डंपर की आपस में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। भिड़ंत इतनी खतरनाक थी कि कार का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया। घटना में कार में सवार चार में तीन युवकों की मौत हो गई। एक की हालत गंभीर है। युवक बड़नगर और उज्जैन के रहने वाले हैं और नलखेड़ा में बगलामुखी माता मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। बड़नगर के इंगोरिया निवासी आदित्य पंड्या उम्र 22 वर्ष, अभय पंडित उम्र 20 वर्ष, उज्जैन के राजेश रावल उम्र 50 वर्ष व शैलेन्द्र आचार्य उम्र 20 वर्ष नलखेड़ा में दर्शन कर पुन: उज्जैन लौट रहे थे। जैथल के पास रात को 12.30 बजे गलत दिशा से आ रहे डंपर से कार की टक्कर हो गई। डंपर अलिसा फूड कंपनी का बताया जा रहा है। टक्कर में आदित्य पंड्या, अभय पंडित, राजेश रावल की मौत हो गई। शैलेंद्र आचार्य को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। डंपर चालक फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया। कार में मृत युवकों को ग्रामीणों से मदद से बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर विधायक सतीश मालवीय मौके पर पहुंचे।

महालक्ष्मी मंदिर की अनोखी भव्यता: 5 दिन तिजोरियों और नोट-आभूषणों से सजा रहेगा मंदिर

रतलाम  रतलाम में मां महालक्ष्मी का मंदिर सज चुका है। सजावट फूलों से नहीं, हीरे, जवाहरात और नोटों से हुई है। मंदिर की हर लड़ में नोट लगे हैं। किसी में 10 तो किसी में 500 रुपए नजर आ रहे हैं।इस अद्भुत सज्जा के लिए भक्तों ने अपनी तिजोरी खोल दी है। मंदिर में अर्पित नकदी-आभूषण को दीपोत्सव के पांच दिन के बाद प्रसादी के रूप में भक्तों को समिति वापस लौटाएगी। मंदिर की सजाने की सालों पुरानी परंपरा के तहत इस साल 2 करोड़ रुपए से मंदिर को सजाया गया है। आज तक यहां से एक रुपया इधर से उधर नहीं हुआ है। धन राशि देने वालों में रतलाम के अलावा प्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। दीपोत्सव के पहले दिन यानी आज धनतेरस से मंदिर की सजावट को भक्त निहार सकते हैं। संभवत: यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जो पांच दिनों तक भक्तों द्वारा अर्पित आभूषण और नोटों से सजा रहता है पहले जानिए आखिर यह परंपरा शुरू कैसे हुई…? मंदिर में पूजा कराने वाले अश्विनी पुजारी बताते हैं कि करीब 300 साल पुराना महालक्ष्मी जी का यह मंदिर रियासतकालीन है। रतलाम के महाराजा रतन सिंह राठौर ने जब रतलाम शहर बसाया, तब से यहां दीपावली धूमधाम से मनाई जाने लगी। राजा वैभव, निरोगी काया और प्रजा की खुशहाली के लिए पांच दिन तक अपनी संपदा मंदिर में रखकर आराधना कराते थे। इसके लिए महाराजा शाही खजाने के सोने-चांदी के आभूषण मां लक्ष्मी जी के श्रृंगार के लिए चढ़ाते थे, तभी से ये परंपरा चली आ रही है। धीरे-धीरे व्यवस्था बदलती गई और भक्त मंदिर के लिए चढ़ावा लेकर आने लगे। पिछले कई सालों से मंदिर की सजावट नोट और आभूषणों से की जा रही है। श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से मंदिर की सजावट के लिए अपनी तिजोरी खोलते हैं। अभी यह मंदिर सरकारी होकर कोर्ट ऑफ वार्डस में आता है। प्रशासन भी सजावट को लेकर पूरी निगरानी रखता है। मंदिर में आखिर क्या है खास… मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी की मूर्ति के साथ ही गणेश जी व सरस्वती मां की भी मूर्ति स्थापित है। लक्ष्मी की मूर्ति के हाथ में धन की थैली रखी है, जो वैभव का प्रतीक है। साथ मंदिर में महालक्ष्मी 8 रूप में विराजमान हैं। जिनमें अधी लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, लक्ष्मीनारायण, धन लक्ष्मी, विजयालक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी मां विराजमान हैं। पुजारी बताते हैं कि दीपावली पर्व हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दीपावली धन, वैभव का त्योहार है, जहां पर विष्णु भगवान के हाथों में महालक्ष्मी विराजमान हैं। सभी भक्त चाहते थे कि माताजी का वास्तविक स्वरूप, जो पुराणों, वेदों में दिखाया जाता है। यानी माता धन बरसा कर रही हैं, भक्त यहां आकर उसी रूप की अनुभूति करते हैं। मान्यता है कि जिस व्यक्ति का धन महालक्ष्मी के श्रृंगार में इस्तेमाल होता है, उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अब जान लीजिए मंदिर की सजावट होती कैसे है… दीपावली के एक सप्ताह पहले से सजावट महालक्ष्मी मंदिर में हर साल दीपावली के एक सप्ताह पहले से सजावट की तैयारी शुरू हो जाती है। शरद पूर्णिमा से ही यहां रुपए और गहने पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मंदिर को 1 रुपए से लेकर 20, 50, 100 और 500 रुपए के नए नोटों से सजाया जाता है। इस बार सजावट के लिए रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, नीमच के अलावा गुजरात, राजस्थान के भक्त ने श्रद्धानुसार राशि जमा कराई है। कई भक्त तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने एक साथ 5 लाख रुपए तक मंदिर काे दिए हैं। श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले नोटों से मंदिर के लिए वंदनवार बनाया जाता है। महालक्ष्मी का आकर्षक श्रृंगार कर गर्भगृह को खजाने के रूप में सजाया जाता है। मंदिर परिसर कुबेर के खजाने के रूप में दिखाई देता है। कई भक्त अपने घरों की तिजोरी तक मंदिर में सजावट के लिए रख जाते हैं। मंदिर की सजावट के लिए एक हजार श्रद्धालुओं ने धनराशि दी है। एक रुपए का भी हेरफेर नहीं, इसलिए यह व्यवस्था मंदिर की सजावट के लिए जो भक्त श्रद्धानुसार धन राशि, आभूषण सजावट के लिए देते हैं, उनकी बाकायदा एंट्री होती है। इस बार इसमें बदलाव कर डिजिटलाइजेशन कर दिया गया। नोट गिनने की मशीन का भी इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन एंट्री में नकदी व आभूषण देने वाले भक्तों का नाम, पता, पासपोर्ट फोटो और मोबाइल नंबर के साथ क्या धन राशि या आभूषण दी, उसकी डिटेल लिखी गई।ऑनलाइन टोकन पर महालक्ष्मी मंदिर की सील लगाई जाती है। साथ ही रजिस्टर में भी एंट्री की जाती है। दीपोत्सव के पांचवें दिन टोकन देखकर भक्तों को उनके द्वारा दी गई धन-राशि प्रसादी के रूप में लौटा दी जाती है। मंदिर परिसर में बंदूकधारी गार्ड तैनात मंदिर में रुपए आने का सिलसिला शुरू होते ही बंदूकधारी गार्ड भी तैनात कर दिए जाते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में सजने वाले कुबेर के खजाने की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं। मंदिर के पीछे ही माणक चौक पुलिस थाना है, जहां 24 घंटे फोर्स तैनात रहती है।

भूपेश बघेल की नक्सलियों की सराहना पर डिप्टी CM अरुण साव का कटाक्ष, पूछा- पार्टी का या निजी मत?

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सलियों के समर्पण करने पर सरकार की तारीफ की है. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, यह पार्टी का स्टैंड है, या उनका निजी मत? उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि (बस्तर में नक्सलियों का) ऐतिहासिक आत्मसमर्पण हुआ है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तारीफ की है, इसके लिए धन्यवाद. लेकिन उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, यह पार्टी का स्टैंड है या उनका निजी मत है? उनके प्रदेश अध्यक्ष कुछ और बात कर रहे हैं. अरुण साव ने कहा कि सरगुजा भी नक्सलवाद से प्रभावित था, जिसे हमने ही नक्सल मुक्त किया. 2018 तक नक्सलवाद थोड़े से हिस्से में ही था, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में नक्सलवाद पला बढ़ा. अब अबूझमाड़ जैसे इलाकों से भी नक्सलवाद का खात्मा हो रहा है. प्रधानमंत्री के संकल्प और गृह मंत्री अमित शाह के प्रयास से प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाएंगे. धनतेरस पर खरीदें स्वदेशी सामग्री उप मुख्यमंत्री ने धनतेरस के अवसर पर प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत के बाद से ही बाजारों में रौनक लौटी है. 350 से अधिक वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है. मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे स्वदेशी सामग्री ही खरीदें ताकि स्थानीय व्यापारियों की दिवाली भी रोशन हो सके. पीएम मोदी करेंगे राज्योत्सव का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्योत्सव को लेकर अरुण साव ने कहा कि राज्योत्सव की तैयारियां जारी है. इस बार रजत जयंती वर्ष मनाया जाएगा. राज्य स्तर पर 5 दिन तक और जिला स्तर पर 3 दिन का आयोजन होगा. शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. विधानसभा के नए भवन का लोकार्पण भी होगा. स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच अरुण साव ने कहा कि आज मुख्यमंत्री के साथ बैठक है, जिसमें राज्योत्सव की विस्तृत रूपरेखा और कार्ययोजना तय की जाएगी. इस बार स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा. कार्यक्रमों में उन्हें पर्याप्त स्थान और सम्मान दिया जाएगा.

शॉकिंग अपडेट! पंजाब में पेंशन बंद होने वाले लोगों की सूची जारी

गिद्दड़बाहा पराली जलाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए गिद्दड़बाहा के एस.डी.एम. ने किसानों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जो किसान पराली जलाते हुए पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ न केवल मुकदमा दर्ज किया जाएगा, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों की पेंशन और अन्य सरकारी सुविधाएं भी रोक दी जाएंगी। सूत्रों के अनुसार, एस.डी.एम. ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने वाले किसानों के परिवार का कोई भी व्यक्ति सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकेगा। इस संबंध में आंगनवाड़ी वर्करों को भी विशेष ड्यूटी दी गई है, जो घर-घर जाकर किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ स्थिति की रिपोर्ट भी तैयार करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बार-बार पराली न जलाने की अपील की जा रही है, लेकिन फिर भी कुछ किसान आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। अब ऐसे मामलों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। खास बात यह है कि गिद्दड़बाहा सबडिवीजन में आने वाली सभी आंगनवाड़ी वर्करों को इस मुहिम में शामिल किया गया है, ताकि लोगों को पराली जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक किया जा सके।  

दिवाली तक मौसम का मिजाज, इंदौर में बारिश और भोपाल-ग्वालियर में धूप खिली रहेगी

भोपाल  मध्यप्रदेश में मौसम ने मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को इंदौर संभाग के चार जिलों बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत अधिकतर जिलों में मौसम साफ और धूप वाला रहने का अनुमान है। अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सिय मौसम विभाग की मानें तो हवा की दिशा में बदलाव के चलते रात के तापमान में वृद्धि देखी जा रही है। बीते दो रातों में अधिकांश शहरों का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के ऊपर रहा। छतरपुर के नौगांव को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर ठंड कम महसूस हुई। दिन में भी गर्मी का असर नजर आया इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और खजुराहो में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, शनिवार को दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन रविवार और सोमवार को प्रदेशभर में मौसम साफ रहेगा। इन दिनों बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। दिवाली के बाद बढ़ेगी ठंड, फरवरी तक रहेगा असर मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि नवंबर से जनवरी तक प्रदेश में तेज सर्दी का दौर रहेगा। इस बार फरवरी तक ठंड का असर बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्दी 2010 के बाद की सबसे ठंडी सर्दी हो सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के चलते सामान्य से अधिक वर्षा भी देखने को मिल सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी ला-नीना स्थितियों के विकसित होने की पुष्टि की है, जिससे ठंड और अधिक तीव्र हो सकती है। विदा हुआ मानसून प्रदेश से अब पूरी तरह मानसून विदा हो चुका है। इस बार मानसून 16 जून को पहुंचा था और 13 अक्टूबर को विदाई हुई। कुल 3 महीने 28 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। हालांकि मानसून विदा होने के बावजूद कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। इस बार मानसून में अच्छी बारिश राज्य में इस बार मानसून ने अच्छी बारिश दी। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश गुना जिले में हुई, जहां कुल 65.7 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं श्योपुर में 216.3% बारिश हुई, जो सामान्य से कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बारिश ने पीने के पानी और सिंचाई दोनों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है। हालांकि, शाजापुर ऐसा जिला रहा, जहां सबसे कम बारिश (81.1%) दर्ज की गई, जो  कमी की श्रेणी में आता है। भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका, लेकिन उज्जैन, बैतूल और सीहोर जैसे जिलों में बारिश सामान्य के करीब रही।  

मध्यप्रदेश में बड़ी बदलाव की शुरुआत: पेपर स्टाम्प बंद, ई-स्टाम्प से हर साल बचेगा करोड़ों का खर्च

भोपाल  मध्य प्रदेश में 126 साल पुरानी मैनुअल स्टाम्प व्यवस्था अब बंद होने जा रही है. जैसे कभी टेलीग्राम और मनीऑर्डर बंद हुए थे, वैसे ही अब मैनुअल स्टाम्प पूरी तरह खत्म किए जा रहे हैं. सरकार अब सिर्फ ई-स्टाम्प जारी करेगी. नई व्यवस्था कुछ महीनों में लागू होने जा रही है. इससे सरकार को हर साल करीब 34 करोड़ रुपए की बचत होगी, जो अब तक स्टाम्प की छपाई, ढुलाई और सुरक्षा पर खर्च होते थे. बता दें कि 100 रुपए से ज्यादा वाले मैनुअल स्टाम्प तो साल 2015 में ही बंद किए जा चुके हैं. अभी तक 100 रुपए से नीचे वाले स्टाम्प की छपाई नीमच और हैदराबाद प्रेस में की जाती है, फिर इन्हें सुरक्षा इंतजामों के साथ अलग-अलग जिलों में भेजा जाता है. ई-स्टाम्प लागू होने के बाद ये परेशानी खत्म हो जाएगी. ई-स्टाम्प सिस्टम से ये भी ट्रैक किया जा सकेगा कि किसने, कब और कितने मूल्य का स्टाम्प खरीदा है. इससे फर्जीवाड़े और दोहरी बिक्री जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी. मैनुअल स्टाम्प बंद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. जल्द मैनुअल स्टाम्प बंद होगा किरायानामा से लेकर एफिडेविट तक लोगों को रोजमर्रा के कामों में स्टाम्प की जरूरत पड़ती है. किरायानामा, एफिडेविट, पॉवर ऑफ अटॉर्नी और सेल एग्रीमेंट जैसे दस्तावेजों के लिए अब लोगों को लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा. बैंक या अधिकृत केंद्र से आसानी से ई-स्टाम्प खरीदा जा सकेगा. इसके अलावा अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर खुद भी ई-स्टाम्प जनरेट कर सकेगा. इससे आम लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे. डेटा रीयल टाइम में उपलब्ध  राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ई-स्टाम्प सिस्टम से पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण दोनों में सुधार होगा. अब हर ट्रांजेक्शन का डेटा रीयल टाइम में उपलब्ध रहेगा. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश देश का इकलौता राज्य है जो अपने खुद के सॉफ्टवेयर से ई-स्टाम्प जारी करता है. बाकी राज्यों में यह काम थर्ड पार्टी एजेंसी "स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया" करती है, एमपी में पैसा सीधे राज्य सरकार के खजाने में जाता है, जबकि बाकी राज्यों में पहले एजेंसी के पास जमा होकर फिर सरकार तक पहुंचता है.  डिजिटल स्टाम्प के लाभ और खर्च में कमी डिजिटल स्टाम्प के चलन में आने से हर साल स्टाम्प पेपर की प्रिंटिंग और उसे वेंडर्स तक पहुंचाने पर होने वाले खर्च में बचत होगी। वर्तमान में, इस प्रक्रिया पर लगभग 30 से 35 करोड़ रुपए का खर्च आता है। कागजी स्टाम्प की समाप्ति के बाद, यह खर्च बच जाएगा और राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। पंजीकरण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, जैसे ही राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी, कागजी स्टाम्प पेपर का प्रचलन समाप्त हो जाएगा। इसके बाद, केवल डिजिटल स्टाम्प का ही उपयोग किया जाएगा, जो एक नई तकनीकी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम न केवल पारदर्शिता लाएगा, बल्कि स्टाम्प के दुरुपयोग को भी कम करेगा। इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) का प्रभाव मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) की शुरुआत जुलाई 2013 में हुई थी। इस प्रणाली के माध्यम से, स्टाम्प पेपर को अधिकृत वेंडर के जरिए ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ईएसएस के जरिए न केवल स्टाम्प की खरीद प्रक्रिया सरल होती है, बल्कि इसकी ट्रैकिंग भी आसान होती है। इससे स्टाम्प के दुरुपयोग की संभावना कम हो जाती है और लेनदेन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होती है। ई-स्टाम्प कैसे खरीदें: एक सरल प्रक्रिया डिजिटल स्टाम्प खरीदने के लिए, उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित सरल चरणों का पालन करना होगा:     मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाएं।     आवश्यक दस्तावेज श्रेणी (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें।     नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड जैसे ऑनलाइन तरीकों से भुगतान करें।     सफल भुगतान के बाद, आपको तुरंत एक डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन प्रक्रिया में संकोच करता है, तो वह अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से भी स्टाम्प खरीद सकता है। स्टाम्प का दुरूपयोग और ट्रेकिंग आसान होगी एमपी में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) जुलाई 2013 में शुरू हुई थी। इस सिस्टम में स्टाम्प पेपर को अधिकृत वेंडर के जरिए ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ईएसएस के जरिए स्टाम्प की ट्रेकिंग आसान होती है। ऑनलाइन ऐसे खरीद सकते हैं ई-स्टाम्प     मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाएं।     आवश्यक दस्तावेज श्रेणी (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें।     नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड जैसे ऑनलाइन तरीकों से भुगतान करें।     सफल भुगतान के बाद आपको तुरंत डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र मिल जाएगा। अधिकृत वेंडर से भी ले सकते हैं     अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से भी खरीद सकते हैं।     स्टाम्प वेंडर जरूरी स्टाम्प शुल्क और प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन करेंगे।     जरूरी विवरण देने के बाद, आप भुगतान कर सकते हैं और स्टाम्प वेंडर से डिजिटल स्टाम्प प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। अधिकृत वेंडर से खरीदने की प्रक्रिया अधिकृत वेंडर से स्टाम्प खरीदने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:     अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से संपर्क करें।     स्टाम्प वेंडर आपको आवश्यक स्टाम्प शुल्क और प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन करेगा।     जरूरी विवरण देने के बाद, आप भुगतान कर सकते हैं और स्टाम्प वेंडर से डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस नई प्रणाली के माध्यम से, मध्य प्रदेश सरकार ने न केवल दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि पारदर्शिता को भी बढ़ावा दिया है। डिजिटल स्टाम्प के माध्यम से, नागरिकों को एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका उपलब्ध होगा, जिससे उन्हें अपने लेनदेन में आसानी होगी। इस परिवर्तन के साथ, मध्य प्रदेश अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें तकनीकी प्रगति और पारदर्शिता को महत्व दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में, उम्मीद की जा रही है कि यह प्रणाली अन्य क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।

बीजापुर के खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रौशन किया नाम

25 वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में जीते 25 पदक वन मंत्री केदार कश्यप ने खिलाड़ियों को दी बधाई रायपुर, छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकने में सक्षम खिलाड़ी छत्तीसगढ़ में हैं। खिलाड़ी कभी हारता नहीं है या तो वह जीतता है या सीखता है। बीजापुर जिले के खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और लगन से एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। कोरबा जिले में आयोजित 25 वीं छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2025 में बीजापुर के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 25 पदक जीतकर जिले का मान बढ़ाया। खिलाड़ी अब राष्ट्रीय स्तर तक परचम लहराने को तैयार खिलाड़ियों ने स्विमिंग सहित विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 10 स्वर्ण, 10 रजत और 5 कांस्य पदक अपने नाम किए और ओवरऑल द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अंडर-19 बालिका वर्ग में सदना पोरतेटी ने 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीते। अक्षिता तोड़ेम ने 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक प्राप्त किया। अंडर-17 बालक वर्ग में बबलु ऐंजा ने 3 रजत पदक और सरैया पालदेव ने 1 कांस्य पदक जीता।  इसी तरह अंडर-14 बालिका वर्ग में रीता पोरतेटी ने 2 स्वर्ण और 1 रजत,गुंजन कोरसा ने 2 स्वर्ण और 1 रजत,सपना कोरसा ने 2 रजत और 1 कांस्य, जबकि तमन्ना ने 1 कांस्य पदक हासिल किया। अंडर-14 बालक वर्ग में खिलाड़ियों ने 1 रजत और 2 कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से बीजापुर के खिलाड़ी अब राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक परचम लहराने को तैयार हैं। बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा इन सभी खिलाड़ियों ने बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी सफलता में कोच दीप्ति वर्मा का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने बच्चों को अनुशासन, फिटनेस और आत्मविश्वास के साथ खेल भावना सिखाई, जिसका परिणाम आज सामने आया। प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने खिलाड़ियों की उपलब्धि के लिए दी बधाई खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि बीजापुर के इन युवा खिलाड़ियों ने पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। यह सफलता जिले के खेल प्रेमी युवाओं के लिए प्रेरणा है। सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है ताकि बस्तर और बीजापुर जैसे अंचलों की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर चमकें। इस शानदार प्रदर्शन से पूरे बीजापुर जिले में खुशी का माहौल है। कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी, खेल अधिकारी एवं अन्य प्रशिक्षकों ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। स्थानीय खेल प्रेमियों और अभिभावकों ने भी गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि बीजापुर के इन बच्चों ने जिले को गौरवान्वित किया है।