samacharsecretary.com

लालू प्रसाद यादव ने मढ़ौरा सीट से दाखिल किया नामांकन, सफलता अब भी दूर

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले दिन नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों में एक नाम ऐसा भी रहा जिसने सभी का ध्यान खींचा है, वह लालू प्रसाद यादव है। लेकिन चौकिए मत, यह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख प्रमुख लालू प्रसाद यादव नहीं हैं, बल्कि उनका हमनाम है, जो लगातार चुनाव लड़ने की अपनी आदत के लिए जाना जाता है। हालांकि अब तक सफलता उससे कोसों दूर रही है। पैंतालीस वर्षीय यह ‘हमनाम' सारण जिले के जादो रहीमपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने शुक्रवार को मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र से नामांकन पत्र दाखिल किया। यह विधानसभा क्षेत्र सारण लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जो लंबे समय से राजद प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम से जुड़ी रही है। अपने पैतृक गांव से फोन पर बातचीत में लालू प्रसाद यादव ने बताया, ‘‘मैंने पहली बार 2001 में चुनाव लड़ा था, जब वार्ड पार्षद के पद के लिए मैदान में उतरा था।'' रहीमपुर गांव राज्य की राजधानी पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर है। दिलचस्प बात यह है कि सारण वही लोकसभा सीट है जिसने 1977 से कई बार मशहूर लालू प्रसाद यादव को संसद में भेजा है। हालांकि, बिहार के इस कम चर्चित लालू प्रसाद यादव को उनके लगातार लेकिन असफल चुनावी प्रयासों के कारण ‘धरती पकड़' की उपाधि मिल चुकी है। वह अपने मशहूर नाम के बोझ से बेपरवाह दिखते हैं। उन्होंने गर्व से याद किया, ‘‘मैंने 2014 के लोकसभा चुनाव में राबड़ी देवी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय वह अपने पति की जगह मैदान में थीं, जिन्हें चारा घोटाला मामले में दोषसिद्धि के बाद चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया गया था।'' उस चुनाव में राबड़ी देवी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजीव प्रताप रूड़ी से हार गई थीं। वह यह भी गर्व से बताते हैं कि उन्होंने ‘‘2017 और 2022 के राष्ट्रपति चुनाव'' में भी नामांकन किया था, लेकिन यह कहे जाने पर कि दोनों बार उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था, वह मुस्कुरा देते हैं। खेती-किसानी करने वाले इस शख्स के पास चुनावी रोमांच का शौक पूरा करने के लिए खूब वक्त है। शायद इसी वजह से उन्हें याद करने में कठिनाई होती है कि उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव और हाल में हुए विधानसभा उपचुनाव में किस सीट से पर्चा भरा था। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा ख्याल है कि लोकसभा में मैं महाराजगंज से उम्मीदवार था। विधानसभा उपचुनाव में या तो तरारी या रुपौली से लड़ा था।'' उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘‘मैं निर्दलीय उम्मीदवार नहीं हूं। कृपया मेरा हलफनामा देखिए। मैं जन संभावना पार्टी का उम्मीदवार हूं।'' मानो वह खुद को और दूसरों को यह यकीन दिलाना चाहते हों कि उनके जैसे लोगों के साथ भी कोई राजनीतिक धारा जुड़ी है।  

BJP को चुनावी झटका: मिश्री लाल यादव ने छोड़ी पार्टी, RJD में एंट्री तय

पटना  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, अब दरभंगा की अलीनगर विधानसभा सीट से विधायक मिश्रीलाल यादव ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में दलितों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक नहीं मिल रहा है। दरअसल, मिश्री लाल यादव ने शनिवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की और आरोप लगाया कि संगठन में दलितों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक नहीं मिल रहा है। दरभंगा ज़िले की अलीनगर सीट से विधायक यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वह पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपेंगे। पार्टी ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सूत्रों ने बताया कि यादव इन अटकलों से नाराज हैं कि इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा और भाजपा अलीनगर से गायिका मैथिली ठाकुर को मैदान में उतार सकती है। राजद में होंगे शामिल! विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर 2020 का चुनाव लड़ने वाले मिश्री लाल यादव ने कहा, "मैंने पहली बार एनडीए के लिए अलीनगर सीट जीती है। पहले, कई अन्य उम्मीदवार, जिनके पास बहुत पैसा और बाहुबल था, ऐसा करने में नाकाम रहे थे।" यादव ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि वह राजद नीत विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक के संपर्क में हैं।

आमेर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, आदेश की पूरी जानकारी

जयपुर राजस्थान पुलिस विभाग को बड़ी राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की पीठ जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह शामिल थे, ने आज जयपुर के आमेर स्थित पुलिस विभाग की विशाल भूमि पर वर्तमान स्थिति बनाए रखने (status quo) का आदेश दिया है, जहाँ वर्तमान में पुलिस प्रशिक्षण एवं अन्य विभागीय सुविधाएं संचालित हो रही हैं। राज्य की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने यह दलील दी कि यह भूमि वर्ष 1992 से पुलिस विभाग के निरंतर उपयोग और कब्जे में है तथा यह कानून-व्यवस्था एवं प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सरकारी ढांचे का अभिन्न अंग है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सरकारी भूमि है, जिस पर प्रतिवादियों और उनके पूर्वजों द्वारा झूठे दावे प्रस्तुत किए गए हैं, जो आरटीआई से प्राप्त कुछ फोटो कॉपी दस्तावेजों के आधार पर किए गए हैं, जिनकी न तो कोई कानूनी वैधता है और न ही स्वामित्व का कोई ठोस आधार। माननीय न्यायालय ने इन दलीलों पर गौर करते हुए, निचली अदालत के उस आदेश के अनुपालन में चल रही सभी निष्पादन कार्यवाहियों (execution proceedings) पर रोक लगा दी, जिसके तहत भूमि को निजी डिक्री धारकों को सौंपे जाने का निर्देश दिया गया था, जिसे उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। इस अंतरिम संरक्षण के साथ, पुलिस विभाग अब आमेर परिसर पर अपना कब्जा बनाए रखेगा और वहीं से अपना कार्य संचालन जारी रखेगा, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आगे कोई आदेश पारित नहीं किया जाता।

शर्मनाक वीडियो वायरल: राम मंदिर के सामने युवक ने किए आपत्तिजनक इशारे, पुलिस ने दर्ज की FIR

हांसी  हांसी में एक युवक ने महिला का सलवार-सूट पहनकर अश्लील वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया । युवक बाइक पर विश्वकर्मा चौक और राम मंदिर के पास पहुंचा। यहां उसने गंदे इशारे किए। साथ ही सपाटे भी मारे। इसके बाद कुछ देर तक अश्लील डांस भी किया। वीडियो सामने आने के बाद जागड़ा समाज के लोगो ने युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए हांसी पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।     वीडियो में हांसी शहर में एक युवक ने भगवान विश्वकर्मा चौक और राम मंदिर के पास सार्वजनिक रूप से भद्दे इशारे किए। युवक ने निजी अंगों को छूते हुए आसपास जाते हुए लोगों की तरफ भी इशारे किए। युवक ने राम मंदिर के सामने भी अभद्र हरकतें कीं। इस चौक के पास तोरण द्वार और श्री श्याम मंदिर भी स्थित हैं, जिनसे लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। यहां हजारों की संख्या में लोग आते हैं। महिलाएं और बच्चे भी रोजाना मंदिर में आते हैं।  

पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

पराली को लेकर सीएम योगी सख्त, शून्य घटनाओं का लक्ष्य तय पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश  सेटेलाइट से की जाएगी निगरानी, अन्नदाता किसानों को किया जाएगा जागरूक फसल अवशेष जलाने पर लगेगी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, नोडल अधिकारी करेंगे निगरानी लखनऊ उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पराली जलाने की घटनाओं को ‘शून्य’ किया जाए। इस संबंध में शासनादेश के तहत विस्तृत दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। सभी जिलाधिकारियों से अपेक्षा की गई है वो सेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं की लगातार निगरानी करें और संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरती जाए। जारी निर्देशों के अनुसार, फसल अवशेष जलाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी। दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000 और पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 का जुर्माना निर्धारित किया गया है। प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी जो पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों से ही स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषण मुक्त प्रदेश का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। निर्देशों के अनुसार, जिलाधिकारियों से कहा गया है कि हॉटस्पाट चिन्ह्ति करते हुए 50/100 किसानों पर एक नोडल अधिकारीकी नियुक्ति किया जाए। नोडल अधिकारी को पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करने के लिए विशेष हिदायत दी जाए। इसके साथ ही, राजस्व, पुलिस, कृषि, ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभागों के जनपद, तहसील, विकासखण्ड एवं क्षेत्रीय कर्मियों के माध्यमसे फसल कटने के समय निगरानी करते हुए, फसल अवषेश जलाने की घटनाओं को शून्य करना है। यदि कोई कृषक फसल अवषेश जलाता हुआ पाया जाता है तो मौके पर उसको रोकना तथा उस पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की धनराषि अधिरोपित करते हुए कार्यवाही करना सुनिश्चित किया जाए।

उपचुनाव से पहले सुरक्षा समीक्षा: झारखंड पुलिस ने पड़ोसी राज्यों के साथ की बैठक

रांची झारखंड में 11 नवंबर को होने वाले घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए सुरक्षा प्रबंधों को अंतिम रूप देने में पुलिस सक्रिय हो गई है। इस कड़ी में आईजी अभियान ने बीते शुक्रवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय सभागार में पश्चिम बंगाल और ओडिशा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनाव से पहले सुरक्षा-व्यवस्था को मजबूत बनाना था। बैठक में तीनों राज्यों के बीच अंतररज्यीय समन्वय को बढ़ावा देने और संयुक्त कारर्वाई पर जोर दिया गया। विशेष रूप से अवैध शराब, मादक पदार्थों, अवैध हथियारों और अवैध धन की आवाजाही को रोकने की रूपरेखा पर चर्चा हुई। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में मिरर चेक पोस्ट स्थापित करने और उनकी सक्रियता बढ़ाने का निर्णय लिया गया। घाटशिला निर्वाचन क्षेत्र के आसपास के जिलों जैसे पश्चिम बंगाल के झारग्राम और पुरुलिया तथा ओडिशा के मयूरभंज में विशेष मिरर चेक पोस्ट बनाए जाएंगे और उन्हें चौबीसों घंटे सक्रिय रखा जाएगा। यह कदम न सिर्फ अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि सीमा पार से अपराधियों और नक्सलियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखने में सहायक होगा। बैठक में अंतररज्यीय वांछित अपराधियों, वारंटियों और हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ संयुक्त रूप से कार्रवाई करने और खुफिया जानकारी साझा करने पर भी सहमति बनी। इससे प्रभावी और तेज पुलिसिया कार्रवाई सुनिश्चित होगी और संगठित अपराधियों की सक्रियता को कम करने में मदद मिलेगी। इन सभी तैयारियों का उद्देश्य उपचुनाव के दौरान एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि सभी मतदाता भयमुक्त होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।  

पुलिस विभाग में मची हलचल: केशव कुमार के आदेश पर 314 पुलिसकर्मी हुए स्थानांतरित

कुशीनगर पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए बड़े पैमाने पर तबादलों को शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत पिछले तीन साल से एक ही थाने में तैनात 314 पुलिसकर्मियों को अन्य थानों में स्थानांतरित किया गया है। इस फैसले से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और कर्मियों के बीच चर्चा जोरों पर है। जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण की सूची में हेड कांस्टेबल और आरक्षी शामिल हैं, जो लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ थे। पुलिस अधीक्षक का यह कदम कार्यक्षमता बढ़ाने और भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी जैसे मुद्दों को रोकने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से कुछ कर्मी प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आकर अनुचित गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं, जिसे रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। स्थानांतरण की सूची जारी होने के बाद कई पुलिसकर्मियों ने नई तैनाती को लेकर अपनी सहमति जताई, जबकि कुछ ने असंतोष भी व्यक्त किया। हालांकि, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने साफ किया कि यह फैसला विभाग की बेहतरी और जनता की सेवा को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने कहा कि नियमित स्थानांतरण से पुलिसकर्मियों को नए अनुभव मिलेंगे और उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा। पुलिस महकमे के सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई से जूनियर और सीनियर दोनों स्तर के कर्मियों में हलचल है। कुछ थानों में स्टाफ की कमी की शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन प्रशासन ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इन खामियों को दूर कर लिया जाएगा। स्थानांतरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई असुविधा न हो। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह कदम पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।  

योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय

जनशिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल अव्वल, मीरजापुर मंडल ने हासिल किया दूसरा स्थान    योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मॉनीटरिंग से शिकायतों का समयबद्ध हो रहा निस्तारण  आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में जनमानस की शिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल ने प्राप्त किया पहला स्थान  – रिपोर्ट में मीरजापुर दूसरे तो बस्ती मंडल है तीसरे स्थान पर, शिकायतों के निस्तारण के बाद मंडलायुक्त ले रहे फीडबैक  – मंडलायुक्तों की मॉनीटरिंग, विभागीय आख्या की जांच और शिकायकर्ता के फीडबैक से समस्या के समाधान में आ रही तेजी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी से जन शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से शिकायतों के समाधान में न केवल पारदर्शिता आई है, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय भी मिल रहा है। योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी उपायों को अपनाकर शिकायतों के निस्तारण को सुनिश्चित किया है। वहीं, आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में बाजी मारी है और प्रदेश में एक बार फिर पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह प्रदेशभर में मीरजापुर मंडल ने दूसरा और बस्ती मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बता दें कि अगस्त माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में भी देवीपाटन जनशिकायतों के निस्तारण में पहले स्थान पर था। हर माह रेंडम पांच शिकायतकर्ता से दवीपाटन मंडलायुक्त खुद लेते हैं निस्तारण का फीडबैक देवीपाटन मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए देवीपाटन मंडल के जिलों क्रमश: श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर में जनशिकायतों के पारदर्शी और त्वरित समाधान के लिए कई बिंदुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिलों में जनशिकायतों की निस्तारण की रिपोर्ट की लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। मंडलायुक्त ने बताया कि वह खुद मंडल के सभी जिलों के जनशिकायतों के निस्तारण के पहलुओं की मॉनीटरिंग करते हैं। इसके साथ ही रेंडम पांच शिकायतकर्ता से मंडलायुक्त कार्यालय से फीडबैक लिया जाता है ताकि यह पता चल सके कि पीड़ित की शिकायत पर वास्तविकता में एक्शन लिया गया है या फिर रिपोर्ट ही लगायी गयी है। इसके साथ ही हर माह जनशिकायतों के मामलों की विभागीय आख्या की जांच की जाती है। यही वजह है कि देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश भर में एक बार फिर पहला स्थान प्राप्त किया है। मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में दवीपाटन मंडल को पूर्णांक 120 में से 104 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 86.67 प्रतिशत है।    मीरजापुर मंडल ने दूसरा तो बस्ती मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया योगी सरकार द्वारा लांच आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कई सुधारों के बाद यह अत्यधिक प्रभावी साबित हुआ है। आईजीआरएस की सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार मीरजापुर मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेशभर में दूसरा प्राप्त किया है। मीरजापुर मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल को पूर्णांक 120 में से 98 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 81.67 प्रतिशत है। पिछले माह भी आईजीआरएस की अगस्त माह की रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल दूसरे स्थान पर था। इसी तरह बस्ती मंडल ने जनशिकायतों के निस्तारण में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बस्ती मंडलायुक्त ने बताया कि सितंबर माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में बस्ती मंडल को पूर्णांक 120 में से 97 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 80.83 प्रतिशत है। इसके साथ ही टॉप फाइव मंडल में अलीगढ़ मंडल ने चौथा और वाराणसी मंडल ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है। इन मंडलों ने शिकायतों के निस्तारण में समय की बचत और पीड़ितों से फीडबैक लेकर सुधार की प्रक्रिया को तेज किया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी शिकायत अनसुलझी न रहे और समाधान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध हो। साथ ही अधिकारियों के फील्ड विज़िट्स ने इस प्रक्रिया को और भी प्रभावी बना दिया है।

ऑटो बन रहे लुटेरों का नया ठिकाना, पुलिस भी हैरान

लुधियाना महानगर में ऑटो गैंग एक बार फिर बेखौफ होकर सक्रिय हो गया है। घंटाघर चौक से सवारी बनकर बैठे 2 लुटेरों ने एक व्यक्ति का मोबाइल और पर्स चुराने की कोशिश की लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया। सवारी ने बहादुरी दिखाते हुए लोगों की मदद से पीछा कर दोनों को पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार, गुरनाम सिंह नामक व्यक्ति घंटाघर चौक से प्रताप चौक जाने के लिए ऑटो में सवार हुआ। ऑटो में पहले से ही एक युवक बैठा हुआ था। ड्राइवर ने रास्ता बदलते हुए ऑटो को प्रताप चौक की बजाय दंडी स्वामी चौक की ओर मोड़ दिया। तभी पीछे बैठे युवक ने मौका पाकर गुरनाम सिंह की जेब से पर्स निकाल लिया। गुरनाम सिंह को जब चोरी का अहसास हुआ तो उन्होंने तुरंत शोर मचाया और युवक को पकड़ लिया। तभी ड्राइवर ने ऑटो तेज रफ्तार से भगाना शुरू कर दिया। झड़प के दौरान आरोपियों ने गुरनाम सिंह को धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया और ऑटो लेकर फरार हो गए लेकिन गुरनाम सिंह ने हिम्मत नहीं हारी, एक राहगीर की बाइक पर सवार होकर आरोपियों का पीछा शुरू कर दिया। करीब 3 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद भारत नगर चौक के पास दोनों बदमाशों को काबू कर लिया गया। मौके पर जुटे लोगों ने दोनों की जमकर धुनाई की और बाद में पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह हाल ही में हुई कई वारदातों से जुड़ा हो सकता है। गुरनाम सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले भी ऐसे गिरोहों की खबरें सुनी थीं, लेकिन खुद पर वारदात होते देख हैरान रह गए। उन्होंने कहा अगर मैं हिम्मत न करता तो शायद यह गैंग किसी और को निशाना बना लेता। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान ऑटो में सवार न हों और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

पहाड़ों में बर्फबारी से ठंड बढ़ी, मानसून अभी तक नहीं लौटा; मध्य प्रदेश में पारा लुढ़का

भोपाल  मध्य प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में मानसून विदाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब अधिकांश शहरों में मौसम शुष्क और साफ नजर आ रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले 36 घंटों में प्रदेश से मानसून पूरी तरह विदा हो जाएगा. कुछ जगहों पर केवल हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है. वहीं, जोरदार बारिश के बाद अब दिन में चटक धूप खिल रही है और शाम होते ही गुलाबी ठंडक का अहसास होने लगा है. इस बार ठंड की शुरुआत सामान्य से कुछ जल्दी हो गई है और संभावना है कि दीपावली तक लोग गर्म कपड़ों का सहारा ले लें. 17 साल में अक्टूबर में तेज ठंड राजधानी भोपाल में पारा अक्टूबर में 18 डिग्री तक गिर गया है, जो पिछले 17 वर्षों में पहली बार हुआ है. पचमढ़ी के मुकाबले राजगढ़ और इंदौर शहरों में तापमान अधिक ठंडा महसूस हो रहा है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को पचमढ़ी का न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि राजगढ़ में 14.5 डिग्री, इंदौर में 15.5 डिग्री और खंडवा में 17 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. भोपाल में भी न्यूनतम पारा 18 डिग्री तक गिरा है. गुना में हुई सबसे ज्यादा बारिश मानसून सीजन के दौरान इस साल गुना जिले में सबसे ज्यादा 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई. मंडला और रायसेन में 62 इंच से अधिक, जबकि श्योपुर और अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश हुई. इसके विपरीत, सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) शामिल हैं. पहाड़ों की बर्फबारी से बदली हवा का रुख जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते हवा का रुख उत्तरी दिशा की ओर से ठंडा हो गया है। इसी वजह से मध्यप्रदेश में तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में सुबह-शाम की ठंडक और बढ़ सकती है। 40 से ज्यादा जिलों से लौट चुका है मानसून राज्य में मानसून की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार तक भोपाल, इंदौर, धार, बुरहानपुर, खंडवा, सीहोर, सागर, रायसेन, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम और बैतूल समेत 40 से अधिक जिलों से मानसून विदा हो चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सिंगरौली, सीधी, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा जिलों से भी अगले 2 दिन में मानसून की पूरी तरह से विदाई हो जाएगी। पूर्वी जिलों में अभी बनी रहेगी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने बताया कि पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में अभी हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। आने वाले तीन दिनों तक बालाघाट, मंडला, सिवनी और उमरिया जिलों में बादल छाए रहेंगे। शेष जिलों में मौसम साफ रहेगा। इस सीजन में गुना रहा सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला मानसूनी सीजन के दौरान इस साल गुना जिले में सबसे ज्यादा 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं, मंडला और रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश हुई। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) शामिल हैं। इंदौर संभाग की स्थिति में हुआ सुधार मानसून की शुरुआत में इंदौर और उज्जैन संभाग में बारिश की स्थिति कमजोर थी, लेकिन सितंबर में तेज बारिश ने संतुलन बना दिया। इंदौर में अब सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया है, हालांकि उज्जैन में अभी भी औसत से कम वर्षा हुई है। ग्वालियर-चंबल में जमकर बरसा मानसून ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में इस बार मानसून सक्रिय रहा। यहां के सभी जिलों में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई। कई जगह बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी, खासकर छतरपुर, मंडला और उमरिया जिलों में। अक्टूबर में मौसम का पुराना रिकॉर्ड     भोपाल में अक्टूबर का औसत अधिकतम तापमान 32.7°C और न्यूनतम 19.1°C रहता है। वर्ष 2012 में तापमान रिकॉर्ड 38°C तक पहुंच गया था।     इंदौर में 22 अक्टूबर 1999 को रात का तापमान 6.2°C दर्ज हुआ था, जो अब तक का सबसे ठंडा रिकॉर्ड है।     ग्वालियर में 27 अक्टूबर 1994 को 40.1°C तक तापमान पहुंचा था।     जबलपुर में 30 अक्टूबर 1952 को न्यूनतम तापमान 10.5°C रहा था।     उज्जैन में 29 अक्टूबर 1983 को न्यूनतम 8.1°C और 2002 में दिन का तापमान 39°C दर्ज हुआ था। अब गुलाबी ठंड का इंतजार मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में मध्यप्रदेश में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आएगी। उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं लगातार सक्रिय हैं। इससे सुबह और देर शाम सर्दी का अहसास और बढ़ जाएगा। तीन दिन तक पूर्वी हिस्से में बूंदाबांदी का अनुमान मौसम विभाग ने अगले 3 दिन तक पूर्वी हिस्से के जिलों में बूंदाबांदी होने का अनुमान जताया है। बाकी जिलों में मौसम साफ रहेगा। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि 14 अक्टूबर को कहीं-कहीं बारिश होने के आसार है। शुक्रवार को पूर्वी हिस्से के तीन जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। इंदौर संभाग की तस्वीर भी सुधरी इस मानसूनी सीजन में शुरुआत से ही इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं रही। एक समय तो इंदौर में प्रदेश की सबसे कम बारिश हुई थी। ऐसे में अटकलें थीं कि क्या इस बार इंदौर में सामान्य बारिश भी होगी? लेकिन सितंबर महीने में तेज बारिश की वजह से इंदौर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। संभाग के सभी जिलों में भी बारिश की बेहतर तस्वीर हो गई। दूसरी ओर, उज्जैन जिले में अब भी कोटा पूरा नहीं हुआ। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर पहले नंबर पर है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं।