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JDU के पत्र से बढ़ी सियासी हलचल, लालू के जन्मदिन पर मिले हीरे के कंगन की जांच की उठी मांग

पटना  राजद सुप्रीमो लालू यादव के बर्थडे पर भोजपुरी सिंगर छोटू छलिया को कंगन देने का मामला राजनीतिक विवाद से होते हुए ईओयू के पाले में चला गया है। रबड़ी देवी ने सिंगर के गाना पर खुश होकर दो कंगन नजराने में दिए थे जिसे छोटू छलिया ने हीरे का बताया था। जदयू के मुख्य प्रवक्ता सह एमएलसी नीरज कुमार ने आर्थिक अपराध इकाई(ईओयू) के एडीजी को पत्र भेजकर मामले की छानबीन की मांग की है। कहा है कि रबड़ी देवी ने हीरे का कंगन कैसे प्राप्त किया इसकी जांच होनी चाहिए। नीरज ने छह बिंदुओं पर जांच की मांग की है। नीरज कुमार ने ईओयू को पत्र लिख कर लालू परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। वीडियो बयान जारी कर उन्होंने पूछा है कि इतना महंगा कंगन उनके पास कहां के आया यह रबड़ी देवी को बताना चाहिए। इसी लिए ईओयू के एडीजी पत्र लिखा है कि इसकी जांच होना चाहिए। नीरज ने कहा है कि लालू परिवार की नियती है कि इन लोगों ने भ्रष्टाचार करके अकूत संपत्ति बनाई है। यह कंगन भी कहीं उसी का हिस्सा तो नहीं है। कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित वीडियो, मीडिया रिपोर्ट्स, विभिन्न लोगों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर ईओयू उचित कार्रवाई करे। नीरज ने पत्र की कॉपी प्रधान आयकर आयुक्त, प्रवर्तन निदेशालय, और लोक आयुक्त बिहार के पास भी भेजा है। पहले से कई मामलो में ईडी, सीबीआई, ईओयू की चल रही जांच के बीच लालू परिवार के लिए यह नया संकट दिख रहा है। 11 जून को लालू यादव के 79वें जन्मदिन के मौके पर राबड़ी आवास में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकार छोटू छलिया का गाना सुनकर राबड़ी देवी ने अपने हाथों से दो कंगन निकालकर उसे गिफ्ट कर दिया। कलाकार ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि राबड़ी देवी उन्हें बेटा मानती हैं और हीरे का कंगन देकर सम्मानित किया। हीरे का कंगन गिफ्ट किए जाने का मामला जैसे ही चर्चा में आया कि राजनैतिक फसाद हो गया। इधर राजद और कांग्रेस रबड़ी देवी के बचाव में उतर गई है। राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा है कि बीजेपी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार पहले राज्य में चल रहे सरकारी भ्रष्टाचार की जांच करे। नीरज जी इतना उद्वेलित और विचलित नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी इसे राजनैतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम करार दिया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद, बढ़ाया उत्साह

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद नई शिक्षा नीति से खेल और शिक्षा को मिल रही नई दिशा 2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश में खेल उन्नयन में दी जानकारी भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के साथ शूटिंग अकादमी का दौरा किया और खिलाड़ियों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें कौशल, खेल और नवाचार से जोड़ने का कार्य किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों को मिला विशेष स्थान केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से खेल और शारीरिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। अब विद्यार्थियों को खेल और पढ़ाई में से किसी एक का चयन करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि दोनों क्षेत्रों में समान रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे खेल गतिविधियों और शैक्षणिक उपलब्धियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। एपीएआर आईडी से जुड़ेंगी खिलाड़ियों की उपलब्धियां केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि एपीएआर (APAAR) आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों और खिलाड़ियों की शैक्षणिक तथा खेल संबंधी उपलब्धियों को एक मंच पर जोड़ा जाएगा। इससे उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों का समग्र रिकॉर्ड तैयार होगा, जो भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों क्षेत्रों में लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इंटर-स्पोर्ट्स गतिविधियों को क्रेडिट स्कोर से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि खेलों में सक्रिय भागीदारी को भी अकादमिक मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जा सके। आईआईटी सहित उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ रहा खेलों का महत्व केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी स्पोर्ट्स कोटा की व्यवस्था की गई है। यह कदम खेल प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने और खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। 2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का संकल्प केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना है। उन्होंने 2036 ओलंपिक को देश का महत्वपूर्ण लक्ष्य बताते हुए कहा कि खेलों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने के लिए युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब भारत को विकसित राष्ट्र, आत्मनिर्भर राष्ट्र और विश्व की अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित करना हमारा सामूहिक लक्ष्य होगा। मंत्री सारंग ने दी शूटिंग अकादमी की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश की खेल उपलब्धियों एवं राज्य शूटिंग अकादमी की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भोपाल स्थित शूटिंग अकादमी देश की ही नहीं बल्कि विश्वस्तरीय खेल अकादमियों में शामिल है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खिलाड़ियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्री सारंग ने बताया कि हाल ही में ओलंपिक चयन प्रक्रिया (ट्रायल्स) का आयोजन भी इसी शूटिंग अकादमी में किया गया था, जो इसकी उत्कृष्ट अधोसंरचना और व्यवस्थाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देखने को मिल रहे हैं। खिलाड़ियों की उपलब्धियों से कराया अवगत मंत्री सारंग ने अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जित पदकों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध करा रही है।  

दान चोरी के आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री योगी से निष्पक्ष जांच की गुहार

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में जो पैसा भक्त दान करते हैं, उसकी कथित तौर पर चोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में विवाद इतनी तेजी से फैलीं कि अब खुद राम मंदिर का ट्रस्ट मैदान में आ गया है. ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी विशेष जांच दल से करवाई जाए।  राम मंदिर में श्रद्धालु जो पैसे दान करते हैं, उन्हें दान पात्रों में डाला जाता है. ये दान पात्र यानी वो बक्से या डिब्बे जिनमें भक्त पैसे डालते हैं. इन्हीं दान पात्रों से पैसे चोरी होने की बात कही जा रही है।  अब इस कथित चोरी को लेकर बाजार में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं. कोई कुछ कह रहा था, कोई कुछ. इन अफवाहों ने मामले को और उलझा दिया और लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई।  इसी वजह से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जो राम मंदिर की देखरेख करने वाला सरकारी ट्रस्ट है, उसने तय किया कि अब चुप रहना ठीक नहीं है. ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अनुरोध किया।  ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से क्या अनुरोध किया? ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से तीन बातें मांगी हैं. पहली – इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी से करवाई जाए. SIT एक खास जांच दल होती है जो किसी बड़े मामले की गहराई से, बिना किसी दबाव के जांच करती है।  दूसरी – यह जांच निष्पक्ष हो यानी बिना किसी की तरफदारी के हो और पूरी तरह से सच सामने आए. तीसरी – जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. ट्रस्ट ने साफ कहा कि दोषियों को बख्शा न जाए. SIT जांच की मांग क्यों? ट्रस्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है. राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला सिर्फ पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि यह भक्तों की आस्था और भरोसे का सवाल भी है. करोड़ों लोग इस मंदिर में श्रद्धा से दान करते हैं. ऐसे में अगर उस दान की चोरी होती है और उस पर अफवाहें भी फैलती हैं, तो यह बेहद संवेदनशील मामला बन जाता है।  ट्रस्ट चाहता है कि SIT जांच से यह बात एकदम साफ हो जाए कि आखिर हुआ क्या था, कितनी चोरी हुई, कौन जिम्मेदार है और इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाने चाहिए।  मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध क्यों? उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी का राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है. अयोध्या और राम मंदिर उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक रही है. SIT का गठन करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है, इसलिए ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी से यह अनुरोध किया। 

मुहर्रम को लेकर सख्त निर्देश: DJ-म्यूजिक बजाने पर लगेगा 50 हजार रुपये का जुर्माना

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक नई एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि इस्लामिक पर्वों को केवल इस्लामिक शिक्षा के अनुसार की आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए वफ्फ बोर्ड ने मस्जिद कमेटियों, दरगाह कमेटियों और आयोजकों के लिए लेजर जारी किया है। इसमें अपील की गई है कि सभी कार्यक्रम इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार ही आयोजित किए जाएं। इस्लामिक एडवाइजरी जारी एडवाइजरी में मुहर्रम और दूसरे इस्लामिक धार्मिक आयोजनों से पहले किसी भी तरह के शोर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। एजवाइजरी में वक्फ बोर्ड ने डीजे म्यूजिक, बैंड-बाजा, डांस प्रोग्राम, आतिशबाजी और पारंपरिक “शेर” परफॉर्मेंस जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि ऐसी गतिविधियां शरीयत के नियमों के मुताबिक नहीं हैं। जुर्माने का भी प्रावधान एडवाइज़री में चेतावनी दी गई है कि जो कमेटियां इन निर्देशों का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसमें कमेटी को भंग करने और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। सादगी से मनाएं त्योहार वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की है कि वे मुहर्रम को इबादत, सादगी, अनुशासन और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए मनाएं।     छत्तीसगढ़ मुस्लिम वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी     सादगी से साथ त्योहार मनाएं मुस्लिम समाज     डीजे बजाना शरीयत के नियमों के खिलाफ     उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना बकरीद में की थी अपील इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने बकरीद को लेकर भी अपील की थी। बकरीद के दौरान वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कुर्बानी खुले में नहीं करना चाहिए। कुर्बानी बंद जगह पर होनी चाहिए। बोर्ड ने कहा था कि खुले में खून नहीं बहाना चाहिए। दूसरे धर्म के लोगों को सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे का उदाहरण पेश करना चाहिए।

मानव हस्तक्षेप से प्रभावित अरावली क्षेत्र की जैव विविधता में गिरावट

 उदयपुर  उदयपुर संभाग के जंगलों में आज भले ही तेंदुए, सियार और जंगली सूअर बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हों, लेकिन एक सदी पहले मेवाड़ के वन बाघ, शेर, चीता और जंगली कुत्तों जैसे शीर्ष वन्यजीवों की शरणस्थली थे। जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य पर किए गए एक शोध अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मानव हस्तक्षेप, जंगलों के विखंडन और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के टूटने से क्षेत्र की जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। शोध के अनुसार जयसमंद और आसपास का क्षेत्र कभी बाघ, शेर, चीता, भेड़िया, जंगली कुत्ता, काला हिरण, चिंकारा, चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे वन्यजीवों से समृद्ध था। उस समय अरावली के जंगल पाली के गोरमघाट और कमलीघाट से लेकर मध्यप्रदेश तक फैले हुए थे, जिससे वन्यजीवों का आवागमन निर्बाध बना रहता था। शिकार और जंगलों की कटाई बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार राजशाही काल में बड़े पैमाने पर शिकार और बाद के वर्षों में बढ़ते मानव दबाव ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाया। खेती के विस्तार, खनन गतिविधियों, सड़क निर्माण और आबादी बढ़ने से वन क्षेत्र छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए। इसका सीधा असर उन प्रजातियों पर पड़ा जिन्हें बड़े और निरंतर जंगलों की आवश्यकता होती है। कई प्रजातियां हुईं स्थानीय रूप से विलुप्त शोध में बताया गया है कि बाघ, शेर, चीता, जंगली कुत्ता और काला हिरण जैसी कई प्रजातियां जयसमंद क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2005 से 2009 के बीच किए गए अध्ययन में केवल 21 स्तनधारी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से बड़ी संख्या कम या दुर्लभ श्रेणी में पाई गई। वर्तमान में तेंदुआ और जंगली सूअर का दबदबा हाल ही में उदयपुर संभाग की वन्यजीव गणना के अनुसार वर्तमान में जंगली सूअर 515, सियार 251, जरख 173 और तेंदुए 57 दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए जैसे अनुकूलनशील वन्यजीव बदलते परिवेश में खुद को ढालने में सफल रहे हैं, जबकि कई संवेदनशील प्रजातियां लगातार सिमटती जा रही हैं। कॉरिडोर बचाने की जरूरत वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फुलवारी की नाल, जयसमंद, सज्जनगढ़ और कुंभलगढ़ के बीच प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जैव विविधता पर और गंभीर खतरा मंडरा सकता है। शोधकर्ताओं ने वन्यजीव आवासों की सुरक्षा, मानव हस्तक्षेप में कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।  

रांची-रामगढ़ समेत कई हाईवे पर जलभराव रोकने के लिए सफाई और मरम्मत शुरू

रांची  बरसात के मौसम को देखते हुए एनएचएआई ने झारखंड के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने को लेकर अभियान चलाया है. इस क्रम में सड़कों के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया गया. एनएचएआई ने रांची-रामगढ़ मार्ग सहित रांची-जमशेदपुर मार्ग, रांची-डाल्टनगंज मार्ग और अन्य प्रमुख राजमार्गों पर ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और मरम्मत का काम शुरू कराया है. जल भराव रोकने के लिए किए जा रहे कार्य यातायात को निर्बाध रखने के लिए साइड ड्रेन, बॉक्स कल्वर्ट और क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं की सफाई की जा रही है, ताकि बरसात के पानी की तेजी से निकासी की व्यवस्था हो सके. इसके अलावा, राजमार्गों पर जल जमाव वाले और संवेदनशील स्थलों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारी बारिश के दौरान भी यातायात प्रभावित न हो और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े. साथ ही, इन मार्गों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े आवश्यक सुधार कार्य भी किए जा रहे हैं. एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी का बयान इस मानसून अभियान को लेकर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी संतोष कुमार आर्य ने कहा कि मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध यातायात बनाये रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी की जा रही हैं, जिससे बारिश के दिनों में भी यात्रियों का सफर सुरक्षित रहेगा.

कर्वी में भारी वाहनों पर प्रतिबंध, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

 चित्रकूट  प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में सोमवार को पड़ रही सोमवती अमावस्या पर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और मूलभूत सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहीं कर्वी नगर में भारी और मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए विस्तृत रूट डायवर्जन योजना लागू कर दी गई है। अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि की कामना लेकर श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा करेंगे और मां मंदाकिनी में पवित्र स्नान करेंगे। भीषण गर्मी को देखते हुए रामघाट क्षेत्र में बड़े टेंट लगाकर छाया की व्यवस्था की जा रही है। परिक्रमा और पैदल मार्गों पर मैट और कारपेट बिछाए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को गर्म जमीन से राहत मिल सके। कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा बैठने और विश्राम के लिए अलग-अलग स्थानों पर छायादार स्थल बनाए गए हैं, जबकि पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने परिक्रमा मार्ग पर पड़ी निर्माण सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 14 जून प्रातः 5:30 बजे से 16 जून मध्यरात्रि तक कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद 17 जून से अगले 30 दिनों तक निर्धारित समयावधि में नो-एंट्री व्यवस्था लागू रहेगी। प्रयागराज, कौशांबी, बांदा और सतना की ओर से आने वाले भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। वहीं जानकीकुंड और सतना की ओर जाने वाले हल्के वाहनों के लिए भी अलग डायवर्जन प्लान बनाया गया है, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

500 यूनिट से ज्यादा खपत पर बढ़ेगा बिजली बिल, दिल्ली उपभोक्ताओं को झटका

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में बिजली के बिल बढ़ने वाले हैं, इसका सीधा असर हजारों विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को 'फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज' (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार जिसे आमतौर पर PPAC भी कहा जाता है। DERC के इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर होगा, जो 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। DERC का फैसला, बढ़ जाएगा बिजली बिल दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और बिजली खरीद लागत में वृद्धि के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी बिजली बिल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) वसूलने की अनुमति दे दी है अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले का असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे में नहीं आते हैं। हालांकि पूर्ण या 50 फीसदी सब्सिडी प्राप्त करने वाले विद्युत उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। 500 यूनिट से ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को झटका एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद लागत में बदलाव के आधार पर लगाया जाने वाला अधिभार है। यह कुल ऊर्जा और स्थायी लागत के पर्सेंट के रूप में वसूला जाता है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में कोयले के आयात और परिवहन लागत बढ़ने से कोयले की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जानकारी के मुताबिक, पूर्वी और मध्य दिल्ली में BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) से बिजली लेने वाले ग्राहकों के बिल में लगभग 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जून से बढ़ सकता है बिजली बिल दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीीडीडीएल) ने मई में डीईआरसी से एफपीपीएएस वसूली की 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का अनुरोध किया था। कंपनियों ने कहा था कि अप्रैल में उनकी वास्तविक बिजली खरीद लागत, 30 सितंबर 2021 के फीस आदेश में निर्धारित आधार लागत की तुलना में काफी बढ़ गई है। DERC के फैसले की बड़ी बातें     डीईआरसी के आदेश के अनुसार, अप्रैल के लिए एफपीपीएएस बीआरपीएल के मामले में 31.5 फीसदी, बीवाईपीएल के लिए 35.26 फीसदी और टाटा पावर डीडीएल के लिए 16 फीसदी रहा।     आयोग ने बिजली खरीद लागत में वृद्धि का उचित हिस्सा वसूलने में बिजली कंपनियों को हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का फैसला किया।     इसके तहत बीआरपीएल को अप्रैल के लिए अतिरिक्त 7.94 फीसदी और बीवाईपीएल को 7.43 फीसदी अतिरिक्त एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     टीपीडीडीएल को पूरा 16 फीसदी एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     इस आदेश के बाद अप्रैल के लिए बीआरपीएल की ओर से वसूला जाने वाला कुल एफपीपीएएस बढ़कर 17.94 फीसदी होगा     बीवाईपीएल के लिए 17.43 प्रतिशत हो गया है।     डीईआरसी ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश जारी होने तक यह छूट मासिक आधार पर लागू रहेगी।

राइस मिल को मिली बड़ी राहत, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 43.30 लाख रुपये चुकाने के निर्देश दिए

 दुर्ग  बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों के निपटारे में की जाने वाली मनमानी और कटौती पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को पूरी तरह से निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, उपभोक्ता किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल की काउंटर अपील को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 43 लाख 30 हजार 423 रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस राशि पर 11 मार्च 2024 से आठ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा। बिना ठोस कानूनी आधार के कम किया दावा प्रकरण के अनुसार, दुर्ग ब्लॉक के समोदा में स्थित किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल ने अपनी मिल में स्थापित बूलर कंपनी की कलर सॉर्टर मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। एक अक्टूबर 2023 को यह मशीन अचानक खराब हो गई, जिसकी सूचना मिल प्रबंधन ने तुरंत बीमा कंपनी को दी। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बाद बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, उपभोक्ता के 45 लाख 58 हजार 340 रुपये के वास्तविक दावे को घटाकर मात्र 20 लाख 55 हजार रुपये कर दिया। जिला आयोग ने ग्राहक के पक्ष मे सुनाया आदेश बीमा कंपनी के निर्णय के खिलाफ राइस मिल के संचालक कृष्णा अग्रवाल ने अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग, दुर्ग में न्याय की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला आयोग ने 28 जुलाई 2025 को बीमा कंपनी को 40 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। आदेश को चुनौती देते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। वहीं, पीड़ित उपभोक्ता ने भी काउंटर अपील दायर कर पूरे नुकसान की भरपाई की मांग की। राज्य आयोग ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद माना कि कंपनी ने दावे को अनुचित तरीके से कम किया था और रिपेयर बिल के आधार पर पूरा भुगतान करने का फैसला सुनाया। IRDAI से करेंगे शिकायत उपभोक्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने बताया कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर खारिज करने के बढ़ते मामलों को लेकर भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को भी औपचारिक शिकायत भेजी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी पर रोक लग सके।  

पीएम ई-बस योजना के तहत आईएसबीटी से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन तय

पटना  राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जिले में जल्द ही 200 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इस संबंध में शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और बस संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत होगा संचालन बैठक में योजना के क्रियान्वयन और बस परिचालन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य सतत और आधुनिक नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस योजना से राजधानी के लोगों को बेहतर और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। आईएसबीटी से शुरू होगा बसों का परिचालन जिलाधिकारी ने बताया कि पाटलिपुत्र बस टर्मिनल, बैरिया (आईएसबीटी) से 200 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे पटना और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होगा। बसों के परिचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अधिकारियों को समयबद्ध तैयारी के निर्देश समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सभी जरूरी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। अनुमंडल पदाधिकारी पटना सदर, जिला परिवहन पदाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक को सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। यात्रियों को मिलेगी स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा जिलाधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। लाखों यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था में भी सुधार आएगा और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रदूषण घटेगा, हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से वायु प्रदूषण में कमी आएगी और हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी। बैठक में बस परिचालन से जुड़ी आधारभूत संरचना, यात्री सुविधाओं और यातायात प्रबंधन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।