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जिलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करें प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

औद्योगिक निवेश, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को दिया जाये बढ़ावा धार्मिक पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा से रोजगार सृजन की दिशा में करें प्रयास जिलों की बंद औद्योगिक इकाइयों के प्रकरणों का हो शीघ्र निराकरण स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का गहराई से अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना बनायें। ऐसे प्रयास हों कि जिले में उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर सृजित हों, जिससे जिले आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करें और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित किया जाए जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी रोजगार से जोड़ने की बात कही जिससे युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हों। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में "रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन" सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की जेसी मिल, रतलाम की सज्जन मिल और उज्जैन की विनोद मिल से संबंधित समस्याओं का समाधान जिस तत्परता से किया गया है उसी तरह अन्य जिलों में बंद औद्योगिक इकाइयों का भी शीघ्र निराकरण किया जाए। मुरैना जिले की कैलारस स्थित शुगर मिल से जुड़े मामले का समाधान भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के औद्योगिक विज़न को ज़मीनी स्तर पर साकार करने में कलेक्टर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिलों की सक्रियता और विभागों के समन्वित प्रयास ही मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि का उपयोग कर लैंड बैंक विकसित किए जाएं। जिलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए जिससे स्थानीय उत्पादन और विपणन गतिविधियों में वृद्धि हो। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र कुमार सिंह, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा एमएसएमई विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से प्रेजेंटेशन दिया गया। राज्य सरकार के वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकसित, औद्योगिक और रोजगार-समृद्ध प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि जिला निवेश सुविधा केंद्र (IFC) को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाया जाए। औद्योगिक भूमि की पहचान कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तथा विभिन्न विभागों द्वारा समयबद्ध अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कौशल समिति को सक्रिय कर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और वैकल्पिक रोजगार अवसरों से जोड़ा जाए। उद्योगों को पीएम विश्वकर्मा और अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जाए। कलेक्टर्स से यह भी कहा गया कि एक जिला-एक उत्पाद के तहत उत्पादों की पहचान, ब्रांडिंग और विपणन पर प्रभावी कार्य किया जाए। टैग किए गए उत्पादों को योजनाओं जैसे PMFME और DEH-OSOP से जोड़ा जाए और एमएसएमई इकाइयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा ई-कॉमर्स माध्यमों से जोड़ा जाए। बंद रेशम केंद्रों का पुनर्जीवन कर खादी, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उपकरण स्वीकृति और वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके साथ ही, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सहयोग के क्षेत्र में DLCC एवं DLRC बैठकों का समय पर आयोजन करने, जन धन, मुद्रा और अटल पेंशन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा वार्षिक लक्ष्य पूर्ति हेतु बैंकों की सक्रिय भूमिका तय करने के निर्देश भी दिए गए।

नर्मदा यात्रियों और गौ माता की सेवा करने वालों की भूमिका प्रशंसनीय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शरद पूर्णिमा कार्यक्रम को वर्चुअली किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां बिजयासन की छत्रछाया में सलकनपुर क्षेत्र में नर्मदा यात्रियों की सेवा और गौ माता की सेवा के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान है। राष्ट्र सेवी स्व. भगवत शरण माथुर और स्व. प्रभाकार राव केलकर की स्मृति में सेवाभावियों को सम्मानित करने का कार्य प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा सलकनपुर जिला सीहोर में शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन से जुड़े पदाधिकारी गण को शरद पूर्णिमा पर हुए इस विशेष कार्यक्रम के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। समर्पण सेवा समिति, सलकनपुर ने शरद पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर स्व. प्रभाकर राव केलकर की स्मृति तथा स्व. भगवत शरण माथुर की स्मृति में गोवंश आधारित जैविक कृषि पुरस्कार और उत्कृष्ट नर्मदा सेवा पुरस्कार प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जानकारी दी गई कि समिति द्वारा उत्तम स्वामी जी के निर्देशन में नर्मदा परिक्रमा वासियों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था का कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्रीमती माया नारोलिया, उत्तम स्वामी महाराज तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

सीजनल पॉल्यूशन रोकने हरियाणा में दो जिलों में वाहन और डीजल जनरेटर पर रोक

चंडीगढ़  हरियाणा के NCR शहरों फरीदाबाद और गुरुग्राम में प्रदूषण से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इन दोनों शहरों में ठंड के दिनों में आमतौर पर सबसे खराब वायु गुणवत्ता (AQI) स्तर दर्ज होती है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने 2025-26 के लिए विंटर सीजन वर्क मेगा प्लानिंग तैयार की है। इस मेगा प्लान के तहत गाड़ियों और उद्योग से होने वाले प्रदूषण के साथ ही सड़कों और निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल की जांच की जाएगी। HSPCB के इस मेगा प्लान से प्रदेश में हो रहे प्रदूषण पर रोक लगाई जाएगी। HSPCB का मेगा प्लान क्या है?     HSPCB के मेगा प्लान में पुरानी गाड़ियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के संचालन पर रोक लग सकती है। अधिकारियों द्वारा शहर में इस तरह की 15 लाख गाड़ियों की पहचान की गई है। इसे लेकर जिला परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है।     सरकार ने सभी बिल्डरों और डेवलपर्स को 500 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट्स को राज्य के धूल नियंत्रण पोर्टल पर पंजीकरण करने का निर्देश दिया है। HSPCB इसका निरीक्षण करेगा। नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा।     गुरुग्राम और फरीदाबाद दोनों शहरों में प्रशासन ने डीजल जनरेटर (DG) पर भी रोक लगाने का आदेश दिया है, जबकि उद्योगों को तुरंत ग्रीन फ्यूल अपनाने के लिए कहा है। अगर कोई व्यक्ति निर्देशों का पालन नहीं करेगा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।     गुरुग्राम नगर निगम ने धुंध से छुटकारा पाने के लिए अपने जल छिड़काव यंत्रों की संख्या 8 से बढ़ाकर 40 करने का फैसला लिया है। इसके अलावा 29 नए सड़क सफाई यंत्र जोड़ेगा, जिसकी कुल संख्या 54 हो जाएगी। मुख्य निर्माण जगहों पर 850 से ज्यादा एंटी-स्मॉग गन की व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह फरीदाबाद अपने स्प्रिंकलरों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 कर देगा। 15 रोड स्वीपर कनेक्ट करेगा और मुख्य प्रदूषण वाली जगहों पर 190 स्मॉग गन की व्यवस्था की जाएगी। योजना के सबसे बड़े फैसलों में से एक है 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाना। गुरुग्राम और फरीदाबाद में ऐसे लगभग 15 लाख वाहनों की पहचान की गई है। जिला परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने इन पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक से होने वाले वायु प्रदूषण में भारी कमी लाना है। निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अब 500 वर्ग मीटर से बड़े सभी निर्माण प्रोजेक्ट्स को राज्य सरकार के धूल नियंत्रण पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। HSPCB नियमित निरीक्षण करेगा और नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम निर्माण क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही दोनों जिलों में डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। सभी औद्योगिक इकाइयों को तुरंत ग्रीन फ्यूल अपनाने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने वाले उद्योगों पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम उद्योगों से होने वाले धुएं और जहरीली गैसों के उत्सर्जन को कम करने की दिशा में उठाया गया है। धुंध और स्मॉग से निपटने के लिए दोनों नगर निगमों ने एंटी-स्मॉग गनों और सफाई यंत्रों की संख्या में इजाफा किया है। गुरुग्राम में जल छिड़काव मशीनों की संख्या 8 से बढ़ाकर 40 की जा रही है, साथ ही 29 नए सड़क सफाई यंत्र शामिल किए जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 54 हो जाएगी। 850 से अधिक एंटी-स्मॉग गन प्रमुख निर्माण स्थलों पर तैनात की जाएंगी। इसी तरह, फरीदाबाद में भी स्प्रिंकलरों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 की जाएगी, 15 नई रोड स्वीपर मशीनें जोड़ी जाएंगी और 190 स्थानों पर स्मॉग गन लगाई जाएंगी। प्रशासन ने दोनों शहरों को "कम उत्सर्जन क्षेत्र" (Low Emission Zone) घोषित किया है, जहां उच्च स्तर का प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इन क्षेत्रों में सख्त निगरानी की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस साल वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। कार्य योजना का अमल शुरू हो चुका है और संबंधित विभागों को समन्वय में रहकर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, उद्योगपतियों और आमजन को भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे प्रदूषण नियंत्रण में प्रशासन का सहयोग करें। 1. 15 लाख डीजल-पेट्रोल वाहन नहीं चलेंगे इस योजना में पुराने वाहनों पर कड़ी कार्रवाई शामिल है। 10 साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन सड़कों से हटा दिए जाएंगे। अधिकारियों ने दोनों जिलों में लगभग 15 लाख ऐसे वाहनों की पहचान कर ली है। जिला परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। 2. बिल्डरों का धूल नियंत्रण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होगा निर्माण संबंधी प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़े कदम के तहत, सभी बिल्डरों और डेवलपर्स को 500 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट्स को राज्य के धूल नियंत्रण पोर्टल पर पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है। एचएसपीसीबी नियमित निरीक्षण करेगा और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। 3. डीजल जनरेटर पर रोक रहेगी दोनों जिलों गुरुग्राम और फरीदाबाद प्रशासन ने डीजल जनरेटर (DG) सेटों पर भी पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया है, जबकि उद्योगों को तुरंत ग्रीन फ्यूल अपनाने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। 4. दोनों जिलों में एंटी स्मॉग गन तैनात होंगी धुंध से निपटने के लिए, गुरुग्राम नगर निगम अपने जल छिड़काव यंत्रों की संख्या 8 से बढ़ाकर 40 करेगा तथा 29 नए सड़क सफाई यंत्र जोड़ेगा, जिससे कुल संख्या 54 हो जाएगी। प्रमुख निर्माण स्थलों पर 850 से अधिक एंटी-स्मॉग गन तैनात की जाएंगी।इसी प्रकार, फरीदाबाद अपने स्प्रिंकलरों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 करेगा, 15 रोड स्वीपर जोड़ेगा, तथा प्रमुख प्रदूषण वाले स्थानों पर 190 स्मॉग गन तैनात करेगा। ​​​​​​​क्यों लिया फैसला? गुरुग्राम और फरीदाबाद … Read more

केन्द्रीय मंत्रि-मंडल ने मध्यप्रदेश सहित 4 राज्यों की रेलवे मल्टी-ट्रेकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रि-मंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मध्यप्रदेश सहित 4 राज्यों के 18 जिलों में रेलवे की 4 मल्टी-ट्रेकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मध्यप्रदेश को मिली इस सौगात के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार मानते हुए धन्यवाद किया है। पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार इन परियोजनाओं का उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श द्वारा मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना है। ये परियोजनाएं नागरिकों, वस्तुओं और सेवाओं को निर्बाध संपर्क प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेलवे लाइन क्षमता में बढ़ोत्‍तरी से गतिशीलता बढ़ेगी जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। मल्टी-ट्रेकिंग (पटरियों की संख्या बढ़ाना) से रेल परिचालन सुगम होगा और यात्रियों को सुविधा होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप इन परियोजनाओं से क्षेत्र के लोगों का व्यापक विकास होगा, वे आत्मनिर्भर बनेंगे और उनके लिए रोज़गार/स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। केन्द्रीय मंत्रि-मंडल समिति ने मध्यप्रदेश में 237 किलोमीटर लंबी इटारसी-भोपाल-बीना चौथी लाइन को और गुजरात एवं मध्यप्रदेश के बीच 259 किलोमीटर लंबी बढ़ोदरा-रतलाम, तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही महाराष्ट्र में वर्धा-भुसावल के बीच 314 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन को तथा महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में 84 किलोमीटर लंबी गोंदिया-डोंगरगढ़ चौथी लाइन को मंजूरी दी गई है। कुल 24 हजार 634 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएं 2030-31 तक पूरी होंगी। स्वीकृत मल्टी-ट्रेकिंग परियोजनाओं से लगभग 3 हजार 633 गांवों, जिनकी जनसंख्या लगभग 85 लाख 84 हजार है तथा 2 आकांक्षी जिलों विदिशा और राजनांदगांव तक संपर्क बढ़ेगा। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्यों के 18 जिलों में व्‍याप्‍त इन चार परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 894 किलोमीटर की वृद्धि होगी। मध्यप्रदेश में परियोजना खंड सांची, सतपुड़ा बाघ अभयारण्य, प्रागैतिहासिक मानव जीवन के प्रमाणों और प्राचीन शैल चित्रकला के लिए प्रसिद्ध भीमबेटका शैलाश्रय, हज़ारा जलप्रपात, नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान आदि प्रमुख स्थलों को भी रेल संपर्क प्रदान करेगा, जो देश भर के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। यह कोयला, कंटेनर, सीमेंट, फ्लाई ऐश, खाद्यान्न, इस्पात आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए भी आवश्यक मार्ग है। पटरियों की संख्या बढ़ाए जाने से प्रति वर्ष 78 मिलियन टन की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे के पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन देश के जलवायु लक्ष्यों और परिचालन लागत को कम करने, तेल आयात (28 करोड़ लीटर) में कमी लाने और कार्बन उत्सर्जन 139 करोड़ किलोग्राम कम करने में मदद करेगा जो 6 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

मध्यप्रदेश में बनेगा अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेन्टर

मध्यप्रदेश और फीरा बार्सिलोना इंटरनेशनल के बीच हुआ एमओयू भोपाल मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेन्टर स्थापित करने के लिये कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश और स्पेन के फीरा बार्सिलोना इंटरनेशनल के बीच एमओयू हुआ। यह केन्द्र न केवल नवाचार एवं स्मार्ट शहरी समाधानों को प्रोत्साहित करेगा बल्कि वैश्विक स्तर के आयोजनों और निवेश सम्मेलनों की मेजबानी का मंच भी बनेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इसी साल जुलाई में स्पेन प्रवास के दौरान संस्थान के पदाधिकारियों से चर्चा हुई थी और उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश आमंत्रित किया था। इस अवसर पर स्पेन के राजदूत श्री जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल तथा फीरा बार्सिलोना इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रिचर्ड जपाटेरो और संस्था के भारत प्रतिनिधि श्री मुकेश अरोरा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से स्पेन के राजदूत श्री जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल ने विस्तार से चर्चा की। यह एमओयू दोनों पक्षों के बीच सांस्कृतिक-व्यापारिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगा और मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन, एक्जीबिशन और व्यापार संबंधी संवाद, निवेश सम्मेलनों के लिए विश्वस्तरीय अधोसंरचना विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस साझेदारी से वैश्विक निवेशकों ओर हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। मध्यप्रदेश का लक्ष्य वैश्विक केन्द्र के रूप में अपनी पहचान को और अधिक सशक्त बनाना है। विशेष रूप से स्मार्ट शहरी समाधान, प्रौद्योगिकी और व्यापार संबंधी प्रदर्शनियों के आयोजन के क्षेत्र में राज्य अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय मानकों और अवसरों के अनुरूप विकास कर सकेगा। यह एमओयू औद्योगिक और निवेश गतिविधियों के नये क्षितिजों को जोड़ने वाला साबित होगा इससे मध्यप्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। मध्यप्रदेश को वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संवाद मंचों, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों का आयोजन करने वाले राज्य के रूप पहचान बनेगी। इस केन्द्र के माध्यम से दुनिया के शीर्ष उद्योगपति, निवेशक और कंपनियां भोपाल आयेंगी। मध्यप्रदेश वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा बनेगा और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और अवसरों का भी केन्द्र बिन्दु बनेगा। मध्यप्रदेश बनायेगा वैश्विक पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ना सिर्फ उद्योग, व्यापार वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति बेहद लाभकारी सिद्ध हुई है। मध्य प्रदेश आने वाले वर्षों में दिल्ली क्षेत्र के विकल्प की दृष्टि से भी आवश्यक अधोसंरचना का विकास कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इंदौर और भोपाल दो मेट्रापोलिटन क्षेत्र के बाद जबलपुर और ग्वालियर के मेट्रापोलिटन क्षेत्र के विकास की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पेन के बार्सिलोना शहर में विकास की विशिष्ट प्लानिंग की गई है। वहां इस वर्ष की गई अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास के साथ विरासत के संरक्षण का संदेश प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिया है। स्पेन के बार्सिलोना जैसे शहर भी प्राचीन वैभव को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं। मध्यप्रदेश में भी प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा बताए मॉडल और बार्सिलोना के संदेश को अपनाया जा रहा है। स्पेन के राजदूत श्री पुजोल ने कहा कि अच्छी लीडरशिप और संगठन तथा प्रबंधन क्षमता से भारत और स्पेन मिलकर बेहतर कार्य करेंगे।  

नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिये वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बनाएं कार्ययोजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कमजोर वर्ग की आवास योजनाओं पर दें विशेष ध्यान मेट्रोपालिटन सिटी के विकास पर संबंधित कलेक्टर्स दें अपने सुझाव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में नगरीय क्षेत्र के मुद्दों पर हुई चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विजन-2047 में आबादी के हिसाब से नगरों के सुनियोजित विकास पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। उनकी मंशा के अनुरूप प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का विकास भी सुनियोजित तरीके से हो सके इसके लिये जिलों में भी वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर की पीएम स्वनिधि योजना और स्वच्छ वायु इन्डेक्स में उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिल्डर्स द्वारा कॉलोनी डेवलपमेंट के समय तैयार किये गये ईडब्ल्यूएस आवास आवंटन में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिये कि कलेक्टर्स इस पर शीघ्र निर्णय लेकर इनका शत-प्रतिशत आवंटन सुनिश्चित कराएं। आधुनिक सुविधाओं के साथ बने गीता भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन तैयार करने का निर्णय लिया है। यह भवन धार्मिक रूप से तैयार नहीं किये जा रहे हैं बल्कि इनका निर्माण आधुनिक टाउन हॉल के तौर पर किया जा रहा है। यह टाउन हॉल शहर की सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करें, साथ ही इनमें डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी हो। भवनों का निर्माण एक निश्चित समय-सीमा में पूरा किया जाये। धार्मिक स्थलों का तैयार हो मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सतना जिले में चित्रकूट के समग्र विकास के लिये कार्ययोजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर साडा (स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के साथ मिलकर चित्रकूट का विकास करें। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर समेत अनेक धार्मिक स्थलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ नर्मदा परिक्रमा मार्ग का भी विकास किया जा रहा है। इन धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं इसलिये आवश्यक है कि इनका समग्र विकास निर्धारित समय में पूरा हो। टीडीआर में मुआवजा राशि का भुगतान जल्द हो शहरी क्षेत्रों में टीडीआर के तहत अधिग्रहण भूमि पर मुआवजा दिया जा रहा है। इनमें शहरी क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण का मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि टीडीआर में अधिग्रहित भूमि के बदले संबंधित को मुआवजा राशि का भुगतान समय पर किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किये जाने पर जोर दिया। मेट्रोपालिटन सिटी का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में भोपाल इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र तैयार करने का निर्णय लिया है। इन क्षेत्रों के कलेक्टर्स प्लान तैयार करें कि कैसे रोजगार, औद्योगिकीकरण, एजुकेशन और मेडिकल हब के रूप में मेट्रोपालिटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार बिजली,पानी और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिये हैं। मध्यप्रदेश विजन@2047 नगरीय विकास एवं आवास के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने बताया‍कि वर्ष 2047 तक प्रत्येक नागरिक को सर्वसुविधा युक्त पक्का आवास और शहरों को मलिन बस्ती मुक्त किया जाना है। स्वच्छता के मामले में अपशिष्ट प्रबंधन, नवकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकोनॉमी का समावेश किया जाना है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन द्वारा सुरक्षित एवं सतत जल आपूर्ति और असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 में 8 लाख 69 हजार 531 आवास तैयार किये जा चुके हैं। योजना में 76 हजार 300 से अधिक आवास पूर्ण किये जाने हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स अधूरे पड़े आवासों को जल्द पूरा करें। प्रदेश में पीएमएवाय 2.0 में 10 लाख आवास तैयार किये जायेंगे। स्वच्छ भारत मिशन में प्रदेश के 100 प्रतिशत आवासों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कचरा संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। निकायों को 7115 कचरा संग्रहण वाहन दिये गये हैं। क्लीन एयर प्रोग्राम में अच्छे काम के लिये इंदौर, जबलपुर और देवास को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। पीएम स्वनिधि योजना में वर्ष 2023-24 में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है। कॉन्फ्रेंस में एयर क्वालिटी सुधार कार्यक्रम पर इंदौर कलेक्टर, पीएमएवाय पर ग्वालियर कलेक्टर और जल संवर्धन में श्रेष्ठ कार्य पर कलेक्टर खंडवा ने अपने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतियां दी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन

  प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।  

कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन

3 सत्रों में होगी महत्वपूर्ण चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में दो दिवसीय कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन बुधवार 8 अक्टूबर को कानून व्यवस्था सहित ग्रामीण जन-जीवन से जुड़े बिन्दुओं पर विमर्श होगा। कॉन्फ्रेंस में प्रत्येक क्षेत्र में राज्य सरकार की प्राथमिकताएं बतायी जायेंगी। कॉन्फ्रेंस में 8 अक्टूबर को 3 सत्र होंगे और प्रत्येक सेक्टर के लिए 75 मिनट का सत्र समय रखा गया है। बुधवार को कांफ्रेंस की शुरुआत सुबह 9:30 से होगी। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और आयुक्त जनसंपर्क श्री दीपक सक्सेना द्वारा मुख्यमंत्री के प्राथमिकता के बिंदुओं के अलावा जनसंपर्क की अपेक्षाओं पर चर्चा की जाएगी। शिक्षा सत्र में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य और आयुक्त राज्य शिक्षा द्वारा चर्चा की जाएगी। अगला सत्र ग्रामीण विकास एवं जनजातीय कार्यों पर केंद्रित होगा, जिसमें अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और प्रमुख सचिव जनजातीय विमर्श करेंगे। अंतिम सत्र में मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था से जुड़े बिन्दुओं पर चर्चा होगी।  

धान खरीदी के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर किसान पंजीयन अनिवार्य, 31 अक्टूबर अंतिम तिथि

एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर कर सकते हैं संपर्क रायपुर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य किया गया है। एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर संपर्क किया जा सकता है। खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी कि एग्रीस्टैक पोर्टल भारत सरकार द्वारा विकसित एक यूनिफाइड एग्रीकल्चर डेटाबेस है, जिसमें किसानों का भूमि एवं आधार लिंक्ड पंजीयन किया जाता है। पंजीकरण उपरांत किसानों को एक यूनिक फार्मर आईडी (Unique Farmer ID) प्राप्त होती है। यह आधार लिंक्ड डेटाबेस शासन की विभिन्न योजनाओं के लाभ केवल वास्तविक पात्र किसानों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के तहत किसानों को सीधे भुगतान किया जाता है। अतः शासन की मंशा है कि सभी पात्र किसान सुशासन एवं पारदर्शिता के साथ इस योजना का वास्तविक लाभ प्राप्त करें। एग्रीस्टैक में आधार-आधारित पंजीयन और ई-केवाईसी की व्यवस्था से संपूर्ण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा। गत वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था। वर्तमान वर्ष में अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है। शेष किसान अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर 31 अक्टूबर 2025 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। इस संबंध में सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को पूर्व में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एग्रीस्टैक पोर्टल डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाएगा। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य के 20 हजार ग्रामों में से 13 हजार 879 ग्रामों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया है। इस डिजिटल क्रॉप सर्वे और मैनुअल गिरदावरी की रिपोर्टों का 2 से 14 अक्टूबर 2025 तक ग्राम सभाओं में पठन किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में मुनादी कर सूचना दी गई है और सर्वे सूची का पंचायत भवनों में प्रदर्शन (चस्पा) भी किया गया है। इस कार्यवाही की सतत निगरानी जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है। यह पहल “डिजिटल एग्रीकल्चर और गुड गवर्नेंस” की दिशा में राज्य का एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।

नागरिकों को सुगम राजस्व सेवाएं प्राप्त हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राजस्व सहित जनहित के मुद्दों पर समर्पित रहा पांचवा सत्र भोपाल : कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि राजस्व विभाग को और भी जनोन्मुखी बनाया जाए जिससे शहरी और ग्रामीण नागरिकों को समय पर सुगम राजस्व विभाग की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किये जाने तथा राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। पांचवे सत्र का अपर मुख्य सचिव श्री संजय कुमार शुक्ल ने संचालन किया। इस सत्र में राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण इस सत्र में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। फेसलैस और पेपरलैस क्षेत्राधिकार मुक्त साइबर तहसील की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। राजस्व न्यायालयों में समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति और प्रत्येक कार्यदिवस में राजस्व न्यायालय के संचालन को लेकर भी विमर्श हुआ। इस दौरान जानकारी दी गई कि 3 राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया गया है, इसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए हैं। भू-अर्जन प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) का विकास किया गया है। मध्यप्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफ़ेरेंस (शून्य बफर) के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध सत्र में जानकारी दी गई कि प्रदेश के नागरिकों की समग्र परिवार आईडी 2 करोड़ 16 लाख हैं और कुल 6 करोड़ 47 लाख ई-केवायसी (E-kyc) की गई हैं। केस प्रबंधन एवं ट्रैकिंग प्रणाली (CMTS) बनाई गई है जो विभिन्न शासकीय विभागों में विविध प्रकरणों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है। यह प्रणाली, न्यायालयीन प्रकरणों में शासन की दक्षता, जवाबदेही एवं समन्वय को सुदृढ़ करती है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। सिंगल साइन ऑन के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही लॉगिन एवं पासवर्ड से विभिन्न पोर्टल में लॉगिन की सुविधा दी गई है। सभी विभागों के नियमित कर्मचारियों के लिए तैयार वर्क फ्लो आधारित पोर्टल प्रदेश के सभी विभागों के 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया है। अब तक 45 विभागों एवं 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों के 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। "अविरल नर्मदा" गतिविधियों के समन्वय के लिए समिति गठन पर चर्चा सत्र में विमर्श हुआ कि निर्मल नर्मदा के लिए 16 जिलों को मुख्यतः कार्य करना होगा। नर्मदा क्षेत्र में क्रियान्वित गतिविधियों के समन्वय एवं अनुश्रवण के लिए समिति के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग, सीएम हेल्पलाइन पर हुई सारगर्भित चर्चा इस दौरान में रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियां, शाला विकास एवं जनभागीदारी समितियां, सीएसआर एवं जनभागीदारी योजना सहित विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। जिला एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कार्यक्रम एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। सत्र में सीएम हेल्पलाइन के गंभीरतापूर्वक क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। मिशन कर्मयोगी पर सीखें सप्ताह एवं पाठ्यक्रम प्रकाशन की जानकारी भी साझा की गईं।