samacharsecretary.com

सुपौल चुनाव: नामांकन 13 अक्टूबर से, वोटिंग 11 नवंबर को तय

सुपौल सुपौल जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होगा। यह जानकारी सोमवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारी एवं जिलाधिकारी सावन कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि चुनाव को लेकर जिले में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया 13 अक्टूबर से आरंभ होगी। अभ्यर्थी 20 अक्टूबर तक संबंधित निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। 21 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी, जबकि अभ्यर्थी 23 अक्टूबर तक नामांकन वापस ले सकते हैं। मतगणना 14 नवंबर को सुबह 8 बजे जिला मुख्यालय स्थित बीएसएस कॉलेज परिसर में होगी। वोटरों का विवरण अब तक जिले में कुल 15,36,954 वोटर रजिस्टर्ड हैं। इनमें 807,584 पुरुष, 729,356 महिला और 14 थर्ड जेंडर वोटर शामिल हैं। विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार मतदाताओं का विवरण इस प्रकार है:     निर्मली: 3,03,529     पिपरा: 3,04,332     सुपौल: 2,92,484     त्रिवेणीगंज: 3,03,595     छातापुर: 3,33,014 जिलाधिकारी ने बताया कि संवीक्षा के 10 दिन पहले तक आम लोग या राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मतदाता सूची में सुधार या नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नामांकन के लिए चुनाव चिह्न आवंटन और परमिशन हेतु सिंगल विंडो निर्वाचक पदाधिकारी स्तर से ही होगी। मतदान सामग्री के डिस्पैच के लिए दो स्थान तय किए गए हैं। निर्मली, सुपौल और छातापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए डिस्पैच सेंटर बीएसएस कॉलेज, जबकि पिपरा और त्रिवेणीगंज के लिए आईटीआई कॉलेज परिसर में बनाया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी शरथ आरएस और उप निर्वाचन पदाधिकारी अनिरुद्ध कुमार भी मौजूद थे। शत प्रतिशत बूथों पर वेबकास्टिंग और सुरक्षा जिलाधिकारी ने बताया कि चुनाव के दौरान सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी। जिला कंट्रोल रूम के माध्यम से हर बूथ की गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों की भी तैनाती की जाएगी। चुनाव निगरानी के लिए विधानसभा वार सेक्टर पदाधिकारी और दंडाधिकारी तैनात किए गए हैं, जो आदर्श आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करेंगे।

गौपालन को मिलेगा बढ़ावा, हर घर तक पहुंचेगा अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

घर-घर में गौपालन को प्रोत्साहित करने और गोवंश की देखभाल के लिए जारी है अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कंप्यूटर बाबा ने की सौजन्य भेंट भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से  नामदेव दास त्यागी कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में घर-घर में गौपालन को प्रोत्साहित करने और गोवंश की देखभाल के लिए गौशालाएं स्थापित करने का अभियान चल रहा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में 5 हजार संख्या तक संख्या में गौ माताएं रखी जा सकें, इस प्रकार की गौशालाऐं स्थापित की जा रही हैं। राज्य शासन ने गौ माता के लिए अनुदान की राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए किया है। दस हजार गौ माताएं रखने की क्षमता वाली गौशालाएं स्थापित करने की दिशा में भी कार्य हो रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। हमारा प्रयास है कि मध्य प्रदेश, दुग्ध उत्पादन में देश में प्रथम हो। इस उद्देश्य से घर-घर में गौ-पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गोपालन की इस प्रकार की कई योजनाओं पर राज्य सरकार कार्य कर रही है। कंप्यूटर बाबा का भी इस दिशा में सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में भगवान राम वन गमन पथ पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही जहां-जहां भगवान कृष्ण की लीलाएं हुईं, उन क्षेत्रों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सब गतिविधियों में भी कंप्यूटर बाबा का सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के बाद कंप्यूटर बाबा ने बताया कि उन्होंने गौ माता को राजमाता का दर्जा देने और प्रदेश में गौ अभयारण्य स्थापित करने का सुझाव राज्य शासन के सम्मुख विचार के लिए रखा है। कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की गौ माता के प्रति आस्था तथा राज्य सरकार द्वारा गौ संरक्षण के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संत समाज गौ संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ है।  

निकालिए गर्म कपड़े! दिवाली तक झारखंड में दस्तक देगी ठंड

रांची देशभर में इस बार हो रही अधिक बारिश ने सभी को हैरान कर दिया है। त्यौहार शुरू हो गए हैं, लेकिन बारिश ने त्योहारों की खुशियों को फीका किया हुआ है। वहीं, झारखंड की बात करें तो यहां 9 अक्टूबर तक हल्की बारिश होने की संभावना बनी हुई है। रांची मौसम विभाग के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में अब बादल छंट रहे हैं। लगातार बारिश में अब कमी आएगी। अगले 4 दिनों के दौरान हवा में तेजी से बदलाव होंगे। इससे बादल साफ होंगे। इसके साथ ही मानसून वापसी की प्रक्रिया आरंभ होगी। मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर के बाद हल्की ठंड शुरू होने लग जाएगी। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के मुताबिक, झारखंड में 11 अक्टूबर से मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मौसम विभाग के अनुसार, 10 अक्टूबर तक कहीं-कहीं हल्की बारिश और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। इसके बाद राज्य में शुष्क मौसम की शुरुआत होगी। इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ का आंशिक असर बना रहेगा, जिससे दोपहर के समय बादल छाने और हल्की बारिश की स्थिति बन सकती है। मानसून की विदाई के बाद झारखंड में मौसम में धीरे-धीरे बदलाव देखा जाएगा। सुबह और शाम के समय हल्की ठंड महसूस होने लगेगी, जबकि दिन में मौसम खुशनुमा बना रहेगा। अनुमान है कि दिवाली तक राज्य में गुलाबी ठंड का प्रभाव साफ तौर पर दिखने लगेगा।

रायपुर में सफाईकर्मियों की ड्यूटी अब 8 घंटे अनिवार्य, तभी मिलेगी सैलरी

 रायपुर शहर की सफाई में काम करने वाले कर्मियों का अब आठ घंटे की पूरी ड्यूटी करनी पड़ेगी। प्रतिदिन आठ घंटे की ड्यूटी होने पर ही उन्हें सैलरी मिलेगी। नगर निगम द्वारा जोन स्तर अनुबंधित किए जाने वाले ठेका सिस्टम को भी खत्म करने जा रहा है। अब निगम हेड ऑफिस से ठेका एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो पूरे शहर में सफाई के लिए कर्मचारी, उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराएगी। नगर निगम की शहरी सरकार ने हाल ही में एमआइसी की बैठक में इस प्रस्ताव पर प्रारंभिक चर्चा की। बैठक में यह भी तय किया गया कि शहर की सफाई व्यवस्था को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि शहर के वार्डों में सफाई कर्मचारी अक्सर निर्धारित संख्या से कम ड्यूटी पर मिलते थे, जिससे सफाई कार्य में कोताही होती है। इससे शहर की सफाई का स्तर अपेक्षित नहीं रह पाया। अन्य नगर निगमों जैसे भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, जगदलपुर और अंबिकापुर में सेंट्रलाइज्ड टेंडर से बेहतर परिणाम मिले हैं। इस नए सिस्टम के तहत पूरे शहर की सफाई के लिए एक बड़ी एजेंसी को आनलाइन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाएगा। वार्डवार मानिटरिंग संबंधित जेडएचओ के माध्यम से होगी। हर वार्ड में अलग ठेकेदार की जगह अब एक सेंट्रलाइज्ड ठेका होगा, जिसमें पापुलेशन और वार्ड वाइज सफाई प्लान तैयार किया जाएगा। निगम प्रशासन की चुनौती वर्तमान में नगर निगम हर महीने लगभग 7 करोड़ रुपये 70 वार्डों की सफाई के एवज में अलग-अलग ठेका एजेंसियों को भुगतान करता है। इसके बावजूद कई वार्डों में सफाई पर्याप्त नहीं हो पा रही थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए अब केंद्रीकृत सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था से शहरवासियों को साफ-सुथरी गलियां, व्यवस्थित सफाई और बेहतर सार्वजनिक सुविधा उपलब्ध होगी। निगम प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में सेंट्रलाइज्ड टेंडर प्रक्रिया पूरी कर नई प्रणाली लागू कर दी जाएगी। सेंट्रलाइज्ड टेंडर से मिलने वाले फायदे     कर्मचारी को 8 घंटे ड्यूटी करनी होगी और हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा।     सफाईकर्मी एक समान वर्दी पहनेंगे, जिससे पहचान आसान होगी।     सफाई के लिए स्पष्ट रूट चार्ट तैयार होगा।     ठेका एजेंसी के काम में मनमानी और गड़बड़ी पर रोक लगेगी।     10 जोन के 70 वार्ड पूरे शहर में एक ही एजेंसी कवर करेगी।     भुगतान में पारदर्शिता और मानिटरिंग में आसानी होगी।

राजस्व सेवाओं को आमजन के लिए सहज बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध : डॉ. यादव

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस पहला दिन नागरिकों को सुगम राजस्व सेवाएं प्राप्त हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्व सहित जनहित के मुद्दों पर समर्पित रहा पांचवा सत्र भोपाल  कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि राजस्व विभाग को और भी जनोन्मुखी बनाया जाए जिससे शहरी और ग्रामीण नागरिकों को समय पर सुगम राजस्व विभाग की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किये जाने तथा राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। पांचवे सत्र का अपर मुख्य सचिव  संजय कुमार शुक्ल ने संचालन किया। इस सत्र में राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण इस सत्र में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। फेसलैस और पेपरलैस क्षेत्राधिकार मुक्त साइबर तहसील की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। राजस्व न्यायालयों में समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति और प्रत्येक कार्यदिवस में राजस्व न्यायालय के संचालन को लेकर भी विमर्श हुआ। इस दौरान जानकारी दी गई कि 3 राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया गया है, इसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए हैं। भू-अर्जन प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) का विकास किया गया है। मध्यप्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफ़ेरेंस (शून्य बफर) के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध सत्र में जानकारी दी गई कि प्रदेश के नागरिकों की समग्र परिवार आईडी 2 करोड़ 16 लाख हैं और कुल 6 करोड़ 47 लाख ई-केवायसी (E-kyc) की गई हैं। केस प्रबंधन एवं ट्रैकिंग प्रणाली (CMTS) बनाई गई है जो विभिन्न शासकीय विभागों में विविध प्रकरणों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है। यह प्रणाली, न्यायालयीन प्रकरणों में शासन की दक्षता, जवाबदेही एवं समन्वय को सुदृढ़ करती है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। सिंगल साइन ऑन के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही लॉगिन एवं पासवर्ड से विभिन्न पोर्टल में लॉगिन की सुविधा दी गई है। सभी विभागों के नियमित कर्मचारियों के लिए तैयार वर्क फ्लो आधारित पोर्टल प्रदेश के सभी विभागों के 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया है। अब तक 45 विभागों एवं 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों के 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। "अविरल नर्मदा" गतिविधियों के समन्वय के लिए समिति गठन पर चर्चा सत्र में विमर्श हुआ कि निर्मल नर्मदा के लिए 16 जिलों को मुख्यतः कार्य करना होगा। नर्मदा क्षेत्र में क्रियान्वित गतिविधियों के समन्वय एवं अनुश्रवण के लिए समिति के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग, सीएम हेल्पलाइन पर हुई सारगर्भित चर्चा इस दौरान में रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियां, शाला विकास एवं जनभागीदारी समितियां, सीएसआर एवं जनभागीदारी योजना सहित विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। जिला एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कार्यक्रम एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। सत्र में सीएम हेल्पलाइन के गंभीरतापूर्वक क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। मिशन कर्मयोगी पर सीखें सप्ताह एवं पाठ्यक्रम प्रकाशन की जानकारी भी साझा की गईं।  

बिहार का चुनावी इतिहास बदला: 40 साल बाद दो चरणों में मतदान, शाहाबाद-मिथिला को अलग फेज़ में रखा गया

पटना बिहार में 40 वर्षों के बाद विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। इससे पहले वर्ष 1985 में दो चरण में चुनाव हुए थे। 1985 के चुनाव में झारखंड बिहार से अलग नहीं था। तब, बिहार में विधानसभा सीटों की संख्या 324 थी। 2000 के नवंबर में बिहार से झारखंड अलग हुआ। इसके बाद बिहार में विधानसभा की सीटें 324 से घटकर 243 रह गईं। झारखंड से अलग होने के बाद बिहार में पहली बार दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं। यहां अब-तक दो से अधिक चरणों में ही चुनाव होते आ रहे हैं। पिछले 25 सालों में बिहार में सबसे अधिक छह चरणों में विधानसभा चुनाव वर्ष 2010 में हुए थे। 2010 के विधानसभा चुनाव में 21, 24 और 28 अक्टूबर तथा 1, 9 और 20 नवंबर को मतदान हुआ था। पिछला चुनाव तीन चरणों में हुआ था। 28 अक्टूबर को 71, 3 नवंबर को 94 और 7 नवंबर को 78 सीटों पर वोट डाले गए थे। 2015 में पांच चरणों में चुनाव हुए। 1980 और 1990 में एक चरण और 1995 में पांच चरणों में चुनाव हुए थे। शाहाबाद, मिथिला, अंग जैसे भू-सांस्कृतिक क्षेत्र दोनों चरणों में बंटे 2025 के विधानसभा चुनाव में शाहाबाद, मिथिला और अंग जैसे भू-सांस्कृतिक क्षेत्र दोनों चरणों में बंटे हैं। शाहाबाद के चार जिलों में भोजपुर और बक्सर में पहले चरण तो रोहतास और कैमूर में दूसरे चरण में चुनाव हैं। पिछली बार शाहाबाद में पहले चरण में ही चुनाव हुए थे। मिथिला के इलाके को भी दो चरणों में बांट दिया गया है। समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और बेगूसराय में तो पहले चरण में जबकि शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी में दूसरे चरण में चुनाव है। अंग इलाके में भागलपुर, बांका और जमुई में दूसरे चरण तो मुंगेर में पहले चरण में चुनाव हैं। मगध के चार जिलों गया, जहानाबाद, औरंगाबाद और नवादा में पिछली बार की तरह एक ही चरण में चुनाव हैं। सीमांचल के सभी चार जिलों अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में दूसरे चरण में चुनाव है। 2020 के चुनाव में शाहाबाद और मगध में पहले चरण में चुनाव हुए थे, जहां महागठबंधन की बंपर जीत हुई थी। इन क्षेत्रों की 77% सीटों पर उसके उम्मीदवार जीते थे।

एनडीए में सीट शेयरिंग पर चला सियासी पेंच, चिराग पासवान ने जताई 54 सीटों की मांग

पटना              बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार  दिल्ली में चिराग पासवान और बीजेपी नेताओं धर्मेंद्र प्रधान व विनोद तावड़े के बीच करीब पचास मिनट तक चली बैठक में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से सीटों की मांग रखी गई. एलजेपी (आर) के सूत्रों की मानें तो पार्टी बिहार चुनाव में 45 से 54 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है. क्या है चिराग पासवान की मांग? बैठक में एलजेपी (रामविलास) की ओर से साफ कहा गया कि पार्टी को 2024 लोकसभा चुनाव में जीती गई पांच सीटों और 2020 विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर सीटें दी जानी चाहिए. चिराग पासवान की ओर से मांग की गई कि जिन पांच लोकसभा क्षेत्रों पर एलजेपी (रामविलास) ने जीत दर्ज की है, वहां से प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम दो विधानसभा सीटें पार्टी को दी जाएं. इसके अलावा एलजेपी के बड़े नेताओं के लिए भी सीटों की मांग सामने रखी गई है. बैठक में बीजेपी की ओर से चिराग पासवान को भरोसा दिलाया गया कि उनकी मांगों पर पार्टी स्तर पर चर्चा कर जल्द ही उन्हें जवाब दिया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में चिराग पासवान और बीजेपी के शीर्ष नेताओं के बीच एक और बैठक होगी, जिसमें अंतिम रूप से सीट शेयरिंग पर सहमति बनाई जा सकती है. दो तीन दिन में हो सकता है सीट बंटवारे का एलान चुनावी समीकरण और राजनीतिक माहौल को देखते हुए एनडीए अगले दो से तीन दिनों में सीट बंटवारे को फाइनल कर उसका औपचारिक ऐलान कर सकता है. संभावना जताई जा रही है कि पटना में ही एनडीए गठबंधन की ओर से सीट शेयरिंग का एलान किया जाएगा. चिराग पासवान ने ब्रह्मपुर और गोविंदगंज सीटों पर ठोकी दावेदारी चिराग पासवान ने ब्रह्मपुर और गोविंदगंज सीट अपनी पार्टी के नेताओं के लिए मांगी हैं. सूत्रों के मुताबिक, चिराग चाहते हैं कि ब्रह्मपुर सीट उनके संसदीय बोर्ड अध्यक्ष हुलास पांडे को मिले. 2020 के चुनाव में एनडीए ने यह सीट वीआईपी को दी थी. उस समय एलजेपी से हुलास पांडे मैदान में उतरे थे और 30,035 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे. एनडीए खेमे से वीआईपी उम्मीदवार जयराज चौधरी तीसरे पायदान पर रहे थे, जबकि सीट पर आरजेडी का कब्जा हो गया था. गोविंदगंज सीट राजू तिवारी के लिए चाहते हैं चिराग इसी तरह गोविंदगंज सीट के लिए चिराग ने अपने प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी का नाम आगे बढ़ाया है. यह सीट फिलहाल बीजेपी के पास है. 2020 में एलजेपी से राजू तिवारी ने यहां चुनाव लड़ा था और 31,300 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे. चिराग पासवान ने अपने नेताओं द्वारा पिछले चुनाव में 30 हजार से ज्यादा वोट हासिल करने को आधार बनाकर इन दोनों सीटों पर दावा ठोका है. सूत्रों ने बताया कि आज की बैठक में सिर्फ सीट बंटवारे का मुद्दा ही नहीं, बल्कि बिहार के चुनावी माहौल, संभावित चुनावी मुद्दों और दिवंगत नेता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि की तैयारियों पर भी चर्चा की गई. क्या चुनाव में अपनी मजबूत स्थिति दर्शाना चाहते हैं चिराग? चिराग पासवान की यह सक्रियता और सीटों पर उनकी सख्त मांग यह दर्शाती है कि एलजेपी (रामविलास) आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराना चाहती है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला क्या होगा और चिराग पासवान की कितनी मांगें पूरी की जाती हैं.  पटना लौट सकते हैं चिराग पासवान सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान दिल्ली से पटना के लिए प्रस्थान करेंगे. वहां से वे खगड़िया जिले के अपने पैतृक गांव शहरबन्नी पहुंचेंगे, जहां उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इस मौके पर चिराग श्रद्धा सभा में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और परिवार तथा समर्थकों से मुलाकात करेंगे. एनडीए में सीट बंटवारे की कवायद अंतिम दौर में पहुंची बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीट बंटवारे की कवायद अब अंतिम दौर में पहुंच गई है. बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) सहित सभी सहयोगी दलों के बीच हिस्सेदारी को लेकर गहन चर्चा चल रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी और जेडीयू को सौ से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, वहीं चिराग पासवान की पार्टी को भी अहम हिस्सेदारी मिलने की संभावना है.

सीट शेयरिंग पर नहीं बनी बात! CPI-ML ने RJD का प्रस्ताव किया खारिज

पटना.  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग को लेकर एक बार फिर से सिर फुटव्वल शुरू हो गया है. सूत्रों से मिली बड़ी जानकारी के मुताबिक, भाकपा-माले (CPI-ML) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 19 सीटों के ऑफर को ठुकरा दिया है. पार्टी ने सीटों की अदला-बदली के प्रस्ताव को भी खारिज करते हुए साफ कहा है कि वे जल्द अपनी नई 30 सीटों की सूची आरजेडी को सौंपेंगे. सूत्रों के अनुसार, आरजेडी की ओर से CPI-ML को 19 सीटों का ऑफर दिया गया था, जिसमें पिछली बार की कुछ सीटों में अदला-बदली (एक्सचेंज) का सुझाव भी शामिल था. लेकिन भाकपा-माले ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है. पार्टी ने कहा है कि वे 2019 और 2020 के चुनावों में अपने मजबूत प्रदर्शन के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं. वहीं सीट शेयरिंग को लेकर मुकेश सहनी ने कहा कि 243 सीटों पर बंटवारे को लेकर हम लोगों पर दबाव है. बैठकें लगातार चल रही हैं और हर एक चीज पर चर्चा हो रही है. मुकेश साहनी ने बताया कि हम लोग रात 2 बजे तक बैठे थे और आज फिर बैठक होगी. सीटों के शेयरिंग में समस्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई उलझन नहीं है. हमारे सभी गठबंधन के साथियों को पता है कि राज्य में 243 सीटें हैं और सभी को एडजस्ट करना है. सभी को उनके जनाधार के अनुसार सम्मानजनक सीटें मिलेंगी. मैं खुद यह मानता हूं कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और सबको उचित सीटें दी जाएंगी.  

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ, वोटर लिस्ट से नाम कटने पर क्या है चुनाव आयोग की भूमिका

पटना   एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट चल रही सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मैं चाहता हूं कि कोर्ट योगेंद्र यादव को 10 मिनट का समय दें, ताकि वे SIR के कारण महिलाओं, मुसलमानों आदि के अनुपातहीन बहिष्कार की वास्तविक पृष्ठभूमि बता सकें. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आप आगे कैसे बढ़ना चाहते हैं? SIR की वैधता पर या…? इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें न तो कोई नोटिस मिला, न ही कोई कारण बताया गया. उन्होंने कहा कि तीसरी बात, अपील का प्रावधान तो है, लेकिन जानकारी ही नहीं दी गई तो अपील कैसे करेंगे? वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि जिन भी लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें आदेश की जानकारी दी गई है. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अगर कोई हमें सूची दे सके कि 3.66 लाख मतदाताओं में से किन लोगों को आदेश की जानकारी नहीं दी गई, तो हम चुनाव आयोग को निर्देश देंगे कि उन्हें जानकारी दी जाए. हर व्यक्ति को अपील का अधिकार है.” क्या है संविधान का अनुच्छेद 329? संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव आयोग को यह अधिकार देता है कि वह चुनाव प्रक्रिया को बिना बाधा के पूरा कराए. संविधान का यह अनुच्छेद एक तरह से न्यायपालिका को चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने से रोकता है और उससे यह उम्मीद करता है कि वह चुनाव आयोग को चुनावी प्रक्रिया पूरी करने में बाधित नहीं करेगा. अनुच्छेद के खंड (क) में कहा गया है कि सीटों के परिसीमन या आवंटन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता पर अदालत में सवाल नहीं उठाया जा सकता है, जबकि खंड (ख) में प्रावधान है कि किसी चुनाव को केवल विधानमंडल द्वारा पारित कानून द्वारा निर्धारित तरीके से दायर चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है. विधायी मामलों के जानकार अयोध्यानाथ मिश्र बताते हैं कि भारत में हर संवैधानिक संस्था का अपना महत्व है. किसी भी संवैधानिक संस्था को संविधान ने सुप्रीम नहीं बताया है, बल्कि सबको अलग-अलग काम दिए हैं और सभी अपने कार्यों को करने के लिए स्वतंत्र हैं. हर संवैधानिक संस्था से यह उम्मीद की जाती है कि वो दूसरे के कार्यों में दखल नहीं देगा. संविधान के अनुच्छेद 329 में इसी बात की व्यवस्था की गई है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और बिना बाधा के चुनावी प्रक्रिया को पूरा कराए. जहां तक बात एसआईआर मामले में सुनवाई की है, तो अब चूंकि चुनाव की तिथि घोषित हो गई है, इसलिए इस बात की संभावना बहुत कम है कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर कोई चौंकाने वाला फैसला सुनाएगा, क्योंकि परंपरा ऐसी नहीं रही है. योगेंद्र यादव दे सकते हैं जानकारी प्रशांत भूषण ने दलील दी कि चुनाव आयोग को अपने ही नियमों के तहत प्रतिदिन प्राप्त आपत्तियों का विवरण अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना चाहिए था. उन्होंने कहा, “इसीलिए हम कह रहे हैं कि ये सारी जानकारियां वेबसाइट पर डालनी चाहिए थीं. उनके नियमों में स्पष्ट है कि हर दिन के अंत में प्रत्येक मतदाता से जुड़ी प्राप्त आपत्तियों की जानकारी प्रकाशित की जानी चाहिए. वे कह रहे हैं कि 3.66 लाख नाम आपत्तियों के आधार पर हटाए गए हैं. योगेन्द्र यादव इस पर तथ्यात्मक जानकारी दे सकते हैं इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर हम अंधेरे में रहेंगे तो कोई समाधान नहीं निकल सकता. वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि योगेन्द्र यादव व्यक्तिगत रूप से एक हलफनामा देकर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने भी कहा कि आज भी विस्तृत (disaggregated) डेटा उपलब्ध है, लेकिन हम अंधेरे में रखे गए हैं. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि सब लोग हवा में कह रहे हैं कि उन्हें जानकारी नहीं है. किसी को हलफनामा दाखिल करना चाहिए. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी को तो हलफनामा दाखिल करना होगा कि वह प्रभावित व्यक्ति है. वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऐसा करने के लिए और जानकारी की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि कुल 65 लाख नाम डिलीट किए गए थे, जिनमें से 42 लाख को वापस जोड़ा गया है. शेष नाम अभी भी हटे हुए हैं. जस्टिस कांत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत संख्या पर नहीं, बल्कि कुछ संभावित उदाहरणों की पहचान पर ध्यान दे रही है. उन्होंने कहा, “अगर मुझे पता है कि संशोधित वोटर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है, तो मैं हलफनामा दाखिल कर सकता हूं.” अगर सुप्रीम कोर्ट ने कोई बाधा डाली तो क्या होगा? संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव आयोग को यह विशेषाधिकार देता है कि वह निष्पक्ष ढंग से बिना बाधा के चुनाव कराए. उसकी यह जिम्मेदारी है कि चुनाव कराते वक्त वह संविधान की मूल भावना का पूरा सम्मान करे और किसी भी नागरिक को लिंग, जाति और धर्म के आधार पर मतदान से ना रोके. इसके लिए चुनाव आयोग अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है. मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य भी उसी में शामिल है, अगर चुनाव की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट कोई ऐसा निर्णय देता है, जिससे चुनाव पर असर हो, तो क्या हो सकता है? इसपर जानकारी देते हुए अयोध्यानाथ मिश्र कहते हैं कि पहली बात तो यह कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा कोई निर्णय नहीं करेगा, जिससे एक संवैधानिक संस्था के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन हो, फिर भी अगर यह मान लिया जाए कि इस तरह का कोई फैसला सुप्रीम कोर्ट सुनाता है, तो अब जबकि चुनाव की घोषणा हो चुकी है, क्या हो सकता है? क्या चुनाव को रोका जाएगा? वहां किसी भी हाल में 22 नवंबर से पहले चुनाव संपन्न होने हैं, क्योंकि वर्तमान सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है. अगर चुनाव संपन्न नहीं हुए तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का क्या होगा? इस लिहाज से इस बात की संभावना काफी कम है कि सुप्रीम कोर्ट कोई भी ऐसा निर्णय सुनाएगा, जिससे चुनाव प्रभावित हो. हां, यह जरूर संभव है कि वह वह कोई सकारात्मक सुझाव दे. क्या हैं … Read more

एम.पी. ट्रांसको के रियल हीरो बने आउटसोर्स कर्मी संजय यादव

जलते ट्रांसफार्मर की आग बुझा कर दिखाया अदम्य साहस भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के जबलपुर में गोरा बाजार स्थित 220 के.वी. सबस्टेशन में बीती रात हुई आग की घटना में आउटसोर्स कर्मी श्री संजय यादव ने अदम्य साहस और जांबाजी का परिचय देते हुए एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। उनकी त्वरित कार्रवाई से न केवल 160 एम व्ही ए. पावर ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहा, बल्कि पूरे यार्ड और शहर की बिजली आपूर्ति को भी खतरे से बचा लिया गया। दरअसल लगभग 10 करोड की लागत से स्थापित 160 एमव्हीए क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर के टेप चेंजर में तकनीकी खराबी आने से अचानक आग लग गई। इसके पहले की लपटें तेज़ी से उठती और स्थिति गंभीर हो जाती, आउटसोर्स आपरेटर श्री संजय यादव ने सहायक अभियंता श्री चेतन यादव, श्री आर.एस. बैस और हेल्पर श्री अय्यूब खान के मार्गदर्शन मे अग्निशमन यंत्रों की मदद से जलते ट्रांसफार्मर के ऊपर चढ़कर आग पर नियंत्रण पा लिया। उनकी सूझबूझ, साहस और समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़ी आपदा टल गई। यदि यह हादसा हो जाता तो शहर की विद्युत व्यवस्था के साथ औद्योगिक क्षेत्र मनेरी प्रभावित तो होता ही अमरकंटक पावर हाउस से आने वाले पावर का प्रबंधन करने की विकट चुनौती खडी हो जाती। एमडी सुनील तिवारी ने किया सम्मानित और पुरस्कृत एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने सब स्टेशन पहुंचकर आउटसोर्स कर्मी श्री संजय यादव का अभिनन्दन करते हुए उन्हें नगद राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया। विषम परिस्थिति में श्री यादव को मार्गदर्शन देने वाले वरिष्ठ हेल्पर श्री अयूब खान को भी सम्मानित किया तथा टीम के सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री यादव और टीम ने जिस असाधारण साहस, तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह एम.पी. ट्रांसको परिवार के लिए गर्व की बात है। समय-समय पर दिए प्रशिक्षण से मिला लाभ एम.पी. ट्रांसको द्वारा समय-समय पर अग्निशमन एवं सुरक्षा प्रशिक्षणों के परिणामस्वरूप ही कर्मचारी आपात स्थितियों में इस तरह की प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम हो सके।